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  • राज्य सरकार हर घड़ी किसानों के साथ, तय वक्त पर प्रारंभ होगी गेहूं खरीदी: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    राज्य सरकार हर घड़ी किसानों के साथ, तय वक्त पर प्रारंभ होगी गेहूं खरीदी: मुख्यमंत्री डॉ. यादव


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश के किसानों का हर तरह से कल्याण हमारी प्रतिबद्धता है। हमारी सरकार हर घड़ी किसानों के साथ है। प्रदेश में तय वक्त पर न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी प्रारंभ कर दी जाएगी। उपार्जन पोर्टल पर पंजीयन कराने वाले सभी किसानों का गेहूं खरीदा जाएगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार देर शाम अपने निवास स्थित समत्व भवन में गेहूं उपार्जन कार्य के संबंध में सरकार द्वारा गठित मंत्री समूह के सदस्य एवं कृषक प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि उपार्जन प्रक्रिया में पहले छोटे किसानों का गेहूं खरीदा जाएगा। इसके बाद मध्यम एवं बड़े किसानों के गेहूं की खरीदी की जाएगी। स्लॉट बुकिंग वाले सभी किसानों का गेहूं चरणबद्ध रूप से खरीदा जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बारदाने की कोई कमी नहीं है। सरकार सभी व्यवस्थाएं कर रही हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों की सुरक्षा के लिए विशेष रूप से संवेदनशील है। गेहूं उपार्जन में बारदान की उपलब्धता निरंतर बनाए रखने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। प्रदेश में गेहूं खरीदी में किसानों को किसी भी प्रकार से बारदाने की समस्या नहीं आने दी जाएगी। केन्द्र सरकार, जूट कमिश्नर सहित अन्य बारदान प्रदाय एजेंसियों से बारदान आपूर्ति के लिए राज्य सरकार लगातार सम्पर्क बनाए हुए है।


    उपार्जन शुरू होने से पहले कराएं तौल केन्द्रों का निरीक्षण

    मुख्यमंत्री ने कहा कि गेहूं उपार्जन व्यवस्था को सरल, सहज और सुविधाजनक बनाया जाये। किसानों को उपार्जन केन्द्र तक आने और गेहूं बेचने में किसी भी तरह की कठिनाई न होने पाये। उन्होंने उपार्जन व्यवस्था पर नियमित रूप से निगरानी के लिए एक राज्य स्तरीय एवं कृषि उपज मंडियों में भी कंट्रोल रूम बनाने के निर्देश खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को दिए।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गेहूं उपार्जन के दृष्टिगत प्रदेश के सभी तौल केंद्रों का 10 अप्रैल से पहले गहन निरीक्षण करा लिया जाए, जिससे किसानों में किसी भी तरह का संशय न रहे। उन्होंने कहा कि प्रदेश की सभी कृषि उपज मंडियों के वर्तमान ढांचे में क्रमबद्ध सुधार किया जाये। सभी मंडियों को वैश्विक जरुरतों के मुताबिक अपग्रेड कर इन्हें वर्ल्ड क्लास मंडी की तरह तैयार किया जाये।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि गेहूं उपार्जन केंद्रों में आने वाले किसानों को सभी प्रकार की बुनियादी सुविधाएं जैसे बिजली, पीने का पानी, बैठक, छाया, प्रसाधन एवं पार्किंग सुविधा उपलब्ध कराई जाये। किसी को भी किसी भी प्रकार की प्रक्रियागत या व्यवस्थागत असुविधा का सामना न करना पड़े। किसी भी केन्द्र में किसानों/ट्रेक्टर-ट्राली की लंबी-लंबी कतारें न लगें, सभी किसानों का सहजता से गेहूं तुल जाये, ऐसी व्यवस्थाएं की जाएं। जिन किसानों से गेहूं खरीदा जाये, कम से कम समय में उनके खातों में भुगतान कर देने की व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित की जाएं।


    10 अप्रैल से प्रारंभ हो जाएगी गेहूं खरीदी

    खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की अपर मुख्य सचिव रश्मि अरुण शमी ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा प्रदेश में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। प्रदेश में इंदौर, उज्जैन, भोपाल एवं नर्मदापुरम संभाग में 10 अप्रैल से एवं अन्य सभी संभागों में 15 अप्रैल से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं का उपार्जन प्रारंभ होने जा रहा है।

