Tag: Student Protest

  • भोपाल के सरकारी स्कूल में छात्रों का हंगामा, टीचर पर पैसे मांगने और मारपीट के आरोप, कार्रवाई के बाद खत्म हुआ प्रदर्शन

    भोपाल के सरकारी स्कूल में छात्रों का हंगामा, टीचर पर पैसे मांगने और मारपीट के आरोप, कार्रवाई के बाद खत्म हुआ प्रदर्शन


    नई दिल्ली। भोपाल के मिसरोद इलाके में सरकारी स्कूल की एक टीचर के खिलाफ छात्र छात्राओं का विरोध प्रदर्शन चर्चा में है। विद्यार्थियों ने टीचर पर गंभीर आरोप लगाते हुए करीब चार घंटे तक सड़क पर बैठकर प्रदर्शन किया। छात्रों का कहना था कि उनसे पढ़ाई कराने के बजाय घर के काम कराए जाते हैं और ऐसा नहीं करने पर फेल करने की धमकी दी जाती है। विद्यार्थियों ने प्रोजेक्ट के नाम पर पैसे मांगने और विरोध करने पर मारपीट करने जैसे आरोप भी लगाए हैं। मामला बढ़ने के बाद शिक्षा विभाग ने संबंधित टीचर का ट्रांसफर कर दिया है और विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।

    यह मामला मिसरोद स्थित नवीन हायर सेकंडरी स्कूल का है। सोमवार को बड़ी संख्या में छात्र छात्राएं स्कूल के बाहर सड़क पर बैठ गए। प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों ने हाथों में पोस्टर लेकर टीचर के खिलाफ नारे लगाए। सूचना मिलने पर मिसरोद थाने के प्रभारी विमलेश कुमार राय मौके पर पहुंचे। उन्होंने स्कूल के प्राचार्य के साथ मिलकर विद्यार्थियों को समझाने की कोशिश की लेकिन छात्र अपनी मांग पर अड़े रहे। उनका कहना था कि आरोपी टीचर को स्कूल से हटाए जाने के बाद ही प्रदर्शन समाप्त किया जाएगा।

    बताया गया कि 11वीं कक्षा के गणित और जीव विज्ञान विषय के विद्यार्थियों ने इससे पहले 3 अक्टूबर को प्राचार्य को लिखित शिकायत दी थी। छात्रों ने आरोप लगाया कि यूपीएससी और अन्य भर्ती परीक्षाओं के दौरान उनसे बेंच लगाने सफाई करने और रोल नंबर लिखने जैसे काम कराए जाते हैं। विद्यार्थियों का यह भी कहना था कि कई बार उन्हें रविवार को भी स्कूल बुलाया जाता है। छात्रों ने कहा कि वे पढ़ाई करने के लिए स्कूल आते हैं और उनसे कर्मचारियों की तरह काम नहीं कराया जाना चाहिए।

    विद्यार्थियों ने प्रोजेक्ट के नाम पर पैसे मांगने का आरोप भी लगाया। शिकायत में दावा किया गया कि हर महीने प्रोजेक्ट के नाम पर 2500 रुपये मांगे जाते हैं। छात्रों के अनुसार पैसे नहीं देने पर पढ़ाई को लेकर दबाव बनाया जाता है। उनका आरोप है कि इसी तरह की स्थिति के कारण कुछ विद्यार्थियों ने विज्ञान विषय तक छोड़ दिया। प्रदर्शनकारी छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि टीचर क्लास में पढ़ाने के बजाय मोबाइल में व्यस्त रहती हैं और सीनियर छात्रों के साथ मारपीट की जाती है।

    इस मामले में छात्रों ने टीचर से एक विद्यार्थी की कथित बातचीत का ऑडियो भी सुनाया। इसमें पास या फेल कराने अभिभावकों से बातचीत और पैसे खर्च होने जैसी बातें सुनाई देने का दावा किया गया। हालांकि ऑडियो में आवाज किसकी है और बातचीत किस वास्तविक संदर्भ में हुई थी इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए इन आरोपों की जांच के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

    दूसरी ओर टीचर बबीता कुशवाह ने छात्रों के आरोपों को गलत बताया है। उनका कहना है कि वह वर्ष 1999 से अध्यापन कर रही हैं और उनके पास लंबे समय का शिक्षण अनुभव है। उन्होंने कहा कि अच्छे परिणाम के लिए वह विद्यार्थियों के साथ सख्ती करती हैं लेकिन पैसे लेकर पास कराने या फेल करने का आरोप पूरी तरह गलत है।

    टीचर ने छात्रों से सफाई कराने के आरोप से भी इनकार किया। उनका कहना है कि विद्यार्थियों को केवल अपना बैग साफ रखने के लिए कपड़ा रखने के लिए कहा जाता है। प्रैक्टिकल के दौरान इंस्ट्रूमेंट को व्यवस्थित करना और उनकी सफाई करना पढ़ाई की प्रक्रिया का हिस्सा है।

