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  • NCERT की कक्षा 9 की नई किताब में SIR के बारे में पढ़ेंगे बच्चे, समाजवाद-धर्मनिरपेक्षता की पुरानी व्याख्या हटाई

    NCERT की कक्षा 9 की नई किताब में SIR के बारे में पढ़ेंगे बच्चे, समाजवाद-धर्मनिरपेक्षता की पुरानी व्याख्या हटाई


    नई दिल्ली। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने कक्षा 9 की नई पाठ्यपुस्तक में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। इस बार छात्रों को चुनाव प्रक्रिया से जुड़े स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बारे में पढ़ाया जाएगा। वहीं, समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता और लोकतंत्र से संबंधित कुछ व्याख्याओं को पहले की तुलना में बदले हुए स्वरूप में प्रस्तुत किया गया है। नई सामग्री का उद्देश्य विद्यार्थियों को संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था की व्यापक समझ देना बताया गया है। इन बदलावों को लेकर शिक्षा और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।

    संविधान की व्याख्या का बदला स्वरूप
    नई पुस्तक में संविधान को समझाने का तरीका भी बदला गया है। इसमें संविधान निर्माण की प्रक्रिया, संविधान सभा की भूमिका और देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं के कार्यों पर अधिक जोर दिया गया है। इसके अलावा समानता, स्वतंत्रता, अधिकार और नागरिकों की जिम्मेदारियों जैसे विषयों को भी प्रमुखता से शामिल किया गया है।

    पहले की पुस्तकों में संविधान की प्रस्तावना और उसमें शामिल शब्दों की विस्तृत व्याख्या दी जाती थी, जबकि नई किताब में प्रस्तावना को सीधे तौर पर शामिल नहीं किया गया है। साथ ही समाजवाद और धर्मनिरपेक्षता जैसे शब्दों को भी पहले की तरह विस्तार से प्रस्तुत नहीं किया गया है।

    पहली बार कक्षा 9 के पाठ्यक्रम में इमरजेंसी
    नई किताब में पहली बार वर्ष 1975 की इमरजेंसी को भी शामिल किया गया है। इसमें बताया गया है कि उस दौर में देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ा और उस समय लिए गए फैसलों को लेकर किस तरह की चर्चाएं हुईं। इसे लोकतंत्र के सामने आने वाली चुनौतियों के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

    SIR को पाठ्यक्रम में क्यों मिली जगह
    पुस्तक में चुनाव आयोग की जिम्मेदारियों के साथ स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया को भी समझाया गया है। इसमें बताया गया है कि मतदाता सूची को अद्यतन और त्रुटिरहित बनाए रखने की प्रक्रिया किस प्रकार पूरी की जाती है।

    चार विषय अब एक ही पुस्तक में
    इस बार इतिहास, भूगोल, राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र को अलग-अलग पुस्तकों के बजाय एकीकृत कर एक ही पुस्तक में शामिल किया गया है। NCERT का उद्देश्य विद्यार्थियों को विभिन्न विषयों के बीच आपसी संबंधों की समग्र समझ प्रदान करना है।

    शिक्षा मंत्री का बयान
    केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि विद्यार्थियों को देश के इतिहास और लोकतंत्र से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी होना आवश्यक है। उनके अनुसार, ऐसे विषयों का अध्ययन करने से नई पीढ़ी में देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और इतिहास के प्रति बेहतर समझ विकसित होगी।

  • नीट परीक्षा के लिए जबलपुर तैयार, 23 केंद्रों पर 10 हजार से अधिक छात्र देंगे परीक्षा; राष्ट्रपति और CM के दौरे के बीच विशेष इंतजाम

    नीट परीक्षा के लिए जबलपुर तैयार, 23 केंद्रों पर 10 हजार से अधिक छात्र देंगे परीक्षा; राष्ट्रपति और CM के दौरे के बीच विशेष इंतजाम


    मध्य प्रदेश । राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) को लेकर जबलपुर जिला प्रशासन ने व्यापक स्तर पर तैयारियां पूरी कर ली हैं। 21 जून को आयोजित होने वाली इस महत्वपूर्ण परीक्षा में जिले के 23 केंद्रों पर 10 हजार से अधिक छात्र शामिल होंगे। परीक्षा की निष्पक्षता, सुरक्षा और छात्रों की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए प्रशासन ने कई विशेष इंतजाम किए हैं। खास बात यह है कि इसी दिन राष्ट्रपति, राज्यपाल और मुख्यमंत्री का भी प्रस्तावित दौरा है, जिसके चलते प्रशासन ने परीक्षा और वीवीआईपी मूवमेंट दोनों को ध्यान में रखते हुए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है।

