Tag: stock market fall India

  • शेयर बाजार पर दबाव बरकरार: विदेशी निवेशकों की बिकवाली से लगातार पांचवीं साप्ताहिक गिरावट

    शेयर बाजार पर दबाव बरकरार: विदेशी निवेशकों की बिकवाली से लगातार पांचवीं साप्ताहिक गिरावट


    नई दिल्ली भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का नाम थमाने का नाम नहीं ले रहा है। लगातार वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की बहुलता और विदेशी उपभोक्ताओं की लगातार बिकवाली रही। सप्ताह के आखिरी प्रमुख दिन निफ्टी 50 2.09% बढ़त के साथ 22,819.60 पर बंद हुआ, जबकि पूरे सप्ताह में इसमें 0.52% की बढ़ोतरी हुई। हालांकि पिछले एक महीने में शेयरधारकों को करीब 8.23% का नुकसान हुआ है, लेकिन जिन निवेशकों की चिंता काफी बढ़ गई है।

    गोदाम और बैंक में भी भारी दबाव

    वहीं बीएसई सेंसेक्स में भी गिरावट साफ नजर आई और यह शुक्रवार को 1,690 अंक 2.25% 73,583.22 पर बंद हुआ। पूरे हफ्ते में करीब 1.94% की गिरावट दर्ज की गई, जबकि एक महीने में यह 8.29% तक टूट गई। नेटवर्क सेक्टर की बात करें तो निफ्टी बैंक सबसे ज्यादा दबाव में रहा और शुक्रवार को 2.67% 52,274 के करीब बंद हुआ। पूरे सप्ताह में इसमें 2.16% की गिरावट दर्ज की गई।

    वैश्विक तनाव और सरकारी कच्चे तेल का असर

    बाजार पर सबसे बड़ा असर संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का है, जिससे निवेशकों में अनिश्चितता बनी हुई है। इसके साथ ही ब्रेंट क्रूड की पार्टनरशिप 98 से 115 डॉलर प्रति शेयर के बीच बनी हुई है, जिसने स्थिरता और आर्थिक स्थिरता को लेकर चिंता और बढ़ा दी है। कच्चे कच्चे तेल का सीधा असर भारत जैसे मजबूत देश पर पड़ता है, जिससे आरएमबी भी दबाव में आ गई।

    सेक्टर में मिलाजुला रुख, मेटल और पीएसयू बैंक सबसे खराब

    सेक्टोरल परफॉर्मेंस की बात तो मेट्रिक मेटल और पीएससीयू बैंक में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली। वहीं आईटी और फार्मास्युटिकल सेक्टर में छोटी-छोटी जगहें दिखाई दीं, जहां आईटी में 1.17% और फार्मास्युटिकल में 0.11% की बढ़त दर्ज की गई। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर भी प्रेशर में रहे—निफ्टी मिडकैप100 में 1.38% और स्मॉलकैप100 में 0.63% की गिरावट दर्ज की गई।

    FII की बिकवाली, DII का सहारा

    बाजार में गिरावट की एक बड़ी वजह विदेशी निवेशकों (FII) की भारी बिकवाली रही। सप्ताह भर में करीब 25,000 से 30,000 करोड़ रुपये की बिक्री बढ़ी, जबकि मार्च में यह आंकड़ा 1.13 लाख रुपये करोड़ से ज्यादा तक पहुंच गया। वहीं घरेलू उद्यमों (डीआईआई) ने 25,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया, जिससे बाजार को कुछ हद तक सहारा मिला।

    क्या? अहम किरदार पर टिकी नजर

    निफ्टी 50 22,850-22,750 के अहम सपोर्ट जोन पर टिकने की कोशिश कर रहा है। ऊपर की तरफ 23,000-23,100 का स्तर मजबूत रेजिस्टेंस माना जा रहा है। वहीं निफ्टी बैंक के लिए 52,000-51,800 का सपोर्ट जोन है, जबकि 53,000-53,600 के लेवल पर सपोर्ट मिल सकता है।


    प्रकाशन- जारी रहने के संकेत

    विशेषज्ञ का मानना ​​है कि जब तक वैश्विक तनाव और कच्चे तेल के कारखाने में स्थिरता नहीं आती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। हालाँकि घरेलू निवेश और बाज़ारों में सुधार से बाज़ार को आगे सहारा मिल सकता है।

  • मिडिल ईस्ट तनाव से बाजार में हाहाकार! सेंसेक्स 1836 अंक टूटा, निवेशकों के डूबे लाखों करोड़

    मिडिल ईस्ट तनाव से बाजार में हाहाकार! सेंसेक्स 1836 अंक टूटा, निवेशकों के डूबे लाखों करोड़


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू राजनीतिक तनाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर साफ नजर आया। हफ्ते के पहले कारोबारी दिन बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली और प्रमुख सूचकांक BSE Sensex और Nifty 50 2 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट के साथ बंद हुए। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 1836.57 अंक यानी 2.46 प्रतिशत टूटकर 72696.39 पर आ गया, जबकि निफ्टी 601.85 अंक यानी 2.60 प्रतिशत गिरकर 22512.65 पर बंद हुआ। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव और युद्ध जैसे हालात ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है, जिसका सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ा है।