    उन्होंने बताया कि जिन संभागों में 10 अप्रैल से गेहूं खरीदी शुरू होनी है, उनके लिए आगामी मंगलवार, 7 अप्रैल से पंजीकृत किसानों की स्लॉट बुकिंग प्रारंभ हो जायेगी। शुक्रवार, 10 अप्रैल से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी प्रारंभ कर दी जाएगी। उपार्जन वर्ष 2026-27 में गेहूं उपार्जन के लिए प्रदेश के 19 लाख 4 हजार 644 किसानों ने अपना पंजीयन कराया है। गेहूं उपार्जन के लिए इस वर्ष प्रदेश में कुल 3627 उपार्जन केंद्र बनाये गये हैं। बीते उपार्जन वर्ष 2025-26 में 15 लाख 44 हजार 55 किसानों ने गेहूं उपार्जन के लिए पंजीयन कराया था। इस उपार्जन वर्ष के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,625 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। राज्य सरकार प्रदेश के किसानों को गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य के अतिरिक्त 40 रूपए प्रति क्विंटल बोनस का लाभ भी इस वर्ष देने जा रही है।

    अपर मुख्य सचिव ने बताया कि प्रदेश में 78 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन होना अनुमानित है। इसके लिए 3 लाख 12 हजार गठान बारदानों की आवश्यकता होगी। प्रदेश में गेहूं खरीदी आरंभ करने के लिए आवश्यक बारदान का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। केन्द्र सरकार की ओर से लिमिट भी तय कर दी गई है। राज्य सरकार को केन्द्र से हर जरूरी सहयोग भी मिल रहा है। जूट कमिश्नर कार्यालय सहित अन्य बारदाना प्रदायकर्ताओं से भी बारदान सामग्री प्राप्त की जा रही है। इसके साथ ही गेहूं उपार्जन के लिए गठित मंत्री-मंडलीय समिति के निर्देश पर अतिरिक्त बारदान खरीदने की प्रक्रिया भी तेजी से जारी है।

    बैठक में राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा, कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना, खाद्य मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत, पशुपालन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल सहित कृषक प्रतिनिधि और खाद्य, सहकारिता एवं अन्य विभागीय अधिकारी भी उपस्थित थे।

  • वर्षा और ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों के हित में तत्पर है मध्यप्रदेश सरकार: कृषि मंत्री कंषाना

    वर्षा और ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों के हित में तत्पर है मध्यप्रदेश सरकार: कृषि मंत्री कंषाना


    भोपाल। किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंषाना ने कहा है कि राज्य सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है और किसी भी परिस्थिति में उनके साथ मजबूती से खड़ी रहेगी। हाल ही में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में हुई वर्षा और ओलावृष्टि के कारण फसलों को हुए नुकसान का शीघ्र निरीक्षण और राहत वितरण सुनिश्चित किया जाएगा।

    कृषि मंत्री कंषाना ने बताया कि जिन जिलों में भारी वर्षा और ओलावृष्टि की घटनाएं हुई हैं, वहां तत्काल प्रभाव से सर्वे और नुकसान का आकलन करने के आदेश दिए गए हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी सर्वे कार्य पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ पूर्ण किए जाएं, ताकि प्रभावित किसानों को समय पर राहत राशि प्रदान की जा सके।

    कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार किसी भी किसान को नुकसान की स्थिति में अकेला नहीं छोड़ेगी और सभी आवश्यक सहायता प्रदान करेगी। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे धैर्य बनाए रखें और स्थानीय प्रशासन के साथ सहयोग करें। उनका कहना था कि राज्य सरकार की प्राथमिकता किसानों को शीघ्र राहत प्रदान करना और उनकी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करना है।

    कंषाना ने यह भी बताया कि कृषि विभाग लगातार प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी कर रहा है और आवश्यकतानुसार फसल सुरक्षा उपायों को लागू किया जाएगा। इसके साथ ही भविष्य में ऐसी प्राकृतिक आपदाओं से बचाव और नुकसान कम करने के लिए दीर्घकालीन रणनीतियों पर भी काम किया जा रहा है।

