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  • सेंसेक्स-निफ्टी ने दिखाई मजबूती, कमजोर संकेतों के बावजूद शानदार शुरुआत!

    सेंसेक्स-निफ्टी ने दिखाई मजबूती, कमजोर संकेतों के बावजूद शानदार शुरुआत!


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कमजोर वैश्विक संकेतों के बावजूद शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार मजबूती के साथ खुला। शुरुआती कारोबार में BSE Sensex करीब 500 अंकों की बढ़त के साथ 77,121 के स्तर पर खुला, जबकि Nifty 50 भी 23,880 के पार पहुंच गया। खबर लिखे जाने तक सेंसेक्स 497 अंकों से ज्यादा की तेजी के साथ 77,129 के आसपास ट्रेड कर रहा था, वहीं निफ्टी 159 अंकों की बढ़त के साथ 23,934 के स्तर पर बना हुआ था।

    मिडकैप और स्मॉलकैप में ज्यादा तेजी

    मुख्य सूचकांकों के मुकाबले व्यापक बाजारों में ज्यादा मजबूती देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 1% से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई, जो बाजार में सकारात्मक सेंटीमेंट को दर्शाता है।

    किन सेक्टर्स में रही बढ़त?

    सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो निफ्टी मेटल, ऑटो, प्राइवेट बैंक, मीडिया, पीएसयू बैंक, रियल्टी और ऑयल एंड गैस सेक्टर्स में 1% से ज्यादा की तेजी देखने को मिली। वहीं आईटी सेक्टर दबाव में रहा, जहां निफ्टी आईटी इंडेक्स में 1% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। फार्मा सेक्टर में हल्की बढ़त देखने को मिली।

    इन शेयरों में सबसे ज्यादा हलचल

    निफ्टी 50 में श्रीराम फाइनेंस, एशियन पेंट्स, एक्सिस बैंक, आयशर मोटर्स, आईसीआईसीआई बैंक, महिंद्रा एंड महिंद्रा, बजाज ऑटो, बजाज फिनसर्व और एसबीआई के शेयर तेजी के साथ कारोबार करते दिखे। दूसरी ओर, Infosys, TCS, सन फार्मा, एचसीएल टेक और टेक महिंद्रा जैसे आईटी और फार्मा शेयरों में गिरावट देखी गई।

    बाजार एक्सपर्ट की राय

    विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया गिरावट के बावजूद बाजार में मजबूती बनी हुई है। ऊर्जा कीमतों में संभावित गिरावट और आने वाला मजबूत अर्निंग सीजन बाजार के लिए सकारात्मक संकेत दे रहा है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि महंगाई में हल्की बढ़ोतरी और ग्रोथ पर थोड़ा दबाव आ सकता है, लेकिन कुल मिलाकर इक्विटी बाजार का रुख सकारात्मक बना रह सकता है।

    निफ्टी के लिए अहम स्तर

    तकनीकी विश्लेषण के अनुसार, Nifty 50 के लिए 23,660 का स्तर मजबूत सपोर्ट बना हुआ है। जब तक इंडेक्स इसके ऊपर बना रहता है, तब तक तेजी जारी रह सकती है और 24,250 तक का स्तर देखने को मिल सकता है।
    वहीं, अगर यह स्तर टूटता है, तो गिरावट बढ़कर 23,200 तक जा सकती है।

    वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय बाजार की मजबूती यह दिखाती है कि घरेलू फैक्टर्स और निवेशकों का भरोसा अभी भी मजबूत बना हुआ है।

  • भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ खुला, फार्मा स्टॉक्स में भारी बिकवाली

    भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ खुला, फार्मा स्टॉक्स में भारी बिकवाली


    नई दिल्ली। हफ्ते के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार कमजोरी के साथ खुला। सुबह करीब 9:17 बजे BSE Sensex 241 अंक यानी 0.33% की गिरावट के साथ 73,078.49 पर और Nifty 50 84.70 अंक यानी 0.37% की कमजोरी के साथ 22,628.40 पर कारोबार करता नजर आया। शुरुआती कारोबार में निवेशकों का रुख सतर्क दिखा, जिससे बाजार पर दबाव बना रहा।

