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  • हार्ट हेल्थ के लिए योगासन: तनाव घटाएं, दिल को बनाएं मजबूत और जीवन को रखें स्वस्थ

    हार्ट हेल्थ के लिए योगासन: तनाव घटाएं, दिल को बनाएं मजबूत और जीवन को रखें स्वस्थ


    नई दिल्ली । आज की तेज रफ्तार जिंदगी में लोग सफलता, कमाई और उपलब्धियों के पीछे भागते हुए अपनी सेहत को अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। खासकर दिल की सेहत, जो शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग है, उस पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि स्वस्थ दिल ही लंबी और खुशहाल जिंदगी की असली नींव है। लगातार तनाव, अनियमित खान-पान और खराब लाइफस्टाइल हृदय रोगों के खतरे को तेजी से बढ़ा रहे हैं। ऐसे में योगासन और प्राणायाम दिल को सुरक्षित रखने का एक प्राकृतिक और प्रभावी उपाय बनकर सामने आए हैं।

    योग और ध्यान से मिलता है दिल को प्राकृतिक संरक्षण
    आयुष विशेषज्ञों के अनुसार नियमित योग और ध्यान न केवल शरीर को स्वस्थ रखते हैं बल्कि मानसिक शांति भी प्रदान करते हैं। योगाभ्यास से तनाव कम होता है, मन स्थिर रहता है और भावनात्मक संतुलन बेहतर होता है। इसका सीधा असर हृदय स्वास्थ्य पर पड़ता है। योग करने से रक्त संचार बेहतर होता है, कोलेस्ट्रॉल का स्तर नियंत्रित रहता है और दिल की मांसपेशियां मजबूत बनती हैं। यही कारण है कि योग को हार्ट हेल्थ के लिए बेहद फायदेमंद माना गया है।

    दिल के लिए लाभकारी प्रमुख योगास
    विशेषज्ञों ने कुछ ऐसे योगासन बताए हैं जो दिल की सेहत को मजबूत बनाने में विशेष भूमिका निभाते हैं। भुजंगासन, शवासन, अनुलोम-विलोम और सूर्य नमस्कार जैसे योगासन नियमित रूप से करने से शरीर में ऊर्जा का संचार होता है और तनाव कम होता है।

    भुजंगासन रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाता है और रक्त प्रवाह को सुधारता है।
    शवासन मानसिक तनाव को दूर कर शरीर को गहरी शांति प्रदान करता है।
    अनुलोम-विलोम प्राणायाम फेफड़ों की क्षमता बढ़ाकर मन को शांत करता है और दिल पर दबाव कम करता है।
    सूर्य नमस्कार पूरे शरीर का संतुलित व्यायाम है, जो ऊर्जा और लचीलापन बढ़ाता है।


    प्राणायाम और ध्यान से कम होता है तनाव
    तनाव को दिल की बीमारियों का सबसे बड़ा कारण माना जाता है। ऐसे में गहरी सांस लेने वाले व्यायाम जैसे प्राणायाम मानसिक दबाव को कम करने में बेहद प्रभावी हैं। नियमित ध्यान और प्राणायाम से हार्ट रेट स्थिर रहता है और शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह बेहतर होता है, जिससे दिल स्वस्थ रहता है।

    जीवनशैली में छोटे बदलाव ला सकते हैं बड़ा सुधार
    विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि रोजाना 30 से 45 मिनट योग करना दिल की सेहत के लिए बेहद जरूरी है। इसके साथ ही संतुलित आहार लेना, पर्याप्त नींद लेना और तनावपूर्ण विचारों से दूर रहना भी आवश्यक है। तैलीय और जंक फूड से दूरी बनाकर हरी सब्जियों और फल का सेवन करना हृदय रोगों के खतरे को कम करता है।

    योगासन और प्राणायाम केवल व्यायाम नहीं बल्कि एक स्वस्थ जीवन का आधार हैं। नियमित अभ्यास से न केवल दिल मजबूत बनता है बल्कि मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा भी मिलती है। यदि योग को जीवन का हिस्सा बना लिया जाए तो कई गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है और जीवन को अधिक स्वस्थ और संतुलित बनाया जा सकता है।