    नीट परीक्षा देश की सबसे महत्वपूर्ण प्रवेश परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। हाल ही में परीक्षा प्रक्रिया को लेकर उठे विवादों और परीक्षा रद्द होने की घटनाओं के बाद इस बार सुरक्षा और पारदर्शिता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। केंद्र और राज्य सरकार के निर्देशों के अनुसार सभी परीक्षा केंद्रों पर कड़े सुरक्षा प्रबंध किए गए हैं।

    जबलपुर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने बताया कि जिले में 23 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, जहां कुल 10,426 विद्यार्थी परीक्षा देंगे। छात्रों को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए पहली बार प्रशासन की ओर से परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने के लिए बसों की व्यवस्था की गई है। शहर के पेंटीनाका चौक से दोपहर 12 बजे तक विद्यार्थियों के लिए विशेष बस सेवा उपलब्ध रहेगी, जिससे दूर-दराज से आने वाले छात्रों को राहत मिलेगी।

    परीक्षा के दौरान गर्मी और मौसम की चुनौतियों को देखते हुए भी विशेष प्रबंध किए गए हैं। सभी परीक्षा केंद्रों पर निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। परीक्षा कक्षों में पंखों और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की गई है ताकि छात्र आरामदायक वातावरण में परीक्षा दे सकें। वहीं परीक्षा केंद्रों के बाहर अभिभावकों के बैठने के लिए अस्थायी शेड तैयार किए जा रहे हैं, जहां कूलर, पंखे और पेयजल की सुविधा उपलब्ध रहेगी।

    प्रशासन ने अभिभावकों के लिए अस्थायी कैंटीन की भी व्यवस्था की है। परीक्षा के दौरान कई घंटों तक बाहर इंतजार करने वाले परिजनों को भोजन और नाश्ते की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे उन्हें किसी प्रकार की असुविधा न हो।

    सुरक्षा के लिहाज से भी इस बार विशेष सतर्कता बरती जा रही है। परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे, बायोमैट्रिक मशीनें और जैमर लगाए जाएंगे। प्रशासन के अनुसार 19 जून तक सभी उपकरण स्थापित कर दिए जाएंगे, जबकि 20 जून को उनका अंतिम परीक्षण किया जाएगा। परीक्षा केंद्रों की निगरानी लगातार की जाएगी ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या अनुचित गतिविधि को रोका जा सके।

    इस बार एक और बड़ी चुनौती प्रशासन के सामने है। 21 जून को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, राज्यपाल मंगूभाई पटेल और मुख्यमंत्री मोहन यादव का भी जबलपुर दौरा प्रस्तावित है। ऐसे में परीक्षा केंद्रों तक छात्रों की सुगम आवाजाही और वीवीआईपी मूवमेंट के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए विशेष ट्रैफिक और सुरक्षा योजना तैयार की गई है। अधिकारियों का कहना है कि छात्रों को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए सभी संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

    प्रशासन का दावा है कि इस बार नीट परीक्षा को पूरी पारदर्शिता, सुरक्षा और बेहतर व्यवस्थाओं के साथ संपन्न कराया जाएगा। छात्रों और अभिभावकों की सुविधा को केंद्र में रखते हुए किए गए ये इंतजाम परीक्षा दिवस को सुचारु और सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

  • तेलंगाना में विकास को मिली नई रफ्तार, छात्रों के लिए मिड-डे मील से लेकर लाखों घरों तक सरकार ने खोला सौगातों का पिटारा

    तेलंगाना में विकास को मिली नई रफ्तार, छात्रों के लिए मिड-डे मील से लेकर लाखों घरों तक सरकार ने खोला सौगातों का पिटारा


    नई दिल्ली। तेलंगाना में विकास को नई गति देने की दिशा में सरकार ने कई महत्वपूर्ण फैसले लेकर राज्य के भविष्य की बड़ी तस्वीर पेश करने की कोशिश की है। शिक्षा, आवास, रोजगार और आधारभूत सुविधाओं से जुड़े नए निर्णयों ने यह संकेत दिया है कि सरकार अब विकास के बहुआयामी मॉडल पर काम कर रही है। हालिया फैसलों को राज्य के सामाजिक और आर्थिक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इन योजनाओं का उद्देश्य केवल तात्कालिक लाभ देना नहीं बल्कि लंबे समय में राज्य की विकास यात्रा को नई पहचान देना भी माना जा रहा है।

