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  • आत्मनिर्भर बैटरी इकोसिस्टम के लिए सेकंड-लाइफ तकनीक जरूरी, पुन: उपयोग और रीसाइक्लिंग पर विशेषज्ञों ने दिया जोर

    आत्मनिर्भर बैटरी इकोसिस्टम के लिए सेकंड-लाइफ तकनीक जरूरी, पुन: उपयोग और रीसाइक्लिंग पर विशेषज्ञों ने दिया जोर

    नई दिल्ली । भारत में मजबूत, आत्मनिर्भर और सर्कुलर बैटरी इकोसिस्टम विकसित करने के लिए केवल बैटरी निर्माण क्षमता बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं ने बैटरियों के निर्माण से लेकर उनके उपयोग, सेकंड-लाइफ एप्लिकेशन और जीवनचक्र समाप्त होने के बाद प्रबंधन तक पूरी व्यवस्था को एक साथ विकसित करने की जरूरत बताई है।

    राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित एक राष्ट्रीय सम्मेलन में बैटरी क्षेत्र से जुड़े अवसरों और चुनौतियों पर चर्चा हुई। इसमें नीति निर्माताओं, उद्योग प्रतिनिधियों, शोधकर्ताओं और अन्य हितधारकों ने भारत में तेजी से विकसित हो रहे बैटरी इकोसिस्टम को लेकर विचार साझा किए।

    द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट की महानिदेशक डॉ. विभा धवन ने कहा कि बैटरी क्षेत्र पर चर्चा केवल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इलेक्ट्रिक वाहनों में इस्तेमाल के बाद भी जिन बैटरियों में पर्याप्त क्षमता बची रहती है, उनके सेकंड-लाइफ एप्लिकेशन की संभावनाओं पर ध्यान देना जरूरी है। इससे बैटरियों के उपयोगी जीवन को बढ़ाया जा सकता है और उनकी आर्थिक उपयोगिता का बेहतर इस्तेमाल संभव होगा।

    भारी उद्योग मंत्रालय के संयुक्त सचिव विजय मित्तल ने घरेलू विनिर्माण और सप्लाई चेन को मजबूत करने के साथ सेकंड-लाइफ बैटरियों, ट्रेसबिलिटी, मानकों और रीसाइक्लिंग से जुड़े ढांचे के विकास की जरूरत बताई। उनके अनुसार ऐसे प्रयास भारत में प्रतिस्पर्धी और सर्कुलर बैटरी अर्थव्यवस्था विकसित करने में मदद कर सकते हैं।

    नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के वैज्ञानिक कुलदीप राणा ने कहा कि सेकंड-लाइफ बैटरियों का इस्तेमाल केवल इलेक्ट्रिक वाहनों से जुड़े क्षेत्रों तक सीमित नहीं है। इनका उपयोग घरेलू उपकरणों, रूफटॉप सोलर पीवी सिस्टम और यूपीएस सिस्टम जैसे क्षेत्रों में भी किया जा सकता है।

    सम्मेलन के दौरान बैटरी वैल्यू चेन के कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा हुई। इनमें घरेलू एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल निर्माण क्षमता का विस्तार, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का विकास और इस्तेमाल की जा चुकी बैटरियों के पुन: उपयोग, पुनर्प्रयोजन तथा रीसाइक्लिंग की बढ़ती जरूरत शामिल रही।

    वरिष्ठ निदेशक ए.के. सक्सेना ने कहा कि बैटरी क्षेत्र में केवल उत्पादन की मात्रा बढ़ाने के बजाय मूल्य सृजन को स्थानीय स्तर पर बढ़ावा देने पर ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने बैटरियों को शुरुआती डिजाइन चरण से ही सर्कुलर दृष्टिकोण को ध्यान में रखकर तैयार करने की आवश्यकता बताई।

