Tag: Student Protest

  • शिकायतों पर नहीं हुई सुनवाई, सड़क पर उतरीं छात्राएं तो दौड़ी बिजली कंपनी

    शिकायतों पर नहीं हुई सुनवाई, सड़क पर उतरीं छात्राएं तो दौड़ी बिजली कंपनी


    शिवपुरी। शिवपुरी जिले के पिछोर कस्बे की पाल कॉलोनी में चार दिनों तक बिजली आपूर्ति ठप रहने से लोगों का सब्र आखिरकार जवाब दे गया। लगातार शिकायतों और अधिकारियों से गुहार लगाने के बावजूद जब समस्या का समाधान नहीं हुआ तो कॉलोनी की छात्राएं सड़क पर उतर आईं। गुरुवार रात बिजली वितरण कंपनी के कार्यालय के सामने उन्होंने चक्काजाम कर विरोध प्रदर्शन किया। करीब आधे घंटे तक मुख्य मार्ग पर यातायात प्रभावित रहा और जैसे ही मामला प्रशासन तक पहुंचा बिजली विभाग के अधिकारी और कर्मचारी हरकत में आ गए। इसके बाद टूटी हुई बिजली लाइन की मरम्मत का काम शुरू किया गया और बिजली बहाल करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई।

    जानकारी के अनुसार पाल कॉलोनी की घरेलू बिजली लाइन टूट जाने के कारण पूरे क्षेत्र की विद्युत आपूर्ति पिछले चार दिनों से बंद थी। लगातार अंधेरे में रहने से लोगों को पीने के पानी घरेलू कामकाज और गर्मी से राहत पाने जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा था। सबसे ज्यादा परेशानी उन छात्राओं को हो रही थी जो परीक्षा और नियमित पढ़ाई की तैयारी कर रही थीं। बिजली नहीं होने के कारण रात में पढ़ाई पूरी तरह प्रभावित हो रही थी और मोबाइल फोन तक चार्ज नहीं हो पा रहे थे जिससे ऑनलाइन पढ़ाई और जरूरी संपर्क भी बाधित हो रहे थे।

    प्रदर्शन में शामिल छात्राओं ने बताया कि वे समय पर बिजली बिल जमा करती हैं लेकिन इसके बावजूद विभाग उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रहा था। उन्होंने कई बार बिजली वितरण कंपनी के कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई और जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों को फोन भी किए लेकिन किसी ने समस्या का समाधान नहीं किया। उनका आरोप था कि कई अधिकारी फोन तक नहीं उठा रहे थे और शिकायतों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा था। इसी उपेक्षा से नाराज होकर छात्राओं ने सामूहिक रूप से विरोध प्रदर्शन करने का फैसला लिया।

    गुरुवार रात प्रियंका लोधी सहित दर्जनभर छात्राएं बिजली कंपनी के कार्यालय पहुंचीं और मुख्य मार्ग पर बैठकर चक्काजाम शुरू कर दिया। प्रदर्शन के दौरान छात्राओं ने साफ कहा कि जब तक बिजली आपूर्ति बहाल नहीं होगी तब तक वे सड़क से नहीं हटेंगी। अचानक हुए प्रदर्शन के कारण सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई और करीब आधे घंटे तक यातायात प्रभावित रहा। स्थानीय लोगों ने भी छात्राओं की मांगों का समर्थन करते हुए विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।

    स्थिति बिगड़ती देख प्रशासन भी सक्रिय हो गया। एसडीएम ममता शाक्य के निर्देश पर पुलिस और बिजली विभाग की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने छात्राओं से बातचीत कर उन्हें जल्द समस्या के समाधान का भरोसा दिलाया। इसके साथ ही बिजली कर्मचारियों ने तत्काल टूटी लाइन की मरम्मत का काम शुरू कर दिया। जैसे ही मरम्मत कार्य शुरू हुआ छात्राओं ने अपना प्रदर्शन समाप्त कर दिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि विभाग ने शुरुआती शिकायतों पर ही कार्रवाई कर दी होती तो लोगों को चार दिनों तक अंधेरे में नहीं रहना पड़ता और सड़क पर उतरकर विरोध करने की नौबत भी नहीं आती। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आम लोगों की समस्याओं का समाधान आखिर शिकायतों से होगा या फिर प्रदर्शन के बाद ही प्रशासन और विभाग जागेंगे।

  • NEET एग्जाम रद्द होने से बवाल, छात्रों की पीड़ा आई सामने-“डिप्रेशन का इलाज करने वाले खुद डिप्रेशन में

