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  • महाराष्ट्र में इंटर्न डॉक्टरों का प्रदर्शन, 18 हजार का स्टाइपेंड बढ़ाकर 30 हजार करने की मांग, 2 नवंबर से हड़ताल की चेतावनी

    महाराष्ट्र में इंटर्न डॉक्टरों का प्रदर्शन, 18 हजार का स्टाइपेंड बढ़ाकर 30 हजार करने की मांग, 2 नवंबर से हड़ताल की चेतावनी

    नई दिल्ली । महाराष्ट्र में इंटर्न डॉक्टरों ने मासिक स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन तेज कर दिया है। गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 को मुंबई के जे.जे. अस्पताल में एसोसिएशन ऑफ स्टेट मेडिकल इंटर्न्स (ASMI) के बैनर तले सैकड़ों इंटर्न डॉक्टरों ने प्रदर्शन किया। उनकी प्रमुख मांग है कि मौजूदा मासिक स्टाइपेंड 18,000 रुपये से बढ़ाकर 30,000 रुपये किया जाए। डॉक्टरों ने राज्य सरकार को चेतावनी दी है कि यदि 1 नवंबर तक उनकी मांग पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो वे 2 नवंबर से हड़ताल शुरू कर देंगे। हालांकि, प्रस्तावित हड़ताल के दौरान आपातकालीन सेवाएं जारी रखने की बात कही गई है।

    प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि महाराष्ट्र में इंटर्न डॉक्टरों को मिलने वाला स्टाइपेंड दूसरे राज्यों की तुलना में कम है। उनके मुताबिक, उत्तर प्रदेश, बिहार और कई अन्य राज्यों में इंटर्न डॉक्टरों को 25,000 रुपये या उससे अधिक मासिक मानदेय दिया जा रहा है। इसके विपरीत, महाराष्ट्र में उन्हें 18,000 रुपये ही मिलते हैं। डॉक्टरों ने कहा कि मुंबई जैसे महंगे महानगर में आवास, भोजन और रोजमर्रा की जरूरतों पर खर्च काफी अधिक है। ऐसे में मौजूदा स्टाइपेंड से जीवनयापन करना मुश्किल हो रहा है। उनका तर्क है कि काम की जिम्मेदारियों और मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए मानदेय बढ़ाना जरूरी है।

    एसोसिएशन ऑफ स्टेट मेडिकल इंटर्न्स के महासचिव डॉ. रमन पवार ने बताया कि स्टाइपेंड बढ़ाने का मुद्दा वर्ष 2024 से लंबित है। उस समय भी इंटर्न डॉक्टरों ने प्रदर्शन कर मासिक स्टाइपेंड 30,000 रुपये करने की मांग उठाई थी, लेकिन उनके अनुसार सरकार की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। अब डॉक्टरों ने एक बार फिर इसी मांग को लेकर आंदोलन शुरू किया है।

    डॉ. पवार के मुताबिक, संगठन ने अगस्त से अक्टूबर के बीच राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को कई पत्र भेजे। इनमें शिक्षा मंत्री, प्रधान सचिव, उपमुख्यमंत्री, मुख्यमंत्री और मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव सहित अन्य अधिकारियों को मांग से अवगत कराया गया। सितंबर में भी अनुरोध पत्र भेजकर सरकार को जवाब देने के लिए 15 से 20 दिन का समय दिया गया था। इसके बाद 5 अक्टूबर को पुनर्विचार के लिए एक और पत्र सौंपा गया। संगठन का कहना है कि इसके बाद भी करीब 10 दिन तक इंतजार करने के बावजूद कोई ठोस जवाब नहीं मिला।

    डॉक्टरों ने बताया कि अधिकारियों से मुलाकात की कोशिश भी की गई और दो बार बातचीत हुई, लेकिन उन्हें केवल आश्वासन मिले। किसी निश्चित बैठक या निर्णय की जानकारी नहीं दी गई। इसी वजह से मामला अब तक लंबित है। संगठन के अनुसार, यह आंदोलन सिर्फ मुंबई तक सीमित नहीं है, बल्कि महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों के इंटर्न डॉक्टर भी इसमें शामिल हैं।

    अस्पताल प्रशासन के स्तर पर भी इस मुद्दे को उठाया गया है। डॉ. पवार ने बताया कि पिछले तीन महीनों में डीन को तीन बार पत्र दिए गए। डीन की ओर से स्टाइपेंड बढ़ाने का प्रस्ताव चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान निदेशालय (DMER) को भेजा गया है। संगठन ने भी इसी अवधि में डीएमईआर को लगभग छह पत्र सौंपे हैं। डॉ. पवार के अनुसार, प्रस्ताव आगे भेजे जाने के बावजूद अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मामला वित्त मंत्रालय तक पहुंच चुका है, तो फैसला लेने में देरी क्यों हो रही है।

    फिलहाल इंटर्न डॉक्टरों ने अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखते हुए सरकार से 1 नवंबर तक निर्णय लेने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि तय समय सीमा तक स्टाइपेंड बढ़ाने पर ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो 2 नवंबर से हड़ताल शुरू की जाएगी। डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि आंदोलन के दौरान आपातकालीन सेवाएं चालू रहेंगी। अब इस मामले में राज्य सरकार के फैसले पर नजर है, क्योंकि समय सीमा समाप्त होने पर अस्पतालों की नियमित सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका हो सकती है।