    उन्होंने यह भी कहा कि सेकंड-लाइफ बैटरियों की बची हुई क्षमता और प्रदर्शन का सही आकलन जरूरी है। इससे इन बैटरियों के इस्तेमाल को लेकर उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

    इंडिया एनर्जी स्टोरेज एलायंस के प्रबंध निदेशक विनायक वालिम्बे ने भारत में मजबूत और प्रतिस्पर्धी बैटरी उद्योग के निर्माण के लिए घरेलू मूल्य संवर्धन बढ़ाने पर जोर दिया।

    वहीं, बीएसईएस राजधानी पावर लिमिटेड की वरिष्ठ प्रबंधक सुगंधिता वाधेरा ने भविष्य में बढ़ने वाली बिजली मांग के प्रभावी प्रबंधन पर बात रखी। उन्होंने राज्यों के लिए क्षमता नियोजन, मजबूत भुगतान सुरक्षा व्यवस्था और वितरण क्षेत्र में अधिक लचीले ऊर्जा संसाधनों की जरूरत बताई। उनके अनुसार इससे ऊर्जा तंत्र को अधिक मजबूत बनाने और बदलती जरूरतों के अनुसार तेजी से प्रतिक्रिया देने में मदद मिल सकती है।

  • चावल में घुन और कीड़े लगने से बचाना है तो स्टोरेज के दौरान अपनाएं ये आसान घरेलू तरीके

    चावल में घुन और कीड़े लगने से बचाना है तो स्टोरेज के दौरान अपनाएं ये आसान घरेलू तरीके

    नई दिल्ली । घर में चावल को लंबे समय तक सुरक्षित रखना है तो सिर्फ उसे डिब्बे में भरकर रखना पर्याप्त नहीं होता। खासकर नमी वाले मौसम में अगर चावल को सही तरीके से स्टोर न किया जाए, तो उसमें घुन या छोटे कीड़े दिखाई दे सकते हैं। कंटेनर में मौजूद नमी, ढीला ढक्कन और गीले चम्मच का इस्तेमाल इस समस्या का जोखिम बढ़ा सकता है। इसलिए चावल को सुरक्षित रखने के लिए कुछ छोटी लेकिन जरूरी सावधानियां अपनाना फायदेमंद हो सकता है।

    सबसे पहले चावल को हमेशा साफ और पूरी तरह सूखे एयरटाइट कंटेनर में रखना चाहिए। खुले पैकेट या ढीले ढक्कन वाले डिब्बे में चावल रखने से नमी और कीड़ों के संपर्क का खतरा बढ़ सकता है। इसके लिए कांच, स्टील या फूड-ग्रेड प्लास्टिक का साफ कंटेनर इस्तेमाल किया जा सकता है। कंटेनर में चावल भरने से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि उसमें किसी तरह की नमी न हो।

    चावल को कीड़ों से बचाने के लिए कुछ लोग सूखे तेजपत्ते का भी इस्तेमाल करते हैं। चावल के डिब्बे में कुछ पूरी तरह सूखे तेजपत्ते रखे जा सकते हैं। इसकी तेज खुशबू कीड़ों को दूर रखने में मदद कर सकती है। हालांकि पत्तियां सूखी होनी चाहिए, क्योंकि नमी बढ़ने पर समस्या उलटे बढ़ सकती है।

    सूखी नीम की पत्तियों का इस्तेमाल भी अनाज को कीड़ों से बचाने के पारंपरिक घरेलू तरीकों में किया जाता है। अगर इस उपाय को अपनाया जाए तो नीम की पत्तियां बिल्कुल सूखी होनी चाहिए। इसी तरह कुछ लोग चावल के डिब्बे में साबुत लौंग रखने का तरीका भी अपनाते हैं। लौंग की तेज खुशबू कीड़ों को दूर रखने में मदद कर सकती है, लेकिन इसे चावल की सुरक्षा का अकेला उपाय नहीं माना जाना चाहिए।