    मामले में जिला शिक्षा अधिकारी अभिनव आर्य ने कहा कि विद्यार्थियों की शिकायत के आधार पर बबीता कुशवाह का ट्रांसफर बागरोदा हायर सेकेंडरी स्कूल कर दिया गया है। उनके खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू की जा रही है। जांच के बाद सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

    नवीन हायर सेकेंडरी स्कूल की स्थापना वर्ष 1962 में हुई थी और यहां करीब 37 लोगों का स्टाफ बताया गया है। बबीता कुशवाह वर्ष 2010 से इस स्कूल में पढ़ा रही थीं। फिलहाल ट्रांसफर और जांच की कार्रवाई के बाद छात्रों का प्रदर्शन खत्म हो गया है। अब पूरे मामले में विभागीय जांच की रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी क्योंकि छात्रों और टीचर की ओर से आरोपों को लेकर अलग अलग दावे सामने आए हैं।

  • 150 छात्राएं सड़क पर क्यों उतरीं? बड़वानी गर्ल्स हॉस्टल में पानी से लेकर भोजन और सुरक्षा तक उठे बड़े सवाल

    150 छात्राएं सड़क पर क्यों उतरीं? बड़वानी गर्ल्स हॉस्टल में पानी से लेकर भोजन और सुरक्षा तक उठे बड़े सवाल


    बड़वानी  । बड़वानी के शासकीय संयुक्त बालिका छात्रावास में रहने वाली करीब 150 छात्राओं का शनिवार को गुस्सा सड़क पर नजर आया। छात्रावास में पानी भोजन सफाई और सुरक्षा से जुड़ी परेशानियों को लेकर छात्राएं हॉस्टल से बाहर निकलीं और पैदल मार्च करते हुए कलेक्टर कार्यालय पहुंचीं। यहां उन्होंने अधिकारियों के सामने अपनी समस्याएं रखीं और व्यवस्थाओं में सुधार की मांग की। छात्राओं का कहना था कि लंबे समय से परेशानियों की शिकायत की जा रही थी लेकिन जब समाधान नहीं हुआ तो उन्हें खुद सामने आकर अपनी बात रखनी पड़ी।

    छात्राओं ने सबसे बड़ी समस्या पानी की बताई। उनका दावा है कि छात्रावास में लगे बोरवेल और नलों से पूरे दिन में करीब एक घंटे ही पानी मिल पाता है। करीब 150 छात्राओं के लिए इतनी कम अवधि में मिलने वाला पानी पीने और दैनिक जरूरतों के लिए पर्याप्त नहीं है। पानी की कमी के कारण उन्हें रोजमर्रा के कामों में परेशानी का सामना करना पड़ता है।

    भोजन को लेकर भी छात्राओं ने गंभीर शिकायतें सामने रखीं। उनका कहना है कि एक दिन सब्जी में नमक ज्यादा होने की शिकायत की गई थी। इसके बाद कथित तौर पर अगले दिन खाने में नमक ही नहीं डाला गया। छात्राओं ने हॉस्टल में निर्धारित मेन्यू के अनुसार भोजन नहीं मिलने का भी आरोप लगाया। उनका कहना है कि हरी सब्जियों में कई बार कीड़े मिलने की शिकायत के बाद उन्हें मेन्यू से ही हटा दिया गया।

    छात्राओं ने यह भी दावा किया कि सिकल सेल बीमारी से पीड़ित दो छात्राओं की तबीयत भोजन की गुणवत्ता के कारण खराब हुई और उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। छात्राओं ने अधिकारियों से भोजन की गुणवत्ता की जांच कराने और निर्धारित मेन्यू के अनुसार खाना उपलब्ध कराने की मांग की।

    हॉस्टल की दूसरी व्यवस्थाओं को लेकर भी छात्राओं ने नाराजगी जताई। उनके मुताबिक पानी का कूलर गीजर और सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीन खराब पड़ी है। परिसर में जगह जगह कचरा जमा होने की शिकायत भी की गई। छात्राओं ने हॉस्टल परिसर में सांप आने की बात कहते हुए सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। उनका कहना है कि कचरे और आसपास की स्थिति के कारण यह समस्या बार बार सामने आती है।

    प्रदर्शन की जानकारी मिलने के बाद सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग रंजना सिंह छात्राओं से मिलने पहुंचीं। उन्होंने छात्राओं से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं और समाधान का भरोसा दिया। अधिकारी के अनुसार छात्रावास भवन का निर्माण वर्ष 2023 में हुआ था जबकि छात्राओं का रहना वर्ष 2025 से शुरू हुआ। भवन में निर्माण से जुड़ी कुछ कमियां सामने आई हैं जिन्हें दूर करने के लिए PIU को पत्र लिखा जाएगा।

    पानी की समस्या को लेकर अधिकारी ने बताया कि फिलहाल बोरवेल से सीमित मात्रा में पानी उपलब्ध हो रहा है। नगर पालिका की पाइपलाइन से पानी उपलब्ध कराने के लिए आवेदन किया गया है। तब तक छात्रावास में टैंकर के माध्यम से पानी पहुंचाने की व्यवस्था की जाएगी। वहीं सांप और कचरे की समस्या को छात्रावास के पास स्थित ट्रेंचिंग ग्राउंड से भी जोड़ा गया है।

