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  • फिल्मी दुनिया में भाषा नहीं, प्रतिभा मायने रखती है: नॉर्थ-साउथ बहस पर बोले बोमन ईरानी

    फिल्मी दुनिया में भाषा नहीं, प्रतिभा मायने रखती है: नॉर्थ-साउथ बहस पर बोले बोमन ईरानी


    नई दिल्ली । भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में लंबे समय से चल रही उत्तर और दक्षिण सिनेमा की बहस पर अभिनेता Boman Irani ने अपनी स्पष्ट राय रखते हुए कहा है कि यह चर्चा अब पुरानी और थकाने वाली हो चुकी है। उनके अनुसार, फिल्म इंडस्ट्री में भाषा या क्षेत्रीय पहचान से ज्यादा महत्वपूर्ण कहानी और काम की गुणवत्ता है।

    बोमन ईरानी इन दिनों अपनी आगामी फिल्म ‘पेड्डी’ के प्रमोशन में व्यस्त हैं, जिसमें वह अहम भूमिका निभा रहे हैं। इसी दौरान एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि भारतीय सिनेमा को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर देखना सही नहीं है, क्योंकि अंततः यह एक ही देश की रचनात्मक दुनिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि “हम सब भारतीय हैं” और किसी भी कलाकार की पहचान उसकी प्रतिभा और काम से होनी चाहिए, न कि उसकी भाषा या क्षेत्र से।

    उन्होंने यह भी बताया कि भारत में भाषाई विविधता बहुत गहरी है और हर कुछ किलोमीटर पर बोली बदल जाती है, लेकिन इससे लोगों के बीच दूरी नहीं बननी चाहिए। उनके अनुसार, एक व्यक्ति अलग भाषा बोल सकता है, लेकिन भावनाएं और सिनेमा की आत्मा समान रहती है। यही कारण है कि आज भारतीय फिल्में क्षेत्रीय सीमाओं से बाहर निकलकर पूरे देश और दुनिया में सराही जा रही हैं।

    अपनी आने वाली फिल्म का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि अब ऐसे समय में जब हैदराबाद जैसे शहरों में बनी फिल्में पूरे देश में प्रमोट हो रही हैं और मुंबई जैसे बड़े फिल्म हब में उनका स्वागत हो रहा है, तो यह साफ संकेत है कि इंडस्ट्री धीरे-धीरे एक साझा मंच की ओर बढ़ रही है। यह बदलाव भारतीय सिनेमा की एकता और विस्तार को दर्शाता है।

    बोमन ईरानी ने अभिनय की गहराई पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि एक अच्छे अभिनेता के लिए भाषा से ज्यादा जरूरी है संवाद के भीतर छिपे भाव और अर्थ को समझना। उनके अनुसार, अभिनय केवल शब्द बोलने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि उसमें भावनाओं और सोच की गहराई को सही तरीके से दर्शकों तक पहुंचाना सबसे अहम है।

    उन्होंने यह भी कहा कि कलाकार को पहले अपने विचारों को समझकर अपनी भाषा में तैयार करना चाहिए और फिर उसे पर्दे पर व्यक्त करना चाहिए, ताकि दर्शक उससे जुड़ सकें। उनका मानना है कि अगर भावनाएं सही तरीके से प्रस्तुत की जाएं तो भाषा कभी बाधा नहीं बनती।

    बोमन ईरानी ने अपने लंबे करियर में कई यादगार फिल्मों में काम किया है और अपनी अलग पहचान बनाई है। कॉमेडी और गंभीर दोनों तरह के किरदारों में उनकी अभिनय क्षमता को दर्शकों ने हमेशा सराहा है। ‘पेड्डी’ में भी उनकी भूमिका को लेकर दर्शकों में उत्सुकता बनी हुई है, जिसमें राम चरण, जान्हवी कपूर और दिव्येंदु शर्मा जैसे कलाकार भी नजर आएंगे।

  • ‘धुरंधर’ को लेकर कमल जैन ने की तारीफ बोले यह फिल्म दर्शकों को खींचने वाला सिनेमाई अनुभव

