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  • दुनिया के पहले खरबपति बनने के बाद एलन मस्क को बड़ा वित्तीय झटका लगा है।

    दुनिया के पहले खरबपति बनने के बाद एलन मस्क को बड़ा वित्तीय झटका लगा है।

    नई दिल्ली। दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी और तकनीकी उद्यमी एलन मस्क को खरबपति बनने के कुछ ही समय बाद बड़ा झटका लगा है। उनकी अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी कंपनी SpaceX के शेयरों में आई गिरावट के चलते महज 24 घंटे के भीतर उनकी संपत्ति में लगभग 56.4 अरब डॉलर यानी करीब 53,298 करोड़ रुपये की कमी दर्ज की गई। यह रकम भारत के कई बड़े उद्योगपतियों की कुल संपत्ति के बराबर मानी जा रही है।

    हाल ही में SpaceX ने अपने शेयर बाजार सफर के दौरान जबरदस्त प्रदर्शन किया था। कंपनी के शेयर लगातार तीन कारोबारी सत्रों में करीब 50 प्रतिशत तक उछले थे, जिससे कंपनी का बाजार पूंजीकरण रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था। इसी तेजी के दम पर एलन मस्क की कुल संपत्ति भी नए शिखर पर पहुंची और वह दुनिया के पहले खरबपति के रूप में चर्चा में आ गए। लेकिन बाजार में मुनाफावसूली शुरू होते ही तस्वीर बदल गई।

    बुधवार को SpaceX के शेयर कारोबार के दौरान शुरुआती बढ़त के बावजूद दबाव में आ गए और अंततः लगभग 5 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए। शेयरों में इस कमजोरी का सीधा असर कंपनी के मूल्यांकन और एलन मस्क की व्यक्तिगत संपत्ति पर पड़ा। हालांकि गिरावट के बाद भी SpaceX का बाजार मूल्य लगभग 2.5 ट्रिलियन डॉलर के आसपास बना हुआ है, जो इसे दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनियों में शामिल रखता है।

    शेयरों में आई गिरावट के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली की, जिससे बिकवाली का दबाव बढ़ गया। इसके अलावा अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों को लेकर दिए गए संकेतों ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई। फेड ने फिलहाल ब्याज दरों को स्थिर रखा है, लेकिन भविष्य में दरों में बढ़ोतरी की संभावना जताई है। इसके बाद अमेरिकी शेयर बाजारों में व्यापक बिकवाली देखने को मिली।

    इस माहौल का असर टेक्नोलॉजी और हाई-वैल्यूएशन कंपनियों पर सबसे अधिक पड़ा। SpaceX भी इससे अछूती नहीं रही। S&P 500 और Nasdaq जैसे प्रमुख सूचकांकों में भी गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों का रुझान जोखिम वाले शेयरों से हटता दिखाई दिया। यही वजह रही कि SpaceX के शेयरों में तेजी पर अचानक ब्रेक लग गया।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में SpaceX के शेयरों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। कंपनी के सीमित फ्री-फ्लोट के कारण शेयरों में छोटी खरीद-बिक्री भी बड़े मूल्य परिवर्तन का कारण बन रही है। साथ ही भविष्य में लॉक-इन अवधि समाप्त होने के बाद शुरुआती निवेशकों द्वारा शेयर बेचने की संभावना भी बाजार पर दबाव बना सकती है।

    हालांकि इस गिरावट के बावजूद एलन मस्क की कुल संपत्ति अभी भी लगभग 1.26 खरब डॉलर के आसपास बनी हुई है। इस वर्ष उनकी संपत्ति में रिकॉर्ड वृद्धि हुई है और वह अब भी दुनिया के सबसे धनी व्यक्ति बने हुए हैं। निवेशकों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि SpaceX आने वाले दिनों में अपनी तेजी को दोबारा हासिल कर पाती है या नहीं।

  • सेंसेक्स-निफ्टी में जोरदार गिरावट, ज्वेलरी स्टॉक्स में मचा हड़कंप, कई कंपनियों के शेयर टूटे