    प्रशासन की ओर से छात्राओं को वापस छात्रावास पहुंचाने के लिए वाहन उपलब्ध कराया गया था लेकिन छात्राओं ने वाहन लेने से इनकार कर दिया। इसके बाद वे पैदल ही वापस छात्रावास चली गईं। अब छात्राओं की शिकायतों के बाद पानी भोजन सफाई सुरक्षा और भवन की व्यवस्थाओं में सुधार के लिए प्रशासन की कार्रवाई पर नजर रहेगी।

  • Gen Z के प्रदर्शन पर गजेंद्र पटेल का गंभीर आरोप: विदेशी ताकतें छात्रों को भड़का रहीं, बोले- मर्यादा में रखें अपनी मांगें

    Gen Z के प्रदर्शन पर गजेंद्र पटेल का गंभीर आरोप: विदेशी ताकतें छात्रों को भड़का रहीं, बोले- मर्यादा में रखें अपनी मांगें


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश में छात्रों के प्रदर्शन को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है। बीजेपी के नवनियुक्त राष्ट्रीय महासचिव और खरगोन-बड़वानी सांसद गजेंद्र सिंह पटेल ने छात्र आंदोलनों के पीछे विदेशी ताकतों के हस्तक्षेप का दावा किया है। पटेल ने कहा कि सोशल मीडिया के जरिए एक विचार तेजी से फैलाया जाता है और उसके बाद Gen Z के युवा उससे जुड़ जाते हैं। उनके मुताबिक इस पूरे घटनाक्रम को देश के भीतर पर्दे के पीछे से कुछ बाहरी तत्वों का समर्थन मिल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसी ताकतें देश को बांटने और युवाओं के बीच नफरत फैलाने की कोशिश कर रही हैं।

    इंदौर में पत्रकारों से चर्चा के दौरान गजेंद्र सिंह पटेल से देश के अलग अलग हिस्सों में हो रहे छात्र प्रदर्शनों को लेकर सवाल पूछा गया था। इसी दौरान उन्होंने कहा कि पहले छात्र आंदोलन सकारात्मक सोच और रचनात्मक मुद्दों के साथ आगे बढ़ते थे। राजनीतिक नेताओं के प्रति भी भाषा और व्यवहार में एक तरह का सम्मान दिखाई देता था लेकिन अब छात्र आंदोलनों का स्वरूप और तरीका बदलता नजर आ रहा है। पटेल ने युवाओं से अपील की कि वे अपनी समस्याओं और मांगों को मर्यादा के दायरे में रखते हुए सरकार के सामने रखें।

    पटेल का यह बयान ऐसे समय आया है जब उनके ही संसदीय क्षेत्र के बड़वानी जिले में एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय के करीब 200 छात्रों ने शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर लगभग 25 किलोमीटर तक मार्च किया। छात्रों की शिकायत थी कि शिक्षकों ने उनके साथ कथित तौर पर जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया और अभद्र व्यवहार किया। छात्रों के इस विरोध प्रदर्शन ने स्थानीय स्तर पर प्रशासन और राजनीतिक नेतृत्व का ध्यान खींचा है।

    इस प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए पटेल ने कहा कि स्कूल में किसी शिक्षक से छोटी मोटी गलती हो सकती है लेकिन बच्चों को इस तरह सड़कों पर नहीं उतरना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार और संगठन बच्चों के साथ हैं और उनकी समस्याओं का समाधान निश्चित रूप से किया जाएगा। पटेल ने यह भी दावा किया कि पिछले एक साल से सक्रिय कुछ संगठनों ने सरकारी स्कूल के छात्रों को गुमराह किया और उन्हें प्रदर्शन के लिए उकसाने का काम किया है।

    बीजेपी नेता ने युवाओं को देश की ताकत बताते हुए कहा कि युवा समझदार हैं और उन्हें यह समझना चाहिए कि उनके आंदोलन का इस्तेमाल कोई बाहरी ताकत अपने हित के लिए न करे। उन्होंने कहा कि छात्रों की वास्तविक समस्याओं पर सरकार गंभीरता से काम कर रही है और शिकायतों के समाधान के लिए संवाद का रास्ता सबसे बेहतर है।

    बातचीत के दौरान पटेल ने इथेनॉल उत्पादन को लेकर भी सरकार की नीतियों का बचाव किया। उन्होंने दावा किया कि देश इथेनॉल उत्पादन में आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इससे रोजगार के अवसर बढ़ने के साथ ईंधन क्षेत्र को भी फायदा होगा। चीनी की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी को उन्होंने कुछ समय की समस्या बताते हुए विपक्ष पर लोगों को गलत जानकारी के जरिए गुमराह करने का आरोप लगाया। छात्र आंदोलनों से लेकर आर्थिक मुद्दों तक पटेल के बयानों ने प्रदेश की सियासत में नई बहस छेड़ दी है।

  • स्कूल की सड़क से खराब खाना और शिक्षकों की कमी तक, बच्चों के प्रदर्शन पर अभिजीत दिपके बोले- हिम्मत को सलाम

