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  • 'मेहर' के बाद नए सफर पर राज कुंद्रा, बोले- पंजाब की कई दमदार कहानियां अब भी पर्दे पर आना बाकी हैं

    'मेहर' के बाद नए सफर पर राज कुंद्रा, बोले- पंजाब की कई दमदार कहानियां अब भी पर्दे पर आना बाकी हैं

    नई दिल्ली । बिजनेसमैन और अभिनेता राज कुंद्रा अब पंजाबी सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहे हैं। अपनी पहली पंजाबी फिल्म ‘मेहर’ से अभिनय की शुरुआत करने के बाद उन्होंने स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य केवल पर्दे पर दिखाई देना नहीं, बल्कि ऐसी फिल्मों का हिस्सा बनना है जो समाज, संस्कृति और लोगों की भावनाओं को प्रभावशाली ढंग से सामने ला सकें। उनका मानना है कि पंजाब की धरती में ऐसी अनेक प्रेरणादायक और वास्तविक कहानियां मौजूद हैं, जिन्हें अब तक बड़े पर्दे पर पर्याप्त स्थान नहीं मिल पाया है।

    राज कुंद्रा का कहना है कि किसी भी फिल्म की सफलता केवल उसके मनोरंजन मूल्य से नहीं आंकी जानी चाहिए, बल्कि इस बात से भी तय होती है कि वह दर्शकों तक किस तरह का संदेश पहुंचाती है। उनके अनुसार वे ऐसे विषयों को प्राथमिकता देना चाहते हैं जो वास्तविक परिस्थितियों, सामाजिक सरोकारों और मानवीय संवेदनाओं से जुड़े हों। उनका मानना है कि मजबूत कहानी ही किसी फिल्म की सबसे बड़ी ताकत होती है और वही दर्शकों के साथ लंबे समय तक जुड़ाव बनाए रखती है।

    उन्होंने अपनी आगामी फिल्म ‘द ग्रेट पंजाब रॉबरी’ का जिक्र करते हुए बताया कि इस परियोजना का विचार काफी समय पहले तैयार हो गया था। यह फिल्म निर्देशक सौरभ वर्मा के साथ उनकी पहली फिल्म बनने वाली थी, लेकिन उस समय पर्याप्त आर्थिक सहयोग और निर्माता नहीं मिलने के कारण परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी। इसके बावजूद उन्होंने इस कहानी पर भरोसा बनाए रखा और इसे छोड़ने के बजाय सही समय का इंतजार किया।

    राज कुंद्रा के अनुसार ‘मेहर’ के रिलीज होने के बाद परिस्थितियां बदलीं और कई निर्माता उनके साथ काम करने में रुचि दिखाने लगे। इसी दौरान उन्होंने एक बार फिर ‘द ग्रेट पंजाब रॉबरी’ को लेकर बातचीत शुरू की। इस बार कई निर्माता इस प्रोजेक्ट से जुड़े और फिल्म को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया। उनका कहना है कि यदि कहानी दमदार हो तो उसे अपना मुकाम मिलने में देर हो सकती है, लेकिन वह अंततः दर्शकों तक जरूर पहुंचती है।

    उन्होंने यह भी संकेत दिया कि उनकी भविष्य की योजनाएं केवल पंजाबी सिनेमा तक सीमित नहीं रहेंगी। ‘द ग्रेट पंजाब रॉबरी’ के बाद वह अपने होम प्रोडक्शन के बैनर तले एक नई फिल्म लेकर आएंगे। इस फिल्म की योजना पूरे देश के दर्शकों को ध्यान में रखकर बनाई जा रही है और इसे पैन इंडिया स्तर पर रिलीज करने की तैयारी है। उनका उद्देश्य क्षेत्रीय विषयों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करना है ताकि अलग-अलग भाषाओं और संस्कृतियों के दर्शक भी इन कहानियों से जुड़ सकें।

