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  • सेबी का बड़ा एक्शन, पुनीत गोयनका और सुभाष चंद्रा पर शेयर बाजार में कारोबार करने पर एक साल का बैन

    सेबी का बड़ा एक्शन, पुनीत गोयनका और सुभाष चंद्रा पर शेयर बाजार में कारोबार करने पर एक साल का बैन


    नई दिल्ली। पूंजी बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ने कॉरपोरेट गवर्नेंस से जुड़े गंभीर उल्लंघनों के मामले में जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड और उसके शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ बड़ा कदम उठाया है। सेबी ने कंपनी के प्रबंध निदेशक पुनीत गोयनका और एस्सेल समूह के प्रमुख सुभाष चंद्रा को एक वर्ष के लिए प्रतिभूति बाजार में कारोबार करने से प्रतिबंधित कर दिया है। इसके साथ ही जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड पर भी दो महीने तक प्रतिभूति बाजार में प्रवेश करने पर रोक लगा दी गई है। नियामक ने तीनों पक्षों पर कुल 1.48 करोड़ रुपए का आर्थिक दंड भी लगाया है।

    सेबी की जांच में सामने आया कि कंपनी की हैदराबाद स्थित मूल्यवान जमीन को आवश्यक कॉरपोरेट मंजूरियों के बिना एस्सेल समूह की कंपनियों द्वारा लिए गए कर्ज के बदले गिरवी रखा गया था। नियामक ने इसे कॉरपोरेट गवर्नेंस और लिस्टिंग नियमों का गंभीर उल्लंघन माना। अंतिम आदेश में कहा गया कि इस प्रक्रिया में नियामकीय प्रावधानों का पालन नहीं किया गया और आवश्यक स्वीकृतियां भी नहीं ली गईं।

    सेबी के आदेश के अनुसार जी एंटरटेनमेंट पर 30 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया है जबकि पुनीत गोयनका पर 58 लाख रुपए और सुभाष चंद्रा पर 60 लाख रुपए का दंड लगाया गया है। नियामक ने सभी संबंधित पक्षों को 45 दिनों के भीतर जुर्माने की राशि जमा करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही यह भी माना कि लिस्टिंग ऑब्लिगेशंस एंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स रेगुलेशंस 2015 और प्रोहिबिशन ऑफ फ्रॉडुलेंट एंड अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिसेज रेगुलेशंस 2003 के प्रावधानों का उल्लंघन हुआ है।

    मामले की शुरुआत वित्त वर्ष 2018-19 के वैधानिक ऑडिट के दौरान हुई थी। ऑडिट में कंपनी की कुछ अचल संपत्तियों के मूल स्वामित्व दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई थी। इसके बाद सेबी ने विस्तृत जांच शुरू की। जांच में पता चला कि दिसंबर 2016 में एस्सेल समूह की चार कंपनियों ने इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड से 726 करोड़ रुपए का कर्ज लिया था। इन कंपनियों पर पुनीत गोयनका सुभाष चंद्रा और उनके परिवार का प्रभावी नियंत्रण था।

    जांच के दौरान यह भी सामने आया कि जब कर्ज लेने वाली कंपनियां आवश्यक सुरक्षा बनाए रखने में विफल रहीं तब नवंबर 2018 में अतिरिक्त संपार्श्विक उपलब्ध कराने के लिए नोटिस जारी किया गया। इसके बाद दिसंबर 2018 में जी एंटरटेनमेंट की हैदराबाद स्थित जमीन के मूल दस्तावेज कर्ज के लिए अतिरिक्त सुरक्षा के रूप में जमा कराए गए ताकि उस संपत्ति पर प्रथम श्रेणी का बंधक बनाया जा सके।

