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  • MP: भोपाल में CJP की बैठक में हंगामा….छात्रों ने लगाए नारे, माइक छीनने की कोशिश

    MP: भोपाल में CJP की बैठक में हंगामा….छात्रों ने लगाए नारे, माइक छीनने की कोशिश


    भोपाल।
    भोपाल (Bhopal) में सीजेपी (CJP) की बैठक के दौरान उस वक्त हंगामा हो गया, जब छात्रों और युवाओं का एक समूह बैठक में पहुंच गया. युवकों ने CJP के प्रतिनिधियों (Representatives) से स्कूलों के ऑडिट (School audits) और संगठन की गतिविधियों को लेकर सवाल किए. सवाल-जवाब के दौरान विवाद बढ़ गया और कुछ युवकों ने नारेबाजी शुरू कर दी. इस दौरान माइक छीनने की कोशिश भी की गई. हंगामे की सूचना मिलते ही पुलिस गांधी भवन पहुंची और छात्रों को समझाइश देकर मामला शांत कराया।

    दरअसल, शहर के गांधी भवन का यह मामला है. यहां CJP की बैठक के दौरान अचानक हंगामे की स्थिति बन गई. दरअसल, छात्रों और युवाओं का एक समूह बैठक के दौरान अंदर पहुंचा था. इनमें कुछ युवक काली टी-शर्ट पहने हुए थे। युवकों ने CJP के प्रतिनिधियों से स्कूलों के ऑडिट को लेकर सवाल पूछना शुरू किया।

    सवाल-जवाब के दौरान दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ गया. युवकों ने दिल्ली में हुए पिछले प्रदर्शनों और संगठन की गतिविधियों को लेकर भी सवाल उठाए। इसी दौरान कुछ युवकों ने नारेबाजी शुरू कर दी. ‘यह दिल्ली नहीं, भोपाल है’, ‘कॉकरोच पार्टी मुर्दाबाद’ और ‘तानाशाही नहीं चलेगी’ जैसे नारे लगाए गए. मामला बढ़ने पर माइक छीनने की कोशिश भी हुई।

    हंगामे की सूचना मिलते ही पुलिस बल गांधी भवन पहुंचा. पुलिस ने मौके पर मौजूद छात्रों और युवाओं को समझाइश दी. पुलिस की समझाइश के बाद मामला शांत हुआ. घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें बैठक के दौरान युवकों की नारेबाजी और हंगामे का दृश्य दिखाई दे रहा है।

  • MP के 1 लाख 22 हजार विद्यार्थियों को कल मिलेंगे 25-25 हजार रुपये

    MP के 1 लाख 22 हजार विद्यार्थियों को कल मिलेंगे 25-25 हजार रुपये


    भोपाल। कक्षा 12वीं में प्रथम प्रयास में 75 प्रतिशत या अधिक अंक पाने वाले प्रदेश के मेधावी विद्यार्थियों का आधुनिक तकनीक से जुड़ने का सपना जल्द ही पूरा होने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रदेश के लगभग 1 लाख 22 हजार विद्यार्थियों को लैपटॉप खरीदने के लिए 25-25 हजार रुपये की राशि का अंतरण करेंगे। विद्यार्थियों को यह राशि 1 सितंबर को कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर
    , भोपाल में आयोजित लैपटॉप क्रय के लिये राशि वितरण कार्यक्रम के दौरान प्रदान की जाएगी।

    प्रदेश सरकार द्वारा विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने और उन्हें डिजिटल तकनीक से जोड़ने के उद्देश्य से स्कूल शिक्षा विभाग के माध्यम से प्रतिभाशाली विद्यार्थी प्रोत्साहन योजना चलाई जा रही है। इसके अंतर्गत कक्षा 12वीं की परीक्षा में पहले ही प्रयास में 75 प्रतिशत या उससे अधिक अंक प्राप्त करने वाले प्रत्येक पात्र विद्यार्थी को लैपटॉप खरीदने के लिए 25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है।

    प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को तकनीकी शिक्षा का संबल

    प्रदेश सरकार द्वारा योजना के अंतर्गत इस वर्ष प्रदेश के लगभग 1 लाख 22 हजार विद्यार्थियों को लाभान्वित किया जा रहा है। प्रत्येक विद्यार्थी के खाते में 25 हजार रुपये की राशि अंतरित की जाएगी। इस प्रकार विद्यार्थियों को कुल 304 करोड़ 98 लाख 50 हजार रुपये से अधिक की राशि का अंतरण किया जाएगा।

    उल्लेखनीय है कि प्रदेश सरकार की यह पहल प्रदेश के मेधावी विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए आवश्यक डिजिटल संसाधन उपलब्ध कराने के साथ-साथ उन्हें आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। लैपटॉप के माध्यम से विद्यार्थी ऑनलाइन अध्ययन, डिजिटल पाठ्य सामग्री, ई-लर्निंग और अन्य तकनीकी संसाधनों का उपयोग कर अपनी शिक्षा को और बेहतर बना सकेंगे।

