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  • शेयर बाजार पर ग्लोबल तनाव का असर, इंफोसिस फिसला तो डॉ रेड्डीज के शेयरों में तेजी मूल सामग्री

    शेयर बाजार पर ग्लोबल तनाव का असर, इंफोसिस फिसला तो डॉ रेड्डीज के शेयरों में तेजी मूल सामग्री


    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में सोमवार 26 अक्टूबर को कारोबार के दौरान काफी उतार चढ़ाव देखने को मिला। सप्ताह की शुरुआत कमजोर संकेतों के साथ हुई और शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स तथा निफ्टी दबाव में नजर आए। हालांकि दिन चढ़ने के साथ बाजार में कुछ खरीदारी लौटी और प्रमुख सूचकांकों ने शुरुआती नुकसान की भरपाई करने की कोशिश की। निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमतों पर रही। इसके अलावा मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी मौद्रिक नीति को लेकर भी बाजार में सतर्कता बनी रही।

    दोपहर के कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 73 हजार 179 अंक के आसपास पहुंच गया जबकि एनएसई निफ्टी 22 हजार 610 के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। इससे पहले बाजार खुलते ही सेंसेक्स में 500 अंकों से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली थी। शुरुआती कमजोरी के बाद खरीदारी आने से निवेशकों को कुछ राहत मिली लेकिन बाजार में पूरी तरह मजबूती लौटने के संकेत नहीं मिले। कारोबार के दौरान वैश्विक घटनाक्रम और कंपनियों के तिमाही नतीजों का असर शेयरों की चाल पर दिखाई दिया।

    बाजार की चिंता की एक बड़ी वजह कच्चे तेल की ऊंची कीमतें हैं। ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 115 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी रही। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंकाओं ने ऊर्जा बाजार को लेकर अनिश्चितता बढ़ाई है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में तेल महंगा होने से आयात बिल बढ़ने और महंगाई पर दबाव पड़ने की आशंका रहती है। इसका असर कंपनियों की लागत और अर्थव्यवस्था की विकास गति पर भी पड़ सकता है।

    शेयरों की बात करें तो सोमवार को डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज के शेयरों में मजबूती देखने को मिली। कंपनी के तिमाही नतीजे बाजार की उम्मीद से बेहतर रहने के बाद शेयर में तेजी दर्ज की गई। वहीं कोटक महिंद्रा बैंक के शेयरों में भी बढ़त रही। इसके विपरीत इंफोसिस के शेयरों पर दबाव बना रहा। कंपनी की ओर से सालाना राजस्व वृद्धि के अनुमान में कटौती किए जाने के बाद निवेशकों की चिंता बढ़ी। उत्तर अमेरिकी बाजार में कमजोरी भी कंपनी के लिए चुनौती बनी हुई है।

    श्रीराम फाइनेंस का शेयर भी निवेशकों के रडार पर रहा। कंपनी की ओर से कर्ज वृद्धि के अनुमान में कमी और संभावित क्रेडिट लागत को लेकर संकेत दिए जाने के बाद शेयर में गिरावट दर्ज की गई। इससे साफ है कि बाजार में केवल वैश्विक घटनाक्रम ही नहीं बल्कि कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन और भविष्य के अनुमान भी निवेशकों के फैसलों को प्रभावित कर रहे हैं। तिमाही नतीजों के इस दौर में अलग अलग कंपनियों के शेयरों में अलग रुख देखने को मिल सकता है।

    आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर संबंधी फैसले पर रहेगी। यदि अमेरिका में ब्याज दरें ऊंची बनी रहती हैं तो उभरते बाजारों में विदेशी निवेश के प्रवाह पर असर पड़ सकता है। इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतें वैश्विक तनाव और कंपनियों के तिमाही नतीजे बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक बने रहेंगे। ऐसे माहौल में निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे केवल एक दिन की तेजी या गिरावट के आधार पर फैसला न लें और निवेश से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति तथा अपनी जोखिम क्षमता का आकलन करें।

  • शेयर बाजार में बढ़ी बेचैनी, सेंसेक्स-निफ्टी लुढ़के, अब 8 अक्टूबर के बाद किस ओर जाएगी बाजार की चाल

    शेयर बाजार में बढ़ी बेचैनी, सेंसेक्स-निफ्टी लुढ़के, अब 8 अक्टूबर के बाद किस ओर जाएगी बाजार की चाल


    नई दिल्ली। 8 अक्टूबर को भारतीय शेयर बाजार के कारोबार पर निवेशकों की नजर टिकी हुई है। इससे पहले 7 अक्टूबर का कारोबारी सत्र बाजार के लिए काफी उतार चढ़ाव वाला रहा। RBI की मौद्रिक नीति के फैसले के बाद बाजार में दबाव बढ़ा और सेंसेक्स 429 अंक की गिरावट के साथ 72638.70 के स्तर पर बंद हुआ। निफ्टी भी 173 अंक फिसलकर 22603.05 के स्तर पर पहुंच गया। बाजार में आई इस कमजोरी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है और अब 8 अक्टूबर के कारोबार में बाजार किस दिशा में जाता है इस पर सबकी नजर रहेगी।

