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  • लखनऊ पहुंचे भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन, 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति पर वरिष्ठ नेताओं संग करेंगे मंथन

    लखनऊ पहुंचे भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन, 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति पर वरिष्ठ नेताओं संग करेंगे मंथन

    नई दिल्ली । भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन शनिवार को दो दिवसीय दौरे पर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ पहुंचे। उनके दौरे को वर्ष 2027 में प्रस्तावित उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दौरान वह पार्टी के वरिष्ठ नेताओं, जनप्रतिनिधियों और संगठन के विभिन्न पदाधिकारियों के साथ बैठक कर आगामी चुनावी रणनीति तथा संगठनात्मक गतिविधियों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

    लखनऊ पहुंचने पर नितिन नवीन का पार्टी कार्यकर्ताओं ने उत्साहपूर्ण स्वागत किया। स्वागत कार्यक्रम के दौरान उनके काफिले के साथ बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी उनका स्वागत किया और राज्य में उनके आगमन पर शुभकामनाएं दीं। दौरे के दौरान पार्टी नेतृत्व और राज्य सरकार के शीर्ष नेताओं के बीच कई महत्वपूर्ण बैठकों का कार्यक्रम तय किया गया है।

    भाजपा सूत्रों के अनुसार इस दौरे का मुख्य उद्देश्य आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों की समीक्षा करना और संगठन को बूथ स्तर तक और अधिक मजबूत बनाने की रणनीति तैयार करना है। पार्टी नेतृत्व विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से फीडबैक लेकर भविष्य की कार्ययोजना को अंतिम रूप देने पर भी विचार करेगा।

    अपने दो दिवसीय कार्यक्रम के दौरान नितिन नवीन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ भी बैठक करेंगे। इसके अलावा उनकी प्रदेश संगठन के वरिष्ठ नेताओं, प्रदेश अध्यक्ष, उपमुख्यमंत्रियों, विधायकों तथा विभिन्न मोर्चों के पदाधिकारियों के साथ अलग-अलग चरणों में चर्चा प्रस्तावित है। इन बैठकों में संगठन के विस्तार, जनसंपर्क अभियान और चुनावी तैयारियों से जुड़े विषयों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

    पार्टी नेतृत्व क्षेत्रीय अध्यक्षों, जिला इकाई प्रमुखों और अन्य संगठनात्मक पदाधिकारियों के साथ भी संवाद करेगा। माना जा रहा है कि इन बैठकों के माध्यम से जमीनी स्तर पर संगठन की स्थिति, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों की रूपरेखा पर विस्तार से विचार-विमर्श होगा। भाजपा संगठन आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए बूथ स्तर तक अपनी तैयारियों को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है।

    दौरे के दौरान नितिन नवीन समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों और प्रबुद्ध नागरिकों से भी मुलाकात करेंगे। इसके अलावा सांस्कृतिक और सामाजिक क्षेत्र की प्रमुख हस्तियों के साथ संवाद का कार्यक्रम भी निर्धारित है। पार्टी का मानना है कि ऐसे संवादों से विभिन्न वर्गों के सुझाव प्राप्त होंगे और संगठन को व्यापक जनसंपर्क अभियान में मदद मिलेगी।

    भाजपा अध्यक्ष का यह दौरा उत्तर प्रदेश में उनके हालिया दौरों की श्रृंखला का हिस्सा माना जा रहा है। इससे पहले भी वह राज्य के विभिन्न शहरों का दौरा कर संगठनात्मक बैठकों में भाग ले चुके हैं। पार्टी नेतृत्व लगातार राज्य में संगठन की सक्रियता बढ़ाने और कार्यकर्ताओं के साथ सीधे संवाद पर जोर दे रहा है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राजनीतिक राज्य होने के कारण भाजपा की चुनावी रणनीति में केंद्रीय भूमिका निभाता है। ऐसे में राष्ट्रीय अध्यक्ष का यह दौरा केवल संगठनात्मक समीक्षा तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे आगामी विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी की तैयारियों को नई दिशा देने वाले महत्वपूर्ण कदम के रूप में भी देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में इन बैठकों से निकले निर्णय भाजपा की चुनावी रणनीति को और स्पष्ट कर सकते हैं।

