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  • शेयर बाजार में गिरावट: सेंसेक्स-निफ्टी 2% से ज्यादा टूटे, निवेशकों में चिंता

    शेयर बाजार में गिरावट: सेंसेक्स-निफ्टी 2% से ज्यादा टूटे, निवेशकों में चिंता


    नई दिल्ली। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने भारतीय शेयर बाजार को इस सप्ताह गहरे दबाव में डाल दिया। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच निवेशकों की धारणा कमजोर रही, जिसका असर सीधे तौर पर प्रमुख बेंचमार्क सूचकांकों सेंसेक्स और निफ्टी पर देखने को मिला। दोनों सूचकांक सप्ताह के अंत में 2 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट के साथ बंद हुए।

    एनएसई निफ्टी-50 इस सप्ताह 2.2 प्रतिशत यानी 532 अंक टूटकर 23,643.5 के स्तर पर आ गया, जबकि बीएसई सेंसेक्स 2.7 प्रतिशत यानी 2,000 से अधिक अंकों की गिरावट के साथ 75,238 पर बंद हुआ। बाजार में यह गिरावट केवल बड़े इंडेक्स तक सीमित नहीं रही, बल्कि व्यापक बाजार भी इसकी चपेट में आ गया। मिडकैप इंडेक्स में 2 प्रतिशत से ज्यादा और स्मॉलकैप इंडेक्स में करीब 4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों की संपत्ति पर और अधिक दबाव बना।

    सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो रियल्टी और आईटी सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित रहे। बीएसई रियल्टी इंडेक्स में लगभग 8 प्रतिशत की तेज गिरावट दर्ज हुई, जबकि आईटी इंडेक्स 5.7 प्रतिशत टूट गया। ऑटो, कैपिटल गुड्स, कंज्यूमर ड्यूरेबल, बैंकिंग और पीएसयू सेक्टर में भी लगातार बिकवाली का दबाव देखने को मिला। हालांकि, कुछ रक्षात्मक सेक्टर जैसे मेटल और हेल्थकेयर ने थोड़ी मजबूती दिखाई और मामूली बढ़त दर्ज की।

    सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में टाइटन सबसे बड़ा नुकसान झेलने वाला स्टॉक रहा, जिसमें 7.6 प्रतिशत की गिरावट आई। इसके अलावा रिलायंस इंडस्ट्रीज, टेक महिंद्रा और महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसे बड़े शेयरों में भी कमजोरी देखी गई, जिससे बाजार पर दबाव और बढ़ गया।

    विश्लेषकों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें 105 से 110 डॉलर प्रति बैरल के बीच बनी हुई हैं, जो महंगाई और आर्थिक स्थिरता के लिए चिंता का विषय है। इसके साथ ही अमेरिकी डॉलर की मजबूती और वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने उभरते बाजारों से विदेशी निवेश को बाहर खींचा है, जिससे एफआईआई की लगातार बिकवाली देखने को मिल रही है।

    हालांकि, इस नकारात्मक माहौल के बीच घरेलू निवेशकों की भागीदारी बाजार के लिए एक सहारा बनी रही। एसआईपी के जरिए लगातार आने वाले निवेश ने बाजार को कुछ हद तक स्थिर बनाए रखने में मदद की। अप्रैल में एसआईपी निवेश 31,115 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जिसने विदेशी बिकवाली के असर को आंशिक रूप से संतुलित किया।

    कुल मिलाकर, वैश्विक तनाव, तेल कीमतों में उछाल और आर्थिक अनिश्चितताओं के चलते भारतीय शेयर बाजार में दबाव बना हुआ है, और आने वाले समय में निवेशकों की नजर अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और कच्चे तेल के रुझानों पर टिकी रहेगी।

  • भारतीय शेयर बाजार की ओर बढ़ा एनआरआई का झुकाव: अब प्रॉपर्टी नहीं, इक्विटी और म्यूचुअल फंड पर भरोसा

    भारतीय शेयर बाजार की ओर बढ़ा एनआरआई का झुकाव: अब प्रॉपर्टी नहीं, इक्विटी और म्यूचुअल फंड पर भरोसा

    नई दिल्ली ।
    खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों के निवेश पैटर्न में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। लंबे समय तक रियल एस्टेट को सबसे सुरक्षित और भरोसेमंद विकल्प मानने वाले एनआरआई अब भारतीय शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड्स की तरफ तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। बदलते आर्थिक माहौल और बेहतर रिटर्न की संभावनाओं ने उनकी निवेश सोच को नई दिशा दी है।