    सरकार ने छात्रों से जुड़े एक महत्वपूर्ण निर्णय के तहत उच्च कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए पोषण संबंधी सुविधा का दायरा बढ़ाने की दिशा में कदम उठाया है। माना जा रहा है कि यह फैसला छात्रों की सेहत, पढ़ाई में एकाग्रता और विद्यालयों में नियमित उपस्थिति बढ़ाने में सहायक हो सकता है। शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ लंबे समय से इस तरह की पहल की आवश्यकता पर जोर देते रहे हैं। अब इसे लागू किए जाने से बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को सीधा लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है।

    इसी के साथ आवास क्षेत्र में भी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। आर्थिक रूप से कमजोर और निम्न आय वर्ग के परिवारों को आवास उपलब्ध कराने के लिए बड़े स्तर पर घरों को स्वीकृति देने का निर्णय लिया गया है। तेजी से बढ़ते शहरीकरण और आवासीय जरूरतों को देखते हुए इसे सामाजिक सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है। सरकार का मानना है कि पक्के घर केवल रहने की सुविधा नहीं बल्कि सामाजिक और आर्थिक स्थिरता का आधार भी होते हैं।

    विकास की इस योजना में रोजगार और औद्योगिक निवेश को भी प्रमुख स्थान दिया गया है। राज्य को भविष्य की औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने के लिए नई नीतियों को बढ़ावा देने की दिशा में भी कदम बढ़ाए गए हैं। सरकार आने वाले वर्षों में बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित करने और रोजगार के अवसर बढ़ाने की रणनीति पर काम करती दिखाई दे रही है। यदि योजनाएं तय लक्ष्यों के अनुसार आगे बढ़ती हैं तो इससे युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर मिल सकते हैं।

    इसके अलावा सरकार ने बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और सार्वजनिक सेवाओं में सुधार के लिए भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। बिजली व्यवस्था, सिंचाई परियोजनाएं और अन्य आधारभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने के प्रयास विकास के व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा माने जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी राज्य की प्रगति केवल नई योजनाओं से नहीं बल्कि उनकी मजबूत आधारभूत संरचना से तय होती है।

    राज्य में लगातार बढ़ती आबादी और बदलती जरूरतों के बीच विकास की चुनौतियां भी बढ़ रही हैं। ऐसे समय में शिक्षा, आवास, रोजगार और इंफ्रास्ट्रक्चर को एक साथ प्राथमिकता देना संतुलित विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है। आने वाले समय में इन योजनाओं का प्रभाव जमीन पर किस स्तर तक दिखाई देता है, इस पर लोगों की नजर बनी रहेगी।

    फिलहाल सरकार के इन फैसलों ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि राज्य विकास की गति को तेज करने और समाज के विभिन्न वर्गों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए व्यापक स्तर पर काम करने की तैयारी कर रहा है। आने वाले वर्षों में इन पहलों के परिणाम राज्य की विकास यात्रा को नई दिशा दे सकते हैं।

  • आईसीएसई-आईएससी परिणाम 2026: छात्राओं ने फिर मारी बाजी, दोनों कक्षाओं में रिकॉर्ड पास प्रतिशत दर्ज

    आईसीएसई-आईएससी परिणाम 2026: छात्राओं ने फिर मारी बाजी, दोनों कक्षाओं में रिकॉर्ड पास प्रतिशत दर्ज

    नई दिल्ली । देशभर के लाखों छात्रों के लिए इंतजार की घड़ी आखिरकार खत्म हो गई है, क्योंकि आईसीएसई और आईएससी बोर्ड के वर्ष 2026 के परिणाम घोषित कर दिए गए हैं। परिणाम जारी होते ही छात्रों और अभिभावकों के बीच उत्साह और राहत का माहौल देखने को मिला। इस बार के नतीजों में एक बार फिर छात्रों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए सफलता का नया स्तर स्थापित किया है।

    10वीं और 12वीं दोनों कक्षाओं के परिणाम इस बार बेहद प्रभावशाली रहे हैं। 10वीं कक्षा में कुल 99.18 प्रतिशत छात्रों ने सफलता प्राप्त की, जबकि 12वीं कक्षा में 99.13 प्रतिशत छात्र उत्तीर्ण हुए हैं। यह आंकड़े इस बात को दर्शाते हैं कि इस वर्ष की परीक्षाओं में छात्रों ने पूरी मेहनत और तैयारी के साथ भाग लिया।

