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जूनियर डॉक्टरों के लिए बड़ी खबर, तीनों पीजी वर्ष के स्टाइपेंड में इजाफा, जानिए अब किसे हर महीने कितनी रकम मिलेगी
भोपाल । मध्य प्रदेश के शासकीय मेडिकल कॉलेजों में पढ़ने वाले जूनियर डॉक्टरों के लिए राहत की खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने पीजी और सुपर स्पेशियलिटी पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों के मासिक स्टाइपेंड में 4.46 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है। वित्त विभाग की सहमति मिलने के बाद बढ़ी हुई राशि 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी मानी जाएगी। इस फैसले से पीजी प्रथम वर्ष से लेकर तृतीय वर्ष तक के डॉक्टरों के साथ सुपर स्पेशियलिटी के विद्यार्थियों को भी लाभ मिलेगा।सरकार के आदेश के अनुसार पीजी प्रथम वर्ष के डॉक्टरों का मासिक स्टाइपेंड 77 हजार 662 रुपये से बढ़ाकर 81 हजार 126 रुपये कर दिया गया है। यानी अब उन्हें हर महीने पहले की तुलना में 3 हजार 464 रुपये अधिक मिलेंगे। इसी तरह पीजी द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों को अब 80 हजार 50 रुपये के बजाय 83 हजार 620 रुपये प्रतिमाह दिए जाएंगे। इस श्रेणी में मासिक स्टाइपेंड में 3 हजार 570 रुपये की बढ़ोतरी हुई है।पीजी तृतीय वर्ष के डॉक्टरों के स्टाइपेंड में भी इजाफा किया गया है। पहले उन्हें हर महीने 82 हजार 441 रुपये मिलते थे जबकि अब यह राशि बढ़ाकर 86 हजार 118 रुपये कर दी गई है। इस तरह तृतीय वर्ष के विद्यार्थियों को हर महीने 3 हजार 677 रुपये अतिरिक्त मिलेंगे। वहीं सुपर स्पेशियलिटी पाठ्यक्रम के प्रथम द्वितीय और तृतीय वर्ष के विद्यार्थियों का मासिक स्टाइपेंड भी बढ़ाकर 86 हजार 118 रुपये कर दिया गया है।विभाग के मुताबिक यह बढ़ोतरी महंगाई भत्ते के आधार पर की गई है। सरकार के इस निर्णय से मेडिकल कॉलेजों में प्रशिक्षण ले रहे डॉक्टरों को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है। पीजी और सुपर स्पेशियलिटी की पढ़ाई के दौरान विद्यार्थियों को अस्पतालों में मरीजों की देखभाल और चिकित्सा सेवाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्य करने होते हैं। ऐसे में स्टाइपेंड में बढ़ोतरी उनके मासिक खर्चों को संभालने में मदद कर सकती है।इस बीच प्रदेश में इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड का मुद्दा भी चर्चा में है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड में 50 प्रतिशत बढ़ोतरी कर इसे 21 हजार 500 रुपये प्रतिमाह किए जाने की खबर सामने आई है। दूसरी ओर स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर इंटर्न डॉक्टरों का आंदोलन भी जारी रहने की जानकारी दी गई है। भोपाल में कमला पार्क के पास प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों ने अपनी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कही है।जूनियर डॉक्टरों के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी का आदेश ऐसे समय आया है जब चिकित्सा शिक्षा से जुड़े विद्यार्थियों की आर्थिक मांगें चर्चा में हैं। अब बढ़ी हुई राशि के भुगतान और आदेश के क्रियान्वयन पर नजर रहेगी। सरकार के इस फैसले से प्रदेश के शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में प्रशिक्षण ले रहे डॉक्टरों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा। -

स्टाइपेंड की लड़ाई ने बढ़ाई स्वास्थ्य व्यवस्था की चिंता: इंटर्न डॉक्टरों का आंदोलन तेज, सरकार के सामने जल्द समाधान की चुनौती
भोपाल । मध्य प्रदेश में इंटर्न डॉक्टरों के आंदोलन ने अब स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर शुरू हुआ आंदोलन लगातार तीसरे दिन भी जारी है और भोपाल से लेकर इंदौर समेत प्रदेश के कई सरकारी अस्पतालों में इसका सीधा असर मरीजों पर दिखाई दे रहा है। इंटर्न डॉक्टर अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर डटे हुए हैं जबकि जूनियर डॉक्टर और सीनियर रेजिडेंट्स के समर्थन में आने से आंदोलन और व्यापक होता जा रहा है। बुधवार को भी नियमित ओपीडी सेवाओं के बहिष्कार का ऐलान किया गया है जिससे सुबह अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि इमरजेंसी सेवाओं को आंदोलन से अलग रखा गया है ताकि गंभीर मरीजों को तत्काल उपचार मिल सके।भोपाल में इस आंदोलन का सबसे बड़ा केंद्र कमला पार्क क्षेत्र बना हुआ है जहां इंटर्न डॉक्टर सड़क पर बैठकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस फैसला नहीं लिया जाता तब तक वे आंदोलन समाप्त नहीं करेंगे। सड़क पर बैठे डॉक्टरों के कारण यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हुई और पुलिस तथा प्रशासन लगातार प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर चक्काजाम समाप्त कराने की कोशिश करते रहे। इसके बावजूद डॉक्टर अपनी मांगों पर अड़े रहे और उन्होंने सड़क पर ही भोजन कर विरोध जारी रखा। इस बीच मानवता की तस्वीर भी देखने को मिली जब एक दंपती ने अपनी बेटी के एक्सीडेंट की जानकारी दी तो प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों ने तुरंत उनकी गाड़ी को रास्ता दे दिया।
