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  • उज्जैन में स्कूल बसों पर चला सुरक्षा का चाबुक: 70 वाहनों की जांच, फिटनेस से लेकर सीसीटीवी तक की हुई पड़ताल

    उज्जैन में स्कूल बसों पर चला सुरक्षा का चाबुक: 70 वाहनों की जांच, फिटनेस से लेकर सीसीटीवी तक की हुई पड़ताल


    मध्यप्रदेश । उज्जैन में नए शैक्षणिक सत्र के शुरू होते ही विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन और यातायात पुलिस पूरी तरह सक्रिय नजर आ रही है। स्कूल खुलने के साथ ही शहर में छात्र परिवहन वाहनों की व्यापक जांच शुरू कर दी गई है। इसी क्रम में बुधवार और गुरुवार को यातायात पुलिस द्वारा विशेष वाहन जांच अभियान चलाया गया, जिसके तहत करीब 70 स्कूल बसों और अन्य छात्र परिवहन वाहनों का निरीक्षण किया गया।

    अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि विद्यार्थियों को स्कूल लाने-ले जाने वाले वाहन सभी निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन कर रहे हैं या नहीं। हाल के वर्षों में स्कूल वाहनों से जुड़े हादसों को देखते हुए प्रशासन किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतना चाहता। यही वजह है कि नए सत्र के पहले ही सप्ताह में सुरक्षा व्यवस्था की गहन समीक्षा शुरू कर दी गई है।

    मोहन नगर चौराहे पर आयोजित इस विशेष जांच अभियान में ट्रैफिक डीएसपी विक्रम कनपुरिया, डीएसपी दिलीप परिहार और यातायात थाना प्रभारी सूबेदार इंद्रपाल सिंह सहित पुलिस अधिकारियों की टीम मौजूद रही। अधिकारियों ने एक-एक वाहन की बारीकी से जांच कर सुरक्षा से जुड़े सभी आवश्यक पहलुओं का परीक्षण किया।

    जांच के दौरान स्कूल बसों की फिटनेस को विशेष रूप से परखा गया। साथ ही यह भी देखा गया कि वाहन के पास वैध दस्तावेज मौजूद हैं या नहीं। इसके अलावा अग्निशमन यंत्र, फर्स्ट एड बॉक्स, आपातकालीन निकास द्वार, स्पीड गवर्नर और सीसीटीवी कैमरों जैसी जरूरी सुरक्षा सुविधाओं की भी जांच की गई। अधिकारियों ने वाहन चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस, अनुभव और परिचालकों की उपलब्धता की भी जानकारी ली।

    यातायात डीएसपी दिलीप परिहार ने बताया कि विद्यार्थियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यह अभियान चलाया गया है। स्कूल वाहन संचालकों और प्रबंधन को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी परिस्थिति में सुरक्षा नियमों से समझौता नहीं किया जाएगा। जिन वाहनों में सुरक्षा संबंधी कमियां पाई गईं, उन्हें तत्काल सुधार करने के निर्देश दिए गए हैं।

    अधिकारियों ने स्कूल संचालकों को यह भी समझाया कि बच्चों के परिवहन में उपयोग होने वाले वाहनों का नियमित रखरखाव और समय-समय पर तकनीकी परीक्षण बेहद आवश्यक है। छोटी-सी लापरवाही भी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है, इसलिए सभी सुरक्षा उपकरण हमेशा कार्यशील स्थिति में रहने चाहिए।

    यातायात पुलिस ने साफ किया है कि यह अभियान केवल औपचारिकता नहीं है, बल्कि आगे भी लगातार जारी रहेगा। समय-समय पर स्कूल बसों और छात्र परिवहन वाहनों की जांच की जाएगी ताकि सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित हो सके। पुलिस का मानना है कि विद्यार्थियों की सुरक्षित यात्रा केवल प्रशासन की ही नहीं, बल्कि स्कूल प्रबंधन, वाहन संचालकों और अभिभावकों की भी सामूहिक जिम्मेदारी है।

    नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ शुरू हुआ यह अभियान स्कूल परिवहन व्यवस्था को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे न केवल वाहन संचालकों में जवाबदेही बढ़ेगी, बल्कि अभिभावकों को भी अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर अधिक भरोसा मिलेगा।