    फार्मा सेक्टर में सबसे ज्यादा दबाव

    इस गिरावट की अगुवाई फार्मा शेयरों ने की। निफ्टी फार्मा इंडेक्स करीब 1% तक लुढ़क गया, जिससे यह टॉप लूजर सेक्टर बना। इसके अलावा ऑयल एंड गैस, हेल्थकेयर, मीडिया, प्राइवेट बैंक, रियल्टी, डिफेंस और इंफ्रा सेक्टरों में भी बिकवाली देखने को मिली। यह दर्शाता है कि बाजार में व्यापक स्तर पर दबाव बना हुआ है।

    आईटी और मेटल स्टॉक्स ने दी थोड़ी राहत

    हालांकि, पूरी तस्वीर नकारात्मक नहीं रही। आईटी, मेटल और पीएसयू बैंक सेक्टर में खरीदारी देखने को मिली, जिससे बाजार को कुछ सहारा मिला। सेंसेक्स के टॉप गेनर्स में ट्रेंट, टाइटन, पावर ग्रिड, टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक, इन्फोसिस और टीसीएस जैसे दिग्गज शेयर शामिल रहे। वहीं कोटक महिंद्रा बैंक, सन फार्मा, आईसीआईसीआई बैंक और मारुति सुजुकी जैसे शेयरों में गिरावट दर्ज की गई।

    मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर भी दबाव में

    लार्जकैप के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी कमजोरी के साथ कारोबार कर रहे थे। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स करीब 0.59% गिरकर 53,384 पर और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 0.64% गिरकर 15,549 पर पहुंच गया। इससे साफ है कि बाजार में व्यापक स्तर पर बिकवाली का माहौल बना हुआ है।

    वैश्विक तनाव का असर, निवेशकों में सतर्कता

    बाजार की इस गिरावट के पीछे प्रमुख वजह वैश्विक तनाव को माना जा रहा है। Iran, United States और Israel के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर दुनियाभर के बाजारों पर दिख रहा है। निवेशक जोखिम से बचने के मूड में नजर आ रहे हैं, जिससे बिकवाली बढ़ रही है।

    एशियाई और अमेरिकी बाजारों का मिला-जुला संकेत

    एशियाई बाजारों में Tokyo और Seoul के बाजार हरे निशान में रहे, जबकि जकार्ता में गिरावट देखने को मिली। वहीं अमेरिकी बाजार पिछले सत्र में कमजोरी के साथ बंद हुए थे, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा।

    कमोडिटी मार्केट में उतार-चढ़ाव

    कमोडिटी बाजार की बात करें तो कच्चे तेल में मिलाजुला रुख देखने को मिला। ब्रेंट क्रूड हल्की तेजी के साथ 109.70 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि WTI क्रूड में गिरावट रही। वहीं सोने और चांदी की कीमतों में भी कमजोरी दर्ज की गई, जो निवेशकों के सतर्क रुख को दर्शाती है।

    दबाव में बाजार, आगे भी रह सकती है उतार-चढ़ाव की स्थिति

    कुल मिलाकर, भारतीय शेयर बाजार ने सप्ताह की शुरुआत कमजोर नोट पर की है। वैश्विक तनाव, महंगाई और निवेशकों की सतर्कता के चलते बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

  • शेयर बाजार की कमजोर शुरुआत, ग्लोबल संकेतों के चलते गिरावट में ओपनिंग

    शेयर बाजार की कमजोर शुरुआत, ग्लोबल संकेतों के चलते गिरावट में ओपनिंग


    नई दिल्ली। कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत भारी गिरावट के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में ही निवेशकों की सतर्कता साफ नजर आई, जिससे प्रमुख सूचकांक लाल निशान में फिसल गए। सुबह करीब 9:18 बजे बीएसई सेंसेक्स 808 अंकों यानी 1.07 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74,435 के स्तर पर कारोबार करता दिखा, वहीं एनएसई निफ्टी भी 274 अंक यानी 1.18 प्रतिशत टूटकर 23,033 पर पहुंच गया। बाजार खुलते ही चौतरफा बिकवाली का दबाव देखने को मिला, जिससे लगभग सभी सेक्टर प्रभावित हुए। खासकर पीएसयू बैंक और ऑटो सेक्टर में सबसे ज्यादा कमजोरी दर्ज की गई, जो बाजार की गिरावट के प्रमुख कारण बने।

