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  • भारत की बड़ी कामयाबी… तेजी से घटी गरीबी…12 साल में 49.6 करोड़ लोग अत्यधिक गरीबी से आए बाहर

    भारत की बड़ी कामयाबी… तेजी से घटी गरीबी…12 साल में 49.6 करोड़ लोग अत्यधिक गरीबी से आए बाहर


    नई दिल्ली।
    भारत (India) ने गरीबी के खिलाफ लड़ाई में बड़ी कामयाबी (Success) हासिल की है. विश्व बैंक (World Bank) की अक्टूबर 2026 में जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक 2011 से 2023 के बीच 12 साल में देश में अत्यधिक गरीबी (Extreme Poverty) तेजी से घटी है. साल 2011 में जहां भारत की 27.1 फीसदी आबादी बेहद गरीब थी, वहीं 2023 में यह आंकड़ा घटकर सिर्फ 2.6 फीसदी रह गया. हालांकि, प्रति व्यक्ति आय के मोर्चे पर भारत को अभी और बेहतर करने की जरूरत है. वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, गरीबी कम होने के बावजूद 2023 में करीब 7.5 करोड़ लोग ऐसे थे, जिनकी रोजाना की आमदनी 3 डॉलर से कम थी।


    12 साल में 49.6 करोड़ लोग गरीबी से बाहर

    विश्व बैंक ने अपनी रिपोर्ट में गरीबी मापने के लिए दो पैमाने इस्तेमाल किए हैं. पहला है रोजाना 3 डॉलर की आय, जिसके आधार पर अत्यधिक गरीबी का आकलन किया जाता है. रोजाना तीन डॉलर आय का यह पैमाना 2021 की परचेजिंग पावर पैरिटी (PPP) यानी अलग-अलग देशों में चीजों की कीमतों और खरीदने की क्षमता के हिसाब से तय की गई है।

    दूसरा पैमाना रोजाना 4.20 डॉलर की आय है. विश्व बैंक इस सीमा का इस्तेमाल भारत जैसे निम्न-मध्यम आय (Lower Middle Income) वाले देशों में गरीबी मापने के लिए करता है. इस पैमाने पर भारत में गरीबी की दर 2011 में 57.7 फीसदी थी, जो 2023 में घटकर 16.1 फीसदी रह गई. इसका मतलब है कि इस दौरान करीब 49.6 करोड़ लोग गरीबी के दायरे से बाहर आए.


    गरीबी घटने के पीछे ये रहे बड़े कारण

    विश्व बैंक ने गरीबी घटने के पीछे तीन बड़ी वजहें बताई हैं. पहली, लोगों के घरेलू खर्च और खपत में बढ़ोतरी. दूसरी, देश में रोजगार के मौके बढ़ना और तीसरी, सरकारी योजनाओं का ज्यादा लोगों तक पहुंचना. इनमें मुफ्त राशन और अन्य तरह की सब्सिडी जैसी योजनाओं की भी अहम भूमिका रही. रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 2017 से 2023 के बीच करीब 13.4 करोड़ नई नौकरियां जुड़ीं. यह इस दौरान कामकाजी उम्र वाली आबादी में हुई बढ़ोतरी से लगभग दोगुना है. ज्यादा लोगों को काम मिलने से परिवारों की कमाई बढ़ी और उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार आया।


    ग्रामीण महिलाओं ने भी बदली तस्वीर

    गरीबी घटाने में ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक गतिविधियों में बढ़ती भागीदारी ने भी अहम भूमिका निभाई. बड़ी संख्या में महिलाएं पैसे कमाने वाले कामों से जुड़ीं. इससे कई परिवारों में कमाने वाले सदस्यों की संख्या बढ़ी और घर की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई. विश्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रामीण इलाकों में गरीबी घटने की रफ्तार शहरों के मुकाबले तेज रही है. इससे गांव और शहर के बीच गरीबी का अंतर भी कम हुआ है. हालांकि, आज भी ग्रामीण भारत में गरीबी की समस्या ज्यादा है. रिपोर्ट में दिए गए साल 2023 तक के आंकड़ों के मुताबिक भारत में रोजाना 4.20 डॉलर की आय के पैमाने पर गांवों में 19.3 फीसदी लोग गरीब हैं, जबकि शहरों में यह आंकड़ा 8.6 फीसदी है।


    यूपी से बंगाल तक के क्षेत्र में ज्यादा गरीबी

    देश में गरीबी कम करने के मामले में बड़ी सफलता मिली है, लेकिन अब यह समस्या कुछ राज्यों और इलाकों में ज्यादा सिमट गई है. विश्व बैंक के मुताबिक, भारत के करीब 57 फीसदी गरीब उत्तर प्रदेश से पश्चिम बंगाल तक फैले एक बड़े क्षेत्र में रहते हैं. इनमें बिहार, झारखंड, ओडिशा जैसे राज्य भी शामिल हैं. इसका मतलब है कि आने वाले समय में गरीबी कम करने की लड़ाई में इन राज्यों की भूमिका सबसे अहम होगी. इन इलाकों में ऐसे रोजगार पैदा करने की जरूरत है, जिनसे लोगों को सिर्फ काम ही न मिले, बल्कि उनकी कमाई भी अच्छी हो।


    गरीबी का शिक्षा से सीधा कनेक्शन: रिपोर्ट

    विश्व बैंक की रिपोर्ट बताती है कि शिक्षा का स्तर भी गरीबी से जुड़ा हुआ है. जिन वयस्कों ने कभी औपचारिक शिक्षा नहीं ली, उनमें 21.3 फीसदी लोग गरीब थे. वहीं, उच्च शिक्षा यानी कॉलेज या उससे आगे की पढ़ाई करने वालों में गरीबी की दर सिर्फ 7.4 फीसदी थी. बच्चों पर भी गरीबी का असर ज्यादा है. रिपोर्ट के मुताबिक, 0 से 14 साल के बच्चों में गरीबी की दर 21.8 फीसदी रही, जो सभी उम्र के समूहों में सबसे ज्यादा है. इसके अलावा, देश की 29.6 फीसदी आबादी को बुनियादी स्तर की स्वच्छता सुविधा भी उपलब्ध नहीं थी. वहीं, 13.8 फीसदी लोगों के घर में किसी भी वयस्क ने प्राथमिक शिक्षा पूरी नहीं की थी।


