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  • प्रभास की फौजी का धमाकेदार टीजर रिलीज! हिटलर के सामने सुभाष चंद्र बोस ने भरी हुंकार, विद्रोही सैनिक बने रिबेल स्टार

    प्रभास की फौजी का धमाकेदार टीजर रिलीज! हिटलर के सामने सुभाष चंद्र बोस ने भरी हुंकार, विद्रोही सैनिक बने रिबेल स्टार


    नई दिल्ली । साउथ सिनेमा के सुपरफिल्म का निर्देशन हनु राघवपुडी ने किया है। वह अपनी कहानी कहने की शैली और भव्य सिनेमाई प्रस्तुति के लिए पहचाने जाते हैं। फौजी का निर्माण मैथरी मूवी मेकर्स ने किया है जबकि टी-सीरीज फिल्म्स इसे प्रस्तुत कर रही है। फिल्म के निर्माता नवीन यरनेनी वाई रवि शंकर और भूषण कुमार हैं। मेकर्स ने इस परियोजना को ऐतिहासिक ड्रामा के रूप में तैयार किया है जिसमें स्वतंत्रता संग्राम की पृष्ठभूमि के साथ बड़े स्तर का एक्शन और भावनात्मक पहलू देखने को मिल सकता है।
    स्टार प्रभास एक बार फिर बड़े पर्दे पर अपने दमदार अंदाज से दर्शकों का दिल जीतने की तैयारी में हैं। उनकी आगामी फिल्म फौजी का टीजर रिलीज कर दिया गया है। प्रभास के जन्मदिन के मौके पर जारी इस पहली झलक में देशभक्ति का जज्बा इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओं और जबरदस्त एक्शन के साथ नजर आ रहा है। फिल्म में प्रभास एक निडर और विद्रोही सैनिक की भूमिका निभाते दिखाई देंगे। टीजर सामने आने के बाद फिल्म को लेकर दर्शकों की उत्सुकता बढ़ गई है। ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और प्रभास के अलग अवतार ने इस फिल्म को उनकी आगामी चर्चित परियोजनाओं में शामिल कर दिया है।

    फौजी के टीजर की सबसे खास बात इसमें हिटलर और नेताजी सुभाष चंद्र बोस के बीच दिखाई गई बातचीत है। फिल्म की कहानी भारत के स्वतंत्रता संग्राम की पृष्ठभूमि पर आधारित है। टीजर में नेताजी सुभाष चंद्र बोस भारत की आजादी के लिए समर्थन मांगते नजर आते हैं। वहीं हिटलर ब्रिटेन के लंबे शासन का हवाला देते हुए भारत की आजादी की लड़ाई को मुश्किल बताते हैं। इसके बावजूद नेताजी भारतीयों की क्षमता और उनके साहस पर भरोसा जताते हैं। वह एक ऐसे सैनिक का जिक्र करते हैं जो अपनी बहादुरी से इतिहास बदलने का दम रखता है। इसके बाद प्रभास की दमदार झलक सामने आती है और उनका विद्रोही अंदाज कहानी के रोमांच को बढ़ा देता है।

    टीजर में प्रभास का लुक उनकी पिछली फिल्मों से काफी अलग दिखाई देता है। उनके किरदार में आक्रामकता साहस और देश के लिए लड़ने का जज्बा नजर आता है। फिल्म में उनका चरित्र केवल एक सैनिक तक सीमित नहीं दिखता बल्कि उसे आजादी की लड़ाई में अहम भूमिका निभाने वाले निडर योद्धा के रूप में पेश किया गया है। प्रभास की मजबूत स्क्रीन प्रेजेंस और ऐतिहासिक माहौल को बड़े स्तर पर दिखाने की कोशिश टीजर को खास बनाती है। हालांकि फिल्म की पूरी कहानी और किरदार के सभी पहलुओं को लेकर अभी ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है।

    फिल्म का निर्देशन हनु राघवपुडी ने किया है। वह अपनी कहानी कहने की शैली और भव्य सिनेमाई प्रस्तुति के लिए पहचाने जाते हैं। फौजी का निर्माण मैथरी मूवी मेकर्स ने किया है जबकि टी-सीरीज फिल्म्स इसे प्रस्तुत कर रही है। फिल्म के निर्माता नवीन यरनेनी वाई रवि शंकर और भूषण कुमार हैं। मेकर्स ने इस परियोजना को ऐतिहासिक ड्रामा के रूप में तैयार किया है जिसमें स्वतंत्रता संग्राम की पृष्ठभूमि के साथ बड़े स्तर का एक्शन और भावनात्मक पहलू देखने को मिल सकता है।

    प्रभास की लोकप्रियता केवल दक्षिण भारतीय सिनेमा तक सीमित नहीं है। बाहुबली सीरीज और अन्य बड़ी फिल्मों के बाद उन्होंने देशभर में अपनी अलग पहचान बनाई है। दर्शक उन्हें अलग-अलग किरदारों में देखने के लिए उत्साहित रहते हैं। ऐसे में फौजी में उनका देशभक्त सैनिक का किरदार उनके प्रशंसकों के लिए खास आकर्षण बन सकता है। फिल्म का टीजर कहानी को लेकर कई सवाल भी छोड़ता है और दर्शकों को यह जानने के लिए उत्सुक करता है कि प्रभास का किरदार आजादी की लड़ाई में किस तरह की भूमिका निभाएगा।