    राज कुंद्रा का मानना है कि भारतीय सिनेमा में क्षेत्रीय फिल्मों का महत्व लगातार बढ़ रहा है। दर्शक अब नई कहानियों, स्थानीय संस्कृति और वास्तविक घटनाओं पर आधारित फिल्मों को अधिक पसंद कर रहे हैं। ऐसे में पंजाब की सामाजिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर आधारित विषयों को बड़े स्तर पर प्रस्तुत करने की काफी संभावनाएं हैं। उनका विश्वास है कि यदि इन कहानियों को ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ पर्दे पर उतारा जाए तो वे न केवल मनोरंजन करेंगी, बल्कि समाज में सकारात्मक चर्चा का भी माध्यम बनेंगी।

  • फिल्मी दुनिया में भाषा नहीं, प्रतिभा मायने रखती है: नॉर्थ-साउथ बहस पर बोले बोमन ईरानी

    फिल्मी दुनिया में भाषा नहीं, प्रतिभा मायने रखती है: नॉर्थ-साउथ बहस पर बोले बोमन ईरानी


    नई दिल्ली । भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में लंबे समय से चल रही उत्तर और दक्षिण सिनेमा की बहस पर अभिनेता Boman Irani ने अपनी स्पष्ट राय रखते हुए कहा है कि यह चर्चा अब पुरानी और थकाने वाली हो चुकी है। उनके अनुसार, फिल्म इंडस्ट्री में भाषा या क्षेत्रीय पहचान से ज्यादा महत्वपूर्ण कहानी और काम की गुणवत्ता है।

    बोमन ईरानी इन दिनों अपनी आगामी फिल्म ‘पेड्डी’ के प्रमोशन में व्यस्त हैं, जिसमें वह अहम भूमिका निभा रहे हैं। इसी दौरान एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि भारतीय सिनेमा को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर देखना सही नहीं है, क्योंकि अंततः यह एक ही देश की रचनात्मक दुनिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि “हम सब भारतीय हैं” और किसी भी कलाकार की पहचान उसकी प्रतिभा और काम से होनी चाहिए, न कि उसकी भाषा या क्षेत्र से।

    उन्होंने यह भी बताया कि भारत में भाषाई विविधता बहुत गहरी है और हर कुछ किलोमीटर पर बोली बदल जाती है, लेकिन इससे लोगों के बीच दूरी नहीं बननी चाहिए। उनके अनुसार, एक व्यक्ति अलग भाषा बोल सकता है, लेकिन भावनाएं और सिनेमा की आत्मा समान रहती है। यही कारण है कि आज भारतीय फिल्में क्षेत्रीय सीमाओं से बाहर निकलकर पूरे देश और दुनिया में सराही जा रही हैं।

    अपनी आने वाली फिल्म का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि अब ऐसे समय में जब हैदराबाद जैसे शहरों में बनी फिल्में पूरे देश में प्रमोट हो रही हैं और मुंबई जैसे बड़े फिल्म हब में उनका स्वागत हो रहा है, तो यह साफ संकेत है कि इंडस्ट्री धीरे-धीरे एक साझा मंच की ओर बढ़ रही है। यह बदलाव भारतीय सिनेमा की एकता और विस्तार को दर्शाता है।

    बोमन ईरानी ने अभिनय की गहराई पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि एक अच्छे अभिनेता के लिए भाषा से ज्यादा जरूरी है संवाद के भीतर छिपे भाव और अर्थ को समझना। उनके अनुसार, अभिनय केवल शब्द बोलने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि उसमें भावनाओं और सोच की गहराई को सही तरीके से दर्शकों तक पहुंचाना सबसे अहम है।

    उन्होंने यह भी कहा कि कलाकार को पहले अपने विचारों को समझकर अपनी भाषा में तैयार करना चाहिए और फिर उसे पर्दे पर व्यक्त करना चाहिए, ताकि दर्शक उससे जुड़ सकें। उनका मानना है कि अगर भावनाएं सही तरीके से प्रस्तुत की जाएं तो भाषा कभी बाधा नहीं बनती।

    बोमन ईरानी ने अपने लंबे करियर में कई यादगार फिल्मों में काम किया है और अपनी अलग पहचान बनाई है। कॉमेडी और गंभीर दोनों तरह के किरदारों में उनकी अभिनय क्षमता को दर्शकों ने हमेशा सराहा है। ‘पेड्डी’ में भी उनकी भूमिका को लेकर दर्शकों में उत्सुकता बनी हुई है, जिसमें राम चरण, जान्हवी कपूर और दिव्येंदु शर्मा जैसे कलाकार भी नजर आएंगे।