  • बैंक कर्मचारियों की तीन दिवसीय हड़ताल स्थगित, नागरिकों ने ली राहत की सांस

    बैंक कर्मचारियों की तीन दिवसीय हड़ताल स्थगित, नागरिकों ने ली राहत की सांस


    नई दिल्ली।
    इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (Indian Banks’ Association- IBA) और यूनाइटेड फोरम ऑफ़ बैंक यूनियंस (United Forum of Bank Unions- UFBU) के बीच रविवार को हुई बैठक के बाद प्रस्तावित बैंक हड़ताल टाल दी गई है. बैठक में बैंक सुधार, स्केल IV और उससे ऊपर के अधिकारियों के लिए PLI स्कीम में बदलाव समेत अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई।

    रविवार रात लगभग 9:30 बजे इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) और यूनाइटेड फोरम ऑफ़ बैंक यूनियंस (UFBU) की बैंक हड़ताल को लेकर बैठक हुई. इस बैठक में बैंक यूनियन की मांगों समेत अन्य अहम मुद्दों पर चर्चा हुई. लंबी बातचीत के बाद दोनों पक्षों के बीच कुछ फैसलों को लेकर सहमति बनी है।

    शनिवार को छुट्टी घोषित किए जाने के मु्द्दे पर इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) और यूनाइटेड फोरम ऑफ़ बैंक यूनियंस (UFBU) की एक हाई लेवल कमेटी का गठन किया जाएगा. यह कमेटी सभी संभावित विकल्पों पर विचार करेगी और हितधारकों के साथ चर्चा कर कोई समाधान निकालेगी, जिससे किसी को भी कोई असुविधा न हो. कमेटी एक ऐसा हल निकालने की कोशिश करेगी जो बैंक यूनियन और ग्राहक, दोनों को स्वीकार्य हों।

    वहीं, स्केल IV और उससे ऊपर के अधिकारियों के लिए PLI(प्रदर्शन से जुड़ी प्रोत्साहन) स्कीम को लेकर यूनियनों और एसोसिएशनों की आपत्तियों और सुझावों के मद्देनजर इसमें बदलाव का प्रस्ताव सरकार को भेजे जाने पर IBA के साथ चर्चा शुरू की जाएगी. इसके अलावा, 8 मार्च 2024 की बैठक के कार्यवृत्त(मिनट्स) में दर्ज बाकी मुद्दों के समाधान के लिए भी दोनों पक्षों के बीच बातचीत होगी।

    इन सभी फैसलों को देखते हुए यूनाइटेड फोरम ऑफ़ बैंक यूनियंस (UFBU) ने प्रस्तावित आंदोलन और हड़ताल के कार्यक्रमों पर टालने पर सहमति जताई, जिसके बाद बैंकों की प्रस्तावित तीन दिवसीय हड़ताल टल गई है।

  • 28 सितंबर से 3 दिन हड़ताल… दूसरे बैंक के ATM से निकासी पर नहीं लगेगा शुल्क, रविवार को भी खुलेंगे बैंक

    28 सितंबर से 3 दिन हड़ताल… दूसरे बैंक के ATM से निकासी पर नहीं लगेगा शुल्क, रविवार को भी खुलेंगे बैंक


    नई दिल्ली।
    बैंक यूनियनों (Bank Unions) की 28 सिंतबर से प्रस्तावित तीन दिवसीय देशव्यापी हड़ताल (Three-day Nationwide Strike) के दौरान दूसरे बैंकों के एटीएम (ATMs Other Banks) से पैसे निकालने पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन बैंक, सेंट्रल बैंक, पंजाब एंड सिंध समेत कई बैंकों ने इस संबंध में घोषणा की है। 

    हड़ताल के मद्देनजर 27 सितंबर रविवार को बैंक खुले रहेंगे। उधर, हड़ताल को देखते हुए केंद्र ने सितंबर के वेतन व पेंशन का भुगतान 5 दिन पहले करने का फैसला किया है। केंद्रीय कर्मियों, औद्योगिक कर्मचारियों और पेंशनरों के खाते में वेतन व पेंशन शुक्रवार को ही भेजने के निर्देश दिए गए हैं। रेलवे कर्मियों का वेतन भी इसी के साथ आएगा।

  • बैंक हड़ताल से पहले रविवार को खुलेंगी बैंक शाखाएं, ग्राहकों की सुविधा के लिए सरकार ने लिया अहम फैसला

    बैंक हड़ताल से पहले रविवार को खुलेंगी बैंक शाखाएं, ग्राहकों की सुविधा के लिए सरकार ने लिया अहम फैसला

    नई दिल्ली । बैंक कर्मचारियों की प्रस्तावित तीन दिवसीय देशव्यापी हड़ताल से पहले आम लोगों को बैंकिंग सेवाओं में परेशानी से बचाने के लिए रविवार को बैंक खुले रखने का फैसला किया गया है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक रविवार को सामान्य रूप से काम करेंगे। इसका उद्देश्य लगातार कई दिनों तक बैंकिंग सेवाएं प्रभावित होने की स्थिति को कम करना है।