    सेक्टरों में मिला-जुला रुख, आईटी ने दिखाई मजबूती

    शुरुआती सत्र में जहां एक ओर निफ्टी पीएसयू बैंक और निफ्टी ऑटो इंडेक्स टॉप लूजर्स के रूप में उभरे, वहीं कुछ सेक्टरों ने मजबूती भी दिखाई। निफ्टी आईटी एकमात्र ऐसा प्रमुख सेक्टर रहा जो हरे निशान में कारोबार करता दिखा। इसके अलावा निफ्टी फाइनेंशियल सर्विस, रियल्टी, इंडिया डिफेंस, प्राइवेट बैंक, कंजप्शन, मेटल और इंफ्रा में सीमित खरीदारी देखने को मिली। हालांकि यह तेजी बाजार की कुल गिरावट को संभालने के लिए पर्याप्त नहीं रही। लार्जकैप शेयरों के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों में भी बिकवाली का दबाव बना रहा। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 561 अंक यानी 1.02 प्रतिशत गिरकर 54,769 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 130 अंक यानी 0.82 प्रतिशत टूटकर 15,766 पर आ गया।

    दिग्गज शेयरों का प्रदर्शन: आईटी चमका, बैंकिंग और ऑटो दबाव में

    सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में आईटी कंपनियों ने बाजार को कुछ सहारा देने की कोशिश की। एचसीएल टेक, टीसीएस, इन्फोसिस और टेक महिंद्रा जैसे दिग्गज शेयरों में तेजी दर्ज की गई। इसके अलावा सन फार्मा और ट्रेंट भी बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए। दूसरी ओर बैंकिंग, ऑटो और इंफ्रा से जुड़े शेयरों में गिरावट हावी रही। बजाज फिनसर्व, एचडीएफसी बैंक, इंडिगो, एलएंडटी, महिंद्रा एंड महिंद्रा, कोटक महिंद्रा बैंक, एसबीआई, एक्सिस बैंक, हिंदुस्तान यूनिलीवर, अल्ट्राटेक सीमेंट, बीईएल, मारुति सुजुकी, टाइटन, आईसीआईसीआई बैंक और पावर ग्रिड जैसे बड़े शेयर नुकसान में रहे, जिससे बाजार पर दबाव और बढ़ गया।

    वैश्विक संकेतों का असर, अमेरिका-ईरान तनाव बना वजह

    एशियाई बाजारों का रुख मिला-जुला रहा। टोक्यो, सोल और जकार्ता में जहां तेजी देखी गई, वहीं शंघाई और हांगकांग के बाजार गिरावट के साथ खुले। अमेरिकी बाजार गुरुवार को पहले ही गिरावट के साथ बंद हुए थे, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला। विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी टेक्नोलॉजी इंडेक्स नैस्डैक में आई कमजोरी और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। शांति वार्ता की समय सीमा नजदीक आने से बाजार में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। हालांकि बाद में इस समय सीमा को आगे बढ़ा दिया गया, जिससे कुछ राहत की उम्मीद जरूर बनी, लेकिन शुरुआती कारोबार में इसका सकारात्मक असर नहीं दिखा।

    निवेशकों के लिए सतर्कता जरूरी, उतार-चढ़ाव के बीच सीमित मौके

    विशेषज्ञों का मानना है कि खबरों के आधार पर बाजार में अल्पकालिक उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। ऐसे माहौल में निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने से बचना चाहिए और सोच-समझकर निवेश करना चाहिए। मौजूदा परिस्थितियों में बाजार में सीमित अवसर ही दिखाई दे रहे हैं, इसलिए जोखिम प्रबंधन बेहद जरूरी है।

