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  • इंदौर में 23 अक्टूबर से सेमीकंडक्टर समिट, 50 से अधिक कंपनियां दिखाएंगी तकनीक; 6,200 करोड़ के निवेश पर नजर

    इंदौर में 23 अक्टूबर से सेमीकंडक्टर समिट, 50 से अधिक कंपनियां दिखाएंगी तकनीक; 6,200 करोड़ के निवेश पर नजर

    मध्य प्रदेश: में सेमीकंडक्टर उद्योग के विस्तार और निवेश की संभावनाओं को बढ़ावा देने के लिए इंदौर में 23 और 24 अक्टूबर को मध्य प्रदेश सेमीकंडक्टर समिट-2026 का आयोजन किया जाएगा। दो दिवसीय यह कार्यक्रम ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में होगा। इसमें सेमीकंडक्टर क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों, निवेशकों, उद्योग विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और स्टार्टअप प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पहले दिन उद्घाटन सत्र को संबोधित करेंगे।

    समिट में सेमीकंडक्टर उद्योग की विभिन्न तकनीकों, विनिर्माण की संभावनाओं और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में नए अवसरों पर चर्चा होगी। चिप डिजाइन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन और आधुनिक तकनीकी समाधानों को लेकर विशेषज्ञ अपने विचार रखेंगे। आयोजन का प्रमुख उद्देश्य प्रदेश में इस क्षेत्र के लिए निवेश आकर्षित करना और उद्योग से जुड़े लोगों के बीच सहयोग बढ़ाना है।

    समिट के दौरान 50 से अधिक कंपनियां अपनी तकनीक, उत्पादों और समाधानों का प्रदर्शन करेंगी। प्रदर्शनी में चिप डिजाइन, सेमीकंडक्टर पैकेजिंग एवं टेस्टिंग, तकनीकी उपकरण, विनिर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री और इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन से जुड़ी कंपनियां शामिल होंगी। कार्यक्रम में आठ पैनल चर्चाएं, पांच राउंडटेबल बैठकें और दो मुख्य व्याख्यान आयोजित किए जाएंगे। इनके माध्यम से उद्योग की जरूरतों, तकनीकी विकास और निवेश से संबंधित मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

    पहले दिन की चर्चाओं में मध्य प्रदेश को सेमीकंडक्टर पैकेजिंग एवं टेस्टिंग हब के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके अलावा फैबलेस इकोसिस्टम, सेमीकंडक्टर विनिर्माण और आपूर्ति शृंखला को मजबूत बनाने जैसे विषय भी एजेंडे में शामिल हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए जरूरी अधोसंरचना, बौद्धिक संपदा और इस क्षेत्र में शिक्षण संस्थानों की भूमिका पर भी चर्चा होगी।

    दूसरे दिन का कार्यक्रम चिप टेक्नोलॉजी, AI और इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों के निर्माण पर केंद्रित रहेगा। डिजाइन सेवाओं, अनुसंधान एवं विकास और तकनीकी रूप से प्रशिक्षित युवाओं को तैयार करने की जरूरत पर भी विचार किया जाएगा। इसके साथ ही फोटोनिक्स, क्वांटम टेक्नोलॉजी और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) से जुड़े विषयों पर बैठकें होंगी। इन चर्चाओं में तकनीकी नवाचार और उद्योग की बदलती जरूरतों के अनुरूप कौशल विकास के अवसरों पर ध्यान दिया जाएगा।

    कार्यक्रम के समापन समारोह में मध्य प्रदेश सेमीकॉन स्टार्टअप प्रतियोगिता के अंतिम चरण में चयनित विजेताओं को सम्मानित किया जाएगा। इस प्रतियोगिता का उद्देश्य सेमीकंडक्टर क्षेत्र में काम कर रहे स्टार्टअप और नए तकनीकी समाधानों को प्रोत्साहित करना है। इससे इस क्षेत्र में नए उद्यमों को सामने लाने और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने की कोशिश की जाएगी।

    सेमीकंडक्टर उद्योग में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार ने मध्य प्रदेश सेमीकंडक्टर नीति-2025 को मंजूरी दी है। इस नीति के तहत पात्र निवेश परियोजनाओं के लिए 25 प्रतिशत सब्सिडी और 10 साल तक दो रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली उपलब्ध कराने का प्रावधान है। इन प्रोत्साहनों के जरिए प्रदेश में सेमीकंडक्टर से संबंधित औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ाने की योजना है।