  • योग का आसान उपाय: शवासन से दूर हो सकता है तनाव और हाई ब्लडप्रेशर की समस्या

    योग का आसान उपाय: शवासन से दूर हो सकता है तनाव और हाई ब्लडप्रेशर की समस्या


    नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हाई ब्लडप्रेशर यानी Hypertension तेजी से आम समस्या बनता जा रहा है। पहले यह बीमारी बढ़ती उम्र के लोगों में ज्यादा देखी जाती थी, लेकिन अब युवाओं में भी इसका खतरा बढ़ रहा है। लगातार तनाव, खराब खानपान, नींद की कमी और घंटों बैठकर काम करना इसके प्रमुख कारण माने जाते हैं। ऐसे में योग और मेडिटेशन को बेहतर जीवनशैली का अहम हिस्सा माना जा रहा है। योग के कई आसनों में शवासन एक ऐसा आसान और प्रभावी योगासन है, जो मानसिक और शारीरिक दोनों स्तर पर राहत देने का काम करता है।
    आयुष मंत्रालय भी हाई ब्लडप्रेशर और तनाव से राहत पाने के लिए योग को अपनाने की सलाह देता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, शवासन शरीर और दिमाग को गहरी शांति देने वाला आसन है। इसमें व्यक्ति पीठ के बल सीधा लेटकर शरीर को पूरी तरह ढीला छोड़ देता है और सांसों पर ध्यान केंद्रित करता है। यह प्रक्रिया शरीर के तनाव को कम करने में मदद करती है।
    दरअसल, मानसिक तनाव हाई ब्लडप्रेशर बढ़ने का सबसे बड़ा कारण माना जाता है। जब व्यक्ति लगातार तनाव में रहता है, तो शरीर में तनाव बढ़ाने वाले हार्मोन सक्रिय हो जाते हैं। इससे दिल की धड़कन तेज होती है और ब्लडप्रेशर बढ़ने लगता है। शवासन दिमाग को शांत कर शरीर की नसों और मांसपेशियों को आराम पहुंचाता है। इससे तंत्रिका तंत्र धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में आने लगता है।
    विशेषज्ञों के अनुसार, शवासन के दौरान ली जाने वाली धीमी और गहरी सांसें शरीर में ऑक्सीजन के स्तर को बेहतर बनाती हैं। इससे रक्त प्रवाह संतुलित रहता है और ब्लडप्रेशर नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। नियमित अभ्यास से मानसिक तनाव, चिंता और बेचैनी भी कम होने लगती है।
    शवासन सिर्फ हाई ब्लडप्रेशर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शरीर की थकान दूर करने में भी असरदार माना जाता है। दिनभर काम करने के बाद शरीर में जो भारीपन और कमजोरी महसूस होती है, यह आसन उसे कम करने में मदद करता है। मांसपेशियों को पूरा आराम मिलने से शरीर फिर से ऊर्जा महसूस करता है।
    नींद की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए भी शवासन फायदेमंद माना जाता है। यह दिमाग को शांत कर नींद की गुणवत्ता सुधारने में मदद कर सकता है। इसके अलावा पाचन तंत्र को बेहतर बनाने, कब्ज और गैस जैसी समस्याओं में राहत देने तथा ध्यान और एकाग्रता बढ़ाने में भी यह योगासन उपयोगी माना जाता है।
    हालांकि, किसी भी बीमारी में योग को इलाज का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति को गंभीर हाई ब्लडप्रेशर या अन्य स्वास्थ्य समस्या है, तो योग शुरू करने से पहले डॉक्टर या योग विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है।
    Disclaimer: यह जानकारी सामान्य स्वास्थ्य और योग संबंधी मान्यताओं पर आधारित है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या में विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।
  • भुजंगासन से पाएं स्ट्रेस और पीठ दर्द से राहत, शरीर बनेगा लचीला

