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  • खराब बिजनेस अपडेट का असर! जुबिलेंट फूडवर्क्स स्टॉक में बड़ी गिरावट, निवेशकों में चिंता

    खराब बिजनेस अपडेट का असर! जुबिलेंट फूडवर्क्स स्टॉक में बड़ी गिरावट, निवेशकों में चिंता


    नई दिल्ली। क्विक सर्विस रेस्टोरेंट (QSR) सेक्टर की दिग्गज कंपनी जुबिलेंट फूडवर्क्स लिमिटेड के शेयरों में मंगलवार को जोरदार गिरावट देखने को मिली। कंपनी के कमजोर चौथी तिमाही (Q4) बिजनेस अपडेट के बाद निवेशकों ने बिकवाली शुरू कर दी, जिसके चलते शेयर 10 प्रतिशत से ज्यादा टूट गया और 52-हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंच गया।

    कारोबार के दौरान 52-हफ्ते के लो पर पहुंचा स्टॉक

    एनएसई पर दोपहर करीब 1:35 बजे जुबिलेंट फूडवर्क्स लिमिटेड का शेयर 10.14% गिरकर 414.25 रुपये पर कारोबार कर रहा था। दिन की शुरुआत 440 रुपये पर हुई थी, लेकिन बिकवाली के दबाव में यह गिरकर 408.80 रुपये तक पहुंच गया, जो इसका 52-हफ्ते का निचला स्तर है।गौरतलब है कि इस स्टॉक का 52-हफ्ते का उच्चतम स्तर 727.95 रुपये रहा है, जिससे साफ है कि पिछले एक साल में इसमें भारी गिरावट आई है।

    रेवेन्यू बढ़ा, लेकिन मांग कमजोर

    कंपनी ने जनवरी-मार्च तिमाही में 19% की कंसोलिडेटेड रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की और कुल आय 2,506 करोड़ रुपये रही। हालांकि, इसके बावजूद निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ गया। इसकी सबसे बड़ी वजह Domino’s Pizza इंडिया का कमजोर प्रदर्शन रहा। कंपनी की लाइक-फॉर-लाइक (LFL) ग्रोथ सिर्फ 0.2% रही, जो घरेलू बाजार में सुस्त मांग को दर्शाती है।

    मार्जिन पर दबाव और सीमित ग्रोथ की चिंता

    विश्लेषकों का मानना है कि कमजोर LFL ग्रोथ के कारण कंपनी के मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है। बड़े इवेंट जैसे टी20 क्रिकेट वर्ल्ड कप के बावजूद कंपनी उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाई। इसके अलावा, डिलीवरी बिजनेस से ग्रोथ की संभावनाएं भी सीमित होती दिख रही हैं। ऐसे में आने वाले समय में कंपनी की ग्रोथ रफ्तार और धीमी पड़ सकती है।

    हालांकि, कंपनी का तुर्की बिजनेस अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन करता नजर आया है, जो कुछ राहत जरूर देता है।

    नए स्टोर्स का विस्तार जारी

    कमजोर मांग के बावजूद कंपनी अपने विस्तार पर ध्यान दे रही है। इस तिमाही में जुबिलेंट फूडवर्क्स लिमिटेड ने कुल 69 नए स्टोर्स जोड़े, जिससे कुल आउटलेट्स की संख्या बढ़कर 3,663 हो गई है।
    इनमें Domino’s Pizza इंडिया के 59 नए स्टोर शामिल हैं, जबकि तुर्की में 4 नए आउटलेट खोले गए।

    डंकिन के साथ 15 साल पुरानी साझेदारी खत्म

    कंपनी ने एक बड़ा फैसला लेते हुए Dunkin’ के साथ अपनी फ्रेंचाइजी एग्रीमेंट को रिन्यू न करने का ऐलान किया है। यह 15 साल पुरानी साझेदारी इस साल 31 दिसंबर को खत्म हो जाएगी। कंपनी ने बताया कि लगातार घाटे और कमजोर ग्रोथ के चलते यह कदम उठाया गया है। अब कंपनी इस बिजनेस के लिए बिक्री या फ्रेंचाइजी ट्रांसफर जैसे विकल्पों पर विचार करेगी।

    निवेशकों के लिए चिंता बढ़ी

    इस साल अब तक कंपनी के शेयर 20% से ज्यादा गिर चुके हैं, जबकि पिछले एक साल में इसमें करीब 40% की गिरावट दर्ज की गई है। कमजोर मांग, मार्जिन प्रेशर और धीमी ग्रोथ के चलते निवेशकों की चिंता बढ़ गई है और आने वाले समय में कंपनी के प्रदर्शन पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