  • कॉकरोच जनता पार्टी नेताओं ने पीड़ित परिवारों को एक करोड़ मुआवजे और छात्रों पर दर्ज मामलों की वापसी की मांग उठाई

    कॉकरोच जनता पार्टी नेताओं ने पीड़ित परिवारों को एक करोड़ मुआवजे और छात्रों पर दर्ज मामलों की वापसी की मांग उठाई

    नई दिल्ली ।कॉकरोच जनता पार्टी ने छात्रों से जुड़े मुद्दों और कथित तौर पर प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने की मांग को लेकर पांच सितंबर को दिल्ली में मार्च निकालने की घोषणा की है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि मार्च इंडिया गेट से दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक निकाला जाएगा। उनके अनुसार, इस कार्यक्रम के जरिए छात्रों पर दर्ज मामलों को वापस लेने और प्रभावित परिवारों को एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग उठाई जाएगी।

    जेन जी से जुड़े एक कार्यक्रम में अभिजीत दीपके के साथ आशुतोष रांका और सौरव दास भी मौजूद थे। बातचीत के दौरान दीपके ने कहा कि संगठन लंबे समय से संबंधित परिवारों के लिए मुआवजे और छात्रों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी वापस लेने की मांग कर रहा है। उन्होंने कहा कि इन मांगों को लेकर पांच सितंबर को मार्च निकाला जाएगा।

    दीपके ने मुआवजे की मांग के पीछे परिवारों की आर्थिक स्थिति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों में कई लोग सीमित आय वाले हैं और बच्चों की पढ़ाई के लिए कर्ज तक लेते हैं। उन्होंने आकांक्षा चतुर्वेदी के परिवार का उदाहरण देते हुए दावा किया कि उनके पिता ने बेटी की पढ़ाई के लिए कर्ज लिया था और अब परिवार आर्थिक तथा पारिवारिक संकट से गुजर रहा है।

    उनका कहना था कि शिक्षा हासिल करने के लिए कोचिंग और अन्य खर्चों में बड़ी रकम लगती है। ऐसे में किसी परिवार के बच्चे के खोने के बाद आर्थिक सहायता उसके लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। संगठन इसी आधार पर प्रत्येक प्रभावित परिवार को एक करोड़ रुपये की सहायता देने की मांग कर रहा है।

    दूसरी प्रमुख मांग छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की है। दीपके ने कहा कि छात्र शिक्षा से जुड़े अपने अधिकारों की मांग करने के लिए सामने आए थे। संगठन का दावा है कि ऐसे मामलों में दर्ज प्राथमिकी वापस होनी चाहिए। पांच सितंबर के प्रस्तावित मार्च में इन्हीं दोनों मुद्दों को प्रमुखता से उठाने की बात कही गई है।

    कार्यक्रम के दौरान जयपुर में हुई घटना के संदर्भ में भी नेताओं से सवाल किया गया। आशुतोष रांका ने कहा कि ऐसी घटनाओं को लेकर उन्हें अपने सार्वजनिक कार्यक्रमों से पीछे हटने की चिंता नहीं है। उन्होंने बताया कि संबंधित घटनाक्रम के बाद भी संगठन के लोग राजस्थान के विभिन्न इलाकों में गए और आगे भी लोगों के बीच जाने की योजना है।

    रांका ने यह भी कहा कि संगठन का उद्देश्य चुनाव में लोगों से वोट मांगना नहीं है। उन्होंने राजस्थान में स्कूलों की स्थिति सुधारने की जरूरत पर जोर दिया। उनका कहना था कि बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिलना चाहिए और स्कूलों का संचालन उचित परिस्थितियों में होना चाहिए।

    हिंसा की आशंका से जुड़े सवाल पर अभिजीत दीपके ने अपने और आशुतोष रांका के साथ पहले हुई कथित मारपीट का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वे विरोध के दौरान मारपीट का सामना कर चुके हैं और अब सौरव दास की बारी आने की बात कही। हालांकि, संगठन ने पांच सितंबर के कार्यक्रम को शांतिपूर्ण मार्च बताया है।

    सौरव दास ने चर्चा के दौरान सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों की ओर से पहले किए गए वादों और अदालत में हुई कार्यवाही को संगठन महत्वपूर्ण मानता है। उनका दावा है कि छात्रों से जुड़े मामलों की प्राथमिकी और प्रभावित परिवारों के मुआवजे को लेकर अभी उनकी अपेक्षाएं पूरी नहीं हुई हैं।

    अब पांच सितंबर का प्रस्तावित मार्च संगठन की अगली बड़ी गतिविधि होगी। इसमें छात्रों पर दर्ज मामलों की वापसी और प्रभावित परिवारों को एक करोड़ रुपये की सहायता की मांग प्रमुख रहेगी। कार्यक्रम के दौरान संगठन अपनी मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से सरकार और प्रशासन के सामने रखने की बात कह रहा है।

  • दिल्ली छात्र प्रदर्शन में पीएम मोदी की मां पर टिप्पणी का मामला, योगी आदित्यनाथ ने गलती स्वीकारने और माफी का किया जिक्र

