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  • महाराष्ट्र में इंटर्न डॉक्टरों का प्रदर्शन, 18 हजार का स्टाइपेंड बढ़ाकर 30 हजार करने की मांग, 2 नवंबर से हड़ताल की चेतावनी

    महाराष्ट्र में इंटर्न डॉक्टरों का प्रदर्शन, 18 हजार का स्टाइपेंड बढ़ाकर 30 हजार करने की मांग, 2 नवंबर से हड़ताल की चेतावनी

    नई दिल्ली । महाराष्ट्र में इंटर्न डॉक्टरों ने मासिक स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन तेज कर दिया है। गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 को मुंबई के जे.जे. अस्पताल में एसोसिएशन ऑफ स्टेट मेडिकल इंटर्न्स (ASMI) के बैनर तले सैकड़ों इंटर्न डॉक्टरों ने प्रदर्शन किया। उनकी प्रमुख मांग है कि मौजूदा मासिक स्टाइपेंड 18,000 रुपये से बढ़ाकर 30,000 रुपये किया जाए। डॉक्टरों ने राज्य सरकार को चेतावनी दी है कि यदि 1 नवंबर तक उनकी मांग पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो वे 2 नवंबर से हड़ताल शुरू कर देंगे। हालांकि, प्रस्तावित हड़ताल के दौरान आपातकालीन सेवाएं जारी रखने की बात कही गई है।

    प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि महाराष्ट्र में इंटर्न डॉक्टरों को मिलने वाला स्टाइपेंड दूसरे राज्यों की तुलना में कम है। उनके मुताबिक, उत्तर प्रदेश, बिहार और कई अन्य राज्यों में इंटर्न डॉक्टरों को 25,000 रुपये या उससे अधिक मासिक मानदेय दिया जा रहा है। इसके विपरीत, महाराष्ट्र में उन्हें 18,000 रुपये ही मिलते हैं। डॉक्टरों ने कहा कि मुंबई जैसे महंगे महानगर में आवास, भोजन और रोजमर्रा की जरूरतों पर खर्च काफी अधिक है। ऐसे में मौजूदा स्टाइपेंड से जीवनयापन करना मुश्किल हो रहा है। उनका तर्क है कि काम की जिम्मेदारियों और मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए मानदेय बढ़ाना जरूरी है।

    एसोसिएशन ऑफ स्टेट मेडिकल इंटर्न्स के महासचिव डॉ. रमन पवार ने बताया कि स्टाइपेंड बढ़ाने का मुद्दा वर्ष 2024 से लंबित है। उस समय भी इंटर्न डॉक्टरों ने प्रदर्शन कर मासिक स्टाइपेंड 30,000 रुपये करने की मांग उठाई थी, लेकिन उनके अनुसार सरकार की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। अब डॉक्टरों ने एक बार फिर इसी मांग को लेकर आंदोलन शुरू किया है।

    डॉ. पवार के मुताबिक, संगठन ने अगस्त से अक्टूबर के बीच राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को कई पत्र भेजे। इनमें शिक्षा मंत्री, प्रधान सचिव, उपमुख्यमंत्री, मुख्यमंत्री और मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव सहित अन्य अधिकारियों को मांग से अवगत कराया गया। सितंबर में भी अनुरोध पत्र भेजकर सरकार को जवाब देने के लिए 15 से 20 दिन का समय दिया गया था। इसके बाद 5 अक्टूबर को पुनर्विचार के लिए एक और पत्र सौंपा गया। संगठन का कहना है कि इसके बाद भी करीब 10 दिन तक इंतजार करने के बावजूद कोई ठोस जवाब नहीं मिला।

    डॉक्टरों ने बताया कि अधिकारियों से मुलाकात की कोशिश भी की गई और दो बार बातचीत हुई, लेकिन उन्हें केवल आश्वासन मिले। किसी निश्चित बैठक या निर्णय की जानकारी नहीं दी गई। इसी वजह से मामला अब तक लंबित है। संगठन के अनुसार, यह आंदोलन सिर्फ मुंबई तक सीमित नहीं है, बल्कि महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों के इंटर्न डॉक्टर भी इसमें शामिल हैं।