  • सीनियर खिलाड़ियों के समर्थन में उतरा भारतीय क्रिकेट टीम प्रशासन, गेंदबाजी कोच ने कहा- सिर्फ एक युवा प्रतिभा के आने से रातों-रात नहीं बदला जाएगा शीर्ष क्रम का बल्लेबाजी संतुलन

    सीनियर खिलाड़ियों के समर्थन में उतरा भारतीय क्रिकेट टीम प्रशासन, गेंदबाजी कोच ने कहा- सिर्फ एक युवा प्रतिभा के आने से रातों-रात नहीं बदला जाएगा शीर्ष क्रम का बल्लेबाजी संतुलन

    नई दिल्ली । भारत और इंग्लैंड के बीच होने वाले दूसरे टी20 मुकाबले से पहले मैनचेस्टर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारतीय टीम के गेंदबाजी कोच मोर्ने मॉर्कल ने टीम के शीर्ष क्रम को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक रुख स्पष्ट किया है। पिछले कुछ समय से 15 वर्षीय युवा बल्लेबाजी सनसनी वैभव सूर्यवंशी के अंतरराष्ट्रीय पदार्पण को लेकर क्रिकेट जगत में भारी उत्सुकता देखी जा रही थी, लेकिन टीम प्रबंधन ने साफ कर दिया है कि किसी एक नई प्रतिभा के आने मात्र से मौजूदा स्थापित ओपनिंग जोड़ी को तुरंत टीम से बाहर नहीं किया जाएगा। टीम प्रशासन का मानना है कि बड़े मंच पर देश को जीत दिलाने वाले खिलाड़ियों को कुछ खराब पारियों के आधार पर टीम से ड्रॉप करना सही रणनीति नहीं है।

    वर्तमान दौरे पर भारतीय सलामी जोड़ी के दोनों बल्लेबाजों का प्रदर्शन काफी भिन्न रहा है। जहां एक ओर अभिषेक शर्मा ने अपनी पिछली तीन पारियों में एक अर्धशतक और 49 रनों की उपयोगी पारी खेलकर अपनी फॉर्म का परिचय दिया है, वहीं दूसरी ओर विकेटकीपर बल्लेबाज संजू सैमसन लगातार संघर्ष करते नजर आए हैं। सैमसन के बल्ले से पिछली तीन पारियों में क्रमशः पांच, शून्य और एक रन की बेहद संक्षिप्त पारियां निकली हैं। इस असंतुलित फॉर्म के बावजूद कोचिंग स्टाफ ने स्पष्ट किया है कि प्रबंधन किसी भी खिलाड़ी की योग्यता का आकलन महज तीन मैचों के प्रदर्शन के आधार पर नहीं करता है, बल्कि उनके पिछले योगदान को पूरा महत्व दिया जाता है।

    गेंदबाजी कोच ने अनुभवी खिलाड़ियों का बचाव करते हुए कहा कि अभिषेक शर्मा पूर्व में टी20 क्रिकेट के शीर्ष क्रम के बल्लेबाजों में शुमार रह चुके हैं और संजू सैमसन विश्व कप विजेता टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य रहे हैं। इसके साथ ही सैमसन का पिछला आईपीएल सीजन भी बेहद शानदार रहा था। ऐसी स्थिति में कोचिंग स्टाफ और प्रबंधन की यह सामूहिक जिम्मेदारी बनती है कि वे अपने खिलाड़ियों के मुश्किल दौर में उनके साथ खड़े रहें और टीम के भीतर एक सुरक्षित तथा सकारात्मक सांस्कृतिक माहौल का निर्माण करें। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि एक अत्यंत युवा खिलाड़ी लगातार टीम का दरवाजा खटखटा रहा है, जो भारतीय क्रिकेट के भविष्य के लिहाज से काफी सुखद पहलू है।

    टीम प्रबंधन ने रणनीतिक तौर पर यह भी साफ कर दिया है कि केवल वैभव सूर्यवंशी को प्लेइंग इलेवन में जगह देने के उद्देश्य से अन्य बल्लेबाजों की बल्लेबाजी पोजीशन में कोई फेरबदल नहीं किया जाएगा। कोच के अनुसार, किसी भी खिलाड़ी को उसकी स्वाभाविक भूमिका और पसंदीदा पोजीशन से हटाना पूरी टीम के रणनीतिक संतुलन को बिगाड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कठिन परिस्थितियों में मैच जिताने वाले अनुभवी खिलाड़ियों पर भरोसा बनाए रखना पहली प्राथमिकता है, जिसके बाद ही परिस्थितियों के अनुरूप सर्वश्रेष्ठ शीर्ष क्रम का निर्धारण किया जाएगा।