    दिल्ली छात्र प्रदर्शन में पीएम मोदी की मां पर टिप्पणी का मामला, योगी आदित्यनाथ ने गलती स्वीकारने और माफी का किया जिक्र

    नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मां के लिए अभद्र शब्दों के इस्तेमाल से जुड़े मामले पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि जिस बेटी ने प्रधानमंत्री की माता के लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया था, उसने बाद में अपनी गलती स्वीकार करते हुए माफी मांग ली।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि छात्रा और उसके माता-पिता ने बाद में स्वीकार किया कि उससे गलती हुई थी। उन्होंने बताया कि छात्रा ने इसके बाद माफी भी मांगी। मुख्यमंत्री की टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब छात्र प्रदर्शन के दौरान की गई उक्त टिप्पणी को लेकर राजनीतिक और सार्वजनिक स्तर पर चर्चा हो रही है।

    योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में युवाओं के भविष्य और उनके सामने मौजूद चुनौतियों को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कुछ लोग देश के युवाओं को भटकाने का प्रयास कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि आखिर कुछ लोग भारत के भविष्य को प्रभावित करने की कोशिश क्यों कर रहे हैं।

    उन्होंने इस संदर्भ में अर्बन नक्सलियों का भी उल्लेख किया और कहा कि उनके हाथों देश के भविष्य को बर्बाद नहीं होने दिया जाएगा। योगी आदित्यनाथ ने युवाओं से जुड़े मुद्दों को व्यापक दृष्टिकोण से देखने की जरूरत पर जोर दिया और कहा कि देश की युवा पीढ़ी को सही दिशा देना महत्वपूर्ण है।

    मुख्यमंत्री की टिप्पणी में छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई घटना के साथ राजनीतिक परिस्थितियों का भी संदर्भ दिखाई दिया। उन्होंने कहा कि युवाओं को किसी भी प्रकार के भटकाव से बचाना आवश्यक है। उनके अनुसार, देश के भविष्य को लेकर युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है और उनके बीच जिम्मेदारी तथा सकारात्मक सोच को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

    योगी आदित्यनाथ ने इस दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने राहुल गांधी का नाम लिए बिना कहा कि एक जिम्मेदार विपक्षी नेता के रूप में उनसे बेहतर आचरण की अपेक्षा थी। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों से खुद को अलग कर लिया है।

    अपने संबोधन में योगी आदित्यनाथ ने अमेठी और रायबरेली का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन दोनों क्षेत्रों की जनता ने हमेशा राजनीतिक घटनाक्रमों को समझते हुए अपना फैसला दिया है। इन इलाकों का राजनीतिक महत्व लंबे समय से राष्ट्रीय राजनीति में रहा है और चुनावी परिस्थितियों में यहां के मतदाताओं के फैसले पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मां को लेकर की गई अभद्र टिप्पणी के मामले में मुख्यमंत्री ने छात्रा की ओर से बाद में माफी मांगे जाने को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि छात्रा और उसके माता-पिता ने गलती स्वीकार की और इसके बाद माफी मांगी गई।

    मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया में एक ओर छात्रा की ओर से की गई टिप्पणी का जिक्र रहा, वहीं दूसरी ओर उन्होंने युवाओं को राजनीतिक या वैचारिक प्रभाव से बचाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने देश के भविष्य के रूप में युवाओं की भूमिका को रेखांकित करते हुए उनके सामने सही दिशा और जिम्मेदार सार्वजनिक व्यवहार की जरूरत बताई।

    इस पूरे घटनाक्रम में छात्र प्रदर्शन, प्रधानमंत्री की मां के खिलाफ की गई कथित अभद्र टिप्पणी, छात्रा की ओर से माफी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रतिक्रिया प्रमुख बिंदु रहे। साथ ही मुख्यमंत्री ने विपक्षी राजनीति और राहुल गांधी के संदर्भ में भी अपनी बात रखी।

  • पुणे में आज राहुल गांधी का छात्रों से सीधा संवाद, शिक्षा सुरक्षा बराबरी और करियर पर होगी अहम चर्चा

    पुणे में आज राहुल गांधी का छात्रों से सीधा संवाद, शिक्षा सुरक्षा बराबरी और करियर पर होगी अहम चर्चा


    नई दिल्ली ।महाराष्ट्र के पुणे में शनिवार 22 अगस्त को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के तहत छात्र-छात्राओं से सीधा संवाद करेंगे। यह कार्यक्रम शहर के SSPMS कॉलेज मैदान में आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम को लेकर पुणे पुलिस ने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आयोजकों के सामने 30 शर्तें रखी हैं। इनमें आपत्तिजनक पोस्टर, बैनर और तस्वीरों पर रोक सहित आयोजन स्थल पर अनुशासन बनाए रखने से जुड़ी व्यवस्थाएं शामिल हैं।

    कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं और खास तौर पर छात्राओं से जुड़े मुद्दों को सार्वजनिक चर्चा के केंद्र में लाना है। संवाद के दौरान शिक्षा, छात्राओं की सुरक्षा, समानता, प्रतियोगी परीक्षाओं, रोजगार और करियर के अवसरों जैसे विषयों पर बातचीत होने की संभावना है। कार्यक्रम में देश के अलग-अलग हिस्सों से छात्र-छात्राओं के शामिल होने की बात कही गई है।