    दरअसल भारतीय रिजर्व बैंक ने 7 अक्टूबर को रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर इसे 5.50 फीसदी कर दिया। करीब चार साल में यह पहली बड़ी दर बढ़ोतरी है। इसके साथ ही RBI ने अपनी नीति का रुख न्यूट्रल से बदलकर कैलिब्रेटेड टाइटनिंग कर दिया। बाजार के लिए यह संकेत महत्वपूर्ण है क्योंकि ब्याज दरों में बढ़ोतरी से कंपनियों की उधारी लागत प्रभावित हो सकती है और ब्याज दर पर निर्भर सेक्टरों में दबाव बढ़ सकता है।

    7 अक्टूबर को बाजार में ज्यादातर प्रमुख सेक्टरों में कमजोरी देखने को मिली। मेटल शेयरों पर खास दबाव रहा और निफ्टी मेटल इंडेक्स करीब 2.3 फीसदी नीचे रहा। रियल एस्टेट और ऑटो जैसे ब्याज दर से प्रभावित होने वाले सेक्टर भी दबाव में रहे। दूसरी तरफ बैंकिंग शेयरों में कुछ मजबूती देखने को मिली। RBI के फैसले के बाद बैंक निफ्टी ने दिन के निचले स्तर से करीब 600 अंक की रिकवरी भी दिखाई। इससे संकेत मिलता है कि बाजार में पूरी तरह से बिकवाली का माहौल नहीं है बल्कि अलग अलग सेक्टरों में निवेशकों की रणनीति अलग रह सकती है।

    शेयरों की बात करें तो टाइटन में करीब 4 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई और यह निफ्टी के प्रमुख कमजोर शेयरों में रहा। अदाणी एंटरप्राइजेज और हिंदाल्को इंडस्ट्रीज में भी दबाव दिखाई दिया। इसके उलट कोटक महिंद्रा बैंक में करीब 1.9 फीसदी की तेजी रही। ऐसे में 8 अक्टूबर को निवेशकों की नजर उन शेयरों पर रह सकती है जिनमें मजबूत कारोबार और बेहतर तिमाही प्रदर्शन की उम्मीद है।

    बाजार के लिए कच्चे तेल की कीमत भी बड़ा संकेत बनी हुई है। ब्रेंट क्रूड 102 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है। महंगे तेल का असर भारत के आयात बिल के साथ महंगाई और कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है। इसके अलावा रुपये की कमजोरी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी बाजार की धारणा को प्रभावित कर रही है। 7 अक्टूबर को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने करीब 2961 करोड़ रुपये के शेयर बेचे जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 5088 करोड़ रुपये की खरीदारी की।

    कुल मिलाकर 8 अक्टूबर का कारोबार बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है। RBI की सख्त नीति कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें कमजोर रुपया और वैश्विक बाजारों के संकेत मिलकर बाजार में उतार चढ़ाव बढ़ा सकते हैं। वहीं मजबूत आर्थिक विकास का अनुमान बाजार के लिए सकारात्मक पक्ष है। RBI ने वित्त वर्ष 2027 के लिए GDP वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर 7.1 फीसदी किया है। ऐसे में निवेशकों को बाजार की तेजी या गिरावट देखकर जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय जोखिम और कंपनी के प्रदर्शन को ध्यान में रखना जरूरी होगा।

  • Share Market 6 October, बाजार ने बदला रुख लेकिन चुनौतियां बरकरार, निवेशकों की नजर अब इन बड़े संकेतों पर

    Share Market 6 October, बाजार ने बदला रुख लेकिन चुनौतियां बरकरार, निवेशकों की नजर अब इन बड़े संकेतों पर


    नई दिल्ली। 6 अक्टूबर को भारतीय शेयर बाजार की चाल पर निवेशकों की नजर बनी हुई है। पिछले कारोबारी सत्र में बाजार ने लगातार चार दिनों की गिरावट का सिलसिला तोड़ते हुए राहत की सांस ली। 5 अक्टूबर को सेंसेक्स 472.77 अंक यानी 0.66 प्रतिशत की बढ़त के साथ 72 382.47 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 133.80 अंक यानी 0.60 प्रतिशत चढ़कर 22 555.75 पर पहुंच गया। बाजार में इस सुधार को कई अहम संकेतों से जोड़कर देखा जा रहा है।

    इससे पहले भारतीय शेयर बाजार लगातार आठ सप्ताह की गिरावट झेल चुका था। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ऊंची बॉन्ड यील्ड महंगा कच्चा तेल और कमजोर रुपये जैसे कारणों ने बाजार के सेंटीमेंट पर दबाव बनाया था। पिछले सप्ताह निफ्टी में करीब 3.10 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी और यह लगातार आठवीं साप्ताहिक गिरावट थी। यह सिलसिला करीब 25 वर्षों में सबसे लंबा साप्ताहिक गिरावट का दौर बताया गया है।

    5 अक्टूबर की तेजी में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और अलग अलग सेक्टर में खरीदारी ने अहम भूमिका निभाई। बाजार खुलते समय वैश्विक संकेतों का भी असर देखने को मिला। निफ्टी शुरुआती कारोबार में 22 621.80 के स्तर तक पहुंचा लेकिन बाद में मुनाफावसूली के कारण इसमें दबाव आया। इसके बावजूद दूसरे कारोबारी सत्र में बाजार ने रिकवरी की और निफ्टी 22 500 के ऊपर बंद होने में सफल रहा।