    सेंसेक्स-निफ्टी में जोरदार गिरावट, ज्वेलरी स्टॉक्स में मचा हड़कंप, कई कंपनियों के शेयर टूटे


    नई दिल्ली । सप्ताह की शुरुआत भारतीय शेयर बाजार के लिए बेहद कमजोर रही, जहां सोमवार को कारोबार की शुरुआत से ही भारी गिरावट का माहौल देखने को मिला। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों इंडेक्स दबाव में रहे और पूरे दिन निवेशकों की चिंता बढ़ती रही। खासकर ज्वेलरी सेक्टर पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ा, जहां कई प्रमुख कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई।

    बाजार खुलते ही टाइटन के शेयर में गिरावट देखने को मिली और कुछ ही समय में इसमें लगभग 7 प्रतिशत तक की कमी आ गई। इसी तरह ज्वेलरी सेक्टर की अन्य कंपनियां भी दबाव में रहीं और निवेशकों ने तेजी से बिकवाली शुरू कर दी। कल्याण ज्वेलर्स और सेनको गोल्ड जैसे स्टॉक्स में भी 8 से 10 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई, जिससे पूरे सेक्टर में हड़कंप मच गया।

    इस गिरावट का असर केवल एक सेक्टर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे बाजार पर इसका दबाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में ही सेंसेक्स में तेज गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी भी बड़े नुकसान के साथ ट्रेड करता नजर आया। बाजार में इस अचानक कमजोरी ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया और कई ट्रेडर्स सतर्क हो गए।

    वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने भी बाजार की स्थिति को कमजोर किया। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता बढ़ने के कारण निवेशकों में जोखिम लेने की क्षमता कम हुई, जिसका सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर देखने को मिला। तेल की कीमतों में तेजी ने महंगाई को लेकर चिंता और बढ़ा दी है, जिससे इक्विटी बाजार पर दबाव बना हुआ है।

    ज्वेलरी सेक्टर में आई इस बड़ी गिरावट का एक कारण निवेशकों की भावनात्मक प्रतिक्रिया भी माना जा रहा है। सोने की मांग और वैश्विक परिस्थितियों से जुड़े संकेतों ने इस सेक्टर को सीधे प्रभावित किया, जिससे अचानक भारी बिकवाली देखने को मिली।

    कुल मिलाकर, आज का दिन शेयर बाजार के लिए बेहद कमजोर साबित हुआ, जहां ज्वेलरी स्टॉक्स सबसे ज्यादा प्रभावित रहे। निवेशकों के लिए यह समय सतर्कता का है, क्योंकि वैश्विक संकेत और घरेलू बाजार की स्थिति मिलकर आने वाले दिनों में भी उतार-चढ़ाव बनाए रख सकते हैं।

  • वैश्विक तनाव की मार से डगमगाया बाजार: सेंसेक्स 516 अंक टूटा, निवेशकों की संपत्ति पर बड़ा असर

    वैश्विक तनाव की मार से डगमगाया बाजार: सेंसेक्स 516 अंक टूटा, निवेशकों की संपत्ति पर बड़ा असर

    नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव का असर अब सीधे भारतीय शेयर बाजार पर साफ नजर आने लगा है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती राजनीतिक और रणनीतिक तनातनी ने वैश्विक निवेश माहौल को अस्थिर कर दिया, जिसका सीधा प्रभाव घरेलू बाजार पर पड़ा। सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन बाजार ने कमजोरी के साथ समापन किया और पूरे दिन बिकवाली का दबाव बना रहा।

    कारोबार की शुरुआत से ही बाजार में अनिश्चितता का माहौल देखने को मिला। निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया और जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ा, बिकवाली का दबाव बढ़ता गया। प्रमुख सूचकांक लगातार नीचे खिसकते रहे और अंत में बड़ी गिरावट के साथ बंद हुए। बाजार में यह लगातार दूसरा दिन रहा जब कमजोरी का रुख बना रहा, जिससे निवेशकों की चिंता और बढ़ गई।