    कमजोर Q4 अपडेट के बाद जुबिलेंट फूडवर्क्स के शेयर 10% से ज्यादा गिरकर 52-हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंच गए। डोमिनोज इंडिया की धीमी ग्रोथ और मार्जिन दबाव के कारण निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ा है।

  • लगातार चौथे हफ्ते बाजार में गिरावट, मिडिल ईस्ट संकट से Nifty 50-BSE Sensex पर दबाव

    लगातार चौथे हफ्ते बाजार में गिरावट, मिडिल ईस्ट संकट से Nifty 50-BSE Sensex पर दबाव


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर साफ नजर आ रहा है। लगातार चौथे हफ्ते बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। वैश्विक अनिश्चितता, महंगे कच्चे तेल और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने बाजार की दिशा पर दबाव बनाए रखा।

    निफ्टी-सेंसेक्स का प्रदर्शन

    सप्ताह के दौरान निफ्टी 50 में 0.16 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, हालांकि आखिरी कारोबारी दिन यह 0.49 प्रतिशत की बढ़त के साथ 23,114.50 पर बंद हुआ। वहीं बीएसई सेंसेक्स हफ्ते के आखिर में 325.72 अंकों (0.44%) की तेजी के साथ 74,532.96 पर बंद हुआ, लेकिन पूरे हफ्ते में इसमें 0.04 प्रतिशत की हल्की गिरावट रही।

    तेल की कीमतों से बढ़ती चिंता

    वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं, जिससे महंगाई और भारत के व्यापार घाटे को लेकर चिंता बढ़ गई है। यही वजह है कि जींस का रुख सतर्क बना हुआ है और बाजार पर दबाव बना हुआ है।

    सेक्टर आधारित प्रदर्शन

    इस हफ्ते सेक्टरों में मिलाजुला रुख देखने को मिला। आईटी और पीएसयू बैंकिंग सर्विसेज ने अच्छा प्रदर्शन किया, जबकि मेटल सेक्टर में भी खरीदारी देखने को मिली। निफ्टी मेटल इंडेक्स में 2 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त दर्ज की गई।
    हालांकि, व्यापक बाजार में कमजोरी नजर आई-मिडकैप में मामूली बढ़त और स्मॉलकैप में गिरावट देखने को मिली।

    रुपये में गिरावट और FII की बिकवाली

    भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 93.49 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। इसके पीछे डॉलर की मजबूत मांग और विदेशी जींस (FII) की लगातार बिकवाली प्रमुख कारण रहे। पिछले 13 ट्रेडिंग सत्रों में एफआईआई करीब 81,263 करोड़ रुपये निकाल चुके हैं।

    निफ्टी की राय

    मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के रिसर्च प्रमुख सिद्धार्थ खेमका के अनुसार, निकट अवधि में बाजार का रुख सतर्क ही रहेगा। निफ्टी कच्चे तेल के दाम और पश्चिम एशिया का तनाव जींस की भावना को प्रभावित कर रहा है।

    विश्लेषकों के अनुसार:

    निफ्टी के लिए 23,850 तत्काल रेजिस्टेंस है
    इसके बाद 24,000 और 24,150 अहम स्तर होंगे
    नीचे की ओर 22,950 और 22,700 मजबूत सपोर्ट हैं

    वहीं बैंक निफ्टी के लिए 52,000–53,000 का फाइलरा सपोर्ट और 54,000–55,000 रेजिस्टेंस माना जा रहा है।

    पश्चिम एशिया के हालात, कच्चे तेल की कीमतें और विदेशी निवेशकों की रिकवरी आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करें। यदि निवेशकों को सतर्क रहकर सोच-समझकर निवेश करने की सलाह दी जा रही है।

  • मध्य पूर्व में तनाव घटने की उम्मीद, भारतीय शेयर बाजार तेजी के साथ खुला

    मध्य पूर्व में तनाव घटने की उम्मीद, भारतीय शेयर बाजार तेजी के साथ खुला


    नई दिल्ली पश्चिम एशिया में तनाव कम की उम्मीदों ने भारतीय शेयर बाजार को नई ऊर्जा दी है। शुक्रवार को मार्केट ने शानदार शुरुआत की, जहां प्रमुख एलेस्ट्रीज के साथ खुले और बिजनेस में खरीदारी का शानदार नजारा देखने को मिला।

    हार्डवेयर-निफ्टी में दमदार उछाल

    सुबह 9:25 बजे बीएसई सेंसेक्स 801 अंक यानी 1.08% की तेजी के साथ 75,008 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं निफ्टी 50 भी 248 अंक (1.08%) की बढ़त के साथ 23,250 पर कारोबार करता है।