    पहले विदेशों में काम करने वाले भारतीय अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा भारत में जमीन, मकान या दूसरी प्रॉपर्टी खरीदने में लगाते थे। इसे सुरक्षित भविष्य और स्थायी संपत्ति के रूप में देखा जाता था। लेकिन अब धीरे-धीरे यह धारणा बदलती दिखाई दे रही है। निवेशकों का मानना है कि वित्तीय बाजारों में लंबे समय में अधिक तेजी और बेहतर ग्रोथ की संभावना मौजूद है, जिसके कारण अब इक्विटी और म्यूचुअल फंड उनकी प्राथमिकता बनते जा रहे हैं।

    भारतीय शेयर बाजार को लेकर एनआरआई के बीच भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है। बड़ी संख्या में निवेशक अब अपनी नई पूंजी सीधे शेयर बाजार में लगा रहे हैं। उनका मानना है कि भारत की अर्थव्यवस्था आने वाले वर्षों में तेजी से आगे बढ़ सकती है और इसका सबसे अधिक फायदा इक्विटी निवेश में देखने को मिल सकता है।

    वैश्विक स्तर पर बढ़ रही अनिश्चितताओं और आर्थिक उतार-चढ़ाव ने भी इस बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। निवेशक अब केवल पारंपरिक विकल्पों पर निर्भर नहीं रहना चाहते, बल्कि ऐसे क्षेत्रों में निवेश करना चाहते हैं जहां तेजी से विकास की संभावना हो। हालांकि बाजार में अस्थिरता बनी हुई है, लेकिन इसके बावजूद अधिकांश एनआरआई निवेशक आत्मविश्वास बनाए हुए हैं और लगातार अपने पोर्टफोलियो को मजबूत करने में लगे हुए हैं।

    म्यूचुअल फंड्स भी इस समय एनआरआई निवेशकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। व्यवस्थित निवेश योजनाओं के जरिए लोग लंबे समय तक सुरक्षित और संतुलित निवेश करना पसंद कर रहे हैं। इससे जोखिम को नियंत्रित करने के साथ-साथ बेहतर रिटर्न की संभावना भी बनी रहती है। यही कारण है कि अब कई लोग सीधे शेयरों के साथ-साथ फंड आधारित निवेश को भी महत्व दे रहे हैं।

    एक और बड़ा बदलाव यह देखने को मिला है कि विदेश से भारत भेजे जाने वाले पैसों का उद्देश्य भी बदल गया है। पहले यह पैसा मुख्य रूप से परिवार की जरूरतों और संपत्ति खरीदने के लिए उपयोग किया जाता था, लेकिन अब इसका बड़ा हिस्सा भविष्य की वित्तीय सुरक्षा, रिटायरमेंट प्लानिंग और निवेश पोर्टफोलियो तैयार करने में लगाया जा रहा है।

    विशेषज्ञों के अनुसार यह बदलाव केवल निवेश के तरीके में परिवर्तन नहीं है, बल्कि वित्तीय सोच में आए बड़े बदलाव का संकेत है। एनआरआई अब भावनात्मक फैसलों के बजाय योजनाबद्ध और पेशेवर तरीके से निवेश कर रहे हैं। भारत का शेयर बाजार उनके लिए केवल ट्रेडिंग का माध्यम नहीं बल्कि लंबे समय तक संपत्ति निर्माण का मजबूत विकल्प बनकर उभरा है।

    कुल मिलाकर, यह ट्रेंड इस बात का संकेत देता है कि आने वाले समय में भारतीय वित्तीय बाजारों में एनआरआई निवेश और अधिक बढ़ सकता है। इससे न केवल निवेशकों को बेहतर अवसर मिलेंगे बल्कि भारतीय बाजार को भी मजबूती मिलने की संभावना है।

  • शेयर बाजार में जोरदार तेजी: सेंसेक्स 358 अंक उछला, निफ्टी ने पकड़ी रफ्तार

    शेयर बाजार में जोरदार तेजी: सेंसेक्स 358 अंक उछला, निफ्टी ने पकड़ी रफ्तार


    नई दिल्ली | हफ्ते के तीसरे कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में मजबूत तेजी दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार में ही खरीदारी का दबाव देखने को मिला, जिससे पूरा बाजार सकारात्मक रुख में आ गया।

    BSE Sensex में आज करीब 358 अंकों की तेजी देखने को मिली और यह मजबूती के साथ कारोबार करता नजर आया। वहीं Nifty 50 भी 101 अंकों की बढ़त के साथ हरे निशान में रहा। इस तेजी ने निवेशकों के बीच भरोसा बढ़ाया और बाजार में उत्साह का माहौल बना रहा।

    बाजार में खरीदारी का दबदबा

    सुबह से ही बाजार में बैंकिंग, आईटी और एनर्जी सेक्टर में खरीदारी देखने को मिली, जिससे इंडेक्स को सपोर्ट मिला। कई लार्जकैप शेयरों में भी अच्छी तेजी दर्ज की गई, जिससे पूरे बाजार का मूड सकारात्मक रहा।