    इसी क्षेत्र में पारस सेमीकंडक्टर्स ने 6,200 करोड़ रुपये के प्रस्तावित निवेश से उन्नत सेमीकंडक्टर असेंबली एवं टेस्टिंग (OSAT) सुविधा स्थापित करने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। प्रस्तावित परियोजना से प्रदेश में सेमीकंडक्टर विनिर्माण और उससे जुड़ी औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार की संभावनाएं हैं। समिट में निवेश के अवसरों और नीतिगत प्रोत्साहनों पर चर्चा के साथ उद्योग, शिक्षा और अनुसंधान संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी जोर रहेगा। तकनीकी अधोसंरचना, अनुसंधान, नवाचार और कुशल मानव संसाधन का विकास इस क्षेत्र के विस्तार से जुड़े प्रमुख विषय होंगे।

  • सेमीकॉन इंडिया 2026 में पीएम मोदी ने विकसित भारत, स्टार्टअप और सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम की दिशा पर विस्तार से बात रखी

    सेमीकॉन इंडिया 2026 में पीएम मोदी ने विकसित भारत, स्टार्टअप और सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम की दिशा पर विस्तार से बात रखी

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार 17 सितंबर को नई दिल्ली के यशोभूमि में सेमीकॉन इंडिया 2026 का उद्घाटन किया। सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र से जुड़े इस आयोजन का आयोजन 17 से 19 सितंबर तक किया जा रहा है। इस वर्ष कार्यक्रम की थीम ‘सिलिकॉन टू सिस्टम्स: बिल्डिंग द इकोसिस्टम’ रखी गई है। आयोजन में प्रधानमंत्री मोदी ने विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर अपनी बात रखी और कार्यक्रम में शामिल प्रतिभागियों को संबोधित किया।

    सेमीकॉन इंडिया 2026 में भारत के साथ 52 अन्य देशों की कंपनियां भी भाग ले रही हैं। आयोजन में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र से जुड़े कंपनियों के प्रतिनिधियों के अलावा निवेशक, वैज्ञानिक, स्टार्टअप, छात्र और सरकारी अधिकारी भी शामिल हो रहे हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य भारत में सेमीकंडक्टर से जुड़े काम और कारोबार को आगे बढ़ाने से संबंधित विषयों पर चर्चा के लिए विभिन्न पक्षों को एक मंच पर लाना है।

    इस आयोजन में 600 से ज्यादा प्रदर्शक शामिल हुए हैं। इनमें करीब 300 विदेशी कंपनियां हैं। प्रदर्शकों के लिए 15 हजार वर्ग मीटर का प्रदर्शनी क्षेत्र तैयार किया गया है। कार्यक्रम में 150 से ज्यादा विशेषज्ञ और वक्ता भी हिस्सा ले रहे हैं। वे सेमीकंडक्टर उद्योग से जुड़े नए काम, उपलब्ध अवसर और क्षेत्र के सामने मौजूद चुनौतियों पर चर्चा करेंगे।

    सेमीकॉन इंडिया 2026 में छह देशों के विशेष पवेलियन भी बनाए गए हैं। इनमें जापान, दक्षिण कोरिया, मलेशिया, नीदरलैंड, सिंगापुर और स्वीडन शामिल हैं। इनके अलावा 12 राज्य सरकारों के पवेलियन भी प्रदर्शनी में मौजूद हैं। इससे विभिन्न देशों और राज्यों की ओर से सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र से जुड़े प्रयासों तथा गतिविधियों को सामने रखने का अवसर मिल रहा है।

    कार्यक्रम में स्टार्टअप और छात्रों के लिए भी विशेष स्थान रखा गया है। करीब 40 स्टार्टअप अपने प्रोजेक्ट और नए विचारों को प्रदर्शित कर रहे हैं। इस तरह आयोजन में उद्योग से जुड़े बड़े संस्थानों के साथ नई तकनीक और नए विचारों पर काम कर रहे स्टार्टअप और छात्रों को भी भागीदारी का अवसर मिला है।

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेमीकॉन इंडिया में मौजूद सभी लोगों का स्वागत किया और विश्वकर्मा जयंती की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने भगवान विश्वकर्मा को निर्माण और सृजन की शक्ति के प्रतीक के रूप में बताते हुए कहा कि संयोग है कि इसी दिन से सेमीकॉन इंडिया की शुरुआत हो रही है।