    बैंक कर्मचारियों की हड़ताल 28 से 30 सितंबर तक प्रस्तावित है। इससे पहले 26 और 27 सितंबर को सप्ताहांत की छुट्टियां हैं। ऐसे में शनिवार और रविवार की छुट्टी के बाद लगातार तीन दिन हड़ताल होने पर बैंकिंग गतिविधियां कई दिनों तक प्रभावित हो सकती थीं। रविवार को बैंक खोलने का फैसला इसी संभावित व्यवधान को कम करने के लिए किया गया है।

    भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंक शाखाओं, कार्यालयों, एटीएम से जुड़ी शाखाओं और करेंसी चेस्ट को रविवार को पूरी तरह चालू रखने की अनुमति दी है। इसके साथ ही सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को रविवार को सामान्य कामकाज सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

    प्रस्तावित हड़ताल बैंक यूनियनों की कुछ मांगों को लेकर है। यूनियनों की प्रमुख मांगों में पांच दिन की बैंकिंग व्यवस्था लागू करना और परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव यानी पीएलआई योजना को वापस लेना शामिल है। मौजूदा व्यवस्था में बैंक कर्मचारियों को महीने में दो शनिवार की छुट्टी मिलती है। यूनियनें बाकी दो शनिवार को भी अवकाश घोषित किए जाने की मांग कर रही हैं।

    पीएलआई योजना को लेकर सरकार ने पहले ही एक कदम उठाया है। कर्मचारियों और यूनियनों की ओर से उठाई गई चिंताओं पर चर्चा के बाद सरकार ने इस योजना को फिलहाल स्थगित रखने का फैसला किया है। सरकार का कहना है कि इससे यूनियनों की दो प्रमुख मांगों में से एक पर कार्रवाई हो चुकी है।

    सरकार ने कहा है कि बैंक ग्राहकों का कल्याण और उनकी सुविधा प्राथमिकता में है। इसी को ध्यान में रखते हुए आवश्यक बैंकिंग सेवाओं को लगातार जारी रखने के लिए कदम उठाए गए हैं। सरकार और बैंक प्रबंधन ने यूनियनों से प्रस्तावित हड़ताल को वापस लेने की अपील भी की है।

    सरकार का कहना है कि यूनियनों की अधिकांश चिंताओं का काफी हद तक समाधान किया जा चुका है, जबकि शेष मांग पर अभी विचार किया जा रहा है। बैंकिंग क्षेत्र के कर्मचारियों से बातचीत के जरिए मुद्दों का समाधान करने और बैंकिंग सेवाओं को निर्बाध बनाए रखने की अपील की गई है।

    रविवार को बैंक खुले रहने से ग्राहकों को हड़ताल से पहले बैंकिंग से जुड़े जरूरी काम निपटाने का अवसर मिलेगा। नकदी से जुड़े काम, शाखा स्तर की सेवाओं और अन्य जरूरी बैंकिंग गतिविधियों के लिए रविवार को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक सामान्य रूप से उपलब्ध रहेंगे। इसके अलावा एटीएम से जुड़ी व्यवस्थाओं और करेंसी चेस्ट को भी चालू रखने की अनुमति दी गई है।

    प्रस्तावित हड़ताल के दौरान बैंकिंग सेवाओं पर कितना असर पड़ेगा, यह कर्मचारियों की भागीदारी और संबंधित संस्थानों की व्यवस्था पर निर्भर करेगा। फिलहाल सरकार की ओर से रविवार को बैंक खुले रखने का निर्णय ग्राहकों के लिए लगातार छुट्टियों और हड़ताल से पैदा होने वाले संभावित व्यवधान को कम करने के उद्देश्य से लिया गया है।

  • बैंक ग्राहकों के लिए बड़ी खबर, हड़ताल से पहले रविवार को खुलेगा बैंक, जानिए 27 सितंबर के फैसले का पूरा असर

    बैंक ग्राहकों के लिए बड़ी खबर, हड़ताल से पहले रविवार को खुलेगा बैंक, जानिए 27 सितंबर के फैसले का पूरा असर

    नई दिल्ली ।सरकारी बैंक कर्मचारियों की प्रस्तावित देशव्यापी हड़ताल को देखते हुए केंद्र सरकार ने ग्राहकों को राहत देने के लिए 27 सितंबर 2026, रविवार को बैंक शाखाएं खुली रखने का फैसला किया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य लगातार छुट्टियों और हड़ताल के कारण बैंकिंग सेवाओं पर पड़ने वाले संभावित असर को कम करना है।

    सरकार के इस निर्णय के तहत सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक 27 सितंबर को सामान्य कार्यदिवस की तरह काम करेंगे। इससे उन ग्राहकों को बैंकिंग सेवाओं का लाभ लेने का अवसर मिलेगा, जिन्हें नकद लेनदेन, दस्तावेजी कामकाज या अन्य जरूरी शाखा संबंधी सेवाओं की आवश्यकता है।

    बैंक कर्मचारियों के संयुक्त संगठन ने 28 से 30 सितंबर 2026 तक तीन दिन की देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। प्रस्तावित हड़ताल से ठीक पहले 26 सितंबर को शनिवार और 27 सितंबर को रविवार है। ऐसे में लगातार छुट्टियों के साथ हड़ताल होने पर बैंकिंग सेवाओं में कई दिनों तक व्यवधान की स्थिति बन सकती थी।