     वैश्विक संकेतों का मिला-जुला असर

    वैश्विक बाजारों में जारी उतार-चढ़ाव का असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला। मिडिल ईस्ट में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बढ़ती अनिश्चितता और तेल बाजार में हलचल ने निवेशकों को सतर्क रखा। इसके बावजूद घरेलू बाजार ने मजबूती दिखाई।

    अमेरिकी बाजारों में हाल की गिरावट जहां Nasdaq Composite और Dow Jones Industrial Average में कमजोरी देखने को मिली उसका भी हल्का असर एशियाई बाजारों पर पड़ा, लेकिन भारत में इसका प्रभाव सीमित रहा।

    एशियाई बाजारों का रुख

    एशिया के अन्य बाजारों में भी मिला-जुला रुख देखने को मिला। कुछ इंडेक्स में हल्की बढ़त रही, जबकि कुछ में गिरावट दर्ज की गई। जापान के बाजार अवकाश के कारण बंद रहे।

    निवेशकों के लिए संकेत

    विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा तेजी सकारात्मक संकेत है, लेकिन वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। इसलिए निवेशकों को सतर्क रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है।

  • टेक्नोलॉजी ने बदली निवेश की तस्वीर, ट्रेडिंग और सलाह का पूरा सिस्टम हुआ डिजिटल..

    टेक्नोलॉजी ने बदली निवेश की तस्वीर, ट्रेडिंग और सलाह का पूरा सिस्टम हुआ डिजिटल..


    नई दिल्ली। 
    वित्तीय बाजार आज जिस तेजी से बदल रहे हैं, उसका सबसे बड़ा कारण तकनीकी प्रगति को माना जा रहा है। हाल ही में एक उच्च स्तरीय आर्थिक कार्यक्रम के दौरान यह बात सामने आई कि निवेश, ट्रेडिंग और वित्तीय सलाह देने के पारंपरिक तरीके अब लगभग पूरी तरह डिजिटल ढांचे में बदल चुके हैं। यह बदलाव सिर्फ तकनीक तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे निवेशकों के व्यवहार और बाजार की संरचना में भी गहरा परिवर्तन आया है।

    आज का निवेशक पहले की तुलना में कहीं अधिक डिजिटल रूप से सक्रिय और जागरूक है। मोबाइल और इंटरनेट की आसान पहुंच ने निवेश को हर व्यक्ति के लिए सरल बना दिया है। अब लोग बिना किसी भौतिक प्रक्रिया के सीधे बाजार से जुड़ सकते हैं और तुरंत निर्णय ले सकते हैं। इसी कारण नए निवेशकों की संख्या तेजी से बढ़ी है और बाजार का दायरा भी व्यापक हुआ है।

    तकनीक ने ट्रेडिंग सिस्टम को पूरी तरह बदल दिया है। पहले जहां निवेश के लिए लंबी प्रक्रियाएं और मध्यस्थों पर निर्भरता होती थी, वहीं अब सब कुछ कुछ सेकंड में डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए संभव हो गया है। इसके साथ ही निवेश सलाह और वित्तीय सेवाएं भी ऑनलाइन माध्यमों पर शिफ्ट हो गई हैं, जिससे पारदर्शिता और गति दोनों में सुधार हुआ है।

    इस बदलाव का असर केवल सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि पूंजी प्रवाह भी अब वैश्विक स्तर पर अधिक सक्रिय हो गया है। निवेशक अब देश की सीमाओं से बाहर जाकर भी अवसरों की तलाश कर रहे हैं। इससे बाजार अधिक जुड़ा हुआ और गतिशील बन गया है, लेकिन इसके साथ जोखिमों का स्वरूप भी जटिल हो गया है क्योंकि अब वैश्विक घटनाओं का सीधा असर स्थानीय बाजारों पर पड़ता है।

    भारतीय शेयर बाजार की मौजूदा स्थिति को देखते हुए यह स्पष्ट है कि यह अब केवल आंकड़ों का खेल नहीं रह गया है। करोड़ों निवेशकों की भागीदारी और हजारों सूचीबद्ध कंपनियों की मौजूदगी यह दिखाती है कि बाजार में विश्वास लगातार मजबूत हो रहा है। पिछले कुछ वर्षों में बाजार पूंजीकरण और निवेश साधनों में भी तेज वृद्धि देखी गई है, जिससे आर्थिक गतिविधियों को मजबूती मिली है।

    हालांकि, इस तेजी के बीच संतुलन बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। जब बाजार तेजी से बढ़ता है और तकनीक हर प्रक्रिया को आसान बनाती है, तब नियमों और निगरानी की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। जरूरत इस बात की है कि नवाचार और सुरक्षा दोनों के बीच सही संतुलन बना रहे, ताकि निवेशकों का भरोसा कायम रहे और बाजार स्थिरता के साथ आगे बढ़े।

    अंत में यह कहा जा सकता है कि तकनीक ने निवेश की दुनिया को पूरी तरह नया रूप दे दिया है। अब बाजार केवल खरीद-बिक्री का स्थान नहीं रहा, बल्कि यह एक डिजिटल इकोसिस्टम बन चुका है, जहां जानकारी, गति और जागरूकता सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

  • ब्रोकरेज ने जताया 64 रुपये के टारगेट का भरोसा; क्या अब मल्टीबैगर रिटर्न के लिए तैयार हैं निवेशक?