  • मिडिल ईस्ट तनाव का भारतीय बाजार पर असर, BSE Sensex में एक फीसदी से ज्यादा गिरावट

    मिडिल ईस्ट तनाव का भारतीय बाजार पर असर, BSE Sensex में एक फीसदी से ज्यादा गिरावट


    नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष का असर गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। कारोबारी सत्र की शुरुआत में ही बाजार दबाव में नजर आया और प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ खुले। सुबह करीब 9:19 बजे BSE Sensex 963 अंक यानी लगभग 1.25 प्रतिशत गिरकर 75,899 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं Nifty 50 303 अंक यानी करीब 1.27 प्रतिशत फिसलकर 23,563 के स्तर पर पहुंच गया। वैश्विक अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के कारण निवेशकों में सतर्कता का माहौल देखने को मिला।

    कई सेक्टरों में दिखा भारी दबाव
    शुरुआती कारोबार में बाजार के लगभग सभी सेक्टरों में गिरावट देखी गई। ऑटो, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, मीडिया, रियल्टी, मेटल, पीएसयू बैंक, डिफेंस और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के शेयरों पर सबसे अधिक दबाव रहा। निवेशकों ने जोखिम से बचने की रणनीति अपनाते हुए कई सेक्टरों में मुनाफावसूली की। इस वजह से बाजार का मूड नकारात्मक बना रहा और प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बने रहे।

    मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर भी दबाव में
    केवल लार्जकैप ही नहीं बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी गिरावट का असर देखा गया। Nifty Midcap 100 इंडेक्स करीब 1,070 अंक यानी 1.90 प्रतिशत की गिरावट के साथ 55,390 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं Nifty Smallcap 100 इंडेक्स लगभग 286 अंक यानी 1.75 प्रतिशत गिरकर 16,127 पर पहुंच गया। इससे साफ है कि बाजार में बिकवाली का दबाव व्यापक स्तर पर देखने को मिला।

    सेंसेक्स के कई बड़े शेयरों में गिरावट
    सेंसेक्स पैक के कई बड़े शेयर शुरुआती कारोबार में नुकसान में दिखाई दिए। इनमें प्रमुख रूप से Mahindra & Mahindra, Tata Steel, ICICI Bank, Titan Company, Larsen & Toubro, Maruti Suzuki, Bajaj Finance, State Bank of India, Axis Bank, Infosys और HDFC Bank जैसे शेयर शामिल रहे। दूसरी ओर आईटी सेक्टर के कुछ शेयरों में मजबूती देखने को मिली, जहां Tech Mahindra और HCLTech हल्की बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए।

    एशियाई और अमेरिकी बाजारों से भी मिला कमजोर संकेत
    वैश्विक बाजारों से भी कमजोर संकेत मिले हैं। एशिया के कई प्रमुख शेयर बाजार जैसे Nikkei 225, Shanghai Composite, Hang Seng Index और KOSPI भी गिरावट के साथ खुले। वहीं अमेरिका में भी पिछला कारोबारी सत्र कमजोर रहा, जहां Dow Jones Industrial Average लाल निशान में बंद हुआ था। इन वैश्विक संकेतों का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा।

    कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल
    बाजार में गिरावट की एक बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी भी है। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। खबर लिखे जाने तक Brent Crude लगभग 9.31 प्रतिशत की तेजी के साथ 100.54 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया था, जबकि WTI Crude भी करीब 9 प्रतिशत की बढ़त के साथ 95.14 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा था।

    एफआईआई की बिकवाली से बढ़ा दबाव
    बाजार पर विदेशी निवेशकों की बिकवाली का दबाव भी बना हुआ है। बुधवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से करीब 6,267.31 करोड़ रुपये की निकासी की। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने बाजार को कुछ सहारा देते हुए लगभग 4,965.53 करोड़ रुपये का निवेश किया। इसके बावजूद वैश्विक अनिश्चितता के माहौल में निवेशकों की सतर्कता के कारण बाजार में गिरावट का रुख बना रहा।