    इसी संभावित स्थिति को ध्यान में रखते हुए रविवार को बैंक खोलने का फैसला किया गया है। सरकार का कहना है कि आम नागरिकों की जरूरी बैंकिंग जरूरतें लंबे समय तक प्रभावित न हों और सेवाओं में निरंतरता बनी रहे, इसके लिए पहले से आवश्यक कदम उठाए गए हैं।

    27 सितंबर को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के साथ-साथ क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों में भी कामकाज होगा। बैंक शाखाओं के अलावा संबंधित बैंकिंग ढांचे को भी सक्रिय रखने की व्यवस्था की गई है। इसका मकसद ग्राहकों को जरूरी सेवाओं के लिए अतिरिक्त अवसर उपलब्ध कराना है।

    हड़ताल का मुख्य मुद्दा बैंकों में सप्ताह के दौरान पांच कार्यदिवस लागू करने की मांग है। बैंक कर्मचारी संगठनों का कहना है कि मार्च 2024 में हुए द्विपक्षीय वेतन संशोधन समझौते के दौरान पांच कार्यदिवस की व्यवस्था को लेकर सहमति बनी थी, लेकिन इसे अब तक लागू नहीं किया गया है।

    बैंक कर्मचारी संगठन इसी मांग को लेकर सरकार और बैंक प्रबंधन के समक्ष अपनी बात रखते रहे हैं। प्रस्तावित तीन दिवसीय हड़ताल भी इसी मुद्दे को लेकर बुलाई गई है। सरकार की ओर से कर्मचारियों से हड़ताल वापस लेने और बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने की अपील की गई है।

    बैंकिंग सेवाएं आम नागरिकों, कारोबारियों और विभिन्न संस्थानों के लिए महत्वपूर्ण हैं। लगातार छुट्टियों के बाद हड़ताल होने की स्थिति में शाखाओं पर काम का दबाव बढ़ सकता है। रविवार को बैंक खोलने का फैसला इसी संभावित व्यवधान को कम करने की दिशा में उठाया गया कदम है।

    ग्राहकों के लिए 27 सितंबर का दिन इसलिए भी महत्वपूर्ण रहेगा क्योंकि यह सामान्य रविवार होने के बावजूद सार्वजनिक क्षेत्र और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों में बैंकिंग कार्य उपलब्ध रहेगा। इसके बाद 28 से 30 सितंबर तक प्रस्तावित हड़ताल के कारण शाखाओं के नियमित कामकाज पर असर पड़ सकता है।

    सरकार और बैंक प्रबंधन की ओर से सेवाओं को सुचारु बनाए रखने पर जोर दिया गया है। वहीं कर्मचारी संगठन अपनी पांच दिवसीय कार्यसप्ताह की मांग को लेकर हड़ताल के कार्यक्रम पर कायम हैं। ऐसे में सितंबर के अंतिम सप्ताह में बैंकिंग सेवाओं की स्थिति पर ग्राहकों और कारोबारियों की नजर रहेगी।

  • आगर-मालवा में दूध के दाम बढ़ाने की मांग पर अनिश्चितकालीन हड़ताल, विक्रेताओं ने सड़क पर बहाया कई लीटर दूध

    आगर-मालवा में दूध के दाम बढ़ाने की मांग पर अनिश्चितकालीन हड़ताल, विक्रेताओं ने सड़क पर बहाया कई लीटर दूध

    मध्य प्रदेश: के आगर-मालवा जिले के सुसनेर में दूध के दाम बढ़ाने की मांग को लेकर दूध विक्रेताओं ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। हड़ताल के कारण क्षेत्र में दूध की सप्लाई प्रभावित होने लगी है और कई डेयरियां बंद बताई जा रही हैं। दूध विक्रेता मौजूदा कीमतों को लेकर असंतोष जताते हुए भाव बढ़ाने की मांग पर अड़े हुए हैं।

    दूध विक्रेताओं की मुख्य मांग दूध का भाव बढ़ाकर 100 रुपये प्रति लीटर करने की है। इसके साथ ही फैट का दाम 12 रुपये करने की मांग भी रखी गई है। विक्रेताओं का कहना है कि मौजूदा कीमतों पर दूध का कारोबार करना उनके लिए मुश्किल हो रहा है। दूध उत्पादन और उसे बाजार तक पहुंचाने से जुड़ी लागत बढ़ने का हवाला देते हुए वे कीमतों में बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं।

    हड़ताल के बीच सुसनेर में विरोध-प्रदर्शन भी देखने को मिला। ग्रामीण क्षेत्रों से दूध लेकर सुसनेर की ओर आ रहे पिकअप वाहनों को रोककर प्रदर्शनकारियों ने दूध सड़क पर बहा दिया। विरोध के दौरान सड़क पर काफी मात्रा में दूध फैल गया। इस घटना के वीडियो भी सामने आए हैं, जिनमें वाहनों को रोककर दूध सड़क पर बहाते हुए लोग दिखाई दे रहे हैं।