    मंत्री कंषाना ने आश्वासन दिया कि राज्य सरकार किसान कल्याण के लिए निरंतर कदम उठाती रहेगी और हर आवश्यक पहल में किसानों का समर्थन करेगी। उनका मानना है कि किसान देश की रीढ़ हैं और उनकी सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और विकास सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

  • दिल्ली मेट्रो अपडेट: T20 वर्ल्ड कप मैच के लिए DMRC ने बढ़ाई आखिरी ट्रेन की टाइमिंग, यात्रियों को राहत

    दिल्ली मेट्रो अपडेट: T20 वर्ल्ड कप मैच के लिए DMRC ने बढ़ाई आखिरी ट्रेन की टाइमिंग, यात्रियों को राहत


    नई दिल्ली। 12 फरवरी, 2026 को अरुण जेटली स्टेडियम में होने वाले ICC T20 वर्ल्ड कप मैच के मद्देनजर दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने मेट्रो समय सारिणी में खास बदलाव किया है। मैच के कारण स्टेडियम और आसपास भारी भीड़ के मद्देनजर DMRC ने प्रमुख मेट्रो लाइनों पर आखिरी ट्रेन का समय लगभग 90 मिनट तक बढ़ा दिया है, ताकि दर्शक और सामान्य यात्री आसानी से घर लौट सकें।

    रेड लाइन (लाइन 1) पर शहीद स्थल से रिठाला रूट की आखिरी ट्रेन अब रात 12:10 से 12:15 बजे तक चलेगी। येलो लाइन (लाइन 2) पर समयपुर बादली से गुरुग्राम के मिलेनियम सिटी सेंटर तक ट्रेन 12:20 बजे तक उपलब्ध रहेगी। ब्लू लाइन (लाइन 3 और 4) की नोएडा इलेक्ट्रॉनिक सिटी से द्वारका सेक्टर 21 तक की आखिरी ट्रेनें 11:35 और 11:45 बजे तक चलेंगी। ग्रीन लाइन (लाइन 5) की कुछ ट्रेनें 1:00 बजे तक उपलब्ध रहेंगी। वायलेट, पिंक, मैजेंटा, ग्रे लाइन और एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन पर भी ट्रेन समय में बदलाव किया गया है।

    DMRC ने स्पष्ट किया है कि यह बदलाव केवल 12 फरवरी के लिए है। 13 फरवरी से मेट्रो टाइमिंग पहले की तरह सामान्य हो जाएगी। इस निर्णय से न केवल मैच देखने वाले दर्शकों को सुविधा मिली है, बल्कि देर रात सफर करने वाले यात्रियों को भी राहत मिली है।

    DMRC के इस कदम से यह सुनिश्चित होगा कि मैच खत्म होने के बाद भी लोग सुरक्षित और समय पर घर पहुंच सकें। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे अपनी यात्रा की योजना नई टाइमिंग के अनुसार बनाएं और भीड़भाड़ वाले समय में अतिरिक्त समय रखें।

  • राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा बना सियासी तूफान, मुख्यमंत्री सरमा के आरोपों के केंद्र में सांसद गौरव गोगोई और उनकी पत्नी

    राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा बना सियासी तूफान, मुख्यमंत्री सरमा के आरोपों के केंद्र में सांसद गौरव गोगोई और उनकी पत्नी


    गुवाहाटी। असम की राजनीति में उस समय बड़ा विवाद खड़ा हो गया जब मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई और उनकी पत्नी एलिजाबेथ कोलबर्न से जुड़े गंभीर आरोपों को सार्वजनिक किया। गुवाहाटी में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरमा ने दावा किया कि एलिजाबेथ कोलबर्न जो ब्रिटिश नागरिक हैं को एक पाकिस्तान आधारित फर्म ने नौकरी पर रखा था और उनकी सैलरी पाकिस्तानी नागरिक अली तौकीर शेख के माध्यम से दी जाती थी। मुख्यमंत्री ने इस पूरे मामले को व्यक्तिगत नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा बताया।

