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  • भारत और न्यूजीलैंड के रिश्तों में ऐतिहासिक बदलाव पीएम मोदी के दौरे ने रक्षा व्यापार और समुद्री सहयोग को दी नई दिशा

    भारत और न्यूजीलैंड के रिश्तों में ऐतिहासिक बदलाव पीएम मोदी के दौरे ने रक्षा व्यापार और समुद्री सहयोग को दी नई दिशा


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया न्यूजीलैंड यात्रा ने भारत और न्यूजीलैंड के द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। लगभग दो दशक बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की इस ऐतिहासिक यात्रा को दोनों देशों के रिश्तों में निर्णायक मोड़ माना जा रहा है। न्यूजीलैंड इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल अफेयर्स द्वारा प्रकाशित एक विश्लेषण में कहा गया है कि इस यात्रा के बाद दोनों देशों के संबंध पारंपरिक सहयोग से आगे बढ़कर व्यापक रणनीतिक साझेदारी के नए चरण में प्रवेश कर चुके हैं।

    दो दिवसीय दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने वर्ष 2030 तक के लिए एक व्यापक रोडमैप तैयार किया। इस रणनीतिक साझेदारी के अंतर्गत रक्षा व्यापार समुद्री सुरक्षा कृषि पर्यटन खेल संस्कृति विज्ञान और प्रौद्योगिकी सहित अनेक क्षेत्रों में सहयोग को नई दिशा देने पर सहमति बनी। दोनों नेताओं ने स्पष्ट किया कि आने वाले वर्षों में दोनों देश साझा हितों और वैश्विक चुनौतियों का मिलकर सामना करेंगे।

    यात्रा के दौरान सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर लगभग 7 बिलियन न्यूजीलैंड डॉलर तक पहुंचाने का रखा गया। इसके लिए निवेश व्यापारिक सहयोग आपूर्ति श्रृंखला और नई आर्थिक संभावनाओं को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया जाएगा। तेजी से बढ़ती भारतीय अर्थव्यवस्था और विशाल उपभोक्ता बाजार को देखते हुए न्यूजीलैंड भारत को अपनी दीर्घकालिक आर्थिक रणनीति का महत्वपूर्ण साझेदार मान रहा है।

    विश्लेषण में उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2030 तक भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। भारत का बढ़ता मध्यम वर्ग वैश्विक बाजार के लिए नई संभावनाएं प्रस्तुत करता है। यही कारण है कि न्यूजीलैंड भारत के साथ आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को और मजबूत बनाने पर विशेष ध्यान दे रहा है।

    दौरे के दौरान कुल 18 महत्वपूर्ण परिणाम सामने आए जिनमें 10 समझौते और सहमति पत्र शामिल हैं। इन समझौतों का उद्देश्य केवल व्यापार बढ़ाना नहीं बल्कि दीर्घकालिक रणनीतिक सहयोग को मजबूत करना भी है। रोडमैप टू 2030 के माध्यम से दोनों देशों ने रक्षा सहयोग समुद्री सुरक्षा वैज्ञानिक अनुसंधान शिक्षा सांस्कृतिक आदान प्रदान और लोगों के बीच संपर्क को बढ़ावा देने का संकल्प लिया है।

    रक्षा और समुद्री सुरक्षा इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष रहे। दोनों देशों ने म्यूचुअल लॉजिस्टिक्स सपोर्ट अरेंजमेंट पर सहमति जताई जिससे भारतीय नौसेना और न्यूजीलैंड रक्षा बल जरूरत पड़ने पर एक दूसरे की सुविधाओं का उपयोग ईंधन भरने रखरखाव और रसद सहायता के लिए कर सकेंगे। इसके अलावा हिंद प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और समन्वय को मजबूत करने के लिए एक नए समुद्री सहयोग समझौते पर भी हस्ताक्षर किए गए।

    आतंकवाद के खिलाफ सहयोग को भी नई मजबूती दी गई है। दोनों देशों ने संयुक्त कार्य समूह गठित करने पर सहमति जताई है जो खुफिया सूचनाओं के आदान प्रदान और सुरक्षा समन्वय को और प्रभावी बनाएगा। साथ ही अवैध मछली पकड़ने जैसी समुद्री चुनौतियों से निपटने के लिए भी साझा प्रयास किए जाएंगे।

    विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह यात्रा केवल कूटनीतिक औपचारिकता नहीं बल्कि भारत और न्यूजीलैंड के संबंधों को नई रणनीतिक दिशा देने वाला महत्वपूर्ण कदम है। आने वाले वर्षों में यह साझेदारी आर्थिक विकास क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक सहयोग के नए अवसर पैदा करेगी तथा हिंद प्रशांत क्षेत्र में दोनों देशों की भूमिका को और अधिक मजबूत बनाएगी।

  • ऑकलैंड से पीएम मोदी का वैश्विक निवेशकों को संदेश, भारत को बताया दुनिया की विकास यात्रा का सबसे मजबूत लॉन्च पैड, रणनीतिक साझेदारी से खुलेंगे नए अवसर

    ऑकलैंड से पीएम मोदी का वैश्विक निवेशकों को संदेश, भारत को बताया दुनिया की विकास यात्रा का सबसे मजबूत लॉन्च पैड, रणनीतिक साझेदारी से खुलेंगे नए अवसर