    कुछ घरेलू तरीकों में चावल के साथ साबुत और सूखी लहसुन की कलियां रखने की सलाह भी दी जाती है। अगर लहसुन का इस्तेमाल किया जा रहा है तो वह सूखा होना चाहिए। गीली या छिली हुई लहसुन की कलियां डालने से कंटेनर में अतिरिक्त नमी पहुंच सकती है, जिससे चावल खराब होने का खतरा बढ़ सकता है।

    चावल के डिब्बे को ऐसी जगह रखना भी जरूरी है जहां भाप या नमी अधिक न हो। सिंक, गैस या नमी वाली जगह के आसपास चावल रखने से बचना चाहिए। चावल निकालते समय हमेशा सूखे चम्मच का इस्तेमाल करें। गीले चम्मच से कंटेनर में नमी पहुंच सकती है और लंबे समय में चावल की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।

    एक और जरूरी बात यह है कि नया चावल पुराने चावल के साथ सीधे नहीं मिलाना चाहिए। पहले पुराने चावल का इस्तेमाल करें। इसके बाद कंटेनर को अच्छी तरह साफ करके पूरी तरह सुखाएं और फिर उसमें नया चावल भरें। इससे पुराने स्टॉक से किसी संभावित कीट या उसके अंडों के नए चावल तक पहुंचने का जोखिम कम किया जा सकता है।

    अगर चावल में पहले से थोड़े कीड़े दिखाई दे रहे हैं, तो उसे अलग करके अच्छी तरह जांचना चाहिए। चावल को कुछ दिनों के लिए फ्रीजर में रखने का विकल्प भी अपनाया जाता है। इसके बाद चावल को छानकर और अच्छी तरह सुखाकर साफ, एयरटाइट डिब्बे में रखा जा सकता है। लेकिन अगर चावल में बहुत ज्यादा कीड़े, फफूंद, नमी या खराब गंध दिखाई दे, तो उसे इस्तेमाल करने के बजाय फेंक देना बेहतर है।

  • कितने घंटे पुरानी रोटी खाना सुरक्षित है, जानिए बासी रोटी खाने के फायदे और किन परिस्थितियों में इससे बचना चाहिए

    कितने घंटे पुरानी रोटी खाना सुरक्षित है, जानिए बासी रोटी खाने के फायदे और किन परिस्थितियों में इससे बचना चाहिए


    नई दिल्ली ।
    भारतीय भोजन में रोटी का खास स्थान है। लंच से लेकर डिनर तक ज्यादातर घरों में रोटी नियमित रूप से खाई जाती है। कई बार रात के खाने में जरूरत से ज्यादा रोटियां बन जाती हैं और कुछ रोटियां अगले दिन के लिए बच जाती हैं। ऐसे में अक्सर यह सवाल उठता है कि रात की बची हुई रोटी कितनी देर तक खाने के लिए सुरक्षित रहती है और क्या बासी रोटी खाने से कोई फायदा भी हो सकता है।

    रोटी को लेकर सबसे जरूरी बात उसके सही तरीके से रखे जाने की है। अगर रोटी को बनाकर खुले में छोड़ दिया जाए, तो मौसम के अनुसार वह कुछ ही घंटों में खराब हो सकती है। खासतौर पर गर्म मौसम में भोजन के जल्दी खराब होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में रात की बची रोटी को अगले दिन खाना जोखिम भरा हो सकता है।

    अगर रोटी को किसी साफ और बंद डिब्बे में रखकर फ्रिज में सुरक्षित तरीके से रखा गया है, तो इसे अगले दिन सुबह या दोपहर तक खाया जा सकता है। सामान्य तौर पर रोटी को 12 से 24 घंटे तक ही सुरक्षित माना जाता है। 24 घंटे से ज्यादा पुरानी रोटी खाने से बचने की सलाह दी जाती है। लंबे समय तक रखे गए भोजन में बैक्टीरिया या फंगस पनपने का खतरा बढ़ सकता है, जिससे पेट खराब होने जैसी परेशानी हो सकती है।