    दरअसल यह विवाद अचानक नहीं उभरा है इसकी जड़ें फरवरी 2025 में असम सरकार द्वारा गठित एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम SIT तक जाती हैं। इस टीम का गठन अली तौकीर शेख नामक पाकिस्तानी नागरिक की गतिविधियों की जांच के लिए किया गया था। सरकार के अनुसार शेख पर भारत विरोधी साजिश रचने और देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने के आरोप थे। SIT ने करीब सात महीने तक जांच करने के बाद सितंबर 2025 में अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंप दी।

    सरकार के मुताबिक रिपोर्ट में कुछ संवेदनशील जानकारियां थीं लेकिन राज्य पुलिस के अधिकार क्षेत्र और संसाधनों की सीमाओं को देखते हुए असम कैबिनेट ने निर्णय लिया कि इस मामले को केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय MHA को भेजा जाए। अब संभावना जताई जा रही है कि आगे की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी इंटेलिजेंस ब्यूरो IB या केंद्रीय जांच ब्यूरो CBI जैसी केंद्रीय एजेंसियों द्वारा की जा सकती है। जरूरत पड़ने पर इंटरपोल की मदद लेने की बात भी सामने आई है।

    मुख्यमंत्री सरमा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि एलिजाबेथ कोलबर्न को मार्च 2011 से मार्च 2012 के बीच पाकिस्तान स्थित एक फर्म में नियुक्त किया गया था। बाद में उन्हें भारत ट्रांसफर किया गया। सरमा के अनुसार उनकी सैलरी अली तौकीर शेख के माध्यम से दी जाती थी जिसे उन्होंने “पाकिस्तानी एजेंट करार दिया। आरोप है कि भारत में रहने के दौरान एलिजाबेथ ने विभिन्न सामाजिक और सरकारी मुद्दों पर जानकारी एकत्र की और कथित तौर पर उसे शेख तक पहुंचाया।

    मुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया कि अगस्त 2014 की एक रिपोर्ट में भारतीय खुफिया एजेंसी IB से जुड़ी कुछ गोपनीय सूचनाओं का उल्लेख था। साथ ही जलवायु परिवर्तन से जुड़े प्रोजेक्ट्स और सरकार की प्रतिक्रिया को लेकर भी जानकारी साझा करने की बात कही गई। हालांकि इन दावों के समर्थन में सार्वजनिक रूप से कोई विस्तृत दस्तावेज पेश नहीं किए गए हैं और जांच अभी आगे की प्रक्रिया में है।

    अली तौकीर शेख को लेकर भी मुख्यमंत्री ने कई तथ्य रखे। उनके अनुसार शेख 2010 से 2013 के बीच कम से कम 13 बार भारत आया था। उन पर आरोप है कि वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के खिलाफ नैरेटिव बनाने और देश के अंदरूनी मामलों में हस्तक्षेप करने का प्रयास कर रहे थे। सरमा ने यह भी कहा कि जांच शुरू होने के बाद शेख ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स से कई पोस्ट हटा दिए जिसे उन्होंने सबूत मिटाने की कोशिश बताया।

    इस पूरे विवाद में एक और महत्वपूर्ण दावा मुख्यमंत्री ने सांसद गौरव गोगोई को लेकर किया। उन्होंने कहा कि गोगोई 2012 से 2016 के बीच पाकिस्तान गए थे और इन यात्राओं की जानकारी केंद्र सरकार को नहीं दी गई थी। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इस दौरान गोगोई सोशल मीडिया पर सक्रिय नहीं थे। हालांकि मुख्यमंत्री ने यह स्वीकार किया कि फोन कॉल रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हैं लेकिन एक व्यक्ति के पाकिस्तान जाने का सबूत मिलने की बात कही गई।

    सरमा ने कहा कि इस मामले में तीन मुख्य किरदार हैं एक पाकिस्तानी नागरिक अली तौकीर शेख एक ब्रिटिश नागरिक एलिजाबेथ कोलबर्न और एक भारतीय सांसद गौरव गोगोई। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कुछ पहलुओं में धार्मिक परिवर्तन से जुड़े कोण की भी जांच हो सकती है हालांकि इस संबंध में कोई विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई। अब राजनीतिक हलकों में यह मामला तेजी से चर्चा का विषय बन गया है। एक तरफ जहां राज्य सरकार इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा बता रही है वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का हिस्सा मान रहा है।

  • राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-तिलहन के तहत राज्य तिलहन मिशन का गठन: मुख्य सचिव करेंगे अध्यक्षता

    राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-तिलहन के तहत राज्य तिलहन मिशन का गठन: मुख्य सचिव करेंगे अध्यक्षता


    नई दिल्ली । राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-तिलहन NMEO-OS के अंतर्गत राज्य शासन द्वारा मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य तिलहन मिशन का गठन किया गया है।समिति में कृषि उत्पादन आयुक्त सहकारिता, उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण/ फूड प्रोसेंसिंग इंडस्ट्रीज, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, वित्त, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण, कुलपति, जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर/ राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर, आयुक्त/ संचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास, निदेशक भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इन्दौर म.प्र, प्रभारी अधिकारी नाबार्ड, समन्वयक स्टेट लेवल बैंकर समिति, तिलहन क्षेत्र में कार्यरत एफपीओ/ को-ऑपरेटिक्स के दो प्रतिनिधि प्रत्येक से एक , बीज एवं खाद्य तेल उत्पादक उद्योग से संबंधित दो प्रतिनिधिप्रत्येक से एक-एक , भारत सरकार, कृषि मंत्रालय द्वारा नामित अधिकारी संयुक्त सचिव स्तर सदस्य होंगे। किसान कल्याण तथा कृषि विकास राज्य मिशन संचालक NMEO-OS को सदस्य-सचिव नामित किया गया हैं।

    राज्य तिलहन मिशन की बैठक का आयोजन कृषि उत्पादन आयुक्त, म.प्र. शासन की अध्यक्षता में किया जा सकेगा। मिशन के दायित्व अंर्तगत मिशन के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए, मिशन में निहित समग्र नीति दिशा-निर्देशों के भीतर राज्य में मिशन कार्यान्वयन की समग्र निगरानी की जायेगी। राज्य को सौंपे गए क्षेत्र, उत्पादन, और उत्पादकता लक्ष्यों और इसकी निगरानी के आधार पर तिलहन की खेती और उत्पादन के लिए राज्य तिलहन कार्य योजना को अंतिम रूप देना , कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, भारत सरकार को प्रस्तुत करने से पहले मिशन के लक्ष्यों और उद्देश्यों के अनुरूप संभावित और वार्षिक राज्य कार्य-योजना को अंतिम रूप देना, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग को प्रस्तुत नियमित रिपोर्टों के साथ प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों पर नजर रखकर राज्य स्तर पर मिशन की प्रगति की निगरानी की जायेगी।

    समिति द्वारा आवश्यक बुनियादी ढांचे इंफास्ट्रक्चर और कटाई के बाद प्रसंस्करण सुविधाओं आदि को विकसित करने के लिए राज्य स्तरीय वित्तीय संसाधन आवंटन की देखरेख करना, जिला मिशनों, मूल्य श्रृंखला भागीदारों और तकनीकी सहायता एजेंसियों के कामकाज और प्रगति की निगरानी करना और उनकी दक्षता बढ़ाने के लिए निर्देश जारी करना और एस.ओ.पी निर्धारित करना, प्रमुख मिशन के कार्यान्वयन को सुव्यवस्थित करने तथा इसे राज्य कृषि नीतियों और विकास योजनाओं के साथ जोडने के लिए संबंधित विभागों कृषि, सिंचाई वित्त. ग्रामीण विकास आदि के साथ समन्वय करके अन्य केन्द्रीय और राज्य योजनाओं के साथ अभिसरण सुनिश्चित करने के कार्य किए जा

  • सागर दौरे पर CM डॉ. मोहन यादव: खुरई में करोड़ों के विकास कार्यों का लोकार्पण, लोकपथ 2.0 एप का भी होगा उद्घाटन

    सागर दौरे पर CM डॉ. मोहन यादव: खुरई में करोड़ों के विकास कार्यों का लोकार्पण, लोकपथ 2.0 एप का भी होगा उद्घाटन