    निवेशकों को भारी नुकसान, 13.65 लाख करोड़ डूबे

    इस बड़ी गिरावट से निवेशकों की संपत्ति में भारी कमी आई है। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब 14 लाख करोड़ रुपए घट गया और यह 428.76 लाख करोड़ रुपए से गिरकर 415.11 लाख करोड़ रुपए रह गया। इंट्रा डे में बाजार और भी ज्यादा दबाव में दिखा, जहां सेंसेक्स एक समय करीब 1974 अंक तक लुढ़क गया था। वहीं, निफ्टी भी 643 अंकों तक गिर गया था। बाजार में घबराहट का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि India VIX में 19 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी आई, जो निवेशकों के बीच बढ़ती चिंता को दर्शाता है।

    मिडकैप और स्मॉलकैप में ज्यादा मार, सभी सेक्टर दबाव में

    बाजार में गिरावट सिर्फ बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में और ज्यादा कमजोरी देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स करीब 3.90 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स 3.94 प्रतिशत गिरा। सेक्टरवार देखें तो कंस्ट्रक्शन, रियल्टी और मेटल सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। बैंकिंग, ऑटो और एफएमसीजी सेक्टर में भी भारी गिरावट दर्ज की गई, जबकि आईटी सेक्टर में अपेक्षाकृत कम कमजोरी देखने को मिली। यह संकेत देता है कि बाजार में व्यापक स्तर पर बिकवाली हुई है और निवेशकों ने जोखिम भरे एसेट्स से दूरी बनानी शुरू कर दी है।

    तेल कीमतें और होर्मुज संकट बने बड़ी वजह

    विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार में इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल है। Strait of Hormuz में संभावित बाधा से सप्लाई प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का लगभग 80 प्रतिशत आयात करता है, ऐसे में तेल की कीमतों में तेजी से देश की अर्थव्यवस्था और कंपनियों की कमाई पर दबाव बढ़ सकता है। इसके अलावा अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते बयानबाजी और संभावित सैन्य कार्रवाई के संकेतों ने बाजार का माहौल और नकारात्मक कर दिया है।

    आगे का रुख अनिश्चित, निवेशकों में बढ़ी चिंता

    मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं होता, तब तक बाजार में स्थिरता लौटना मुश्किल है। वैश्विक बाजारों के साथ तालमेल के चलते भारत भी इस दबाव से बच नहीं पा रहा है। फिलहाल बाजार का रुख कमजोर बना हुआ है और निवेशकों के लिए सतर्क रहने की जरूरत है। अगर हालात और बिगड़ते हैं, तो बाजार में और गिरावट देखने को मिल सकती है।

  • क्यों धड़ाम हुआ बाजार? सेंसेक्स की भारी गिरावट के पीछे की असली वजहें

    क्यों धड़ाम हुआ बाजार? सेंसेक्स की भारी गिरावट के पीछे की असली वजहें


    नई दिल्ली।  सप्ताह की शुरुआत भारतीय शेयर बाजार के लिए बेहद खराब रही। सोमवार के महीने के सत्र में बीएसई सेंसेक्स करीब 1,772 अंक यानी 2.32% 72,803 पर पहुंच गया। वहीं निफ्टी 50 भी 565 अंक (2.44%) पर कारोबार कर 22,549 पर पहुंचा।

    मिडकैप और स्मॉलकैप में भी बड़ी गिरावट
    सिर्फ बड़े शेयर ही नहीं, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप स्टॉक में भी जबरदस्त बिकवाली देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप 100 3.78% टूटकर 52,789 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 4.12% टूटकर 15,070 पर पहुंच गया। कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और मेटल सेक्टर में सबसे ज्यादा नुकसान हो रहा है, जिससे बाजार में चौतरफा मंदी बनी हुई है।

    मध्य पूर्व तनाव बना सबसे बड़ा कारण
    इस भारी गिरावट की सबसे बड़ी वजह मध्य पूर्व में भारी तनाव है। डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा ईरान को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज झील के लिए 48 घंटे की अंतिम घोषणा और जवाबी कार्रवाई की चेतावनी में गिरावट और नीचे दिए गए। इसके जवाब में ईरान ने क्षेत्रीय हमलों और होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने की धमकी दी है। यह संघर्ष अब चौथे सप्ताह में पहुंच चुका है, जिससे अल्पावधि में डर और अनिश्चितता बढ़ गई है।

    वैश्विक उपकरण से मिले ख़राब संकेत
    अंतर्राष्ट्रीय बाजार में गिरावट ने भी भारतीय बाजार पर दबाव बनाया। टोक्यो, सोल, हांगकांग, शंघाई और बैंकॉक जैसे प्रमुख एशियाई देशों में 2% से 6.5% तक की गिरावट दर्ज की गई, जिससे घरेलू उद्यमियों का भरोसा टूट गया।