    निवेशकों के लिए 6 अक्टूबर को सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि बाजार पिछले सत्र की तेजी को आगे बढ़ा पाता है या नहीं। विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण रहेंगी। सितंबर के अंतिम कारोबारी दिन विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में 10 148.41 करोड़ रुपये की बिकवाली की थी। इसके मुकाबले घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 11 271.73 करोड़ रुपये की खरीदारी की थी।

    इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक बॉन्ड यील्ड भी बाजार की चाल को प्रभावित कर सकते हैं। अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता को लेकर सामने आए संकेत भी निवेशकों के लिए अहम हैं। 5 अक्टूबर को शुरुआती तेजी के बाद बाजार में उस समय दबाव बढ़ा जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारत अमेरिका व्यापार समझौते की बातचीत के फिलहाल एक ठहराव पर पहुंचने की बात कही। इसके बाद सेंसेक्स और निफ्टी ने अपनी शुरुआती बढ़त का एक हिस्सा गंवा दिया था।

    5 अक्टूबर के कारोबार में Tata Motors Passenger Vehicles ITC Bajaj Finance Shriram Finance और NTPC जैसे शेयर निफ्टी के प्रमुख बढ़ने वाले शेयरों में रहे। वहीं HCL Technologies Max Healthcare HDFC Bank Asian Paints और Apollo Hospitals जैसे शेयरों में दबाव देखा गया। व्यापक बाजार में भी मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में करीब 0.5 प्रतिशत की बढ़त रही।

    ऐसे माहौल में 6 अक्टूबर को निवेशकों के लिए बाजार में तेजी देखकर जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय कंपनियों के नतीजे कारोबार की स्थिति वैश्विक संकेत और शेयर की वैल्यूएशन पर ध्यान देना जरूरी होगा। बाजार में उतार चढ़ाव अभी बना हुआ है इसलिए किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय लक्ष्य और जोखिम क्षमता को ध्यान में रखना बेहतर रहेगा। यह लेख निवेश सलाह नहीं है।

  • 25 सितंबर को शेयर बाजार में क्या होगा, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और क्रूड ऑयल पर नजर, जानिए अहम स्तर

    25 सितंबर को शेयर बाजार में क्या होगा, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और क्रूड ऑयल पर नजर, जानिए अहम स्तर


    नई दिल्ली। 25 सितंबर 2026 शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार की चाल पर निवेशकों की नजर रहेगी। इससे एक दिन पहले यानी 24 सितंबर को घरेलू बाजार में तेज गिरावट देखने को मिली। कारोबार के दौरान Sensex और Nifty दोनों दबाव में रहे। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई। इसके साथ ही वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों का असर भी भारतीय बाजार पर दिखाई दिया।

    24 सितंबर की सुबह Sensex करीब 576 अंक की गिरावट के साथ 74251 के आसपास कारोबार कर रहा था जबकि Nifty 23245 के स्तर तक फिसल गया था। बाजार में गिरावट का असर कई प्रमुख शेयरों और सेक्टर पर देखने को मिला। बैंकिंग और वित्तीय शेयरों पर भी दबाव रहा। रिपोर्ट के मुताबिक बाजार पूंजीकरण में शुरुआती कारोबार के दौरान 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक की कमी आई थी।

    अब 25 सितंबर को बाजार की दिशा तय करने में Nifty के अहम तकनीकी स्तर महत्वपूर्ण हो सकते हैं। बाजार विश्लेषण के अनुसार 23200 का स्तर एक महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन के तौर पर देखा जा रहा है। यदि Nifty इस स्तर के नीचे टिकता है तो 23100 से 23000 का क्षेत्र अगला महत्वपूर्ण सपोर्ट बन सकता है। वहीं ऊपर की तरफ 23500 का स्तर अहम रेजिस्टेंस माना जा रहा है।

    बाजार की चाल पर अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का असर भी बना रह सकता है। 24 सितंबर को अमेरिका की 10 वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 5.1 प्रतिशत के ऊपर पहुंच गई थी जो 2007 के बाद का ऊंचा स्तर बताया गया। बढ़ती यील्ड के कारण निवेशकों के बीच ब्याज दरों को लेकर नए अनुमान बन रहे हैं। इसका असर दुनियाभर के शेयर बाजारों के साथ भारतीय बाजार पर भी पड़ सकता है।

    कच्चे तेल की कीमत भी निवेशकों के लिए अहम संकेत रहेगी। Brent crude 102 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया था। भारत कच्चे तेल का बड़ा आयातक है इसलिए तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी से आयात बिल और महंगाई पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। इसी वजह से बाजार में तेल की हर बड़ी चाल पर नजर बनी रहेगी।

    इसके अलावा विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण रहेंगी। 23 सितंबर को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयरों में खरीदारी की थी जबकि घरेलू संस्थागत निवेशक भी खरीदार रहे थे। ऐसे में 25 सितंबर को अगर संस्थागत निवेश का रुख बदलता है तो बाजार की चाल पर उसका असर दिखाई दे सकता है।