    स्कूल की सड़क से खराब खाना और शिक्षकों की कमी तक, बच्चों के प्रदर्शन पर अभिजीत दिपके बोले- हिम्मत को सलाम


    नई दिल्ली। देश की नई पीढ़ी अब सिर्फ पढ़ाई और भविष्य की चिंता तक सीमित नहीं रहना चाहती बल्कि अपने आसपास की समस्याओं को लेकर भी आवाज उठाने लगी है। उत्तर प्रदेश के हमीरपुर उत्तराखंड के खटीमा और राजस्थान के बांसवाड़ा में स्कूली बच्चों की ओर से किए गए विरोध प्रदर्शन ने इसी बदलती तस्वीर की ओर इशारा किया है। इन तीनों जगहों पर बच्चों ने सड़क स्कूल की व्यवस्था भोजन पानी और शिक्षकों की कमी जैसे मुद्दों को लेकर अपनी आवाज बुलंद की। बच्चों के इन प्रदर्शनों पर कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। उन्होंने अपने भविष्य और बेहतर सुविधाओं के लिए आवाज उठाने वाले बच्चों की हिम्मत को सलाम किया है।
    हमीरपुर में बच्चों की सबसे बड़ी मांग स्कूल तक पक्की सड़क बनाने की थी। चंदूपुर के गंगवा का डेरा और बच्ची का डेरा क्षेत्र के छात्र लंबे समय से खराब रास्ते की परेशानी झेल रहे थे। बारिश के दौरान रास्ते में कीचड़ भर जाने से स्कूल पहुंचना मुश्किल और जोखिम भरा हो जाता था। इसी समस्या को लेकर छात्र ग्रामीणों के साथ हाथों में तिरंगा लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे। बच्चों ने करीब पांच किलोमीटर की पैदल यात्रा की और जिलाधिकारी कार्यालय के मुख्य गेट पर धरना दिया। प्रशासन की ओर से बताया गया कि सड़क निर्माण के लिए वन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र मिल चुका है और करीब एक करोड़ 81 लाख रुपये की लागत से पक्की सड़क का निर्माण कराया जाएगा।

    इसी तरह उत्तराखंड के खटीमा में सरकारी एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय के करीब 400 छात्रों ने स्कूल की व्यवस्थाओं को लेकर विरोध जताया। छात्रों की शिकायत खराब भोजन दूषित पानी और शौचालयों में गंदगी को लेकर थी। बड़ी संख्या में छात्रों के धरने के बाद मामला मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तक पहुंचा। इसके बाद स्कूल की प्रिंसिपल भारती यादव को हटाने के निर्देश दिए गए। इस घटनाक्रम ने यह दिखाया कि छात्र अपनी रोजमर्रा की बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी अब खुलकर सवाल पूछ रहे हैं।

    राजस्थान के बांसवाड़ा में भी छात्रों ने शिक्षकों की कमी को लेकर स्कूल के मुख्य गेट पर तालाबंदी कर दी। कुशलगढ़ के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बियापाड़ा में शिक्षकों के खाली पदों के कारण पढ़ाई प्रभावित हो रही थी। छात्रों के विरोध को स्थानीय लोगों का भी समर्थन मिला। प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उच्च अधिकारियों से बातचीत की और छह शिक्षकों की डेप्युटेशन के आदेश जारी किए। इसके बाद छात्रों ने स्कूल का ताला खोल दिया।

    इन तीनों घटनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए अभिजीत दिपके ने कहा कि अपने भविष्य के लिए लड़ रहे इन बच्चों को उनका सलाम है। उन्होंने खास तौर पर सवाल उठाया कि आजादी के करीब 80 साल बाद भी बच्चों को अपने स्कूल तक सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के लिए आवाज क्यों उठानी पड़ रही है। उन्होंने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर ग्रामीण भारत के बच्चों और स्कूलों के लिए काम करने का संकल्प लेने की अपील भी की।

    इन घटनाओं को व्यापक रूप से देखें तो यह केवल तीन स्थानीय विरोध प्रदर्शनों की कहानी नहीं है बल्कि नई पीढ़ी में बढ़ती जागरूकता का संकेत भी है। सड़क हो या स्कूल में शिक्षक भोजन हो या स्वच्छता बच्चे अब अपनी समस्याओं को सामने रखने और प्रशासन से जवाब मांगने का साहस दिखा रहे हैं। इनकी मांगें बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी हैं और यही वजह है कि इन प्रदर्शनों ने व्यापक ध्यान खींचा है। तीन अलग-अलग राज्यों में सामने आई इन घटनाओं ने यह संदेश जरूर दिया है कि नई पीढ़ी अपने अधिकारों और बेहतर भविष्य को लेकर पहले से कहीं अधिक मुखर हो रही है।