    ब्रोकरेज ने जताया 64 रुपये के टारगेट का भरोसा; क्या अब मल्टीबैगर रिटर्न के लिए तैयार हैं निवेशक?


    नई दिल्ली।विंड एनर्जी सेक्टर की प्रमुख कंपनी सुजलॉन एनर्जी के शेयरों में हाल के दिनों में तेज रफ्तार देखने को मिली है। लगातार खरीदारी के चलते स्टॉक में मजबूत तेजी बनी हुई है और निवेशकों का रुझान इस ओर बढ़ा है। पिछले कुछ कारोबारी सत्रों में शेयर में लगभग 20 प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज की गई है, जबकि एक महीने के भीतर इसमें करीब 28 प्रतिशत तक की तेजी देखने को मिली है।

    हाल के कारोबारी सत्र में शेयर लगभग 53 रुपये के स्तर पर बंद हुआ, जिससे बाजार में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या यह आगे चलकर 64 रुपये के स्तर को पार कर सकता है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनी में आई यह तेजी केवल अल्पकालिक नहीं है, बल्कि इसके पीछे सेक्टर की मजबूत संभावनाएं भी अहम भूमिका निभा रही हैं।

    ब्रोकरेज हाउस जेएम फाइनेंशियल ने सुजलॉन एनर्जी पर अपनी BUY रेटिंग को बरकरार रखते हुए अगले 12 महीनों के लिए 64 रुपये का टारगेट प्राइस तय किया है। रिपोर्ट के अनुसार मौजूदा स्तर से शेयर में लगभग 30 प्रतिशत तक की अतिरिक्त बढ़त की संभावना बनी हुई है। इसके पीछे मुख्य कारण भारत में तेजी से बढ़ती बिजली की मांग और नवीकरणीय ऊर्जा पर सरकार का बढ़ता फोकस माना जा रहा है।

    विशेषज्ञों के अनुसार विंड एनर्जी सेक्टर आने वाले समय में और अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, खासकर तब जब सोलर और गैस आधारित ऊर्जा उत्पादन दिन के कुछ समय तक सीमित रहता है। शाम और रात के समय बिजली की मांग को पूरा करने में विंड एनर्जी एक मजबूत विकल्प के रूप में उभर रही है, जिससे इस सेक्टर की कंपनियों को फायदा मिल सकता है।

    सरकारी स्तर पर भी विंड एनर्जी क्षमता बढ़ाने पर लगातार काम किया जा रहा है। आने वाले वर्षों में बड़े पैमाने पर नए प्रोजेक्ट्स शुरू होने की संभावना है, जिससे इस क्षेत्र में निवेश और विस्तार दोनों को बढ़ावा मिलेगा। इससे कंपनियों की ऑर्डर बुक मजबूत होने और उत्पादन क्षमता में सुधार की उम्मीद है।

    कंपनी के प्रदर्शन में हाल के समय में सुधार देखने को मिला है। प्रोजेक्ट्स के निष्पादन और डिलीवरी में तेजी आई है, जिससे पहले की तुलना में कामकाज अधिक सुचारू हुआ है। इससे कंपनी के कैश फ्लो में सुधार और नए ऑर्डर्स मिलने की संभावना भी बढ़ी है।

    बाजार विश्लेषकों का कहना है कि सुजलॉन के शेयर की दिशा आगे चलकर पूरी तरह से रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर की मांग, सरकारी नीतियों और वैश्विक ऊर्जा परिस्थितियों पर निर्भर करेगी। यदि सेक्टर में मौजूदा रफ्तार बनी रहती है, तो शेयर में आगे और मजबूती देखने को मिल सकती है।

  • सेंसेक्स में जोरदार रिकवरी: निचले स्तर से 1800 अंक उछलकर बंद, IT सेक्टर चमका

    सेंसेक्स में जोरदार रिकवरी: निचले स्तर से 1800 अंक उछलकर बंद, IT सेक्टर चमका


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार के लिए गुरुवार का सत्र उतार-चढ़ाव से भरा रहा, लेकिन अंत में बाजार ने शानदार रिकवरी दिखाते हुए हरे निशान में क्लोजिंग दी। शुरुआती गिरावट के बाद निवेशकों की खरीदारी से बाजार में जबरदस्त रिटर्न देखने को मिली।