    निवेशकों के लिए फिलहाल बाजार में तेजी या गिरावट को लेकर जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय प्रमुख तकनीकी स्तरों और वैश्विक संकेतों पर नजर रखना जरूरी होगा। खासतौर पर Nifty का 23200 के आसपास व्यवहार और 23500 के स्तर की ओर उसकी चाल बाजार की दिशा के बारे में महत्वपूर्ण संकेत दे सकती है। शेयर बाजार में उतार चढ़ाव सामान्य है इसलिए किसी भी निवेश निर्णय से पहले जोखिम और अपनी निवेश रणनीति को ध्यान में रखना जरूरी है।

  • 24 सितंबर को शेयर बाजार में बड़ा हलचल वाला दिन NSE की लिस्टिंग पर रहेगी निवेशकों की नजर

    24 सितंबर को शेयर बाजार में बड़ा हलचल वाला दिन NSE की लिस्टिंग पर रहेगी निवेशकों की नजर


    नई दिल्ली । 24 सितंबर 2026 को भारतीय शेयर बाजार के लिए कारोबारी लिहाज से महत्वपूर्ण दिन रहने वाला है। इस दिन बाजार में सामान्य कारोबार के साथ नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी NSE के शेयरों की लिस्टिंग भी होने जा रही है। NSE का आईपीओ निवेशकों के बीच काफी चर्चा में रहा और अब इसकी लिस्टिंग पर बाजार की नजर बनी हुई है। आईपीओ को कुल 5.71 गुना सब्सक्रिप्शन मिला था जबकि योग्य संस्थागत निवेशकों के हिस्से को 12.68 गुना सब्सक्रिप्शन मिला।

    NSE के शेयर 24 सितंबर को BSE पर कारोबार के लिए उपलब्ध होंगे। इसके अलावा NSE के शेयर Metropolitan Stock Exchange of India पर भी कारोबार के लिए उपलब्ध होने की जानकारी सामने आई है। NSE की लिस्टिंग ऐसे समय हो रही है जब भारतीय शेयर बाजार हाल के सत्रों में उतार चढ़ाव के दौर से गुजर रहा है।

    बुधवार 23 सितंबर के कारोबार के दौरान भी बाजार की गतिविधियों पर निवेशकों की नजर रही। इससे एक दिन पहले 22 सितंबर को Sensex करीब 0.44 प्रतिशत गिरकर 74529.08 के स्तर पर बंद हुआ था। इस दौरान Reliance Industries समेत कुछ बड़े शेयरों में कमजोरी देखने को मिली।

    वहीं 21 सितंबर को भारतीय बाजार में हाल की लगातार गिरावट के बाद खरीदारी देखने को मिली थी। उस दिन Nifty 50 करीब 0.29 प्रतिशत बढ़कर 23414.30 पर जबकि Sensex 0.76 प्रतिशत की बढ़त के साथ 74858.99 पर बंद हुआ था। बाजार में इस दौरान कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों को लेकर भी निवेशकों की नजर बनी रही।

    24 सितंबर के कारोबार में NSE की लिस्टिंग सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाले घटनाक्रमों में शामिल हो सकती है। NSE के आईपीओ का इश्यू साइज करीब 22568.94 करोड़ रुपए था और यह पूरी तरह ऑफर फॉर सेल यानी OFS था। इसका मतलब है कि आईपीओ के जरिए कंपनी के मौजूदा शेयरधारकों ने अपने शेयर बिक्री के लिए पेश किए थे।

    लिस्टिंग से पहले ग्रे मार्केट में NSE के शेयरों को लेकर प्रीमियम की चर्चा भी रही है। हालांकि ग्रे मार्केट के संकेत आधिकारिक लिस्टिंग कीमत या शेयर के भविष्य के प्रदर्शन की गारंटी नहीं होते। इसलिए निवेशकों के लिए वास्तविक बाजार भाव और कारोबार शुरू होने के बाद सामने आने वाली स्थिति ज्यादा महत्वपूर्ण होगी।

    इसके अलावा भारतीय बाजार की दिशा तय करने में वैश्विक बाजारों की चाल कच्चे तेल की कीमतें विदेशी निवेशकों की गतिविधियां बॉन्ड यील्ड और प्रमुख कंपनियों के शेयरों में खरीदारी या बिकवाली जैसे कारक भी अहम रहेंगे। हाल के सत्रों में कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव और वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत बने हुए हैं।

    ऐसे में 24 सितंबर का कारोबारी सत्र निवेशकों के लिए कई कारणों से महत्वपूर्ण रहेगा। एक तरफ Sensex और Nifty के रुख पर नजर होगी तो दूसरी तरफ NSE के शेयर बाजार में अपनी पहली कीमत पर कारोबार शुरू करेंगे। निवेशकों को किसी भी शेयर में निर्णय लेने से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति बाजार की परिस्थितियों और अपने जोखिम स्तर को ध्यान में रखना चाहिए। बाजार में तेजी या गिरावट की कोई भी संभावना निश्चित नहीं मानी जा सकती।

  • 23 सितंबर को शेयर बाजार में क्या होगा हलचल के बीच Sensex Nifty पर रहेगी नजर जानें किन संकेतों से तय होगी बाजार की चाल

    23 सितंबर को शेयर बाजार में क्या होगा हलचल के बीच Sensex Nifty पर रहेगी नजर जानें किन संकेतों से तय होगी बाजार की चाल