    भुजंगासन से पाएं स्ट्रेस और पीठ दर्द से राहत, शरीर बनेगा लचीला


    नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव, गलत बैठने की आदत और अनियमित दिनचर्या के कारण लोग कई शारीरिक और मानसिक समस्याओं से जूझ रहे हैं। ऐसे में योग एक प्राकृतिक और प्रभावी समाधान के रूप में सामने आता है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, भुजंगासन यानी कोबरा पोज एक ऐसा सरल योगासन है जो शरीर और मन दोनों को संतुलित करने में मदद करता है।
    यह आसन विशेष रूप से उन लोगों के लिए फायदेमंद माना जाता है जो स्ट्रेस, कब्ज, पेट की चर्बी, पीठ दर्द या सांस संबंधी समस्याओं से परेशान रहते हैं। नियमित अभ्यास से शरीर में ऊर्जा का संचार बढ़ता है और थकान कम महसूस होती है।
    भुजंगासन रीढ़ की हड्डी को मजबूत और लचीला बनाता है। यह पीठ की जकड़न को दूर करने में मदद करता है, जिससे लंबे समय तक बैठकर काम करने वाले लोगों को काफी राहत मिलती है। साथ ही यह मुद्रा संबंधी दर्द को भी कम करता है।
    इस योगासन का पाचन तंत्र पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। यह आंतों की गतिविधि को सुधारकर कब्ज जैसी समस्या को दूर करने में मदद करता है। इसके अलावा यह पेट की चर्बी घटाने में भी सहायक माना जाता है, जिससे शरीर फिट और संतुलित रहता है।
    मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी भुजंगासन काफी लाभकारी है। यह तनाव और मानसिक थकान को कम करता है क्योंकि यह श्वास प्रक्रिया को बेहतर बनाता है और शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति बढ़ाता है। इससे मन शांत होता है और एकाग्रता बढ़ती है।
    सांस संबंधी समस्याओं जैसे ब्रोंकाइटिस में भी यह आसन राहत पहुंचाने में मदद कर सकता है। छाती खुलने से सांस लेने की क्षमता बेहतर होती है और फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ती है।
    भुजंगासन करने की प्रक्रिया भी बेहद सरल है। इसके लिए सबसे पहले पेट के बल लेट जाएं। फिर हथेलियों को कंधों के नीचे रखें और धीरे-धीरे सांस लेते हुए छाती और सिर को ऊपर उठाएं। ध्यान रखें कि कमर पर ज्यादा दबाव न पड़े। इस स्थिति में 15 से 30 सेकंड तक रहें और फिर धीरे-धीरे वापस सामान्य अवस्था में आ जाएं। शुरुआत में इसे 3 से 5 बार करना पर्याप्त होता है।
    आयुष मंत्रालय का कहना है कि भुजंगासन न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है, बल्कि मानसिक संतुलन भी बनाए रखता है। यह शरीर की जकड़न को दूर कर उसे अधिक सक्रिय और ऊर्जावान बनाता है।
    हालांकि, जिन लोगों को गंभीर पीठ दर्द, हाल ही में सर्जरी या कोई पुरानी बीमारी है, उन्हें इस आसन का अभ्यास करने से पहले डॉक्टर या योग विशेषज्ञ की सलाह जरूर लेनी चाहिए।
  • स्ट्रेस और बेचैनी से पाना है छुटकारा? भ्रामरी प्राणायाम है आसान और असरदार उपाय

    स्ट्रेस और बेचैनी से पाना है छुटकारा? भ्रामरी प्राणायाम है आसान और असरदार उपाय

    नई दिल्ली आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव, चिंता और मानसिक थकान आम समस्या बन चुकी है। काम का दबाव, लगातार स्क्रीन टाइम और बदलती लाइफस्टाइल के कारण लोग अक्सर बेचैनी और दिमागी अशांति महसूस करते हैं। ऐसे में Ministry of AYUSH ने एक आसान और असरदार उपाय सुझाया है भ्रामरी प्राणायाम

    मंत्रालय के अनुसार, यह प्राणायाम मन को शांत करने और मानसिक संतुलन बनाए रखने में बेहद कारगर है। खासकर जब मन में बहुत ज्यादा विचार चल रहे हों या बेचैनी महसूस हो रही हो, तब भ्रामरी प्राणायाम तुरंत राहत देने में मदद करता है।

    International Day of Yoga से पहले भी मंत्रालय लोगों को इस प्राणायाम के फायदे बता रहा है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसे अपनी दिनचर्या में शामिल कर सकें।

    योग विशेषज्ञों के मुताबिक, भ्रामरी प्राणायाम एक विशेष श्वास तकनीक है, जिसमें सांस छोड़ते समय भौंरे की तरह “हम्म्म” की ध्वनि निकाली जाती है। इस ध्वनि से मस्तिष्क में हल्का कंपन होता है, जो तनावग्रस्त नसों को शांत करता है। इससे न केवल स्ट्रेस कम होता है, बल्कि गुस्सा, चिंता और नींद से जुड़ी समस्याओं में भी राहत मिलती है।