    नई दिल्ली ।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न्यूजीलैंड के ऑकलैंड में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान भारत को वैश्विक आर्थिक विकास का प्रमुख केंद्र बताते हुए अंतरराष्ट्रीय निवेशकों से भारत की विकास यात्रा में सहभागी बनने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत केवल एक बड़ा उपभोक्ता बाजार नहीं है, बल्कि वैश्विक विकास के लिए एक मजबूत लॉन्च पैड बन चुका है। तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, स्थिर नीतियां, आधुनिक बुनियादी ढांचा और डिजिटल परिवर्तन भारत को निवेश के लिए दुनिया के सबसे आकर्षक देशों में शामिल कर रहे हैं।

    प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भारत और न्यूजीलैंड के संबंध एक नए दौर में प्रवेश कर चुके हैं। दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी केवल कूटनीतिक उपलब्धि नहीं, बल्कि साझा विकास और दीर्घकालिक सहयोग का नया आधार है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि हाल के महीनों में हुए मुक्त व्यापार समझौते से व्यापार, निवेश, तकनीक, सेवाओं और प्रतिभा के आदान-प्रदान को नई गति मिलेगी। उनका कहना था कि यह समझौता दोनों देशों के उद्योगों और निवेशकों के लिए अनेक नए अवसर लेकर आएगा।

    उन्होंने बताया कि भारत और न्यूजीलैंड ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। साथ ही न्यूजीलैंड की ओर से भारत में दीर्घकालिक निवेश की प्रतिबद्धता दोनों देशों के बीच बढ़ते भरोसे का संकेत है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह केवल पूंजी निवेश नहीं, बल्कि भारत के विकास और नवाचार की यात्रा में साझेदारी का प्रतीक है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की आर्थिक प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि देश आज दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि बढ़ता मध्यम वर्ग, डिजिटल तकनीक का व्यापक उपयोग और लगातार विकसित हो रहा बुनियादी ढांचा भारत को वैश्विक निवेश का पसंदीदा गंतव्य बना रहे हैं। सरकार की सुधार आधारित नीतियों ने उद्योगों के लिए बेहतर वातावरण तैयार किया है और निवेशकों को दीर्घकालिक स्थिरता का भरोसा दिया है।

    उन्होंने उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि विनिर्माण क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए कई प्रमुख उद्योगों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। खाद्य प्रसंस्करण, वस्त्र, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य क्षेत्रों में निवेश की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने वैश्विक कंपनियों को भारत में उत्पादन बढ़ाने और आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा बनने का निमंत्रण दिया।

    प्रधानमंत्री ने विमानन, पर्यटन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत का घरेलू विमानन क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है और दोनों देश कार्गो कॉरिडोर, बेहतर हवाई संपर्क तथा संयुक्त पर्यटन पैकेज विकसित कर सकते हैं। कृषि और बागवानी क्षेत्र में भी सहयोग की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि न्यूजीलैंड की विशेषज्ञता और भारत के विशाल उपभोक्ता बाजार का संयोजन वैश्विक निर्यात के नए अवसर तैयार कर सकता है।

    अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने डिजिटल भुगतान, फिनटेक, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और स्मार्ट शहरों जैसे क्षेत्रों को भविष्य की साझेदारी का आधार बताया। उन्होंने कहा कि भारत में निजी भागीदारी के लिए अंतरिक्ष क्षेत्र खोला जा चुका है और बड़ी संख्या में स्टार्टअप नवाचार को आगे बढ़ा रहे हैं। जल प्रबंधन, शहरी परिवहन, कचरा प्रबंधन और आधुनिक तकनीकों के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच सहयोग को नई दिशा दी जा सकती है। प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि मजबूत आर्थिक सहयोग, नवाचार और साझा निवेश के माध्यम से भारत और न्यूजीलैंड आने वाले वर्षों में वैश्विक विकास के महत्वपूर्ण साझेदार बनकर उभरेंगे।

  • 40 साल बाद भारतीय प्रधानमंत्री का ऐतिहासिक न्यूजीलैंड दौरा, पीएम मोदी और क्रिस्टोफर लक्सन की मुलाकात से द्विपक्षीय संबंधों को मिली नई रफ्तार

    40 साल बाद भारतीय प्रधानमंत्री का ऐतिहासिक न्यूजीलैंड दौरा, पीएम मोदी और क्रिस्टोफर लक्सन की मुलाकात से द्विपक्षीय संबंधों को मिली नई रफ्तार


    नई दिल्ली ।
    चार दशक से अधिक समय बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की न्यूजीलैंड यात्रा ने दोनों देशों के संबंधों को नई ऊर्जा देने का अवसर प्रदान किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय राजकीय दौरे पर न्यूजीलैंड पहुंचे, जहां उनका प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने गर्मजोशी से स्वागत किया। यह यात्रा केवल औपचारिक कूटनीतिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे भारत और न्यूजीलैंड के बीच राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को नए स्तर पर ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    ऑकलैंड पहुंचने पर दोनों नेताओं की मुलाकात की तस्वीरें और वीडियो व्यापक रूप से चर्चा में रहे। स्वागत के दौरान दोनों नेताओं ने आत्मीयता के साथ एक-दूसरे का अभिवादन किया, जिससे दोनों देशों के मजबूत होते संबंधों का स्पष्ट संदेश भी गया। इस अवसर पर न्यूजीलैंड के शीर्ष नेतृत्व ने भारत के साथ दीर्घकालिक सहयोग को और मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।

    प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए स्वागत संदेश पर दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने भी भारत और न्यूजीलैंड की मित्रता तथा प्रगति के लिए शुभकामनाएं व्यक्त कीं। राष्ट्रपति के इस संदेश का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी जवाब दिया और कहा कि मित्र देशों की ओर से मिलने वाले ऐसे विचारपूर्ण संदेश हमेशा विशेष महत्व रखते हैं। इस संवाद को क्षेत्रीय सहयोग और आपसी विश्वास का सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