  • भोपाल में लगातार तीसरे दिन बम धमकी, JK अस्पताल यूनिवर्सिटी में 1:30 बजे ब्लास्ट की वार्निंग

    भोपाल में लगातार तीसरे दिन बम धमकी, JK अस्पताल यूनिवर्सिटी में 1:30 बजे ब्लास्ट की वार्निंग


    भोपाल । राजधानी भोपाल में बम धमकी का सिलसिला लगातार तीसरे दिन जारी रहा। इस बार JK हॉस्पिटल और JK यूनिवर्सिटी को उड़ाने की धमकी वाला ई मेल मिला है। धमकी में कहा गया है कि कॉलेज कैंपस बाथरूम और प्रिंसिपल के कमरे में बम रखे गए हैं जो दोपहर 1:30 बजे विस्फोट कर दिए जाएंगे।

    सूचना मिलते ही पुलिस बम निरोधक दस्ता और डॉग स्क्वॉड मौके पर पहुंच गए। दोनों संस्थानों में सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया और एहतियातन छात्रों और स्टाफ को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया। अभी तक किसी संदिग्ध वस्तु या विस्फोटक का पता नहीं चला है।

    पिछले दो दिनों का पैटर्न भी चिंताजनक रहा। 17 मार्च को नापतोल विभाग को इसी तरह की धमकी मिली थी जिसमें सायनाइड गैस वाले सिलेंडरों का जिक्र था। इससे पहले एम्स भोपाल और पीपल्स यूनिवर्सिटी को भी बार बार धमकी वाले ई मेल प्राप्त हुए थे।

    पुलिस और जांच एजेंसियों के अनुसार पिछले एक महीने में भोपाल में पांचवीं बार विभिन्न संस्थानों को बम धमकी मिली है। अब तक सभी धमकियां फर्जी साबित हुई हैं। कोई भी विस्फोटक नहीं मिला लेकिन हर बार सर्च ऑपरेशन इमारतें खाली कराना और आम जनता में दहशत फैलाना जैसी परेशानियां उत्पन्न होती हैं।

  • मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच CBSE ने GCC देशों में 12वीं बोर्ड परीक्षाओं को रद्द किया

    मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच CBSE ने GCC देशों में 12वीं बोर्ड परीक्षाओं को रद्द किया


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में ईरान और इजरायल अमेरिका के हालिया संघर्ष के चलते तनावपूर्ण स्थिति बढ़ने के बीच भारतीय दूतावासों ने छात्रों और अभिभावकों के लिए नई एडवाइजरी जारी की है। इस अपडेट में सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) ने 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाओं को बहरीन ईरान कुवैत ओमान कतर सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में रद्द करने की घोषणा की है। यह निर्णय छात्रों की सुरक्षा और शिक्षण गतिविधियों पर पड़ रहे प्रभावों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

    ओमान में भारतीय दूतावास ने बताया कि यह एडवाइजरी पहले जारी 01.03.2026 03.03.2026 05.03.2026 07.03.2026 और 09.03.2026 के सर्कुलरों का अपडेशन है। इन सर्कुलरों के माध्यम से प्रभावित देशों में स्कूलों और संबंधित अधिकारियों से मिले इनपुट और अपील के आधार पर बोर्ड ने 12वीं क्लास की परीक्षाओं की समीक्षा की। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि 16 मार्च से लेकर 10 मार्च तक निर्धारित सभी परीक्षाएं रद्द कर दी गई हैं। इसके साथ ही पहले स्थगित की गई परीक्षाओं की तारीखें भी पूरी तरह रद्द होंगी।

    इस निर्णय का उद्देश्य न केवल छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि उनके परिणाम सही समय पर घोषित किए जाएं। एडवाइजरी में यह भी कहा गया कि परीक्षा स्थगित होने के बाद रिजल्ट जारी करने की प्रक्रिया और तरीका बाद में अलग से बताया जाएगा। इससे पहले दूतावास ने कहा था कि सीबीएसई 10 मार्च को स्थिति की पुनः समीक्षा करेगा और 12 मार्च से होने वाली परीक्षाओं के लिए सही निर्णय लेगा।

    मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण ओमान में भारतीय दूतावास ने पहले भी 9 10 और 11 मार्च को होने वाली 12वीं बोर्ड परीक्षाओं को फिलहाल टालने की जानकारी साझा की थी। यह कदम ईरान इजरायल युद्ध और वहां की सुरक्षा स्थिति के मद्देनजर छात्रों और उनके परिवारों के हित में उठाया गया। दूतावास ने यह भी बताया कि सभी संबंधित स्कूलों और अधिकारियों को बोर्ड ने सीधे निर्देश दिए हैं कि परीक्षा स्थगित होने की जानकारी तुरंत छात्रों तक पहुँचाई जाए।

    इस स्थिति से प्रभावित छात्रों और अभिभावकों के लिए राहत की बात यह है कि बोर्ड ने पहले से ही स्पष्ट कर दिया है कि परीक्षाओं के परिणामों को घोषित करने की प्रक्रिया सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से की जाएगी। इस बीच छात्रों को आवश्यकतानुसार ऑनलाइन अध्ययन सामग्री और मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा सकता है ताकि उनका अकादमिक नुकसान कम से कम हो।

    इस निर्णय से यह भी साफ हो जाता है कि वैश्विक तनाव और सुरक्षा स्थिति सीधे तौर पर शिक्षा पर प्रभाव डाल सकती है। सीबीएसई का यह कदम छात्रों की सुरक्षा मानसिक शांति और शिक्षण गतिविधियों की निरंतरता को सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • जबलपुर में छात्र हॉस्टल से लापता, स्कूल परिसर में मिली सुरक्षा की बड़ी चूक..

    जबलपुर में छात्र हॉस्टल से लापता, स्कूल परिसर में मिली सुरक्षा की बड़ी चूक..


    जबलपुर। माढ़ोताल थाना क्षेत्र के ग्रीन वैली पब्लिक स्कूल हॉस्टल से दो छात्र अचानक लापता हो गए, जिसके बाद रात भर हड़कंप मच गया। बुधवार रात छात्र हॉस्टल में नहीं लौटे तो स्कूल प्रबंधन ने तुरंत पुलिस को सूचित किया। पुलिस टीम रात करीब 12 बजे स्कूल पहुंची और परिसर में लगे सीसीटीवी फुटेज की जांच शुरू की। फुटेज में छात्र स्कूल परिसर से बाहर जाते दिखाई नहीं दिए।

    इस पर स्कूल के सभी ब्लॉक्स और कक्षाओं में सघन तलाशी शुरू की गई। तलाशी के दौरान पता चला कि दोनों छात्र लगभग तीन घंटे तक एक कक्षा की अलमारी में छिपे रहे। पुलिस ने दोनों छात्रों को सुरक्षित बाहर निकाला। छात्रों की पहचान सार्थक पटेल और आलोक के रूप में हुई।

    सार्थक ने पुलिस को बताया कि पिछले दो हफ्ते से उसे घर पर माता-पिता से फोन पर बात नहीं कराई जा रही थी। उसने कहा कि रविवार को भी बातचीत नहीं कराई गई, जिससे वह नाराज था। इसी नाराजगी के कारण वह शाम करीब सात बजे अपने साथी आलोक के साथ कक्षा में गया और बाद में अलमारी में छिप गया। छात्र की यह हरकत स्कूल में हड़कंप मचाने के लिए काफी थी।

    सार्थक के पिता सीताराम पटेल ने आरोप लगाया कि स्कूल में अभिभावकों से नियमित बातचीत का नियम होने के बावजूद कई बार कॉल के बावजूद बच्चों से बात नहीं कराई जाती। उन्होंने कहा कि इस बार भी बच्चों को माता-पिता से बात कराने में अनदेखी हुई। उन्होंने प्रबंधन से स्पष्ट व्यवस्था बनाने और नियमित संवाद सुनिश्चित करने की मांग की।