    रोजगार तो बढ़ा, लेकिन अच्छी कमाई चुनौती

    विश्व बैंक ने रोजगार बढ़ने को गरीबी घटने की बड़ी वजह माना है, लेकिन साथ ही नौकरियों की गुणवत्ता पर चिंता भी जताई है. रिपोर्ट के मुताबिक, रोजगार में बढ़ोतरी का बड़ा हिस्सा ऐसे कामों से आया, जिनमें कम कमाई होती है और उत्पादकता भी कम रहती है. इस दौरान महंगाई के असर को हटाकर देखी जाने वाली वास्तविक कमाई (Real Earnings) में भी खास बढ़ोतरी नहीं हुई. युवाओं के लिए रोजगार की चुनौती अब भी बनी हुई है. रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 और वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के बीच युवा बेरोजगारी दर 14.6 फीसदी से बढ़कर 15.9 फीसदी हो गई. ग्रामीण इलाकों की युवा महिलाएं इस बढ़ोतरी से ज्यादा प्रभावित हुईं।


    देश में आर्थिक असमानता एक बड़ी चुनौती

    भारत में गरीबी भले ही तेजी से घटी है, लेकिन कमाई के मामले में अमीर और गरीब के बीच बड़ा अंतर अब भी बना हुआ है. विश्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 में सबसे ज्यादा कमाने वाले 10 फीसदी कामगारों की औसत कमाई, सबसे कम कमाने वाले 10 फीसदी कामगारों की तुलना में करीब 13 गुना थी. आसान भाषा में समझें तो अगर सबसे कम कमाने वाले वर्ग के एक कामगार की कमाई 1,000 रुपये मानी जाए, तो सबसे ज्यादा कमाने वाले वर्ग के कामगार की कमाई करीब 13,000 रुपये रही. यह दोनों समूहों की बीच कमाई (Median Earnings) में बड़ा अंतर दिखाता है. विश्व बैंक ने यह भी बताया है कि अमीर परिवारों की खपत को घरेलू सर्वे में पूरी तरह दर्ज करना मुश्किल हो सकता है. इस वजह से देश में अमीर और गरीब के बीच असमानता का वास्तविक स्तर रिपोर्ट में दिखाए गए आंकड़ों से ज्यादा हो सकता है. यानी गरीबी घटने की उपलब्धि के साथ यह चुनौती भी बनी हुई है कि देश में आर्थिक असमानता की खाई कैसे पाटी जाए और लोगों की आय कैसे बढ़ाई जाए।


    देश में 2028 तक और घट सकती है गरीबी

    विश्व बैंक का अनुमान है कि भारत में आने वाले वर्षों में भी गरीबी घटेगी, लेकिन अब इसकी रफ्तार पहले के मुकाबले धीमी हो सकती है. रिपोर्ट के अनुमान के मुताबिक, रोजाना 4.20 डॉलर की आय वाली गरीबी दर 2026 में 14.2 फीसदी से घटकर 2028 तक 12.1 फीसदी रह सकती है. रिपोर्ट के मुताबिक गरीबी घटाने के मामले में भारत ने पिछले 12 साल में बड़ी उपलब्धि हासिल की है. अब अगली चुनौती यह है कि लोगों को ऐसे गुणवत्ता परक रोजगार मिलें, जिनसे उनकी कमाई लगातार बढ़े. इससे उनकी क्रय शक्ति में भी इजाफा होगा और जीवनस्तर भी सुधरेगा. खासकर उन राज्यों और ग्रामीण इलाकों में इस पर ध्यान देना होगा, जहां आज भी बड़ी आबादी गरीबी से जूझ रही है।

  • लेक्चरर से IAS बनने तक सौम्या मिश्रा का सफर, तीन असफलताओं के बाद चौथे प्रयास में हासिल की 18वीं रैंक

    लेक्चरर से IAS बनने तक सौम्या मिश्रा का सफर, तीन असफलताओं के बाद चौथे प्रयास में हासिल की 18वीं रैंक

    नई दिल्ली । सफलता की राह में आने वाली असफलताएं कई बार इंसान के धैर्य और संकल्प की परीक्षा लेती हैं। मध्य प्रदेश के सिंगरौली में पदस्थ IAS अधिकारी सौम्या मिश्रा की कहानी इसी बात का उदाहरण है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत कॉलेज में लेक्चरर के रूप में की थी, लेकिन उनका लक्ष्य प्रशासनिक सेवा में पहुंचना था। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए उन्होंने लगातार मेहनत की और शुरुआती तीन प्रयासों में असफल रहने के बाद भी तैयारी जारी रखी। आखिरकार चौथे प्रयास में उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में अखिल भारतीय स्तर पर 18वीं रैंक हासिल की।

    सौम्या मिश्रा मूल रूप से उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले की रहने वाली हैं। शिक्षा के क्षेत्र में लेक्चरर के रूप में काम करने के दौरान उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की दिशा में कदम बढ़ाया। उनका सफर बताता है कि करियर की शुरुआत किसी एक क्षेत्र से होने के बावजूद व्यक्ति अपने लक्ष्य के अनुसार आगे बढ़ सकता है। इसके लिए निरंतर प्रयास और कठिन परिस्थितियों में भी तैयारी जारी रखना महत्वपूर्ण होता है।