    प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब भारत इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपने सहयोगी देशों के साथ संबंधों को लगातार मजबूत करने पर विशेष ध्यान दे रहा है। भारत की एक्ट ईस्ट नीति और समुद्री क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की रणनीति के तहत न्यूजीलैंड का महत्व लगातार बढ़ा है। दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, शिक्षा, कृषि, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और रक्षा सहयोग जैसे क्षेत्रों में साझेदारी का दायरा बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया जाएगा।

    दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को नई गति देने के लिए विभिन्न संभावनाओं पर विचार होने की उम्मीद है। निवेश बढ़ाने, आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने, नवाचार, डिजिटल अर्थव्यवस्था और स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा प्रस्तावित है। इसके अलावा क्षेत्रीय सुरक्षा, समुद्री सहयोग और मुक्त तथा समावेशी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के साझा दृष्टिकोण पर भी दोनों नेताओं के बीच विस्तृत बातचीत होने की संभावना है।

    प्रधानमंत्री मोदी अपने प्रवास के दौरान न्यूजीलैंड के उद्योग जगत, व्यापारिक समुदाय और खेल क्षेत्र के प्रमुख प्रतिनिधियों से भी मुलाकात करेंगे। साथ ही वहां रहने वाले भारतीय समुदाय को संबोधित कर भारत और प्रवासी भारतीयों के बीच संबंधों को और मजबूत करने का संदेश देंगे। न्यूजीलैंड में भारतीय मूल के लोगों की बढ़ती भागीदारी दोनों देशों के सामाजिक और आर्थिक रिश्तों का महत्वपूर्ण आधार मानी जाती है।

    न्यूजीलैंड प्रधानमंत्री मोदी की तीन देशों की विदेश यात्रा का अंतिम पड़ाव है। इससे पहले वह इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया का दौरा कर चुके हैं। लगातार तीन महत्वपूर्ण देशों की इस यात्रा को भारत की सक्रिय विदेश नीति और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ती भूमिका के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस ऐतिहासिक यात्रा से भारत और न्यूजीलैंड के बीच सहयोग के नए अवसर खुलेंगे तथा दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी आने वाले वर्षों में और अधिक मजबूत होगी।

  • तीन देशों के रणनीतिक दौरे के अंतिम चरण में न्यूजीलैंड पहुंचे पीएम मोदी, द्विपक्षीय संबंधों और आर्थिक साझेदारी को मिलेगा नया विस्तार

    तीन देशों के रणनीतिक दौरे के अंतिम चरण में न्यूजीलैंड पहुंचे पीएम मोदी, द्विपक्षीय संबंधों और आर्थिक साझेदारी को मिलेगा नया विस्तार

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी तीन देशों की रणनीतिक विदेश यात्रा के अंतिम चरण में शुक्रवार को न्यूजीलैंड पहुंच गए। इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया की यात्रा पूरी करने के बाद उनका यह दौरा भारत और न्यूजीलैंड के बीच द्विपक्षीय संबंधों को नई गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस यात्रा का प्रमुख उद्देश्य व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, निवेश और क्षेत्रीय सहयोग को और अधिक मजबूत बनाना है। भारत की बदलती वैश्विक भूमिका और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ते रणनीतिक महत्व के बीच यह दौरा विशेष महत्व रखता है।

    ऑस्ट्रेलिया प्रवास के दौरान दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग को लेकर सहमति बनी। नागरिक परमाणु ऊर्जा, समुद्री सुरक्षा और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ने की दिशा में सकारात्मक पहल हुई। इन समझौतों को भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा, औद्योगिक विकास और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसके बाद अब न्यूजीलैंड यात्रा पर भी दोनों देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को नए स्तर तक पहुंचाने पर जोर रहेगा।

    प्रधानमंत्री मोदी न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के निमंत्रण पर ऑकलैंड पहुंचे हैं। यहां उनके विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों के साथ उच्चस्तरीय बैठकों में भाग लेने का कार्यक्रम निर्धारित है। दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच व्यापार, निवेश, कृषि, शिक्षा, तकनीक और रक्षा सहयोग जैसे अनेक विषयों पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है। इसके अलावा दोनों देशों के बीच लोगों के आपसी संबंधों और आर्थिक भागीदारी को मजबूत करने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।

    यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री सरकारी कार्यक्रमों के अलावा व्यापार और खेल क्षेत्र से जुड़े आयोजनों में भी हिस्सा लेंगे। इन कार्यक्रमों के माध्यम से उद्योग जगत, निवेशकों और विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ संवाद स्थापित किया जाएगा। भारतीय समुदाय के साथ उनका विशेष कार्यक्रम भी प्रस्तावित है, जिसमें दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और सामाजिक संबंधों को और मजबूत करने का संदेश दिया जाएगा। विदेशों में बसे भारतीय समुदाय की भूमिका को भारत लगातार अपनी वैश्विक साझेदारी का महत्वपूर्ण आधार मानता रहा है।

    भारत और न्यूजीलैंड के बीच पिछले कुछ वर्षों में आर्थिक और रणनीतिक सहयोग लगातार बढ़ा है। दोनों देश मुक्त और सुरक्षित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र, आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती, खाद्य सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के पक्षधर रहे हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री की यह यात्रा भविष्य की साझेदारी के लिए नई संभावनाओं का मार्ग प्रशस्त कर सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस दौरे से दोनों देशों के बीच व्यापारिक अवसरों में विस्तार के साथ निवेश और तकनीकी सहयोग को भी नई गति मिलेगी।