    इस प्राणायाम का नियमित अभ्यास मानसिक एकाग्रता बढ़ाने और भावनात्मक संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। जो लोग अक्सर चिंता या ओवरथिंकिंग का शिकार रहते हैं, उनके लिए यह एक सरल और प्राकृतिक उपाय है।

    भ्रामरी प्राणायाम करने का तरीका भी बेहद आसान है। सबसे पहले किसी शांत जगह पर आराम से सीधे बैठ जाएं और आंखें बंद कर लें। अब अपने अंगूठों से दोनों कानों को हल्के से बंद करें। इसके बाद गहरी सांस लें और धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए “हम्म” की आवाज निकालें। कोशिश करें कि यह ध्वनि लंबी और स्थिर हो। इस प्रक्रिया को 5 से 10 बार दोहराएं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि रोजाना सुबह या शाम के समय इसका अभ्यास करने से मन की अशांति धीरे-धीरे कम होने लगती है। साथ ही, इससे ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है और नींद की गुणवत्ता भी बेहतर होती है।

     कहना है कि यह प्राणायाम पूरी तरह सुरक्षित है और इसे घर पर बिना किसी उपकरण के आसानी से किया जा सकता है। जो लोग लगातार मानसिक थकान या तनाव से जूझ रहे हैं, उनके लिए यह एक प्रभावी और प्राकृतिक समाधान है।

    कुल मिलाकर, भ्रामरी प्राणायाम को अपनी दिनचर्या में शामिल करके आप मानसिक शांति और बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में एक बड़ा कदम उठा सकते हैं।


  • Yoga Tips: रोज सिर्फ 5 मिनट करें वृक्षासन, हड्डियां होंगी मजबूत और दिमाग रहेगा शांत

    Yoga Tips: रोज सिर्फ 5 मिनट करें वृक्षासन, हड्डियां होंगी मजबूत और दिमाग रहेगा शांत


    नई दिल्ली । आज की तेज रफ्तार और तनाव से भरी जिंदगी में शारीरिक फिटनेस के साथ मानसिक संतुलन बनाए रखना बड़ी चुनौती बन चुका है। ऐसे में योग एक ऐसा प्रभावी उपाय है, जो न केवल शरीर को मजबूत बनाता है बल्कि मन को भी शांत और स्थिर करता है। खासतौर पर वृक्षासन एक ऐसा आसान लेकिन बेहद असरदार योगासन है, जिसे रोजाना सिर्फ 5 मिनट करने से कई स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं।

    वृक्षासन का अर्थ ही है पेड़ की तरह स्थिर और मजबूत खड़े रहना। यह आसन हमें सिखाता है कि जीवन की कठिन परिस्थितियों में भी कैसे संतुलन बनाए रखा जाए। जब आप एक पैर पर खड़े होकर शरीर को संतुलित करते हैं, तो यह न केवल आपकी शारीरिक क्षमता को बढ़ाता है बल्कि मानसिक एकाग्रता को भी मजबूत करता है। नियमित अभ्यास से दिमाग और मांसपेशियों के बीच तालमेल बेहतर होता है, जिससे शरीर की कार्यक्षमता बढ़ती है।

    इस योगासन का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह रीढ़ की हड्डी को सीधा और मजबूत बनाए रखने में मदद करता है। साथ ही पैरों की मांसपेशियां टोन होती हैं और शरीर का संतुलन सुधरता है। जो लोग लंबे समय तक बैठकर काम करते हैं, उनके लिए यह आसन विशेष रूप से फायदेमंद है। एक पैर पर संतुलन बनाने की प्रक्रिया फोकस और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता को कई गुना बढ़ा देती है, जिससे काम में एकाग्रता भी बेहतर होती है।

    मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी वृक्षासन बेहद लाभकारी माना जाता है। यह शरीर के वात दोष को संतुलित करता है, जिससे तनाव, घबराहट और मानसिक अस्थिरता में कमी आती है। नियमित अभ्यास से मन शांत रहता है और सकारात्मक सोच विकसित होती है।