    ‘धुरंधर’ को लेकर कमल जैन ने की तारीफ बोले यह फिल्म दर्शकों को खींचने वाला सिनेमाई अनुभव


    फिल्म ‘मणिकर्णिका: द क्वीन ऑफ झांसी’ के निर्माता कमल जैन ने अपनी नई फिल्म ‘धुरंधर’ को लेकर बेहद सकारात्मक राय व्यक्त की है। उनके अनुसार ‘धुरंधर’ केवल एक फिल्म नहीं बल्कि एक ऐसा सिनेमाई अनुभव है जो दर्शकों को न सिर्फ जोड़ता है बल्कि उन्हें पूरी तरह से अपनी कहानी में खींच लेता है। उन्होंने इसे एक ऐसा प्रोजेक्ट बताया है जो दर्शकों के देखने के नजरिए को बदलने की क्षमता रखता है।

    कमल जैन का मानना है कि असली सफलता सिर्फ एक अच्छी कहानी से नहीं आती, बल्कि उसमें मौजूद उस खास जादू से आती है जो दर्शकों को बांधकर रखता है। उन्होंने कहा कि ‘मैजिक ही असल में बिकता है’ और यही वह तत्व है जो किसी फिल्म को सामान्य से अलग बनाता है। उनके अनुसार ‘धुरंधर’ में वही दुर्लभ जादू मौजूद है, जिसे हमने पहले भी ‘दीवार’, ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’, ‘भाग मिल्खा भाग’, ‘एम.एस. धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी’, ‘विकी डोनर’ और ‘संजू’ जैसी फिल्मों में देखा है।

    उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि इस तरह के जादू के लिए जरूरी है कि फिल्म के क्रिएटर्स की सोच और इरादे मजबूत हों। जब प्रोड्यूसर की व्यावसायिक दृष्टि और निर्देशक की रचनात्मक सोच एक साथ मिलकर काम करती हैं, तब एक बेहतरीन सिनेमाई अनुभव तैयार होता है। ‘धुरंधर’ इसी तरह की मजबूत सिनर्जी का उदाहरण है, जहां कहानी, निर्देशन और प्रस्तुति एक दूसरे के साथ तालमेल बनाते हैं।

    कमल जैन ने यह भी कहा कि आज के दौर में जब दुनिया पूरी तरह से कनेक्टेड है, तब फिल्में सिर्फ दर्शकों तक पहुंचती नहीं बल्कि उन्हें सिनेमाघरों तक खींचने की क्षमता भी रखती हैं। ‘धुरंधर’ भी इसी तरह का प्रभाव छोड़ने में सक्षम दिखाई देती है, जो दर्शकों को थिएटर तक आकर्षित करने का दम रखती है।

    उन्होंने फिल्म की टीम की भी सराहना की और कहा कि इसमें मेकर्स की स्पष्टता और मजबूत सोच साफ दिखाई देती है। आदित्य की लेखनी, निर्देशन, संगीत और कलाकारों का प्रदर्शन कहानी को और गहराई प्रदान करता है। साथ ही ज्योति देशपांडे की मजबूत मार्केटिंग और वितरण रणनीति ने इसे एक बड़े सिनेमाई प्रोजेक्ट में बदल दिया है।

    कमल जैन के अनुसार जब कंटेंट खुद बोलने लगता है और दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बन जाता है, तब वह केवल एक फिल्म नहीं रहता बल्कि एक प्रभावशाली अनुभव बन जाता है। यही ‘धुरंधर’ की खासियत है, जो कहानी कहने की कला को एक नई ऊंचाई पर ले जाती है।

     कमल जैन की राय के अनुसार ‘धुरंधर’ एक ऐसी फिल्म है जो सिर्फ मनोरंजन नहीं बल्कि दर्शकों के दिल और दिमाग दोनों को प्रभावित करने की क्षमता रखती है। यह फिल्म उस स्तर पर खड़ी दिखाई देती है जहां कला, कहानी और प्रस्तुति का संगम एक यादगार अनुभव तैयार करता है