    सेंसेक्स पूरे दिन उतार-चढ़ाव के बीच रहा, लेकिन अंततः यह महत्वपूर्ण अंकों की गिरावट के साथ बंद हुआ। निफ्टी ने भी समान रुझान दिखाते हुए कमजोरी दर्ज की। शुरुआती कारोबार में थोड़ी स्थिरता जरूर दिखी, लेकिन वैश्विक संकेतों के दबाव ने बाजार की दिशा को पूरी तरह बदल दिया।

    हालांकि पूरे बाजार में गिरावट का माहौल रहा, लेकिन कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में हल्की खरीदारी भी देखने को मिली। सूचना प्रौद्योगिकी और कुछ उपभोक्ता आधारित सेक्टरों में मामूली तेजी रही, जिसने बाजार को पूरी तरह टूटने से बचाया। इसके विपरीत बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं, धातु, तेल और गैस जैसे क्षेत्रों में भारी दबाव देखा गया, जिसने कुल मिलाकर बाजार को नीचे खींच दिया।

    कई बड़ी कंपनियों के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, खासकर बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों में दबाव ज्यादा रहा। वहीं कुछ उपभोक्ता और तकनीकी कंपनियों में हल्की बढ़त देखने को मिली, लेकिन यह पूरे बाजार के नुकसान की भरपाई के लिए पर्याप्त नहीं थी।

    दिन के अंत में निवेशकों की संपत्ति में भी भारी गिरावट दर्ज की गई। बाजार पूंजीकरण में कमी आने से एक ही सत्र में निवेशकों को बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ। यह स्थिति इस बात का संकेत देती है कि वैश्विक घटनाएं अब भारतीय बाजार को तेजी से प्रभावित कर रही हैं और निवेशक भावनाएं अंतरराष्ट्रीय समाचारों से सीधे जुड़ गई हैं।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय तनाव और भू-राजनीतिक स्थिति में सुधार नहीं होता, तब तक बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। ऐसे माहौल में निवेशकों को सावधानी के साथ आगे बढ़ने की सलाह दी जा रही है।

    फिलहाल बाजार की नजरें वैश्विक घटनाक्रम और आर्थिक संकेतों पर टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि बाजार स्थिरता की ओर लौटता है या उतार-चढ़ाव का दौर अभी और लंबा चलता है।

  • शेयर मार्केट टुडे: हफ्ते के चौथे दिन बाजार में गिरावट, सेंसेक्स-निफ्टी लाल निशान में

    शेयर मार्केट टुडे: हफ्ते के चौथे दिन बाजार में गिरावट, सेंसेक्स-निफ्टी लाल निशान में


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार, 9 अप्रैल को गिरावट देखने को मिली। हफ्ते के चौथे कारोबारी दिन बाजार की शुरुआत कमजोर रही और शुरुआती कारोबार में ही बिकवाली का दबाव नजर आया। प्रमुख सूचकांक BSE Sensex और Nifty 50 दोनों लाल निशान में कारोबार करते दिखे।

    कमजोर शुरुआत, शुरुआती कारोबार में गिरावट तेज
    सेंसेक्स 243 अंक की गिरावट के साथ 77,319 के स्तर पर खुला, जबकि निफ्टी 50 भी 88 अंकों की कमजोरी के साथ 23,909 पर ओपन हुआ। सुबह करीब 9:20 बजे तक गिरावट और बढ़ गई, जहां सेंसेक्स करीब 300 अंक टूटकर 77,261 पर आ गया, वहीं निफ्टी 113 अंक गिरकर 23,883 के स्तर पर ट्रेड करता नजर आया।

    गेनर्स और लूजर्स में दिखा मिला-जुला रुख
    गिरते बाजार के बीच कुछ शेयरों में मजबूती भी देखने को मिली। टॉप गेनर्स में NTPC, Tata Steel, Power Grid Corporation of India, ITC Limited और Bharti Airtel शामिल रहे। वहीं टॉप लूजर्स में Sun Pharmaceutical Industries, IndiGo, Adani Ports और Larsen & Toubro जैसे शेयर दबाव में रहे।

