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  • संजय दत्त के साथ पर्दे पर भिड़ेंगे या देंगे साथ, खलनायक रिटर्न्स में सलमान खान की एंट्री पर सुभाष घई ने तोड़ी चुप्पी

    संजय दत्त के साथ पर्दे पर भिड़ेंगे या देंगे साथ, खलनायक रिटर्न्स में सलमान खान की एंट्री पर सुभाष घई ने तोड़ी चुप्पी


    नई दिल्ली। बॉलीवुड की चर्चित फिल्म खलनायक के सीक्वल खलनायक रिटर्न्स को लेकर दर्शकों का उत्साह बढ़ता जा रहा है। साल 1993 में रिलीज हुई इस फिल्म में संजय दत्त ने बलराम प्रसाद उर्फ बल्लू का यादगार किरदार निभाया था। अब एक बार फिर संजय दत्त इसी किरदार के साथ बड़े पर्दे पर वापसी करने की तैयारी में हैं। फिल्म को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा सलमान खान के नाम की हो रही है। खबरें हैं कि सलमान खान भी इस फिल्म का हिस्सा बन सकते हैं और उन्हें एक पुलिस अधिकारी की भूमिका में दिखाया जा सकता है। हालांकि फिल्म के निर्देशक और निर्माता सुभाष घई ने अभी इन खबरों पर अंतिम मुहर नहीं लगाई है।

    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सुभाष घई अपनी राइटिंग टीम के साथ मिलकर फिल्म की कहानी पर काम कर रहे हैं। इसी दौरान सलमान खान के लिए एक खास किरदार तैयार किए जाने की चर्चा सामने आई है। बताया जा रहा है कि सलमान फिल्म में ऐसे पुलिसवाले की भूमिका निभा सकते हैं जो संजय दत्त के किरदार बल्लू की मदद करता नजर आएगा। यह किरदार कहानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है और फिल्म की घटनाओं को नया मोड़ दे सकता है। हालांकि अभी तक सलमान खान की कास्टिंग आधिकारिक रूप से तय नहीं हुई है।

    फिल्म से जुड़े सूत्रों के हवाले से आई खबरों में दावा किया गया है कि सलमान का संभावित किरदार केवल कैमियो तक सीमित नहीं होगा बल्कि उसका कहानी पर भी असर पड़ सकता है। इस भूमिका के लिए सलमान खान को उपयुक्त बताया जा रहा है। लेकिन फिल्म की स्क्रिप्ट और स्क्रीनप्ले अभी तैयार किए जा रहे हैं। ऐसे में मेकर्स पहले कहानी को अंतिम रूप देना चाहते हैं और उसके बाद ही कलाकारों की कास्टिंग को लेकर फैसला लिया जाएगा।

    सलमान खान की एंट्री को लेकर सुभाष घई ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि इस समय कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी क्योंकि फिल्म की स्क्रिप्टिंग का काम जारी है। स्क्रिप्ट पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि फिल्म किस दिशा में आगे बढ़ेगी और कौन से कलाकार इसका हिस्सा होंगे। उनके बयान से साफ है कि फिलहाल सलमान खान की भूमिका को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

    अगर सलमान खान इस फिल्म में काम करते हैं तो यह सुभाष घई के साथ उनकी दूसरी फिल्म होगी। इससे पहले दोनों साल 2008 में रिलीज हुई फिल्म युवराज में साथ काम कर चुके हैं। वहीं संजय दत्त और सलमान खान की जोड़ी को पर्दे पर देखना भी दर्शकों के लिए खास अनुभव हो सकता है। दोनों कलाकारों की अपनी अलग पहचान और मजबूत फैन फॉलोइंग है।

    खलनायक की बात करें तो यह फिल्म साल 1993 में रिलीज हुई थी और बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता हासिल की थी। सुभाष घई के निर्देशन में बनी इस फिल्म में संजय दत्त के साथ जैकी श्रॉफ और माधुरी दीक्षित मुख्य भूमिकाओं में नजर आए थे। इसके अलावा राखी गुलजार अनुपम खेर और राम्या कृष्णन जैसे कलाकारों ने भी अहम किरदार निभाए थे। फिल्म में बल्लू का किरदार दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय हुआ था। अब इसके सीक्वल को लेकर उम्मीदें बढ़ गई हैं।

    दूसरी ओर सलमान खान की आगामी फिल्म मातृभूमि को लेकर भी चर्चा जारी है। अपूर्वा लाखिया के निर्देशन में बन रही इस फिल्म में सलमान के साथ चित्रांगदा सिंह नजर आएंगी। इसकी कहानी भारत और चीन के बीच गलवान घाटी में हुई झड़प की पृष्ठभूमि पर आधारित बताई जा रही है। फिलहाल इसकी रिलीज डेट की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में दर्शकों की नजरें अब खलनायक रिटर्न्स की स्क्रिप्ट और सलमान खान की संभावित एंट्री पर टिकी हैं।

  • ऋषि कपूर की ‘कर्ज’: फ्लॉप फिल्म, लेकिन सुपरहिट म्यूजिक और मानसिक तनाव की सच्ची कहानी

    ऋषि कपूर की ‘कर्ज’: फ्लॉप फिल्म, लेकिन सुपरहिट म्यूजिक और मानसिक तनाव की सच्ची कहानी



    नई दिल्ली। बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता ऋषि कपूर की 1980 में आई फिल्म कर्ज आज भले ही एक कल्ट क्लासिक मानी जाती है, लेकिन रिलीज के समय यह बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप साबित हुई थी। दिलचस्प बात यह है कि फिल्म की असफलता नहीं, बल्कि उसके गानों की भारी सफलता ने उस दौर में ऋषि कपूर को भावनात्मक रूप से प्रभावित किया था।