    सौम्या ने वर्ष 2021 में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग यानी UPPSC की परीक्षा पास की थी। इस परीक्षा में उन्होंने दूसरा स्थान प्राप्त किया। यह उपलब्धि उनके लिए महत्वपूर्ण पड़ाव रही। हालांकि, उनका प्रयास यहीं तक सीमित नहीं रहा। इसके बाद उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की, जिसे देश की प्रमुख और प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में गिना जाता है।

    UPSC की तैयारी के दौरान सौम्या को लगातार तीन प्रयासों में सफलता नहीं मिली। किसी भी अभ्यर्थी के लिए बार-बार असफल होना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, खासकर तब जब परीक्षा की तैयारी में लंबा समय और निरंतर मेहनत लगती हो। इसके बावजूद सौम्या ने अपने लक्ष्य से दूरी नहीं बनाई। उन्होंने चौथे प्रयास में परीक्षा पास करते हुए ऑल इंडिया रैंक 18 हासिल की। इस उपलब्धि ने उन्हें प्रशासनिक सेवा तक पहुंचाया और उनकी मेहनत को एक नई पहचान मिली।

    वर्तमान में सौम्या मिश्रा मध्य प्रदेश के सिंगरौली में पदस्थ IAS अधिकारी हैं। उनकी यात्रा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे उन युवाओं के लिए प्रेरणादायक है, जो शुरुआती नाकामी के बाद अपने लक्ष्य को लेकर असमंजस में पड़ जाते हैं। उनकी उपलब्धियों से यह स्पष्ट होता है कि असफलता के बाद तैयारी जारी रखना और अपने प्रयासों में सुधार करते रहना सफलता की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

    सौम्या मिश्रा की कहानी की एक और खास बात यह है कि उनकी छोटी बहन सुमेघा मिश्रा ने भी सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल की है। सुमेघा ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2024 में 253वीं रैंक प्राप्त की। दोनों बहनों की उपलब्धियां परिवार के लिए गौरव का विषय हैं। एक ओर सौम्या ने कई प्रयासों के बाद देश की प्रतिष्ठित परीक्षा में 18वीं रैंक हासिल की, वहीं सुमेघा ने भी अपनी मेहनत से परीक्षा में स्थान बनाया।

    दोनों बहनों की सफलता यह दिखाती है कि बड़े लक्ष्य हासिल करने के लिए नियमित मेहनत, धैर्य और निरंतर प्रयास का महत्व बना रहता है। सौम्या का लेक्चरर से IAS अधिकारी बनने तक का सफर खास तौर पर उन युवाओं को प्रेरित कर सकता है, जो प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार प्रयास कर रहे हैं। उनकी कहानी का मुख्य संदेश यही है कि शुरुआती असफलताओं को अंतिम परिणाम मानने के बजाय उनसे सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए।

  • खेलों में सफलता की राह आसान बना सकती हैं घर की ये 3 दिशाएं, वास्तु संतुलन से बढ़ सकता है आत्मविश्वास और प्रदर्शन

    खेलों में सफलता की राह आसान बना सकती हैं घर की ये 3 दिशाएं, वास्तु संतुलन से बढ़ सकता है आत्मविश्वास और प्रदर्शन

    नई दिल्ली । खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन केवल प्रतिभा, कड़ी मेहनत और नियमित अभ्यास पर ही निर्भर नहीं करता, बल्कि कई लोग मानते हैं कि सकारात्मक वातावरण और ऊर्जा भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार घर या प्रशिक्षण स्थल की दिशाओं का संतुलन व्यक्ति के आत्मविश्वास, मानसिक शक्ति और कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकता है। विशेष रूप से खेल जगत से जुड़े लोगों के लिए दक्षिण-पूर्व, दक्षिण-दक्षिण-पूर्व और दक्षिण दिशा को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।

    वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार ये तीनों दिशाएं मिलकर अग्नि तत्व का क्षेत्र बनाती हैं। अग्नि तत्व को ऊर्जा, उत्साह, साहस और सक्रियता का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि यदि यह क्षेत्र संतुलित और दोषमुक्त हो तो खिलाड़ी के भीतर प्रतिस्पर्धा की भावना मजबूत होती है और वह अपने लक्ष्य पर अधिक एकाग्रता के साथ काम कर पाता है। इससे मानसिक दृढ़ता और आत्मविश्वास में भी सकारात्मक वृद्धि हो सकती है।

    दक्षिण-दक्षिण-पूर्व दिशा को विशेष रूप से साहस और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता से जोड़ा जाता है। कहा जाता है कि इस दिशा का संतुलित होना खिलाड़ी को कठिन परिस्थितियों में भी संयम बनाए रखने और बेहतर निर्णय लेने में मदद कर सकता है। कुछ वास्तु मान्यताओं के अनुसार इस दिशा में बैठकर भोजन करना भी लाभकारी माना जाता है, क्योंकि इससे शरीर और मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होने की बात कही जाती है।

    दक्षिण दिशा को यश, सम्मान और पहचान की दिशा माना जाता है। वास्तु मान्यता के अनुसार यदि इस दिशा में किसी प्रकार का दोष हो तो व्यक्ति को अपनी मेहनत के अनुरूप सफलता या पहचान मिलने में कठिनाई आ सकती है। वहीं यदि यह दिशा संतुलित रहे तो खेल के क्षेत्र में उपलब्धियों के साथ सामाजिक सम्मान और पहचान मिलने की संभावनाएं बढ़ने की बात कही जाती है। हालांकि सफलता के लिए निरंतर अभ्यास और प्रदर्शन सबसे महत्वपूर्ण आधार बने रहते हैं।