    इंटर-डे में बड़ी रिकवरी

    कारोबार के दौरान बीएसई सेंसेक्स 71,545 के निचले स्तर से करीब 1,774 अंक उछल गया। दिन के अंत में सेंसेक्स 185.23 अंक (0.25%) की बढ़त के साथ 73,319.55 पर बंद हुआ।

    वहीं निफ्टी 50 ने भी 22,182 के लो से 531 अंकों की रिकवरी करते हुए 33.70 अंक (0.15%) की तेजी के साथ 22,713.10 पर क्लोजिंग दी।

    आईटी सेक्टर बना बाजार का हीरो

    आज के कारोबार में निफ्टी आईटी सबसे बड़ा जेनरेटर रहा, जो 2.60% की तेजी के साथ बंद हुआ। इसके अलावा:

    निफ्टी रियल्टी: +1.07%
    निफ्टी सर्विसेज़: +0.54%
    निफ्टी मेटल: +0.39%
    निफ्टी प्राइवेट बैंक: +0.39%
    निफ्टी FMCG: +0.21%

    IT कंपनियों में खरीदारी ने बाजार को बढ़त देने में अहम भूमिका निभाई।

    इन सेक्टर्स में रही गिरावट

    दूसरी ओर कुछ सेक्टर्स दबाव में रहे:

    निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स: -0.93%
    निफ्टी फार्मा: -0.92%
    निफ्टी हेल्थकेयर: -0.86%
    निफ्टी ऑयल एंड गैस: -0.79%
    निफ्टी ऑटो: -0.62%
    निफ्टी इंफ्रा: -0.45%
    सेंसेक्स के टॉप जेनर्स और लूजर्स

    तेजी वाले सर्वे में Infosys, TCS, HCLTech, Tech Mahindra, HDFC Bank और ICICI Bank शामिल रहे।

    वहीं गिरावट वाले रिकवरी में Sun Pharma, NTPC, Power Grid Corporation of India और Tata Steel प्रमुख रहे।

    मिडकैप और स्मॉलकैप में कमजोरी

    लार्जकैप के मुकाबले मिडकैप और स्मॉलकैप रिकवरी में कमजोरी देखने को मिली।

    निफ्टी मिडकैप 100: 0.26% गिरकर 53,677.05
    निफ्टी स्मॉलकैप 100: 0.38% गिरकर 15,650.50
    क्यों आई बाजार में यह रिकवरी?

    विश्लेषकों के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप के ईरान पर संभावित हमले वाले बयान से शुरुआती कारोबार में बाजार दबाव में था। लेकिन बाद में वैल्यू बाइंग और रुपये में बढ़ोतरी से बाजार में सुधार आया।

    रुपये ने भी मजबूत प्रदर्शन करते हुए बाजार को सहारा दिया, जिससे निवेशकों का भरोसा लौटा।

    क्यों अहम है यह ट्रेंड

    आज की रिकवरी यह दर्शाती है कि बाजार में अभी भी निवेशकों का भरोसा बना हुआ है और गिरावट में खरीदारी का रुख जारी है।

  • जेफरीज का बड़ा फैसला: HDFC Bank को पोर्टफोलियो से हटाया, शेयर 3% तक लुढ़के

    जेफरीज का बड़ा फैसला: HDFC Bank को पोर्टफोलियो से हटाया, शेयर 3% तक लुढ़के


    नई दिल्ली। ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म जेफरीज के बड़े जज ने भारतीय फाइनेंसियल सेक्टर में हलचल मचा दी है। कंपनी ने देश के सबसे बड़े निजी बैंकों में से एक एचडीएफसी बैंक को अपना मुख्य पोर्टफोलियो से बाहर कर दिया है, जिसके बाद शुक्रवार के कारोबार में बैंक के स्टॉक पर दबाव साफ नजर आया। सूची पर बैंक का शेयर करीब 3 प्रतिशत तक जनसंख्या 758 रुपये के आसपास पहुंच गया। यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब पहले से ही बैंक का स्टॉक पिछले एक महीने में 14.3 प्रतिशत और छह महीने में करीब 20 प्रतिशत तक टूट गया है, जिससे छात्रों की चिंता और बढ़ गई है।

    ‘ग्रिड एंड फियर’ की रिपोर्ट में बड़ा बदलाव, एचएसबीसी को मिली जगह

    जेफरीज़ के रणनीतिकार क्रिस वुड ने अपनी नामांकन रिपोर्ट “ग्रिड एंड फियर” में इस बदलाव का ज़िक्र किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, एशिया (जापान को खत्म), ग्लोबल और इंटरनेशनल लॉन्ग-ओनली पोर्टफोलियो को हटा दिया गया है। हालाँकि, इस निर्णय के पीछे कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया है, लेकिन बाजार में इसे शामिल करने की घटना देखी जा रही है। खास बात यह है कि बैंक की जगह एचएसबीसी को 4 प्रतिशत वेटेज के साथ पोर्टफोलियो में शामिल किया गया है। इस बदलाव के चलते भारत का कुल वेटेज भी थोड़ा कम हो गया है, जो विदेशी निवेशकों के नजरिए में बदलाव का संकेत देता है।