    लिंग आधारित प्रदर्शन की बात करें तो इस बार भी छात्राओं ने छात्रों की तुलना में बेहतर परिणाम हासिल किए हैं। 10वीं में छात्राओं का पास प्रतिशत 99.46 रहा, जबकि छात्रों का 98.93 प्रतिशत दर्ज किया गया। इसी तरह 12वीं में भी छात्राओं ने 99.48 प्रतिशत के साथ बेहतर प्रदर्शन किया, जबकि छात्रों का पास प्रतिशत 98.81 रहा। यह लगातार देखा जा रहा है कि शैक्षणिक प्रदर्शन में छात्राएं लगातार आगे निकल रही हैं।

    इस वर्ष दोनों कक्षाओं में मिलाकर चार लाख से अधिक छात्र परीक्षा में शामिल हुए थे। इनमें 10वीं कक्षा के लगभग डेढ़ लाख और 12वीं कक्षा के लगभग ढाई लाख से अधिक छात्र शामिल थे। परीक्षा का आयोजन निर्धारित केंद्रों पर सफलतापूर्वक संपन्न हुआ था, जिसमें छात्रों ने विभिन्न विषयों में अपनी योग्यता का प्रदर्शन किया।

    परीक्षा परिणाम जारी होने के बाद छात्रों को अपना स्कोरकार्ड प्राप्त करने की सुविधा भी दी गई है। छात्र अपने यूनिक आईडी और अन्य आवश्यक विवरणों की मदद से अपना परिणाम देख सकते हैं और उसे डाउनलोड भी कर सकते हैं। इसके लिए ऑनलाइन माध्यम के साथ-साथ अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है, जिससे छात्रों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

    इस बार के परिणामों ने एक बार फिर शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर सुधार और छात्रों की बढ़ती क्षमता को उजागर किया है। शिक्षकों और अभिभावकों ने भी छात्रों की इस उपलब्धि पर खुशी जताई है और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।

  • अब नहीं छूटेगा साल 5वीं 8वीं के फेल और अनुपस्थित छात्रों के लिए जून में फिर परीक्षा

    अब नहीं छूटेगा साल 5वीं 8वीं के फेल और अनुपस्थित छात्रों के लिए जून में फिर परीक्षा


    भोपाल । मध्यप्रदेश के भोपाल सहित पूरे प्रदेश में कक्षा 5वीं और 8वीं के छात्रों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है जहां फेल और अनुपस्थित विद्यार्थियों को एक और मौका दिया जा रहा है। राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार अब ये छात्र 1 जून से 6 जून 2026 के बीच आयोजित होने वाली पुन परीक्षा में शामिल हो सकेंगे जिससे उनका एक शैक्षणिक वर्ष बच सकता है।

    शिक्षण सत्र 2025 26 की मुख्य परीक्षा में असफल या अनुपस्थित रहने वाले विद्यार्थियों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है। इस पुन परीक्षा में सरकारी मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों अनुदान प्राप्त संस्थानों और पंजीकृत मदरसों में पढ़ने वाले छात्र भी शामिल होंगे। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी छात्र की पढ़ाई केवल एक परीक्षा के कारण बाधित न हो।

    परीक्षा में शामिल होने वाले विद्यार्थियों के लिए प्रवेश पत्र 25 मई तक उपलब्ध करा दिए जाएंगे। छात्र अपना एडमिट कार्ड राज्य शिक्षा केंद्र के आधिकारिक पोर्टल www.rskmp.in से डाउनलोड कर सकेंगे। इसके लिए शाला प्रमुख जनशिक्षा केंद्र प्रभारी और संबंधित अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है कि सभी छात्रों तक समय पर प्रवेश पत्र पहुंचाया जाए।

    पुन परीक्षा की तैयारी को लेकर भी खास व्यवस्था की गई है। परीक्षा से पहले शाला स्तर पर विषयवार अतिरिक्त कक्षाएं संचालित की जाएंगी ताकि छात्र बेहतर तरीके से तैयारी कर सकें। जिन छात्रों ने पहले प्रोजेक्ट कार्य पूरा नहीं किया था या जिनके अंक कम थे उन्हें दोबारा प्रोजेक्ट पूरा करने और मूल्यांकन का अवसर भी दिया जाएगा।

    इस बार परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था भी अलग तरीके से की गई है। सभी परीक्षा केंद्र जनशिक्षा केंद्र स्तर पर बनाए जाएंगे ताकि परीक्षा प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी रहे। यदि किसी केंद्र पर 500 से अधिक छात्र होते हैं तो राज्य शिक्षा केंद्र की अनुमति से अतिरिक्त केंद्र भी बनाए जा सकेंगे।