    एक दिन पहले बाजार में आई थी जोरदार तेजी
    इससे पहले 8 अप्रैल को बाजार में जबरदस्त उछाल देखने को मिला था। सेंसेक्स करीब 2946 अंक चढ़कर 77,562 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 873 अंक की तेजी के साथ 23,997 पर पहुंच गया था। उस दिन ज्यादातर सेक्टर्स में खरीदारी देखी गई थी।

    गिरावट की वजह क्या है?
    विशेषज्ञों के मुताबिक, बाजार में आई इस गिरावट के पीछे कई कारण हो सकते हैं पिछले दिन की तेज बढ़त के बाद मुनाफावसूली ग्लोबल मार्केट में उतार-चढ़ाव निवेशकों का सतर्क रुख निवेशकों के लिए क्या संकेत? बाजार में हल्की गिरावट को सामान्य करेक्शन माना जा रहा है। जानकारों का कहना है कि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए ऐसे मौके निवेश के लिहाज से फायदेमंद साबित हो सकते हैं। 9 अप्रैल को शेयर बाजार में आई गिरावट ने यह संकेत दिया है कि तेज रैली के बाद बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है और निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है।

  • शेयर बाजार में हाहाकार: सेंसेक्स 1700 अंक लुढ़का, निवेशकों के 9 लाख करोड़ डूबे

    शेयर बाजार में हाहाकार: सेंसेक्स 1700 अंक लुढ़का, निवेशकों के 9 लाख करोड़ डूबे


    नई दिल्ली। दो दिनों की तेजी के बाद शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई। लार्जकैप, मिडकैप और स्मॉलकैप सभी सेगमेंट में भारी बिकवाली देखने को मिली। बीएसई सेंसेक्स 1690 अंक यानी 2.25% गिरकर 73,583 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 486 अंक या 2.09% टूटकर 22,819 पर आ गया। वहीं, निफ्टी बैंक 1433 अंक गिरकर 52,274 पर क्लोज हुआ।

    इस गिरावट की बड़ी वजह ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव माना जा रहा है। हालांकि डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के तेल ठिकानों पर 10 दिनों तक हमला न करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने की समयसीमा 6 अप्रैल तक बढ़ाने की घोषणा की है, फिर भी बाजार में नकारात्मक असर बना हुआ है।

    टॉप शेयरों में बड़ी गिरावट

    बीएसई के टॉप 30 शेयरों में एयरटेल, टीसीएस और पावरग्रिड को छोड़कर बाकी 27 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। सबसे ज्यादा दबाव रिलायंस इंडस्ट्रीज पर रहा, जिसके शेयर 4.60% गिरकर 1347 रुपये पर आ गए। इसके अलावा इंडिगो, बजाज फाइनेंस और एसबीआई में करीब 4% की गिरावट देखने को मिली, जबकि अन्य कई शेयर 2% से अधिक टूटे।

    निवेशकों को भारी नुकसान

    बुधवार को बीएसई का मार्केट कैप 431 लाख करोड़ रुपये था, जो अब घटकर 422 लाख करोड़ रुपये रह गया है। इस तरह निवेशकों को करीब 9 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।

    गिरावट के प्रमुख कारण

    मुनाफावसूली का दबाव: पिछले दो सत्रों में करीब 3.5% की तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी। आईटी सेक्टर को छोड़कर लगभग सभी सेक्टरों में गिरावट रही। स्मॉल और मिडकैप शेयरों में करीब 1.7% की गिरावट आई। बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व, एसबीआई, एक्सिस बैंक और एचडीएफसी लाइफ के शेयर 1-3% तक गिरे, जबकि रिलायंस इंडस्ट्रीज ने सबसे ज्यादा दबाव बनाया।

    जियो-पॉलिटिकल तनाव: ईरान और अमेरिका के बीच स्थिति सामान्य नहीं हो पा रही है। ट्रंप के बयान के बावजूद बाजार इस अनिश्चितता को नकारात्मक रूप में ले रहा है, जिसका असर वैश्विक बाजारों पर भी दिखा। कच्चे तेल की कीमतें: शुक्रवार को कच्चा तेल 109 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जिससे भारतीय बाजार पर दबाव और बढ़ गया।

    रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर: भारतीय रुपया 94 प्रति डॉलर के पार चला गया, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है। मिडिल ईस्ट में संभावित ऊर्जा संकट को लेकर चिंता ने आयात-आधारित अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ा दिया है।VIX में उछाल: बाजार की अस्थिरता को दर्शाने वाला इंडिया VIX करीब 9% बढ़कर 28 पर पहुंच गया, जो निकट भविष्य में और गिरावट की आशंका को दर्शाता है।

  • SRU Steels सहित टॉप 5 पेनी स्टॉक्स ने निवेशकों को लगाया झटका..