    भले ही मोर्ने मॉर्कल ने वैभव सूर्यवंशी के आधिकारिक डेब्यू की किसी निश्चित तारीख या मैच का खुलासा नहीं किया, लेकिन उन्होंने इस 15 वर्षीय खिलाड़ी की तकनीकी क्षमता और परिपक्वता की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि इतनी कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय ड्रेसिंग रूम के दबाव को झेलना और वहां सहज रहना किसी भी खिलाड़ी के लिए एक बड़ी चुनौती होती है। वैभव ने अपने आत्मविश्वास और बेहतरीन व्यवहार से बेहद कम समय में सीनियर खिलाड़ियों के साथ तालमेल बिठा लिया है। अंतरराष्ट्रीय नेट सेशन्स के दौरान इस युवा खिलाड़ी ने अपनी बल्लेबाजी तकनीक से पूरे कोचिंग स्टाफ को बेहद प्रभावित किया है।

    शीर्ष क्रम के अलावा गेंदबाजी कोच ने भारतीय टीम के युवा गेंदबाजी संसाधनों पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने युवा तेज गेंदबाज प्रिंस यादव की प्रतिभा को रेखांकित करते हुए कहा कि घरेलू क्रिकेट और नेट गेंदबाज के रूप में उनका प्रदर्शन लगातार बेहतर रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव की परिस्थितियों में सही निर्णय लेने की प्रिंस की क्षमता टीम के लिए उपयोगी साबित हो रही है। इसके साथ ही चोट के बाद टीम में वापसी करने वाले तेज गेंदबाज हर्षित राणा की रफ्तार और आक्रामकता को भी भारतीय तेज गेंदबाजी आक्रमण के लिए एक बेहद सकारात्मक और राहत देने वाला संकेत बताया गया है।

  • उत्तर प्रदेश चुनावी तैयारियों को धार देंगे नितिन नवीन, पहले लखनऊ दौरे में संगठन से लेकर सरकार तक होगा व्यापक मंथन

    उत्तर प्रदेश चुनावी तैयारियों को धार देंगे नितिन नवीन, पहले लखनऊ दौरे में संगठन से लेकर सरकार तक होगा व्यापक मंथन

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक गतिविधियों को तेज कर दिया है। इसी क्रम में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन 3 और 4 जुलाई को अपने पहले आधिकारिक दो दिवसीय दौरे पर लखनऊ पहुंचेंगे। हाल ही में घोषित नई प्रदेश कार्यकारिणी के बाद यह शीर्ष नेतृत्व का पहला महत्वपूर्ण दौरा माना जा रहा है। राजनीतिक दृष्टि से इस प्रवास को संगठन की मजबूती, चुनावी रणनीति और सरकार-संगठन के बेहतर समन्वय के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

    नितिन नवीन के कार्यक्रम में कई महत्वपूर्ण बैठकें प्रस्तावित हैं। दौरे के दौरान वे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दोनों उपमुख्यमंत्री, प्रदेश सरकार के मंत्रियों, सांसदों और विधायकों के साथ अलग-अलग बैठकों में हिस्सा लेंगे। इन बैठकों का उद्देश्य आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए संगठनात्मक तैयारियों की समीक्षा करना और चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देने की दिशा में आवश्यक सुझावों पर चर्चा करना बताया जा रहा है।

    दौरे के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ भी उनकी बैठक प्रस्तावित है। माना जा रहा है कि इस दौरान संगठन और सरकार के बीच समन्वय को और प्रभावी बनाने, विभिन्न स्तरों पर संवाद को मजबूत करने तथा आगामी राजनीतिक चुनौतियों से निपटने की रणनीति पर विचार-विमर्श किया जाएगा। भाजपा नेतृत्व लंबे समय से संगठनात्मक समन्वय को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल करता रहा है और यह बैठक उसी दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    हाल ही में उत्तर प्रदेश भाजपा की नई प्रदेश कार्यकारिणी का गठन किया गया है। नए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के नेतृत्व में पार्टी ने विभिन्न पदों पर नई जिम्मेदारियां सौंपी हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष अपने दौरे के दौरान नई टीम के साथ बैठक कर संगठनात्मक कार्यों की प्रगति की समीक्षा करेंगे। इसके साथ ही क्षेत्रीय अध्यक्षों, संगठन मंत्रियों और विभिन्न मोर्चों के पदाधिकारियों से भी संवाद कर जमीनी स्तर की गतिविधियों और संगठन की सक्रियता का आकलन करेंगे।