    NEET एग्जाम रद्द होने से बवाल, छात्रों की पीड़ा आई सामने-“डिप्रेशन का इलाज करने वाले खुद डिप्रेशन में


    नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 एक बार फिर विवादों में घिर गई है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने 3 मई को आयोजित परीक्षा को कथित अनियमितताओं और पेपर लीक की शिकायतों के बाद रद्द कर दोबारा कराने का फैसला लिया है। इस फैसले ने देशभर के करीब 22 लाख छात्रों को सीधे प्रभावित किया है।

    परीक्षा रद्द होने के बाद अभ्यर्थियों में गहरा आक्रोश और निराशा देखने को मिल रही है। कई छात्रों का कहना है कि वे पिछले कई वर्षों से केवल इसी परीक्षा की तैयारी में जुटे थे, लेकिन बार-बार होने वाले बदलाव और अनिश्चितता ने उनके मानसिक तनाव को और बढ़ा दिया है।

    इस पूरे मामले ने परीक्षा प्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्रों और अभिभावकों का कहना है कि जिस परीक्षा के जरिए उनकी योग्यता तय होती है, उसी को आयोजित करने वाली एजेंसी की पारदर्शिता पर बार-बार सवाल उठना चिंता का विषय है।

    NEET-UG जैसे महत्वपूर्ण परीक्षा को लेकर यह स्थिति छात्रों के भविष्य पर सीधा असर डाल रही है। अभ्यर्थियों का कहना है कि लगातार बदलते फैसलों और दोबारा परीक्षा के निर्णय से उनका मानसिक संतुलन प्रभावित हो रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं न केवल छात्रों के आत्मविश्वास को कमजोर करती हैं, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र पर भी सवाल खड़े करती हैं। अभ्यर्थी अब मांग कर रहे हैं कि परीक्षा प्रणाली को और अधिक मजबूत और पारदर्शी बनाया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने।

    फिलहाल, दोबारा परीक्षा की नई तारीख को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है, लेकिन छात्रों की नजरें अब आगे के आधिकारिक फैसले पर टिकी हैं।

  • झांसी बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी में लॉ छात्र से मारपीट का मामला: विरोध के बाद गार्ड सस्पेंड, छात्रों का धरना जारी

    झांसी बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी में लॉ छात्र से मारपीट का मामला: विरोध के बाद गार्ड सस्पेंड, छात्रों का धरना जारी



    नई दिल्ली। झांसी स्थित Bundelkhand University में लॉ छात्र के साथ हुई कथित मारपीट का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। घटना के बाद छात्रों के भारी विरोध और प्रदर्शन के बीच आरोपी सिक्योरिटी गार्ड को निलंबित कर दिया गया है।

    क्या है पूरा मामला?
    घटना विश्वविद्यालय के परीक्षा भवन में हुई बताई जा रही है, जहां लॉ विभाग के छात्र परीक्षा देने पहुंचे थे। इसी दौरान सुरक्षा गार्ड और छात्रों के बीच विवाद हो गया, जो बाद में मारपीट में बदल गया। घटना का वीडियो सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया।

    छात्रों का गुस्सा और प्रदर्शन
    आरोपी गार्ड पर कार्रवाई न होने से नाराज छात्रों ने सोमवार को  यूनिवर्सिटी के मुख्य गेट पर ताला लगा दिया। करीब 5 घंटे तक धरना प्रदर्शन किया। प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की  इस दौरान पुलिस और छात्रों के बीच हल्की झड़प भी हुई।

    गार्ड सस्पेंड, लेकिन छात्र अब भी नाराज
    बढ़ते विरोध के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने आरोपी सिक्योरिटी गार्ड अमित को निलंबित कर दिया है।लेकिन छात्र अभी भी मांग कर रहे हैं किअन्य जिम्मेदार गार्डों पर भी कार्रवाई होसार्वजनिक माफी दी जाए।सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव किया जाए।

    छात्र संगठनों का समर्थन
    इस आंदोलन को कई छात्र संगठनों का समर्थन मिला, जिनमें शामिल हैं:एबीवीपी एनएसयूआई
    समाजवादी छात्रसभाआजाद समाज पार्टी छात्र संगठन सभी ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।छात्रों ने चेतावनी दी है कि अगर 7 दिनों के भीतर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो क्रमिक अनशन शुरू किया जाएगा।आंदोलन और तेज किया जाएगाBundelkhand University में हुआ यह मामला अब सिर्फ एक मारपीट की घटना नहीं रहा, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है। फिलहाल छात्रों और प्रशासन के बीच बातचीत और तनाव दोनों जारी हैं।