    नई दिल्ली। 23 सितंबर 2026 को भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों की नजर कई अहम संकेतों पर रहने वाली है। मंगलवार 22 सितंबर को घरेलू बाजार में दबाव देखने को मिला और कारोबार के अंत में निफ्टी 50 करीब 0.36 प्रतिशत गिरकर 23329 के स्तर पर बंद हुआ जबकि सेंसेक्स 0.44 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 74529.08 पर रहा। आईटी शेयरों में दबाव बाजार की कमजोरी की प्रमुख वजहों में शामिल रहा। इसके साथ ही विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक स्तर पर जारी अनिश्चितता ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया।

    अब 23 सितंबर के कारोबार में निवेशकों की नजर ग्लोबल मार्केट के संकेतों के साथ कच्चे तेल की कीमतों पर भी रहेगी। हाल के सत्रों में क्रूड की कीमतों में उतार चढ़ाव भारतीय बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत बनकर सामने आया है। भारत कच्चे तेल का बड़ा आयातक है इसलिए तेल की कीमतों में तेज बदलाव का असर महंगाई और कंपनियों की लागत से लेकर निवेशकों की धारणा तक दिखाई दे सकता है। मंगलवार को भी बाजार पर क्रूड और भू राजनीतिक घटनाक्रम का असर नजर आया।

    निफ्टी के स्तरों की बात करें तो 23 सितंबर को कारोबार के दौरान 23300 के आसपास का स्तर बाजार की नजर में रह सकता है। इसके ऊपर टिकाव बाजार में स्थिरता का संकेत दे सकता है जबकि कमजोरी बढ़ने पर निवेशकों की नजर अगले सपोर्ट स्तरों पर जा सकती है। इससे पहले 21 सितंबर को निफ्टी 23414.30 पर बंद हुआ था और बाजार में खरीदारी का रुख देखने को मिला था। उस सत्र में सेंसेक्स 564 अंक चढ़कर 74858.99 पर बंद हुआ था।

    बाजार की दिशा तय करने में विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां भी महत्वपूर्ण रहेंगी। विदेशी पूंजी का प्रवाह बाजार में उतार चढ़ाव बढ़ा सकता है जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी कई बार गिरावट के दौरान सहारा देने का काम करती है। ऐसे में 23 सितंबर को निवेशकों की नजर एफआईआई और डीआईआई के आंकड़ों पर भी रहेगी।

    सेक्टोरल स्तर पर आईटी शेयरों की गतिविधि खास तौर पर महत्वपूर्ण हो सकती है। मंगलवार को आईटी इंडेक्स में कमजोरी दर्ज की गई थी। इसके अलावा बैंकिंग ऑटो फार्मा मेटल और एनर्जी शेयरों में भी स्टॉक आधारित गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। बाजार में किसी एक सेक्टर की चाल पूरे इंडेक्स की दिशा को प्रभावित कर सकती है।

    इस समय निवेशकों के लिए केवल सेंसेक्स और निफ्टी की चाल देखना पर्याप्त नहीं होगा। अमेरिकी बाजारों की स्थिति एशियाई बाजारों का रुख डॉलर की चाल बॉन्ड यील्ड कच्चे तेल की कीमतें और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां सभी बाजार के लिए अहम संकेत दे सकती हैं। सोमवार को वैश्विक संकेतों और तेल की कीमतों में नरमी के बीच भारतीय बाजार में खरीदारी देखने को मिली थी लेकिन मंगलवार को बाजार फिर दबाव में आ गया। इससे साफ है कि मौजूदा दौर में बाजार में उतार चढ़ाव बना रह सकता है।

    23 सितंबर को निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने के बजाय बाजार की शुरुआती चाल के साथ प्रमुख स्तरों और सेक्टरवार गतिविधियों पर नजर रखनी चाहिए। शेयर बाजार में किसी भी दिशा की गारंटी नहीं होती इसलिए निवेश का फैसला अपने जोखिम और वित्तीय लक्ष्य के अनुसार करना जरूरी है। आने वाले कारोबार में वैश्विक संकेत और घरेलू घटनाक्रम मिलकर बाजार की चाल को प्रभावित कर सकते हैं।

  • Stock Market Today: 22 सितंबर को बाजार में दिख सकती है हलचल Nifty के इन लेवल पर रहेगी नजर

    Stock Market Today: 22 सितंबर को बाजार में दिख सकती है हलचल Nifty के इन लेवल पर रहेगी नजर


    नई दिल्ली। 22 सितंबर 2026 को भारतीय शेयर बाजार की चाल पर निवेशकों की नजर रहेगी। सोमवार को बाजार ने लगातार छह सप्ताह की गिरावट के बाद राहत की सांस ली और सेंसेक्स तथा निफ्टी बढ़त के साथ बंद हुए। सोमवार को सेंसेक्स 564.03 अंक यानी 0.76 प्रतिशत चढ़कर 74858.99 पर बंद हुआ जबकि निफ्टी 67.90 अंक यानी 0.29 प्रतिशत की बढ़त के साथ 23414.30 पर पहुंचा। बाजार में यह तेजी कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और विदेशी निवेश से मिले सहारे के बीच देखने को मिली।