    प्रधानमंत्री मोदी की इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की यह यात्रा भारत की सक्रिय विदेश नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही है। लगातार बढ़ते वैश्विक आर्थिक और रणनीतिक बदलावों के बीच भारत अपने प्रमुख साझेदार देशों के साथ संबंधों को मजबूत करने की दिशा में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। इस यात्रा के समापन के बाद प्रधानमंत्री नई दिल्ली लौटेंगे। माना जा रहा है कि इस पूरे दौरे के परिणाम आने वाले वर्षों में भारत के व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग और क्षेत्रीय रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती प्रदान करेंगे।

  • इंडोनेशिया में भारत की कूटनीतिक ताकत का बड़ा प्रदर्शन, 20 अहम समझौतों के साथ रक्षा, व्यापार और समुद्री सहयोग को मिली नई दिशा

    इंडोनेशिया में भारत की कूटनीतिक ताकत का बड़ा प्रदर्शन, 20 अहम समझौतों के साथ रक्षा, व्यापार और समुद्री सहयोग को मिली नई दिशा

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो दिवसीय इंडोनेशिया यात्रा भारत की कूटनीतिक और रणनीतिक प्राथमिकताओं के लिहाज से महत्वपूर्ण साबित हुई है। जकार्ता में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ हुई उच्चस्तरीय वार्ता के दौरान दोनों देशों ने रक्षा, समुद्री सुरक्षा, कृषि, अंतरिक्ष, चुनाव प्रबंधन, निवेश और महत्वपूर्ण खनिजों सहित कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच अनेक महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए, जिन्हें हिंद-प्रशांत क्षेत्र में दोनों देशों की साझेदारी को नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है।

    यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी का औपचारिक स्वागत किया गया और राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने उन्हें इंडोनेशिया के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘बिंतांग आदिपूर्णा’ से सम्मानित किया। प्रधानमंत्री ने इस सम्मान को भारत के 140 करोड़ नागरिकों का सम्मान बताते हुए इंडोनेशिया की सरकार और वहां की जनता के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और लोकतांत्रिक संबंध समय के साथ और अधिक मजबूत हुए हैं तथा भविष्य में यह साझेदारी नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगी।

    द्विपक्षीय वार्ता में रक्षा सहयोग सबसे प्रमुख विषय रहा। दोनों देशों के बीच ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल सहयोग को लेकर महत्वपूर्ण समझौता हुआ, जिसे भारत के रक्षा निर्यात और स्वदेशी रक्षा उद्योग के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इसके साथ ही समुद्री सुरक्षा, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग और सामरिक समन्वय को भी आगे बढ़ाने पर सहमति बनी। विशेषज्ञों का मानना है कि इन समझौतों से क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग और आपसी विश्वास को नई मजबूती मिलेगी।

    बैठक के दौरान चुनाव प्रबंधन और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग प्रणाली में सहयोग, कृषि अनुसंधान, खाद्य सुरक्षा, अंतरिक्ष विज्ञान, तकनीकी साझेदारी तथा क्रिटिकल मिनरल्स में निवेश जैसे विषयों पर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। दोनों देशों ने विज्ञान, नवाचार और उभरती तकनीकों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। इससे आर्थिक संबंधों के साथ-साथ तकनीकी साझेदारी के नए अवसर खुलने की उम्मीद है।

    इंडोनेशिया की संसद को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया मिलकर दुनिया में मानवता को नई ऊर्जा प्रदान कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारत विस्तारवाद नहीं बल्कि विकासवाद की नीति में विश्वास रखता है। प्रधानमंत्री ने दोनों देशों की समुद्री निकटता का उल्लेख करते हुए कहा कि भौगोलिक दूरी भले अधिक दिखाई देती हो, लेकिन समुद्र दोनों देशों के बीच सहयोग और विश्वास का मजबूत सेतु है। उन्होंने लोकतांत्रिक मूल्यों, शांति और साझा विकास को दोनों देशों की साझेदारी का आधार बताया।

    प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत और इंडोनेशिया का संबंध केवल सरकारों तक सीमित नहीं है, बल्कि दोनों देशों की जनता, संस्कृति, इतिहास और सभ्यताओं के बीच गहरे जुड़ाव पर आधारित है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देश वैश्विक चुनौतियों का समाधान सहयोग, संवाद और परस्पर सम्मान के माध्यम से तलाशने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने राष्ट्रपति प्रबोवो के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों का भी उल्लेख करते हुए दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्वास को रेखांकित किया।

    यात्रा के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री मोदी जकार्ता में भारतीय समुदाय को भी संबोधित करेंगे। इस कार्यक्रम के माध्यम से भारत की विकास यात्रा, वैश्विक भूमिका और प्रवासी भारतीयों के योगदान पर विशेष जोर दिए जाने की उम्मीद है। कुल मिलाकर यह यात्रा भारत और इंडोनेशिया के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी, रक्षा सहयोग, आर्थिक संबंधों और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझा दृष्टिकोण को और अधिक मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में देखी जा रही है।

  • भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों में नई गति की उम्मीद, पीएम मोदी की यात्रा से वार्षिक समिट, आर्थिक सहयोग और लोगों के जुड़ाव को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

    भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों में नई गति की उम्मीद, पीएम मोदी की यात्रा से वार्षिक समिट, आर्थिक सहयोग और लोगों के जुड़ाव को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे को भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच तेजी से मजबूत होते द्विपक्षीय संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है। यात्रा से पहले ऑस्ट्रेलिया में भारत के उच्चायुक्त नागेश सिंह ने दोनों देशों के बीच विकसित हो रहे रणनीतिक सहयोग, आर्थिक साझेदारी, रक्षा संबंधों, लोगों के बीच बढ़ते संपर्क और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझा दृष्टिकोण पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने विश्वास जताया कि यह दौरा दोनों देशों की व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और अधिक मजबूत करेगा तथा भविष्य के सहयोग के लिए नए रास्ते खोलेगा।

    उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह तीसरा ऑस्ट्रेलिया दौरा है, जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि दोनों देशों के संबंध लगातार नई ऊंचाइयों तक पहुंच रहे हैं। वर्ष 2020 में भारत और ऑस्ट्रेलिया के रिश्तों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया गया था, जिसके बाद रक्षा, सुरक्षा, व्यापार, निवेश, स्वच्छ ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिजों और तकनीकी सहयोग जैसे अनेक क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। उनके अनुसार दोनों लोकतांत्रिक देशों के साझा मूल्य इस संबंध को और अधिक मजबूत आधार प्रदान करते हैं।

    नागेश सिंह ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में भारत और ऑस्ट्रेलिया का सहयोग पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। उन्होंने कहा कि दोनों देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र को स्वतंत्र, सुरक्षित, शांतिपूर्ण और समृद्ध बनाए रखने के पक्षधर हैं। हाल के वर्षों में विभिन्न क्षेत्रों में संघर्ष और अस्थिरता के बावजूद भारत और ऑस्ट्रेलिया के संबंध स्थिरता और भरोसे के साथ आगे बढ़े हैं। यही कारण है कि दोनों देश क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर भी एक-दूसरे के साथ समन्वय बढ़ा रहे हैं।

    उन्होंने आर्थिक सहयोग को भी इस साझेदारी का महत्वपूर्ण आधार बताया। उनके अनुसार ऑस्ट्रेलिया के पास प्रचुर मात्रा में महत्वपूर्ण खनिज और प्राकृतिक संसाधन उपलब्ध हैं, जबकि भारत के पास विशाल बाजार और मजबूत विनिर्माण क्षमता है। दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग, निवेश और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उनका मानना है कि यह साझेदारी आने वाले वर्षों में दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए लाभदायक साबित होगी।

    भारतीय उच्चायुक्त ने दोनों देशों के बीच लोगों के आपसी जुड़ाव को भी संबंधों की सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया में भारतीय मूल के लगभग दस लाख लोग विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। शिक्षा, व्यवसाय, राजनीति और अन्य पेशेवर क्षेत्रों में भारतीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी दोनों देशों के बीच मजबूत सामाजिक और सांस्कृतिक पुल का कार्य कर रही है। इससे आपसी विश्वास और सहयोग को लगातार नई मजबूती मिल रही है।

    उन्होंने भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच आयोजित होने वाले वार्षिक नेताओं के शिखर सम्मेलन को भी विशेष महत्व का बताया। उनके अनुसार भारत बहुत कम देशों के साथ हर वर्ष शीर्ष नेतृत्व स्तर पर नियमित शिखर बैठक आयोजित करता है। यह परंपरा दोनों देशों के बीच गहरे विश्वास और निरंतर संवाद का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा उसी निरंतरता का हिस्सा है और इससे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में नई पहल सामने आने की उम्मीद है।

    प्रधानमंत्री के ऑस्ट्रेलिया प्रवास के दौरान भारतीय समुदाय को संबोधित करने के लिए एक बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया जाएगा। उच्चायुक्त ने बताया कि इस कार्यक्रम को लेकर भारतीय समुदाय में व्यापक उत्साह है और देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में लोग इसमें शामिल होने पहुंचेंगे। उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल भारतीय समुदाय तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और सामाजिक संबंधों की गहराई को भी प्रदर्शित करेगा।

    खेल सहयोग पर उन्होंने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट से आगे बढ़कर अन्य खेलों में भी साझेदारी का विस्तार करना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच खेलों के आदान-प्रदान, प्रशिक्षण और नई खेल संस्कृतियों को बढ़ावा देने पर भी चर्चा हो रही है। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत और ऑस्ट्रेलिया की द्विपक्षीय साझेदारी अपने स्वतंत्र आधार पर आगे बढ़ रही है और इसका मूल उद्देश्य शांति, स्थिरता, साझा विकास तथा नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को मजबूत करना है।

  • भारत-इंडोनेशिया संबंधों को नई रणनीतिक मजबूती, पीएम मोदी और राष्ट्रपति प्रबोवो की वार्ता में व्यापार, रक्षा और समुद्री सहयोग पर बनी व्यापक सहमति

    भारत-इंडोनेशिया संबंधों को नई रणनीतिक मजबूती, पीएम मोदी और राष्ट्रपति प्रबोवो की वार्ता में व्यापार, रक्षा और समुद्री सहयोग पर बनी व्यापक सहमति

    नई दिल्ली । भारत और इंडोनेशिया के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने की दिशा में मंगलवार को महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता में व्यापार, रक्षा, समुद्री सुरक्षा, कृषि, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और मानव विकास सहित कई अहम क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर व्यापक चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि बदलते वैश्विक और क्षेत्रीय परिदृश्य में दोनों देशों के बीच सहयोग को नई गति देना समय की आवश्यकता है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वार्ता के बाद कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत और इंडोनेशिया के संबंधों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के रिश्तों में केवल मजबूती ही नहीं आई है, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग का दायरा भी लगातार विस्तृत हुआ है। प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि मौजूदा बैठक से रणनीतिक साझेदारी और अधिक मजबूत होगी तथा क्षेत्रीय एवं वैश्विक स्तर पर सहयोग के नए अवसर तैयार होंगे।