    SRU Steels सहित टॉप 5 पेनी स्टॉक्स ने निवेशकों को लगाया झटका..


    नई दिल्ली:पिछले दो हफ्तों में शेयर बाजार ने निवेशकों के लिए चुनौतीपूर्ण माहौल पेश किया। इस दौरान खासकर कम कीमत वाले पेनी स्टॉक्स में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। 15 ऐसे पेनी स्टॉक्स रहे जिनमें 15% से लेकर 55% तक की गिरावट दर्ज की गई। इनमें सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाले टॉप 5 स्टॉक्स की पहचान की गई है, जो निवेशकों के लिए चेतावनी के रूप में काम कर सकते हैं।

    इन स्टॉक्स का चयन एक विशेष स्क्रीनिंग के आधार पर किया गया। इसका उद्देश्य ऐसे कम कीमत वाले और सक्रिय रूप से ट्रेड होने वाले शेयर ढूंढना था, जिन पर हाल ही में दबाव दिखा। इस स्क्रीन में मार्केट कैप 1,000 करोड़ रुपये से कम, शेयर की कीमत 20 रुपये से कम और न्यूनतम ट्रेडिंग वॉल्यूम 5 लाख शेयर जैसी शर्तें शामिल थीं।

    सूची में सबसे ऊपर एसआरयू स्टील्स (SRU Steels) है। कंपनी ने पिछले दो हफ्तों में 56% की भारी गिरावट दर्ज की। इसका पिछला क्लोजिंग प्राइस 1.47 रुपये था और मार्केट कैप मात्र 8.81 करोड़ रुपये। 1995 में स्थापित यह कंपनी मुख्य रूप से स्टेनलेस स्टील की ट्रेडिंग के बिजनेस में सक्रिय है।

    दूसरे नंबर पर सुफा फार्माकेम (Supha Pharmachem / Remedium Lifecare) है, जिसने 34% की गिरावट दिखाई। इसका पिछला क्लोजिंग प्राइस 0.45 रुपये रहा। 1988 में स्थापित यह कंपनी एडवांस्ड फार्मास्युटिकल इंटरमीडिएट्स और अन्य फार्मा उत्पादों की ट्रेडिंग करती है।

    तीसरे स्थान पर पारले इंडस्ट्रीज (Parle Industries) है, जिसने 33% का नुकसान झेला। इसका क्लोजिंग प्राइस 4.96 रुपये था। 1983 में स्थापित यह कंपनी इंफ्रास्ट्रक्चर और रियल एस्टेट डेवलपमेंट के क्षेत्र में काम करती है।

    चौथे नंबर पर है ए-1 एसिड लिमिटेड (A-1 Acid), जिसने 28% की गिरावट दर्ज की। पिछला क्लोजिंग प्राइस 18.16 रुपये था और मार्केट कैप 835 करोड़ रुपये। 2004 में स्थापित यह कंपनी एसिड और केमिकल्स की होलसेल ट्रेडिंग के साथ-साथ ट्रांसपोर्टेशन बिजनेस में भी सक्रिय है।

    पांचवें नंबर पर है नवकार अर्बनस्ट्रक्चर (Navkar Urbanstructure), जिसने 27% की गिरावट दर्ज की। इसका क्लोजिंग प्राइस 0.95 रुपये और मार्केट कैप 107 करोड़ रुपये रहा। 1992 में स्थापित यह कंपनी RCC और RMC पाइप्स सहित इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के निर्माण और विकास में सक्रिय है।