  • कॉकरोच पार्टी ने NEET आंदोलन किया खत्म, कहा-प्रदर्शनकारी अब अपने घर लौट जाएं

    कॉकरोच पार्टी ने NEET आंदोलन किया खत्म, कहा-प्रदर्शनकारी अब अपने घर लौट जाएं


    नई दिल्ली। नई दिल्ली में कई दिनों से चल रहे आंदोलन को लेकर शनिवार को महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया जब कॉकरोच जनता पार्टी ने केंद्र सरकार के साथ हुई वार्ता के बाद अपना आंदोलन समाप्त करने की घोषणा कर दी। संगठन ने कहा कि सरकार के साथ कई दौर की बातचीत के बाद उनकी प्रमुख मांगों पर सकारात्मक सहमति बनी है। इसी भरोसे के आधार पर जंतर मंतर पर चल रहा प्रदर्शन समाप्त करने का फैसला लिया गया है।

    पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने बताया कि सरकारी प्रतिनिधिमंडल के साथ तीन चरणों में विस्तृत बातचीत हुई। उन्होंने कहा कि संगठन की तीन प्रमुख मांगें थीं जिनमें तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा प्रदर्शनकारियों और आंदोलन के आयोजकों के खिलाफ दर्ज मामलों और एफआईआर को वापस लेना तथा भविष्य में आंदोलन से जुड़े लोगों के खिलाफ किसी भी प्रकार की नई कानूनी कार्रवाई नहीं किए जाने की गारंटी शामिल थी। उनके अनुसार सरकार ने इन मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाया है।

    संगठन ने यह भी दावा किया कि उसकी एक अन्य प्रमुख मांग उन परिवारों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने से जुड़ी थी जिन्होंने कथित रूप से नीट विवाद के दौरान अपने परिजनों को खोया। पार्टी का कहना है कि इस विषय पर भी सरकार के साथ चर्चा हुई और संबंधित मुद्दों पर विचार का आश्वासन मिला। हालांकि इस संबंध में सरकार की ओर से आधिकारिक घोषणा का इंतजार किया जा रहा है।

    कॉकरोच जनता पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने बताया कि सरकार ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों की जानकारी साझा करने का भरोसा दिया है। उनके अनुसार दिल्ली सहित विभिन्न राज्यों में दर्ज एफआईआर की प्रतियां अगले कुछ दिनों में संगठन को उपलब्ध कराई जाएंगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने यह भी आश्वासन दिया है कि तय प्रक्रिया के तहत इन मामलों को वापस लेने की दिशा में कार्रवाई की जाएगी।

    सौरव दास ने कहा कि संगठन सरकार की नीयत पर विश्वास जताते हुए आंदोलन समाप्त कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह निर्णय इस समझ के साथ लिया गया है कि सरकार निर्धारित समय सीमा के भीतर अपने आश्वासनों को पूरा करेगी। यदि तय समय में आवश्यक कार्रवाई होती है तो यह संवाद और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की सफलता मानी जाएगी।

    उन्होंने यह भी कहा कि आंदोलन का उद्देश्य केवल अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाना था और अब जब सरकार ने बातचीत के जरिए समाधान का रास्ता अपनाया है तो संगठन भी सकारात्मक रुख अपनाते हुए धरना समाप्त कर रहा है। पार्टी के नेताओं ने उम्मीद जताई कि आने वाले दिनों में सभी लंबित मुद्दों पर औपचारिक कार्रवाई पूरी हो जाएगी और आंदोलन से जुड़े लोगों को राहत मिलेगी।

    इस पूरे घटनाक्रम के बाद जंतर मंतर पर कई दिनों से चल रहा प्रदर्शन समाप्त हो गया। संगठन के कार्यकर्ताओं ने आंदोलन वापस लेने की घोषणा का स्वागत किया और कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में बातचीत के जरिए समाधान निकलना सबसे बेहतर रास्ता है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार अपने दिए गए आश्वासनों पर तय समय के भीतर क्या कार्रवाई करती है।

  • 'विनीत जोशी का ट्रांसफर सजा नहीं, जवाबदेही तय करे सरकार', NEET विवाद पर विजेता दहिया का हमला

    'विनीत जोशी का ट्रांसफर सजा नहीं, जवाबदेही तय करे सरकार', NEET विवाद पर विजेता दहिया का हमला


    नई दिल्ली। NEET पेपर लीक विवाद को लेकर देशभर में जारी छात्र आंदोलन के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की पूर्व प्रवक्ता विजेता दहिया ने परीक्षा प्रणाली की जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि किसी अधिकारी का सिर्फ तबादला कर देना समस्या का समाधान नहीं है और न ही इसे सजा माना जा सकता है। उनका कहना है कि जब किसी विभाग में गंभीर लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदारी तय होना सबसे जरूरी है।

    आईएएनएस से बातचीत में विजेता दहिया ने कहा कि NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र महीनों नहीं, बल्कि कई बार वर्षों तक दिन-रात मेहनत करते हैं। परीक्षा के बाद सफलता की उम्मीद लेकर बैठे छात्रों को जब यह पता चलता है कि पेपर लीक जैसी घटनाओं के कारण पूरी परीक्षा प्रक्रिया सवालों के घेरे में आ गई है और दोबारा परीक्षा देनी पड़ सकती है, तो इसका उनके मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ता है। उन्होंने कहा कि यही वजह है कि कई लोग इन घटनाओं से जुड़ी छात्र मौतों को केवल आत्महत्या नहीं, बल्कि व्यवस्था की विफलता का परिणाम मानते हैं।