    विरोध के दौरान दूध विक्रेताओं और दूध लेकर आने वाले वाहनों को रोकने की बात सामने आई है। प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में दूध सड़क पर बहाकर विरोध दर्ज कराया। हालांकि, इस दौरान किसी अप्रिय घटना की जानकारी सामने नहीं आई है।

    सुसनेर में एक होटल से पैकेट और अन्य दूध भी प्रदर्शनकारियों द्वारा सड़क पर बहाए जाने का दावा किया गया है। इस घटना से जुड़े वीडियो भी सामने आए हैं। दूध की बर्बादी के जरिए प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर नाराजगी जताई।

    दूध विक्रेताओं का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक हड़ताल जारी रहेगी। अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण सुसनेर क्षेत्र के अलावा आगर-मालवा के ग्रामीण इलाकों में भी दूध की सप्लाई प्रभावित होने लगी है। कई डेयरियों के बंद रहने से स्थानीय स्तर पर दूध की उपलब्धता पर असर पड़ रहा है।

    विक्रेताओं की मांग में दो प्रमुख बिंदु शामिल हैं। पहला, दूध का भाव 100 रुपये प्रति लीटर किया जाए और दूसरा, फैट का दाम बढ़ाकर 12 रुपये किया जाए। उनका कहना है कि वर्तमान कीमतों पर दूध का कारोबार चलाना मुश्किल हो रहा है और बढ़ती लागत के कारण उन्हें आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है।

    फिलहाल हड़ताल को समाप्त करने को लेकर कोई समाधान सामने नहीं आया है। दूध विक्रेताओं ने अपनी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कही है। ऐसे में हड़ताल कितने समय तक चलती है और प्रशासन तथा संबंधित पक्षों के स्तर पर इस मुद्दे को लेकर क्या बातचीत होती है, यह आगे महत्वपूर्ण रहेगा।

    यदि हड़ताल लंबी चलती है, तो सुसनेर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में दूध की सप्लाई और उपलब्धता पर इसका प्रभाव बढ़ सकता है। फिलहाल दूध विक्रेता 100 रुपये प्रति लीटर कीमत और 12 रुपये फैट के दाम की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं।

  • स्वामित्व योजना के अतिरिक्त काम से नाराज पटवारियों का प्रदर्शन, 55 जिलों में कलमबंद हड़ताल की दी चेतावनी

    स्वामित्व योजना के अतिरिक्त काम से नाराज पटवारियों का प्रदर्शन, 55 जिलों में कलमबंद हड़ताल की दी चेतावनी

    मध्य प्रदेश । के छतरपुर जिले में स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना के तहत अतिरिक्त जिम्मेदारियां सौंपे जाने के विरोध में पटवारियों ने मंगलवार को प्रदर्शन किया। मध्य प्रदेश पटवारी संघ जिला शाखा के आह्वान पर दर्जनों पटवारी रैली के रूप में कलेक्ट्रेट पहुंचे। यहां उन्होंने नारेबाजी करते हुए धरना दिया और अपनी मांगों को लेकर विरोध जताया। पटवारियों ने मुख्यमंत्री के नाम जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपने की बात कही।

    पटवारी संघ की मुख्य मांग है कि आबादी भूमि के पंजीयन और निष्पादन की प्रक्रिया, ई-केवाईसी तथा व्यक्तिगत दायित्व से जुड़े अन्य कार्यों से पटवारी संवर्ग को अलग रखा जाए। संघ का कहना है कि इन कार्यों में जमीन की सीमा, क्षेत्रफल, मालिकाना हक या दस्तावेजों से जुड़ी किसी भी त्रुटि की स्थिति में पटवारियों पर व्यक्तिगत कानूनी जिम्मेदारी आने की आशंका है। इसी वजह से संघ इन अतिरिक्त दायित्वों को लेकर विरोध कर रहा है।

    मध्य प्रदेश पटवारी संघ संघर्ष समिति के जिलाध्यक्ष हारून अहमद ने कहा कि पंजीयन से संबंधित कार्यों के लिए शासन के पास अलग विभाग मौजूद है। इसके बावजूद राजस्व विभाग के मैदानी कर्मचारियों को अतिरिक्त प्रशासनिक और कानूनी जिम्मेदारियां दी जा रही हैं। उनका कहना है कि ग्रामीण आबादी क्षेत्र का भू-स्वरूप कृषि भूमि से अलग है और पंचायत राज व्यवस्था के तहत सर्वेक्षण से जुड़े कार्य पंचायत विभाग से संबंधित हैं।

    पटवारियों ने किसान हितैषी फार्मर आईडी और जियो-टैग गिरदावरी में सामने आ रही तकनीकी खामियों का भी मुद्दा उठाया। संघ के अनुसार, तकनीकी समस्याओं के कारण मैदानी स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों पर अतिरिक्त दबाव बन रहा है। पटवारी संघ का कहना है कि पहले से ही कई जिम्मेदारियां निभा रहे कर्मचारियों पर लगातार नई योजनाओं का काम बढ़ाया जा रहा है।

