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  • भारत-कनाड़ा के बीच कारोबारी रिश्तों को मजबूत करेगी IDBI बैंक डील…..इन क्षेत्रों में आएगा निवेश

    भारत-कनाड़ा के बीच कारोबारी रिश्तों को मजबूत करेगी IDBI बैंक डील…..इन क्षेत्रों में आएगा निवेश


    नई दिल्ली।
    भारत और कनाडा (India and Canada) के बीच कारोबारी रिश्तों को बढ़ावा देने की दिशा में आईडीबीआई बैंक का सौदा (IDBI Bank Deal) अहम माना जा रहा है। कनाडा के अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धू (Maninder Sidhu) ने कहा है कि उनका देश भारत में निवेश और बढ़ाने की संभावनाएं देख रहा है। केंद्र सरकार ने बुधवार को आईडीबीआई बैंक की रणनीतिक बिक्री और पुनर्गठन को मंजूरी दी है। यह सौदा 52,878 करोड़ रुपये का है और इसमें कनाडा की फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स की भूमिका अहम है। सिद्धू के मुताबिक, भारत में बुनियादी ढांचे, विमानन और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में कनाडाई कंपनियों के लिए काफी अवसर हैं।

    सिद्धू ने कहा कि कनाडा अब तक भारत में करीब 107 अरब अमेरिकी डॉलर (107 Billion US Dollars) का निवेश कर चुका है। इसके बावजूद दोनों देशों के बीच निवेश बढ़ाने की काफी गुंजाइश है। उन्होंने कहा कि कनाडाई कंपनियां, संस्थान और पेंशन फंड भारत के बुनियादी ढांचे के विकास में योगदान दे रहे हैं। सिद्धू ने फेयरफैक्स और उसके प्रमुख प्रेम वत्स की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि कंपनी भारत में हवाई अड्डों के विकास में मदद कर रही है। उनके मुताबिक, भारत की विकास योजनाएं कनाडा के लिए निवेश के नए रास्ते खोल सकती हैं।


    निर्मला सीतारमण बोलीं- बैंकिंग व्यवस्था होगी मजबूत

    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आईडीबीआई बैंक के रणनीतिक पुनर्गठन को मंजूरी मिलने का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि इससे बैंक को विकास के अगले चरण में पहुंचने और विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) हासिल करने में मदद मिलेगी। बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कनाडा की फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स को आईडीबीआई बैंक की 60.72 प्रतिशत नियंत्रक हिस्सेदारी 52,878 करोड़ रुपये में बेचने की मंजूरी दी। इस सौदे के बाद भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) की हिस्सेदारी घटकर 19 प्रतिशत रह जाएगी। सीतारमण के मुताबिक, इस कदम से देश का बैंकिंग तंत्र मजबूत होगा और बैंकिंग सेवाओं को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने में मदद मिलेगी।

    केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इस फैसले से वित्तीय क्षेत्र में विदेशी निवेश बढ़ेगा और छोटे कारोबारियों तथा उद्यमियों के लिए नए अवसर बनेंगे। सरकार आईडीबीआई बैंक में अपनी 30.48 प्रतिशत हिस्सेदारी और एलआईसी अपनी 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचेगी। सौदे के बाद सरकार के पास 15 प्रतिशत और एलआईसी के पास 19 प्रतिशत हिस्सेदारी रहेगी। बैंक की वित्तीय स्थिति में भी सुधार हुआ है। इसका सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (जीएनपीए) अनुपात सितंबर 2018 के 31.78 प्रतिशत से घटकर मार्च 2026 में 2.32 प्रतिशत रह गया। शुद्ध एनपीए भी 17.30 प्रतिशत से घटकर 0.15 प्रतिशत हो गया। वित्त वर्ष 2025-26 में बैंक ने 9,513 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया। खराब वित्तीय स्थिति के कारण मई 2017 में आरबीआई ने बैंक को त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई (पीसीए) के दायरे में रखा था, जिसे सुधार के बाद मार्च 2021 में हटा दिया गया।


    आईडीबीआई बैंक के सौदे में क्या हुआ और कनाडा की भूमिका क्यों अहम है?