    सही तरीके से रखी गई और लगभग 12 से 15 घंटे पुरानी रोटी के कुछ संभावित फायदे भी बताए जाते हैं। रोटी ठंडी होने के बाद उसमें मौजूद स्टार्च का एक हिस्सा रेजिस्टेंट स्टार्च में बदल जाता है। इसे पचने में अपेक्षाकृत अधिक समय लगता है। इससे पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस हो सकता है और बार-बार भूख लगने की संभावना कम हो सकती है। इसी वजह से वजन नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए ठंडी रोटी को एक विकल्प माना जाता है।

    बासी रोटी में मौजूद फाइबर पाचन तंत्र के लिए भी उपयोगी हो सकता है। सुबह पेट साफ नहीं होने जैसी समस्या से परेशान लोग ठंडी रोटी को दूध के साथ खाने का विकल्प अपना सकते हैं। इसके अलावा ठंडी रोटी को सुबह ठंडे दूध में मिलाकर खाने से शरीर की गर्मी कम महसूस होने और पेट को ठंडक मिलने की बात भी कही जाती है।

    हालांकि, बासी रोटी खाने से पहले उसकी स्थिति की जांच करना जरूरी है। अगर रोटी से अजीब या खराब गंध आ रही हो, उसका रंग बदल गया हो या उस पर फंगस अथवा सफेद धब्बे दिखाई दे रहे हों, तो उसे बिल्कुल नहीं खाना चाहिए। ऐसी रोटी को तुरंत फेंक देना बेहतर है।

    फ्रिज में रखी रोटी खाने से पहले उसे हल्का गर्म किया जा सकता है। इससे रोटी नरम हो जाती है और उसे खाना आसान रहता है। इस तरह रात की बची रोटी को सुरक्षित तरीके से रखने और समय सीमा का ध्यान रखने पर ही अगले दिन इस्तेमाल करना बेहतर है।

  • मध्य प्रदेश में ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा, एडीबी सहयोग से ओंकारेश्वर में 600 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर परियोजना की तैयारी

    मध्य प्रदेश में ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा, एडीबी सहयोग से ओंकारेश्वर में 600 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर परियोजना की तैयारी

    मध्य प्रदेश: सरकार नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में अपनी क्षमता बढ़ाने के साथ ग्रीन एनर्जी को राज्य के आर्थिक और औद्योगिक विकास से जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सरकार का जोर सौर ऊर्जा समेत स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों के विस्तार पर है। इसके साथ ही निवेश आकर्षित करने और रोजगार के नए अवसर तैयार करने को भी प्राथमिकता दी जा रही है।

    इसी क्रम में रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर लिमिटेड और एशियन डेवलपमेंट बैंक के बीच महत्वपूर्ण समझौता हुआ है। इसके तहत नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र की तीन प्रमुख परियोजनाओं के लिए ट्रांजेक्शन एडवाइजरी सर्विसेज उपलब्ध कराई जा रही हैं। खास बात यह है कि इन सलाहकारी सेवाओं के लिए एडीबी की ओर से कोई शुल्क नहीं लिया जा रहा है।

    सरकार की योजना ऐसे व्यावसायिक मॉडल और लेनदेन ढांचे तैयार करने की है, जिससे नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं में निवेश करना आसान हो और उनका संचालन लंबे समय तक आर्थिक रूप से टिकाऊ बना रहे। इससे निजी और संस्थागत निवेशकों के लिए परियोजनाओं में भागीदारी की संभावनाएं बढ़ने की उम्मीद है।

    ओंकारेश्वर में प्रस्तावित फ्लोटिंग सोलर परियोजना इस योजना का प्रमुख हिस्सा है। जलाशय की सतह पर सौर पैनल स्थापित कर बिजली उत्पादन करने वाली इस तकनीक के जरिए उपलब्ध जल क्षेत्र का उपयोग किया जाएगा। ओंकारेश्वर में 278 मेगावाट क्षमता के एक चरण के लिए परियोजना संबंधी समझौता किया गया है।