    अब 22 सितंबर के कारोबार में निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि सोमवार की तेजी आगे भी कायम रहती है या बाजार फिर से दबाव में आता है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार निफ्टी के लिए 23200 से 23150 के आसपास का क्षेत्र महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन माना जा रहा है। वहीं 23500 के स्तर के आसपास बाजार को तत्काल प्रतिरोध का सामना करना पड़ सकता है। यदि निफ्टी 23500 से ऊपर मजबूती बनाए रखता है तो बाजार में आगे की दिशा को लेकर नजर 23600 के आसपास के स्तर पर जा सकती है।

    सोमवार की तेजी में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट की भी भूमिका रही। ब्रेंट क्रूड करीब 2.25 प्रतिशत गिरकर लगभग 101.5 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। तेल की कीमतों में नरमी भारतीय बाजार के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर कच्चे तेल का आयात करता है। दूसरी ओर विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भी हालिया बिकवाली के बाद खरीदारी की तरफ रुख किया। शुक्रवार को विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों में करीब 599 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की थी।

    हालांकि बाजार के सामने चुनौतियां भी बनी हुई हैं। हाल के सप्ताहों में ऊंची कच्चे तेल की कीमतें वैश्विक स्तर पर चिंता का कारण रही हैं। इसके साथ ही अमेरिकी ब्याज दरों और बॉन्ड यील्ड से जुड़े संकेत भी उभरते बाजारों के लिए महत्वपूर्ण बने हुए हैं। वैश्विक मौद्रिक नीति में सख्ती की आशंका और भू राजनीतिक घटनाक्रम बाजार की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं।

    22 सितंबर को सेक्टर आधारित गतिविधियों पर भी निवेशकों की नजर रह सकती है। सोमवार को फार्मा और एफएमसीजी समेत कई क्षेत्रों में मजबूती देखने को मिली जबकि आईटी मेटल और पीएसयू बैंकिंग जैसे कुछ हिस्सों में दबाव रहा। बाजार में स्टॉक विशेष गतिविधियां भी देखने को मिल सकती हैं इसलिए केवल इंडेक्स की चाल के बजाय अलग अलग सेक्टर और कंपनियों के प्रदर्शन पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।

    इसके अलावा रुपये की चाल भी बाजार के लिए अहम संकेत दे सकती है। सोमवार को रुपया डॉलर के मुकाबले मामूली मजबूत होकर 95.8150 पर बंद हुआ। हालांकि आयातकों की डॉलर मांग और कच्चे तेल की कीमतों से जुड़ी परिस्थितियां रुपये पर असर डाल सकती हैं। विदेशी निवेश का प्रवाह भी मुद्रा और शेयर बाजार दोनों के लिए महत्वपूर्ण बना हुआ है।

    कुल मिलाकर 22 सितंबर के कारोबार में निफ्टी के 23200 से 23150 के सपोर्ट क्षेत्र और 23500 से 23600 के प्रतिरोध क्षेत्र पर बाजार की नजर रह सकती है। यह स्तर बाजार विशेषज्ञों के तकनीकी आकलन पर आधारित हैं और वास्तविक कारोबार में परिस्थितियों के अनुसार बदलाव हो सकता है। निवेशकों को बाजार की अस्थिरता को ध्यान में रखते हुए किसी भी निवेश या ट्रेडिंग फैसले से पहले अपनी जोखिम क्षमता और संबंधित कंपनी के बुनियादी आंकड़ों पर विचार करना चाहिए।

  • Share Market Today: नए कारोबारी सप्ताह में बाजार की चाल पर रहेंगी इन बड़े संकेतों की नजर, निवेशकों के लिए जानना जरूरी

    Share Market Today: नए कारोबारी सप्ताह में बाजार की चाल पर रहेंगी इन बड़े संकेतों की नजर, निवेशकों के लिए जानना जरूरी


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार नए कारोबारी सप्ताह की शुरुआत 21 सितंबर 2026 को करेगा। पिछले सप्ताह घरेलू बाजार में उतार चढ़ाव देखने को मिला और प्रमुख सूचकांकों पर दबाव बना रहा। शुक्रवार के कारोबार में निफ्टी 50 करीब 75.80 अंक की बढ़त के साथ 23346.40 पर बंद हुआ जबकि सेंसेक्स मामूली गिरावट के साथ 74294.96 के स्तर पर रहा। पूरे सप्ताह की बात करें तो निफ्टी में करीब 0.22 प्रतिशत और सेंसेक्स में करीब 0.65 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई। यह लगातार छठा सप्ताह रहा जब निफ्टी साप्ताहिक आधार पर गिरावट के साथ बंद हुआ।

    अब 21 सितंबर से शुरू होने वाले कारोबारी सप्ताह में निवेशकों की नजर कई घरेलू और वैश्विक संकेतों पर रहेगी। सबसे अहम फैक्टर कच्चे तेल की कीमतें मानी जा रही हैं। हाल के दिनों में पश्चिम एशिया से जुड़े घटनाक्रम और तेल की कीमतों में उतार चढ़ाव ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया है। ऊंची क्रूड कीमतें महंगाई और ब्याज दरों को लेकर चिंता बढ़ा सकती हैं जिसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखाई दे सकता है।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII की गतिविधि भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण रहेगी। सितंबर में विदेशी निवेशकों की बिकवाली बढ़ी है जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी DII की खरीदारी ने बाजार को कुछ सहारा दिया है। ऐसे में 21 सितंबर के कारोबार में निवेशक विदेशी और घरेलू निवेश के आंकड़ों पर नजर रख सकते हैं। सितंबर में अब तक FII की बिकवाली और DII की खरीदारी के बीच बड़ा अंतर देखने को मिला है।