    भोपाल । मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज सागर जिले के खुरई में एक महत्वपूर्ण दौरे पर रहेंगे, जहां वे 312 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाले विकास कार्यों का लकार्पण और भूमिपूजन करेंगे। इस दौरे का उद्देश्य स्थानीय विकास को नई गति देना और जनता से सीधे संवाद स्थापित करना है।

    मुख्यमंत्री के दौरे की शुरुआत एक रोड शो से होगी, जिसमें वे खुरई शहर में आम जनता से जुड़ेंगे और उन्हें इन विकास कार्यों की सौगातों का एहसास कराएंगे। रोड शो के बाद सीएम डॉ. यादव 165 करोड़ रुपये की लागत से 38 विकास कार्यों का लोकार्पण करेंगे। इसके अलावा, 147 करोड़ रुपये की लागत से 48 विकास कार्यों का भूमिपूजन शिलान्यास भी किया जाएगा। ये कार्य मुख्यतः सड़क, जल आपूर्ति, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य क्षेत्रों से जुड़े होंगे, जो खुरई और आसपास के इलाकों के लिए काफी महत्वपूर्ण साबित होंगे।

    मुख्यमंत्री का भोपाल कार्यक्रम

    खुरई दौरे से पहले, मुख्यमंत्री डॉ. यादव भोपाल में लोक निर्माण विभाग पीडब्ल्यूडी के एक प्रमुख कार्यक्रम में भी भाग लेंगे। इस कार्यक्रम में प्रदेशभर से 1500 से अधिक अभियंता शामिल होंगे, जो इंजीनियरिंग कार्यों में अपनी क्षमताओं को और बेहतर बनाने के लिए प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। इस अवसर पर, मुख्यमंत्री द्वारा कैपेसिटी बिल्डिंग फ्रेमवर्क दस्तावेज का विमोचन किया जाएगा, जो प्रदेश में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होगा। साथ ही, मुख्यमंत्री लोकपथ 2.0 एप का भी लोकार्पण करेंगे। यह एप इंजीनियरिंग कार्यों को डिजिटल और अधिक कुशल बनाने में मदद करेगा, जिससे प्रदेश में निर्माण कार्यों की निगरानी और प्रबंधन अधिक प्रभावी तरीके से किया जा सकेगा।

  • मध्यप्रदेश सरकार की योजनाओं से महिलाएं बन रहीं आत्मनिर्भर  50 लाख तक का लोन और सब्सिडी

    मध्यप्रदेश सरकार की योजनाओं से महिलाएं बन रहीं आत्मनिर्भर 50 लाख तक का लोन और सब्सिडी


    भोपाल। 
    मध्यप्रदेश सरकार राज्य की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उन्हें व्यवसायिक रूप से प्रगति करने के लिए कई योजनाओं को लागू कर रही है। इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को रोजगार की तलाश तक सीमित न रखकर उन्हें उद्यम स्थापित करने के लिए प्रेरित करना है। इसके लिए सरकार उन्हें लोन ट्रेनिंग सब्सिडी और अन्य वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है जिससे महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को बेहतर बना रही हैं।

    महिलाओं के लिए उद्यमिता योजनाएं

    मध्यप्रदेश सरकार ने महिलाओं के लिए कई तरह की उद्यमिता योजनाएं शुरू की हैं जिनके जरिए महिलाएं अपने छोटे-से-व्यवसाय की शुरुआत कर सकती हैं। इन योजनाओं के तहत महिलाओं को न केवल व्यवसाय शुरू करने के लिए लोन और सब्सिडी मिल रही है बल्कि उन्हें विभिन्न प्रकार की ट्रेनिंग भी दी जा रही है जिससे वे अपनी क्षमताओं को पहचान सकें और व्यवसाय के विभिन्न पहलुओं से अवगत हो सकें।

    सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि इन योजनाओं के तहत महिलाओं को एक मजबूत आर्थिक आधार प्रदान किया जाए। इसके लिए राज्य में कई प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं जिसमें महिलाएं अपने कौशल को सुधार सकती हैं और विभिन्न उद्योगों में कदम रख सकती हैं। इसके अलावा सरकार महिलाओं को आर्थिक सहायता देने के लिए लोन के साथ-साथ मार्जिन मनी और सब्सिडी जैसी सुविधाएं भी प्रदान कर रही है।