    केंद्र सरकार की कैबिनेट ने आईडीबीआई बैंक की रणनीतिक बिक्री और पुनर्गठन को मंजूरी दी है। प्रस्तावित सौदे का मूल्य 52,878 करोड़ रुपये है। इस प्रक्रिया के तहत भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) बैंक में अपनी हिस्सेदारी घटाकर 19 प्रतिशत करने वाला है। वहीं, कनाडा की फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स की भागीदारी से बैंक के स्वामित्व में बदलाव की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। यह सौदा भारत के बैंकिंग क्षेत्र में सरकारी हिस्सेदारी घटाने की कोशिशों का अहम हिस्सा है। इसके साथ ही भारत और कनाडा के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ने की संभावनाओं पर भी ध्यान गया है।


    भारत में किन क्षेत्रों में निवेश बढ़ाना चाहता है कनाडा?

    सिद्धू ने कहा कि भारत में बुनियादी ढांचे, विमानन, ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में कनाडा के लिए निवेश के बड़े अवसर हैं। उन्होंने भारत की हवाई यातायात और परिवहन से जुड़ी योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि देश 100 और हवाई अड्डे बनाने की योजना पर काम कर रहा है। इसके अलावा भारत को करीब 2,000 और विमानों की जरूरत होगी। सिद्धू के अनुसार, कनाडा का विमानन उद्योग, बुनियादी ढांचे से जुड़ी विशेषज्ञता और ऊर्जा क्षेत्र की क्षमता इन जरूरतों को पूरा करने में सहयोग दे सकती है।


    भारतीय बुनियादी ढांचे में कनाडाई पेंशन फंड कैसे मदद कर रहे हैं?

    कनाडा के मंत्री ने बताया कि उनके देश के पेंशन फंड भारत में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में भागीदारी कर रहे हैं। इनमें राजमार्गों से जुड़ी परियोजनाएं भी शामिल हैं। पेंशन फंड ऐसे निवेश को लंबे समय तक बनाए रख सकते हैं, जिससे बड़ी परियोजनाओं के लिए पूंजी उपलब्ध कराने में मदद मिलती है। सिद्धू ने भारत और कनाडा की अर्थव्यवस्थाओं को एक-दूसरे के लिए उपयोगी बताया। उनके मुताबिक, भारत की विकास जरूरतें और कनाडा की निवेश क्षमता दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ा सकती हैं।


    क्या आईडीबीआई बैंक सौदे से दोनों देशों का निवेश संबंध मजबूत होगा?

    सिद्धू ने भरोसा जताया कि भारत और कनाडा के बीच निवेश आने वाले समय में और बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि कनाडा पहले ही भारत में बड़ी रकम निवेश कर चुका है, लेकिन अवसर अभी खत्म नहीं हुए हैं। आईडीबीआई बैंक का सौदा ऐसे समय हुआ है, जब दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को विस्तार देने पर जोर दिया जा रहा है। हालांकि, इस सौदे के बाद कितना अतिरिक्त निवेश आएगा, इसकी कोई निश्चित राशि या समयसीमा मंत्री ने नहीं बताई। फिलहाल बुनियादी ढांचा, विमानन, ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिज दोनों देशों के संभावित सहयोग के प्रमुख क्षेत्र हैं।

  • रोम से स्वदेश रवाना हुए PM मोदी…. अंतरराष्ट्रीय संबंधों को मजबूत करेगा 5 देशों का दौरा

    रोम से स्वदेश रवाना हुए PM मोदी…. अंतरराष्ट्रीय संबंधों को मजबूत करेगा 5 देशों का दौरा


    रोम (इटली)।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने अपने पांच देशों के आधिकारिक दौरे को पूरा करते हुए बुधवार को इटली (Italy) के रोम (Rome) से भारत के लिए प्रस्थान किया। यह दौरा भारत की वैश्विक कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को मजबूत करने की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