    राहुल गांधी का यह कार्यक्रम ऐसे समय हो रहा है जब देशभर में युवाओं के लिए शिक्षा, रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े अवसर महत्वपूर्ण सार्वजनिक मुद्दे बने हुए हैं। कार्यक्रम में छात्राओं को अपनी समस्याएं और अपेक्षाएं सीधे सामने रखने का अवसर देने पर विशेष जोर दिया गया है। इसके जरिए युवाओं की चिंताओं को समझने और उन्हें व्यापक राजनीतिक एवं सामाजिक चर्चा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

    SSPMS कॉलेज मैदान राहुल गांधी के लिए पहले से परिचित स्थान है। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान भी उन्होंने इसी मैदान पर एक बड़ी जनसभा को संबोधित किया था। करीब दो वर्ष बाद वह एक बार फिर इसी परिसर में पहुंच रहे हैं, लेकिन इस बार कार्यक्रम का केंद्र राजनीतिक जनसभा के बजाय विद्यार्थियों के साथ संवाद है।

    ‘छात्रों की गूंज’ अभियान के तहत इससे पहले कोटा, देहरादून और प्रयागराज में भी कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। इन आयोजनों में युवाओं की शिक्षा, भविष्य और देश के विकास में उनकी भूमिका से जुड़े विषयों को प्रमुखता दी गई। प्रयागराज में राहुल गांधी ने युवाओं को देश की बड़ी ताकत बताते हुए उनके सामर्थ्य को भारत के भविष्य से जोड़ने की बात कही थी।

    पुणे कार्यक्रम से पहले दिल्ली में राहुल गांधी से जुड़ा एक अलग राजनीतिक घटनाक्रम भी चर्चा में रहा। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर पैलेट गन के इस्तेमाल के विरोध में उन्होंने पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने के बाहर धरना दिया था। उन्होंने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की थी। इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया।

    दिल्ली के घटनाक्रम के बाद पुणे में होने वाले छात्र संवाद पर भी राजनीतिक और सामाजिक नजरें बनी हुई हैं। हालांकि पुणे कार्यक्रम का घोषित केंद्र छात्रों से जुड़े शैक्षणिक, सामाजिक और करियर संबंधी मुद्दे हैं। पुलिस की ओर से लगाई गई 30 शर्तों का उद्देश्य आयोजन के दौरान शांति, सुरक्षा और व्यवस्था सुनिश्चित करना है।

    कार्यक्रम में छात्राओं की सुरक्षा और उन्हें समान अवसर उपलब्ध कराने से जुड़े सवालों को विशेष महत्व मिलने की उम्मीद है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, उच्च शिक्षा तक पहुंच, करियर विकल्प और युवाओं के सामने मौजूद अवसरों जैसे विषय भी संवाद का हिस्सा रहेंगे। कार्यक्रम के जरिए विद्यार्थियों को अपनी बात सीधे रखने का मंच मिलेगा।

    पुणे में आयोजन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। पुलिस की शर्तों के तहत आयोजकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि कार्यक्रम के दौरान किसी तरह की आपत्तिजनक सामग्री प्रदर्शित न हो और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित न हो। कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए आयोजकों और प्रशासन के बीच समन्वय महत्वपूर्ण रहेगा।

  • 'वन डे, वन यूनिवर्सिटी' से छात्रों तक पहुंचेगी मोदी सरकार, हर दिन कैंपस में केंद्रीय मंत्री करेंगे संवाद

    'वन डे, वन यूनिवर्सिटी' से छात्रों तक पहुंचेगी मोदी सरकार, हर दिन कैंपस में केंद्रीय मंत्री करेंगे संवाद


    नई दिल्ली।
    केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार छात्रों और युवाओं के साथ सीधे संवाद बढ़ाने के लिए एक नई पहल पर विचार कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार ‘वन डे, वन यूनिवर्सिटी’ नाम से देशव्यापी कार्यक्रम शुरू करने की तैयारी में है। इसके तहत हर दिन एक केंद्रीय मंत्री किसी विश्वविद्यालय के कैंपस में पहुंचकर छात्रों से आमने-सामने बातचीत कर सकता है।

    सरकार की कोशिश इस पहल के जरिए केवल योजनाओं और नीतियों की जानकारी देना नहीं, बल्कि छात्रों की समस्याओं, सुझावों और चिंताओं को सीधे सुनना भी है। कैंपस में मंत्री युवाओं से शिक्षा, रोजगार, स्किल डेवलपमेंट, परीक्षा व्यवस्था और देश से जुड़े दूसरे मुद्दों पर चर्चा कर सकते हैं।

    हर दिन एक यूनिवर्सिटी में पहुंचेगा मंत्री

    प्रस्तावित योजना के तहत अलग-अलग केंद्रीय मंत्रियों को देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों का दौरा करने की जिम्मेदारी दी जा सकती है। इसका उद्देश्य केंद्र सरकार और युवा वर्ग के बीच संवाद को ज्यादा प्रत्यक्ष बनाना है।