    दहिया ने दावा किया कि छात्र आंदोलन को लेकर सरकार और सीजेपी के प्रतिनिधियों के बीच सकारात्मक बातचीत हुई है। उनके अनुसार सरकार ने सिद्धांततः यह आश्वासन दिया है कि पेपर लीक प्रकरण से प्रभावित होकर जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने पर विचार किया जाएगा। इसके अलावा आंदोलनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने का भी भरोसा दिया गया है। हालांकि उन्होंने कहा कि आंदोलन की तीसरी और प्रमुख मांग शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तथा जिम्मेदारी तय करने की रही है।

    उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलन का उद्देश्य केवल विरोध प्रदर्शन करना नहीं, बल्कि परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुधार सुनिश्चित कराना है। उनका मानना है कि देश के लाखों छात्रों का भरोसा तभी लौटेगा, जब सरकार ठोस और प्रभावी कदम उठाएगी।

    विपक्षी दलों से फंडिंग मिलने के आरोपों को भी विजेता दहिया ने सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन पूरी तरह आम लोगों के सहयोग से चल रहा है। कई लोग अपनी क्षमता के अनुसार भोजन, पंखे, कूलर, कालीन और अन्य आवश्यक सामान उपलब्ध करा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई बार इतनी अधिक सहायता मिल जाती है कि अतिरिक्त सहयोग लेने से भी मना करना पड़ता है। उनके अनुसार यह किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि जनता और छात्रों का आंदोलन है।

    विजेता दहिया ने कहा कि वे अब सीजेपी की आधिकारिक प्रवक्ता नहीं हैं, लेकिन एक समर्थक के रूप में आंदोलन से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि शुरुआत से ही राजनीतिक दलों से अपील की गई थी कि यदि वे छात्रों का समर्थन करना चाहते हैं तो पार्टी के झंडों के बिना आंदोलन में शामिल हों। उन्होंने माना कि विभिन्न दलों के समर्थन से आंदोलन को मजबूती मिली है, लेकिन इसकी मूल भावना गैर-दलीय जन आंदोलन की ही है।

    उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी के तबादले का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि यदि किसी अधिकारी के कार्यकाल में इतनी बड़ी गड़बड़ी सामने आती है तो केवल विभाग बदल देना जवाबदेही तय करने के बराबर नहीं है। उनका कहना है कि वास्तविक सुधार तभी संभव होगा, जब जिम्मेदार लोगों के खिलाफ स्पष्ट कार्रवाई हो और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए मजबूत व्यवस्था बनाई जाए।

  • NEET विवाद पर बड़ा फैसला 36 दिन के आंदोलन के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने छोड़ा पद सरकार ने स्वीकारा इस्तीफा

    NEET विवाद पर बड़ा फैसला 36 दिन के आंदोलन के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने छोड़ा पद सरकार ने स्वीकारा इस्तीफा


    नई दिल्ली: देशभर में परीक्षा प्रणाली को लेकर उठे विवाद और दिल्ली के जंतर-मंतर पर 36 दिनों से जारी छात्र आंदोलन के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा राजनीतिक फैसला लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। लंबे समय से छात्र संगठन, विपक्षी दल और विभिन्न सामाजिक संगठन परीक्षा प्रणाली में कथित गड़बड़ियों को लेकर उनकी जवाबदेही तय करने और इस्तीफे की मांग कर रहे थे। सरकार के इस फैसले को आंदोलन की सबसे बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

    पिछले कई सप्ताह से राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर हजारों छात्र लगातार प्रदर्शन कर रहे थे। आंदोलन के दौरान सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की बातचीत भी हुई, लेकिन शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर सहमति नहीं बन सकी थी। आखिरकार सरकार ने बड़ा निर्णय लेते हुए धर्मेंद्र प्रधान को पद छोड़ने का निर्देश दिया और उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया।

    इस्तीफे की खबर सामने आते ही जंतर-मंतर पर मौजूद प्रदर्शनकारियों में उत्साह का माहौल बन गया। छात्रों ने नारेबाजी कर इसे लोकतांत्रिक संघर्ष और एकजुटता की जीत बताया। छात्र नेताओं का कहना है कि यह केवल पहला कदम है और अब सरकार को परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और व्यापक शिक्षा सुधारों के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।

    विपक्षी दलों ने भी इस घटनाक्रम को छात्रों और जनता की आवाज की जीत बताया है। विपक्ष का दावा है कि संसद से लेकर सड़क तक लगातार बने जनदबाव और विरोध प्रदर्शनों के कारण सरकार को यह फैसला लेना पड़ा। विपक्षी नेताओं ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार और परीक्षा प्रणाली को अधिक विश्वसनीय बनाने की मांग दोहराई है।

    अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी किसे सौंपी जाएगी। राजनीतिक गलियारों में नए शिक्षा मंत्री के नाम को लेकर चर्चाएं तेज हैं। माना जा रहा है कि केंद्र सरकार जल्द ही नए शिक्षा मंत्री की घोषणा कर सकती है और शिक्षा सुधारों के लिए नई कार्ययोजना भी सामने ला सकती है।