    एशिया-पैसिफिक पोर्टफोलियो में भी स्टॉक, भारत का वेटेज कम हो गया

    जेफरीज ने सिर्फ ग्लोबल पोर्टफोलियो में ही नहीं, बल्कि एशिया-पैसिफिक (जापान को छोड़कर) पोर्टफोलियो में भी बदलाव किए हैं। भारत और ऑस्ट्रेलिया का वेस्टेज़ 2-2 प्रतिशत नीचे आया है, जबकि ताइवान का वेस्टेज़ 4 प्रतिशत नीचे आया है। इस पोर्टफोलियो में भारत की 13 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जो अभी भी MSCI से थोड़ी अधिक बनी हुई है। इसके बावजूद वेस्टेज में यह टिप्पणी की गई है कि विदेशी ब्रोकरेज हाउस को भारत ले जाने से रोका गया है।

    शव के अवशेषों से लेकर गहनता तक की जांच, जांच की भी चर्चा

    यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब हाल ही में डिजिटल स्टॉक एक्सचेंज के शेयरधारक अतनु चक्रवर्ती ने ‘मूल्यों और संपत्तियों’ से जुड़े शेयरों की शपथ ली थी। इसके बाद बैंक ने केकी मिस्त्री को पोर्टफोलियो में नियुक्त कर दिया। बताया जा रहा है कि बैंक ने इस मामले की जांच के लिए लॉ फर्मों को भी नियुक्त किया है। वहीं, अन्यत्र में यह भी संकेत मिले हैं कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) इस मामले की समीक्षा कर सकता है। इन घटनाओं में बैंक की संभावनाओं को लेकर सवाल पूछे गए हैं, जिससे किसी भी व्यक्ति का भरोसेमंद प्रभाव हो सकता है।

    युवाओं की धारणा पर असर, आगे भी रह सकता है दबाव

    विशेषज्ञ विशेषज्ञ का मानना ​​है कि भले ही अभी तक किसी भी तरह की गड़बड़ी साबित नहीं हुई है, लेकिन इस तरह की घटनाओं की धारणा प्रभावित होती है। इससे शेयर पर शॉर्ट टर्म में प्रेशर बनाया जा सकता है। स्थिर स्थिति में बैंक का 52 ग्रेड का निचला स्तर 741.05 रुपये और उच्च स्तर 1,020.50 रुपये है, जबकि बैंक की बाजार पूंजी करीब 5.82 करोड़ लाख रुपये है। ऐसे में किसी भी निवेश के लिए यह समय अत्यावश्यक रहना होगा और किसी भी निवेश निर्णय से पहले स्थिति को भरना जरूरी होगा।

  • कॉम्पटीशन खत्म अब साथ मिलकर काम RVNL IRCON मर्जर से क्या बदलेगा

    कॉम्पटीशन खत्म अब साथ मिलकर काम RVNL IRCON मर्जर से क्या बदलेगा


    नई दिल्ली:     देश के प्रमुख डिस्काउंट ब्रोकर Zerodha ने ट्रेडर्स को बड़ा झटका दिया है। कंपनी ने घोषणा की है कि 1 अप्रैल से इंट्राडे फ्यूचर्स और ऑप्शंस ट्रेडिंग के कुछ मामलों में ब्रोकरेज चार्ज ₹20 से बढ़ाकर ₹40 प्रति ऑर्डर कर दिया जाएगा। इस फैसले से खासतौर पर डेरिवेटिव सेगमेंट में ट्रेड करने वाले निवेशकों की लागत बढ़ने वाली है

    यह बदलाव हर ट्रेडर पर लागू नहीं होगा। कंपनी के अनुसार, यह बढ़ा हुआ शुल्क केवल उन निवेशकों पर लगेगा जो Securities and Exchange Board of India के नियमों का पालन नहीं करते। सेबी के नियम के मुताबिक, किसी भी ट्रेड के लिए कुल मार्जिन का कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सा कैश या कैश इक्विवेलेंट के रूप में होना जरूरी है

    अब तक Zerodha ऐसे मामलों में ग्राहकों की कमी को अपने फंड से पूरा कर देता था और इसके लिए अलग से कोई चार्ज नहीं लेता था। लेकिन अब कंपनी इस सुविधा की लागत वसूल करेगी। यानी अगर कोई ट्रेडर पर्याप्त कैश मार्जिन नहीं रखता और ब्रोकर के फंड का इस्तेमाल करता है, तो उसे ₹40 प्रति ऑर्डर देना होगा