    माढ़ोताल थाना प्रभारी वीरेंद्र सिंह पवार ने बताया कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। पुलिस यह जांच कर रही है कि यह घटना केवल संवाद की कमी का परिणाम थी या बच्चों पर किसी प्रकार का दबाव या प्रताड़ना थी। उन्होंने कहा कि स्कूल प्रबंधन और कर्मचारियों से पूछताछ की जा रही है ताकि पूरे मामले की तह तक पहुंचा जा सके।

    इस घटना के बाद स्कूल परिसर में सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी की समीक्षा शुरू कर दी गई है। अभिभावकों को आश्वस्त किया गया है कि बच्चों के संवाद और सुरक्षा से जुड़े प्रोटोकॉल स्पष्ट किए जाएंगे। पुलिस ने कहा कि जांच पूरी होने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

    इस मामले ने स्कूलों में हॉस्टल छात्रों की सुरक्षा और अभिभावकों से संवाद की अहमियत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञ भी मानते हैं कि बच्चों की मानसिक और भावनात्मक सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी कि उनकी शारीरिक सुरक्षा। ग्रीन वैली पब्लिक स्कूल की यह घटना अन्य स्कूलों के लिए चेतावनी के रूप में भी देखी जा रही है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

  • अनुशासनहीनता की हद: स्कूल प्रबंधन सोया रहा, 8 फीट की बाउंड्री फांदकर स्कूल से बंक मारती नजर आईं छात्राएं

    अनुशासनहीनता की हद: स्कूल प्रबंधन सोया रहा, 8 फीट की बाउंड्री फांदकर स्कूल से बंक मारती नजर आईं छात्राएं


    सतना । मध्य प्रदेश के सतना जिले के शासकीय कन्या हायर सेकंडरी स्कूल नागौद में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां की छात्राएं स्कूल की 8 फीट ऊंची बाउंड्री फांदकर बाहर जा रही थीं, लेकिन स्कूल प्रबंधन को इसकी भनक तक नहीं लगी। यह मामला तब सुर्खियों में आया, जब बाउंड्री फांदते हुए छात्राओं का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। विडंबना यह है कि विद्यालय के पीछे से बाउंड्री लांघकर छात्राएं मुख्य सड़क पर कूद रही थीं, जहां दिनभर वाहनों की आवाजाही होती रहती है। इस स्थिति में किसी भी वक्त बड़ा हादसा हो सकता था। वीडियो में छात्राएं बाउंड्री फांदते समय गिरती भी नजर आ रही हैं, जिससे यह सवाल उठता है कि अगर कोई गंभीर दुर्घटना हो जाती, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होती

    स्थानीय लोगों और अभिभावकों का कहना है कि यह मामला छात्राओं की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है, और स्कूल प्रशासन की लापरवाही बेहद चिंताजनक है। स्कूल समय के दौरान छात्राओं का इस तरह बाउंड्री फांदकर बाहर जाना न केवल अनुशासनहीनता का प्रतीक है, बल्कि उनकी जान को भी खतरे में डालने वाला है। जैसे ही यह वीडियो मीडिया में आया, जिला शिक्षा अधिकारी कंचन श्रीवास्तव ने इस पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “हमने इस घटना के बारे में जानकारी प्राप्त की है। हम प्राचार्य से चर्चा करेंगे और इस मामले में उचित प्रबंध कराने के लिए निर्देश देंगे।

    स्कूल की प्राचार्य, विनीता श्रीवास्तव ने इस पर सफाई देते हुए कहा, मुख्य गेट पर ताला लगा हुआ था और अंदर प्री-बोर्ड परीक्षाएं चल रही थीं। अब हमें इस घटना की जानकारी मिली है और इसके लिए उचित प्रबंध किए जाएंगे। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि जब गेट पर ताला लगा था, तो स्कूल प्रबंधन ने छात्राओं के बाहर जाने पर नजर क्यों नहीं रखी। यह मामला विद्यालय प्रबंधन की घोर लापरवाही को उजागर करता है, जो छात्रों की सुरक्षा और अनुशासन की जिम्मेदारी लेने में नाकाम रहा। अगर भविष्य में कोई दुर्घटना होती है, तो यह बड़ा सवाल बनकर खड़ा हो जाएगा कि इसके लिए जिम्मेदार कौन होगा।
     