    पेनी स्टॉक्स निवेशकों को आकर्षित करते हैं क्योंकि इनकी कीमत कम होती है और इनमें जल्दी मुनाफा कमाने की संभावना रहती है। लेकिन इनके साथ जुड़े जोखिम भी कम नहीं हैं। कम लिक्विडिटी और अधिक अस्थिरता के कारण इन स्टॉक्स को बेचना मुश्किल हो सकता है। इसके अलावा इन कंपनियों के बारे में जानकारी सीमित होती है, जिससे कीमतों में हेरफेर और अचानक क्रैश का खतरा रहता है। बिना स्पष्ट रणनीति और जोखिम प्रबंधन के निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

    इसलिए, अगर आप भी पेनी स्टॉक्स में निवेश करते हैं, तो बाजार की हालिया गतिविधियों पर नज़र रखना और समझदारी से निर्णय लेना बेहद जरूरी है।

  • निवेशकों के चार दिन में 13 लाख करोड़ रुपये डूबे, ईरान-इजरायल युद्ध के बीच शेयर बाजार में कोहराम

    निवेशकों के चार दिन में 13 लाख करोड़ रुपये डूबे, ईरान-इजरायल युद्ध के बीच शेयर बाजार में कोहराम


    नई दिल्ली। ईरान-इजरायल युद्ध के लगातार खिंचने के असर से भारतीय शेयर बाजार में पिछले चार कारोबारी सत्रों में भारी गिरावट आई है। निवेशकों की कुल संपत्ति इस दौरान 13 लाख करोड़ रुपये से अधिक घट गई है। कारोबारी हफ्ते के आखिरी दिन शुक्रवार को भी सेंसेक्स और निफ्टी में 1 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी 315.45 अंक गिरकर 24,450.45 पर बंद हुआ जबकि सेंसेक्स करीब 1100 अंक टूटकर 79,000 के नीचे बंद हुआ। शुक्रवार को ही लगभग 3 लाख करोड़ का मार्केट कैप स्वाहा हो गया।

    बैंकिंग और बड़े शेयरों पर दबाव

    सबसे अधिक दबाव ICICI बैंक के शेयर पर रहा जो 3.39 प्रतिशत गिरा। इसके अलावा एक्सिस बैंक अल्ट्राटेक सीमेंट HDFC बैंक और SBI के शेयरों में भी 2 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली। बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप 27 फरवरी को 463.25 लाख करोड़ रुपये था जो अब घटकर 449.79 लाख करोड़ रुपये रह गया है।

    विशेषज्ञों के मुताबिक पिछले कुछ दिनों में विदेशी संस्थागत निवेशकों FII ने भारतीय बाजार में भारी बिकवाली की है। वैश्विक अनिश्चितता के कारण विदेशी निवेशक अक्सर सुरक्षित बाजारों की ओर रुख करते हैं जिससे उभरते बाजारों जैसे भारत में दबाव बढ़ जाता है। इसके अलावा कच्चे तेल की बढ़ती कीमत और रुपये की कमजोरी ने भी बाजार की गिरावट को तेज किया। शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत 86 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई।

    लार्ज-कैप और 52-वीक लो पर शेयर

    चार दिन की बिकवाली में सबसे अधिक दबाव बड़े शेयरों यानी लार्ज-कैप स्टॉक्स पर पड़ा जिससे सेंसेक्स में ज्यादा गिरावट आई। बीएसई 500 इंडेक्स के कई शेयर अपने 52-हफ्ते के निचले स्तर पर आ गए। इनमें ACC अंबुजा सीमेंट एल्काइल एमिन्स केमिकल्स साइएंट बर्जर पेंट्स इंडिया कोहांस लाइफसाइंसेज इंद्रप्रस्थ गैस एडब्ल्यूएल एग्री बिजनेस बिरला कॉर्पोरेशन जेके लक्ष्मी सीमेंट जुबिलेंट फार्मावा प्रॉक्टर एंड गैंबल हाइजीन एंड हेल्थ केयर और सोनाटा सॉफ्टवेयर शामिल हैं।