    दक्षिण-पूर्व दिशा को संसाधनों और आर्थिक स्थिरता से जोड़कर देखा जाता है। खेलों में आगे बढ़ने के लिए प्रशिक्षण, उपकरण, प्रतियोगिताओं में भागीदारी और अन्य आवश्यक सुविधाओं की जरूरत होती है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार इस दिशा का संतुलन व्यक्ति को संसाधनों के बेहतर उपयोग और आर्थिक सहयोग प्राप्त करने में सहायक माना जाता है। यही कारण है कि इस क्षेत्र को व्यवस्थित और सकारात्मक बनाए रखने की सलाह दी जाती है।

    अग्नि कोण में रसोई का होना शुभ माना जाता है, क्योंकि यह अग्नि तत्व के स्वाभाविक स्वरूप के अनुरूप माना जाता है। वहीं इस क्षेत्र में जल तत्व से जुड़ी वस्तुएं, अत्यधिक नीले या काले रंग का उपयोग तथा अनावश्यक पानी की व्यवस्था करने से बचने की सलाह दी जाती है। ऐसी मान्यताओं के अनुसार इससे ऊर्जा का संतुलन प्रभावित हो सकता है।

    वास्तु शास्त्र को मानने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि जो युवा या पेशेवर खिलाड़ी खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहते हैं, उन्हें अपने घर या अभ्यास स्थल की इन दिशाओं को स्वच्छ, व्यवस्थित और वास्तुदोष से मुक्त रखने का प्रयास करना चाहिए। हालांकि यह भी ध्यान रखना आवश्यक है कि खेलों में सफलता का सबसे बड़ा आधार नियमित अभ्यास, अनुशासन, उचित प्रशिक्षण और दृढ़ संकल्प ही है, जबकि वास्तु संबंधी उपाय व्यक्तिगत आस्था और मान्यता का विषय हैं।

  • धन और सफलता का मार्ग दिखाते हैं चाणक्य के नौ सूत्र, सही सोच और अनुशासन से बदल सकती है जीवन की दिशा

    धन और सफलता का मार्ग दिखाते हैं चाणक्य के नौ सूत्र, सही सोच और अनुशासन से बदल सकती है जीवन की दिशा

    नई दिल्ली । आचार्य चाणक्य को भारत के महान अर्थशास्त्रियों, कूटनीतिज्ञों और नीति-निर्माताओं में प्रमुख स्थान प्राप्त है। उनके विचार आज भी व्यक्तिगत विकास, आर्थिक प्रबंधन और सफल जीवन के लिए प्रासंगिक माने जाते हैं। चाणक्य का मानना था कि केवल धन अर्जित करना ही समृद्धि का आधार नहीं है, बल्कि सही सोच, अनुशासित जीवन, दूरदर्शिता और विवेकपूर्ण निर्णय ही व्यक्ति को स्थायी सफलता दिलाते हैं। उनके बताए गए सिद्धांत आज के प्रतिस्पर्धी दौर में भी लोगों को जीवन की सही दिशा चुनने की प्रेरणा देते हैं।

    चाणक्य के अनुसार सफलता की शुरुआत स्पष्ट लक्ष्य से होती है। यदि व्यक्ति को यह पता ही न हो कि उसे किस दिशा में आगे बढ़ना है, तो उसकी मेहनत बिखर जाती है। स्पष्ट उद्देश्य व्यक्ति को योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ने और अपने प्रयासों को सही दिशा देने में मदद करता है। यही कारण है कि लक्ष्य निर्धारण को उन्होंने सफलता का पहला आधार माना।

    समय के महत्व को भी चाणक्य ने विशेष रूप से रेखांकित किया है। उनका मानना था कि समय सबसे मूल्यवान संसाधन है और जो व्यक्ति इसका सदुपयोग करना सीख लेता है, उसके लिए प्रगति के नए अवसर स्वयं बनने लगते हैं। समय पर निर्णय लेना, आलस्य से बचना और अवसरों का सही उपयोग करना सफलता की महत्वपूर्ण शर्त मानी गई है।

    आर्थिक प्रबंधन को लेकर भी चाणक्य की सोच अत्यंत व्यावहारिक थी। उनका कहना था कि जितना आवश्यक धन कमाना है, उतना ही जरूरी उसे समझदारी से खर्च करना और भविष्य के लिए बचत करना भी है। अनावश्यक खर्च आर्थिक अस्थिरता का कारण बन सकता है, जबकि संतुलित वित्तीय व्यवहार व्यक्ति को सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाता है।

    चाणक्य ने ज्ञान को सबसे बड़ी पूंजी बताया है। उनका मानना था कि बदलते समय के साथ नई जानकारी और कौशल सीखते रहना आवश्यक है। जो व्यक्ति स्वयं को लगातार विकसित करता रहता है, वही प्रतिस्पर्धा में आगे निकलता है। सीखने की यह प्रवृत्ति व्यक्ति के आत्मविश्वास और कार्यक्षमता दोनों को मजबूत बनाती है।

    उन्होंने यह भी कहा कि व्यक्ति की संगति उसके विचारों और भविष्य को प्रभावित करती है। सकारात्मक सोच रखने वाले और प्रेरित करने वाले लोगों के साथ रहने से व्यक्तित्व का विकास होता है, जबकि नकारात्मक वातावरण प्रगति में बाधा बन सकता है। इसलिए सही लोगों का साथ चुनना भी सफलता का महत्वपूर्ण आधार माना गया है।

    चाणक्य जोखिम लेने की क्षमता को भी आवश्यक मानते थे, लेकिन उन्होंने यह स्पष्ट किया कि हर निर्णय सोच-समझकर और परिस्थितियों का आकलन करने के बाद ही लेना चाहिए। बिना तैयारी के उठाया गया जोखिम नुकसान पहुंचा सकता है, जबकि विवेकपूर्ण निर्णय बड़े अवसरों का मार्ग खोल सकता है।