    परीक्षा की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए प्रश्न पत्रों की ऑन द स्पॉट प्रिंटिंग की जाएगी। यानी प्रश्न पत्र सीधे परीक्षा केंद्र पर ही डाउनलोड और प्रिंट किए जाएंगे जिससे लीक जैसी समस्याओं की संभावना कम होगी।

    गर्मी के मौसम को देखते हुए छात्रों की सुरक्षा के लिए भी विशेष इंतजाम किए गए हैं। हर परीक्षा केंद्र पर पीने के पानी की पर्याप्त व्यवस्था रहेगी। साथ ही बच्चों को नियमित अंतराल पर पानी पिलाने लू और डिहाइड्रेशन से बचाने के लिए ORS उपलब्ध कराने और जरूरत पड़ने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।

    कुल मिलाकर यह पहल उन छात्रों के लिए एक बड़ी राहत है जो किसी कारणवश मुख्य परीक्षा में सफल नहीं हो पाए थे। अब उनके पास अपनी मेहनत से खुद को साबित करने और अगली कक्षा में आगे बढ़ने का एक और सुनहरा अवसर है।

  • नर्मदापुरम में प्रतिभाओं का सम्मान 52 टॉपर्स को मिला मंच विधायक बोले यही जीवन के टर्निंग पॉइंट

    नर्मदापुरम में प्रतिभाओं का सम्मान 52 टॉपर्स को मिला मंच विधायक बोले यही जीवन के टर्निंग पॉइंट


    नर्मदापुरम । नर्मदापुरम जिले में शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित करने के लिए आयोजित प्रतिभा सम्मान समारोह प्रेरणा और उत्साह का केंद्र बन गया। मप्र माध्यमिक शिक्षा मंडल की 10वीं और 12वीं परीक्षाओं में जिले में शीर्ष स्थान प्राप्त करने वाले 52 विद्यार्थियों को जिला पंचायत सभागार में सम्मानित किया गया। इस अवसर पर कलेक्टर सोमेश मिश्रा की अध्यक्षता में कार्यक्रम आयोजित हुआ, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में विधायक डॉ सीताशरन शर्मा मौजूद रहे।

    कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष राधा पटेल, जनपद अध्यक्ष भूपेंद्र चौकसे और सीईओ हिमांशु जैन सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने विद्यार्थियों को प्रशस्ति पत्र और सम्मान देकर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

    कलेक्टर सोमेश मिश्रा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा जीवन का सबसे बड़ा अस्त्र है, जो व्यक्ति को हर चुनौती से लड़ने की क्षमता देता है। उन्होंने कहा कि 10वीं कक्षा जीवन का पहला महत्वपूर्ण पड़ाव होती है, जहां से भविष्य की नींव मजबूत होती है। इसके बाद 12वीं, उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में निरंतर मेहनत ही सफलता की कुंजी है।

    विधायक डॉ सीताशरन शर्मा ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि 10वीं और 12वीं कक्षा जीवन के दो बड़े टर्निंग पॉइंट होते हैं। 10वीं के बाद विषयों का चयन और 12वीं के बाद करियर का निर्णय व्यक्ति के पूरे भविष्य को दिशा देता है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की इस सफलता से उनके परिवारों में गर्व और खुशी का माहौल है।

    इस वर्ष के परीक्षा परिणामों में खास बात यह रही कि ग्रामीण और सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों ने शानदार प्रदर्शन किया। सीमित संसाधनों के बावजूद इन छात्रों ने अपनी मेहनत और लगन से सफलता हासिल की, जो अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बन गई है।

    पथरौटा के सरकारी स्कूल की छात्रा रितिका कुरुचि ने 12वीं होम साइंस में टॉप कर एक मिसाल पेश की। माता-पिता के साये के बिना दादा-दादी और चाचा-चाची के सहयोग से पढ़ाई करते हुए उन्होंने यह उपलब्धि हासिल की। वहीं तारारोड़ा गांव की आंशिक सराठे ने आर्ट्स संकाय में 93.2 प्रतिशत अंक लाकर पहला स्थान प्राप्त किया। उनके पिता सैलून चलाते हैं, जिससे यह सफलता और भी प्रेरणादायक बन जाती है।

    उत्कृष्ट विद्यालय की शेख जोया ने आर्ट्स में दूसरा स्थान हासिल किया, जिनके पिता बाइक मैकेनिक हैं। गणित में अवनी गोहिया और रशिका राय, विज्ञान में आदित्य लोवंशी और नमामि बसेड़िया, कृषि में कनक चौरे और कॉमर्स में निखिल सोनी तथा शिफा शाह ने भी उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। 10वीं कक्षा में नैना यादव, सोनम परिहार और प्रिंसी साहू टॉपर रहीं।