  • जनजातीय छात्रावासों में सुरक्षा सख्ती: अधीक्षक अब बच्चों के साथ रात बिताएंगे, नियम उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई

    जनजातीय छात्रावासों में सुरक्षा सख्ती: अधीक्षक अब बच्चों के साथ रात बिताएंगे, नियम उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई


    भोपाल। प्रदेश के जनजातीय छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों, खासकर छात्राओं की सुरक्षा और अनुशासन को लेकर राज्य सरकार ने बड़े कदम उठाए हैं। अब छात्रावासों में अधीक्षक का रातभर परिसर में रहना अनिवार्य होगा। नियमों का पालन न करने वाले अधीक्षकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और उन्हें पद से हटाया जा सकता है।सरकार ने यह निर्णय छात्रावासों में लगातार मिल रही शिकायतों और सुरक्षा से जुड़े मामलों को ध्यान में रखते हुए लिया है। वर्तमान में कई अधीक्षक मूल रूप से शिक्षक हैं, जो न तो नियमित रूप से पढ़ा रहे हैं और न ही छात्रावासों में पर्याप्त समय दे रहे हैं। बच्चों के हित में उचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए नई अधीक्षक कैडर प्रणाली लागू करने की तैयारी की जा रही है। योजना के तहत अगले कुछ वर्षों में चरणबद्ध तरीके से पूर्णकालिक अधीक्षकों की नियुक्ति की जाएगी, जबकि मौजूदा शिक्षक अधीक्षक अपने मूल शिक्षण कार्य में लौटेंगे।
    छात्राओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सरकार ने तय किया है कि प्रत्येक छात्रावास में अधीक्षक के लिए आवासीय व्यवस्था होगी। अधीक्षक को बच्चों के साथ ही परिसर में रुकना होगा, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जा सके। इसके साथ ही संभाग स्तर पर विशेष निगरानी टीमें बनाई जाएंगी, जो छात्रावासों का औचक निरीक्षण करेंगी और व्यवस्थाओं की रिपोर्ट तैयार करेंगी।तकनीकी निगरानी को भी मजबूत किया जाएगा। प्रदेश के लगभग 2500 जनजातीय छात्रावासों में सीसीटीवी कैमरे और बायोमेट्रिक/थंब इम्प्रेशन सिस्टम लगवाए जाएंगे। इससे यह रिकॉर्ड रखा जा सकेगा कि कौन व्यक्ति कब छात्रावास में आया और कब गया। इसके अलावा, भोजन की गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए रोजाना परोसी जाने वाली थाली की तस्वीर भेजना भी अनिवार्य किया जाएगा।
    इस बीच, भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री परिसर की जमीन को लेकर सरकार ने स्पष्ट किया कि इसका अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री स्तर पर ही लिया जाएगा। लंबे समय से लंबित कचरा निष्पादन की प्रक्रिया को पूरा करना सरकार की बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है।सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि आगामी शिक्षा सत्र से पहले किसी भी छात्रावास में बिना पुलिस सत्यापन के कोई कर्मचारी नियुक्त नहीं होगा। सुरक्षा गार्ड से लेकर अन्य स्टाफ की पृष्ठभूमि जांच अनिवार्य होगी।
    इसके अलावा, जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा के विस्तार पर भी जोर दिया जा रहा है। प्रत्येक विकासखंड में आधुनिक सुविधाओं वाले स्कूल, छात्रावास और सांस्कृतिक केंद्र विकसित करने की योजना है। इसका उद्देश्य बच्चों और युवाओं को बेहतर शिक्षा, सुरक्षित आवास और सांस्कृतिक गतिविधियों के अवसर प्रदान करना है।सुरक्षा, अनुशासन और शिक्षा के इस सुधार से यह उम्मीद जताई जा रही है कि प्रदेश के छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों को सुरक्षित वातावरण मिलेगा और उनकी पढ़ाई पर भी ध्यान केंद्रित किया जा सकेगा। सरकार का कहना है कि इस कदम से छात्राओं और छात्रों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं की संभावना न्यूनतम होगी।