    प्रधानमंत्री ने विकसित भारत के लक्ष्य का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश का प्रत्येक नागरिक एक प्रतिबद्धता के साथ विकसित भारत के निर्माण में जुटा है। उन्होंने बीते 15 दिनों के दौरान भारत में हुए विभिन्न घटनाक्रमों का जिक्र करते हुए देश की विकास यात्रा की दिशा और गति पर बात रखी।

    प्रधानमंत्री ने सितंबर में मुंबई में आयोजित ग्लोबल फिनटेक फेस्ट का उल्लेख किया, जहां एजेंटिक एआई, टोकनाइजेशन और क्वांटम टेक्नोलॉजी के माध्यम से समावेशी वित्त पर चर्चा हुई। उन्होंने इसी अवधि में करीब 3,000 किलोमीटर लंबे डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के पूरी तरह चालू होने का भी उल्लेख किया। इसके साथ ही उन्होंने सितंबर में जारी भारत की तिमाही जीडीपी रिपोर्ट का जिक्र करते हुए विकास से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों की जानकारी सामने रखी।

  • जीईएम ने बदली सरकारी खरीद की तस्वीर, 10 साल में 400 करोड़ से 5 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचा कारोबार: सीईओ मिहिर कुमार

    जीईएम ने बदली सरकारी खरीद की तस्वीर, 10 साल में 400 करोड़ से 5 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचा कारोबार: सीईओ मिहिर कुमार

    नई दिल्ली । सरकारी खरीद व्यवस्था में पारदर्शिता, दक्षता और समावेशिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू किया गया सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) आज देश की सबसे महत्वपूर्ण डिजिटल पहलों में से एक बन चुका है। पिछले एक दशक में इस प्लेटफॉर्म ने सरकारी खरीद की पारंपरिक व्यवस्था को बदलते हुए कारोबार, प्रतिस्पर्धा और उद्यमिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय बदलाव दर्ज किए हैं। जीईएम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मिहिर कुमार के अनुसार, जिस प्लेटफॉर्म का कारोबार शुरुआती वर्ष में केवल 400 से 422 करोड़ रुपये के आसपास था, वह आज बढ़कर 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक के स्तर तक पहुंच चुका है।

    जीईएम की स्थापना वर्ष 2016 में सरकारी खरीद प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के उद्देश्य से की गई थी। इसके माध्यम से विक्रेताओं का पंजीकरण, उत्पाद सूचीकरण, निविदा प्रक्रिया, ऑर्डर प्रबंधन, आपूर्ति और भुगतान जैसी सभी प्रक्रियाएं पूरी तरह डिजिटल माध्यम से संचालित की जाती हैं। इससे सरकारी विभागों और आपूर्तिकर्ताओं दोनों के लिए प्रक्रियाएं अधिक सरल और तेज हुई हैं।

    प्लेटफॉर्म की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक सूक्ष्म और लघु उद्यमों की बढ़ती भागीदारी रही है। सरकारी नीति के अनुसार सार्वजनिक खरीद का कम से कम 25 प्रतिशत हिस्सा एमएसई क्षेत्र से किया जाना चाहिए, लेकिन जीईएम पर यह हिस्सा लगभग 45 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। इससे हजारों छोटे कारोबारियों और उद्यमियों को सीधे सरकारी बाजार तक पहुंच बनाने का अवसर मिला है।

    जीईएम के माध्यम से केवल कारोबार का विस्तार ही नहीं हुआ, बल्कि विभिन्न सामाजिक और आर्थिक वर्गों की भागीदारी भी बढ़ी है। महिला उद्यमियों ने इस मंच का व्यापक लाभ उठाया है। शुरुआती वर्षों में जहां महिला स्वामित्व वाले उद्यमों से होने वाला कारोबार सीमित स्तर पर था, वहीं अब यह कई हजार करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। इससे महिला उद्यमिता को नई गति मिली है और सरकारी खरीद प्रक्रिया में उनकी भागीदारी मजबूत हुई है।

    स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को भी जीईएम से बड़ा लाभ मिला है। एक दशक पहले जहां बहुत कम स्टार्टअप इस प्लेटफॉर्म से जुड़े थे, वहीं अब हजारों स्टार्टअप्स सरकारी खरीद प्रक्रिया का हिस्सा बन चुके हैं। इनके माध्यम से होने वाला कारोबार भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है। इससे नवाचार आधारित कंपनियों को सरकारी संस्थानों तक अपनी सेवाएं और उत्पाद पहुंचाने का अवसर प्राप्त हुआ है।

    अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग से जुड़े उद्यमों की भागीदारी में भी महत्वपूर्ण वृद्धि दर्ज की गई है। सरकार की समावेशी विकास नीति के अनुरूप जीईएम ने उन वर्गों को भी बाजार उपलब्ध कराया है जिन्हें पहले सरकारी खरीद प्रणाली में अपेक्षाकृत कम अवसर मिलते थे। इससे आर्थिक सशक्तिकरण और उद्यमिता को बढ़ावा मिला है।

    स्वास्थ्य क्षेत्र में भी जीईएम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। विभिन्न सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियानों के लिए बड़ी मात्रा में वैक्सीन, सिरिंज, चिकित्सा उपकरण और अन्य आवश्यक सामग्री की खरीद इसी मंच के माध्यम से की गई। इसके अलावा रेलवे, शिक्षा, प्रशासन और अन्य सरकारी क्षेत्रों की आवश्यकताओं की पूर्ति में भी प्लेटफॉर्म की भूमिका लगातार बढ़ती गई है।

    तकनीकी दृष्टि से भी जीईएम लगातार विकसित हुआ है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित विश्लेषण, डिजिटल मॉनिटरिंग, ऑनलाइन नीलामी और डेटा आधारित निर्णय प्रक्रिया ने खरीद व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाया है। इससे मानव हस्तक्षेप में कमी आई है और खरीद प्रक्रिया की विश्वसनीयता बढ़ी है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि जीईएम ने केवल सरकारी खरीद को डिजिटल नहीं बनाया, बल्कि कारोबार करने में आसानी को भी नई मजबूती प्रदान की है। ऑनलाइन पंजीकरण, पारदर्शी बोली प्रणाली और डिजिटल अनुबंध प्रबंधन ने छोटे और बड़े सभी व्यवसायों के लिए सरकारी बाजार तक पहुंच को सरल बनाया है। विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में यह मंच अब देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था और सार्वजनिक खरीद प्रणाली का एक महत्वपूर्ण आधार बनकर उभर रहा है।

  • भारत इनोवेट्स 2026 में आईआईटी मद्रास की बड़ी मौजूदगी, 15 स्टार्टअप्स और अत्याधुनिक शोध परियोजनाएं होंगी प्रदर्शित

    भारत इनोवेट्स 2026 में आईआईटी मद्रास की बड़ी मौजूदगी, 15 स्टार्टअप्स और अत्याधुनिक शोध परियोजनाएं होंगी प्रदर्शित

    नई दिल्ली । भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास वैश्विक स्तर पर भारतीय तकनीकी नवाचारों और स्टार्टअप इकोसिस्टम की क्षमता को प्रदर्शित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रहा है। फ्रांस में आयोजित होने वाले ‘भारत इनोवेट्स 2026’ कार्यक्रम में संस्थान अपने डीप-टेक अनुसंधान, उभरती प्रौद्योगिकियों और नवाचार आधारित स्टार्टअप्स को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करेगा। इस आयोजन को भारत और फ्रांस के बीच तकनीकी सहयोग तथा नवाचार साझेदारी को मजबूत करने के एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखा जा रहा है।

    यह कार्यक्रम 14 से 16 जून के बीच आयोजित किया जाएगा, जिसमें भारत के प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थानों और तकनीकी संगठनों से जुड़े नवाचारों को वैश्विक समुदाय के सामने रखा जाएगा। आयोजन का उद्देश्य उभरती तकनीकों और स्टार्टअप्स को निवेशकों, नीति निर्माताओं, उद्योग विशेषज्ञों, शोध संस्थानों और तकनीकी साझेदारों से जोड़ना है, ताकि उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार के अवसर मिल सकें।

    आईआईटी मद्रास इस कार्यक्रम में प्रमुख भूमिका निभाते हुए दो महत्वपूर्ण विषयगत क्षेत्रों का नेतृत्व करेगा। संस्थान अपने साथ जुड़े 15 स्टार्टअप्स को भी प्रदर्शित करेगा, जो विभिन्न तकनीकी क्षेत्रों में अभिनव समाधान विकसित कर रहे हैं। इसके अलावा पांच प्रमुख शोध परियोजनाओं को भी प्रदर्शित किया जाएगा, जो भारत की स्वदेशी तकनीकी क्षमताओं और अनुसंधान आधारित विकास को रेखांकित करेंगी।

