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  • बाल संरक्षण तंत्र को मजबूत करने के लिए भोपाल में हुई राज्य स्तरीय कार्यशाला

    बाल संरक्षण तंत्र को मजबूत करने के लिए भोपाल में हुई राज्य स्तरीय कार्यशाला


    भोपाल । मध्यप्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग, भोपाल द्वारा दिनांक 17 जुलाई, 2026 को मध्यप्रदेश काउंसिल फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी (MPCST), भोपाल में “लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (पॉक्सो अधिनियम) एवं किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 के प्रभावी क्रियान्वयन में बाल कल्याण समिति (CWC) की भूमिका” विषय पर राज्य स्तरीय प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया।

    कार्यक्रम रामेन्द्र सिंह, महासचिव, भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी, मध्यप्रदेश। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. अनिल कोठारी, गहानिदेशक, मध्यप्रदेश काउंसिल फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी (MPCST), भोपाल तथा श्रीमती सुधा विजय सिंह भदौरिया, सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी, जिला न्यायालय, भोपाल, आयोग की सदस्य श्रीमती सोनम निनामा एवं श्रीमती अर्चना गुप्ता की गरिमामयी उपस्थिति रही।

    बाल कल्याण समितियों की कार्यप्रणाली में एकरूपता लाना मुख्य उद्देश्य

    कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य प्रदेश की समस्त बाल कल्याण समितियों की कार्यप्रणाली में एकरूपता स्थापित करना, सदस्यों की विधिक एवं पुक्रियागत दक्षता का संवर्धन करना, विभिन्न जिलों के अनुभवों एवं श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों का आदान-प्रदान सुनिश्चित करना तथा राज्य की वाल संरक्षण व्यवस्था को अधिक प्रभावी, उत्तरदायी एवं “बालहित सर्वोपरि” (Best Interest of Child) के सिद्धांत के अनुरूप सुटढ़ बनाना था।

    कानूनी प्रावधानों और व्यावहारिक चुनौतियों पर गहन मंथन

    इस प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला में प्रदेश के समस्त जिलों की बाल कल्याण समितियों के अध्यक्षों एवं सदस्यों को लैंगिक अपराधों से चालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (पॉक्सो अधिनियम) तथा किशोर न्याय (वालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 के प्रभावी क्रियान्वयन से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत एवं व्यवहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षण में वाल संरक्षण संबंधी वैधानिक प्रावधानों, प्रक्रियात्मक कार्यवाही, वालहित सर्वोपरि के सिद्धांत, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन, विभागीय समन्वय, बाल कल्याण समिति की भूमिका, प्रकरण प्रबंधन (Case Management), अभिलेख संधारण, आयोग की रिपोर्टिंग प्रणाली तथा संवेदनशील प्रकरणों के प्रभावी एवं समयबद्ध निराकरण जैसे महत्वपूर्ण विपयों पर विस्तार से चर्चा की गई।

    प्रशिक्षण के प्रथम सत्र में रामेन्द्र सिंह द्वारा बाल संरक्षण व्यवस्था को अधिक संवेदनशील एवं प्रभावी बनाने पर विशेष बल दिया गया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक प्रकरण में बालक अथवा बालिका के सर्वोतम हित को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान करते हुए वाल कल्याण समितियों को आपसी समन्वय, संवे संवेदनशील दृष्टिकोण एवं विधिक प्रावधानों के अनुरूप कार्य करना चाहिए। उन्होंने समितियों को प्रत्येक प्रकरण में मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए उत्तरदायित्वपूर्ण एवं निष्पक्ष निर्णय लेने हेतु प्रेरित किया।

    एमपीसीएसटी के महानिदेशक डॉ. अनिल कोठारी ने अपने उद्धोधन में वर्तमान समय में बाल संरक्षण प्रणाली को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि नवीनतम तकनीकी संसाधनों एवं डिजिटल माध्यमों के प्रभावी उपयोग से वाल संरक्षण तंत्र को अधिक सुदृढ़, पारदर्शी एवं परिणामोन्मुख बनाया जा सकता है।

    कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में श्रीमती सुधा विजय सिंह भदौरिया द्वारा बाल कल्याण समितियों को विस्तृत विधिक एवं व्यवहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। उन्होंने पॉक्सो अधिनियम एवं किशोर न्याय अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों की विस्तारपूर्वक जानकारी देते हुए कहा कि प्रत्येक पीड़ित बालक अथवा बालिका के पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन की प्रक्रिया सुरक्षित, संवेदनशील एवं बाल-अनुकूल सामाजिक वातावरण में सुनिधित की जानी चाहिए। उन्होंने समितियों को विधिक प्रक्रियाओं का पूर्ण पालन करते हुए पीड़ित के अधिकारों एवं गरिमा की रक्षा सुनिश्चित करने के संबंध में आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया।