    रिलीज की बात करें तो फौजी को 19 मार्च 2027 को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज करने की योजना है। फिल्म को लेकर अभी से चर्चा शुरू हो गई है। अब दर्शकों की नजर इसके अगले टीजर ट्रेलर और अन्य प्रचार सामग्री पर रहेगी। प्रभास की लोकप्रियता ऐतिहासिक विषय और देशभक्ति से जुड़ी कहानी का मेल बॉक्स ऑफिस पर कैसा प्रदर्शन करता है यह फिल्म रिलीज होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

  • इतिहास के पन्नों में 22 जून: सुभाष बोस का बड़ा फैसला, अमरीश पुरी का जन्म और कई ऐतिहासिक घटनाएं

    इतिहास के पन्नों में 22 जून: सुभाष बोस का बड़ा फैसला, अमरीश पुरी का जन्म और कई ऐतिहासिक घटनाएं


    नई दिल्ली ।इतिहास में 22 जून की तारीख कई महत्वपूर्ण राजनीतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और खेल जगत की घटनाओं के कारण विशेष महत्व रखती है। भारत के स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर विश्व राजनीति और खेल इतिहास तक इस दिन कई ऐसे घटनाक्रम हुए जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्र में गहरा प्रभाव छोड़ा।

    भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में 22 जून 1897 का दिन विशेष रूप से उल्लेखनीय है। इसी दिन क्रांतिकारी चाफेकर बंधुओं दामोदर और बालकृष्ण चाफेकर ने पुणे में ब्रिटिश प्लेग कमिश्नर डब्ल्यू.सी. रैंड पर हमला कर अंग्रेजी शासन के खिलाफ सशस्त्र प्रतिरोध का संदेश दिया था। इस घटना ने स्वतंत्रता आंदोलन में क्रांतिकारी विचारधारा को नई ऊर्जा प्रदान की।

    22 जून 1940 को नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने कांग्रेस नेतृत्व से वैचारिक मतभेदों के बाद फॉरवर्ड ब्लॉक की स्थापना की थी। इस संगठन का उद्देश्य स्वतंत्रता आंदोलन को अधिक आक्रामक और जनकेंद्रित दिशा देना था। नेताजी का यह कदम भारतीय राजनीति और स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जाता है।

    भारतीय सिनेमा के महान अभिनेता अमरीश पुरी का जन्म भी 22 जून 1932 को हुआ था। अपनी दमदार आवाज, प्रभावशाली व्यक्तित्व और यादगार अभिनय के दम पर उन्होंने हिंदी सिनेमा में अमिट पहचान बनाई। मिस्टर इंडिया फिल्म में निभाया गया उनका ‘मोगैम्बो’ का किरदार आज भी भारतीय सिनेमा के सबसे लोकप्रिय खलनायकों में गिना जाता है। इसी दिन प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक अनुभव सिन्हा का जन्म भी हुआ था, जिन्होंने सामाजिक सरोकारों से जुड़ी कई चर्चित फिल्में बनाई हैं।

    22 जून 1975 को देश में आपातकाल लागू किए जाने की प्रक्रिया शुरू हुई थी। इसके तीन दिन बाद 25 जून की रात तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल की औपचारिक घोषणा की थी। यह भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का एक महत्वपूर्ण और बहुचर्चित अध्याय माना जाता है।

    विज्ञान और खगोल विज्ञान के क्षेत्र में भी यह दिन खास रहा है। वर्ष 2009 में 21वीं सदी का सबसे लंबा सूर्यग्रहण भारत में दिखाई दिया था। देशभर में लाखों लोगों ने इस दुर्लभ खगोलीय घटना को देखा और वैज्ञानिकों ने भी इसका अध्ययन किया। इसी वर्ष डिजिटल तकनीक के बढ़ते प्रभाव के बीच ईस्टमैन कोडक ने अपनी प्रसिद्ध कोडाक्रोम फिल्म की बिक्री बंद करने की घोषणा की थी, जिसने फोटोग्राफी के एक युग के अंत का संकेत दिया।

    विश्व इतिहास में 22 जून 1941 को नाजी जर्मनी ने सोवियत संघ पर हमला करते हुए ऑपरेशन बारबरोसा की शुरुआत की थी। यह द्वितीय विश्व युद्ध की सबसे बड़ी सैन्य कार्रवाइयों में से एक मानी जाती है। वहीं वर्ष 1986 में फीफा विश्व कप के दौरान अर्जेंटीना के महान फुटबॉलर डिएगो माराडोना ने इंग्लैंड के खिलाफ ‘हैंड ऑफ गॉड’ और ‘गोल ऑफ द सेंचुरी’ जैसे ऐतिहासिक गोल कर खेल इतिहास में अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज कराया।

    इस प्रकार 22 जून केवल कैलेंडर की एक तारीख नहीं बल्कि अनेक ऐतिहासिक घटनाओं, महान व्यक्तित्वों और यादगार उपलब्धियों का प्रतीक है। यह दिन हमें इतिहास के उन महत्वपूर्ण पड़ावों की याद दिलाता है जिन्होंने समाज, राजनीति, खेल और संस्कृति की दिशा बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।