    अभी आमतौर पर छात्रों और केंद्र सरकार के बीच संवाद मंत्रालयों, आधिकारिक कार्यक्रमों या डिजिटल माध्यमों तक सीमित रहता है। ऐसे में मंत्रियों के सीधे विश्वविद्यालयों में पहुंचने से छात्रों को अपनी समस्याएं सरकार के प्रतिनिधियों के सामने रखने का अवसर मिल सकता है।

    प्रह्लाद जोशी और मनसुख मांडविया को समन्वय की जिम्मेदारी

    सूत्रों के अनुसार, शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी और युवा मामले एवं खेल मंत्री मनसुख मांडविया को इस प्रस्तावित अभियान के समन्वय की जिम्मेदारी दी गई है। दोनों मंत्री विश्वविद्यालयों और दूसरे केंद्रीय मंत्रियों के साथ मिलकर इसकी रूपरेखा तैयार कर सकते हैं।

    बताया जा रहा है कि इस प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में भी चर्चा हुई है। हालांकि, कार्यक्रम के अंतिम स्वरूप और इसे कब से शुरू किया जाएगा, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

    परीक्षा विवादों के बीच छात्रों तक पहुंचने की कवायद

    सरकार की यह पहल ऐसे समय में प्रस्तावित है, जब देश में प्रतियोगी परीक्षाओं और परीक्षा व्यवस्था को लेकर छात्र संगठनों की ओर से लगातार सवाल उठाए जाते रहे हैं। NEET समेत कई परीक्षाओं को लेकर छात्रों के आंदोलन और राजनीतिक विवाद सामने आए हैं।

    ऐसे माहौल में केंद्रीय मंत्रियों का सीधे विश्वविद्यालय परिसरों में जाकर छात्रों से बातचीत करना सरकार की युवा वर्ग के साथ संवाद बढ़ाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। इससे छात्रों की शिकायतों और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को सीधे सरकार तक पहुंचाने का रास्ता भी बन सकता है।

    देशभर के विश्वविद्यालयों तक पहुंचने की तैयारी

    देश में केंद्रीय, राज्य, निजी और डीम्ड विश्वविद्यालयों की बड़ी संख्या है। ऐसे में अगर ‘वन डे, वन यूनिवर्सिटी’ अभियान को व्यापक स्तर पर लागू किया जाता है, तो आने वाले समय में अलग-अलग राज्यों के विश्वविद्यालयों में केंद्रीय मंत्रियों की नियमित यात्राएं देखने को मिल सकती हैं।

    हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि अभियान में केवल केंद्रीय विश्वविद्यालयों को शामिल किया जाएगा या निजी और राज्य विश्वविद्यालयों को भी इसका हिस्सा बनाया जाएगा। योजना के अंतिम स्वरूप के सामने आने के बाद ही यह साफ होगा कि सरकार इसे कितने बड़े स्तर पर लागू करती है।

  • तमिलनाडु में विजय सरकार ने छात्रों को CJP और वामपंथी प्रदर्शनों से दूर रखने वाला विवादित आदेश वापस लिया

    तमिलनाडु में विजय सरकार ने छात्रों को CJP और वामपंथी प्रदर्शनों से दूर रखने वाला विवादित आदेश वापस लिया

    नई दिल्ली । तमिलनाडु में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली सरकार ने छात्रों को कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP और वामपंथी संगठनों के प्रदर्शनों में शामिल होने से रोकने वाला अपना निर्देश वापस ले लिया है। सरकार की ओर से यह फैसला 19 अगस्त को लिया गया। इससे पहले 14 अगस्त को कॉलेजिएट शिक्षा निदेशालय की ओर से संबंधित विभागों और संस्थानों को निर्देश जारी किया गया था।

    इस निर्देश में स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थियों तथा युवाओं को राजनीतिक प्रदर्शनों और आंदोलनों में शामिल होने से रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा गया था। संबंधित प्रशासनिक और शैक्षणिक अधिकारियों से इस दिशा में कार्रवाई करने की अपेक्षा की गई थी। आदेश सामने आने के बाद तमिलनाडु की राजनीति में इसको लेकर बहस तेज हो गई।

    निर्देश में विशेष रूप से CJP और वामपंथी दलों की ओर से आयोजित आंदोलनों का उल्लेख किया गया था। सरकार का रुख छात्रों को राजनीतिक गतिविधियों से दूर रखने पर केंद्रित था, लेकिन इस व्यवस्था को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर सवाल उठने लगे। आलोचकों ने इसे छात्रों की राजनीतिक अभिव्यक्ति और लोकतांत्रिक गतिविधियों में भागीदारी से जोड़कर देखा।

    CJP ने सरकार के इस कदम का विरोध करते हुए निर्देश को असंवैधानिक बताया था। संगठन का कहना था कि छात्रों को किसी खास राजनीतिक आंदोलन में शामिल होने से रोकने के लिए प्रशासनिक निर्देश जारी करना उनके अधिकारों के दायरे से जुड़ा गंभीर विषय है। आदेश वापस लिए जाने के बाद इस विवाद को लेकर सरकार का रुख पहले की तुलना में बदला हुआ दिखाई दिया।