    हालांकि कंपनी ने दावा किया कि इस प्रक्रिया के लिए सभी आवश्यक मंजूरियां प्राप्त की गई थीं लेकिन सेबी की जांच में ऑडिट समिति निदेशक मंडल या शेयरधारकों की ओर से ऐसी किसी पूर्व स्वीकृति का कोई प्रमाण नहीं मिला। बाद में कंपनी ने स्वयं नियामक को बताया कि प्रबंधन और निदेशक मंडल इस बंधक की प्रक्रिया से अनभिज्ञ थे और उन्होंने इस लेनदेन को मंजूरी नहीं दी थी।

    सेबी ने अपने आदेश में कहा कि यह संबंधित पक्षों के बीच हुआ लेनदेन था जिसके लिए नियमानुसार पारदर्शिता बनाए रखना आवश्यक था। वित्तीय विवरणों में भी इस संबंध में आवश्यक खुलासे और स्वीकृतियों का पालन नहीं किया गया। नियामक ने स्पष्ट किया कि सूचीबद्ध कंपनियों में निवेशकों के हितों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और कॉरपोरेट गवर्नेंस के नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भविष्य में भी इसी तरह सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

  • सुभाष चंद्रा ने लुटियंस दिल्ली का आलीशान बंगला 1260 करोड़ में बेचा, रियल एस्टेट बाजार में मचा हड़कंप

    सुभाष चंद्रा ने लुटियंस दिल्ली का आलीशान बंगला 1260 करोड़ में बेचा, रियल एस्टेट बाजार में मचा हड़कंप


    नई दिल्ली भारतीय रियल एस्टेट बाजार में एक बड़ा और चर्चित सौदा सामने आया है, जिसमें Subhash Chandra ने राजधानी के सबसे प्रीमियम इलाकों में से एक में स्थित अपनी ऐतिहासिक संपत्ति को भारी कीमत पर बेच दिया है। यह डील न केवल आकार में बड़ी है, बल्कि कीमत के लिहाज से भी देश के सबसे महंगे रिहायशी सौदों में शामिल मानी जा रही है।

    यह संपत्ति Lutyens’ Delhi के भगवान दास रोड पर स्थित थी, जो राजधानी का अत्यंत सुरक्षित और विशिष्ट रिहायशी क्षेत्र माना जाता है। करीब 2.8 एकड़ में फैली इस प्रॉपर्टी को 1260 करोड़ रुपये में बेचा गया है। इस सौदे की चर्चा रियल एस्टेट बाजार में इसलिए भी तेज है क्योंकि यहां लेन-देन बहुत सीमित और बेहद नियंत्रित होते हैं।

    रिपोर्ट्स के अनुसार यह प्रॉपर्टी साल 2015 में लगभग 304 करोड़ रुपये में खरीदी गई थी। महज एक दशक के भीतर इसकी कीमत में लगभग चार गुना वृद्धि ने यह साबित किया है कि लुटियंस जोन में संपत्तियों का मूल्य समय के साथ तेजी से बढ़ता है। इस क्षेत्र में भूमि की सीमित उपलब्धता और कड़े निर्माण नियमों के कारण यहां प्रॉपर्टी की मांग हमेशा उच्च स्तर पर बनी रहती है।

    लुटियंस दिल्ली भारत के सबसे प्रभावशाली और वीआईपी रिहायशी क्षेत्रों में गिना जाता है, जहां वरिष्ठ नौकरशाहों, न्यायाधीशों, राजनयिकों और चुनिंदा उद्योगपतियों के आवास स्थित हैं। यहां संपत्ति खरीदना केवल आर्थिक शक्ति का संकेत नहीं, बल्कि सामाजिक और रणनीतिक प्रतिष्ठा का भी प्रतीक माना जाता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार इस क्षेत्र में होने वाले रियल एस्टेट सौदे आम बाजार की तरह नहीं चलते। यहां कीमतें केवल आर्थिक चक्रों पर निर्भर नहीं करतीं, बल्कि लोकेशन की विशिष्टता, सुरक्षा, और सीमित आपूर्ति जैसे कारक इन्हें लगातार ऊ