    प्रदर्शित की जाने वाली प्रमुख तकनीकों में हाइपरलूप परिवहन प्रणाली, लैब-ग्रोन डायमंड तकनीक, स्वदेशी 5जी और 6जी संचार समाधान, स्मार्ट पोर्ट ऑटोमेशन तथा कम कंप्यूटिंग संसाधनों पर आधारित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल शामिल हैं। ये सभी परियोजनाएं भविष्य की तकनीकी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विकसित की जा रही हैं और इनमें वैश्विक स्तर पर उपयोग की संभावनाएं देखी जा रही हैं।

    संस्थान के अनुसार, हाइपरलूप तकनीक भारत की अगली पीढ़ी की परिवहन व्यवस्था को नई दिशा दे सकती है। इसी प्रकार स्वदेशी 5जी और 6जी समाधान देश को दूरसंचार क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। वहीं, कम कंप्यूटिंग क्षमता पर कार्य करने वाले एआई मॉडल्स को ऐसे क्षेत्रों के लिए उपयोगी माना जा रहा है जहां संसाधन सीमित हैं लेकिन डिजिटल समाधान की आवश्यकता तेजी से बढ़ रही है।

    कार्यक्रम में ब्लू इकोनॉमी से जुड़े नवाचारों को भी विशेष स्थान मिलेगा। समुद्री और ऑफशोर इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए विकसित स्वायत्त प्रणालियां, अंडरवॉटर निरीक्षण तकनीकें और समुद्री शैवाल आधारित टिकाऊ उत्पाद इस क्षेत्र की प्रमुख आकर्षण परियोजनाओं में शामिल होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी तकनीकें पर्यावरणीय स्थिरता और औद्योगिक दक्षता दोनों को बढ़ावा दे सकती हैं।

    आईआईटी मद्रास के नेतृत्व का मानना है कि यह आयोजन केवल तकनीकी प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारत और फ्रांस के बीच शोध, नवाचार, स्टार्टअप सहयोग और प्रतिभा आदान-प्रदान के नए अवसर भी पैदा करेगा। विशेष रूप से दूरसंचार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, उन्नत विनिर्माण और सतत विकास से जुड़े क्षेत्रों में संयुक्त अनुसंधान की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।

    तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक प्रतिस्पर्धा के इस दौर में भारतीय संस्थानों की अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सक्रिय भागीदारी देश के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को नई पहचान दिला रही है। आईआईटी मद्रास की भागीदारी इस बात का संकेत है कि भारतीय अनुसंधान संस्थान अब केवल शिक्षा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वैश्विक तकनीकी विकास और उद्योग परिवर्तन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

    ‘भारत इनोवेट्स 2026’ जैसे आयोजन भारतीय स्टार्टअप्स और शोध परियोजनाओं को अंतरराष्ट्रीय निवेश, साझेदारी और तकनीकी सहयोग के नए अवसर उपलब्ध करा सकते हैं। इससे भारत की नवाचार क्षमता को वैश्विक स्तर पर और अधिक मजबूती मिलने की उम्मीद है।

  • युवाओं ने अपनी मेहनत, सोच और नए प्रयोगों से भारत को बना दिया स्टार्टअप का बड़ा केंद्र : ओम बिरला

    युवाओं ने अपनी मेहनत, सोच और नए प्रयोगों से भारत को बना दिया स्टार्टअप का बड़ा केंद्र : ओम बिरला


    भोपाल।
    लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि आज हमारे नौजवानों ने स्टार्टअप की एक नई दुनिया खड़ी कर दी है। अपनी मेहनत, सोच और नए प्रयोगों के दम पर उन्होंने भारत को स्टार्टअप का बड़ा केंद्र बना दिया है। अब हमारे युवा सिर्फ सपने नहीं देख रहे, बल्कि अपने नए विचारों से दुनिया की समस्याओं का हल भी दे रहे हैं।

    लोकसभा अध्यक्ष बिरला शुक्रवार को मध्य प्रदेश के इंदौर में वैष्णव विद्यापीठ विश्वविद्यालय के 8वें दीक्षांत समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित इस गरिमामय कार्यक्रम का प्रारंभ वंदे मातरम्, राष्ट्रगान, पारंपरिक दीप प्रज्वलन और मां सरस्वती की वंदना के साथ हुआ।