    इलेक्ट्रिकल और एनर्जी सेक्टर हीरो बाजार के बने

    शुरुआती कारोबार में सरकारी बिजली और ऊर्जा क्षेत्र ने बाजार का नेतृत्व किया। एमएपीएसयू बैंक और एमएडी ग्रेजुएट स्टूडेंट टॉप गेनर में शामिल हैं। इसके अलावा मेटल, ऑटो, आईटी, मेडिसिन, इंफ्रा और डिफेंस जैसे आसपास के सभी सेक्टर हरे निशान में कारोबार कर रहे थे, जिससे बाजार में व्यापक तेजी का संकेत मिला।

    मिड कैप्चर और स्मॉल कैप्चर में भी स्थावर रैपिड

    केवल लार्जकैप ही नहीं, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शूट में भी साहिल का उत्साह देखने को मिला। मैथ्यू मिडकैप 100 स्टाल्स 1.73% 55,436 और मैथ्यूज मिडकैप 100 स्टाल्स 1.32% 15,911 पर पहुंच गए।

    इन दिग्गज स्टॉकिंग्स में दिखीं फोर्स

    प्लांट पैक में टाटा स्टील, इंफोसिस, आईसीआईसीआई बैंक, टीसीएस, एनटीपीसी और पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया जैसे दिग्गज स्टॉक में तेजी से देखने को मिली। वहीं एचडीएफसी बैंक की मंदी लगातार जारी है।

    तनाव कम होने के संकेत बाजार को सहारा से

    सिद्धांतों का मानना ​​है कि संयुक्त राज्य अमेरिका और इजराइल की ओर से ईरान के साथ चल रहे तनाव में कमी की उम्मीद जगी है। इस वैश्विक कंपनी का भरोसेमंद रिटर्न है और बाजार में खरीदारी की गुंजाइश है।

    एशियाई सामानों का भी मिलाप

    एशिया के प्रमुख बाज़ार-कोरिया, सिंगापुर, चीन और ऑस्ट्रेलिया-भी हरे निशान में कारोबार कर रहे थे, जिससे भारतीय बाज़ार को सकारात्मक संकेत मिला। हालाँकि, अमेरिकी बाज़ार में पिछले सत्र में गिरावट जारी रही।

    एफओआई की बिकवालीरिलीज़, डीओआई का सहारा

    विदेशी एंटरप्राइज़ एंटरप्राइज़ (FII) ने गुरुवार को 7,558 करोड़ रुपये की बिकवाली की, जबकि घरेलू एंटरप्राइज़ एंटरप्राइज़ (DII) ने बाज़ार में 3,863 करोड़ रुपये का निवेश कर समर्थन दिया।
    कुल मिलाकर, विश्वविद्यालयों में सुधार और भू-राजनीतिक तनाव कम होने की उम्मीद है, भारतीय शेयर बाजार ने मजबूत शुरुआत की है, जिससे विश्वविद्यालयों में उत्साह लौटता दिख रहा है।

  • तीसरे दिन भी शेयर बाजार में जोरदार तेजी, सेंसेक्स की रफ्तार के पीछे ये बड़े कारण

    तीसरे दिन भी शेयर बाजार में जोरदार तेजी, सेंसेक्स की रफ्तार के पीछे ये बड़े कारण


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में लगातार तीसरे दिन रैपिड का स्ट्रिप जारी है, जिससे निवेशक का भरोसा और मजबूत हुआ है। प्रमुख शोधकर्ता बीएसई सेंसेक्स और निफ्टी 50 इस दौरान शेयर बाजार में उछाल दिखा रहे हैं। डीजेस के तीन सत्रों में 2,000 अंक के करीब भुगतान किया गया है, जबकि ड्यूस में 700 अंक से अधिक की बढ़त दर्ज की गई है। शनिवार दोपहर 12:47 बजे आटा 636 अंक 0.84% ​​की तेजी के साथ 76,707 पर कारोबार हो रहा था, मलेशिया 191 अंक 0.81% 23,770 पर पहुंच गया। खास बात यह है कि इस तेजी में सिर्फ लार्जकैप ही नहीं, बल्कि बात मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर में भी बराबर की भागीदारी निभा रहे हैं, जो बाजार में व्यापक बाजार का संकेत है।