    वार्ता के दौरान आर्थिक सहयोग को विशेष प्राथमिकता दी गई। दोनों नेताओं ने व्यापार और निवेश बढ़ाने के साथ-साथ कृषि, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और मानव संसाधन विकास के क्षेत्र में साझेदारी को विस्तार देने पर विचार-विमर्श किया। दोनों पक्षों ने इस बात पर जोर दिया कि आपसी सहयोग से न केवल दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को लाभ मिलेगा, बल्कि क्षेत्रीय विकास और स्थिरता को भी मजबूती मिलेगी।

    रक्षा और सुरक्षा सहयोग भी बैठक का प्रमुख केंद्र रहा। हिंद-प्रशांत क्षेत्र के दो महत्वपूर्ण समुद्री देशों के रूप में भारत और इंडोनेशिया ने समुद्री सुरक्षा, रक्षा सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर साझा दृष्टिकोण दोहराया। दोनों देशों ने समुद्री मार्गों की सुरक्षा, रणनीतिक समन्वय और रक्षा क्षमता को मजबूत करने की दिशा में सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। इस दौरान रक्षा क्षेत्र में हुए समझौतों को दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना गया।

    संयुक्त प्रेस वार्ता में प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण समझौते हुए हैं। इनमें सबसे प्रमुख ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली से जुड़ा सहयोग रहा, जिसके तहत भारत इंडोनेशिया को अतिरिक्त ब्रह्मोस मिसाइल यूनिट उपलब्ध कराएगा। इसके साथ ही इंडोनेशिया ने भारतीय ‘अस्त्र’ एयर-टू-एयर मिसाइल प्रणाली को खरीदने का निर्णय भी लिया है। इन समझौतों को भारत के रक्षा निर्यात और दोनों देशों के बढ़ते रक्षा सहयोग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    प्रधानमंत्री मोदी का तीन दिवसीय इंडोनेशिया दौरा केवल रणनीतिक और आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि सांस्कृतिक संबंधों को भी नई ऊर्जा देने का प्रयास माना जा रहा है। उन्होंने साझा सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि योग्याकार्ता स्थित एक हजार वर्ष से अधिक पुराने प्रम्बानन मंदिर का पुनर्निर्माण परियोजना दोनों देशों के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों का प्रतीक है। प्रधानमंत्री बुधवार को राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ इस परियोजना का शुभारंभ करेंगे।

    दौरे के दौरान प्रधानमंत्री भारतीय समुदाय को भी संबोधित करेंगे। माना जा रहा है कि यह यात्रा भारत और इंडोनेशिया के बीच व्यापक रणनीतिक सहयोग, रक्षा साझेदारी, आर्थिक संबंधों और सांस्कृतिक जुड़ाव को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। दोनों देशों ने भविष्य में आपसी विश्वास, साझा हितों और क्षेत्रीय शांति को आधार बनाकर सहयोग को और अधिक मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

  • भारत-इंडोनेशिया संबंधों को मिली नई रणनीतिक रफ्तार, पीएम मोदी बोले- दोनों देशों की साझेदारी का लाभ पूरी दुनिया और मानवता को मिलेगा

    भारत-इंडोनेशिया संबंधों को मिली नई रणनीतिक रफ्तार, पीएम मोदी बोले- दोनों देशों की साझेदारी का लाभ पूरी दुनिया और मानवता को मिलेगा

    नई दिल्ली । भारत और इंडोनेशिया के संबंधों को नई मजबूती देते हुए दोनों देशों ने रक्षा, समुद्री सुरक्षा, डिजिटल भुगतान, स्वास्थ्य, शिक्षा, अंतरिक्ष, औद्योगिक सहयोग और तकनीक समेत अनेक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण समझौतों पर सहमति बनाई है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया की बढ़ती रणनीतिक साझेदारी केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसका सकारात्मक प्रभाव 21वीं सदी की वैश्विक व्यवस्था और पूरी मानवता पर भी दिखाई देगा। उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों देशों के बीच सहयोग का नया दौर साझा विकास और स्थिरता को नई दिशा देगा।

    प्रधानमंत्री मोदी ने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो द्वारा दिए गए आत्मीय स्वागत और देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान को भारत के 140 करोड़ नागरिकों के सम्मान के रूप में स्वीकार करते हुए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान दोनों देशों के दशकों पुराने ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक संबंधों का प्रतीक है तथा भविष्य में सहयोग को और अधिक मजबूत करने की प्रेरणा देगा।

    उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत और इंडोनेशिया के रिश्तों में विश्वास, सहयोग और रणनीतिक समझ लगातार बढ़ी है। वर्ष 2018 में स्थापित व्यापक रणनीतिक साझेदारी अब नए चरण में प्रवेश कर रही है। विकास, सुरक्षा, तकनीक, शिक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों ने उल्लेखनीय प्रगति की है और आगे भी इसे नई ऊंचाइयों तक ले जाने का संकल्प लिया गया है।

    रक्षा और समुद्री सुरक्षा को लेकर दोनों देशों ने सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर दिया है। रक्षा आदान-प्रदान, आपदा प्रबंधन, औद्योगिक सहयोग और हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा के लिए दोनों देशों के तटरक्षक बल मिलकर काम करेंगे। ब्लू इकोनॉमी, बंदरगाह विकास और समुद्री व्यापार के क्षेत्र में भी साझेदारी को विस्तार देने पर सहमति बनी है, जिससे क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों और समुद्री संपर्क को नई गति मिलने की उम्मीद है।