    लोकसभा अध्यक्ष बिरला ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि वैष्णव ट्रस्ट द्वारा किए जा रहे समाजहित के कार्यों ने उन्हें इस समारोह में आने के लिए प्रेरित किया। डिग्री प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राएं अत्यंत सौभाग्यशाली हैं कि उन्हें इस प्रतिष्ठित संस्थान में शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिला। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत का प्रगतिशील भविष्य पूरी तरह से युवाओं की ऊर्जा और उनके विजन पर निर्भर करता है।

    उन्होंने कहा कि यह बदलते और विकसित भारत के निर्माण का कालखंड है। आज दुनिया के सभी देश भारत की ओर देख रहे हैं। हमारे नौजवानों की ताकत दुनिया में बढ़ रही है और हमारे जनसांख्यिकीय विभाजन (Demographic Dividend) पर दुनिया की नज़र है। हमारे नौजवानों ने स्टार्टअप की नई दुनिया शुरू कर दी है, भारत को स्टार्टअप बना दिया और और अपने नवाचार के माध्यम से वैश्विक चुनौतियों का समाधान कर रहे हैं।

    बिरला ने इंदौर की इस शिक्षा और संस्कार की पावन धरती से देशभर के विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे अपनी भारतीय संस्कृति, अपने मूल्यों और अपनी सोच को साथ लेकर आगे बढ़ें और देश को नई ऊंचाइयों तक पहुँचाने में अपना पूरा योगदान दें। विश्वविद्यालय कैंपस में आपने जो सीखा है, ज्ञानार्जन किया है, उसका सदुपयोग कर नवभारत के निर्माण में जुट जाएं।

    विश्वविद्यालय के कुलाधिपति पुरुषोत्तमदास पसारी ने विधिवत रूप से समारोह के उद्घाटन की घोषणा की। उन्होंने अपने स्वागत भाषण में मुख्य अतिथि सहित उपस्थित शिक्षकों, अभिभावकों और उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों का अभिनंदन किया।

    समारोह के दौरान कुलगुरु प्रो. (डॉ.) योगेश सी. गोस्वामी ने विश्वविद्यालय का वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। उन्होंने संस्थान की शैक्षणिक यात्रा, बीते वर्ष में किए गए महत्वपूर्ण शोध कार्यों, विद्यार्थियों के प्लेसमेंट के आंकड़ों और संस्थागत विकास की विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि किस प्रकार विश्वविद्यालय निरंतर उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर रहा है।

    सफल प्रोफेशनल बनने से पहले बेहतर इंसान बनें

    कार्यक्रम में मौजूद इंदौर सांसद शंकर लालवानी ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक और सामाजिक सेवा गतिविधियों की प्रशंसा की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि यह संस्थान विद्यार्थियों में स्वावलंबन की भावना विकसित करने का सराहनीय कार्य कर रहा है।

    प्रदेश के जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने भी विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही हर वैश्विक समस्या का एकमात्र स्थायी समाधान है और जीवन में एक सफल प्रोफेशनल बनने से पहले एक बेहतर इंसान बनना अनिवार्य है।

    मेधावी छात्रों को स्वर्ण पदक और उपाधियों से नवाजा

    इस दीक्षांत समारोह में कुल 2008 स्नातक और स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। इसके अतिरिक्त 32 शोधार्थियों को उनकी पीएचडी की डिग्री सौंपी गई। शैक्षणिक क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 16 मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक से नवाजा गया। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. रूपा शिंदे ने किया और राष्ट्रगान के साथ इस शैक्षणिक उत्सव का समापन हुआ।

    मंत्री सिलावट ने लोकसभा अध्यक्ष का भव्य स्वागत किया

    लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला साधारण यात्रियों की तरह दिल्ली से ट्रेन में सवार होकर इंदौर पहुंचे। इंदौर पहुंचने पर भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने सतरंगी दुपटटा एवं पुष्पमाला पहनाकर उनका भव्य स्वागत किया। इस अवसर पर सांसद शंकर लालवानी, जनपद पंचायत सांवेर अध्यक्ष प्रतिनिधि मानसिंह, विश्वजीतसिंह सिसौदिया, जिला उपाध्यक्ष भारतसिंह, दिलीप चौधरी, नगर परिषद अध्यक्ष संदीप चंगेडिया सहित सैकडों नागरिकों ने भी ओम बिरला का पुष्पमालाओं से भव्य स्वागत किया। इसके पश्चात वे उज्जैन रोड स्थित श्री वैष्णव विद्यापीठ विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए।