    इटली यात्रा में रिश्तों को मिली नई मजबूती

    प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी इटली यात्रा को बेहद सफल बताते हुए कहा कि उनकी चर्चा इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के साथ कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर केंद्रित रही। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि भारत और इटली ने अपने संबंधों को स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप तक पहुंचाने का निर्णय लिया है, जिससे आने वाले समय में दोनों देशों के सहयोग को नई गति मिलेगी। पीएम मोदी ने इटली के राष्ट्रपति सर्जियो मटेरेला से मुलाकात कर व्यापार, निवेश, संस्कृति, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, महत्वपूर्ण खनिज, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा जैसे अहम क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विस्तृत चर्चा की।


    आतंक के वित्तपोषण के खिलाफ भारत इटली की पहल वैश्विक नजीर: मोदी

    पीएम मोदी ने कहा कि आतंकवाद मानवता के लिए एक गंभीर चुनौती है और भारत-इटली दोनों इस बात पर एकमत हैं। आतंकवाद के वित्तपोषण के खिलाफ हमारी पहल ने पूरी दुनिया के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण प्रस्तुत किया है। पीएम मोदी ने कहा, भारत और इटली ने स्पष्ट संदेश दिया है कि जिम्मेदार लोकतंत्र न केवल आतंकवाद की निंदा करते हैं, बल्कि इसके वित्तीय नेटवर्क को बाधित करने के लिए ठोस कदम भी उठाते हैं। पीएम ने यूक्रेन और पश्चिम एशिया संकट के बारे में कहा कि हम यूक्रेन, पश्चिम एशिया और अन्य तनावों के संबंध में लगातार एक-दूसरे के संपर्क में हैं। भारत का दृष्टिकोण स्पष्ट है कि सभी समस्याओं का समाधान संवाद और कूटनीति से होना चाहिए। इटली की पीएम जियोर्जिया मेलनी के साथ वार्ता के बाद साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में मोदी ने कहा, दोनों देशों के रक्षा उद्योगों के साथ-साथ हमारी सेनाओं में भी सहयोग बढ़ रहा है।


    इटली दौरे की बड़ी उपलब्धियां

    – दोनों देशों के संबंध को विशेष रणनीतिक साझेदारी में बदलने से द्विपक्षीय संबंध तेजी से आगे बढ़ेगा।
    – भारत-इटली रक्षा औद्योगिक रोडमैप: रक्षा सहयोग और रक्षा उत्पादन तंत्र मजबूत होगा।
    – दुर्लभ खजिनों के क्षेत्र में सहयोग का एमओयू से खोज-खनन-उत्पादन में तेजी। आधुनिक तकनीक और निवेश में सहयोग बढ़ेगा।
    – ईडी-इटली के वित्तीय निगरानी विभाग में सहयोग से टैक्स संबंधी अपराधों, धनशोधन और आतंकवाद के खिलाफ फंडिंग पर मिलकर काम होगा।
    – भारत-इटली में 2027 को संस्कृति और पर्यटन वर्ष के रूप में मनाने का समझौता: दोनों देशों में सांस्कृतिक आदान-प्रदान और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
    – भारतीय नर्सों को काम के लिए इटली भेजने का समझौता: इससे भारतीय स्वास्थ्य क्षेत्र में रोजगार बढ़ेगा। दुनिया में भारतीय कार्यबल की गुणवत्ता को मान्यता।
    – गुजरात के लोथल में नेशनल मेरीटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स निर्माण के एमओयू से भारतीय सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण होगा।
    – उच्च शिक्षा और शोध में सहयोग का रोडमैप: शोध की गुणवत्ता, औद्योगिक संपर्क और आधुनिक शिक्षण का तंत्र विकसित होगा। क्षमता निर्माण होगा।
    – समुद्री परिवहन क्षेत्र में सहयोग के लिए एमओयू से समुद्री बुनियादी ढांचा मजबूत होगा।