    ₹50 लाख तक का लोन और वित्तीय सहायता

    मध्यप्रदेश सरकार महिलाओं के लिए व्यवसाय स्थापित करने के लिए ₹50 लाख तक का लोन उपलब्ध करवा रही है। यह लोन उन्हें अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए आवश्यक पूंजी उपलब्ध कराता है। इसके अलावा महिलाओं को रेडीमेड गारमेंट उद्योग जैसी क्षेत्रों में भी विशेष सहायता दी जा रही है जहां उन्हें प्रति माह ₹5000 की प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है। यह राशि महिलाओं को उनके व्यवसाय के संचालन में सहायक साबित हो रही है और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में मदद कर रही है।

    इसके अतिरिक्त अक्टूबर 2025 तक MSME सूक्ष्म लघु और मझोले उद्योग क्षेत्र में 850 से अधिक इकाइयों को कुल ₹275 करोड़ की वित्तीय सहायता दी जा चुकी है। यह वित्तीय सहायता महिला उद्यमियों के लिए एक मजबूत आधार बनी है जो उन्हें अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक संसाधन प्रदान करती है।

    महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए सरकार के कदम

    मध्यप्रदेश सरकार ने महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए कई अन्य कदम भी उठाए हैं। उदाहरण के लिए महिलाएं अब विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत स्वयं सहायता समूह बना सकती हैं और इन्हें सरकार से सहायता मिल सकती है। इसके अलावा महिलाओं को छोटे से लेकर बड़े स्तर तक व्यवसाय स्थापित करने के लिए राज्य सरकार द्वारा समर्थन और मार्गदर्शन भी प्रदान किया जा रहा है।

    इसके साथ ही महिलाएं अब अधिक से अधिक व्यवसायों के लिए सशक्त और आत्मनिर्भर बन रही हैं जो न केवल उनकी व्यक्तिगत स्थिति को मजबूत कर रहे हैं बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। यह पहल महिलाओं को नए अवसरों की ओर मार्गदर्शन करने और उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने में मदद कर रही है।

    मध्यप्रदेश सरकार की यह पहल महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए एक सकारात्मक कदम है। लोन ट्रेनिंग सब्सिडी और अन्य सुविधाओं के माध्यम से महिलाओं को व्यवसाय स्थापित करने का एक मजबूत मंच मिल रहा है। इससे न केवल महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ रहा है बल्कि वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत कर रही हैं। सरकार की इस पहल से महिलाओं को रोजगार की दिशा में एक नई राह मिल रही है और वे आत्मनिर्भर बन रही हैं।

  • मप्र में मंत्रिमंडल विस्तार भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव के बाद होगा फैसला मंत्री प्रदर्शन रिपोर्ट भी अहम

    मप्र में मंत्रिमंडल विस्तार भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव के बाद होगा फैसला मंत्री प्रदर्शन रिपोर्ट भी अहम


    भोपाल । मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार के दो वर्ष पूरे होने के बाद मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाएं लगातार सुर्खियों में बनी हुई हैं। हालांकि पार्टी सूत्रों के अनुसार यह विस्तार भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन के बाद ही किया जाएगा। केंद्रीय नेतृत्व द्वारा मंत्रालयों के कार्यों का गहन मूल्यांकन किए जाने के बाद ही इस प्रक्रिया में अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

    राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव के बाद विस्तार की संभावना

    भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का कार्यकाल 20 जनवरी 2026 को समाप्त हो रहा है और पार्टी नेताओं का मानना है कि इस तिथि के आसपास भाजपा को नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिल जाएगा। पार्टी के नेताओं के बीच चर्चा है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव होने के बाद ही मध्य प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार पर निर्णय लिया जाएगा। इसके पीछे यह कारण है कि पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व प्रदेश के मंत्रिमंडल में फेरबदल करने के लिए पूरी तरह से तैयार है लेकिन यह बदलाव भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व से मंजूरी मिलने के बाद ही होगा।