    अस्पताल प्रशासन के स्तर पर भी इस मुद्दे को उठाया गया है। डॉ. पवार ने बताया कि पिछले तीन महीनों में डीन को तीन बार पत्र दिए गए। डीन की ओर से स्टाइपेंड बढ़ाने का प्रस्ताव चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान निदेशालय (DMER) को भेजा गया है। संगठन ने भी इसी अवधि में डीएमईआर को लगभग छह पत्र सौंपे हैं। डॉ. पवार के अनुसार, प्रस्ताव आगे भेजे जाने के बावजूद अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मामला वित्त मंत्रालय तक पहुंच चुका है, तो फैसला लेने में देरी क्यों हो रही है।

    फिलहाल इंटर्न डॉक्टरों ने अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखते हुए सरकार से 1 नवंबर तक निर्णय लेने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि तय समय सीमा तक स्टाइपेंड बढ़ाने पर ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो 2 नवंबर से हड़ताल शुरू की जाएगी। डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि आंदोलन के दौरान आपातकालीन सेवाएं चालू रहेंगी। अब इस मामले में राज्य सरकार के फैसले पर नजर है, क्योंकि समय सीमा समाप्त होने पर अस्पतालों की नियमित सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका हो सकती है।

  • मध्य प्रदेश में इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड पर बड़ा फैसला, 14,337 से बढ़कर अब 21,500 रुपये प्रतिमाह

    मध्य प्रदेश में इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड पर बड़ा फैसला, 14,337 से बढ़कर अब 21,500 रुपये प्रतिमाह


    मध्य प्रदेश: के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इंटर्न डॉक्टरों के लिए स्टाइपेंड बढ़ाने का औपचारिक आदेश जारी कर दिया गया है। लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने मासिक स्टाइपेंड 14,337 रुपये से बढ़ाकर 21,500 रुपये करने की प्रशासनिक स्वीकृति दी है। आदेश के अनुसार बढ़ी हुई राशि 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी मानी जाएगी। इससे प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप कर रहे छात्रों को बढ़ा हुआ स्टाइपेंड मिलेगा।

    विभाग की ओर से जारी आदेश में वर्तमान में प्रचलित 14,337 रुपये की राशि को संशोधित कर 21,500 रुपये प्रतिमाह निर्धारित किया गया है। इस तरह इंटर्न डॉक्टरों के मासिक स्टाइपेंड में 7,163 रुपये की वृद्धि हुई है। सितंबर में सरकार और इंटर्न डॉक्टरों के बीच सहमति बनने के बाद अब विभागीय स्तर पर इसकी औपचारिक प्रक्रिया पूरी कर दी गई है।

    स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों के इंटर्न डॉक्टर लंबे समय से अपनी मांग उठा रहे थे। सितंबर में यह मामला आंदोलन तक पहुंच गया था। भोपाल में प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारी डॉक्टरों के बीच स्थिति तनावपूर्ण हुई और वाटर कैनन के इस्तेमाल की घटना भी सामने आई। इसके बाद डॉक्टरों की मांग और प्रदर्शन से जुड़े घटनाक्रम को लेकर सरकार की ओर से हस्तक्षेप किया गया।

    इंटर्न डॉक्टरों की मांग पर उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के साथ प्रतिनिधिमंडल की बातचीत हुई थी। चर्चा के दौरान स्टाइपेंड बढ़ाने के मुद्दे पर सहमति बनी और 21,500 रुपये प्रतिमाह देने की घोषणा की गई। इसके बाद आंदोलन समाप्त हुआ और विभागीय आदेश का इंतजार किया जा रहा था। अब आदेश जारी होने के साथ बढ़े हुए स्टाइपेंड को लागू करने की प्रक्रिया स्पष्ट हो गई है।