    मध्यप्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. निवेदिता शर्मा ने बाल संरक्षण से संबंधित प्रत्येक प्रकरण में समयबद्ध, निष्पक्ष एवं गुणवत्तापूर्ण कार्यवाही सुनिधित की जाए उन्होंने सतत संवाद, प्रभावी समन्वय तथा बालहित सर्वोपरि के सिद्धांत को प्रत्येक निर्णय का आधार बनाने पर विशेष बल दिया। उन्होंने पॉक्सो अधिनियम के अंतर्गत पीड़ित बच्चों के लिए सपोर्ट पर्सन की नियुक्ति पूर्ण पारदर्शिता एवं निष्पक्षता के साथ किए जाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे व्यक्तियों का चयन किया जाए जो पीड़ित बच्चों के सर्वोतम हितों की प्रभावी रूप से रक्षा कर सकें।

  • मप्र में स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने के लिए एनएचएम और सनोफी इंडिया के बीच हुआ एमओयू

    मप्र में स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने के लिए एनएचएम और सनोफी इंडिया के बीच हुआ एमओयू


    भोपाल।
    राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) ने मध्य प्रदेश में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने के उद्देश्य से सनोफी इंडिया लिमिटेड के साथ मंगलवार को एक महत्वपूर्ण एमओयू किया है। इस साझेदारी का उद्देश्य मधुमेह जैसे गैर-संचारी रोगों के प्रति जागरूकता बढ़ाना, उनकी शीघ्र पहचान और उपचार को प्रोत्साहित करना और दुर्लभ रोगों से पीड़ित मरीजों को बेहतर सहयोग प्रदान करना है।

    एमओयू पर एनएचएम मध्य प्रदेश की मिशन डायरेक्टर डॉ. सलोनी सिडाना और सनोफी इंडिया लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर दीपक अरोड़ा द्वारा हस्ताक्षर किए गए। इस दौरान लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, आयुक्त धनराजू एस सहित विभागीय वरिष्ठ अधिकारी एवं संस्था के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

    एनएचएम एमडी डॉ. सलोनी सिडाना ने इस अवसर पर कहा कि यह पहल विशेष रूप से दूरस्थ और वंचित क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को मजबूत करेगी। उन्होंने बताया कि मोबाइल मेडिकल यूनिट्स के माध्यम से लोगों को उनके क्षेत्र में ही निःशुल्क जांच, उपचार और डॉक्टरों से टेली-परामर्श की सुविधा मिलेगी। साथ ही मधुमेह एवं अन्य गैर-संचारी रोगों के लिए जागरूकता, प्रारंभिक जोखिम पहचान और रेफरल सेवाओं को सुदृढ़ किया जाएगा।

    उन्होंने कहा कि दुर्लभ रोगों के लिए शीघ्र पहचान, निःशुल्क जांच और बेहतर उपचार व्यवस्था विकसित की जाएगी, जिससे मरीजों को समय पर उचित देखभाल मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि स्कूल स्तर पर बच्चों को स्वास्थ्य, पोषण और जीवनशैली से संबंधित सही जानकारी देना अत्यंत आवश्यक है, ताकि वे स्वयं स्वस्थ आदतें अपनाने के साथ अपने परिवार और समुदाय में भी जागरूकता फैला सकें।

    सनोफी इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर अरोड़ा ने भारत में बढ़ते एनसीडी के दृष्टिगत शीघ्र पहचान की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि सनोफी स्वास्थ्य प्रणाली को सशक्त बनाने और मरीजों के बेहतर परिणाम सुनिश्चित करने के लिए इस तरह की साझेदारियों के प्रति प्रतिबद्ध है। यह साझेदारी राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए कई प्रमुख क्षेत्रों में कार्य करेगी।

    इस अवसर पर बताया कि एमओयू के तहत दुर्लभ रोगों के निदान और उपचार व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाएगा, जिसमें स्वास्थ्यकर्मियों का प्रशिक्षण, उन्नत तकनीकों के माध्यम से शीघ्र पहचान तथा चयनित बीमारियों की निःशुल्क जांच की सुविधा चिन्हित संस्थानों में उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही मधुमेह एवं अन्य एनसीडी के लिए प्रारंभिक जोखिम पहचान, जागरूकता अभियान और रेफरल सेवाओं को मजबूत किया जाएगा, जिसमें राज्यभर में तकनीकी सहयोग भी प्रदान किया जाएगा। स्कूल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत “किड्स एंड डायबिटीज इन स्कूल्स (KiDS)” जैसे अभियानों के माध्यम से विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं अभिभावकों को स्वस्थ जीवनशैली, पोषण और रोगों की रोकथाम के प्रति जागरूक किया जाएगा। इसके अतिरिक्त डॉक्टरों, नर्सों, पैरामेडिकल स्टाफ एवं सामुदायिक कार्यकर्ताओं के लिए क्षमता निर्माण के तहत संरचित प्रशिक्षण कार्यक्रम और तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे।