    मंत्रियों के कार्य प्रदर्शन पर रिपोर्ट कार्ड तैयार

    मध्य प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार की प्रक्रिया में एक और महत्वपूर्ण पहलू है जो सरकार के मंत्रियों के कार्य प्रदर्शन से जुड़ा है। पार्टी सूत्रों के अनुसार केंद्रीय नेतृत्व ने प्रदेश के मंत्रियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करने के लिए अलग-अलग एजेंसियों से रिपोर्ट कार्ड तैयार करवाया है। इन रिपोर्ट कार्ड्स में मंत्रियों की कार्यकुशलता जनता के प्रति उनकी जिम्मेदारी और उनके विभागों के कार्यों की समीक्षा की गई है। माना जा रहा है कि इन रिपोर्ट्स को विस्तार के निर्णय में अहम भूमिका दी जाएगी।

    हालांकि सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय नेतृत्व मध्य प्रदेश के कुछ मंत्रियों के कार्य प्रदर्शन से काफी नाराज भी है और इन रिपोर्ट्स के आधार पर ही अगले कदम उठाए जाएंगे। इसके अलावा मंत्रियों के कामकाज का आकलन करने के लिए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने विभागवार समीक्षा बैठकें भी आयोजित की हैं। इन बैठकों का उद्देश्य मंत्रियों की कार्यशैली का मूल्यांकन करना और यह सुनिश्चित करना था कि हर विभाग अपने लक्ष्यों को पूरा कर रहा है या नहीं।

    छत्तीसगढ़ के बाद मध्य प्रदेश में भी होगा फेरबदल

    इसी साल छत्तीसगढ़ में विष्णुदेव साय की सरकार में मंत्रिमंडल विस्तार हुआ था और इसके बाद से ही राजनीतिक गलियारों में यह कयास लगाए जा रहे हैं कि मध्य प्रदेश में भी मोहन यादव अपनी टीम में फेरबदल कर सकते हैं। भाजपा नेताओं के अनुसार केंद्रीय नेतृत्व की निगाहें अब प्रदेश के मंत्रियों पर हैं और उनके प्रदर्शन की समीक्षा के आधार पर ही किसी को मंत्रिमंडल में जगह मिलेगी या फिर बाहर किया जाएगा।

    विस्तार के लिए प्रमुख नेता की नियुक्ति

    मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान इस बात की संभावना जताई जा रही है कि कुछ नई चेहरों को भी मौका दिया जा सकता है खासकर उन नेताओं को जो हाल के विधानसभा चुनावों में अच्छा प्रदर्शन कर चुके हैं या फिर जिनकी जनता में बेहतर छवि बन चुकी है। इस विस्तार के बाद यह देखा जाएगा कि सरकार में किसी को नई जिम्मेदारी दी जाती है या कुछ पुराने मंत्रियों को बदलकर नए मंत्रियों की नियुक्ति की जाती है।

    केंद्रीय नेतृत्व की नाराजगी और मंत्रियों की समीक्षा

    केंद्रीय नेतृत्व का मध्य प्रदेश के मंत्रियों के प्रति असंतोष का मुख्य कारण उनके कार्यों में लापरवाही और प्रदेश के विभिन्न मुद्दों पर उनका कमजोर रवैया बताया जा रहा है। भाजपा की केंद्र सरकार से लेकर राज्य सरकार तक यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि किसी भी तरह की असंतोषपूर्ण कार्यशैली को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही अपने विभागों में सुधार और बेहतर प्रदर्शन करने के लिए तैयार रहें।

    मध्य प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार के लिए सभी आँखें भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव पर टिकी हैं। यह संभावना जताई जा रही है कि जेपी नड्डा के कार्यकाल के अंत और नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव के बाद ही मुख्यमंत्री मोहन यादव मंत्रिमंडल में फेरबदल करेंगे। इस निर्णय में प्रमुख भूमिका मंत्रियों के कार्य प्रदर्शन पर तैयार रिपोर्ट कार्ड की होगी जो भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के निर्णय को प्रभावित करेगा। इसके अलावा जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं की अपेक्षाओं को ध्यान में रखते हुए मंत्रिमंडल में बदलाव किए जाएंगे।