    बाजार की इस तेजी के पीछे सबसे बड़ी वजह आईटी सेक्टर में रिटर्न्स की खरीदारी है। निफ्टी आईटी करीब 4 फीसदी की तेजी के साथ टॉप जेनर बन गया है। इन्फोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, एचसीएल टेक्नोलॉजीज और टेक महिंद्रा जैसी दिग्गज आईटी कंपनियां इनफॉरमेंस शॉपिंग को मिल रही हैं। इसकी एक बड़ी वैश्विक ग्लोबल ब्रोकरेज सीएलएसए की रिपोर्ट है, जिसमें कहा गया है कि ओपनएआई और एंथ्रोपिक के नए इंजीनियरिंग टूल्स से इंडस्ट्री को कोई बड़ा खतरा नहीं है। इस रिपोर्ट के बाद वोडाफोन की चिंता कम हुई और सेक्टर में तेजी से पैसा लौटा।

    कच्चे तेल की गिरावट और ज्वालामुखी वोलैटिलिटी ने स्केल फ़्रॉम

    बाज़ार की सूची में अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिकों का भी बहुत बड़ा योगदान है। कच्चे तेल की बिक्री में आई गिरावट से उपज की सेंटि बेहतर हुई है। WTI क्रूड ऑयल में करीब 3.43% की गिरावट दर्ज की गई और 92.91 डॉलर प्रति शेयर के आसपास रहा, जबकि ब्रेंट क्रूड भी 2.02% बढ़कर 101.3 डॉलर के करीब रहा। कच्चा तेल सस्ता होने से भारत जैसे औद्योगिक देश के लिए अर्थव्यवस्था और अर्थव्यवस्था पर दबाव कम होता है, जिससे शेयर बाजार को समर्थन मिलता है।

    इसके अलावा भारत VIX में गिरावट के लिए भी बाजार सकारात्मक संकेत है। इंडिया विक्स 4.30% ग्रुप 18.94 पर आया है, जो बताता है कि बाजार में स्थिरता कम हो रही है और स्थिरता बढ़ रही है। आम तौर पर जब अस्थिरता कम होती है, तो निवेशक अधिकांश स्वामित्व के साथ बाजार में पैसा विकल्प होते हैं।

    मिडकैप और स्मॉलकैप स्टूडियो में भी मजबूत तेजी से देखने को मिल रही है। मैथ्यू मिडकैप 100 स्टॉल 1.77% और मैडकैप 100 स्टॉल 1.52% तक चढ़े, जिससे यह पता चलता है कि रैली व्यापक है और केवल साइंटिस्ट स्टॉक तक सीमित नहीं है।

    कुल मिलाकर, आईटी सेक्टर में विश्वास की वापसी, कच्चे तेल के क्षेत्र में गिरावट और कम होने वाली बाजार अस्थिरता ने मिलकर इस तेजी को जगह दी है। अगर यही ट्रेंड जारी हो रहा है, तो आने वाले दिनों में बाजार में नए व्यापारियों को चुना जा सकता है।

  • एलपीजी संकट के बीच चमके इंडक्शन चूल्हा कंपनियों के शेयर, निवेशकों की बढ़ी दिलचस्पी

    एलपीजी संकट के बीच चमके इंडक्शन चूल्हा कंपनियों के शेयर, निवेशकों की बढ़ी दिलचस्पी


    नई दिल्ली। मध्य-पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और एलपीजी आपूर्ति प्रभावित होने की आशंकाओं के बीच भारत में इलेक्ट्रिक इंडक्शन चूल्हों की मांग तेजी से बढ़ती दिखाई दे रही है। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और रिटेल बाजारों में इन उपकरणों की खरीदारी बढ़ने लगी है। इसका असर शेयर बाजार पर भी पड़ा है, जहां घरेलू उपकरण बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में बुधवार को तेज उछाल देखने को मिला। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि एलपीजी की आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी रहती है तो आने वाले दिनों में इलेक्ट्रिक कुकिंग उपकरणों की मांग और बढ़ सकती है।

    घरेलू उपकरण कंपनियों के शेयरों में जोरदार तेजी
    इलेक्ट्रिक कुकिंग उपकरणों की बढ़ती मांग का सीधा फायदा होम अप्लायंसेज कंपनियों को मिला है। किचन अप्लायंसेज बनाने वाली कंपनी Butterfly Gandhimathi Appliances के शेयर में जबरदस्त तेजी दर्ज की गई। दोपहर करीब 12:45 बजे कंपनी का शेयर करीब 7.93 प्रतिशत की बढ़त के साथ 651 रुपये के स्तर पर कारोबार करता दिखा। कारोबार के दौरान इसने 660 रुपये का उच्चतम स्तर भी छुआ। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों को उम्मीद है कि इलेक्ट्रिक कुकिंग उपकरणों की मांग बढ़ने से कंपनी के कारोबार को फायदा मिल सकता है।