  • जेएनयू में फिर टकराव की स्‍थ‍िति बनी, अभाविप का उग्र विरोध सामने आया

    जेएनयू में फिर टकराव की स्‍थ‍िति बनी, अभाविप का उग्र विरोध सामने आया


    नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) एक बार फिर छात्र राजनीति और प्रशासनिक फैसलों को लेकर विवाद के केंद्र में आ गया है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) की जेएनयू इकाई ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए निष्कासन और भारी जुर्माने की कार्रवाई को तानाशाही करार दिया है। संगठन का कहना है कि छात्र आंदोलनों को दबाने के लिए प्रशासन दमनकारी नीतियों का सहारा ले रहा है, जिसे किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

    अभाविप के अनुसार, हाल के दिनों में कई छात्र कार्यकर्ताओं के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है, जिसमें निष्कासन और आर्थिक दंड शामिल हैं। संगठन ने आरोप लगाया कि प्रशासन इन कदमों के जरिए सक्रिय छात्रों की आवाज दबाने की कोशिश कर रहा है। उनका कहना है कि इस तरह की कार्रवाई छात्रों के अधिकारों का उल्लंघन है, उनके शैक्षणिक भविष्य के साथ भी सीधा खिलवाड़ है।

    संगठन ने इन फैसलों को अलोकतांत्रिक बताते हुए कहा कि जुर्माने की राशि इतनी अधिक रखी गई है कि आम छात्र के लिए उसे भर पाना बेहद मुश्किल है। अभाविप जेएनयू अध्यक्ष मयंक पंचाल ने कहा कि कुछ मामलों में जुर्माना करीब 4,83,000 रुपये तक लगाया गया है, जो प्रशासनिक संवेदनहीनता को दर्शाता है। उनका कहना है कि यह कदम छात्रों को डराने और आंदोलन को कमजोर करने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।

    विरोध जताने के लिए अभाविप कार्यकर्ताओं ने परिसर में दमनकारी आदेशों की प्रतियां जलाकर अपना आक्रोश व्यक्त किया। संगठन ने इसे प्रतीकात्मक विरोध बताते हुए कहा कि यह उस व्यवस्था के खिलाफ चेतावनी है जो छात्रों के अधिकारों को कुचलने की कोशिश कर रही है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण है, लेकिन अन्याय के खिलाफ उनकी लड़ाई मजबूती से जारी रहेगी।

    इस पूरे विवाद के केंद्र में CPO (चीफ प्रॉक्टर ऑफिस) मैनुअल भी है, जिसे लेकर अभाविप शुरू से ही विरोध जता रही है। संगठन का कहना है कि यह मैनुअल जेएनयू जैसे खुले और लोकतांत्रिक माहौल वाले विश्वविद्यालय के लिए खतरा है। अभाविप के मुताबिक, इसके प्रावधान छात्रों की स्वतंत्रता को सीमित करते हैं और प्रशासन को अत्यधिक अधिकार देते हैं। संगठन ने मांग की है कि इस मैनुअल को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए।

    अभाविप नेताओं का आरोप है कि प्रशासन अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए कठोर नियमों का सहारा ले रहा है। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय को संवाद और सहयोग के जरिए चलाया जाना चाहिए, न कि दंड और निष्कासन के जरिए। संगठन ने साफ शब्दों में कहा कि राष्ट्रवादी छात्र किसी भी तरह की कायराना कार्रवाई से डरने वाले नहीं हैं। हालांकि, अभाविप ने यह भी स्पष्ट किया कि वह विरोध के नाम पर अराजकता और तोड़-फोड़ का समर्थन नहीं करती। संगठन ने कहा कि विश्वविद्यालय की सार्वजनिक संपत्ति उसकी धरोहर है और उसे नुकसान पहुंचाना किसी भी तरह से उचित नहीं है। इस दौरान अभाविप ने वामपंथी छात्र संगठनों पर परिसर में तोड़-फोड़ की राजनीति करने का आरोप लगाया और उसकी कड़ी निंदा की।