    उनके विचारों में गोपनीयता, धैर्य और अनुशासन का भी विशेष महत्व है। चाणक्य के अनुसार अपनी योजनाओं को समय से पहले सार्वजनिक करने के बजाय उन्हें सफलतापूर्वक पूरा करना अधिक उचित है। साथ ही, उन्होंने यह भी बताया कि सफलता एक दिन में नहीं मिलती, बल्कि लगातार प्रयास, संयम और अनुशासित जीवनशैली से ही स्थायी उपलब्धियां प्राप्त होती हैं।

    चाणक्य ने विनम्रता को भी सफल व्यक्तित्व का महत्वपूर्ण गुण बताया है। उनका मानना था कि ऊंचाइयों पर पहुंचने के बाद भी व्यवहार में सरलता और सम्मान बनाए रखना व्यक्ति की वास्तविक पहचान होती है। यही गुण लोगों का विश्वास जीतते हैं और दीर्घकालिक सफलता की मजबूत नींव तैयार करते हैं।

  • सूर्य के नक्षत्र उत्तराफाल्गुनी में चंद्रमा का प्रवेश, इन 4 राशियों पर बरसेगी सफलता, सम्मान और धन की वर्षा

    सूर्य के नक्षत्र उत्तराफाल्गुनी में चंद्रमा का प्रवेश, इन 4 राशियों पर बरसेगी सफलता, सम्मान और धन की वर्षा

    नई दिल्ली। गंगा दशहरा 2026 के पावन अवसर पर एक महत्वपूर्ण ज्योतिषीय परिवर्तन देखने को मिल रहा है, जिसने ज्योतिष प्रेमियों और राशि आधारित भविष्य में रुचि रखने वाले लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर लिया है। 25 मई 2026 को चंद्रमा सूर्य के प्रभाव वाले उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में प्रवेश कर चुके हैं और यह गोचर 26 मई की सुबह तक प्रभावी रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार चंद्रमा मन, भावनाओं और निर्णय क्षमता का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र को स्थिरता, प्रतिष्ठा और सफलता से जोड़कर देखा जाता है। ऐसे में इस विशेष संयोग का असर कुछ राशियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लेकर आने वाला माना जा रहा है।

    इस नक्षत्र परिवर्तन का प्रभाव विशेष रूप से मिथुन राशि के जातकों के लिए शुभ संकेत दे रहा है। लंबे समय से नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को अच्छे अवसर मिल सकते हैं और करियर में आगे बढ़ने के रास्ते खुल सकते हैं। व्यापार से जुड़े लोगों के लिए भी समय लाभकारी माना जा रहा है, जहां नई साझेदारी या बड़ी डील सफलता का कारण बन सकती है। आर्थिक स्थिति में सुधार और रुके हुए कार्यों के पूरे होने की संभावना से मानसिक संतुष्टि बढ़ सकती है।

    कर्क राशि के जातकों के लिए भी यह गोचर राहत और सकारात्मक ऊर्जा लेकर आने वाला माना जा रहा है। परिवार में चल रही परेशानियां कम हो सकती हैं और रिश्तों में मधुरता लौटने के संकेत मिल रहे हैं। कार्यक्षेत्र में अच्छी खबर मिलने के योग बन सकते हैं। नौकरीपेशा लोगों को पदोन्नति या वेतन वृद्धि जैसी खुशखबरी मिल सकती है। व्यापारिक गतिविधियों में भी गति बढ़ने के संकेत दिखाई दे रहे हैं, जिससे आत्मविश्वास में बढ़ोतरी हो सकती है।

    सिंह राशि के लिए यह समय विशेष रूप से प्रभावशाली माना जा रहा है। नेतृत्व क्षमता और आत्मविश्वास में वृद्धि के साथ सामाजिक पहचान मजबूत हो सकती है। करियर में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं और आय के नए स्रोत बनने की संभावना भी जताई जा रही है। समाज में सम्मान बढ़ सकता है और लोग आपके विचारों को गंभीरता से सुन सकते हैं। यह समय नई शुरुआत और बड़े निर्णय लेने के लिए अनुकूल माना जा रहा है।

    वहीं धनु राशि के जातकों के लिए भी यह गोचर नई उम्मीदें लेकर आ सकता है। लंबे समय से अटके हुए कार्यों में गति आने की संभावना है और सफलता के नए मार्ग खुल सकते हैं। सरकारी कार्यों से जुड़े मामलों में राहत मिल सकती है और यदि कोई कानूनी प्रक्रिया चल रही है तो सकारात्मक संकेत मिल सकते हैं। मानसिक शांति और आत्मविश्वास बढ़ने से व्यक्ति अपने फैसले अधिक स्पष्टता के साथ ले पाएगा। ज्योतिषीय दृष्टि से देखा जाए तो गंगा दशहरा पर बना यह चंद्र गोचर कई लोगों के लिए नई ऊर्जा और नई संभावनाओं का संकेत बनकर सामने आ सकता है।

  • फिल्मों के नाम में ‘के’ था सफलता का फॉर्मूला, लेकिन एक कहानी ने तोड़ दिया करण जौहर का भ्रम

    फिल्मों के नाम में ‘के’ था सफलता का फॉर्मूला, लेकिन एक कहानी ने तोड़ दिया करण जौहर का भ्रम


    नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा की दुनिया में जब सफल फिल्म निर्माताओं का जिक्र होता है तो निर्देशक और निर्माता Karan Johar का नाम प्रमुखता से सामने आता है। बीते कई वर्षों में उन्होंने अपनी फिल्मों के जरिए दर्शकों के बीच अलग पहचान बनाई है। बड़े सेट, भावनात्मक कहानियां, रिश्तों की गहराई और पारिवारिक मूल्यों को पर्दे पर भव्य तरीके से दिखाने की उनकी शैली ने उन्हें फिल्म जगत का एक बड़ा नाम बना दिया। हालांकि फिल्मों के अलावा करण अपनी निजी सोच और मान्यताओं को लेकर भी कई बार चर्चा में रहे हैं।