    जिला शिक्षा अधिकारी लक्ष्मी नारायण प्रजापति के अनुसार, जिले का 10वीं का परिणाम 78 प्रतिशत और 12वीं का 81 प्रतिशत रहा, जिससे नर्मदापुरम को प्रदेश में 16वीं रैंक प्राप्त हुई है। यह समारोह केवल सम्मान का मंच नहीं बल्कि उन संघर्षों और सफलताओं की कहानी भी है, जो यह बताती हैं कि मेहनत और संकल्प से किसी भी परिस्थिति को पार किया जा सकता है।

  • हिन्दी का साउथ में भी दबदबा…. कर्नाटक में 93% छात्रों ने तीसरी भाषा के रूप में किया चयन

    हिन्दी का साउथ में भी दबदबा…. कर्नाटक में 93% छात्रों ने तीसरी भाषा के रूप में किया चयन


    नई दिल्ली।
    हिंदी भाषा (Hindi Language) को लेकर अकसर ही देश में एक वर्ग नॉर्थ बनाम साउथ की डिबेट (North vs. South debate) चलाता रहा है। तमिलनाडु (Tamil Nadu) के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन (Chief Minister MK Stalin) तो कई बार केंद्र सरकार पर आरोप लगा चुके हैं कि हिंदी थोपने का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन यह भी सच है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में हिंदी स्वाभाविक रूप से बड़ी आबादी द्वारा ना सिर्फ स्वीकार की जा रही है बल्कि उसके महत्व को समझते हुए सीखने के प्रयास भी हो रहे हैं। इसका उदाहरण कर्नाटक स्टेट बोर्ड के नतीजों ने भी प्रस्तुत किया है। कर्नाटक स्कूल बोर्ड के छात्रों में से कुल 93 फीसदी ऐसे रहे हैं, जिन्होंने तीसरी भाषा के रूप में हिंदी का चयन किया।

    नई शिक्षा नीति के तहत त्रिभाषा फॉर्मूला लागू किया है। इसके अनुसार छात्र अंग्रेजी सीखेंगे। इसके अलावा एक स्थानीय भाषा वे अपने अनुसार चुन सकते हैं। फिर वे तीसरी भाषा के तौर पर अन्य किसी भी भाषा को स्वीकार कर सकते हैं। कर्नाटक में 93 फीसदी छात्रों ने हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में चुना है। कर्नाटक बोर्ड में कुल 8.1 लाख छात्रों ने तीसरी भाषा को चुना है और इनमें से 7.5 लाख लोगों ने हिंदी का ही विकल्प पसंद किया है। कोंकणी, मराठी, उर्दू, अरबी जैसी भाषाओं को भी कुछ छात्रों ने तीसरी भाषा के रूप में चुना है। इस आंकड़े ने हिंदी भाषा की लोकप्रियता को स्थापित किया है।

    हिंदी को लेकर अमित शाह ने जब कहा था कि यह देश की संपर्क भाषा है और इसका विस्तार जरूरी है तो तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन ने विरोध किया था। उनका कहना था कि हिंदी को थोपा जा रहा है, जबकि देश में तमिल सबसे पुरानी भाषा है। तमिलनाडु के लोगों का मानना है कि उनकी भाषा दुनिया की सबसे प्राचीन भाषाओं में से एक है।


    त्रिभाषा नीति से विरोध खत्म करने की कोशिश, सबको मिलेगा महत्व

    त्रिभाषा नीति के जरिए सरकार ने इसी विरोधाभास को खत्म करने का प्रयास किया है। इसके अलावा भाषा के चलते पैदा होने वाले विवादों में भी इससे कमी आएगी। इस नीति के तहत सरकार ने हिंदी, अंग्रेजी के साथ ही स्थानीय भाषाओं को भी प्रोत्साहित करने का प्रयास किया है। ऐसे में यदि कर्नाटक में 93 फीसदी छात्रों ने हिंदी भाषा को तीसरे विकल्प के तौर पर चुना तो यह अच्छी खबर है। पहले जब होम मिनिस्टर अमित शाह ने हिंदी भाषा को लेकर बयान दिया था तो एमके स्टालिन ने आपत्ति जताई थी। हालांकि कुछ सर्वे दावा करते रहे हैं कि तमिलनाडु में भी हिंदी का तेजी से प्रसार हो रहा है।