    इसके अलावा ओंकारेश्वर में लगभग 300 मेगावाट अतिरिक्त क्षमता विकसित करने के लिए जरूरी जलाशय क्षेत्र और आधारभूत ढांचा उपलब्ध बताया गया है। इस तरह कुल मिलाकर करीब 600 मेगावाट क्षमता वाले फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट की दिशा में तैयारी की जा रही है। परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए सर्वेक्षण, प्री फिजिबिलिटी और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट से संबंधित अध्ययन भी किए जा चुके हैं।

    नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन की प्रकृति को देखते हुए सरकार अब बिजली भंडारण को भी परियोजनाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा बना रही है। सौर ऊर्जा दिन के समय उपलब्ध रहती है, जबकि बिजली की मांग कई बार अलग-अलग समय पर बढ़ती है। ऐसे में ऊर्जा भंडारण प्रणाली उत्पादन और मांग के बीच संतुलन बनाने में उपयोगी हो सकती है।

    ओंकारेश्वर की प्रस्तावित परियोजना में दो घंटे की को-लोकेटेड एनर्जी स्टोरेज सिस्टम व्यवस्था का प्रावधान रखा गया है। इससे सौर ऊर्जा से उत्पादित बिजली को जरूरत के समय इस्तेमाल करने की क्षमता बढ़ाने की योजना है। पीएम सूर्य सरोवर योजना के तहत ऐसे प्रोजेक्ट्स के लिए केंद्रीय वित्तीय सहायता का प्रावधान भी बताया गया है।

    राज्य सरकार का लक्ष्य केवल सौर बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाना नहीं है। सरकार नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को औद्योगिक निवेश, ग्रीन इन्वेस्टमेंट, रोजगार सृजन और आर्थिक गतिविधियों के विस्तार से जोड़ना चाहती है। इसके लिए परियोजनाओं को वित्तीय और तकनीकी रूप से व्यवहारिक बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

    मध्य प्रदेश में सौर ऊर्जा की उपलब्ध संभावनाओं, जलाशयों और विकसित हो रहे ऊर्जा ढांचे को देखते हुए सरकार आने वाले समय में इस क्षेत्र में बड़े निवेश की संभावना तलाश रही है। एडीबी के साथ सहयोग और ओंकारेश्वर जैसी परियोजनाओं को इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। ऊर्जा उत्पादन, भंडारण और निवेश को एक साथ आगे बढ़ाकर राज्य को ग्रीन और क्लीन एनर्जी के क्षेत्र में मजबूत स्थिति दिलाने की कोशिश की जा रही है।

  • किचन में कांच के बर्तनों का इस्तेमाल बनाता है सामान व्यवस्थित, स्टोरेज से सफाई तक मिलते हैं ये आठ आसान फायदे

    किचन में कांच के बर्तनों का इस्तेमाल बनाता है सामान व्यवस्थित, स्टोरेज से सफाई तक मिलते हैं ये आठ आसान फायदे

    नई दिल्ली ।किचन में इस्तेमाल होने वाले बर्तनों का चुनाव केवल उनकी खूबसूरती के आधार पर नहीं किया जाता। रोजमर्रा के कामों में ऐसे बर्तन अधिक उपयोगी माने जाते हैं, जिन्हें साफ रखना आसान हो और जिनमें खाद्य सामग्री को व्यवस्थित तरीके से रखा जा सके। इसी वजह से आजकल कई घरों में प्लास्टिक और स्टील के साथ कांच के कंटेनर, जार, बाउल और सर्विंग डिश भी इस्तेमाल किए जाते हैं।

    कांच के बर्तनों की सबसे खास बात उनकी पारदर्शिता है। कंटेनर के अंदर रखी दाल, मसाले, ड्राई फ्रूट्स या अन्य खाद्य सामग्री बाहर से दिखाई देती है। इससे सामान पहचानने के लिए बार बार डिब्बे खोलने की जरूरत नहीं पड़ती और जरूरत की चीज आसानी से ढूंढी जा सकती है।