    संघ ने ग्रेड-पे, वेतन विसंगति और कैडर रिव्यू जैसी लंबित मांगों का भी उल्लेख किया। पटवारियों के मुताबिक इन मुद्दों का अभी निराकरण नहीं हुआ है और इसके साथ ही अतिरिक्त कार्यभार लगातार बढ़ रहा है। इसी वजह से संघ ने शासन से आबादी पंजीयन एवं निष्पादन योजना से पटवारियों को तत्काल अलग करने की मांग की है।

    कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन के दौरान पटवारी इस बात पर भी अड़े रहे कि मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन केवल जिला कलेक्टर को ही सौंपा जाएगा। डिप्टी कलेक्टर और एडीएम विनय द्विवेदी ज्ञापन लेने पहुंचे, लेकिन पटवारियों ने उन्हें ज्ञापन देने से इनकार कर दिया। इसके बाद दोनों अधिकारी बिना आवेदन लिए वापस लौट गए और पटवारी धरने पर बैठे रहे।

    पटवारी संघ ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांग पर तत्काल कार्रवाई नहीं हुई और अतिरिक्त जिम्मेदारियों को लेकर दबाव जारी रहा, तो प्रदेश के सभी 55 जिलों में पटवारी काम बंद कर कलमबंद हड़ताल करने के लिए मजबूर होंगे। संघ ने ऐसी स्थिति के लिए शासन-प्रशासन को जिम्मेदार बताया है।

  • आज देशभर में बैंक कर्मचारियों की हड़ताल…. 3 दिन नहीं खुलेंगे बैंक

    आज देशभर में बैंक कर्मचारियों की हड़ताल…. 3 दिन नहीं खुलेंगे बैंक


    नई दिल्ली।
    अगर आपको बैंक (Bank) का कोई जरूरी काम है और वह सिर्फ बैंक ब्रांच जाकर ही हो सकता है, तो उसे टालना भारी पड़ सकता है. आने वाले कुछ दिनों में कई जगह बैंक ब्रांच (Bank branch) बंद रहने वाली हैं. ऐसे में कैश निकालने, जमा करने या दूसरे ब्रांच से जुड़े काम के लिए आपको लंबा इंतजार करना पड़ सकता है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि बैंकिंग सेवाएं (Banking Services) पूरी तरह बंद रहेंगी. डिजिटल बैंकिंग, ATM और दूसरे ऑनलाइन ऑप्शन आपके काम आ सकते हैं।

    यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (United Forum of Bank Unions- UFBU) ने 11 सितंबर को देशव्यापी बैंक हड़ताल (Nationwide bank strike) का ऐलान किया है. बैंक यूनियनों ने अपनी कई मांगों को लेकर यह हड़ताल बुलाई है. इसका असर खास तौर पर बैंक ब्रांच में होने वाले सामान्य कामकाज पर पड़ सकता है. हड़ताल के बाद 12 सितंबर को शनिवार और 13 सितंबर को रविवार है. इसके बाद कुछ राज्यों में सोमवार और मंगलवार को गणेश चतुर्थी के चलते भी बैंक बंद रहेंगे. यानी कुछ जगहों पर बैंक ब्रांच से जुड़े काम के लिए ग्राहकों को लगातार कई दिनों तक इंतजार करना पड़ सकता है।

    किन मांगों को लेकर हड़ताल?
    बैंक यूनियनों की प्रमुख मांगों में ‘5 डे बैंकिंग वीक’ लागू करना शामिल है. इसके अलावा परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम (PLI Scheme) की समीक्षा की भी मांग की जा रही है. यूनियनों का कहना है कि सरकार की ओर से सोमवार से शुक्रवार तक हफ्ते में पांच दिन कामकाज और शनिवार, रविवार फुल डे वीक ऑफ लागू करने का वादा किया गया था, जिसे अब पूरा किया जाना चाहिए. इन्हीं मांगों के समर्थन में UFBU ने हड़ताल का फैसला लिया है. यूएफबीयू में एआइबीईए, एआइबीओसी, एनसीबीई, एआइबीओए, बीईएफआइ, आइएनबीओसी और आइएनबीईएफ समेत सात बैंक यूनियनें शामिल हैं. ये बैंकिंग वर्कफोर्स के 90 प्रतिशत से अधिक का प्रतिनिधित्व करती हैं।


    बैंकिंग सेवाएं पूरी तरह बंद रहेंगी?

    ऐसा नहीं है कि हड़ताल के दौरान बैंकिंग की हर सुविधा बंद हो जाएगी. बैंकों ने जरूरी सेवाएं जारी रखने के लिए इंतजाम किए हैं. लेकिन बैंक ब्रांच में होने वाले कई काम प्रभावित हो सकते हैं. अगर आपका काम ऐसा है जिसके लिए बैंक ब्रांच जाना जरूरी है, तो उसमें देरी हो सकती है. खास तौर पर कैश जमा करने, कैश निकालने या किसी दूसरे ऑफलाइन काम के लिए आपको इंतजार करना पड़ सकता है।


    SBI ने ग्राहकों को क्या कहा?

    स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर ग्राहकों के लिए एडवाइजरी जारी की है. बैंक ने कहा है कि हड़ताल के दौरान ब्रांच और ऑफिस के सामान्य कामकाज के लिए जरूरी इंतजाम किए गए हैं. इसके बावजूद 11 सितंबर की प्रस्तावित हड़ताल के कारण बैंकिंग काम प्रभावित हो सकता है. SBI ने ग्राहकों को सलाह दी है कि अगर कोई जरूरी बैंकिंग ट्रांजैक्शन करना है तो उसे डिजिटल या इंटरनेट बैंकिंग के जरिए पूरा करें।


    कैश की जरूरत तो क्या करें?