    क्या थी फिल्म की खासियत?
    फिल्म का निर्देशन सुभाष घई ने किया था और यह एक म्यूजिकल थ्रिलर के रूप में बनाई गई थी। कहानी के साथ-साथ इसके संगीत पर खास फोकस किया गया था।इस फिल्म के संगीत को तैयार किया था लक्ष्मीकांत–प्यारेलाल की जोड़ी ने, और गानों को आवाज दी थी किशोर कुमार और मोहम्मद रफ़ी जैसे महान गायकों ने।

    सुपरहिट हुए गाने
    फिल्म के गाने जैसे
    ओम शांति ओम
    एक हसीना थी
    पैसा ये पैसा
    दर्द-ए-दिलइतने लोकप्रिय हुए कि वे आज भी याद किए जाते हैं।

    बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप
    जहां फिल्म का संगीत सुपरहिट रहा, वहीं सिनेमाघरों में फिल्म दर्शकों को आकर्षित नहीं कर पाई और फ्लॉप हो गई। शुरुआती हफ्तों के बाद इसकी कमाई तेजी से गिर गई।इसके कुछ समय बाद रिलीज हुई कुर्बानी ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया और कर्ज पीछे छूट गई।

    क्यों परेशान हुए ऋषि कपूर?
    रिपोर्ट्स और ऋषि कपूर की आत्मकथा के अनुसार, उन्हें इस बात का मानसिक दबाव महसूस हुआ कि उनकी फिल्म भले ही असफल रही, लेकिन उसके गाने हर जगह लोकप्रिय हो रहे थे। इस वजह से वे भावनात्मक तनाव में आ गए थे।कई रिपोर्ट्स में यह भी उल्लेख मिलता है कि वे उस समय काफी परेशान रहे और यह दौर उनके लिए चुनौतीपूर्ण था।

    आज क्या है स्थिति?
    समय के साथ कर्ज को दर्शकों ने एक आइकॉनिक फिल्म के रूप में स्वीकार किया और आज इसे बॉलीवुड की सबसे यादगार म्यूजिकल फिल्मों में गिना जाता है।

  • खलनायक के सीक्वल से लौटेगा बल्लू बलराम का खौफ; संजय दत्त की जिद पर सुभाष घई ने तैयार की कहानी,

    खलनायक के सीक्वल से लौटेगा बल्लू बलराम का खौफ; संजय दत्त की जिद पर सुभाष घई ने तैयार की कहानी,


    नई दिल्ली।हिंदी सिनेमा के इतिहास में जिस फिल्म ने ‘नायक नहीं खलनायक हूं मैं’ के नारे को घर-घर तक पहुँचाया, उस कल्ट क्लासिक फिल्म के सीक्वल की चर्चा एक बार फिर फिजाओं में तैर रही है। करीब तीन दशक पहले रिलीज हुई ‘खलनायक’ ने न केवल बॉक्स ऑफिस पर सफलता के झंडे गाड़े थे, बल्कि संजय दत्त के करियर को एक ऐसी नई पहचान दी थी जिसने एंटी-हीरो किरदारों की परिभाषा ही बदल दी।
    अब तीस साल के लंबे अंतराल के बाद संजय दत्त ने खुद अपनी इस यादगार फिल्म के सीक्वल का औपचारिक ऐलान कर दिया है। इस खबर के आते ही प्रशंसकों में भारी उत्साह देखा जा रहा है, लेकिन इसी बीच एक अहम जानकारी सामने आई है कि फिल्म के मूल रचयिता सुभाष घई इस बार निर्देशन की कुर्सी पर नजर नहीं आएंगे।

    इस बड़े फैसले के पीछे की वजहें बेहद भावनात्मक और पेशेवर हैं। बताया जा रहा है कि संजय दत्त इस प्रोजेक्ट को लेकर वर्षों से खासे उत्साहित थे। उनकी यह इच्छा इतनी प्रबल थी कि जेल में रहने के दौरान भी उन्होंने पत्र लिखकर इस कहानी को आगे बढ़ाने की बात कही थी।

    संजय दत्त के प्रति पिता जैसा स्नेह रखने वाले सुभाष घई ने इस प्रोजेक्ट के लिए अपनी सहमति तो दे दी है और फिल्म की मूल अवधारणा व पटकथा भी तैयार कर ली है, लेकिन वे अब इस विरासत को किसी नई दृष्टि के साथ विकसित होते देखना चाहते हैं। अस्सी वर्ष की आयु में सुभाष घई ने अब निर्देशन के चुनौतीपूर्ण कार्य से दूरी बनाने का फैसला किया है, हालांकि फिल्म के रचनात्मक पक्ष पर उनकी पकड़ पहले की तरह ही बनी रहेगी।

    फिल्म के इस दूसरे भाग में सुभाष घई एक मार्गदर्शक और ‘क्रिएटिव प्रोड्यूसर’ की भूमिका में नजर आएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया है कि भले ही वे कैमरे के पीछे निर्देशक के रूप में न हों, लेकिन फिल्म के निर्माण के हर पड़ाव पर वे संजय दत्त के साथ खड़े रहेंगे। दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने फिल्म में एक छोटा सा कैमियो करने की इच्छा भी जताई है, जो पुरानी यादों को ताजा करने का काम करेगा।

    1993 में आई पहली फिल्म ने जो बेंचमार्क सेट किया था, उसे पार करना किसी भी नए निर्देशक के लिए बड़ी चुनौती होगी। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सुभाष घई की सरपरस्ती में संजय दत्त का यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट किस तरह पर्दे पर उतरता है और ‘खलनायक’ की इस विरासत को कौन आगे ले जाता है।