    कांच की चिकनी सतह के कारण इसे साफ करना भी अपेक्षाकृत आसान होता है। सही तरीके से सफाई करने पर खाद्य पदार्थों के दाग और अवशेष हटाए जा सकते हैं। हालांकि, सफाई के दौरान कांच के बर्तन को गिरने या तेज झटके से बचाना जरूरी होता है।

    कांच की सतह आमतौर पर नॉन पोरस होती है, इसलिए यह कई तरह की तेज गंध को प्लास्टिक जैसी कुछ सामग्रियों की तुलना में कम सोखता है। मसालेदार भोजन, सॉस या अन्य सुगंध वाली चीजें रखने के बाद भी उचित सफाई के साथ कंटेनर को दोबारा इस्तेमाल करना सुविधाजनक हो सकता है।

    ग्लास कंटेनर बचे हुए खाने, फलों, ड्राई फूड और अन्य खाद्य पदार्थों के भंडारण के लिए उपयोग किए जा सकते हैं। कुछ विशेष ग्लास कंटेनर फ्रिज या फ्रीजर में इस्तेमाल के लिए बनाए जाते हैं। हालांकि, किसी भी कांच के बर्तन को कम या ज्यादा तापमान में रखने से पहले उसके इस्तेमाल संबंधी निर्देश देखना जरूरी है।

    कांच के बर्तन केवल स्टोरेज तक सीमित नहीं हैं। ग्लास बाउल और सर्विंग डिश में सलाद, मिठाई और रंगीन व्यंजन आकर्षक दिखाई देते हैं। पारदर्शी बर्तन में भोजन का रंग और उसकी प्रस्तुति साफ नजर आती है, जिससे खाने की मेज पर भी बेहतर लुक मिल सकता है।

    उपयुक्त ग्लास कंटेनर कई कामों में इस्तेमाल किए जा सकते हैं। जरूरत के अनुसार एक ही बर्तन में खाना स्टोर करने, सर्व करने और कुछ मामलों में गर्म करने की सुविधा मिल सकती है। इससे अलग अलग कामों के लिए अतिरिक्त बर्तनों की जरूरत कम हो सकती है।

    पारदर्शी कांच में रखी खाद्य सामग्री का रंग और मात्रा भी आसानी से दिखाई देती है। इससे यह पता लगाने में सुविधा होती है कि कंटेनर में कितना सामान बचा है और उसे दोबारा कब भरने की जरूरत पड़ेगी। इस तरह किचन की सामग्री को व्यवस्थित रखना आसान हो सकता है।

    एक जैसे ग्लास जार और कंटेनर किचन की शेल्फ को साफ और व्यवस्थित रूप दे सकते हैं। खासकर छोटे किचन में अलग अलग सामान को पारदर्शी कंटेनरों में रखने से उपलब्ध जगह का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है और जरूरी सामग्री आसानी से दिखाई देती रहती है।

    हालांकि, कांच के बर्तनों का इस्तेमाल करते समय सावधानी जरूरी है। गर्म ग्लासवेयर को अचानक ठंडे पानी या बहुत ठंडी सतह पर रखने से बचना चाहिए, क्योंकि तापमान में तेज बदलाव से कुछ प्रकार के कांच टूट सकते हैं। माइक्रोवेव, ओवन या फ्रीजर में रखने से पहले यह जरूर जांच लें कि संबंधित कंटेनर उसके लिए उपयुक्त है या नहीं।

  • बारिश में नरम हो जाते हैं होममेड स्नैक्स? अपनाएं ये 5 आसान स्टोरेज टिप्स, लंबे समय तक रहेंगे कुरकुरे

    बारिश में नरम हो जाते हैं होममेड स्नैक्स? अपनाएं ये 5 आसान स्टोरेज टिप्स, लंबे समय तक रहेंगे कुरकुरे