    अगर आपको कैश की जरूरत है तो बैंक ब्रांच बंद होने की स्थिति में ATM और ADWM (Automated Deposit and Withdrawal Machine) का इस्तेमाल किया जा सकता है. SBI ने ग्राहकों को उपलब्ध बैंकिंग सेवाओं के लिए CSP (Customer Service Point) का इस्तेमाल करने की भी सलाह दी है. इसके अलावा इंटरनेट बैंकिंग, YONO, मोबाइल बैंकिंग, UPI और दूसरे डिजिटल चैनलों के जरिए कई जरूरी काम किए जा सकते हैं. यानी अगर आपका काम ऑनलाइन हो सकता है तो बैंक ब्रांच खुलने का इंतजार करने की जरूरत नहीं है. UPI से पेमेंट, मोबाइल बैंकिंग, इंटरनेट बैंकिंग और ATM जैसी सुविधाएं उपलब्ध रहने की स्थिति में उनका इस्तेमाल किया जा सकता है।


    PNB ने जारी की एडवाइजरी

    पंजाब नेशनल बैंक (PNB) ने भी 11 सितंबर की बैंक हड़ताल को लेकर ग्राहकों के लिए एडवाइजरी जारी की है. बैंक ने जरूरी ट्रांजैक्शन के लिए डिजिटल बैंकिंग सेवाओं का इस्तेमाल करने की सलाह दी है. PNB के मुताबिक ग्राहक UPI Payments, मोबाइल बैंकिंग, इंटरनेट बैंकिंग, ATM और ADWM जैसी सुविधाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं।


    HDFC और ICICI का अपडेट

    HDFC Bank, ICICI Bank और कुछ दूसरे बैंकों की ओर से इस हड़ताल को लेकर फिलहाल कोई अलग बयान सामने नहीं आया है. ऐसे में ग्राहकों को अपने बैंक की तरफ से जारी होने वाले अपडेट पर नजर रखनी चाहिए. अगर आपका अकाउंट इन बैंकों में है और कोई जरूरी काम ब्रांच जाकर करना है, तो ब्रांच जाने से पहले बैंक की वेबसाइट, ऐप या दूसरे आधिकारिक चैनल पर स्थिति जरूर चेक कर लें।


    अगले कुछ दिन रहेंगे मुश्किल

    11 सितंबर की हड़ताल के बाद 12 सितंबर शनिवार और 13 सितंबर रविवार है. इसके बाद कुछ राज्यों में 14 और 15 सितंबर को गणेश चतुर्थी के चलते बैंक हॉलिडे रह सकता है. हालांकि, छुट्टी की स्थिति राज्य के हिसाब से अलग हो सकती है. इसलिए अगर आपको कैश जमा करना है, कैश निकालना है या ऐसा कोई काम करना है जो सिर्फ बैंक ब्रांच में हो सकता है, तो इसके लिए अगले कुछ दिनों का इंतजार करना पड़ सकता है।

  • हिंदू समूह की यात्रा के दौरान महिला कर्मचारियों को ड्यूटी से हटाने पर भड़के एफिल टावर कर्मचारी, एक दिन बंद रहा टावर

    हिंदू समूह की यात्रा के दौरान महिला कर्मचारियों को ड्यूटी से हटाने पर भड़के एफिल टावर कर्मचारी, एक दिन बंद रहा टावर

    नई दिल्ली ।पेरिस के प्रसिद्ध एफिल टावर को सोमवार को कर्मचारियों की हड़ताल के कारण एक दिन के लिए बंद करना पड़ा। हड़ताल की वजह एक हिंदू धार्मिक समूह की यात्रा के दौरान महिला कर्मचारियों को ड्यूटी से हटाए जाने का मामला बताया जा रहा है। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि कार्यस्थल पर लिंग के आधार पर भेदभाव किया गया और महिलाओं को हटाकर उनकी जगह पुरुष कर्मचारियों को लगाया गया।

    घटना का संबंध बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था यानी BAPS के एक प्रतिनिधिमंडल की एफिल टावर यात्रा से बताया गया है। समूह में 100 से अधिक संत और अन्य सदस्य शामिल थे। यात्रा से पहले महिला कर्मचारियों को उनके निर्धारित कार्यस्थलों से हटाने का निर्णय लिया गया था। इस फैसले से कर्मचारियों में नाराजगी पैदा हुई और बाद में उन्होंने विरोध स्वरूप हड़ताल कर दी।

    एफिल टावर की जिम्मेदारी संभालने वाली कंपनी एसईटीई के अनुसार, धार्मिक समूह की ओर से अनुरोध किया गया था कि उनके दौरे के दौरान महिलाओं से बातचीत कम से कम हो। कंपनी ने कहा कि उसने इस तरह की मांग को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। हालांकि, घटनाक्रम के दौरान महिला कर्मचारियों को ड्यूटी से हटाए जाने के बाद विवाद बढ़ गया।