    रणनीतिक साझेदारी को मिला नया आयाम

    दोनों देशों ने संयुक्त रणनीतिक कार्य योजना 2025-29 की प्रगति की समीक्षा की और व्यापार, निवेश, तकनीक, रक्षा, ब्लू इकोनॉमी, कनेक्टिविटी, शिक्षा और जन-से-जन संबंधों जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई। इटली सरकार ने भी इस यात्रा को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि भारत और इटली के संबंध अब अपने सबसे उच्च स्तर पर पहुंच चुके हैं।


    MEA ने बताया यात्रा को सफल

    विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी इस दौरे को बेहद सफल बताया। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी की 5 देशों की यात्रा के अंतिम चरण में इटली में कई महत्वपूर्ण परिणाम सामने आए हैं। पीएम मोदी ने 15 से 20 मई तक संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली का दौरा किया। इस दौरान भारत ने कई देशों के साथ अपने आर्थिक, रणनीतिक और तकनीकी संबंधों को मजबूत किया।


    भारत और इटली के बीच का द्विपक्षीय व्यापार

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इससे पहले जून 2024 में ग्रुप ऑफ सेवन (G7) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए इटली गए थे। अब उनका यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब भारत और इटली के बीच द्विपक्षीय संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं।

    विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों देश संयुक्त रणनीतिक कार्य योजना 2025-2029 को सक्रिय रूप से लागू कर रहे हैं। इस व्यापक रोडमैप के तहत व्यापार, निवेश, रक्षा और सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, नवाचार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और लोगों के बीच संपर्क जैसे कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया जा रहा है।

    मंत्रालय ने बताया कि वर्ष 2025 में भारत-इटली द्विपक्षीय व्यापार 16.77 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है। वहीं अप्रैल 2000 से सितंबर 2025 के बीच इटली से भारत में 3.66 अरब अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) दर्ज किया गया। दोनों देश रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।


    यात्रा के दौरान मिले कई सम्मान

    इसी यात्रा क्रम में नॉर्वे दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ग्रैंड क्रॉस ऑफ द रॉयल ऑर्डर ऑफ मेरिट’ से सम्मानित किया गया, जो उनका 32वां अंतरराष्ट्रीय सम्मान है। नॉर्वे में उन्होंने भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में भी भाग लिया। इसके अलावा स्वीडन में उन्हें ‘रॉयल ऑर्डर ऑफ द पोलर स्टार’ से सम्मानित किया गया और दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करते हुए रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने पर सहमति जताई।

  • कारों की सेल में तेजी… नवंबर में मजबूत रही मोटर वाहनों की खुदरा बिक्री

    कारों की सेल में तेजी… नवंबर में मजबूत रही मोटर वाहनों की खुदरा बिक्री


    नई दिल्ली।
    देश में मोटर वाहनों (Motor Vehicles) की खुदरा बिक्री (Retail Sales) नवंबर 2025 (November 2025) में भी मजबूत बनी रही। आमतौर पर त्योहारों के बाद बाजार में थोड़ी सुस्ती आ जाती है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (Federation of Automobile Dealers Association) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर में कुल वाहन पंजीकरण 2% बढ़कर 33,00,832 इकाई हो गया, जबकि पिछले साल यह संख्या 32,31,526 थी। यानी वाहन खरीदने का उत्साह त्योहारों के बाद भी जारी रहा।

    पैसेंजर वाहन, तिपहिया वाहन, कॉमर्शियल वाहन और ट्रैक्टर श्रेणियों में बेहतर मांग ने इस वृद्धि को आगे बढ़ाया। फाडा अध्यक्ष सी.एस. विग्नेश्वर ने कहा कि लोग त्योहारों के बाद भी वाहन खरीदते रहे, और इस वजह से पिछले साल की तुलना में बिक्री तेज बनी रही। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले साल दिवाली और धनतेरस अक्टूबर में आ गए थे, इसलिए नवंबर 2024 में बिक्री अचानक बहुत ज्यादा थी। इसके बावजूद इस साल नवंबर ने उस उच्च आधार पर भी अच्छी बढ़त दिखाई है।