    हालांकि कंपनी ने यह भी साफ किया है कि इस फैसले का असर इंट्राडे इक्विटी ट्रेडिंग पर नहीं पड़ेगा। यह बदलाव केवल F&O यानी डेरिवेटिव ट्रेडिंग तक सीमित रहेगा

    इस फैसले के पीछे कई वजहें बताई जा रही हैं। एक तरफ बाजार में पहले से ही डेरिवेटिव ट्रेडिंग वॉल्यूम पर दबाव है, वहीं दूसरी ओर सरकार द्वारा सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स यानी STT बढ़ाने का प्रस्ताव भी लागत बढ़ाने वाला है। बजट 2026 में फ्यूचर्स पर STT को 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत और ऑप्शंस पर 0.10 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत करने की बात कही गई है

    कंपनी के सह संस्थापक और सीईओ Nithin Kamath ने भी इस फैसले को जरूरी बताया है। उनका कहना है कि ग्राहकों के कोलेटरल में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है और कंपनी को मार्जिन फंडिंग के लिए उधार लेना पड़ सकता है जिसकी लागत होती है। ऐसे में यह कदम कंपनी के लिए जरूरी हो गया था

    मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि Zerodha का यह फैसला पूरे ब्रोकरेज इंडस्ट्री पर असर डाल सकता है। अगर दूसरे ब्रोकर भी इसी राह पर चलते हैं तो आने वाले समय में ट्रेडिंग और महंगी हो सकती है

    यह बदलाव उन ट्रेडर्स के लिए चेतावनी है जो ज्यादा लीवरेज लेकर ट्रेड करते हैं। अब उन्हें अपनी रणनीति बदलनी होगी और पर्याप्त कैश मार्जिन रखना होगा वरना ट्रेडिंग की लागत सीधे दोगुनी हो जाएगी

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  • आईपीओ लॉक-इन खत्म होते ही चार शेयरों में गिरावट, ऐ फाइनेंस 7.4% तक टूटा

    आईपीओ लॉक-इन खत्म होते ही चार शेयरों में गिरावट, ऐ फाइनेंस 7.4% तक टूटा


    नई दिल्ली :
    हाल ही में शेयर बाजार में सूचीबद्ध हुई चार कंपनियों के शेयर सोमवार को गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए। इन कंपनियों के आईपीओ की लॉक-इन अवधि खत्म होने के बाद बड़ी संख्या में शेयर बाजार में ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध हो गए, जिसके कारण शेयरों पर बिकवाली का दबाव बढ़ गया।

    फ्रैक्टल एनालिटिक्स के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट देखी गई। कंपनी के करीब 0.69 करोड़ शेयर, जो कुल इक्विटी का लगभग 4 प्रतिशत हैं, लॉक-इन से बाहर आकर ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध हो गए। इसके चलते कंपनी के शेयर करीब 4.35 प्रतिशत तक गिर गए।

    दोपहर करीब 1:50 बजे कंपनी के शेयर 3.98 प्रतिशत की गिरावट के साथ 764.35 रुपये पर कारोबार करते नजर आए। यह शेयर अभी भी अपने आईपीओ प्राइस 900 रुपये से लगभग 12 प्रतिशत नीचे चल रहा है।

    वहीं ऐ फाइनेंस के शेयरों में भी भारी बिकवाली देखने को मिली। कंपनी के शेयर करीब 7.42 प्रतिशत तक गिर गए, क्योंकि इसकी एक महीने की लॉक-इन अवधि समाप्त हो गई। लॉक-इन खत्म होने के बाद करीब 1.76 करोड़ शेयर, जो कंपनी की लगभग 7 प्रतिशत इक्विटी के बराबर हैं, बाजार में ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध हो गए।

    पिछले पांच कारोबारी दिनों में कंपनी के शेयर 14.64 प्रतिशत गिर चुके हैं, जबकि एक महीने के दौरान निवेशकों को करीब 24.29 प्रतिशत का नकारात्मक रिटर्न मिला है।

    इसी तरह पार्क मेडी वर्ल्ड के शेयरों में भी गिरावट दर्ज की गई। सोमवार को कंपनी के करीब 0.85 करोड़ शेयर, यानी लगभग 2 प्रतिशत इक्विटी लॉक-इन से बाहर आने के बाद इसके शेयर करीब 3.2 प्रतिशत तक गिर गए।

    वहीं नेफ्रोकेयर हेल्थ सर्विसेज के शेयरों में भी गिरावट देखी गई। कंपनी के करीब 0.28 करोड़ शेयर, जो लगभग 3 प्रतिशत इक्विटी के बराबर हैं, 16 मार्च से ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध हो गए। इसके बाद कंपनी के शेयर करीब 2.8 प्रतिशत तक नीचे आ गए।