    विशेषज्ञों की राय और भविष्य का अनुमान

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट करीब 2–3 प्रतिशत के करेक्शन के रूप में देखी जा सकती है। हालांकि ईरान-इजरायल युद्ध के कारण निवेशकों का भरोसा फिलहाल कमजोर पड़ा है और बाजार पहले ही लगभग 8 प्रतिशत टूट चुका है।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह स्थिति अवसर भी पैदा कर सकती है। यदि वैश्विक हालात स्थिर होते हैं और विदेशी निवेशकों की बिकवाली कम होती है तो बाजार में फिर से तेजी लौट सकती है। आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमतों पश्चिम एशिया की स्थिति विदेशी निवेशकों के रुख और वैश्विक बाजारों के प्रदर्शन पर रहेगी।

  • बाजार की गिरावट में छिपा है कमाई का मौका? एक्सपर्ट्स ने बताया क्यों नहीं घबराना चाहिए और क्या हो अगली रणनीति

    बाजार की गिरावट में छिपा है कमाई का मौका? एक्सपर्ट्स ने बताया क्यों नहीं घबराना चाहिए और क्या हो अगली रणनीति


    नई दिल्ली :भारतीय शेयर बाजार के लिए पिछला कुछ समय काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है, जिसका सीधा असर घरेलू बाजार पर भी देखने को मिला। पिछले मात्र दो सत्रों में सेंसेक्स और निफ्टी में 2.5 प्रतिशत से अधिक की भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों की करीब 11 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति पलक झपकते ही साफ हो गई। सोमवार को सेंसेक्स जहाँ 1,000 अंकों से ज्यादा टूटा, वहीं निफ्टी में भी 300 अंकों की बड़ी गिरावट आई। बाजार में घबराहट का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ‘इंडिया विक्स’ (India VIX) इंडेक्स 25 फीसदी से ज्यादा उछलकर 17.13 पर पहुंच गया, जो निकट भविष्य में तेज उतार-चढ़ाव का स्पष्ट संकेत है।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि शॉर्ट टर्म में गिरावट की आशंका बनी हुई है, लेकिन भारत की बुनियादी स्थिति यानी ‘मैक्रो स्टोरी’ अभी भी बहुत मजबूत है। आनंद राठी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर की तन्वी कंचन और पीएल कैपिटल के विक्रम कसाट जैसे जानकारों का कहना है कि जनवरी में 1.71 लाख करोड़ रुपये का शानदार जीएसटी कलेक्शन और सरकारी बैंकों के मजबूत तिमाही नतीजे इस बात के सबूत हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था सही दिशा में है। श्रीराम वेल्थ के नवल कगलवाला के अनुसार, पश्चिम एशिया का संकट भारत के लिए एक अवसर भी बन सकता है। जब वैश्विक बाजार असुरक्षित महसूस करते हैं, तो भारत जैसे मजबूत घरेलू मांग वाले देश ‘सेफ हेवन’ बनकर उभरते हैं। पिछले शुक्रवार के आंकड़े बताते हैं कि जहाँ विदेशी निवेशकों ने बिकवाली की, वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 12,293 करोड़ रुपये की बड़ी खरीदारी करके बाजार को सहारा देने की कोशिश की।

    मौजूदा हालातों में एक्सपर्ट्स निवेशकों को संयम और अनुशासन बरतने की सलाह दे रहे हैं। विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि यह घबराहट में आकर अपनी होल्डिंग्स बेचने का समय नहीं है। निवेशकों को सलाह दी गई है कि वे अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करें, कर्ज लेकर निवेश (लेवरेज पोजीशन) करने से बचें और अपने रिस्क मैनेजमेंट पर ध्यान केंद्रित करें। एसआईपी SIP के माध्यम से निवेश करने वालों के लिए यह संदेश है कि वे अपना निवेश जारी रखें, क्योंकि ऐतिहासिक रूप से ऐसी ही गिरावटें लंबी अवधि में संपत्ति निर्माण Wealth Creation का आधार बनती हैं। रेलिगेयर ब्रोकिंग के अजित मिश्रा ने भी निवेशकों को सावधानी बरतने और फिलहाल अपनी पोजीशन को हल्का रखने की सलाह दी है।