Tag: STF Investigation

  • तेंदुआ शिकार मामले में दिनभर चली पूछताछ, 9 घंटे से ज्यादा जांच के घेरे में रहे कार्तिक, बोले- हमारे खिलाफ रची गई साजिश

    तेंदुआ शिकार मामले में दिनभर चली पूछताछ, 9 घंटे से ज्यादा जांच के घेरे में रहे कार्तिक, बोले- हमारे खिलाफ रची गई साजिश


    शिवपुरी । तेंदुआ शिकार से जुड़े मामले में वाइल्डलाइफ एसओएस के संचालक कार्तिक सत्यनारायण से शिवपुरी में करीब साढ़े नौ घंटे तक पूछताछ की गई। सोमवार को वह वन प्रशासन की विशेष कार्य बल यानी एसटीएसएफ के कार्यालय पहुंचे थे। पूछताछ सुबह करीब 11 बजे शुरू हुई और रात लगभग साढ़े आठ बजे तक चली। लंबी पूछताछ के बाद बाहर आए कार्तिक सत्यनारायण ने अपने ऊपर लगाए जा रहे आरोपों को खारिज किया और पूरे मामले को गहरी साजिश बताया। उन्होंने कहा कि वह खुद भी यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि इस मामले के पीछे किसका हाथ है।

    एसटीएसएफ की टीम ने पूछताछ के दौरान वन्यजीव संरक्षण तेंदुआ शिकार और मामले से जुड़े दूसरे पहलुओं पर कार्तिक से सवाल किए। हालांकि जांच एजेंसी की ओर से अभी यह सार्वजनिक नहीं किया गया है कि पूछताछ के दौरान उनसे किन बिंदुओं पर सवाल किए गए और उन्होंने उनका क्या जवाब दिया। ऐसे में जांच के अंदरूनी पहलुओं को लेकर फिलहाल आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

    पूछताछ के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए कार्तिक सत्यनारायण ने खुद को निर्दोष बताया। उन्होंने कहा कि उनके और उनके संगठन के खिलाफ लगाए जा रहे आरोप बेबुनियाद हैं। कार्तिक के मुताबिक उनका संगठन लंबे समय से वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में काम कर रहा है और उनकी टीम कानून के खिलाफ कोई गतिविधि नहीं कर सकती। उन्होंने अपने कर्मचारियों का भी बचाव किया और कहा कि सभी लोग वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए काम करते हैं।

    कार्तिक ने दावा किया कि उनके खिलाफ चल रहा मामला किसी गहरी साजिश का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि वह अपने स्तर पर भी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर इस पूरे घटनाक्रम के पीछे कौन है। हालांकि उनके इस दावे को लेकर जांच एजेंसी की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है। मामले में वास्तविक स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

    पूछताछ के दौरान कार्तिक के साथ उनके वकील भी मौजूद रहे। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील रोहित भारद्वाज ने कहा कि कार्तिक जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं। उनके मुताबिक जांच एजेंसी जब भी कार्तिक को बुलाएगी वह पूछताछ के लिए उपस्थित होंगे। वकील के इस बयान के बाद अब जांच के अगले चरण पर नजर है।

    सोमवार को हुई लंबी पूछताछ के बाद कार्तिक सत्यनारायण को मंगलवार को भी एसटीएसएफ के सामने पेश होना है। इसका मतलब है कि मामले में जांच अभी जारी है और एजेंसी उनसे दोबारा सवाल-जवाब कर सकती है। फिलहाल एसटीएसएफ की ओर से पूछताछ को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

    तेंदुआ शिकार से जुड़े इस मामले में आगे की जांच के दौरान सामने आने वाले दस्तावेज साक्ष्य और बयानों से कई सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद है। फिलहाल एक तरफ जांच एजेंसी मामले की पड़ताल कर रही है तो दूसरी तरफ कार्तिक सत्यनारायण अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को गलत बताते हुए इसे साजिश बता रहे हैं। अब एसटीएसएफ की अगली कार्रवाई और जांच में सामने आने वाले तथ्यों से ही मामले की आगे की दिशा स्पष्ट होगी।

  • फर्जी पासपोर्ट रैकेट में 5वीं गिरफ्तारी: एजेंट नसीम धराया, कच्छ-नागपुर के मठों के पते पर भोपाल से बने 30 तक पासपोर्ट

    फर्जी पासपोर्ट रैकेट में 5वीं गिरफ्तारी: एजेंट नसीम धराया, कच्छ-नागपुर के मठों के पते पर भोपाल से बने 30 तक पासपोर्ट


    भोपाल। भोपाल और ग्वालियर से जुड़े फर्जी पासपोर्ट मामले की जांच में अब एजेंट नेटवर्क की कड़ियां सामने आने लगी हैं। बांग्लादेशी नागरिकों के कथित तौर पर फर्जी भारतीय दस्तावेज तैयार कर पासपोर्ट हासिल करने के मामले में एसटीएफ ने पांचवीं गिरफ्तारी की है। भोपाल से पासपोर्ट एजेंट नसीम अख्तर को पकड़ा गया है। पूछताछ में सामने आया है कि वह 20 से ज्यादा पासपोर्ट बनवाने की प्रक्रिया में शामिल रहा। जांच के दौरान कच्छ और नागपुर के मठों के पतों का इस्तेमाल कर भोपाल से करीब 25 से 30 पासपोर्ट बनवाए जाने की जानकारी भी सामने आई है।