    इस पूरे घटनाक्रम के बीच देशभर के छात्र और अभिभावक सरकार के अगले कदम पर नजर बनाए हुए हैं। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और तकनीक आधारित बनाने के लिए बड़े फैसले लिए जा सकते हैं।

  • पेपर लीक के खिलाफ MP में छात्रों का उबाल, इंदौर से श्योपुर तक सड़कों पर प्रदर्शन; पारदर्शी परीक्षा और कार्रवाई की मांग तेज

    पेपर लीक के खिलाफ MP में छात्रों का उबाल, इंदौर से श्योपुर तक सड़कों पर प्रदर्शन; पारदर्शी परीक्षा और कार्रवाई की मांग तेज


    इंदौर । प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों और दिल्ली में आंदोलनरत छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध की आग अब मध्य प्रदेश तक पहुंच गई है। प्रदेश के कई शहरों में छात्रों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया है। इंदौर के टंट्या भील चौराहे पर बड़ी संख्या में युवा धरने पर बैठे हैं। लगातार हो रही बारिश भी उनके हौसलों को डिगा नहीं सकी। प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि जब तक परीक्षा प्रणाली पूरी तरह पारदर्शी नहीं बनाई जाती और पेपर लीक के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

    इंदौर में छात्र हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर सरकार के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। उनका कहना है कि लाखों युवाओं की वर्षों की मेहनत पेपर लीक जैसी घटनाओं से बर्बाद हो जाती है। इसलिए केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस और प्रभावी कार्रवाई की जरूरत है। छात्रों ने निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था और दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग दोहराई।

    उधर, श्योपुर में भी छात्र संगठनों ने बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन किया। “समस्त छात्र शक्ति” के बैनर तले बड़ी संख्या में छात्र पीजी कॉलेज से रैली निकालकर कलेक्ट्रेट पहुंचे। करीब चार किलोमीटर लंबी इस पदयात्रा के दौरान छात्रों ने हाथों में पोस्टर और बैनर लेकर परीक्षा प्रणाली में सुधार तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाई। कलेक्ट्रेट पहुंचकर छात्रों ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा और लगभग दो घंटे तक धरना देकर नारेबाजी की।

    रीवा, उमरिया और बड़वानी सहित अन्य जिलों में भी छात्र अलग-अलग स्थानों पर धरने और प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका कहना है कि पेपर लीक जैसी घटनाओं ने प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्रों का आरोप है कि मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है, इसलिए सरकार को दोषियों के खिलाफ त्वरित और कठोर कार्रवाई करनी चाहिए।

    प्रदर्शनकारी युवाओं ने यह भी कहा कि केवल जांच बैठाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए मजबूत कानून, तकनीकी निगरानी और जवाबदेही तय करना जरूरी है। छात्रों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में ऐसे आंदोलन और व्यापक रूप ले सकते हैं।

    प्रदेशभर में बढ़ते छात्र आंदोलनों ने साफ कर दिया है कि युवाओं का धैर्य अब जवाब देने लगा है। प्रतियोगी परीक्षाओं में निष्पक्षता और पारदर्शिता की मांग को लेकर उठी यह आवाज अब सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं रही, बल्कि मध्य प्रदेश के कई जिलों में भी आंदोलन का रूप ले चुकी है।

  • 'बच्चों के जख्मों पर मरहम लगाइए, नमक-मिर्च नहीं': जंतर-मंतर घटनाक्रम पर अभिनेता रजा मुराद की भावुक अपील

    'बच्चों के जख्मों पर मरहम लगाइए, नमक-मिर्च नहीं': जंतर-मंतर घटनाक्रम पर अभिनेता रजा मुराद की भावुक अपील


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से जुड़े वरिष्ठ बॉलीवुड अभिनेता रजा मुराद ने जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो संदेश में उन्होंने आंदोलन कर रहे छात्रों के प्रति संवेदनशील रवैया अपनाने की अपील करते हुए कहा कि बच्चों के जख्मों पर “मरहम लगाइए, नमक-मिर्च नहीं।” उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा का विषय बन गया है।

    रजा मुराद ने अपने संदेश की शुरुआत जंतर-मंतर पर हुए घटनाक्रम पर दुख व्यक्त करते हुए की। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बल प्रयोग की खबरें और तस्वीरें बेहद पीड़ादायक हैं। उनके अनुसार, यदि युवा अपनी बात रखने के लिए सड़क पर उतरते हैं तो सबसे पहले उनकी बात सुनने और संवाद स्थापित करने की कोशिश की जानी चाहिए।

    उन्होंने परिवार का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि घर का कोई बच्चा नाराज हो जाए या अपनी शिकायत रखे तो उसे डांटने या कठोरता दिखाने के बजाय समझाया और मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि आंदोलन कर रहे छात्र भी इसी देश के बच्चे हैं और समाज का अभिन्न हिस्सा हैं। ऐसे में उनके साथ भी वही व्यवहार होना चाहिए, जो किसी परिवार के सदस्य के साथ किया जाता है।