    एक समय ऐसा था जब करण जौहर न्यूमरोलॉजी यानी अंकों और अक्षरों के प्रभाव पर काफी विश्वास करते थे। उनका मानना था कि अंग्रेजी का ‘K’ अक्षर उनके लिए बेहद शुभ है और इसी वजह से उनकी फिल्मों को सफलता मिलती है। यही कारण था कि उन्होंने लगातार अपनी फिल्मों के नाम ऐसे चुने जिनकी शुरुआत इसी अक्षर से होती थी। उनकी कई चर्चित और सफल फिल्मों के नाम इसी पैटर्न पर आधारित रहे। उस दौर में फिल्म इंडस्ट्री में भी न्यूमरोलॉजी को लेकर खास आकर्षण देखा जाता था और कई लोग नामों की स्पेलिंग तक बदलते नजर आते थे।

    करण जौहर की फिल्मी यात्रा भी काफी दिलचस्प रही है। फिल्मी माहौल में बड़े होने के कारण उनका झुकाव बचपन से सिनेमा की ओर था। उन्होंने शुरुआत पर्दे के पीछे काम करते हुए की और बाद में निर्देशन के क्षेत्र में कदम रखा। उनकी पहली निर्देशित फिल्म ने उन्हें बड़ी पहचान दिलाई और उसके बाद उन्होंने कई यादगार फिल्मों का निर्माण किया। उनकी फिल्मों ने केवल बॉक्स ऑफिस पर सफलता हासिल नहीं की बल्कि दर्शकों के दिलों में भी खास जगह बनाई।

    लेकिन समय के साथ करण की सोच में बदलाव आया। उन्होंने एक बातचीत के दौरान बताया था कि निर्देशक Rajkumar Hirani की फिल्म Lage Raho Munna Bhai देखने के बाद उनकी सोच बदल गई। फिल्म में अंधविश्वास और न्यूमरोलॉजी जैसे विषयों को हल्के अंदाज में दिखाया गया था, जिसने उन्हें सोचने पर मजबूर कर दिया। उन्हें महसूस हुआ कि किसी फिल्म की सफलता उसके नाम के पहले अक्षर से नहीं बल्कि उसकी कहानी, मेहनत और दर्शकों से जुड़ाव से तय होती है।

    इसके बाद उन्होंने फिल्मों के नाम को लेकर अपनी पुरानी मान्यता छोड़ दी और नए विचारों के साथ आगे बढ़ना शुरू किया। आने वाले वर्षों में उन्होंने कई अलग-अलग शीर्षकों वाली सफल फिल्में दीं और निर्माता के रूप में नए कलाकारों को भी मौका दिया। आज करण जौहर केवल एक सफल निर्देशक नहीं बल्कि हिंदी सिनेमा की बदलती सोच और आधुनिक फिल्म निर्माण शैली की एक बड़ी पहचान बन चुके हैं। उनकी यात्रा यह भी दिखाती है कि समय के साथ विचार बदलना और नई सोच अपनाना सफलता का अहम हिस्सा हो सकता है।

  • बड़ा मंगल का शुभ योग, इन 5 राशियों के लिए खुलेंगे धन और सफलता के द्वार

    बड़ा मंगल का शुभ योग, इन 5 राशियों के लिए खुलेंगे धन और सफलता के द्वार



    नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बड़ा मंगल का दिन इस बार बेहद खास माना जा रहा है क्योंकि इस दिन Gajakesari Rajyog का दुर्लभ संयोग बन रहा है। इस योग का निर्माण तब होता है जब गुरु ग्रह और चंद्रमा एक ही राशि में आकर युति करते हैं। 19 मई 2026 को यह संयोग मिथुन राशि में बन रहा है, जिससे इसका प्रभाव और अधिक शक्तिशाली माना जा रहा है।

    ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार यह योग व्यक्ति के जीवन में धन लाभ, सफलता, मान-सम्मान और रुके हुए कार्यों में प्रगति का संकेत देता है। विशेष रूप से कुछ राशियों पर इसका प्रभाव अधिक शुभ बताया जा रहा है। मेष राशि के जातकों के लिए कार्यस्थल पर सराहना और आर्थिक लाभ के योग बन रहे हैं, हालांकि उन्हें क्रोध और फिजूलखर्ची से बचने की सलाह दी गई है।

    वृषभ राशि वालों के लिए यह समय करियर में उन्नति और पारिवारिक सुख लेकर आ सकता है, वहीं मिथुन राशि के जातकों के लिए यह योग सबसे अधिक फलदायी माना जा रहा है क्योंकि यह युति उनकी ही राशि में बन रही है, जिससे जीवन में सकारात्मक बदलाव और आर्थिक मजबूती के संकेत हैं। सिंह राशि वालों के लिए अचानक धन लाभ और प्रमोशन के अवसर बन सकते हैं, जबकि मीन राशि के जातकों के लिए सुख-सुविधाओं में वृद्धि और रुका हुआ धन मिलने की संभावना बताई जा रही है।

    हालांकि यह ज्योतिषीय मान्यता पर आधारित भविष्यफल है और वास्तविक परिणाम व्यक्ति के कर्म और परिस्थितियों पर निर्भर करते हैं।

  • नर्मदापुरम में प्रतिभाओं का सम्मान 52 टॉपर्स को मिला मंच विधायक बोले यही जीवन के टर्निंग पॉइंट

    नर्मदापुरम में प्रतिभाओं का सम्मान 52 टॉपर्स को मिला मंच विधायक बोले यही जीवन के टर्निंग पॉइंट