    इस आसन को करने का सबसे सही समय सुबह का होता है, जब पेट खाली हो। अगर आप इसे शाम के समय करना चाहते हैं, तो भोजन और योग के बीच कम से कम 4 से 6 घंटे का अंतर रखना जरूरी है। अभ्यास शुरू करने से पहले शरीर को तैयार करने के लिए हल्के वार्म-अप जैसे स्ट्रेचिंग या अन्य योगासन करना फायदेमंद रहता है।

    हालांकि, इस आसन को करते समय कुछ सावधानियां भी जरूरी हैं। जिन लोगों को घुटनों में दर्द, किसी प्रकार की गंभीर चोट या माइग्रेन की समस्या है, उन्हें इसे करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लेनी चाहिए। बिना मार्गदर्शन के अभ्यास करने से बचना बेहतर होता है।

    कुल मिलाकर, वृक्षासन केवल एक योगासन नहीं, बल्कि शरीर और मन को संतुलित करने का एक सरल विज्ञान है। अगर आप अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में बेहतर फोकस, मजबूत हड्डियां और मानसिक शांति चाहते हैं, तो इस आसान आसन को अपनी दिनचर्या में जरूर शामिल करें।

  • उत्तर-पूर्व दिशा में पौधे लगाने से बढ़ेगी शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि: वास्तु विशेषज्ञों की सलाह

    उत्तर-पूर्व दिशा में पौधे लगाने से बढ़ेगी शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि: वास्तु विशेषज्ञों की सलाह


    नई दिल्ली।भारतीय घरों में वास्तुशास्त्र का महत्व समय के साथ और अधिक बढ़ा है। खासकर शहरी जीवन में बढ़ते तनाव और अस्थिरता के बीच लोग ऐसे उपायों की तलाश कर रहे हैं, जो घर के वातावरण को संतुलित और सकारात्मक बनाए रखें। इस क्रम में उत्तर-पूर्व दिशा, जिसे वास्तु में ईशान कोण कहा जाता है, सबसे प्रभावशाली मानी जाती है। वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, इस दिशा में सही प्रकार के पौधे लगाने से घर में मानसिक शांति, पारिवारिक स्थिरता और आर्थिक संतुलन बन सकता है।उत्तर-पूर्व दिशा को ज्ञान, जल तत्व और आध्यात्मिक ऊर्जा से जोड़ा गया है। यह दिशा मानसिक शांति और स्पष्ट सोच का प्रतीक मानी जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस स्थान को हल्का साफ और जीवंत रखा जाए तो घर में रहने वालों के निर्णय बेहतर होते हैं, अनावश्यक विवाद कम होते हैं और घर का वातावरण सकारात्मक रहता है। पौधे इस दिशा में जीवन तत्व और ऊर्जा को सक्रिय रखने का एक सरल और प्राकृतिक तरीका हैं।

    वास्तु विशेषज्ञ कुछ पौधों को विशेष रूप से उपयोगी मानते हैं। मोटे पत्तों वाला क्रासुला पौधा आर्थिक संतुलन से जुड़ा माना जाता है। इसे उत्तर-पूर्व या इसके आसपास रखने से घर में खर्च और आय के बीच संतुलन बन सकता है। अपराजिता का पौधा धार्मिक दृष्टि से पवित्र माना जाता है और इसे रखने से मानसिक मजबूती और आत्मविश्वास बढ़ता है।मोगरे जैसे खुशबूदार पौधे घर के वातावरण को शांत रखते हैं और तनाव कम करने में सहायक होते हैं। शमी का पौधा अनुशासन और धैर्य का प्रतीक माना जाता है। इसे सही दिशा में रखने से घर में नकारात्मकता कम होती है। वहीं, गेंदे के फूल सकारात्मक ऊर्जा और उत्साह का प्रतीक हैं। वास्तुशास्त्र के अनुसार इसके फूल घर के वातावरण को हल्का और प्रसन्न बनाते हैं।

    विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है। पौधों की नियमित देखभाल, पर्याप्त धूप और स्वच्छ मिट्टी जरूरी है। सूखे या खराब पौधे ऊर्जा को बाधित कर सकते हैं। इसके अलावा उत्तर-पूर्व दिशा में भारी फर्नीचर या अव्यवस्था से बचना चाहिए। घर का यह क्षेत्र हमेशा हल्का खुला और साफ-सुथरा होना चाहिए।हाल के वर्षों में ग्रीन वास्तु की अवधारणा लोकप्रिय हुई है। अब लोग पौधों को सिर्फ सजावट के लिए नहीं बल्कि ऊर्जा संतुलन के लिए भी इस्तेमाल कर रहे हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि पौधों के साथ जीवनशैली में भी संतुलन रखा जाए, तो इसके सकारात्मक परिणाम लंबे समय तक बनाए रखे जा सकते हैं।

    हालांकि, किसी भी वास्तु उपाय को अपनाने से पहले व्यक्तिगत परिस्थितियों, घर के आकार और परिवार की आवश्यकताओं को ध्यान में रखना जरूरी है। सही दिशा में पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने से घर का माहौल न केवल स्वस्थ और शांत रहेगा बल्कि आर्थिक और मानसिक स्थिरता भी बढ़ेगी।इस प्रकार उत्तर-पूर्व दिशा में हरियाली का संतुलित उपयोग आधुनिक शहरी घरों में न सिर्फ सौंदर्य बढ़ाता है बल्कि घर की सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि का माध्यम भी बन सकता है।

  • सर्दियों में लेमन ग्रास टी इम्यूनिटी बूस्ट और एनर्जी का प्राकृतिक स्रोत

    सर्दियों में लेमन ग्रास टी इम्यूनिटी बूस्ट और एनर्जी का प्राकृतिक स्रोत


    नई दिल्ली । सर्दियों के मौसम में ठंड से बचाव और सेहत बनाए रखने के लिए लेमन ग्रास टी एक प्राकृतिक वरदान है। सर्दियों में लेमन ग्रास टी की चुस्की खासतौर पर फायदेमंद है। यह ताजगी भरी हर्बल ड्रिंक एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होती है जो शरीर को अंदर से मजबूत बनाती है।लेमन ग्रास टी न केवल पाचन सुधारती है बल्कि प्राकृतिक रूप से तनाव से राहत देती है और इम्यूनिटी बढ़ाती है। आयुर्वेद में लंबे समय से इस्तेमाल हो रही यह चाय सर्दी-जुकाम से बचाव के लिए भी बेहतरीन है।
    भारत सरकार का आयुष मंत्रालय लेमन ग्रास टी के फायदों से अवगत कराता है। इसका सेवन पाचन तंत्र के लिए बहुत फायदेमंद है। यह पेट फूलना गैस और अपच जैसी समस्याओं को दूर करती है। लेमन ग्रास टी में मौजूद सिट्रल कंपाउंड पाचन एंजाइम्स को एक्टिव करता है जिससे भोजन आसानी से पचता है। सर्दियों में भारी खाने से होने वाली तकलीफों में यह राहत देती है।

    प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने में भी लेमन ग्रास टी का बड़ा योगदान है। इसमें विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर होते हैं जो संक्रमण से लड़ने की क्षमता बढ़ाते हैं। सर्दियों में वायरल इंफेक्शन और फ्लू से बचाव के लिए रोजाना एक कप पीना लाभकारी है। यह टी सूजन कम करने में भी प्रभावी है। एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों के कारण जोड़ों के दर्द मांसपेशियों की अकड़न और सर्दी से होने वाली सूजन में आराम मिलता है। साथ ही यह शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकालती है और डिटॉक्स का काम करती है।

    लेमन ग्रास टी थकान को उतारने में भी प्रभावी है। रिलैक्सेशन को बढ़ावा देने वाली यह टी तनाव और चिंता कम करती है। इसकी सुगंध मूड को बेहतर बनाती है और नींद अच्छी आती है। सर्दियों की लंबी रातों में एक कप गर्म लेमन ग्रास टी पीना शांति का एहसास देता है। लेमन ग्रास टी बनाने के लिए ताजा या सूखे लेमन ग्रास के डंठल लें काटकर पानी में उबाल लें। इसे 5 से 10 मिनट तक उबालने के बाद छान लें। स्वाद के लिए इसमें शहद या नींबू भी मिला सकते हैं।लेमन ग्रास टी स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है। हालांकि विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि इसे रोजाना 1 या 2 कप से ज्यादा न पीएं। गर्भवती महिलाएं या कोई दवा ले रहे हों तो डॉक्टर से सलाह के बाद ही सेवन करें।