    भाजपा नेतृत्व का प्रयास है कि चुनावी तैयारियों को केवल शीर्ष स्तर तक सीमित न रखकर बूथ और मंडल स्तर तक मजबूत किया जाए। इसी उद्देश्य से राष्ट्रीय अध्यक्ष कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद कर स्थानीय मुद्दों, जनसंपर्क अभियानों और संगठन की कार्यप्रणाली पर फीडबैक प्राप्त करेंगे। पार्टी का मानना है कि जमीनी स्तर पर सक्रिय और संगठित ढांचा चुनावी सफलता का महत्वपूर्ण आधार होता है।

    राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, हाल के चुनावी अनुभवों के बाद भाजपा उत्तर प्रदेश में अपनी संगठनात्मक रणनीति को और अधिक मजबूत करने पर विशेष ध्यान दे रही है। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि आगामी विधानसभा चुनावों से पहले प्रत्येक स्तर पर तैयारियों की नियमित समीक्षा हो और संगठन के भीतर समन्वय तथा संवाद को लगातार बेहतर बनाया जाए। इसी कारण शीर्ष नेतृत्व स्वयं प्रदेश का दौरा कर स्थिति का प्रत्यक्ष आकलन कर रहा है।

    नितिन नवीन के इस दौरे को केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं बल्कि आगामी चुनावी अभियान की शुरुआती रणनीतिक कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। संभावना है कि बैठकों के दौरान संगठन विस्तार, जनसंपर्क अभियान, सरकार की योजनाओं के प्रभावी प्रचार और विपक्ष की राजनीतिक रणनीतियों के जवाब जैसे विषयों पर भी विस्तार से चर्चा होगी। आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए यह दौरा उत्तर प्रदेश भाजपा की चुनावी तैयारियों को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • बंगाल में BJP की बढ़त के पीछे अमित शाह की रणनीति बनी सबसे बड़ा फैक्टर, चुनावी खेल पूरी तरह बदला

    बंगाल में BJP की बढ़त के पीछे अमित शाह की रणनीति बनी सबसे बड़ा फैक्टर, चुनावी खेल पूरी तरह बदला

    नई दिल्ली।पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के रुझानों ने इस बार राज्य की राजनीति को एक नए मोड़ पर ला खड़ा किया है। शुरुआती आंकड़ों में भाजपा कई सीटों पर आगे दिखाई दे रही है, जिससे राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अधिक ध्यान जिस बात पर जा रहा है, वह है भाजपा की रणनीतिक तैयारी और उसके पीछे माने जा रहे प्रमुख नेतृत्व की भूमिका।

    चुनाव से काफी पहले ही राज्य में पार्टी ने अपने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने पर काम शुरू कर दिया था। बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया गया और स्थानीय मुद्दों को गहराई से समझने पर जोर दिया गया। इसका उद्देश्य यह था कि पार्टी केवल बड़े मंचों तक सीमित न रहे, बल्कि सीधे मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत कर सके।

    इस पूरी रणनीति के केंद्र में एक स्पष्ट योजना दिखाई दी, जिसमें जमीनी स्तर पर संगठन को सक्रिय करना और अलग-अलग क्षेत्रों में प्रभावशाली चेहरों को आगे लाना शामिल था। इससे पार्टी को उन इलाकों में भी समर्थन मिलने लगा, जहां पहले उसकी स्थिति कमजोर मानी जाती थी।

    चुनावी अभियान के दौरान कई महत्वपूर्ण मुद्दों को लगातार जनता के बीच रखा गया। इनमें कानून व्यवस्था, सुरक्षा, भ्रष्टाचार और विकास से जुड़े विषय प्रमुख रहे। साथ ही रोजगार और निवेश को लेकर भी मजबूत संदेश दिया गया, जिससे युवाओं और शहरी वर्ग तक पहुंच बनाने में मदद मिली।