आंदोलन के पीछे केवल स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग नहीं बल्कि सोमवार को प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर भी डॉक्टरों में गहरी नाराजगी है। इंटर्न डॉक्टरों का आरोप है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। इसी कार्रवाई के विरोध में अब आंदोलन और तेज हो गया है। डॉक्टरों का कहना है कि उनकी समस्याओं का समाधान बल प्रयोग से नहीं बल्कि संवेदनशील बातचीत और ठोस निर्णय के जरिए किया जाना चाहिए।
इंटर्न डॉक्टरों के समर्थन में भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज के सीनियर रेजिडेंट्स भी आंदोलन में शामिल हो गए हैं। जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन और मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन के बाद सीनियर रेजिडेंट्स द्वारा भी ओपीडी और अन्य गैर जरूरी सेवाओं के बहिष्कार का निर्णय लिए जाने से स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बढ़ गया है। जूनियर डॉक्टरों ने भी साफ कर दिया है कि नियमित ओपीडी और इलेक्टिव ओटी का बहिष्कार जारी रहेगा जबकि आपातकालीन सेवाएं सामान्य रूप से संचालित की जाएंगी।
प्रदेशभर के डॉक्टरों में पुलिस कार्रवाई को लेकर नाराजगी का दावा किया जा रहा है। मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन का कहना है कि डॉक्टरों की मांगों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए और सरकार को जल्द ऐसा रास्ता निकालना चाहिए जिससे आंदोलन समाप्त हो सके। दूसरी ओर अस्पतालों में इलाज के लिए पहुंच रहे मरीजों की परेशानी लगातार बढ़ रही है। अब सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती डॉक्टरों की मांगों पर जल्द सहमति बनाकर स्वास्थ्य व्यवस्था को पूरी तरह सामान्य करना है। प्रशासन और सरकार की बातचीत पर सभी की नजरें टिकी हैं क्योंकि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आंदोलन का असर प्रदेश की चिकित्सा सेवाओं पर और अधिक गंभीर हो सकता है।
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मप्र में जूनियर डॉक्टरों के स्टाइपेंड में हुई वृद्धि, उप मुख्यमंत्री शुक्ल के निर्देश के बाद आदेश जारी
भोपाल । उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल के निर्देशों के अनुपालन में चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा जूनियर डॉक्टरों के स्टाइपेंड में वृद्धि संबंधी आदेश जारी कर दिए गए हैं, जो 1 अप्रैल 2025 से प्रभावी होंगे।
उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्रदेश सरकार चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता को सुदृढ़ करने और स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सशक्त एवं जनोन्मुख बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जूनियर डॉक्टर पूर्ण समर्पण से प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त और सुदृढ़ करने में अपना महत्वपूर्ण योगदान निभायेंगे।
उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि जूनियर डॉक्टर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। मेडिकल कॉलेजों और संबद्ध अस्पतालों में वे न केवल अपने चिकित्सा प्रशिक्षण को पूर्ण करते हैं। मरीजों को निरंतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने में भी जूनियर डॉक्टर अग्रणी भूमिका निभाते हैं।
उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने जूनियर डॉक्टर के हित को ध्यान में रखते हुए संबंधित अधिकारियों को सकारात्मक समाधान के निर्देश दिए थे। उसके अनुक्रम में विभाग द्वारा स्टाइपेंड वृद्धि का आदेश जारी किया गया है। प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत जूनियर डॉक्टरों के स्टाइपेंड में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक 2.94 के आधार पर वृद्धि करते हुए 1 अप्रैल 2025 से संशोधित स्टाइपेंड लागू किया गया है। इसके तहत पीजी प्रथम वर्ष का स्टाइपेंड 75,444 रुपये से बढ़ाकर 77,662 रुपये, द्वितीय वर्ष का 77,764 रुपये से बढ़ाकर 80,050 रुपये तथा तृतीय वर्ष का 80,086 रुपये से बढ़ाकर 82,441 रुपये किया गया है। इसी प्रकार इंटर्न का स्टाइपेंड 13,928 रुपये से बढ़ाकर 14,337 रुपये किया गया है। सुपर स्पेशिलिटी पाठ्यक्रम के प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय वर्ष के स्टाइपेंड को भी बढ़ाकर 82,441 रुपये निर्धारित किया गया है। सीनियर रेजिडेंट का स्टाइपेंड 88,210 रुपये से बढ़ाकर 90,803 रुपये तथा जूनियर रेजिडेंट का स्टाइपेंड 63,324 रुपये निर्धारित किया गया है। इस निर्णय से प्रदेश के सभी शासकीय मेडिकल कॉलेजों में अध्ययनरत एवं सेवाएं दे रहे जूनियर डॉक्टरों को प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त होगा।