    रजा मुराद ने कहा कि किसी भी घायल व्यक्ति के घाव पर मरहम लगाया जाता है, नमक नहीं छिड़का जाता। उनके मुताबिक यदि छात्रों की भावनाएं आहत हुई हैं तो जरूरत उन्हें और आहत करने की नहीं, बल्कि उनकी भावनाओं को समझने और भरोसा दिलाने की है। उन्होंने कहा कि युवाओं का विश्वास बनाए रखना किसी भी लोकतांत्रिक समाज की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है।

    अपने संदेश में उन्होंने यह भी कहा कि आज जिन युवाओं को हम प्रदर्शनकारी के रूप में देख रहे हैं, वही कल देश के विभिन्न क्षेत्रों में जिम्मेदार भूमिकाएं निभाएंगे और देश की बागडोर संभालेंगे। इसलिए उनके साथ संवाद, संवेदनशीलता और सम्मान का व्यवहार किया जाना चाहिए। उन्होंने जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों से आग्रह किया कि वे हालात को टकराव के बजाय बातचीत और विश्वास के जरिए संभालने का प्रयास करें।

    रजा मुराद ने अपने संदेश के अंत में कहा कि देश केवल सीमाओं से बना भूभाग नहीं, बल्कि एक बड़ा परिवार है और छात्र उसी परिवार का हिस्सा हैं। उन्होंने अपील की कि युवाओं को अकेला या उपेक्षित महसूस कराने के बजाय उनके साथ विश्वास का रिश्ता मजबूत किया जाए और उनकी चिंताओं को गंभीरता से सुना जाए।

    इससे पहले अभिनेता रघुवीर यादव भी छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई पर अपनी प्रतिक्रिया दे चुके हैं। अब रजा मुराद के बयान के बाद यह मुद्दा सोशल मीडिया और सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा बना हुआ है।

  • देशव्यापी छात्र प्रदर्शन से पहले हाई अलर्ट, गृह मंत्रालय सतर्क, सोशल मीडिया और एआई आधारित प्रचार सामग्री पर नजर

    देशव्यापी छात्र प्रदर्शन से पहले हाई अलर्ट, गृह मंत्रालय सतर्क, सोशल मीडिया और एआई आधारित प्रचार सामग्री पर नजर


    नई दिल्ली । देशव्यापी छात्र प्रदर्शन के आह्वान को देखते हुए केंद्र सरकार और सुरक्षा एजेंसियों ने सतर्कता बढ़ा दी है। गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की पुलिस को कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक तैयारियां करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों को भी किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा गया है। सुरक्षा एजेंसियां विशेष रूप से सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर प्रसारित हो रही सामग्री पर नजर बनाए हुए हैं।

    अधिकारियों के अनुसार, खुफिया एजेंसियों के पास ऐसे इनपुट हैं कि बड़े प्रदर्शनों के दौरान कुछ असामाजिक या बाहरी तत्व माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर सकते हैं। इसी आशंका को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई है। विशेष रूप से सीमावर्ती राज्यों और संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को समय रहते रोका जा सके।

    सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा एजेंसियां सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाली विभिन्न प्रकार की सामग्री की निगरानी कर रही हैं। इसमें एआई आधारित प्रचार सामग्री भी शामिल है, जिसकी प्रामाणिकता और संभावित प्रभाव का आकलन किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी ऑनलाइन सामग्री को लेकर कार्रवाई उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रियाओं के अनुसार की जाएगी।

    खुफिया एजेंसियों ने राज्यों को भीड़ प्रबंधन और संवेदनशील स्थानों की सुरक्षा मजबूत करने की सलाह दी है। राष्ट्रीय राजमार्गों, प्रमुख चौराहों और बड़े शहरों के महत्वपूर्ण इलाकों में निगरानी बढ़ाने के लिए सीसीटीवी नेटवर्क का प्रभावी उपयोग करने पर जोर दिया गया है। आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त पुलिस बल और केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की भी तैयारी रखी गई है।

    केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की इकाइयों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि यदि किसी राज्य से अतिरिक्त सुरक्षा बल की मांग आती है तो आवश्यक कार्रवाई तुरंत की जा सके। इसका उद्देश्य कानून व्यवस्था बनाए रखना और किसी भी आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना है।

    हाल के दिनों में विभिन्न राज्यों में छात्र संगठनों द्वारा आयोजित प्रदर्शनों में कई राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने भी भाग लिया था। कुछ स्थानों पर प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव तथा झड़प की घटनाएं भी सामने आई थीं। इन्हीं अनुभवों को ध्यान में रखते हुए इस बार सुरक्षा व्यवस्था पहले से अधिक मजबूत रखने की तैयारी की गई है।

    प्रशासन ने प्रदर्शन में शामिल होने वाले लोगों से शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने और कानून का पालन करने की अपील की है। साथ ही अफवाहों या अपुष्ट जानकारी पर भरोसा न करने और केवल आधिकारिक स्रोतों से प्राप्त सूचनाओं पर ही विश्वास करने की सलाह दी गई है।

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