    रफ्तार के पीछे कई बड़े कारण

    -सरकार द्वारा जीएसटी दरों में कटौती
    -ऑटो कंपनियों और डीलरों द्वारा मिल रहे अच्छे ऑफर और छूट
    -बड़े मॉडलों, खासकर एसयूवी की बेहतर उपलब्धता
    -शादी-विवाह के सीजन की मजबूत मांग


    किस-किस वाहन में कितनी बिक्री हुई?

    1. यात्री वाहन यानी कार-एसयूवी आदि की बिक्री 20% बढ़कर 3,94,152 इकाई हो गई।


    बिक्री बढ़ने की वजहें

    -जीएसटी में कटौती के बाद कीमतें कम होना
    -एसयूवी और कॉम्पैक्ट एसयूवी की जबरदस्त मांग
    -पहले से बुक किए गए मॉडलों की तेज डिलीवरी
    -शादी के सीजन में कार खरीदारी का बढ़ता रुझान

    2. दोपहिया वाहन का पंजीकरण नवंबर में 3% घटकर 25,46,184 इकाई रहा। हालांकि, एक सकारात्मक बात यह रही कि कुल वाहनों का स्टॉक घटकर 44-46 दिन रह गया है। पहले यह 53-55 दिनों का था। इससे पता चलता है कि डीलरशिप पर गाड़ियां ज्यादा समय तक नहीं अटक रहीं-यानी मांग बेहतर है।

    बिक्री घटने की वजहें

    -ग्रामीण इलाकों में थोड़ी कमजोर मांग
    -फाइनेंसिंग में सख्ती का असर शामिल है।

    3. वाणिज्यिक वाहन (ट्रक-बस) की बिक्री 20% बढ़कर 94,935 इकाई हुई।
    बिक्री बढ़ने की वजहें:
    -सड़कों और इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कार्यों में तेजी
    -माल ढुलाई की बढ़ती जरूरत
    -सरकार की विभिन्न परियोजनाओं में नई मांग
    -जीएसटी सुधारों से लॉजिस्टिक सेक्टर को मिला फायदा

    4. तिपहिया वाहनों की बिक्री 24% बढ़कर 1,33,951 इकाई हो गई। ई-रिक्शा से लेकर बड़े तिपहिया वाहनों तक, सभी श्रेणियों में मांग रही।
    5. ट्रैक्टर का पंजीकरण नवंबर में 57% बढ़कर 1,26,033 इकाई पहुंच गया।
    इसकी वजहें
    -रबी फसल की तैयारी
    -किसानों के पास अच्छी आय
    -ग्रामीण बाजार में अपेक्षा से ज्यादा सुधार
    -ट्रैक्टर बाजार ने सबसे अच्छा प्रदर्शन किया।


    आगे भी तेजी की उम्मीद

    कुल मिलाकर, नवंबर का महीना वाहन बाजार के लिए उम्मीद से ज्यादा अच्छा रहा। यात्री वाहन, तिपहिया वाहन, वाणिज्यिक वाहन और ट्रैक्टरों ने तेजी दिखाई, जबकि दोपहिया सेगमेंट थोड़ा कमजोर रहा। लेकिन समग्र रूप से, ऑटो सेक्टर में सकारात्मक रुझान जारी है और आने वाले महीने भी मजबूत रहने की उम्मीद है। फाडा का मानना है कि अगले तीन महीनों में भी वाहन बिक्री अच्छी रहने की उम्मीद है।


    इस उम्मीद की वजहें

    -जीएसटी 2.0 सुधारों का असर
    -ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुधार
    -जनवरी 2026 में संभावित कीमत बढ़ोतरी से पहले खरीदारी
    -नए मॉडल लॉन्च
    -शादी-विवाह का लंबा सीजन