    इस पूरे घटनाक्रम में भारतीय जनता पार्टी की प्रतिक्रिया भी सामने आई थी। भाजपा नेता विनोज पी. सेल्वम ने सरकार के शुरुआती निर्देश का समर्थन करते हुए CJP और वामपंथी संगठनों पर छात्रों को प्रभावित करने का आरोप लगाया था। उन्होंने दावा किया था कि ऐसे संगठन युवाओं को आंदोलनों में शामिल करते हैं और बाद में उन्हें परिस्थितियों का सामना करने के लिए छोड़ देते हैं।

    तमिलनाडु की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम ने राज्य की राजनीति में नई भूमिका बनाई है। सरकार के गठन में कांग्रेस और वामपंथी दलों के समर्थन का भी राजनीतिक संदर्भ मौजूद है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार वामपंथी दलों ने सरकार को समर्थन दिया है, जबकि उनके किसी नेता को मंत्रिमंडल में स्थान नहीं मिला है।

    ऐसे में छात्रों को वामपंथी संगठनों और CJP के प्रदर्शनों से दूर रखने वाला निर्देश राजनीतिक रूप से भी चर्चा का विषय बन गया था। सरकार द्वारा इसे वापस लेने के बाद अब संबंधित संस्थानों के लिए पहले जारी प्रतिबंधात्मक निर्देश प्रभावी नहीं रहेगा।

    यह घटनाक्रम तमिलनाडु में छात्र राजनीति, राजनीतिक भागीदारी और प्रशासनिक निर्देशों को लेकर चल रही व्यापक बहस के बीच सामने आया है। सरकार का आदेश वापस लेना इस बात का संकेत है कि फिलहाल छात्रों को इन प्रदर्शनों से दूर रखने संबंधी पहले जारी निर्देश को आगे लागू नहीं किया जाएगा।

    हालांकि, राजनीतिक दलों और संगठनों की प्रतिक्रियाओं के बीच यह मुद्दा राज्य की राजनीति में आगे भी चर्चा का विषय बना रह सकता है। सरकार के फैसले ने एक ओर प्रशासनिक स्तर पर जारी निर्देश को समाप्त किया है, वहीं दूसरी ओर छात्रों की राजनीतिक गतिविधियों में भागीदारी और संस्थानों की भूमिका को लेकर नए सवाल भी सामने रखे हैं।

  • भोपाल के पनिया गांव में स्वतंत्रता दिवस पर कीचड़ भरे रास्ते से तिरंगा लेकर स्कूल पहुंचे बच्चे, जर्जर भवन से गिरा प्लास्टर

    भोपाल के पनिया गांव में स्वतंत्रता दिवस पर कीचड़ भरे रास्ते से तिरंगा लेकर स्कूल पहुंचे बच्चे, जर्जर भवन से गिरा प्लास्टर

    भोपाल। देश भर में स्वतंत्रता दिवस का पर्व अत्यंत हर्षोल्लास और देशभक्ति के वातावरण में मनाया गया। इस राष्ट्रीय पर्व के अवसर पर शैक्षणिक संस्थानों में ध्वजारोहण और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। हालांकि, मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से सटे एक ग्रामीण क्षेत्र से सामने आई तस्वीरों ने प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था और तटीय व ग्रामीण बुनियादी ढांचे की वास्तविक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, भोपाल जिले की बैरसिया तहसील के पनिया गांव में स्कूली छात्र हाथों में राष्ट्रीय ध्वज थामे अत्यंत कठिन परिस्थितियों को पार करते हुए विद्यालय पहुंचे। क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश के कारण स्कूल तक पहुंचने वाला मार्ग पूरी तरह से कीचड़ और जलभराव में तब्दील हो चुका था। छोटे-छोटे बच्चों को इसी दुर्गम रास्ते से गुजरकर ध्वजारोहण समारोह में भाग लेने के लिए जाना पड़ा।

    परेशानियों का सिलसिला केवल खराब रास्ते तक ही सीमित नहीं रहा। जब छात्र विद्यालय परिसर में पहुंचे, तो वहां जर्जर भवन की खतरनाक स्थिति सामने आई। विद्यालय के एक कमरे की छत का प्लास्टर टूटकर जमीन पर गिर गया, जिससे वहां उपस्थित लोगों और अभिभावकों के बीच चिंता का माहौल बन गया। इस प्रकार की स्थिति में दैनिक रूप से पठन-पाठन कार्य संचालित होना बच्चों की सुरक्षा के लिए एक बड़ा जोखिम माना जा रहा है।

    तमाम विपरीत परिस्थितियों और प्रशासनिक अव्यवस्थाओं के बावजूद विद्यार्थियों के उत्साह में कोई कमी देखने को नहीं मिली। छात्रों ने अनुशासित रूप से पंक्तिबद्ध होकर राष्ट्रीय ध्वज फहराया और पूरे सम्मान के साथ राष्ट्रगान का गायन किया। बच्चों के चेहरे पर देशभक्ति का भाव स्पष्ट दिखाई दे रहा था, जबकि पृष्ठभूमि में जर्जर इमारत और कीचड़युक्त परिसर व्यवस्थागत कमियों को उजागर कर रहा था।