    नर्मदापुरम । नर्मदापुरम जिले में शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित करने के लिए आयोजित प्रतिभा सम्मान समारोह प्रेरणा और उत्साह का केंद्र बन गया। मप्र माध्यमिक शिक्षा मंडल की 10वीं और 12वीं परीक्षाओं में जिले में शीर्ष स्थान प्राप्त करने वाले 52 विद्यार्थियों को जिला पंचायत सभागार में सम्मानित किया गया। इस अवसर पर कलेक्टर सोमेश मिश्रा की अध्यक्षता में कार्यक्रम आयोजित हुआ, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में विधायक डॉ सीताशरन शर्मा मौजूद रहे।

    कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष राधा पटेल, जनपद अध्यक्ष भूपेंद्र चौकसे और सीईओ हिमांशु जैन सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने विद्यार्थियों को प्रशस्ति पत्र और सम्मान देकर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

    कलेक्टर सोमेश मिश्रा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा जीवन का सबसे बड़ा अस्त्र है, जो व्यक्ति को हर चुनौती से लड़ने की क्षमता देता है। उन्होंने कहा कि 10वीं कक्षा जीवन का पहला महत्वपूर्ण पड़ाव होती है, जहां से भविष्य की नींव मजबूत होती है। इसके बाद 12वीं, उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में निरंतर मेहनत ही सफलता की कुंजी है।

    विधायक डॉ सीताशरन शर्मा ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि 10वीं और 12वीं कक्षा जीवन के दो बड़े टर्निंग पॉइंट होते हैं। 10वीं के बाद विषयों का चयन और 12वीं के बाद करियर का निर्णय व्यक्ति के पूरे भविष्य को दिशा देता है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की इस सफलता से उनके परिवारों में गर्व और खुशी का माहौल है।

    इस वर्ष के परीक्षा परिणामों में खास बात यह रही कि ग्रामीण और सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों ने शानदार प्रदर्शन किया। सीमित संसाधनों के बावजूद इन छात्रों ने अपनी मेहनत और लगन से सफलता हासिल की, जो अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बन गई है।

    पथरौटा के सरकारी स्कूल की छात्रा रितिका कुरुचि ने 12वीं होम साइंस में टॉप कर एक मिसाल पेश की। माता-पिता के साये के बिना दादा-दादी और चाचा-चाची के सहयोग से पढ़ाई करते हुए उन्होंने यह उपलब्धि हासिल की। वहीं तारारोड़ा गांव की आंशिक सराठे ने आर्ट्स संकाय में 93.2 प्रतिशत अंक लाकर पहला स्थान प्राप्त किया। उनके पिता सैलून चलाते हैं, जिससे यह सफलता और भी प्रेरणादायक बन जाती है।

    उत्कृष्ट विद्यालय की शेख जोया ने आर्ट्स में दूसरा स्थान हासिल किया, जिनके पिता बाइक मैकेनिक हैं। गणित में अवनी गोहिया और रशिका राय, विज्ञान में आदित्य लोवंशी और नमामि बसेड़िया, कृषि में कनक चौरे और कॉमर्स में निखिल सोनी तथा शिफा शाह ने भी उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। 10वीं कक्षा में नैना यादव, सोनम परिहार और प्रिंसी साहू टॉपर रहीं।

    जिला शिक्षा अधिकारी लक्ष्मी नारायण प्रजापति के अनुसार, जिले का 10वीं का परिणाम 78 प्रतिशत और 12वीं का 81 प्रतिशत रहा, जिससे नर्मदापुरम को प्रदेश में 16वीं रैंक प्राप्त हुई है। यह समारोह केवल सम्मान का मंच नहीं बल्कि उन संघर्षों और सफलताओं की कहानी भी है, जो यह बताती हैं कि मेहनत और संकल्प से किसी भी परिस्थिति को पार किया जा सकता है।

  • 34 साल की मेहनत के बाद रवि किशन को मिली पहचान, बोले- ‘मैं खत्म हो गया था’

    34 साल की मेहनत के बाद रवि किशन को मिली पहचान, बोले- ‘मैं खत्म हो गया था’


    नई दिल्ली । रवि किशन की जिंदगी की कहानी एक लंबी जर्नी हैजिसमें संघर्षनिराशा और फिर सफलता का उजाला शामिल है। 34 साल तक धैर्य से इंतजार करने के बाद उन्हें आखिरकार वह मुकाम मिलाजिसकी हर कलाकार को चाह होती है। लापता लेडीज़ और वेब सीरीज मामला लीगल है में उनके बेहतरीन अभिनय ने दर्शकों और क्रिटिक्स दोनों का दिल जीत लिया। इस समय वे फिल्म भाबीजी घर पर हैं: फन ऑन द रन में भी नजर आ रहे हैंजिसे बिनैफर और संजय कोहली ने प्रोड्यूस किया है।

    रवि किशन ने इस फिल्म के बारे में कहा कि वे हमेशा से इस शो के फैन रहे हैं। कहानीडायरेक्टर और उनके किरदार तीनों ही कारण थे जिनकी वजह से उन्होंने यह प्रोजेक्ट चुना। उनका किरदार एकतरफा प्यार में डूबा हुआ हैजिसे बिना ज्यादा एक्सप्रेशन के भी लोगों को हंसाना पड़ता है। रवि ने बताया कि बिहार और यूपी में उन्हें ऐसे लोगों से रोज मिलना होता हैइसलिए यह रोल उन्हें बेहद पसंद आया।