    अभाविप जेएनयू मंत्री प्रवीण कुमार पीयूष ने प्रशासन की कार्रवाई को गुंडागर्दी करार देते हुए कहा कि छात्रों को डराने की रणनीति अब काम नहीं आने वाली है। उन्होंने कहा कि निष्कासन और भारी जुर्मानों के आदेशों को जलाकर संगठन ने यह साफ संदेश दे दिया है कि वह इन फैसलों को स्वीकार नहीं करता। उनका कहना है कि यदि प्रशासन ने अपने फैसलों पर पुनर्विचार नहीं किया, तो विरोध और तेज हो सकता है। मयंक पंचाल ने कहा कि उनका मुख्य विरोध उस ढांचे के खिलाफ है, जिसमें छात्रों को निष्कासित कर उनके मौलिक अधिकारों का हनन किया जा रहा है। उन्होंने निष्कासित छात्रों की तत्काल बहाली और लगाए गए जुर्मानों को वापस लेने की मांग दोहराई। उनके अनुसार, यह पूरे परिसर के लोकतांत्रिक माहौल का सवाल है।

    इस घटनाक्रम ने जेएनयू में एक बार फिर प्रशासन और छात्र संगठनों के बीच तनाव को उजागर कर दिया है। जहां एक ओर छात्र संगठन इसे अधिकारों की लड़ाई बता रहे हैं, वहीं प्रशासन की ओर से अभी तक इस विवाद पर कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह टकराव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। इस दौरान अभाविप ने अंत में दोहराया कि वह सामान्य छात्रों के हितों और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए लगातार संघर्ष करती रहेगी। संगठन का कहना है कि प्रशासनिक तानाशाही के खिलाफ उसकी लड़ाई अंतिम निर्णय तक जारी रहेगी और वह किसी भी स्तर पर छात्रों की आवाज को दबने नहीं देगा।

  • आधी रात का विद्रोह: हरदा एकलव्य विद्यालय के 400 बच्चों का पैदल मार्च, अधीक्षिका पर मानसिक प्रताड़ना और बदइंतजामी के आरोप

    आधी रात का विद्रोह: हरदा एकलव्य विद्यालय के 400 बच्चों का पैदल मार्च, अधीक्षिका पर मानसिक प्रताड़ना और बदइंतजामी के आरोप


    हरदा । हरदा जिले के रहटगांव तहसील स्थित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में उस समय सनसनी फैल गई, जब सैकड़ों छात्र-छात्राएं आधी रात को हॉस्टल की दीवार फांदकर पैदल मार्च पर निकल पड़े। यह घटना न सिर्फ प्रशासन के लिए चौंकाने वाली थी, बल्कि आवासीय विद्यालयों की व्यवस्थाओं पर भी गंभीर सवाल खड़े कर गई। बच्चों का आरोप है कि विद्यालय में लंबे समय से उन्हें मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ रही थी, भोजन की गुणवत्ता बेहद खराब थी और शिकायत करने पर डराया-धमकाया जाता था।बताया जा रहा है कि विद्यालय में अध्ययनरत करीब 300 से 400 छात्र-छात्राएं तड़के करीब चार बजेअचानक एकजुट हुए और हॉस्टल परिसर की दीवार फांदकर जिला मुख्यालय हरदा की ओर पैदल निकल पड़े। बच्चों का कहना था कि उन्होंने कई बार अधीक्षिका सोनिया आनंद और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों से अपनी समस्याएं साझा कीं, लेकिन हर बार उनकी शिकायतों को अनसुना कर दिया गया। मजबूर होकर बच्चों ने यह अनोखा और साहसिक कदम उठाया।
    पैदल मार्च के दौरान बच्चों में गुस्सा और पीड़ा साफ नजर आ रही थी। वे प्राचार्य हाय-हाय मानसिक प्रताड़ना बंद करोऔर ऐसा भोजन नहीं चलेगा जैसे नारे लगाते हुए अपनी आवाज बुलंद कर रहे थे। करीब दस किलोमीटर तक पैदल चलने के बाद ग्राम सोडलपुर के पास फोरलेन मार्ग पर जिला प्रशासन को इस असाधारण घटना की जानकारी मिली। सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आया और जिला कलेक्टर सिद्धार्थ जैन स्वयं मौके पर पहुंचे। कलेक्टर के पहुंचते ही सभी बच्चे सड़क किनारे बैठ गए और खुलकर अपनी समस्याएं बताईं। बच्चों ने बताया कि उन्हें समय पर पौष्टिक भोजन नहीं दिया जाता, साफ-सफाई की हालत खराब है और अनुशासन के नाम पर अपमानजनक व्यवहार किया जाता है। कुछ छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि शिकायत करने वालों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है, जिससे वे भय के माहौल में जीने को मजबूर हैं।
    कलेक्टर सिद्धार्थ जैन ने बच्चों को शांत करते हुए भरोसा दिलाया कि उनकी सभी शिकायतों की निष्पक्ष जांच की जाएगी और दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने मौके पर ही पालकों की एक निगरानी समिति गठित करने की घोषणा की, जो विद्यालय की व्यवस्थाओं, भोजन और अनुशासन पर नजर रखेगी। कलेक्टर के आश्वासन के बाद बच्चों ने अपना विरोध समाप्त किया। इसके बाद जिला प्रशासन द्वारा बसों की व्यवस्था कर सभी बच्चों को सुरक्षित वापस हॉस्टल पहुंचाया गया। प्रशासन का कहना है कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यह घटना एकलव्य आवासीय विद्यालयों की कार्यप्रणाली और बच्चों के अधिकारों को लेकर एक बड़ी चेतावनी के रूप में सामने आई है, जिस पर समय रहते ठोस कदम उठाना बेहद जरूरी है।

