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  • जेब में सिर्फ 300 रुपये, दिल में बड़े सपने: यश के संघर्ष से सुपरस्टार बनने तक की कहानी

    जेब में सिर्फ 300 रुपये, दिल में बड़े सपने: यश के संघर्ष से सुपरस्टार बनने तक की कहानी


    नई दिल्ली । साउथ फिल्म इंडस्ट्री में जब भी मेहनत और संघर्ष से सफलता पाने वाले कलाकारों की बात होती है तो अभिनेता यश का नाम सबसे ऊपर लिया जाता है। आज करोड़ों दिलों पर राज करने वाले यश का सफर आसान नहीं रहा। जेब में सिर्फ 300 रुपये और आंखों में बड़े सपने लेकर घर छोड़ने वाला यह युवक आज भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े सुपरस्टार्स में गिना जाता है।

    अभिनेता यश का जन्म 8 जनवरी 1986 को कर्नाटक के हासन जिले के छोटे से गांव भुवनहल्ली में हुआ था। उनका असली नाम नवीन कुमार गौड़ा है। उनके पिता बीएमटीसी में बस चालक थे और माता एक गृहिणी थीं। परिवार साधारण था और माता-पिता चाहते थे कि बेटा पढ़-लिखकर सुरक्षित सरकारी नौकरी करे। लेकिन यश का मन बचपन से ही अभिनय की दुनिया में बस चुका था।स्कूल के दिनों में यश नाटकों और डांस प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेते थे। मंच पर तालियों की गूंज उन्हें खास सुकून देती थी और यहीं से उनके भीतर अभिनेता बनने का सपना मजबूत होता गया। जब परिवार ने उनके इस सपने का विरोध किया तो यश ने एक कठिन लेकिन साहसी फैसला लिया। वह सिर्फ 300 रुपये लेकर घर से निकल पड़े और बेंगलुरु का रुख किया। उन्हें डर था कि अगर वापस लौटे तो फिर कभी अपने सपनों के पीछे नहीं भाग पाएंगे।

    बेंगलुरु पहुंचकर यश ने थिएटर से अपने करियर की शुरुआत की। शुरुआती दिनों में उन्हें बड़े रोल नहीं मिले। वह बैकस्टेज काम करते रिप्लेसमेंट कलाकार बनते और छोटे-छोटे किरदार निभाते रहे। कई बार हालात इतने मुश्किल हुए कि गुजारा करना भी चुनौती बन गया लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। यही संघर्ष उनके भविष्य की मजबूत नींव बना।साल 2008 में यश को कन्नड़ फिल्म मोगिना मनासु से सिनेमा में पहला बड़ा मौका मिला। इस फिल्म में उनके अभिनय को काफी सराहा गया और उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड फॉर बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर भी मिला। इसके बाद राजधानी गजकेसरी मास्टरपीस जैसी फिल्मों ने उन्हें कन्नड़ सिनेमा का जाना-पहचाना चेहरा बना दिया।

    हालांकि यश की जिंदगी का सबसे बड़ा मोड़ 2018 में आया जब केजीएफ चैप्टर 1 रिलीज हुई। फिल्म में रॉकी भाई का किरदार निभाकर उन्होंने पूरे देश में पहचान बना ली। इसके बाद केजीएफ चैप्टर 2 ने इतिहास रच दिया और 1100 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई कर कन्नड़ सिनेमा को वैश्विक पहचान दिलाई।निजी जीवन में यश ने अपनी को-स्टार राधिका पंडित से 2016 में शादी की। दोनों ने मिलकर यशो मार्ग फाउंडेशन की शुरुआत की जो ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा और जल संरक्षण के लिए काम करता है। आज यश सिर्फ एक सुपरस्टार नहीं बल्कि संघर्ष आत्मविश्वास और मेहनत की मिसाल बन चुके हैं।

  • सुपरस्टार बनने से पहले संघर्ष के दिन, Gippy Grewal की संघर्ष और मेहनत की कहानी

    सुपरस्टार बनने से पहले संघर्ष के दिन, Gippy Grewal की संघर्ष और मेहनत की कहानी


    नई दिल्ली। पंजाबी फिल्मों और संगीत की दुनिया के सुपरस्टार गिप्पी ग्रेवाल ने सफलता का लंबा सफर मेहनत और संघर्ष से तय किया है। आज जहां उनका नाम करोड़ों फैंस के दिलों में गूंजता है, वहीं शुरूआत में उन्होंने गाड़ियों धोने, सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी और कनाडा में रेस्तरां में वेटर जैसी नौकरियां की। गिप्पी का जन्म 2 जनवरी 1983 को हुआ था और आज वह अपना 39वां जन्मदिन मना रहे हैं।

    बचपन से संगीत की ओर झुकाव
    गिप्पी बचपन से ही संगीत और नाटकों में रुचि रखते थे। पढ़ाई में उनकी दिलचस्पी कम थी, और उन्होंने केवल इतनी पढ़ाई की कि पास हो सकें। 12वीं के बाद उन्होंने म्यूजिक सीखना शुरू किया।

    उनके गुरु ने उनकी रफ आवाज पर काम करने की सलाह दी, जिसे उन्होंने सुधारकर अपनी अलग पहचान बनाई। यह रफ और अनोखी आवाज ही उन्हें पंजाबी संगीत और फिल्मों में अलग मुकाम दिलाने में मददगार साबित हुई।

    छोटी नौकरियों से बड़ी मंजिल तक
    गिप्पी ग्रेवाल पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री में अभिनेता, गायक, निर्माता, निर्देशक और लेखक के रूप में सक्रिय हैं। फिल्मों में आने से पहले उन्होंने कनाडा में वेटर, दिल्ली में सिक्योरिटी गार्ड और गाड़ियों की धोने जैसी नौकरियों में काम किया।

    उनका मानना है कि किसी भी काम में शर्म नहीं होनी चाहिए और ईमानदारी से कमाए पैसे से ही सुकून मिलता है। यही मेहनत और समर्पण उन्हें संगीत में करियर बनाने के लिए प्रेरित करता रहा।

    संगीत और फिल्म की दुनिया में धमाका
    गिप्पी ने अपने संगीत करियर की शुरुआत हिट अलबम ‘चक्ख लाई’ से की। इसके बाद साल 2010 में उन्हें पंजाबी फिल्म ‘मेल करादे रब्बा’ में काम करने का मौका मिला और फिर ‘जिहने मेरा दिल लुटेया’ में उनकी लोकप्रियता बढ़ी। साल 2012 में उन्होंने खुद ‘कैरी ऑन जट्टा’ का निर्माण किया, जो इंडस्ट्री की बड़ी हिट साबित हुई। इसके बाद ‘कैरी ऑन जट्टा 2’ ने बॉक्स ऑफिस पर 60 करोड़ रुपये कमाए। अब उनके फैंस इस साल तीसरे भाग का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

    मेहनत और ईमानदारी की मिसाल
    गिप्पी ग्रेवाल की कहानी यह साबित करती है कि संघर्ष, मेहनत और ईमानदारी से कोई भी व्यक्ति अपने सपनों को साकार कर सकता है। आज वह पंजाबी सिनेमा के सुपरस्टार हैं और संगीत की दुनिया में भी करोड़ों फैंस के दिलों पर राज कर रहे हैं। उनके संघर्ष और सफलता की कहानी नए कलाकारों और फैंस के लिए प्रेरणा का स्त्रोत बनी हुई है।