Tag: Strait of Hormuz crisis

  • ईरान-यूएस टकराव चरम पर: IRGC की सीधी चेतावनी, अमेरिकी ठिकाने और जहाज निशाने पर 14-पॉइंट प्रस्ताव पर तनाव जारी

    ईरान-यूएस टकराव चरम पर: IRGC की सीधी चेतावनी, अमेरिकी ठिकाने और जहाज निशाने पर 14-पॉइंट प्रस्ताव पर तनाव जारी


    नई दिल्ली। मध्य पूर्व में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं, जहां ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने खुली चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि यदि फारस की खाड़ी या होर्मुज स्ट्रेट में ईरानी तेल टैंकरों और व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया गया, तो जवाब में सीधे अमेरिकी सैन्य ठिकानों और युद्धपोतों पर हमला किया जाएगा।

    IRGC नौसेना कमांड ने सोशल मीडिया पोस्ट में साफ कहा है कि क्षेत्र में किसी भी तरह की “आक्रामक कार्रवाई” को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वहीं एयरोस्पेस फोर्स ने दावा किया है कि उसके मिसाइल और ड्रोन पहले से ही अमेरिकी ठिकानों और संभावित लक्ष्यों पर लॉक हैं और केवल आदेश का इंतजार है।

    इस बीच, अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वॉशिंगटन ने ईरान के सामने 14 सूत्रीय प्रस्ताव रखा है, जिसमें परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने, यूरेनियम संवर्धन पर रोक और क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे को लेकर कई सख्त शर्तें शामिल हैं। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया था कि इस प्रस्ताव पर जल्द जवाब की उम्मीद है, लेकिन ईरान ने किसी समयसीमा को मानने से इनकार कर दिया है।

    ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा है कि अमेरिकी प्रस्ताव अभी समीक्षा में है और इसका जवाब “उचित समय पर और राष्ट्रीय हितों को देखते हुए” दिया जाएगा। उन्होंने साफ किया कि ईरान किसी बाहरी दबाव में निर्णय नहीं करेगा।

    तनाव के बीच खाड़ी क्षेत्र में स्थिति और भी संवेदनशील हो गई है। कतर के पास एक मालवाहक जहाज पर संदिग्ध प्रोजेक्टाइल से हमला और ईरान के खार्ग द्वीप के पास बड़े तेल रिसाव ने समुद्री सुरक्षा और पर्यावरणीय चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेल रिसाव 20 वर्ग मील तक फैल चुका है, जिससे क्षेत्रीय पारिस्थितिकी पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

    इसी बीच अमेरिका के प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि समझौते की स्थिति में ईरान पर लगे प्रतिबंध धीरे-धीरे हटाए जा सकते हैं और उसकी जमी हुई संपत्ति भी जारी की जा सकती है, लेकिन इसके बदले परमाणु गतिविधियों पर सख्त नियंत्रण जरूरी होगा।

    क्षेत्रीय तनाव को देखते हुए ब्रिटेन और फ्रांस ने भी अपनी नौसैनिक तैनाती बढ़ा दी है, जबकि रूस ने प्रस्ताव दिया है कि वह ईरान के एनरिच्ड यूरेनियम को सुरक्षित रखने के लिए तैयार है।

    मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट अब वैश्विक ऊर्जा और व्यापार का सबसे संवेदनशील क्षेत्र बन गया है, जहां किसी भी टकराव का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

  • फारस की खाड़ी और होर्मुज में तेल रिसाव का संकट गहराया, उपग्रह तस्वीरों में मिले गंभीर संकेत

    फारस की खाड़ी और होर्मुज में तेल रिसाव का संकट गहराया, उपग्रह तस्वीरों में मिले गंभीर संकेत

    दुबई । अमेरिका और ईरान से जुड़े सैन्य तनाव के बाद फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य में कई स्थानों पर तेल रिसाव के गंभीर संकेत सामने आए हैं। उपग्रह तस्वीरों में ईरान के केश्म द्वीप, लावान द्वीप और कुवैत तट के पास समुद्र में फैला हुआ तेल स्पष्ट रूप से देखा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस स्थिति पर तुरंत नियंत्रण नहीं किया गया, तो यह क्षेत्र एक बड़े पर्यावरणीय संकट में बदल सकता है, जिससे समुद्री जीवन, तटीय आबादी और जल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।