    मध्य प्रदेश के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में मानसून के मौसम के दौरान इस प्रकार की समस्याएं अक्सर सामने आती रहती हैं। ग्रामीण इलाकों में पक्के संपर्कों और बुनियादी सुविधाओं के अभाव में बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय पहुंचने में भारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। पनिया गांव की यह घटना यह दर्शाती है कि जमीनी स्तर पर मूलभूत सुविधाओं का विकास अभी भी एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती बना हुआ है।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला स्तरीय वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने घटनाक्रम पर संज्ञान लेने की बात कही है। जिला कलेक्टर ने मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है और आश्वस्त किया है कि संबंधित विभाग के माध्यम से विद्यालय भवन की मरम्मत तथा पहुंच मार्ग को दुरुस्त करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। स्थानीय निवासियों ने भी प्रशासन से शीघ्र अति शीघ्र नए भवन और पक्की सड़क की मांग की है।

    स्थानीय समुदाय का मानना है कि बच्चों के उज्ज्वल भविष्य और सुरक्षा के लिए सुरक्षित कक्षाएं, पेयजल और पक्के पहुंच मार्ग जैसी मूलभूत सुविधाएं प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराई जानी चाहिए। जर्जर इमारतों की समय पर मरम्मत न होने से कभी भी कोई बड़ी दुर्घटना घटित हो सकती है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग की होगी।

    फिलहाल, इस घटना के बाद से स्थानीय स्तर पर शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर व्यापक चर्चा हो रही है। देखना होगा कि प्रशासनिक आश्वासन के बाद पनिया गांव के इस प्राथमिक विद्यालय का जीर्णोद्धार कब तक पूरा हो पाता है और छात्रों को एक सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण कब उपलब्ध कराया जाता है।

  • चीन में धर्म की भी 'जासूसी'! अस्पताल से स्कूल तक आस्था पर निगरानी, मांगी जा रही जानकारी

    चीन में धर्म की भी 'जासूसी'! अस्पताल से स्कूल तक आस्था पर निगरानी, मांगी जा रही जानकारी


    नई दिल्ली। चीन में धार्मिक मान्यताओं पर सरकारी निगरानी का दायरा बढ़ने का दावा किया जा रहा है। चेंगदू के एक सरकारी अस्पताल में स्थायी कर्मचारियों के अलावा कॉन्ट्रैक्ट और अस्थायी कर्मचारियों से भी उनकी धार्मिक आस्था की जानकारी मांगे जाने की बात सामने आई है। कर्मचारियों से पूछा गया कि वे किसी धर्म को मानते हैं या नहीं। यहां तक कि किसी धर्म को न मानने वालों की जानकारी भी दर्ज करने की बात कही गई है।

    रिपोर्ट के मुताबिक, अस्पताल ने इसे कर्मचारियों की धार्मिक मान्यताओं से जुड़ा एक बड़ा सर्वे बताया और इसे वैचारिक, जातीय एवं धार्मिक मामलों की नियमित जांच से जोड़ा गया। इस प्रक्रिया में कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य भी शामिल बताए गए हैं। चीन में पार्टी सदस्यों के लिए धार्मिक आस्था रखने पर प्रतिबंध होने की बात कही जाती है। ऐसे में किसी कर्मचारी के खुद को धार्मिक बताने पर उसे अपनी पार्टी शाखा को इसकी जानकारी देने के लिए कहा गया।

    स्कूलों में छात्रों और परिवारों की भी जानकारी

    धार्मिक पहचान की कथित निगरानी केवल सरकारी अस्पतालों तक सीमित नहीं बताई जा रही। रिपोर्ट में सिचुआन के एक विश्वविद्यालय के प्रशासनिक कर्मचारी के हवाले से कहा गया है कि शिक्षण संस्थानों में छात्रों के साथ-साथ उनके परिवारों की धार्मिक पृष्ठभूमि की जानकारी भी जुटाई जा रही है और इसे उच्च अधिकारियों तक भेजा जाता है।

    चेंगदू शिक्षा विभाग से जुड़े एक कर्मचारी के मुताबिक, बच्चों के स्कूल में दाखिले से पहले उनके परिवारों की नियमित पृष्ठभूमि जांच होती है। इसमें परिवार की धार्मिक पहचान से जुड़ी जानकारी भी शामिल होने का दावा किया गया है। यानी कथित तौर पर निगरानी सिर्फ व्यक्ति की धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके परिवार की पृष्ठभूमि तक भी पहुंच रही है।

    ‘सिनिसाइजेशन ऑफ रिलिजन’ के तहत बढ़ा नियंत्रण

    चीन में धार्मिक गतिविधियों पर कम्युनिस्ट पार्टी का नियंत्रण पहले से ही सख्त रहा है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नेतृत्व में धार्मिक मामलों पर पार्टी की निगरानी और मजबूत करने पर जोर दिया गया है। चीन की ‘सिनिसाइजेशन ऑफ रिलिजन’ नीति के तहत धार्मिक संगठनों और उनकी गतिविधियों को चीनी राजनीतिक एवं सांस्कृतिक प्राथमिकताओं के अनुरूप ढालने की कोशिश की जाती है।