    इस बीच नुवामा वेल्थ मैनेजमेंट की एक रिपोर्ट के अनुसार हाल ही में आईपीओ लाने वाली 88 कंपनियों के प्री-लिस्टिंग निवेशकों की लॉक-इन अवधि 11 मार्च से 29 जून 2026 के बीच खत्म होने वाली है।

    रिपोर्ट के मुताबिक इस अवधि के दौरान करीब 72 अरब डॉलर यानी लगभग 6.6 लाख करोड़ रुपये के शेयर बाजार में ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध हो सकते हैं। इससे आने वाले महीनों में बाजार की धारणा और कई शेयरों की चाल पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

  • Central Mine Planning IPO: ऑफर फॉर सेल पर आधारित, निवेशकों के लिए 24 मार्च तक खुला मौका

    Central Mine Planning IPO: ऑफर फॉर सेल पर आधारित, निवेशकों के लिए 24 मार्च तक खुला मौका

    नई दिल्ली:कोल इंडिया की सब्सिडियरी कंपनी Central Mine Planning का आईपीओ इस हफ्ते निवेशकों के लिए खुलने जा रहा है। यह IPO 20 मार्च से खुलेगा और 24 मार्च तक निवेशक इसमें हिस्सेदारी ले सकते हैं। ग्रे मार्केट के हालिया आंकड़े बताते हैं कि इस आईपीओ में पहले से ही आकर्षक प्रीमियम देखने को मिल रहा है। निवेशकों की नजर इस आईपीओ पर काफी तेज है क्योंकि यह ऑफर फॉर सेल पर आधारित है और कोल इंडिया की प्रतिष्ठित सब्सिडियरी कंपनी द्वारा जारी किया जा रहा है।

    Central Mine Planning IPO के तहत 10.71 करोड़ शेयर जारी किए जाएंगे। यह एक मेनबोर्ड सेगमेंट का आईपीओ है और इसकी लिस्टिंग बीएसई और एनएसई दोनों जगह होगी। हालांकि कंपनी ने अभी तक प्राइस बैंड और लॉट साइज की घोषणा नहीं की है, लेकिन उम्मीद है कि सोमवार तक यह जानकारी सार्वजनिक कर दी जाएगी।

    आईपीओ में 50 प्रतिशत हिस्सा क्वालीफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स QIBs के लिए आरक्षित रहेगा। वहीं 35 प्रतिशत हिस्सा रिटेल निवेशकों के लिए उपलब्ध होगा और शेष 15 प्रतिशत नॉन-इंस्टिट्यूशनल इन्वेस्टर्स के लिए रखा गया है।

    कंपनी की आर्थिक स्थिति भी मजबूत नजर आ रही है। वित्त वर्ष 2025-26 में Central Mine Planning का रेवन्यू 2,177 करोड़ रुपये रहा, जो वित्त वर्ष 2024 में 1,770 करोड़ रुपये था। टैक्स के बाद प्रॉफिट वित्त वर्ष 2025 में 667 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले साल यह 503 करोड़ रुपये था। यह वृद्धि निवेशकों के लिए आकर्षक संकेत है।

    ग्रे मार्केट प्रीमियम GMP की रिपोर्ट के अनुसार, इस IPO के शेयर आज 19 रुपये के प्रीमियम पर ट्रेड कर रहे हैं। आईपीओ में सबसे अधिक GMP 24 रुपये प्रति शेयर देखा गया। यह संकेत करता है कि निवेशकों की ओर से शुरुआती प्रतिक्रिया सकारात्मक है और शेयरों की मांग अच्छी रहेगी।

    Central Mine Planning भारत की सबसे बड़ी कोयला और मिनिरल कंसल्टेंसी फर्म है। कंपनी के पास वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान 61 प्रतिशत मार्केट शेयर था। कंपनी कोयला मंत्रालय के साथ-साथ पेट्रोलियम मंत्रालय को भी सलाह देती है, जिससे इसकी प्रतिष्ठा और बाजार में स्थिरता बनी रहती है।

    इस IPO के मर्चेंट बैंकर्स के रूप में IDBI Capital Markets & Securities और SBI Capital Markets चुने गए हैं। रजिस्ट्रार के रूप में केफिन टेक्नोलॉजी नियुक्त की गई है।

    विशेष रूप से निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन होता है। इसलिए किसी भी निवेश से पहले विशेषज्ञों की सलाह लेना जरूरी है।

     Central Mine Planning का IPO निवेशकों के लिए एक आकर्षक अवसर के रूप में सामने आया है। मजबूत वित्तीय प्रदर्शन, ग्रे मार्केट प्रीमियम और प्रतिष्ठित कंपनी होने के कारण यह IPO चर्चा में है। निवेशक इसे लेकर उत्साहित हैं और आगामी लिस्टिंग पर नजर रखे हुए हैं।