    उपग्रह निगरानी में सामने आया समुद्री प्रदूषण
    एक रिपोर्ट के अनुसार उपग्रह चित्रों ने न केवल तेल ढांचे और जहाजों पर हुए नुकसान को उजागर किया है, बल्कि फारस की खाड़ी के संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र पर मंडरा रहे खतरे को भी सामने रखा है। कई तस्वीरों में समुद्र की सतह पर फैला तेल स्पष्ट दिखाई देता है, जो तटीय समुदायों की आजीविका और मछली पालन पर सीधा असर डाल सकता है। केश्म द्वीप के पास लगभग पांच मील तक फैले तेल के निशान दर्ज किए गए हैं।

    शिदवर द्वीप के पारिस्थितिकी तंत्र पर संकट
    फारस की खाड़ी में स्थित शिदवर द्वीप को एक महत्वपूर्ण कोरल क्षेत्र माना जाता है, जहां कछुए, समुद्री पक्षी और अन्य जीव रहते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह का तेल रिसाव यदि इन क्षेत्रों तक पहुंचता है तो यह समुद्री प्रजातियों के प्रजनन, भोजन श्रृंखला और पूरे पारिस्थितिक संतुलन को लंबे समय तक प्रभावित कर सकता है।

    कुवैत तट तक फैला असर
    छह अप्रैल को प्राप्त उपग्रह तस्वीरों में कुवैत के तटीय क्षेत्र के पास भी तेल फैलाव देखा गया। इसी दिन ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने खाड़ी क्षेत्र की ईंधन और पेट्रोकेमिकल सुविधाओं को निशाना बनाए जाने की बात कही थी, जिसके बाद स्थिति और संवेदनशील हो गई।

    लाखों लोगों और समुद्री जीवन पर खतरा
    पर्यावरण विशेषज्ञ विम ज्वाइनेनबर्ग के अनुसार, इस तरह का तेल रिसाव लाखों लोगों की आजीविका को प्रभावित कर सकता है, खासकर तटीय क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों को। प्रदूषित समुद्र मछली पालन को नुकसान पहुंचा सकता है और खाद्य सुरक्षा पर असर डाल  है। समुद्री जीव जैसे कछुए, डॉल्फिन और व्हेल भी इससे गंभीर रूप से प्रभावित हो सकते हैं, क्योंकि वे तेल के संपर्क में आ सकते हैं या उसे निगल सकते हैं। साथ ही, समुद्री जल को शुद्ध करने वाले संयंत्रों (डिसैलिनेशन प्लांट्स) पर भी खतरा मंडरा रहा है।

  • अमेरिका ईरान तनाव के बीच ट्रंप का बड़ा दावा समझौते की उम्मीद लेकिन सैन्य विकल्प तैयार

    अमेरिका ईरान तनाव के बीच ट्रंप का बड़ा दावा समझौते की उम्मीद लेकिन सैन्य विकल्प तैयार


    नई दिल्ली । अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच Donald Trump का ताजा बयान वैश्विक राजनीति में हलचल पैदा कर रहा है। उन्होंने दावा किया है कि अमेरिका ईरान के साथ गहरी और गंभीर बातचीत में जुटा हुआ है लेकिन साथ ही यह भी साफ कर दिया है कि अगर हालात नहीं सुधरे तो सैन्य कार्रवाई का रास्ता भी खुला रखा गया है। इस दोहरे रुख ने संकेत दिया है कि आने वाले दिन मध्य पूर्व के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं।

    इजरायली मीडिया से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि उनकी सरकार ईरान के साथ संघर्ष विराम की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है और इसके लिए कई चैनलों के जरिए संपर्क बनाए हुए हैं। उन्होंने बताया कि इस कूटनीतिक पहल की अगुवाई उनके करीबी सहयोगी स्टीव विटकॉफ और Jared Kushner कर रहे हैं जो अलग अलग देशों के माध्यम से बातचीत को आगे बढ़ा रहे हैं।

    सूत्रों के अनुसार बातचीत दो स्तरों पर चल रही है। एक तरफ पाकिस्तान मिस्र और तुर्की जैसे देश मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं और दोनों पक्षों के बीच अप्रत्यक्ष संवाद कायम कर रहे हैं। दूसरी तरफ अमेरिकी प्रतिनिधि सीधे ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi के संपर्क में हैं। इन प्रयासों का मकसद किसी ऐसे समझौते तक पहुंचना है जिससे तनाव कम हो सके और टकराव टाला जा सके।