  • फर्जी खबरों से भड़का विवाद: VIT भोपाल ने सरकार को भेजा विस्तृत जवाब, कहा- 17 हजार छात्रों में केवल 35 को पीलिया

    फर्जी खबरों से भड़का विवाद: VIT भोपाल ने सरकार को भेजा विस्तृत जवाब, कहा- 17 हजार छात्रों में केवल 35 को पीलिया


    भोपाल । VIT भोपाल यूनिवर्सिटी ने राज्य सरकार के शो-कॉज नोटिस पर 49 पन्नों का विस्तृत जवाब भेजते हुए आरोपों को भ्रमित करने वाला, तथ्यहीन और अफवाहों पर आधारित बताया है। विश्वविद्यालय ने साफ कहा कि भोजन, पानी, हॉस्टल, स्वास्थ्य सुविधाओं और सुरक्षा से जुड़े सभी प्रावधान तय मानकों के अनुरूप हैं। संस्था के अनुसार, हालिया उपद्रव सोशल मीडिया पर फैलाई गई फर्जी खबरों और भड़काऊ संदेशों के कारण हुआ।

    यूनिवर्सिटी ने अपने स्पष्टीकरण में कहा कि कैंपस में 8 बॉयज और 2 गर्ल्स हॉस्टल हैं, जिनमें प्रतिष्ठित केटरर्स भोजन उपलब्ध कराते हैं। फूड मेन्यू छात्रों की फूड कमेटी तय करती है, और फीडबैक पर तुरंत कार्रवाई की जाती है। पानी की गुणवत्ता ISO 10500 मानकों के अनुसार नियमित रूप से जांची जाती है, जिसके लिए ओजोनाइजर, सैंड फिल्टर और वॉटर सॉफ्टनर लगाए गए हैं। प्रबंधन ने यह भी बताया कि जल्द ही कैंपस में फूड और वॉटर टेस्टिंग लैब स्थापित की जाएगी।

    पीलिया फैलने की खबरों पर यूनिवर्सिटी ने कहा कि कुल 17,121 छात्रों में से केवल 35 विद्यार्थियों में ही पीलिया के लक्षण पाए गए, जिन्हें तुरंत मेडिकल सुविधा दी गई। संस्थान में 24×7 डॉक्टर, नर्सें और 8-बेड की मेडिकल यूनिट मौजूद है। गंभीर मामलों में छात्रों को मान्यता प्राप्त अस्पतालों, जैसे चिरायु अस्पताल, भेजा गया। छात्रों की मेडिकल रिपोर्ट न देने के आरोप को भी असत्य बताया गया।

    VIT ने सुरक्षा और अनुशासन संबंधी आरोपों को भी खारिज किया। संस्था ने कहा कि किसी अधिकारी को रोका नहीं गया, न ही छात्रों को धमकाया गया। यूनिवर्सिटी के अनुसार विरोध के दौरान अफवाहों के चलते छात्रों ने एक एम्बुलेंस, बस, कारें और लैब उपकरणों को नुकसान पहुंचाया, CCTV सिस्टम तोड़ दिया और सुरक्षा कर्मियों के साथ मारपीट की गई। इन घटनाओं से कर्मचारियों की जान भी खतरे में पड़ी।

    अंत में विश्वविद्यालय ने कहा कि शो-कॉज नोटिस गलत सूचनाओं पर आधारित है, इसलिए इसे वापस लिया जाए। साथ ही, तथ्यात्मक सुनवाई का अवसर देने का अनुरोध भी किया गया। VIT भोपाल ने अपनी उपलब्धियों-डॉक्टरेट फैकल्टी, वैश्विक MoUs, आधुनिक लैब्स और प्लेसमेंट रिकॉर्ड-का उल्लेख करते हुए कहा कि वह हमेशा सभी मानकों का पालन करता आया है।