    इससे पहले इंटर्न डॉक्टरों को हर महीने 14,337 रुपये स्टाइपेंड मिलता था। आंदोलन के दौरान डॉक्टरों की ओर से इससे काफी अधिक राशि की मांग रखी गई थी। सरकार और डॉक्टरों के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत के बाद 21,500 रुपये की राशि पर सहमति बनी। अब आदेश में इसे 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी किए जाने से अप्रैल से सितंबर तक की अवधि के भुगतान को लेकर भी बढ़ी हुई दर लागू होने का आधार तैयार हो गया है।

    स्टाइपेंड में यह संशोधन सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्रशिक्षण ले रहे इंटर्न डॉक्टरों के लिए सीधे आर्थिक लाभ से जुड़ा फैसला है। इंटर्नशिप के दौरान डॉक्टर अस्पतालों में मरीजों की देखभाल, विभिन्न विभागों में चिकित्सकीय कार्य और प्रशिक्षण से जुड़ी जिम्मेदारियां निभाते हैं। ऐसे में स्टाइपेंड में बढ़ोतरी उनके प्रशिक्षण काल के दौरान मिलने वाली मासिक आर्थिक सहायता को बढ़ाएगी।

    सरकार और इंटर्न डॉक्टरों के बीच विवाद का एक प्रमुख मुद्दा स्टाइपेंड था, लेकिन आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई भी चर्चा में रही। प्रदर्शन के दौरान वाटर कैनन और बल प्रयोग के बाद मामला और गंभीर हुआ था। उप मुख्यमंत्री ने इस घटनाक्रम पर कार्रवाई की बात कही थी। इसके बाद स्टाइपेंड बढ़ाने के निर्णय के साथ आंदोलन समाप्त होने का रास्ता साफ हुआ।

    अब लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के आदेश के बाद 21,500 रुपये मासिक स्टाइपेंड की नई दर औपचारिक रूप से लागू हो गई है। 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होने के कारण यह निर्णय केवल आगे की अवधि तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आदेश में निर्धारित प्रभावी तारीख के आधार पर भुगतान की गणना की जाएगी।

  • एमबीबीएस के बाद अब आयुष इंटर्न्स का प्रदर्शन, भोपाल कलेक्ट्रेट पहुंचकर स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग

    एमबीबीएस के बाद अब आयुष इंटर्न्स का प्रदर्शन, भोपाल कलेक्ट्रेट पहुंचकर स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग

    मध्यप्रदेश: की राजधानी भोपाल में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर आयुष इंटर्न डॉक्टरों का विरोध प्रदर्शन मंगलवार को तेज हो गया। बड़ी संख्या में आयुष इंटर्न डॉक्टर भोपाल कलेक्ट्रेट पहुंचे और अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। डॉक्टरों का कहना है कि उन्हें वर्तमान में 9,383 रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड दिया जा रहा है, जो कई अन्य राज्यों की तुलना में काफी कम है।

    आयुष इंटर्न डॉक्टरों ने दोपहर करीब 12 बजे कलेक्ट्रेट पहुंचकर घेराव किया। प्रदर्शन को देखते हुए कलेक्ट्रेट के मुख्य गेट को बंद कर दिया गया और इंटर्न डॉक्टरों को अंदर जाने से रोका गया। स्थिति को देखते हुए प्रशासन की ओर से भारी पुलिस बल भी तैनात किया गया।

    प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों ने अलग-अलग राज्यों में मिलने वाले स्टाइपेंड का हवाला देते हुए मध्यप्रदेश में राशि बढ़ाने की मांग रखी। उनका कहना है कि मौजूदा 9,383 रुपये का मासिक स्टाइपेंड 15 राज्यों की तुलना में सबसे कम है।

