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  • ग्लोबल संकेतों के बीच बाजार धड़ाम, निफ्टी 1.5% गिरा और 23,500 के अहम स्तर से नीचे फिसला

    ग्लोबल संकेतों के बीच बाजार धड़ाम, निफ्टी 1.5% गिरा और 23,500 के अहम स्तर से नीचे फिसला

    नई दिल्ली ।  सप्ताह के अंतिम कारोबारी सत्र में भारतीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली, जिससे निवेशकों की संपत्ति को बड़ा नुकसान हुआ। वैश्विक बाजारों से मिले-जुले संकेतों और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच घरेलू बाजार दबाव में आ गया। कारोबार की शुरुआत भले ही सकारात्मक रही हो, लेकिन दिन के आगे बढ़ने के साथ बाजार में कमजोरी बढ़ती गई और अंतिम घंटे में तेज बिकवाली ने स्थिति को और बिगाड़ दिया।

    कारोबार के अंत में 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 1,092.06 अंक यानी 1.44 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74,775.74 पर बंद हुआ। वहीं एनएसई का निफ्टी 50 भी 359.40 अंक यानी 1.50 प्रतिशत टूटकर 23,547.75 के स्तर पर बंद हुआ। दिनभर के कारोबार में सेंसेक्स ने 76,220.02 का ऊपरी स्तर और 74,589.11 का निचला स्तर छुआ, जबकि निफ्टी 24,002.80 के हाई से फिसलकर 23,484.75 के निचले स्तर तक पहुंच गया।

    बाजार में यह गिरावट व्यापक स्तर पर देखने को मिली, जहां मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी दबाव में रहे। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 1.33 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.85 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। सेक्टरवार देखें तो तेल एवं गैस, मेटल और फाइनेंशियल सर्विसेज जैसे प्रमुख सेक्टरों में दो प्रतिशत से अधिक की गिरावट ने बाजार पर अतिरिक्त दबाव बनाया। वहीं ऑटो, फार्मा, हेल्थकेयर और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर भी कमजोर रहे, जबकि आईटी सेक्टर में हल्की बढ़त देखने को मिली।

    निफ्टी 50 के प्रमुख शेयरों में टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक, विप्रो, नेस्ले इंडिया और एलएंडटी जैसे स्टॉक्स में मामूली तेजी रही, लेकिन दूसरी ओर पावरग्रिड, इंडिगो, ओएनजीसी, मैक्स हेल्थ, आयशर मोटर्स और टाटा कंज्यूमर जैसे शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई। कुल मिलाकर बाजार में बिकवाली का दबाव इतना अधिक रहा कि एक ही सत्र में निवेशकों को लगभग 6 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति का नुकसान झेलना पड़ा।

    विशेषज्ञों के अनुसार बाजार में यह गिरावट मुख्य रूप से वैश्विक अनिश्चितताओं और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण देखने को मिली। हालांकि कच्चे तेल की कीमतों में हालिया नरमी से कुछ राहत के संकेत मिले हैं, लेकिन मध्य पूर्व में तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े घटनाक्रम अभी भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। ब्रेंट क्रूड की कीमतों में गिरावट से आयात बिल और महंगाई पर कुछ सकारात्मक असर की उम्मीद जरूर जताई जा रही है, लेकिन निवेशकों का भरोसा अभी पूरी तरह स्थिर नहीं हुआ है।

    मुद्रा बाजार में रुपये ने डॉलर के मुकाबले हल्की मजबूती दिखाई है, जिससे कुछ हद तक घरेलू बाजार को सहारा मिला है। लेकिन तकनीकी विश्लेषकों का मानना है कि निफ्टी के 23,500 के नीचे फिसलने से निकट भविष्य में बाजार पर दबाव बना रह सकता है और इसमें आगे और गिरावट की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

    कुल मिलाकर, सप्ताह का अंत भारतीय शेयर बाजार के लिए कमजोर रहा और आने वाले सत्रों में वैश्विक संकेत, कच्चे तेल की चाल और भू-राजनीतिक घटनाक्रम बाजार की दिशा तय करेंगे।

  • मार्केट क्रैश: निवेशकों को झटका, Sensex लुढ़का, Nifty में भारी गिरावट से मचा हड़कंप

    मार्केट क्रैश: निवेशकों को झटका, Sensex लुढ़का, Nifty में भारी गिरावट से मचा हड़कंप


    नई दिल्ली । गुरुवार, 23 अप्रैल को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत भारी गिरावट के साथ हुई। हफ्ते के चौथे कारोबारी दिन बाजार खुलते ही निवेशकों को झटका लगा और दोनों प्रमुख इंडेक्स लाल निशान में कारोबार करते दिखे।

    सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में
    30 शेयरों वाला BSE Sensex करीब 532 अंक की गिरावट के साथ 77,983 के आसपास खुला। वहीं NSE Nifty 50 भी 175 अंक से ज्यादा गिरकर 24,202 के स्तर पर ओपन हुआ। दिन की शुरुआत से ही बाजार में बिकवाली का दबाव साफ नजर आया, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई।

    बुधवार को भी रहा था बाजार कमजोर
    इससे पहले बुधवार, 22 अप्रैल को भी बाजार में गिरावट देखी गई थी। सेंसेक्स 756 अंक टूटकर 78,516 पर बंद हुआ था निफ्टी 198 अंक गिरकर 24,378 के स्तर पर बंद हुआ लगातार दूसरे दिन गिरावट से बाजार में कमजोरी का संकेत मिल रहा है। बाजार में कई सेक्टरों में दबाव देखने को मिला आईटी सेक्टर में कमजोरी बैंकिंग शेयरों में गिरावट ऑटो सेक्टर भी दबाव में हालांकि, कुछ सेक्टर जैसे FMCG और मिडकैप शेयरों में हल्की मजबूती देखने को मिली।

    किन शेयरों ने किया निराश?
    गिरावट के बीच कई दिग्गज कंपनियों के शेयर टूटे, जिनमें शामिल हैं HCL Technologies, TCS, ICICI Bank, Mahindra & Mahindra, वहीं कुछ कंपनियों जैसे Reliance Industries और NTPC में हल्की तेजी देखी गई।

    निवेशकों के लिए क्या संकेत?
    लगातार गिरते बाजार से यह संकेत मिल रहा है कि फिलहाल बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। निवेशकों को सोच-समझकर निवेश करने की सलाह दी जा रही है। 23 अप्रैल को शेयर बाजार की शुरुआत कमजोर रही और सेंसेक्स-निफ्टी दोनों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। अब निवेशकों की नजर इस बात पर है कि दिन के आगे के कारोबार में बाजार संभलता है या गिरावट जारी रहती है।

  • जंग का झटका बाजार को! सेंसेक्स 80 हजार से नीचे, ऑटो-कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर धराशायी

    जंग का झटका बाजार को! सेंसेक्स 80 हजार से नीचे, ऑटो-कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर धराशायी


    नई दिल्ली। Israel–Iran युद्ध के बीच वैश्विक अनिश्चितता ने भारतीय शेयर बाजार को झटका दिया है। दोपहर 12:30 बजे तक सेंसेक्स 1,486 अंक यानी 1.83% टूटकर 79,806 पर आ गया, जबकि निफ्टी 453 अंक (1.80%) गिरकर 24,725 पर कारोबार करता दिखा। निवेशकों की घबराहट साफ नजर आई, खासकर उन सेक्टरों में जो कच्चे तेल की कीमतों और उपभोक्ता मांग से सीधे जुड़े हैं।
    ऑटो और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सबसे ज्यादा प्रभावित

    सेक्टोरल इंडेक्स में सबसे ज्यादा गिरावट ऑटो और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में रही। निफ्टी ऑटो और निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स करीब 3-3% टूटे। इसके अलावा निफ्टी इन्फ्रा, रियल्टी, ऑयल एंड गैस और एनर्जी इंडेक्स भी 2% से ज्यादा गिरावट के साथ लाल निशान में रहे।

    लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी बिकवाली तेज रही। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 2.14% और निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 2.03% नीचे कारोबार करता दिखा। यह संकेत है कि गिरावट व्यापक रही, सिर्फ चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं।

    सेंसेक्स पैक में चुनिंदा शेयर संभले, बाकी दबाव में

    सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से अधिकांश में गिरावट रही। बीईएल, सन फार्मा और भारती एयरटेल जैसे कुछ शेयर ही हरे निशान में दिखे। वहीं एलएंडटी, इंडिगो, मारुति सुजुकी, एमएंडएम, एशियन पेंट्स, टाइटन, बजाज फाइनेंस, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और एसबीआई समेत कई दिग्गज शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई। बाजार पूंजीकरण की बात करें तो बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब 9 लाख करोड़ रुपये घटकर 454 लाख करोड़ रुपये पर आ गया।

    कच्चे तेल और डॉलर का दबाव, सोना-चांदी में चमक
    युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है। Brent Crude करीब 9% चढ़कर 79 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया, जबकि WTI Crude भी 8% की तेजी के साथ 72 डॉलर प्रति बैरल पर रहा।

    दूसरी ओर सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने और चांदी में जोरदार तेजी देखी गई। सोना 3% से ज्यादा उछल गया, जबकि चांदी में भी लगभग 2.7% की बढ़त रही। डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी ने भी बाजार पर अतिरिक्त दबाव डाला है।

    आगे क्या?

    विश्लेषकों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतें स्थिर नहीं होतीं, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। फिलहाल निवेशकों की नजर वैश्विक घटनाक्रम और केंद्रीय बैंकों की संभावित प्रतिक्रिया पर टिकी है।