    हालांकि अब तक की बातचीत से कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है लेकिन ट्रंप ने उम्मीद जताई है कि तय समय सीमा से पहले समझौता हो सकता है। उन्होंने संकेत दिया कि मंगलवार तक स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। इसी के साथ उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर ईरान ने अमेरिका की शर्तें नहीं मानी तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

    ट्रंप का बयान खास तौर पर उस समय आया है जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है और इसके बंद होने से पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है। ट्रंप ने ईरान से इसे तुरंत खोलने की मांग दोहराई है।

    उन्होंने यहां तक कहा कि अगर ईरान तय समय सीमा तक इस मुद्दे पर सहमति नहीं देता तो अमेरिका उसके पावर प्लांट्स को निशाना बना सकता है। यह बयान इस बात का संकेत है कि अमेरिका केवल कूटनीतिक दबाव तक सीमित नहीं रहना चाहता बल्कि जरूरत पड़ने पर सैन्य कार्रवाई के लिए भी तैयार है।

    कुल मिलाकर स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है जहां एक ओर बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश हो रही है वहीं दूसरी ओर युद्ध जैसे हालात बनने का खतरा भी बना हुआ है। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या दोनों देश बातचीत के जरिए समाधान निकाल पाएंगे या फिर यह तनाव किसी बड़े टकराव में बदल जाएगा।

  • ट्रंप की धमकी के बाद एक्शन: दुबई के पास तेल टैंकर पर ड्रोन हमला

    ट्रंप की धमकी के बाद एक्शन: दुबई के पास तेल टैंकर पर ड्रोन हमला


    नई दिल्ली । नई दिल्ली में वेस्ट एशिया का संकट एक बार फिर गहराता नजर आ रहा है। ईरान ने कुवैत के एक तेल टैंकर पर ड्रोन हमला कर क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया है। यह हमला दुबई के पास समुद्री क्षेत्र में हुआ जिसकी पुष्टि स्थानीय अधिकारियों और कुवैती सूत्रों ने की है। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस हमले में किसी तरह की जनहानि या तेल रिसाव की सूचना नहीं मिली है।

    दुबई मीडिया ऑफिस के अनुसार आपातकालीन टीमों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए स्थिति को नियंत्रण में कर लिया। टैंकर में आग जरूर लगी थी लेकिन उसे समय रहते बुझा दिया गया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि न तो कोई व्यक्ति घायल हुआ और न ही समुद्र में तेल का रिसाव हुआ।

    इस घटना से पहले डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी थी कि यदि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज को दोबारा नहीं खोला गया तो अमेरिका ईरान की तेल सुविधाओं को निशाना बना सकता है। ट्रंप की इस चेतावनी के बाद ही टैंकर पर हमले की खबर सामने आई जिससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक कुवैत का यह टैंकर दुबई से करीब 31 नॉटिकल मील उत्तर-पश्चिम में हमले का शिकार हुआ। ब्रिटेन की मैरीटाइम एजेंसी के अनुसार हमले के बाद जहाज में आग लग गई थी जिसे बाद में काबू में कर लिया गया।

    इस बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस घटना को लेकर चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि नागरिक बुनियादी ढांचे जैसे तेल टैंकरों पर हमला करना अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत गंभीर अपराध माना जा सकता है।

    दूसरी ओर चीन ने इस पूरे घटनाक्रम पर चिंता जताते हुए अमेरिका और इजरायल से ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई रोकने की अपील की है। चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि सभी पक्ष संयम बरतें और क्षेत्र में शांति बनाए रखने का प्रयास करें।

    चीन ने संघर्ष के दौरान ईरान के परमाणु संयंत्रों और ऐतिहासिक स्थलों को हुए नुकसान पर भी दुख जताया है। विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि सांस्कृतिक धरोहर पूरी मानवता की अमूल्य संपत्ति है और इस तरह का नुकसान बेहद चिंताजनक है।

    कुल मिलाकर मिडिल ईस्ट में बढ़ते इस तनाव ने वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री व्यापार को गंभीर जोखिम में डाल दिया है। होर्मुज जैसे अहम समुद्री मार्ग पर पहले से मौजूद संकट के बीच इस तरह के हमले आने वाले दिनों में हालात को और जटिल बना सकते हैं।

  • गंभीर ऊर्जा संकट: होर्मुज से 8-10 मिलियन बैरल तेल सप्लाई ठप, कीमतों में आएगी तेजी