    एमओयू के तहत सिंगरौली, बालाघाट और अनूपपुर जिलों में मोबाइल मेडिकल यूनिट्स की तैनाती की जाएगी, जिससे दूरस्थ एवं वंचित क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंच सकेंगी। इन यूनिट्स के माध्यम से मधुमेह, उच्च रक्तचाप और मुख कैंसर जैसी बीमारियों की निःशुल्क जांच और उपचार की सुविधा उपलब्ध होगी। प्रत्येक यूनिट में प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी तैनात रहेंगे तथा डॉक्टरों से टेली-कंसल्टेशन की सुविधा भी प्रदान की जाएगी। प्रारंभिक चरण में यह सेवा इन तीन जिलों में शुरू की जाएगी और आवश्यकता अनुसार अन्य जिलों में भी विस्तार किया जाएगा।

  • भारत-वियतनाम के बीच रेशम और वस्त्र क्षेत्र में मजबूत होगा द्विपक्षीय सहयोग

    भारत-वियतनाम के बीच रेशम और वस्त्र क्षेत्र में मजबूत होगा द्विपक्षीय सहयोग


    नई दिल्ली।
    भारतीय रेशम और वस्त्र उद्योग (Indian Silk and Textile Industry) के वैश्विक विस्तार की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, वस्त्र मंत्रालय (Ministry of Textiles) के केंद्रीय रेशम बोर्ड और प्रमुख भारतीय उद्यमियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने वियतनाम का पांच दिवसीय आधिकारिक दौरा किया।

    वस्त्र मंत्रालय के अनुसार हनोई स्थित भारतीय दूतावास के सहयोग से आयोजित इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य रेशम उत्पादन, हथकरघा और तकनीकी वस्त्रों के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच व्यापारिक और तकनीकी संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है।

    यात्रा के दौरान, केंद्रीय रेशम बोर्ड के संयुक्त सचिव (तकनीकी) डॉ. नरेश बाबू एन. ने वियतनाम के अग्रणी वस्त्र निर्माता और निर्यातकों में शामिल बिटेक्सको नाम लॉन्ग जॉइंट स्टॉक कंपनी के अध्यक्ष को फाइव-इन-वन सिल्क स्टोल (छोटे शॉल) भेंट कर सम्मानित किया और कंपनी को भारत टेक्स 2026 में भाग लेने का न्यौता दिया। उन्होंने वियतनाम टेक्सटाइल एंड अपैरल एसोसिएशन (वीआईटीएएस) को भी भारत टेक्स 2026 के लिए आमंत्रित किया और वियतनाम एसोसिएशन ऑफ क्राफ्ट विलेजेज के साथ हथकरघा और हस्तशिल्प को बढ़ावा देने, उत्पादों के विकास, ग्राम स्तरीय रेशमी वस्त्र उत्पादन, निर्यात और नीतिगत समर्थन पर चर्चा की। वियतनामी एसोसिएशन ने इस पर सहयोग में गहरी रुचि दिखाई।

    प्रतिनिधिमंडल ने हनोई में भारत के राजदूत शेरिंग वांगचुक शेरपा से मुलाकात कर रेशम और वस्त्र क्षेत्र में संयुक्त अनुसंधान और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पर गहन चर्चा की। इस दौरान भारत और वियतनाम के बीच व्यापार-से-व्यापार संबंधों को मजबूत करने पर सहमति बनी।

    ​भारतीय दल ने हनोई के ऐतिहासिक वान फुक सिल्क क्राफ्ट विलेज का दौरा किया। यहां के बुनाई, डिजाइन और फैशन के एकीकृत मॉडल का अध्ययन किया गया, जिससे भारत में ‘रेशम उत्पादन-पर्यटन’ मॉडल विकसित करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, दल ने स्वचालित रीलिंग इकाइयों और शहतूत के खेतों का भी निरीक्षण किया।

    ​वियतनाम में आयोजित दो प्रमुख अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों—वियतनाम इंटरनेशनल वैल्यू चेन एग्जिबिशन 2026 और वियतनाम ग्लोरियस स्प्रिंग फेयर 2026 में केंद्रीय रेशम बोर्ड के स्टॉल भी लगाया गया। भारतीय रेशम उत्पादों के प्रति बढ़ती रुचि ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की मजबूत स्थिति को दर्शाया।

    इस यात्रा के समापन पर विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और वियतनाम के बीच इस सहयोग से प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और आधुनिक सिलाई तकनीकों का आदान-प्रदान होगा, उत्पाद विविधीकरण के नए अवसर मिलेंगे, ​दोनों देशों के बीच संवहनीय विकास और वैश्विक बाजार संबंधों को मजबूती मिलेगी।