  • गुजरात बन रहा स्टार्टअप और नवाचार का हब, आई-हब से युवा स्टार्टअप्स को मिल रही प्रगति की राह

    गुजरात बन रहा स्टार्टअप और नवाचार का हब, आई-हब से युवा स्टार्टअप्स को मिल रही प्रगति की राह


    अहमदाबाद । गुजरात देश के उन राज्यों में तेजी से शामिल हो रहा है जहां नवाचार और स्टार्टअप संस्कृति को मजबूत आधार मिल रहा है। सक्रिय सरकारी नीतियों और युवाओं को आगे बढ़ाने वाले दृष्टिकोण के चलते गुजरात आज युवा उद्यमिता का एक बड़ा केंद्र बनकर उभर रहा है। गुजरात सरकार की स्टूडेंट स्टार्टअप एंड इनोवेशन पॉलिसी के तहत स्थापित आई-हब गुजरात ने नए विचारों को सफल व्यवसायों में बदलने में अहम भूमिका निभाई है।

    एसएसआईपी को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए वर्ष 2019 में ई-हब गुजरात की स्थापना की गई थी। यह एक सिंगल-विंडो प्लेटफॉर्म के रूप में काम करता है जहां छात्रों नवाचारकर्ताओं और स्टार्टअप्स को विचार से लेकर बाजार तक की पूरी यात्रा में सहयोग मिलता है। आइडिया की पहचान उसकी जांच इनक्यूबेशन और बाजार तक पहुंच बनाने तक ई-हब हर चरण में मार्गदर्शन मेंटरशिप और संस्थागत समर्थन प्रदान करता है।

    अहमदाबाद में स्थित अत्याधुनिक ई-हब परिसर में इस समय सैकड़ों स्टार्टअप्स को तैयार किया जा रहा है। यहां स्टार्टअप्स को इनक्यूबेशन सुविधाएं अनुभवी विशेषज्ञों का मार्गदर्शन और फंडिंग के अवसर उपलब्ध कराए जाते हैं जिससे युवा उद्यमियों को शुरुआती चुनौतियों से उबरने और अपने विचारों को टिकाऊ व्यवसाय में बदलने में मदद मिलती है।

    गुजरात की नवाचार केंद्रित सोच को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है। भारत सरकार की स्टेट स्टार्टअप रैंकिंग 2018 में गुजरात को सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया था। यह उपलब्धि एसएसआईपी जैसी नीतियों और राज्य के मजबूत स्टार्टअप ढांचे की सफलता को दर्शाती है। गुजरात सरकार के शिक्षा विभाग के अंतर्गत काम करने वाला ई-हब छात्रों शैक्षणिक संस्थानों उद्योग और समाज के बीच एक मजबूत सेतु का काम कर रहा है।

    गुजरात लगातार भारत सरकार की स्टार्टअप रैंकिंग में शीर्ष राज्यों में शामिल रहा है। इसका श्रेय एसएसआईपी ई-हब गुजरात सेक्टर आधारित इनक्यूबेशन सेंटर और स्टार्टअप्स के लिए विशेष प्रोत्साहन योजनाओं को जाता है। राज्य में फिनटेक एग्रीटेक हेल्थटेक मैन्युफैक्चरिंग क्लीन एनर्जी और डीप टेक जैसे क्षेत्रों में हजारों पंजीकृत स्टार्टअप्स सक्रिय हैं।

    अहमदाबाद गांधीनगर सूरत वडोदरा और राजकोट जैसे शहर स्टार्टअप हब के रूप में उभर चुके हैं। यहां 100 से अधिक इनक्यूबेशन सेंटर विश्वविद्यालयों से जुड़े इनोवेशन सेल सरकारी सीड फंडिंग और मजबूत एमएसएमई व औद्योगिक क्लस्टर मौजूद हैं। विश्वस्तरीय बंदरगाह बेहतर लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी निवेशकों के अनुकूल शासन और व्यापार व निर्माण से जुड़ी उद्यमशील संस्कृति गुजरात को देशभर के स्टार्टअप्स और नवाचारकर्ताओं के लिए पसंदीदा राज्य बना रही है।