    डॉक्टरों के मुताबिक पश्चिम बंगाल में आयुष इंटर्न्स को 33,099 रुपये प्रतिमाह, ओडिशा में 30 हजार रुपये और तेलंगाना में 29,792 रुपये का स्टाइपेंड मिलता है। बिहार में यह राशि 27 हजार रुपये, आंध्र प्रदेश में 25,906 रुपये और केरल में 23 हजार रुपये प्रतिमाह बताई गई है।

    इसी तरह कर्नाटक में 22,500 रुपये, असम और महाराष्ट्र में 18 हजार रुपये, छत्तीसगढ़ में 15,900 रुपये तथा पंजाब और उत्तराखंड में 15 हजार रुपये का स्टाइपेंड मिलने की जानकारी प्रदर्शनकारी डॉक्टरों ने दी। राजस्थान में 14 हजार रुपये के साथ डीए मिलने की बात भी कही गई है।

    हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में इंटर्न डॉक्टरों को 10 हजार रुपये प्रतिमाह मिलने का दावा किया गया। इन आंकड़ों के आधार पर आयुष इंटर्न डॉक्टरों का कहना है कि मध्यप्रदेश में मिलने वाला स्टाइपेंड बढ़ाया जाना चाहिए।

    आयुष इंटर्न डॉक्टरों का यह प्रदर्शन ऐसे समय हुआ है, जब हाल ही में भोपाल में एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टर भी स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन कर चुके हैं। एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों ने तीन दिन तक धरना प्रदर्शन किया था। इसके बाद सरकार ने उनके स्टाइपेंड में 50 प्रतिशत बढ़ोतरी का ऐलान किया।

    सरकार की घोषणा के बाद एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों का स्टाइपेंड बढ़कर 21,500 रुपये प्रतिमाह किया गया। हालांकि प्रदर्शन के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हुई थी। प्रदर्शनकारी डॉक्टरों पर लाठीचार्ज और वॉटर कैनन के इस्तेमाल की बात सामने आई थी, जिसमें कुछ डॉक्टर घायल हुए थे।

    इस मामले में दो पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच किया गया था और मामले की जांच जारी है। इसी घटनाक्रम के बीच अब आयुष विभाग से जुड़े इंटर्न डॉक्टरों ने भी स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन शुरू किया है।

    आयुष इंटर्न डॉक्टरों की मांग है कि उनकी आर्थिक स्थिति और अन्य राज्यों में मिलने वाली राशि को ध्यान में रखते हुए मध्यप्रदेश में भी स्टाइपेंड में उचित बढ़ोतरी की जाए। कलेक्ट्रेट घेराव के दौरान प्रशासन और प्रदर्शनकारी डॉक्टरों के बीच स्थिति पर नजर रखी गई।

    अब आयुष इंटर्न डॉक्टरों की मांग पर सरकार और संबंधित विभाग की ओर से क्या निर्णय लिया जाता है, इस पर नजर है। प्रदर्शन के जरिए डॉक्टरों ने स्टाइपेंड में बढ़ोतरी को लेकर अपनी मांग प्रशासन के सामने रख दी है।

  • 14 हजार से 30 हजार स्टाइपेंड की मांग को लेकर डॉक्टर सड़क पर उतरे, हमीदिया में पुलिस से हुई झड़प

    14 हजार से 30 हजार स्टाइपेंड की मांग को लेकर डॉक्टर सड़क पर उतरे, हमीदिया में पुलिस से हुई झड़प

    भोपाल: के हमीदिया अस्पताल में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर इंटर्न डॉक्टरों का प्रदर्शन सोमवार को तनावपूर्ण हो गया। मुख्यमंत्री निवास की ओर मार्च निकालने की कोशिश कर रहे डॉक्टरों को रोकने के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। इस दौरान वाटर कैनन की चपेट में आने से एक इंटर्न डॉक्टर के घायल होने की जानकारी सामने आई है।