    नई दिल्ली। बारिश का मौसम अपने साथ ठंडी हवाएं और स्वादिष्ट स्नैक्स का आनंद लेकर आता है। इस दौरान घरों में मठरी, नमकपारे, चकली, सेव, रिबन पकोड़ा और कई तरह के पारंपरिक स्नैक्स बड़ी मात्रा में बनाकर स्टोर किए जाते हैं। हालांकि, मानसून में बढ़ी हुई नमी के कारण ये स्नैक्स जल्दी अपनी कुरकुराहट खो देते हैं और कुछ ही दिनों में नरम पड़ने लगते हैं। यदि सही तरीके से इन्हें स्टोर किया जाए तो लंबे समय तक इनका स्वाद और ताजगी बरकरार रखी जा सकती है।

    स्नैक्स को स्टोर करने से पहले यह सुनिश्चित करें कि वे पूरी तरह ठंडे हो चुके हों। कई बार लोग जल्दबाजी में गर्म या हल्के गुनगुने स्नैक्स को डिब्बे में बंद कर देते हैं, जिससे अंदर भाप बनती है और नमी बढ़ने के कारण स्नैक्स जल्दी नरम हो जाते हैं। इसलिए किसी भी तले हुए स्नैक को पूरी तरह ठंडा होने के बाद ही कंटेनर में रखें।

    स्टोरेज के लिए हमेशा अच्छी गुणवत्ता वाले एयरटाइट कंटेनर का इस्तेमाल करना चाहिए। मानसून के दौरान हवा में मौजूद नमी आसानी से खुले डिब्बों या ढीले ढक्कन वाले कंटेनरों में पहुंच जाती है। एयरटाइट कंटेनर स्नैक्स को बाहरी नमी से बचाकर लंबे समय तक कुरकुरा बनाए रखने में मदद करते हैं।

    यदि स्नैक्स को लंबे समय तक सुरक्षित रखना हो तो फूड-ग्रेड मॉइश्चर एब्जॉर्बर या सिलिका जेल पैक का उपयोग किया जा सकता है। यह अतिरिक्त नमी को सोखने में मदद करता है और स्नैक्स की गुणवत्ता बनाए रखता है। हालांकि, इस बात का ध्यान रखें कि सिलिका पैक सीधे खाद्य पदार्थ के संपर्क में न आए और केवल फूड-ग्रेड उत्पादों का ही उपयोग किया जाए।

    बार-बार कंटेनर खोलने से भी स्नैक्स की गुणवत्ता प्रभावित होती है। हर बार डिब्बा खोलने पर बाहर की नम हवा अंदर प्रवेश करती है, जिससे स्नैक्स जल्दी नरम होने लगते हैं। इसलिए बेहतर होगा कि स्नैक्स को छोटे-छोटे एयरटाइट कंटेनरों में अलग-अलग स्टोर करें, ताकि एक बार में केवल जरूरत के अनुसार ही डिब्बा खोला जाए।

    स्नैक्स को हमेशा ठंडी, सूखी और साफ जगह पर रखना चाहिए। गैस स्टोव, सिंक या ऐसी जगह जहां नमी अधिक रहती हो, वहां कंटेनर रखने से बचें। यदि किचन में अधिक सीलन रहती है तो स्नैक्स को पेंट्री या बंद अलमारी में रखना अधिक सुरक्षित विकल्प हो सकता है।

    यदि किसी कारण से मठरी, चकली या नमकपारे हल्के नरम हो जाएं, तो उन्हें कुछ मिनट के लिए ओवन या एयर फ्रायर में कम तापमान पर हल्का गर्म किया जा सकता है। इसके बाद ठंडा होने पर उनकी कुरकुराहट काफी हद तक वापस आ जाती है। हालांकि, अधिक देर तक गर्म करने से स्नैक्स जल भी सकते हैं, इसलिए तापमान और समय का विशेष ध्यान रखना जरूरी है।