  • "परीक्षा पे चर्चा": लेसन प्लान विद्यार्थियों के साथ पूर्व से ही साझा करें : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी

    "परीक्षा पे चर्चा": लेसन प्लान विद्यार्थियों के साथ पूर्व से ही साझा करें : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी


    भोपाल ! प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को “परीक्षा पे चर्चा” कार्यक्रम में विद्याथिर्यों से संवाद कर परीक्षा से जुड़े तनाव और शंकाओं का समाधान किया। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के उत्कृष्ट विद्यालय, जबलपुर के छात्र श्री आयुष तिवारी ने प्रधानमंत्री श्री मोदी से प्रश्न किया कि कई बार वे शिक्षकों की पढ़ाने की गति से तालमेल नहीं बिठा पाते हैं, उसे कैसे मैच करें? इस पर प्रधानमंत्री श्री मोदी ने विद्यार्थियों को समझाते हुए शिक्षकों से भी आग्रह किया कि अपने अध्‍यापन की स्‍पीड विद्यार्थियों के सीखने की गति के अनुरूप रखें। लेसन प्‍लान विद्याथिर्यों के साथ पूर्व से ही साझा करें। विद्यार्थी वह चेप्‍टर पहले से पढें, अध्‍ययन करें जो शिक्षक भविष्‍य में कक्षा में पढाने वाले हैं। उन्‍होंने कहा कि शिक्षकों की गति से सामंजस्‍य बैठाने का सबसे अच्‍छा तरीका यह है कि पहले अपने को जोड़ो, फिर मन को जोड़ो। उसके बाद पढाई के विषय शुरू करो। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि मन को जोड़ने का अर्थ है, विषय की तमाम जानकारियां जुटाना और जोड़ने का अर्थ है, एकाग्रता बनाए रखना। इससे आपकी समझ मजबूत होगी और आप एक कदम आगे चलेंगे। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने विद्यार्थियों के साथ आयोजित ‘परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम में तनावमुक्त जीवन, समय प्रबंधन, अनुशासन, जीवन कौशल एवं व्यवसायिक विकास के महत्वपूर्ण मंत्र दिए। इसके साथ ही उन्‍होंने विद्यार्थियों से आत्मविश्वास के साथ लक्ष्य निर्धारित कर आगे बढ़ने का आह्वान किया।

    2018 से लगातार हो रहा आयोजन

    प्रधानमंत्री श्री मोदी वर्ष 2018 से परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम के दौरान परीक्षाओं के तनाव को दूर करने के लिए विद्यार्थियों से संवाद करते हैं। इस वर्ष यह कार्यक्रम का 9 वां संस्करण था। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री श्री मोदी ने देश भर से आये विद्यार्थियों की विभिन्न शंकाओं का समाधान किया। कार्यक्रम का सीधा प्रसारण विभिन्‍न संचार माध्‍यमों पर किया गया।

    जिसने समय का सही प्रबंधन कर लिया, वह जीवन में कभी असफल नहीं होता- शिक्षा मंत्री श्री सिंह

    परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम में स्‍कूल शिक्षा मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह ने नरसिंहपुर जिले के ग्राम तेंदूखेड़ा कन्या उच्‍चतर माध्‍यमिक विद्यालय में विद्यार्थियों के साथ प्रधानमंत्री श्री मोदी के परीक्षा मंत्र सुने। मंत्री श्री सिंह ने विद्यार्थियों और शिक्षकों से प्रधानमंत्री के द्वारा दिए गए सूत्रों और विचारों को आत्‍मसात कर परीक्षाओं की तैयारी करने का आग्रह किया। उन्‍होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के मार्गदर्शन एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश का स्कूल शिक्षा विभाग राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने, अनुशासन को मजबूत करने और विद्यार्थियों को भविष्य के लिए सक्षम बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है। जिसने समय का सही प्रबंधन कर लिया, वह जीवन में कभी असफल नहीं होता। समय अनुशासन सिखाता है और अनुशासन के साथ जिया गया जीवन ही सफलता की सच्ची पहचान है। जब तक असंभव को करने का प्रयास नहीं किया जाएगा, तब तक असाधारण उपलब्धियां संभव नहीं हैं।

    शासकीय सुभाष उत्‍कृष्‍ट विद्यालय भोपाल में हुआ राज्य स्तरीय कार्यक्रम

    परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम का भोपाल के शासकीय सुभाष उत्‍कृष्‍ट विद्यालय में राज्‍य स्‍तरीय कार्यक्रम हुआ। यहां पर स्‍कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. संजय गोयल ने विशिष्‍ट जनों, वरिष्‍ठ अधिकारी, अभिभावक और विद्यार्थियों के साथ सजीव प्रसारण में सहभागिता की। संचालक लोक शिक्षण श्री केके द्व‍िवेदी सहि‍त कार्यक्रम के नोडल अधिकारी संयुक्‍त संचालक श्री एच.एन. नेमा भी उपस्थित रहे।