    प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों की मुख्य मांग स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की है। उनका कहना है कि वर्तमान में उन्हें हर महीने 14,337 रुपये स्टाइपेंड मिल रहा है, जबकि वे इसे बढ़ाकर कम से कम 30 हजार रुपये प्रतिमाह करने की मांग कर रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक इस संबंध में शासन की ओर से निर्णय लेने का मौखिक आश्वासन दिया गया था, लेकिन एक महीने से अधिक समय बीतने के बावजूद आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ।

    इसी के बाद इंटर्न डॉक्टरों ने मुख्यमंत्री मोहन यादव तक अपनी मांग पहुंचाने के लिए मार्च निकालने का फैसला किया। डॉक्टरों का कहना है कि वे मुख्यमंत्री से सीधे मुलाकात कर अपनी समस्या रखना चाहते थे। हालांकि मार्च शुरू होने से पहले ही अस्पताल परिसर में पुलिस बल तैनात कर दिया गया और बाहर निकलने वाले रास्तों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई।

    पुलिस की तैनाती के बीच प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच विवाद बढ़ गया। कुछ इंटर्न डॉक्टरों ने हमीदिया अस्पताल के गेट और बैरिकेड तोड़ दिए। इसके बाद वे अस्पताल परिसर से बाहर निकलकर फतेहगढ़ की मुख्य सड़क पर पहुंच गए और वहीं बैठकर विरोध जताने लगे। प्रदर्शन के दौरान सड़क पर डॉक्टरों के बैठने से इलाके में तनाव की स्थिति बन गई।

    अस्पताल परिसर में पुलिस की ओर से इमरजेंसी गेट को भी ब्लॉक किए जाने की बात सामने आई। मौके पर वाटर कैनन वाहन सहित पुलिस के अन्य वाहन तैनात रहे। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने का प्रयास किया। इसी दौरान वाटर कैनन चलाया गया और एक छात्र के घायल होने की जानकारी सामने आई।

    इंटर्न डॉक्टर मोहित मिश्रा ने कहा कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग रखने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि डॉक्टर पहले संवैधानिक तरीके से अपनी बात रख चुके हैं और सभी नियमों का पालन किया गया, लेकिन जब उनकी मांग पर निर्णय नहीं हुआ तो मुख्यमंत्री निवास की ओर मार्च करने का फैसला लिया गया।

    डॉक्टरों का कहना है कि उन्हें केवल मौखिक आश्वासन नहीं चाहिए। उनकी मांग है कि स्टाइपेंड बढ़ाने का फैसला लिखित सरकारी आदेश के रूप में जारी किया जाए। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि उन्हें 14,337 रुपये नहीं, बल्कि न्यूनतम 30 हजार रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड चाहिए।

    मोहित मिश्रा के मुताबिक उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल की ओर से पहले कहा गया था कि यदि उत्तर प्रदेश में इंटर्न डॉक्टरों का स्टाइपेंड बढ़ाया जाता है तो मध्य प्रदेश में भी उस दिशा में निर्णय लिया जाएगा। अब उत्तर प्रदेश में स्टाइपेंड बढ़ाकर 25 हजार रुपये किए जाने का आदेश जारी होने के बाद मध्य प्रदेश के इंटर्न डॉक्टर भी अपने राज्य में इसी तरह के निर्णय की मांग कर रहे हैं।

    प्रदर्शनकारियों के अनुसार मध्य प्रदेश में करीब दो हजार शासकीय इंटर्न डॉक्टर हैं, जबकि प्रदेश में कुल इंटर्न डॉक्टरों की संख्या लगभग 3,600 बताई जा रही है। दूसरे मेडिकल कॉलेजों के इंटर्न डॉक्टरों के भी आंदोलन में शामिल होने का दावा किया गया है। प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि सागर के इंटर्न डॉक्टरों की बस को नादरा बस स्टैंड पर रोका गया।