  • अभिजीत दीपके ने सौरव दास का किया समर्थन, बोले उनके वीडियो से लॉ छात्रों का भविष्य बचा और सवाल उठाना जरूरी है

    अभिजीत दीपके ने सौरव दास का किया समर्थन, बोले उनके वीडियो से लॉ छात्रों का भविष्य बचा और सवाल उठाना जरूरी है


    नई दिल्ली । 
    अभिजीत दीपके ने सौरव दास के समर्थन में बयान देते हुए कहा है कि वह देश और विशेष रूप से कानून की पढ़ाई कर रहे छात्रों के हित में काम कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि सौरव दास के एक वीडियो के सामने आने के बाद बार काउंसिल के चेयरमैन ने अपना नोटिफिकेशन वापस ले लिया था। दीपके के मुताबिक इससे बड़ी संख्या में लॉ छात्रों का भविष्य प्रभावित होने से बच गया।

    अभिजीत दीपके ने कहा कि सौरव दास का प्रयास देश के लिए सकारात्मक है और कानून के छात्रों के लिए भी इसका महत्व है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कोई व्यक्ति सार्वजनिक हित से जुड़े मुद्दे पर अपनी बात रख रहा है तो उसे जानबूझकर परेशान करने की कोशिश क्यों की जानी चाहिए।

    उन्होंने सौरव दास और उनके परिवार से जुड़े एक अन्य घटनाक्रम का भी उल्लेख किया। दीपके के अनुसार दिल्ली में एक यूट्यूबर सौरव दास के घर में प्रवेश कर गया था। उन्होंने इस घटनाक्रम को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि सौरव और उनके परिवार को इस तरह परेशान करने की जरूरत नहीं होनी चाहिए थी।

    दीपके ने यह भी सवाल उठाया कि परिवार के सदस्यों से उनकी निजी गतिविधियों और कामकाज से जुड़े सवाल क्यों किए गए। उन्होंने विशेष रूप से सौरव की मां को इस पूरे मामले में शामिल किए जाने पर आपत्ति जताई। उनके अनुसार परिवार को अनावश्यक रूप से परेशान करने की स्थिति पैदा नहीं होनी चाहिए।

    सौरव दास ने इससे पहले पुडुचेरी में अपने परिवार को पुलिस की ओर से डराए और धमकाए जाने का आरोप लगाया था। हालांकि, पुलिस ने इन आरोपों को खारिज किया था। पुलिस की ओर से बताया गया कि अधिकारी सौरव दास के रिश्तेदारों के घर जरूर गए थे, लेकिन यह कार्रवाई नियमित सुरक्षा प्रक्रिया का हिस्सा थी।

    पुलिस के अनुसार स्वतंत्रता दिवस जैसे महत्वपूर्ण अवसरों से पहले संवेदनशील स्थानों और प्रमुख मार्गों के आसपास रहने वाले लोगों के घर जाकर सुरक्षा संबंधी जानकारी जुटाई जाती है। इसी प्रक्रिया के तहत सौरव दास के रिश्तेदारों के घर भी पुलिस पहुंची थी। पुलिस ने किसी तरह की धमकी या परेशान किए जाने के आरोपों से इनकार किया था।

    इस पूरे मामले के बीच अभिजीत दीपके ने सौरव दास के काम को लेकर अपना समर्थन दोहराया। उन्होंने कहा कि देश में कानून के छात्रों के भविष्य और शिक्षा से जुड़े विषयों पर आवाज उठाना जरूरी है। उनके अनुसार यदि किसी मुद्दे पर बदलाव की जरूरत है तो उसके बारे में सवाल पूछे जाने चाहिए और संबंधित व्यवस्था से जवाब मांगा जाना चाहिए।

    स्कूलों की स्थिति को लेकर भी अभिजीत दीपके ने अपनी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी देश के कई बच्चे बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनके अनुसार शिक्षा व्यवस्था में मूलभूत सुविधाओं की कमी दूर किए बिना देश की वास्तविक प्रगति संभव नहीं है।

    उन्होंने कहा कि बच्चों को बेहतर शिक्षा और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना प्राथमिकता होनी चाहिए। उनका मानना है कि शिक्षा के क्षेत्र में सुधार का सीधा संबंध देश के भविष्य से है और इस दिशा में लगातार काम करने की जरूरत है।

    सौरव दास से जुड़े विवाद में फिलहाल उनके आरोपों और पुलिस के स्पष्टीकरण के अलग-अलग पक्ष सामने आए हैं। वहीं अभिजीत दीपके ने स्पष्ट रूप से सौरव के प्रयासों का समर्थन किया है और उनके खिलाफ होने वाली किसी भी अनावश्यक कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। मामले को लेकर आगे होने वाले घटनाक्रम पर अब नजर रहेगी।