    अभियान के दौरान महिलाओं की सुरक्षा को भी एक महत्वपूर्ण मुद्दे के रूप में सामने रखा गया। कई जनसभाओं में यह बात प्रमुखता से उठाई गई कि राज्य में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत करने की जरूरत है। इसके साथ ही विकास मॉडल को लेकर भी व्यापक चर्चा हुई, जिसमें भविष्य की दिशा को लेकर अलग दृष्टिकोण पेश किया गया।

    पूरे चुनावी अभियान के दौरान संगठनात्मक स्तर पर लगातार निगरानी और समन्वय बनाए रखा गया। रणनीति केवल चुनावी रैलियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसे हर स्तर पर लागू किया गया। कार्यकर्ताओं को लगातार दिशा-निर्देश दिए जाते रहे, जिससे अभियान में निरंतरता बनी रही।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव में भाजपा की बढ़त केवल किसी एक कारण से नहीं है, बल्कि यह कई स्तरों पर की गई तैयारियों का परिणाम है। संगठन की मजबूती, जमीनी संपर्क और मुद्दों की स्पष्टता ने इस स्थिति को बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

    फिलहाल रुझानों में भाजपा को बढ़त मिलती दिख रही है, जिससे राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है। हालांकि अंतिम परिणाम आने तक तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट नहीं होगी, लेकिन इतना तय है कि इस चुनाव ने राज्य की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे दिया है और आगे आने वाले समय में इसके असर और भी गहरे दिखाई दे सकते हैं।

  • बंदूक नहीं, दिमाग से जंग’-भारत के खिलाफ नई रणनीति पर काम कर रहा पाकिस्तान, रिपोर्ट में खुलासा

    बंदूक नहीं, दिमाग से जंग’-भारत के खिलाफ नई रणनीति पर काम कर रहा पाकिस्तान, रिपोर्ट में खुलासा

    इस्लामाबाद। आसिम मुनीर के नेतृत्व में पाकिस्तान भारत के खिलाफ नई रणनीति पर काम कर रहा है। आरोप है कि सैन्य टकराव के बजाय अब “इन्फॉर्मेशन वॉर” के जरिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि को चुनौती देने की कोशिश हो रही है।

    DisinfoLab की हालिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान एक वैश्विक मीडिया नेटवर्क और थिंक टैंक इकोसिस्टम तैयार कर रहा है, जिसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय राय को प्रभावित करना है। यह पहल कथित तौर पर पिछले साल के ऑपरेशन सिंदूर के बाद शुरू हुई, जब पाकिस्तान का नैरेटिव वैश्विक मंच पर प्रभाव नहीं डाल सका।

    ‘नैरेटिव वॉर’ का मास्टर प्लान

    रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने 2025 में “रणनीतिक संचार मास्टर प्लान” नाम से पहल शुरू की है। इसका लक्ष्य अंग्रेजी भाषा के ऐसे प्लेटफॉर्म बनाना है जो अंतरराष्ट्रीय दर्शकों में विश्वसनीय दिखें और कश्मीर जैसे मुद्दों पर पाकिस्तान-समर्थक दृष्टिकोण को आगे बढ़ाएं। पहले उर्दू-केंद्रित मैसेजिंग वैश्विक स्तर पर प्रभावी नहीं रही, इसलिए यह बदलाव किया गया।

    थिंक टैंक नेटवर्क पर फोकस

    बताया गया है कि मिन्हाज यूनिवर्सिटी लाहौर में “हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ रिसर्च एंड पॉलिसी स्टडीज” जैसे संस्थान स्थापित किए गए हैं। ये भू-राजनीति, सुरक्षा और जलवायु जैसे विषयों पर काम करने का दावा करते हैं, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार इनमें रणनीतिक तंत्र से जुड़े लोगों की भागीदारी बताई गई है।

    ग्लोबल मीडिया में पैठ की कोशिश

    रिपोर्ट में कहा गया है कि कई डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के लिए सक्रिय किया गया है, जिनमें AsiaOne News, DM News English, FP92TV और Afrik1 TV शामिल बताए गए हैं। इन प्लेटफॉर्म्स को कथित तौर पर “निष्पक्ष पत्रकारिता” के रूप में पेश किया जा रहा है, जबकि आलोचकों का आरोप है कि इनके जरिए नैरेटिव सेट करने की कोशिश हो रही है।