    स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा को भी सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों में शामिल किया गया है। भारत की किफायती दवाओं की उपलब्धता इंडोनेशिया में बढ़ाने, वहां के डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के प्रशिक्षण में सहयोग देने तथा उन्नत गेहूं के बीज उपलब्ध कराने जैसे कदमों पर सहमति बनी है। इसके साथ ही सार्वजनिक वितरण प्रणाली और कल्याणकारी योजनाओं के संचालन से जुड़े भारतीय अनुभव भी साझा किए जाएंगे, ताकि दोनों देशों के नागरिकों तक सरकारी सेवाओं का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से पहुंच सके।

    तकनीक और डिजिटल क्षेत्र में दोनों देशों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, दूरसंचार, डिजिटल अवसंरचना और स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने का निर्णय लिया है। भारत की यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस प्रणाली को इंडोनेशिया की भुगतान व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में भी सहमति बनी है। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और पर्यटन को सुविधा मिलेगी। शिक्षा के क्षेत्र में भारत के प्रतिष्ठित प्रबंधन संस्थान का परिसर इंडोनेशिया में स्थापित करने की योजना भी सामने आई है, जिससे पूरे आसियान क्षेत्र के विद्यार्थियों को लाभ मिलने की संभावना है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने अंतरिक्ष अनुसंधान, तकनीकी क्षमता निर्माण, महत्वपूर्ण खनिजों, स्टील और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के लिए भी संयुक्त प्रयासों की घोषणा की। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों, विविधता में एकता और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को मजबूत करने में दोनों देशों की महत्वपूर्ण भूमिका है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग, आसियान की केंद्रीय भूमिका, संवाद आधारित कूटनीति और वैश्विक शांति के प्रति साझा प्रतिबद्धता दोनों देशों के संबंधों को और अधिक मजबूत बनाएगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि साझा इतिहास, साझा विश्वास और साझा समृद्धि के आधार पर भारत और इंडोनेशिया आने वाले वर्षों में नई सफलताओं की मिसाल कायम करेंगे।

  • भारत-इंडोनेशिया संबंधों को मिलेगा नया आयाम, जकार्ता में पीएम मोदी और राष्ट्रपति सुबियांतो के बीच रक्षा से डिजिटल अर्थव्यवस्था तक होगी व्यापक चर्चा

    भारत-इंडोनेशिया संबंधों को मिलेगा नया आयाम, जकार्ता में पीएम मोदी और राष्ट्रपति सुबियांतो के बीच रक्षा से डिजिटल अर्थव्यवस्था तक होगी व्यापक चर्चा

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया यात्रा के दूसरे दिन भारत और इंडोनेशिया के संबंधों को नई गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जाने की उम्मीद है। जकार्ता में प्रधानमंत्री का औपचारिक और भव्य स्वागत किया गया, जहां इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ उनकी उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठक निर्धारित है। इस बैठक में दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने के लिए कई अहम मुद्दों पर चर्चा की जाएगी तथा विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने वाले कई समझौतों पर हस्ताक्षर होने की संभावना है।

    औपचारिक स्वागत समारोह के दौरान राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने प्रधानमंत्री मोदी का आत्मीय स्वागत किया। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे का अभिवादन करने के बाद अपने-अपने प्रतिनिधिमंडलों से परिचय कराया। प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति भवन स्थित अतिथि पुस्तिका में हस्ताक्षर भी किए। इस अवसर पर दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी और मंत्री भी उपस्थित रहे, जिससे इस यात्रा के महत्व का स्पष्ट संकेत मिला।

    दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत करने के लिए बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे भारत और इंडोनेशिया के राष्ट्रीय ध्वज लेकर कार्यक्रम स्थल पर मौजूद रहे। प्रधानमंत्री ने बच्चों का अभिवादन स्वीकार किया और उनसे आत्मीयता से मुलाकात की। यह दृश्य दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे सांस्कृतिक और जन-स्तरीय संबंधों का प्रतीक माना जा रहा है।

    प्रधानमंत्री ने जकार्ता पहुंचने पर मिले स्वागत को विशेष बताते हुए उसके कुछ दृश्य साझा किए और राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ होने वाली बैठक को लेकर उत्साह व्यक्त किया। उन्होंने यह भी कहा कि भारत और इंडोनेशिया के बीच स्थापित व्यापक रणनीतिक साझेदारी ने दोनों देशों के लोगों को लाभ पहुंचाया है और अब इस सहयोग को नए क्षेत्रों तक विस्तारित करने का अवसर है।

    द्विपक्षीय वार्ता में रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, क्रिटिकल मिनरल्स, खाद्य सुरक्षा और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण विषय प्रमुख रूप से शामिल रहेंगे। इसके अलावा दोनों देश निवेश, व्यापार, प्रौद्योगिकी, क्षमता निर्माण और क्षेत्रीय सहयोग को लेकर भी नए अवसरों पर विचार करेंगे। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता, सुरक्षित समुद्री मार्ग और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने पर भी चर्चा होने की संभावना है।

    बैठक के दौरान वर्ष 2018 में स्थापित व्यापक रणनीतिक साझेदारी के तहत अब तक हुई प्रगति की समीक्षा भी की जाएगी। दोनों देश इस साझेदारी को अधिक व्यावहारिक और परिणामोन्मुख बनाने के लिए नई पहल पर सहमति बना सकते हैं। इससे द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ क्षेत्रीय सहयोग को भी नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