    कच्चे तेल की इकाइयों ने चिंता व्यक्त की
    तेल बाजार में तेजी से भी गिरावट की अहम वजह बनी। ब्रेंट क्रूड 113 डॉलर प्रति डॉलर और डब्ल्यूटीआई क्रूड 100 डॉलर प्रति डॉलर के आसपास पहुंच गया। तेल के रासायनिक यौगिक भारत जैसे तेल उत्पादक देशों के लिए औद्योगिक और आर्थिक दबाव बढ़ाते हैं, जिससे बाजार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

    एफआईआई की बिकवाली से बढ़ा दबाव
    विदेशी बिजनेसमैन की बिकवाली ने भी बाजार को झटका दिया। पिछले मत्स्य सत्र में एफओवाई ने 5,518 करोड़ रुपये का निवेश किया था, जबकि डीईओआई ने 5,706 करोड़ रुपये का निवेश किया था। इसके बावजूद बाजार में गिरावट को रोकना मुश्किल साबित हुआ।

    विपक्ष में सोनम कपूर
    इन सभी सामानों के सामान बाजार में डर और शांति का मोहरा बना हुआ है। पर्यटक पर्यटक आकर्षण अपनाते नजर आ रहे हैं और आगे की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

  • मिडिल ईस्ट तनाव का भारतीय बाजार पर असर, BSE Sensex में एक फीसदी से ज्यादा गिरावट

    मिडिल ईस्ट तनाव का भारतीय बाजार पर असर, BSE Sensex में एक फीसदी से ज्यादा गिरावट


    नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष का असर गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। कारोबारी सत्र की शुरुआत में ही बाजार दबाव में नजर आया और प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ खुले। सुबह करीब 9:19 बजे BSE Sensex 963 अंक यानी लगभग 1.25 प्रतिशत गिरकर 75,899 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं Nifty 50 303 अंक यानी करीब 1.27 प्रतिशत फिसलकर 23,563 के स्तर पर पहुंच गया। वैश्विक अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के कारण निवेशकों में सतर्कता का माहौल देखने को मिला।

    कई सेक्टरों में दिखा भारी दबाव
    शुरुआती कारोबार में बाजार के लगभग सभी सेक्टरों में गिरावट देखी गई। ऑटो, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, मीडिया, रियल्टी, मेटल, पीएसयू बैंक, डिफेंस और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के शेयरों पर सबसे अधिक दबाव रहा। निवेशकों ने जोखिम से बचने की रणनीति अपनाते हुए कई सेक्टरों में मुनाफावसूली की। इस वजह से बाजार का मूड नकारात्मक बना रहा और प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बने रहे।

    मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर भी दबाव में
    केवल लार्जकैप ही नहीं बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी गिरावट का असर देखा गया। Nifty Midcap 100 इंडेक्स करीब 1,070 अंक यानी 1.90 प्रतिशत की गिरावट के साथ 55,390 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं Nifty Smallcap 100 इंडेक्स लगभग 286 अंक यानी 1.75 प्रतिशत गिरकर 16,127 पर पहुंच गया। इससे साफ है कि बाजार में बिकवाली का दबाव व्यापक स्तर पर देखने को मिला।

    सेंसेक्स के कई बड़े शेयरों में गिरावट
    सेंसेक्स पैक के कई बड़े शेयर शुरुआती कारोबार में नुकसान में दिखाई दिए। इनमें प्रमुख रूप से Mahindra & Mahindra, Tata Steel, ICICI Bank, Titan Company, Larsen & Toubro, Maruti Suzuki, Bajaj Finance, State Bank of India, Axis Bank, Infosys और HDFC Bank जैसे शेयर शामिल रहे। दूसरी ओर आईटी सेक्टर के कुछ शेयरों में मजबूती देखने को मिली, जहां Tech Mahindra और HCLTech हल्की बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए।

    एशियाई और अमेरिकी बाजारों से भी मिला कमजोर संकेत
    वैश्विक बाजारों से भी कमजोर संकेत मिले हैं। एशिया के कई प्रमुख शेयर बाजार जैसे Nikkei 225, Shanghai Composite, Hang Seng Index और KOSPI भी गिरावट के साथ खुले। वहीं अमेरिका में भी पिछला कारोबारी सत्र कमजोर रहा, जहां Dow Jones Industrial Average लाल निशान में बंद हुआ था। इन वैश्विक संकेतों का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा।

    कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल
    बाजार में गिरावट की एक बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी भी है। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। खबर लिखे जाने तक Brent Crude लगभग 9.31 प्रतिशत की तेजी के साथ 100.54 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया था, जबकि WTI Crude भी करीब 9 प्रतिशत की बढ़त के साथ 95.14 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा था।

    एफआईआई की बिकवाली से बढ़ा दबाव
    बाजार पर विदेशी निवेशकों की बिकवाली का दबाव भी बना हुआ है। बुधवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से करीब 6,267.31 करोड़ रुपये की निकासी की। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने बाजार को कुछ सहारा देते हुए लगभग 4,965.53 करोड़ रुपये का निवेश किया। इसके बावजूद वैश्विक अनिश्चितता के माहौल में निवेशकों की सतर्कता के कारण बाजार में गिरावट का रुख बना रहा।