    डॉक्टरों ने कहा है कि जब तक मुख्यमंत्री स्वयं सामने आकर स्टाइपेंड बढ़ाने का लिखित आदेश नहीं देते, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। फिलहाल हमीदिया अस्पताल परिसर में डॉक्टरों के प्रदर्शन और पुलिस की तैनाती के कारण स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

  • भोपाल में जूनियर डॉक्टरों का प्रदर्शन, स्टाइपेंड बढ़ोतरी न होने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी

    भोपाल में जूनियर डॉक्टरों का प्रदर्शन, स्टाइपेंड बढ़ोतरी न होने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी


    भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी में जूनियर डॉक्टरों ने सोमवार को जोरदार प्रदर्शन किया। जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन जूडा ने राजधानी में मार्च निकालकर अपनी मांगों को लेकर प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया। जूडा के प्रतिनिधियों का कहना है कि प्रदेश सरकार ने अन्य डॉक्टरों का स्टाइपेंड बढ़ा दिया है लेकिन जूनियर डॉक्टरों के स्टाइपेंड में कोई वृद्धि नहीं की गई। अधिकारियों की तरफ से अब तक कोई ठोस जवाब नहीं आया है जिसके चलते जूडा ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाएंगे।

    जूनियर डॉक्टरों का कहना है कि एमपी के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पढ़ने और काम करने वाले डॉक्टर्स लंबे समय से स्टाइपेंड बढ़ोतरी और लंबित भुगतान के इंतजार में हैं। जूडा ने बताया कि प्रदेश सरकार के 7 जून 2021 के आदेश के अनुसार 1 अप्रैल 2025 से CPE आधारित स्टाइपेंड बढ़ोतरी और लंबित एरियर का भुगतान होना था लेकिन यह अब तक लागू नहीं हुआ है। डॉक्टरों का मानना है कि यह सिर्फ आर्थिक मसला नहीं है बल्कि उनके मानसिक और पेशेवर मनोबल पर भी असर डाल रहा है।

    जूडा ने अपनी विरोध की रणनीति चरणबद्ध तरीके से तैयार की है। सबसे पहले डॉक्टर काली पट्टी बांधकर अपनी नाराजगी जताएंगे इसके बाद मार्च निकाला गया। यदि सरकार ने मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो जूनियर डॉक्टर नॉन-इमरजेंसी सेवाओं जैसे कि OPD रूटीन चेकअप आदि का बहिष्कार करेंगे। जूडा ने स्पष्ट किया कि इमरजेंसी सेवाएं जारी रहेंगी लेकिन अन्य सेवाओं में रुकावट आने से प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।

    जूनियर डॉक्टरों ने कहा कि स्टाइपेंड बढ़ोतरी और लंबित एरियर का भुगतान उनके लिए बेहद जरूरी है। इसके बिना न केवल उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित होती है बल्कि काम के प्रति मनोबल और पेशेवर जिम्मेदारी निभाने की क्षमता पर भी असर पड़ता है। डॉक्टरों ने प्रशासन से आग्रह किया है कि उनकी मांगों को गंभीरता से लें और शीघ्र कार्रवाई करें।

    इस प्रदर्शन में जूनियर डॉक्टरों के साथ मेडिकल कॉलेज के अन्य स्टाफ ने भी सहभागिता की। जूडा का कहना है कि यह आंदोलन केवल अपनी मांगों तक सीमित नहीं है बल्कि यह पूरे स्वास्थ्य क्षेत्र में कर्मचारियों के हक और सम्मान की लड़ाई भी है। प्रदर्शन के दौरान जूडा ने कहा कि यदि सरकार ने शीघ्र कार्रवाई नहीं की तो सोमवार से वे नॉन-इमरजेंसी सेवाओं का बहिष्कार शुरू करेंगे।

    यह आंदोलन भोपाल के कई अस्पतालों में मरीजों और आम जनता के लिए चुनौती बन सकता है। जूडा का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल आर्थिक न्याय हासिल करना है और इसके लिए वे शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे हैं।