    प्रधानमंत्री मोदी की यह इंडोनेशिया की चौथी यात्रा है, लेकिन व्यापक रणनीतिक साझेदारी का दर्जा मिलने के बाद यह उनकी पहली द्विपक्षीय यात्रा है। ऐसे में इस दौरे को दोनों देशों के रिश्तों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं के बीच यह यात्रा भारत और इंडोनेशिया के संबंधों को और अधिक मजबूत बनाने तथा भविष्य की साझा विकास यात्रा को नई गति देने की दिशा में एक अहम पड़ाव साबित हो सकती है।

  • भारत-इंडोनेशिया रक्षा साझेदारी को नई मजबूती, ब्रह्मोस मिसाइल आपूर्ति समझौते से स्वदेशी रक्षा उद्योग को मिलेगा बड़ा प्रोत्साहन

    भारत-इंडोनेशिया रक्षा साझेदारी को नई मजबूती, ब्रह्मोस मिसाइल आपूर्ति समझौते से स्वदेशी रक्षा उद्योग को मिलेगा बड़ा प्रोत्साहन

    नई दिल्ली । भारत और इंडोनेशिया ने रक्षा सहयोग को नई ऊंचाई देते हुए ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण समझौता किया है। इस करार को भारत के रक्षा निर्यात, स्वदेशी सैन्य तकनीक और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी के लिहाज से एक अहम उपलब्धि माना जा रहा है। समझौते के साथ दोनों देशों ने रक्षा, समुद्री सुरक्षा, औद्योगिक सहयोग और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी संबंधों को और मजबूत बनाने पर सहमति जताई है।

    यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान संपन्न हुआ, जो उनके तीन देशों के विदेश दौरे का पहला चरण है। इस अवसर पर दोनों देशों के बीच कई रणनीतिक और आर्थिक समझौतों को अंतिम रूप दिया गया। ब्रह्मोस मिसाइल की आपूर्ति के साथ भारत की स्वदेशी रक्षा उत्पादन क्षमता को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    समझौते के तहत इंडोनेशिया भारत में विकसित ‘अस्त्र’ एयर-टू-एयर मिसाइल प्रणाली की खरीद भी करेगा। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन द्वारा विकसित यह मिसाइल ‘बियॉन्ड विजुअल रेंज’ क्षमता से लैस है और आधुनिक हवाई युद्ध की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। यह तेजी से दिशा बदलने वाले दुश्मन के लड़ाकू विमानों को लक्ष्य बनाकर उन्हें प्रभावी ढंग से निष्क्रिय करने में सक्षम मानी जाती है।

    जानकारी के अनुसार भारत भविष्य में इंडोनेशिया को ब्रह्मोस मिसाइल की अतिरिक्त बैटरियां भी उपलब्ध करा सकता है। यदि ऐसा होता है तो यह भारत के रक्षा निर्यात कार्यक्रम को और मजबूती देगा तथा स्वदेशी रक्षा उद्योग के लिए नए अवसर तैयार करेगा। हाल के वर्षों में भारत ने रक्षा उपकरणों के निर्यात को बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया है और कई मित्र देशों के साथ इस दिशा में सहयोग लगातार बढ़ रहा है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्वास को इस साझेदारी की सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि भारत और इंडोनेशिया के बीच रक्षा, सुरक्षा और समुद्री सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। उनके अनुसार नए समझौतों से रक्षा आदान-प्रदान, आपदा प्रबंधन, औद्योगिक सहयोग और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में भी व्यापक सहयोग का मार्ग प्रशस्त होगा।

    रक्षा क्षेत्र के अलावा दोनों देशों ने स्वास्थ्य, खनिज संसाधन और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। भारत की गुणवत्तापूर्ण और किफायती दवाओं की उपलब्धता इंडोनेशिया में और आसान बनाने पर सहमति बनी है। साथ ही डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के प्रशिक्षण एवं क्षमता विकास में भी भारत सहयोग करेगा, जिससे स्वास्थ्य क्षेत्र में द्विपक्षीय संबंध और मजबूत होंगे।

    भारत और इंडोनेशिया ने आवश्यक खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के लिए स्टील, मिनरल्स और आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया है। इसके अलावा भारत इंडोनेशिया को विशेष इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन विकसित करने और चुनावी प्रौद्योगिकी से जुड़ा तकनीकी सहयोग भी उपलब्ध कराएगा। इन पहलों को दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक रणनीतिक सहयोग का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

    यात्रा के दौरान इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश के सर्वोच्च नागरिक एवं सैन्य सम्मान ‘बिंतांग आदिपूर्णा ऑफ द रिपब्लिक ऑफ इंडोनेशिया’ से सम्मानित किया। यह सम्मान उन व्यक्तियों को प्रदान किया जाता है जिन्होंने असाधारण योगदान और उत्कृष्ट सेवाएं दी हों। इस सम्मान को भारत और इंडोनेशिया के बीच मजबूत होते संबंधों तथा पारस्परिक विश्वास का प्रतीक माना जा रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रह्मोस और ‘अस्त्र’ जैसी स्वदेशी रक्षा प्रणालियों का निर्यात भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता, तकनीकी क्षमता और वैश्विक रक्षा बाजार में बढ़ती उपस्थिति को और मजबूत करेगा। साथ ही यह समझौता इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में दोनों देशों के रणनीतिक सहयोग को नई दिशा देने के साथ भारत के घरेलू रक्षा उद्योग, अनुसंधान और विनिर्माण क्षेत्र के लिए भी दीर्घकालिक अवसरों का मार्ग प्रशस्त करेगा।