    एसटीएफ के मुताबिक इस नेटवर्क में पासपोर्ट बनवाने के लिए लोगों से करीब 20 हजार रुपए तक लिए जाते थे। पुलिस वेरिफिकेशन को छोड़कर आवेदन से लेकर पासपोर्ट तैयार होने तक की ज्यादातर प्रक्रिया एजेंट संभालता था। इसी कड़ी में नसीम अख्तर की भूमिका सामने आने के बाद उसे गिरफ्तार किया गया। अब जांच एजेंसी उन सभी पासपोर्ट और उनमें इस्तेमाल किए गए दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है जिनमें नसीम की भूमिका बताई गई है।

    पूछताछ में नसीम ने बताया कि वह वर्ष 2016 से भोपाल के एमपी नगर इलाके में टूर एंड ट्रैवल्स का काम करता था। इसी कारोबार के दौरान वह पासपोर्ट संबंधी काम से जुड़ गया और बाद में पासपोर्ट एजेंट के तौर पर काम करने लगा। इसी दौरान भोपाल पासपोर्ट कार्यालय के बाहर उसकी मुलाकात मित्यानंद भिक्षु उर्फ रेयाल चौधरी भिक्षु से हुई। इसके बाद दोनों के बीच संपर्क बढ़ा और कथित तौर पर पासपोर्ट बनवाने का काम शुरू हुआ।

    जांच के अनुसार मित्यानंद भिक्षु नसीम को पासपोर्ट बनवाने वाले लोगों के नाम और दस्तावेज उपलब्ध कराता था। नसीम उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर ऑनलाइन आवेदन करता था। एसटीएफ अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन दस्तावेजों की उत्पत्ति कहां से हुई और आवेदन में दर्ज पहचान तथा वास्तविक पहचान के बीच कितना अंतर था।

    नसीम के खिलाफ नागपुर में पहले से एक आपराधिक मामला दर्ज होने की जानकारी भी जांच में सामने आई है। एसटीएफ इस पुराने मामले और वर्तमान नेटवर्क के बीच किसी संभावित कड़ी की भी पड़ताल कर रही है।

    एसटीएफ एसपी राजेश सिंह भदौरिया के मुताबिक इस मामले में नसीम से पहले प्रियान चौधरी जय चौधरी रियाल चौधरी और विप्लव अधिकारी की गिरफ्तारी हो चुकी है। अब नसीम पांचवां गिरफ्तार आरोपी है। जांच के लिए एसटीएफ की छह टीमें कई राज्यों में दबिश और पूछताछ कर रही हैं। करीब 25 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है जबकि अब तक 150 से ज्यादा लोगों से पूछताछ की जा चुकी है।

    जांच में यह भी सामने आया है कि रियाल करीब 10 साल पहले भारत आया था। आरोप है कि उसने 2021-22 के आसपास बौद्ध भिक्षुओं के नाम पर नेटवर्क तैयार करना शुरू किया। इसके बाद साथियों के भारतीय नाम से दस्तावेज तैयार कराए गए और उन्हीं के आधार पर पासपोर्ट बनवाए गए।

    मामले की जांच में कई ऐसे पासपोर्ट धारकों की जानकारी सामने आई है जिनके वास्तविक नाम और पासपोर्ट में दर्ज नाम अलग पाए गए हैं। यानी दस्तावेजों के जरिए कथित तौर पर पहचान बदलकर पासपोर्ट हासिल किए गए। एसटीएफ अब इन पासपोर्ट धारकों के विदेश यात्रा रिकॉर्ड और दस्तावेजों की भी जांच कर रही है। जांच आगे बढ़ने के साथ इस नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों और फर्जी दस्तावेज तैयार करने की पूरी प्रक्रिया का खुलासा होने की संभावना है।

  • भोपाल रेलवे स्टेशन पर बड़ी कार्रवाई 311 कछुए बरामद आरपीएफ वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई के बाद STF ने शुरू की जांच

    भोपाल रेलवे स्टेशन पर बड़ी कार्रवाई 311 कछुए बरामद आरपीएफ वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई के बाद STF ने शुरू की जांच

    भोपाल /मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स, आरपीएफ और वन विभाग ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए कछुए तस्करी का मामला पकड़ा है। रेलवे स्टेशन पर चेकिंग के दौरान 311 कछुए बरामद किए गए और एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया।

    भोपाल के बैरागढ़ के संत हिरदाराम रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ ने बैग चेकिंग के दौरान दो बैगों में कुल 311 कछुए पकड़े। आरोपी अजय सिंह राजपूत पिता रामकुमार रेलवे कोच में अटेंडर का काम करता है। आरोपी ने पूछताछ में बताया कि ढाई हजार रुपए की लालच में वह कछुओं को देवास और इंदौर भेजने के लिए ले जा रहा था।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग को जानकारी दी गई। तुरंत स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स और वन विभाग का स्टाफ मौके पर पहुंचा और आरोपी को हिरासत में लिया। आरपीएफ की पूछताछ में यह सामने आया कि रविंद्र कश्यप नामक व्यक्ति ने ढाई हजार रुपए की लालच देकर आरोपी से कछुए तस्करी कराई।

    फिलहाल आरोपी के खिलाफ वन अपराध प्रकरण क्रमांक 237/23 पंजीबद्ध किया गया है। STF मामले की जांच में जुटी है और आरोपी से विस्तार से पूछताछ की जा रही है। आज उसे माननीय न्यायालय में पेश किया जाएगा।यह मामला वन्यजीव तस्करी और रेलवे सुरक्षा दोनों के लिए गंभीर चेतावनी माना जा रहा है