    गंभीर ऊर्जा संकट: होर्मुज से 8-10 मिलियन बैरल तेल सप्लाई ठप, कीमतों में आएगी तेजी

    नई दिल्ली। ईरान युद्ध के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार गंभीर संकट में है। एस एंड पी ग्लोबल के CERAWeek सम्मेलन में दुनिया की बड़ी तेल और गैस कंपनियों के सीईओ ने चेतावनी दी कि होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से रोजाना 8–10 मिलियन (80–100 करोड़) बैरल तेल और वैश्विक एलएनजी सप्लाई का लगभग 20% हिस्सा बाजार से गायब हो गया है। इसके चलते जेट फ्यूल, डीज़ल और पेट्रोल की आपूर्ति में अभूतपूर्व संकट उत्पन्न हुआ है और यह संकट एशिया से लेकर यूरोप तक फैल चुका है। विशेषज्ञों का कहना है कि कीमतों में दीर्घकालिक उछाल अब लगभग तय है।

    कंपनियों और विशेषज्ञों की चेतावनी

    कॉनोकोफिलिप्स के सीईओ रयान लांस ने कहा कि इतनी बड़ी मात्रा में तेल और गैस को बाजार से हटाने के गंभीर परिणाम अपरिहार्य हैं। कुवैत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन के सीईओ शेख नवाफ अल-सबाह ने इसे खाड़ी तेल उत्पादकों के खिलाफ आर्थिक नाकेबंदी करार देते हुए कहा कि ईरान ने होर्मुज को बंद कर वैश्विक अर्थव्यवस्था को बंधक बना दिया है। स्वतंत्र विश्लेषक पॉल सैंकी ने स्थिति को 1973 के अरब ऑयल एम्बार्गो के बाद सबसे गंभीर बताया।

    एलएनजी आपूर्ति दबाव में

    चेनीयर के सीईओ जैक फुस्को ने बताया कि कंपनी पूरी क्षमता पर उत्पादन कर रही है, लेकिन अमेरिका से एशिया तक एलएनजी पहुंचाने में 28 दिन लगते हैं। ऐसे में कतर पर निर्भर एशियाई देशों को तुरंत राहत मिलना मुश्किल है। जॉन्स हॉपकिन्स विश्वविद्यालय के विशेषज्ञ वली नसर के अनुसार ईरान युद्धविराम नहीं बल्कि व्यापक समझौता चाहता है, जिसमें होर्मुज पर नियंत्रण, आर्थिक मुआवजा और सुरक्षा गारंटी शामिल हैं।

    पूर्व अमेरिकी रक्षा मंत्री जिम मैटिस ने कहा कि यह संघर्ष फिलहाल गतिरोध में है, लेकिन आगे बढ़ सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिकी नौसेना के लिए होर्मुज से ओमान की खाड़ी तक समुद्री मार्गों की सुरक्षा करना बेहद चुनौतीपूर्ण होगा।

    तेल कीमतें तीन साल के उच्चतम स्तर पर

    सीएनबीसी के अनुसार, युद्ध और तनाव बढ़ने के बीच तेल की कीमतें लगातार उछल रही हैं। 28 फरवरी को अमेरिकी कच्चा तेल 49% बढ़कर 99.64 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड 55% बढ़कर 112.57 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जो तीन साल का उच्चतम स्तर है।

    सरकारें सुरक्षित कर रही हैं अपना भंडार

    टोटलएनर्जी के सीईओ पैट्रिक पुइयाने ने कहा कि जेट फ्यूल की कीमत 200 डॉलर प्रति बैरल और डीज़ल 160 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुकी है। रूस और चीन ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर रोक लगा दी है, जबकि थाईलैंड में पेट्रोल राशनिंग शुरू हो गई है। अप्रैल तक यूरोप में भी कमी का असर दिखाई दे सकता है।

    खाड़ी अर्थव्यवस्थाओं पर गंभीर असर

    पॉल सैंकी ने चेतावनी दी है कि यह संकट खाड़ी देशों के आर्थिक मॉडल को चुनौती दे सकता है। इराक, कतर, यूएई और संभावित रूप से सऊदी अरब की जीडीपी में 30% तक गिरावट आ सकती है। जिम मैटिस ने कहा कि अमेरिका ने खाड़ी सहयोगियों से बिना परामर्श युद्ध शुरू किया और अब इससे आसानी से बाहर नहीं निकल सकता। उन्होंने जोर दिया कि इस युद्ध के अंत का फैसला ईरान के हाथ में भी है।