  • ‘धुरंधर’ को लेकर कमल जैन ने की तारीफ बोले यह फिल्म दर्शकों को खींचने वाला सिनेमाई अनुभव

    ‘धुरंधर’ को लेकर कमल जैन ने की तारीफ बोले यह फिल्म दर्शकों को खींचने वाला सिनेमाई अनुभव


    फिल्म ‘मणिकर्णिका: द क्वीन ऑफ झांसी’ के निर्माता कमल जैन ने अपनी नई फिल्म ‘धुरंधर’ को लेकर बेहद सकारात्मक राय व्यक्त की है। उनके अनुसार ‘धुरंधर’ केवल एक फिल्म नहीं बल्कि एक ऐसा सिनेमाई अनुभव है जो दर्शकों को न सिर्फ जोड़ता है बल्कि उन्हें पूरी तरह से अपनी कहानी में खींच लेता है। उन्होंने इसे एक ऐसा प्रोजेक्ट बताया है जो दर्शकों के देखने के नजरिए को बदलने की क्षमता रखता है।

    कमल जैन का मानना है कि असली सफलता सिर्फ एक अच्छी कहानी से नहीं आती, बल्कि उसमें मौजूद उस खास जादू से आती है जो दर्शकों को बांधकर रखता है। उन्होंने कहा कि ‘मैजिक ही असल में बिकता है’ और यही वह तत्व है जो किसी फिल्म को सामान्य से अलग बनाता है। उनके अनुसार ‘धुरंधर’ में वही दुर्लभ जादू मौजूद है, जिसे हमने पहले भी ‘दीवार’, ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’, ‘भाग मिल्खा भाग’, ‘एम.एस. धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी’, ‘विकी डोनर’ और ‘संजू’ जैसी फिल्मों में देखा है।

    उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि इस तरह के जादू के लिए जरूरी है कि फिल्म के क्रिएटर्स की सोच और इरादे मजबूत हों। जब प्रोड्यूसर की व्यावसायिक दृष्टि और निर्देशक की रचनात्मक सोच एक साथ मिलकर काम करती हैं, तब एक बेहतरीन सिनेमाई अनुभव तैयार होता है। ‘धुरंधर’ इसी तरह की मजबूत सिनर्जी का उदाहरण है, जहां कहानी, निर्देशन और प्रस्तुति एक दूसरे के साथ तालमेल बनाते हैं।

    कमल जैन ने यह भी कहा कि आज के दौर में जब दुनिया पूरी तरह से कनेक्टेड है, तब फिल्में सिर्फ दर्शकों तक पहुंचती नहीं बल्कि उन्हें सिनेमाघरों तक खींचने की क्षमता भी रखती हैं। ‘धुरंधर’ भी इसी तरह का प्रभाव छोड़ने में सक्षम दिखाई देती है, जो दर्शकों को थिएटर तक आकर्षित करने का दम रखती है।

    उन्होंने फिल्म की टीम की भी सराहना की और कहा कि इसमें मेकर्स की स्पष्टता और मजबूत सोच साफ दिखाई देती है। आदित्य की लेखनी, निर्देशन, संगीत और कलाकारों का प्रदर्शन कहानी को और गहराई प्रदान करता है। साथ ही ज्योति देशपांडे की मजबूत मार्केटिंग और वितरण रणनीति ने इसे एक बड़े सिनेमाई प्रोजेक्ट में बदल दिया है।

    कमल जैन के अनुसार जब कंटेंट खुद बोलने लगता है और दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बन जाता है, तब वह केवल एक फिल्म नहीं रहता बल्कि एक प्रभावशाली अनुभव बन जाता है। यही ‘धुरंधर’ की खासियत है, जो कहानी कहने की कला को एक नई ऊंचाई पर ले जाती है।

     कमल जैन की राय के अनुसार ‘धुरंधर’ एक ऐसी फिल्म है जो सिर्फ मनोरंजन नहीं बल्कि दर्शकों के दिल और दिमाग दोनों को प्रभावित करने की क्षमता रखती है। यह फिल्म उस स्तर पर खड़ी दिखाई देती है जहां कला, कहानी और प्रस्तुति का संगम एक यादगार अनुभव तैयार करता है