    निफ्टी के तकनीकी स्तरों की बात करें तो बाजार विश्लेषणों में 23000 से 23100 के आसपास के क्षेत्र को महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन माना गया है। वहीं 23600 से 23700 के आसपास का स्तर महत्वपूर्ण प्रतिरोध क्षेत्र के तौर पर देखा जा रहा है। इन स्तरों के आसपास बाजार की चाल में बदलाव देखने को मिल सकता है। हालांकि ये तकनीकी स्तर बाजार की दिशा की गारंटी नहीं देते और वास्तविक कारोबार वैश्विक तथा घरेलू घटनाक्रम के आधार पर बदल सकता है।

    इस सप्ताह NSE का IPO भी बाजार की चर्चा में रहेगा। NSE का IPO 17 सितंबर को खुला था और 21 सितंबर को इसका सब्सक्रिप्शन समाप्त होना है। इसके बाद 24 सितंबर को लिस्टिंग प्रस्तावित है। इस बड़े IPO से जुड़े आंकड़ों और निवेशकों की प्रतिक्रिया पर भी बाजार की नजर रहेगी।

    इसके अलावा अमेरिकी बॉन्ड यील्ड वैश्विक ब्याज दरों की स्थिति रुपये की चाल और पश्चिम एशिया से जुड़ी खबरें भी भारतीय बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे माहौल में 21 सितंबर को कारोबार के दौरान उतार चढ़ाव बना रह सकता है। निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे किसी भी शेयर में पैसा लगाने से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति और अपने जोखिम को समझें। बाजार में तेजी या गिरावट देखकर जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय उपलब्ध जानकारी के आधार पर निवेश संबंधी निर्णय लेना अधिक उचित माना जाता है।

  • हफ्ते के आखिरी दिन बाजार में मिला-जुला रुख निफ्टी चढ़ा IT शेयर फिसले जानिए किन सेक्टरों में रही तेजी

    हफ्ते के आखिरी दिन बाजार में मिला-जुला रुख निफ्टी चढ़ा IT शेयर फिसले जानिए किन सेक्टरों में रही तेजी


    नई दिल्ली। हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में पूरे दिन उतार-चढ़ाव देखने को मिला। कारोबार के दौरान कभी बाजार में तेजी दिखाई दी तो कभी बिकवाली का दबाव बढ़ा। अंत में सेंसेक्स मामूली गिरावट के साथ लगभग सपाट बंद हुआ जबकि निफ्टी बढ़त के साथ बंद होने में कामयाब रहा। व्यापक बाजार में हालांकि खरीदारी का रुझान मजबूत रहा और मिडकैप तथा स्मॉलकैप इंडेक्स में भी तेजी दर्ज की गई।

    कारोबार समाप्त होने पर 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 19.63 अंक यानी 0.03 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 74294.96 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 50 में 75.80 अंक यानी 0.33 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई और यह 23346.40 के स्तर पर पहुंच गया। इस तरह दोनों प्रमुख सूचकांकों में अलग अलग रुख देखने को मिला।

    व्यापक बाजार की बात करें तो निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 1.24 प्रतिशत की तेजी रही जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 1.74 प्रतिशत ऊपर बंद हुआ। इससे संकेत मिला कि शुक्रवार के कारोबार में बड़ी कंपनियों के अलावा मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही।

    सेक्टर के स्तर पर भी बाजार में अलग अलग रुझान दिखाई दिए। निफ्टी मेटल निफ्टी रियल्टी निफ्टी ऑयल एंड गैस निफ्टी सीमेंट और निफ्टी केमिकल में मजबूती रही। दूसरी ओर निफ्टी आईटी में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई। आईटी शेयरों में कमजोरी की एक वजह प्रॉफिट बुकिंग को माना गया। लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरों के कारण वैश्विक स्तर पर टेक्नोलॉजी खर्च पर संभावित असर को लेकर भी बाजार में चिंता बनी हुई है।

    निफ्टी 50 में अदाणी पोर्ट्स अदाणी एंटरप्राइजेज भारती एयरटेल एचडीएफसी बैंक पावरग्रिड अल्ट्राटेक सीमेंट और अपोलो हॉस्पिटल जैसे शेयर बढ़त वाले प्रमुख शेयरों में शामिल रहे। वहीं टीसीएस टीएमपीवी एसबीआई लाइफ कोल इंडिया मारुति सुजुकी एनटीपीसी टाटा कंज्यूमर और सन फार्मा में गिरावट देखने को मिली।

    बाजार के एक विशेषज्ञ के अनुसार लगातार बनी भू राजनीतिक अनिश्चितता के बावजूद कच्चे तेल की कीमतों और ग्लोबल यील्ड में नरमी ने निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को कुछ समर्थन दिया। इसके चलते भारतीय इक्विटी बाजार में रिकवरी का रुझान जारी रहा। बड़े केंद्रीय बैंकों की ओर से उम्मीद के मुताबिक नीतिगत फैसलों के बाद मिले सकारात्मक वैश्विक संकेतों से भी निवेशकों का भरोसा बढ़ने की बात कही गई।

