Tag: stock market today India

  • शेयर बाजार में कमजोरी: शुरुआती कारोबार में Sensex और Nifty 50 दोनों में गिरावट

    शेयर बाजार में कमजोरी: शुरुआती कारोबार में Sensex और Nifty 50 दोनों में गिरावट


    नई दिल्ली। सप्ताह के तीसरे कारोबारी दिन बुधवार, 22 अप्रैल को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत कमजोर रही। शुरुआती कारोबार में ही बाजार पर दबाव देखने को मिला और प्रमुख सूचकांक BSE Sensex और NSE Nifty 50 लाल निशान में ट्रेड करते नजर आए।

    Sensex और Nifty की कमजोर शुरुआत
    सुबह बाजार खुलते ही 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 253 अंक से ज्यादा की गिरावट के साथ 79,000 के आसपास खुला। वहीं निफ्टी 50 भी 100 अंकों से ज्यादा फिसलकर 24,470 के करीब पहुंच गया। कुछ ही देर में गिरावट और बढ़ी और सेंसेक्स करीब 365 अंक टूटकर 78,900 के आसपास कारोबार करने लगा, जबकि निफ्टी भी करीब 90 अंक गिरकर 24,485 के स्तर पर आ गया।

    किन शेयरों में रही तेजी और गिरावट?
    बाजार में आई इस गिरावट के बीच कुछ शेयरों में खरीदारी भी देखने को मिली। Trent Ltd, Bajaj Finance, Maruti Suzuki और ITC Limited जैसे शेयरों में तेजी रही। वहीं दूसरी ओर HCL Technologies, Tech Mahindra, Infosys, Tata Consultancy Services और ICICI Bank के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई।

    मंगलवार को बाजार में रही थी तेजी
    इससे पहले मंगलवार को बाजार में जोरदार तेजी देखने को मिली थी। सेंसेक्स 753 अंक चढ़कर 79,273 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 211 अंक की बढ़त के साथ 24,576 के स्तर पर पहुंच गया था। उस दिन बैंकिंग, आईटी और ऑटो सेक्टर में अच्छी खरीदारी देखने को मिली थी।

    क्या है गिरावट की वजह?
    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, बुधवार को आई गिरावट के पीछे मुख्य वजह मुनाफावसूली और वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेत हैं। पिछले सत्र में तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफा वसूली शुरू कर दी, जिससे बाजार पर दबाव बना। हालांकि जानकारों का कहना है कि इस तरह की गिरावट बाजार का सामान्य हिस्सा है। लंबी अवधि के निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि सोच-समझकर निवेश रणनीति बनानी चाहिए।

  • ग्लोबल टेंशन से सहमा बाजार! भारतीय शेयर मार्केट की कमजोर शुरुआत

    ग्लोबल टेंशन से सहमा बाजार! भारतीय शेयर मार्केट की कमजोर शुरुआत


    नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर सोमवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ तौर पर देखने को मिला। व्यापारिक प्रतिष्ठानों की शुरुआत ही भारी गिरावट के साथ हुई, जिससे व्यापारियों की चिंता और बढ़ गई। सुबह 9:28 बजे बीएसई सेंसेक्स 1,309 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1.78 प्रतिशत शेयर 73,223 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 50 408 अंक 1.77 प्रतिशत की गिरावट के साथ 22,705 पर कारोबार हुआ।

    हर सेक्टर में बिकवाली,अजनबी में डर का माहौल

    शुरुआती कारोबार में बाजार में चौतरफा बिकवाली देखने को मिली। मेटल, पीएससीयू बैंक और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित रहे। इसके अलावा रियल्टी, डिफेंस, आईटी, स्कॉर्पियो, एनर्जी और आर्किटेक्चर जैसे लगभग सभी सेक्टर लाल निशान में बिजनेस कर रहे थे। लार्जकैप स्टॉकहोम के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर बाजार में भी नजर आए। निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में भी तेजी से गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह साफ हो गया कि बाजार में व्यापक स्तर पर कमजोरी बनी हुई है।

    वैश्विक हस्ताक्षर भी फ़्राईड, एशियाई अख़्तियार में भी गिरावट

    भारतीय बाज़ार की इस गिरावट के पीछे अंतर्राष्ट्रीय संकेत भी बड़ी वजह बने। टोक्यो, शंघाई, हांगकांग, बैंकॉक और सियोल जैसे एशियाई सामानों की भी भारी बिक्री आंकी गई है। वहीं, अमेरिकी बाजार में भी पिछले सत्र में गिरावट के साथ गिरावट आई थी, जिससे उपभोक्ताओं का भरोसा टूट गया है।

    तेल के कारखाने और मध्य पूर्व संकट बना सबसे बड़ा कारण

    वैज्ञानिकों के अनुसार, इस गिरावट का सबसे बड़ा कारण मध्य पूर्व में भारी तनाव है, विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भारी असमानता। इस क्षेत्र में वैश्विक तेल आपूर्ति का अहम मार्ग है, और यहां किसी भी तरह के संकटग्रस्त कच्चे तेल की आपूर्ति को तेजी से बढ़ाया जा सकता है। तेल की पेट्रोलियम कंपनी भारत जैसे तीर्थ-निर्भर देश के लिए चिंता का विषय हैं, क्योंकि इसी वजह से तेल की पेट्रोलियम कंपनी की कीमत में भी बढ़ोतरी होती है।

    विदेशी ग्राहकों की लगातार बिकवाली

    बाजार पर दबाव बढ़ाने वाला एक और बड़ा कारण विदेशी निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली है। पिछले फेस्टिवल सत्र में एफओआई ने 5,518 करोड़ रुपये की बड़ी बिक्री की, जिससे बाजार का सेंटीमेंट और गिरावट आई। हालाँकि, घरेलू एंटरप्राइज़ कॉमर्स (डीआईआई) ने कुछ हद तक खरीदारी कर बाजार को सहारा देने की कोशिश की।

    आगे क्या? विद्यार्थी के लिए संकेत

    विशेषज्ञ का मानना ​​है कि जब तक मध्य पूर्व में तनाव कम नहीं हुआ और तेल की कीमतें स्थिर नहीं हुईं, तब तक बाजार में मिश्रण बना रह सकता है। आवेदकों को अनुमति और लंबी अवधि की रणनीति पर ध्यान देने की सलाह दी जा रही है।