    टीटीके प्रेस्टीज और स्टोव क्राफ्ट के शेयर भी चढ़े
    इसी तरह किचन उपकरण क्षेत्र की एक और प्रमुख कंपनी TTK Prestige के शेयर में भी तेज उछाल देखा गया। कंपनी का शेयर करीब 9.40 प्रतिशत की बढ़त के साथ 530 रुपये के आसपास पहुंच गया। कारोबार के दौरान यह 556 रुपये तक भी गया। वहीं Stove Kraft, जो ‘पिजन’ ब्रांड के नाम से उत्पाद बेचती है, के शेयर में भी करीब 5 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई। कंपनी का शेयर लगभग 510 रुपये के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया और दिन के दौरान इसने 525 रुपये का उच्चतम स्तर छुआ। बाजार विश्लेषकों के अनुसार निवेशक यह मानकर चल रहे हैं कि एलपीजी की संभावित कमी से इलेक्ट्रिक कुकिंग उपकरणों की बिक्री में तेजी आ सकती है।

    विशेषज्ञों ने इंडक्शन स्टोव को बताया बेहतर विकल्प
    ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि एलपीजी आपूर्ति में संभावित दबाव को देखते हुए शहरी परिवारों को इलेक्ट्रिक इंडक्शन स्टोव जैसे विकल्पों की ओर बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। ऊर्जा और पर्यावरण से जुड़े शोध संस्थान Council on Energy, Environment and Water (सीईईडब्ल्यू) के फेलो Abhishek Kar ने कहा कि भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का लगभग दो-तिहाई हिस्सा आयात करता है। इसमें से 90 प्रतिशत से अधिक आपूर्ति पश्चिम एशियाई देशों से आती है, जिनमें United Arab Emirates, Qatar और Saudi Arabia प्रमुख हैं। ऐसे में क्षेत्र में बढ़ते तनाव का असर गैस आपूर्ति पर पड़ सकता है।

    ‘गिव इट अप’ अभियान जैसे नए प्रयास का सुझाव
    अभिषेक कर ने सुझाव दिया कि घरेलू उपयोग के लिए एलपीजी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार को आवश्यक वस्तु अधिनियम जैसे प्रावधानों का उपयोग करना चाहिए। इसके साथ ही एलपीजी सब्सिडी के लिए चलाए गए ‘गिव इट अप’ अभियान की तर्ज पर एक नया अभियान शुरू किया जा सकता है। इस अभियान का उद्देश्य उन परिवारों को एलपीजी का उपयोग कम करने के लिए प्रेरित करना हो सकता है, जिनके पास पहले से इलेक्ट्रिक इंडक्शन स्टोव हैं या जो इसे आसानी से खरीद सकते हैं। इससे घरेलू एलपीजी की मांग पर दबाव कम किया जा सकता है।

    रेस्तरां उद्योग को भी सतर्क रहने की सलाह
    एलपीजी आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच होटल और रेस्तरां उद्योग को भी सतर्क रहने की सलाह दी गई है। National Restaurant Association of India (एनआरएआई) ने अपने सदस्यों से गैस की खपत कम करने के उपाय अपनाने का आग्रह किया है। संगठन ने सुझाव दिया है कि रेस्तरां ऐसे मेनू पर अधिक ध्यान दें जिनमें कम गैस की खपत होती हो या जिनका खाना जल्दी तैयार हो सके।

    इलेक्ट्रिक कुकिंग विकल्प अपनाने पर जोर
    एनआरएआई ने अपने सदस्यों को जारी सलाह में कहा कि मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों के कारण व्यावसायिक एलपीजी की आपूर्ति श्रृंखला में बाधाएं आ सकती हैं। यदि स्थिति और गंभीर होती है तो रेस्तरां उद्योग को संचालन संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में जहां संभव हो, वहां खाना पकाने के लिए इलेक्ट्रिक उपकरणों के विकल्प अपनाने पर भी विचार किया जाना चाहिए।

    उद्योग की स्थिरता के लिए जरूरी कदम
    संगठन ने कहा कि व्यापार की निरंतरता, रोजगार और पूरे खाद्य सेवा क्षेत्र की स्थिरता को बनाए रखने के लिए ईंधन संरक्षण के उपाय अपनाना आवश्यक है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा स्रोतों में विविधता और वैकल्पिक कुकिंग तकनीकों को बढ़ावा देना भविष्य में इस तरह की चुनौतियों से निपटने के लिए महत्वपूर्ण रणनीति साबित हो सकता है।