    विशेषज्ञ के अनुसार बाजार की रिकवरी कई सेक्टर में दिखाई दी लेकिन आईटी शेयरों में मुनाफावसूली का दबाव रहा। आगे बाजार की दिशा को लेकर वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां महत्वपूर्ण रहेंगी। कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक यील्ड में नरमी से फिलहाल राहत मिली है लेकिन यह रिकवरी कितनी टिकाऊ रहती है यह ग्लोबल मैक्रो जोखिमों में कमी और विदेशी निवेशकों की ओर से लगातार निवेश पर निर्भर कर सकता है।

    कुल मिलाकर शुक्रवार का कारोबार भारतीय शेयर बाजार के लिए मिश्रित रहा। सेंसेक्स लगभग सपाट रहा जबकि निफ्टी और व्यापक बाजार सूचकांकों में बढ़त देखने को मिली। अगले कारोबारी सत्र में निवेशकों की नजर वैश्विक संकेतों विदेशी निवेश और विभिन्न सेक्टरों में खरीदारी की दिशा पर रहेगी।

  • शेयर मार्केट में उतार-चढ़ाव जारी: निफ्टी और सेंसेक्स पर ग्लोबल संकेतों का असर जानिए बाजार की पूरी तस्वीर

    शेयर मार्केट में उतार-चढ़ाव जारी: निफ्टी और सेंसेक्स पर ग्लोबल संकेतों का असर जानिए बाजार की पूरी तस्वीर


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में 18 सितंबर को निवेशकों की नजर घरेलू संकेतों के साथ वैश्विक घटनाक्रम पर भी बनी रहेगी। 17 सितंबर के कारोबारी सत्र में बाजार ने काफी उतार चढ़ाव के बीच लगभग सपाट रुख दिखाया था। कारोबारी दिन के अंत में Nifty 50 करीब 0.23 प्रतिशत की बढ़त के साथ 23270.60 के स्तर पर बंद हुआ जबकि Sensex 0.03 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 74314.59 पर रहा। बाजार में हाल की गिरावट के बाद कुछ चुनिंदा शेयरों में खरीदारी जरूर दिखाई दी लेकिन निवेशकों का रुख पूरी तरह से जोखिम लेने वाला नहीं रहा।

    18 सितंबर के कारोबार में सबसे बड़ा असर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले का रह सकता है। फेड ने ब्याज दर में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी की है और ब्याज दर का दायरा 3.75 से 4 प्रतिशत कर दिया है। इसके साथ ही आगे भी दरों में बढ़ोतरी की संभावना का संकेत दिया गया है। इससे अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ है और दुनियाभर के बाजारों में निवेशकों की नजर ब्याज दरों और बॉन्ड यील्ड पर बनी हुई है। भारतीय बाजार के लिए यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिकी ब्याज दरों में बढ़ोतरी से विदेशी निवेशकों के लिए अमेरिकी परिसंपत्तियां आकर्षक हो सकती हैं और उभरते बाजारों से विदेशी पूंजी पर दबाव बढ़ सकता है।

    रुपये की चाल भी बाजार के लिए अहम संकेत रहेगी। 17 सितंबर को भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 95.93 के स्तर पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान रुपया 96 के स्तर के पार भी गया था लेकिन बाद में इसमें सुधार देखने को मिला। Reuters के मुताबिक संभावित RBI हस्तक्षेप और पोर्टफोलियो निवेश से रुपये को कुछ सहारा मिला। ऐसे में 18 सितंबर को डॉलर इंडेक्स और रुपये की दिशा पर निवेशकों की नजर बनी रह सकती है।

    कच्चा तेल भी बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारकों में शामिल रहेगा। 17 सितंबर को Brent crude करीब 104.8 डॉलर प्रति बैरल पर रहा। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए लंबे समय तक ऊंची तेल कीमतें महंगाई और आयात बिल से जुड़े दबाव बढ़ा सकती हैं। ऐसे में तेल की कीमतों में तेजी या गिरावट का असर बाजार के अलग अलग सेक्टर पर दिखाई दे सकता है।

    सेक्टर के लिहाज से 17 सितंबर को ऑटो और मेटल शेयरों में खरीदारी देखने को मिली थी। वहीं व्यापक बाजार में भी मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों ने मजबूती दिखाई। Business Standard के अनुसार कारोबारी सत्र के दौरान Nifty Metal में भी बढ़त रही और बाजार की चौड़ाई सकारात्मक बनी रही।

    18 सितंबर को निवेशकों की नजर विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों की गतिविधियों पर भी रहेगी। 17 सितंबर से पहले उपलब्ध आंकड़ों में विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी थी जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी बाजार को सहारा दे रही थी। इस खींचतान के बीच Nifty और Sensex में उतार चढ़ाव बढ़ सकता है। इसलिए बाजार की चाल को केवल एक संकेत के आधार पर समझने के बजाय वैश्विक बाजार रुपये कच्चे तेल विदेशी निवेश और अमेरिकी ब्याज दरों को साथ देखकर समझना महत्वपूर्ण रहेगा।