    हालांकि रवि किशन दशकों से फिल्मों में काम कर रहे हैंलेकिन उन्हें बड़ी पहचान हाल ही में मिली। उन्होंने कहा कि उन्होंने 34 साल तक धैर्य से इंतजार किया और एक समय ऐसा भी आया जब लोगों को लगता था कि वे सिर्फ भोजपुरी फिल्मों तक सीमित रह गए हैंराजनीति में चले गए हैंउम्र बढ़ गई है और अब धीरे-धीरे गायब हो जाएंगे। लेकिन भगवान की कृपा सेजब सब कुछ खत्म होता दिखातभी किरण राव जैसी निर्देशक लापता लेडीज़ जैसी स्क्रिप्ट लेकर आईं और उसके बाद मामला लीगल है जैसी वेब सीरीज ने उन्हें नई पहचान दी।

    रवि ने कहा कि पिछले साल ने साबित कर दिया कि जब फिल्ममेकर उन पर भरोसा करते हैं और अच्छा कंटेंट देते हैंतो वे क्या कर सकते हैं। उनकी जर्नी संघर्ष कर रहे कलाकारों के लिए एक मिसाल है।

    उन्होंने तेरे नाम के बाद अपने करियर के उस दौर को याद किया जब काम के मौके बहुत कम मिल रहे थे। सलमान खान के साथ तेरे नाम के बाद उन्हें लगा कि यहां बहुत भीड़ हैवह इस रेस का हिस्सा नहीं बन पाएंगे और लोग उनका रिस्पॉन्स नहीं देंगे। गुस्सा और निराशा जरूर थीलेकिन उन्होंने उसी गुस्से को भोजपुरी इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाने में लगाया। रवि ने साफ कहा कि उन्होंने कभी बॉलीवुड को दोष नहीं दियाक्योंकि हिंदी सिनेमा ने उन्हें पहचान दी और वही सब सिखायाजिसे बाद में भोजपुरी फिल्मों ने अपनाया।

    अब जब उन्हें प्यार और पहचान मिल रही हैतो वे बेहद आभारी हैं। रवि किशन का कहना है कि यह उगते सूरज का खेल है और यह बात हर पेशे में सच है। उन्होंने कहा कि अब जो प्यार मिल रहा हैउसके लिए वह दिल से धन्यवाद करते हैं।

  • लक्ष्मी के साथ सरस्वती और गणेश की पूजा क्यों है जरूरी धन बुद्धि और ज्ञान का संतुलन ही बनाता है जीवन सफल

    लक्ष्मी के साथ सरस्वती और गणेश की पूजा क्यों है जरूरी धन बुद्धि और ज्ञान का संतुलन ही बनाता है जीवन सफल


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में देवी-देवताओं की पूजा केवल आस्था का विषय नहींबल्कि जीवन में संतुलन और सही दिशा पाने का माध्यम मानी जाती है। विशेष रूप से मां लक्ष्मीमां सरस्वती और भगवान गणेश की संयुक्त पूजा को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया है। शास्त्रों और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यदि केवल धन की देवी मां लक्ष्मी की उपासना की जाए और ज्ञान व बुद्धि की अधिष्ठात्री शक्तियों को असंतुलित हो सकता है।
    मां लक्ष्मी को धनवैभव और समृद्धि की देवी माना जाता है। हर व्यक्ति अपने जीवन में सुख-सुविधाओं और ऐश्वर्य की कामना करता हैजिसके लिए धन आवश्यक है। लेकिन धर्मशास्त्रों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि धन अपने आप में न तो शुभ है और न ही अशुभबल्कि उसका उपयोग ही उसे शुभ या अशुभ बनाता है। धन का सही उपयोग तभी संभव है जब व्यक्ति के पास ज्ञान और विवेक हो। यहीं पर मां सरस्वती और भगवान गणेश का महत्व सामने आता है। मां सरस्वती ज्ञानविद्या और विवेक की देवी हैं। उनके आशीर्वाद से व्यक्ति सही-गलत में भेद करना सीखता है और अपने निर्णयों को समझदारी से ले पाता है। वहीं भगवान गणेश को बुद्धिविवेक और विघ्नहर्ता माना जाता है। वे व्यक्ति को सोचने-समझने की शक्ति देते हैंजिससे वह जीवन में आने वाली बाधाओं को पार कर सके।
    मान्यता है कि यदि किसी घर में केवल मां लक्ष्मी की पूजा की जाए और ज्ञान व बुद्धि की उपेक्षा की जाएतो धन आने के बावजूद उसका सदुपयोग नहीं हो पाता। ऐसा धन व्यक्ति को अहंकारलालच और मोह की ओर ले जा सकता है। परिणामस्वरूप न केवल बुद्धि भ्रष्ट होती हैबल्कि व्यक्ति की नीयत और व्यवहार में भी नकारात्मक बदलाव आने लगते हैं। धन की ऊर्जा अत्यंत शक्तिशाली मानी जाती हैऔर यदि इसे संतुलित ढंग से न संभाला जाए तो यह जीवन में अशांति और पतन का कारण भी बन सकती है।
    इसी कारण धार्मिक परंपराओं में मां लक्ष्मी के साथ मां सरस्वती और भगवान गणेश की पूजा का विधान बताया गया है। इन तीनों की संयुक्त आराधना से व्यक्ति को धन के साथ-साथ ज्ञान और बुद्धि का भी आशीर्वाद मिलता है। इससे न केवल आर्थिक समृद्धि आती हैबल्कि जीवन में संतुलनविवेक और सद्बुद्धि भी बनी रहती है। कलियुग में धन की आवश्यकता से कोई इनकार नहीं कर सकतालेकिन केवल धन के पीछे भागना जीवन का उद्देश्य नहीं होना चाहिए। जब धनज्ञान और बुद्धि का संतुलन बनता हैतभी व्यक्ति सच्चे अर्थों में सुखी और सफल बन पाता है। यही कारण है कि धार्मिक दृष्टि से मां लक्ष्मीमां सरस्वती और भगवान गणेश की एक साथ पूजा को जीवन को सही दिशा देने वाला मार्ग माना गया है।