    कर्मचारियों की ओर से इस मामले को कार्यस्थल पर लैंगिक भेदभाव से जोड़कर देखा गया। उनका कहना था कि किसी धार्मिक या सांस्कृतिक समूह की पसंद के आधार पर महिला कर्मचारियों को उनके काम से हटाना स्वीकार्य नहीं होना चाहिए। इसी मुद्दे को लेकर कर्मचारियों ने सोमवार को काम रोक दिया, जिसके चलते एफिल टावर आने वाले पर्यटकों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

    इस विवाद के बाद BAPS से जुड़े पेरिस स्थित हिंदू मंदिर की ओर से भी खेद जताया गया। संस्था ने कहा कि यदि उनके प्रतिनिधिमंडल की वजह से किसी व्यक्ति को ठेस पहुंची है या किसी तरह की परेशानी हुई है तो उन्हें इसका अफसोस है। संस्था ने यह भी बताया कि प्रतिनिधिमंडल में 100 से अधिक लोग शामिल थे और बड़ी संख्या को देखते हुए यात्रा के दौरान किसी तरह की परेशानी से बचने के लिए व्यवस्थाएं पहले से तय की गई थीं।

    पेरिस के मेयर इमैनुएल ग्रेगोइरे ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी और कहा कि कंपनी को इस तरह की शर्तें स्वीकार नहीं करनी चाहिए थीं। विवाद ने धार्मिक स्वतंत्रता, कार्यस्थल पर समानता और महिला कर्मचारियों के अधिकारों से जुड़े सवालों को चर्चा में ला दिया है।

    एफिल टावर पेरिस की पहचान से जुड़ी दुनिया की सबसे प्रसिद्ध संरचनाओं में से एक है। सीन नदी के किनारे स्थित यह टावर करीब 330 मीटर ऊंचा है। इसका निर्माण 1887 से 1889 के बीच कराया गया था। इसे 1889 में आयोजित विश्व मेले के लिए तैयार किया गया था। यह आयोजन फ्रांसीसी क्रांति की 100वीं वर्षगांठ के अवसर पर किया गया था।

    इस विशाल टावर का डिजाइन गुस्ताव एफिल से जुड़ा है और उन्हीं के नाम पर इसे एफिल टावर कहा गया। शुरुआत में इसे प्रदर्शनी के लिए तैयार किया गया था, लेकिन समय के साथ यह पेरिस और फ्रांस की सबसे बड़ी पहचान बन गया। आज दुनियाभर से लाखों पर्यटक इसे देखने पहुंचते हैं। ऐसे में कर्मचारियों की हड़ताल के कारण इसका एक दिन बंद रहना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया।

  • मप्र में 8 हजार डॉक्टर आज से हड़ताल पर… बिगड़ सकती है स्वास्थ्य व्यवस्था

    मप्र में 8 हजार डॉक्टर आज से हड़ताल पर… बिगड़ सकती है स्वास्थ्य व्यवस्था


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश में आज स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत करीब 8 हजार रेजिडेंट डॉक्टर, सीनियर रेजिडेंट और इंटर्न सोमवार सुबह 9 बजे से हड़ताल पर चले गए हैं। मध्य प्रदेश में आज स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत करीब 8 हजार रेजिडेंट डॉक्टर, सीनियर रेजिडेंट और इंटर्न सोमवार सुबह 9 बजे से हड़ताल पर चले गए हैं। हड़ताल के चलते डॉक्टर ओपीडी में मरीज नहीं देखेंगे और सामान्य ऑपरेशन भी नहीं करेंगे। केवल अति गंभीर मरीजों का इलाज जारी रहेगा।

    जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन के नेतृत्व में यह हड़ताल लंबित स्टाइपेंड संशोधन को लागू करने की मांग को लेकर की जा रही है। डॉक्टरों का कहना है कि शासन के आदेश के अनुसार सीपीआई आधारित स्टाइपेंड संशोधन 1 अप्रैल 2025 से लागू होना था, लेकिन अब तक इसे लागू नहीं किया गया और न ही बकाया एरियर का भुगतान हुआ है।

    डॉक्टरों के अनुसार इस संबंध में कई बार शासन और संबंधित विभागों से निवेदन किया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। इससे डॉक्टरों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

    हड़ताल के कारण प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में हर्निया, रॉड इंप्लांट सहित कई सामान्य ऑपरेशन टल सकते हैं, जिससे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि आपातकालीन सेवाएं और गंभीर मरीजों का इलाज पहले की तरह जारी रहेगा।

    जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन के डॉ. ब्रिजेंद्र ने बताया कि हड़ताल की सूचना प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों के डीन और विभागाध्यक्षों को दे दी गई है। इसके तहत ओपीडी और अन्य इलेक्टिव सेवाओं का बहिष्कार किया जाएगा।

    गौरतलब है कि जूनियर डॉक्टर पिछले तीन दिनों से काली पट्टी बांधकर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। डॉक्टरों का कहना है कि उनका आंदोलन केवल शासन द्वारा जारी आदेश के क्रियान्वयन और लंबित एरियर के भुगतान की मांग को लेकर है। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार जल्द फैसला नहीं करती है तो आंदोलन को और तेज किया जा सकता है।