    ‘न्यूट्रल मीडिया’ के नाम पर रणनीति

    विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी समर्थन वाले मीडिया पर भरोसे की कमी को देखते हुए पाकिस्तान ने थिंक टैंक, सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय डिजिटल चैनलों के जरिए “सॉफ्ट पावर” आधारित रणनीति अपनाई है। इसका उद्देश्य बिना प्रत्यक्ष सैन्य टकराव के कूटनीतिक और सूचना स्तर पर प्रभाव बनाना है।
    कुल मिलाकर, रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान अब पारंपरिक सैन्य टकराव के बजाय सूचना और प्रचार के जरिए वैश्विक मंच पर भारत को चुनौती देने की रणनीति अपना रहा है।

  • युद्ध लंबा चला तो ईरान टिक नहीं पाएगा, चीन का समर्थन भी पर्याप्त नहीं, जाने एक्सपर्ट्स का विश्लेषण

    युद्ध लंबा चला तो ईरान टिक नहीं पाएगा, चीन का समर्थन भी पर्याप्त नहीं, जाने एक्सपर्ट्स का विश्लेषण


    नई दिल्ली। अमेरिका और Iran के बीच बढ़ते सैन्य टकराव और इजरायल पर हुए हमलों के बाद मध्य-पूर्व के कई देशों में युद्ध जैसी स्थिति बन चुकी है। हालांकि रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के पास इतने संसाधन नहीं हैं कि वह लंबे समय तक अमेरिका और इजरायल जैसे शक्तिशाली देशों का मुकाबला कर सके।

    अमेरिका के तीन प्रमुख लक्ष्य
    सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल राजेन्द्र सिंह के अनुसार, अमेरिका के ईरान पर हमले के पीछे तीन मुख्य उद्देश्य हैं: ईरान में सत्ता परिवर्तन लाना, उसके मिसाइल कार्यक्रम को नष्ट करना और परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ने से रोकना। अमेरिका चाहता है कि ईरान भविष्य में किसी भी प्रकार का खतरा न बन सके।

    वहीं, ईरान की जवाबी कार्रवाई केवल उन हमलों का प्रतिकार है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि उसकी ताकत इतनी नहीं कि वह लंबे समय तक संघर्ष जारी रख सके। उसे अपने मिसाइल और सीमित संसाधनों के सहारे अमेरिका और इजरायल का मुकाबला करना कठिन होगा, इसलिए अंततः बातचीत की मेज पर आने की नौबत आएगी।

    ईरान की सीमित ताकत

    पूर्व एयर वाइस मार्शल ओपी तिवारी के अनुसार, ईरान की एयरफोर्स कमजोर है और हिज़बुल्ला तथा कुछ शिया संगठनों का समर्थन पहले जैसा नहीं रहा। जबकि रूस फिलहाल हथियारों की मदद नहीं दे सकता, चीन कुछ हथियारों से सहायता कर सकता है, लेकिन यह भी अमेरिका और इजरायल के मुकाबले पर्याप्त नहीं है। विशेषज्ञों का निष्कर्ष है कि ईरान के लिए लंबा युद्ध संभव नहीं और उसकी संभावित तबाही तय है।

    तेल की कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर

    विशेषज्ञों के अनुसार, युद्ध से मध्य-पूर्व में तेल की कीमतों में इजाफा हो रहा है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है। भारत इन देशों से तेल आयात करता है, इसलिए तेल की कीमतों और आपूर्ति में बाधा देश के लिए चुनौती बनेगी। अमेरिका के पास वेनेजुएला से तेल का विकल्प मौजूद है, जबकि भारत रूस से तेल खरीदने का विकल्प इस्तेमाल कर सकता है।

    भारतीय नागरिकों की सुरक्षा चुनौती
    लेफ्टिनेंट जनरल राजेन्द्र सिंह ने बताया कि ईरान, इजरायल, कतर, सऊदी अरब, बहरीन और यूएई में लाखों भारतीय नागरिक रहते हैं। युद्ध की स्थिति में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण होगा। हालांकि ईरान के हमले ज्यादातर अमेरिकी बेसों को निशाना बना रहे हैं, लेकिन मिसाइलों के भटकने का खतरा भी पूरी तरह टला नहीं जा सकता।