    प्रदेश में राज्य शैक्षिक अनुसंधान, प्रशिक्षण परिषद (SCERTS), सभी जिला शैक्षिक प्रशिक्षण संस्थानों (DIETS) और प्रदेश के सभी शासकीय, अशासकीय एवं शासन से अनुदान प्राप्‍त विद्यालयों में परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम को समारोह पर्वूक आयोजित किया गया। उक्‍त कार्यक्रम के लाइव प्रसारण में विद्यार्थियों ने उत्‍साहपूर्वक सहभागिता की। प्रदेश के स्‍कूलों में टीवी प्रसारण के अलावा, इंटरनेट एक्सेस डिवाइस (कंप्यूटर, लैपटॉप इत्यादि) पर भी कार्यक्रम देखने की सुविधा स्‍थापित की गई थी।

    9 फरवरी को होगा अगला प्रसारण

    परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम का अगला प्रसारण 9 फरवरी 2026 को होगा। जिसमें प्रधानमंत्री श्री मोदी देश के विभिन्‍न अंचलों के विद्यार्थियों के साथ चर्चा करेंगे। यह कार्यक्रम विभिन्‍न संचार माध्‍यमों पर सुबह 10 बजे से प्रसारित किया जायेगा। प्रदेश के विद्यालयों में उक्‍त कार्यक्रम के सजीव प्रसारण की व्‍यवस्‍थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।

  • MP: सिवनी के सरकारी स्कूल में छात्रों से लगवाए गए 'अल्लाह हू अकबर' के नारे

    MP: सिवनी के सरकारी स्कूल में छात्रों से लगवाए गए 'अल्लाह हू अकबर' के नारे


    सिवनी।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के सिवनी जिले (Seoni district) के एक सरकारी स्कूल (Government school) में बच्चों से जबरन ‘अल्लाह हू अकबर’ के नारे लगवाने के बाद बवाल मच गया. मामला अरी थाना क्षेत्र के सरकारी हायर सेकेंडरी स्कूल का है। बच्चों ने आरोप लगाया कि 1 दिसंबर को गीता पाठ के बाद उनसे 16 बार ‘अल्लाह हू अकबर’ के नारे लगवाए गए और स्कूल की प्रभारी प्रिंसिपल प्रतीक्षा मानगढ़े ने सभी बच्चों को नारा लगाने के लिए दबाव डाला।

    घर आकर बच्चों ने ये बात परिजनों को बताई तो बवाल मच गया. 3 दिसंबर को बच्चों और अभिभावकों के साथ हिंदूवादी संगठन के लोग भी स्कूल पहुंचे और प्रिंसिपल का विरोध करते हुए उनको स्कूल से हटाने और सस्पेंड किए जाने की मांग करने लगे।

    हंगामा बढ़ता देख पुलिस ने मौके पर पहुंचकर लोगों को शांत कराया. थोड़ी ही देर में जिला शिक्षा अधिकारी एसएस कुमरे भी स्कूल पहुंचे तो लोगों ने उनके ख़िलाफ़ भी नारेबाजी की, इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने प्रभारी प्रिंसिपल प्रतीक्षा मानगढ़े से बात की और उन्हें स्कूल से हटाकर जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में अटैच कर दिया।

    गांव के लोग इस पर भी नहीं माने और प्रिंसिपल के निलंबन की मांग करने लगे तो जिला शिक्षा अधिकारी ने मौके पर ही एक जांच टीम का गठन कर दिया, जिसकी रिपोर्ट मिलने के बाद प्रिंसिपल पर कार्रवाई का आश्वासन दिया तब जाकर मामला शांत हुआ।

    जिला शिक्षा अधिकारी एसएस कुमरे ने बताया, ”शिकायत के बाद मैं खुद जांच करने स्कूल गया था, जहां प्रिंसिपल ने अपनी गलती मानते हुए कहा कि उनका इरादा किसी की भावनाओं को आहत करना नहीं, बल्कि सर्वधर्म सद्भाव का था, उन्होंने सबसे माफी भी मांगी. प्रिंसिपल को स्कूल से हटा दिया गया है और पूरे मामले की जांच के लिए एक टीम बनाई गई है. रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की जाएगी।