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  • एपस्टीन केस में सनसनीखेज खुलासा: मौत से पहले लिखा ‘गुडबाय नोट’ 7 साल से सीलबंद, अब उठे बड़े सवाल

    एपस्टीन केस में सनसनीखेज खुलासा: मौत से पहले लिखा ‘गुडबाय नोट’ 7 साल से सीलबंद, अब उठे बड़े सवाल


    नई दिल्ली। अमेरिका के कुख्यातएपस्टीन केस में सनसनीखेज खुलासा: मौत से पहले लिखा ‘गुडबाय नोट’ 7 साल से सीलबंद, अब उठे बड़े सवाल फाइनेंसर Jeffrey Epstein की रहस्यमयी मौत को लेकर एक बार फिर नया और चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। 2019 में जेल में हुई उसकी मौत से पहले लिखा गया एक कथित सुसाइड नोट पिछले सात सालों से सीलबंद रखा गया था, जिसे अब सार्वजनिक करने की मांग तेज हो गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस नोट में लिखा था। “अलविदा कहने का समय आ गया है”, जिसने पूरे मामले को और ज्यादा रहस्यमयी बना दिया है।

    यह नोट सबसे पहले एपस्टीन के सेलमेट Nicholas Tartaglione को मिला था, जो खुद एक पूर्व पुलिस अधिकारी और कई गंभीर अपराधों में दोषी है। बताया जा रहा है कि यह नोट जेल की कोठरी में रखी एक ग्राफिक नॉवेल के अंदर छिपा हुआ था। पीले रंग के कागज पर लिखे इस संदेश ने उस वक्त भी कई सवाल खड़े किए थे, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इसे कभी सार्वजनिक नहीं किया गया।

    टार्टाग्लियोन ने यह नोट जेल प्रशासन को देने के बजाय अपने वकीलों को सौंप दिया था। उसका कहना था कि उसे डर था कि अगर यह नोट अधिकारियों को दिया गया, तो उस पर एपस्टीन को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया जा सकता है। उसके वकीलों का दावा है कि उन्होंने नोट की सत्यता की पुष्टि की, हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि यह जांच कैसे की गई।

    इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इतने अहम सबूत को अब तक जांच एजेंसियों से दूर क्यों रखा गया? रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिस फेडरल जज के सामने टार्टाग्लियोन का केस चल रहा था, उन्होंने इस नोट को सीलबंद कर दिया था। चौंकाने वाली बात यह भी है कि न तो अमेरिकी न्याय विभाग और न ही एपस्टीन की मौत की जांच करने वाली एजेंसियों ने इस नोट की आधिकारिक जांच की।

    गौरतलब है कि Jeffrey Epstein को 6 जुलाई 2019 को यौन तस्करी के गंभीर आरोपों में गिरफ्तार किया गया था। वह मुकदमे का इंतजार कर रहा था, तभी अगस्त 2019 में न्यूयॉर्क की जेल में उसकी मौत हो गई। उसकी मौत को आधिकारिक तौर पर आत्महत्या बताया गया, लेकिन सुरक्षा चूक और कई संदिग्ध परिस्थितियों के चलते यह मामला शुरू से ही विवादों में रहा है।

    अब जब इस ‘गुडबाय नोट’ का खुलासा सामने आया है, तो एक बार फिर यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या एपस्टीन की मौत वाकई आत्महत्या थी या इसके पीछे कोई बड़ा राज छिपा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह नोट सार्वजनिक होता है, तो यह इस हाई-प्रोफाइल केस के कई अनसुलझे रहस्यों से पर्दा उठा सकता है।

  • ग्वालियर में मेधावी सपनों का दर्दनाक अंत: 11वीं की छात्रा ने खुद को मारी गोली, सुसाइड नोट में लिखा- 'नहीं कर सकी परिवार का नाम रोशन'

    ग्वालियर में मेधावी सपनों का दर्दनाक अंत: 11वीं की छात्रा ने खुद को मारी गोली, सुसाइड नोट में लिखा- 'नहीं कर सकी परिवार का नाम रोशन'


    ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर से एक ऐसा हृदयविदारक मामला सामने आया है, जिसने आधुनिक शिक्षा प्रणाली और बच्चों पर बढ़ते मानसिक दबाव को एक बार फिर कठघरे में खड़ा कर दिया है। बहोड़ापुर थाना क्षेत्र के घोसीपुरा इलाके में रहने वाली 17 वर्षीय छात्रा ट्विंकल ने परीक्षा में कम अंक आने के अवसाद में आकर मौत को गले लगा लिया। आईटीबीपी (ITBP) जवान की बेटी ने बुधवार तड़के अपने ही घर में पिता की लाइसेंसी पिस्तौल से खुद के सीने में गोली मार ली। जब तक परिजन उसे अस्पताल ले जाते, तब तक उसकी सांसें थम चुकी थीं।

    सपनों का बोझ और एक घातक फैसला
    घटना बुधवार सुबह करीब 7 बजे की है। गिरराज जी मंदिर के पास रहने वाले श्याम कुमार अहिरवार के घर में सब कुछ सामान्य था, लेकिन अचानक एक धमाके ने परिवार की खुशियों को मातम में बदल दिया। ट्विंकल अपनी मां के साथ सोई थी, लेकिन सुबह उठकर वह दूसरे कमरे में चली गई। जैसे ही गोली चलने की आवाज आई, परिजन बदहवास होकर कमरे की ओर दौड़े, लेकिन दरवाजा अंदर से बंद था। खिड़की से झांकने पर जो मंजर दिखा उसने सबके पैरों तले जमीन खिसका दी। ट्विंकल लहूलुहान हालत में जमीन पर पड़ी थी और पास ही उसके पिता की रिवॉल्वर पड़ी थी।

    सुसाइड नोट: “गुड बाय… कम नंबर आए हैं”
    पुलिस को मौके से छात्रा का एक रजिस्टर मिला है, जो अब उसकी आखिरी याद बन गया है। इस रजिस्टर में अंग्रेजी में लिखे चार लाइनों के सुसाइड नोट ने पुलिस और परिजनों की आंखों में आंसू ला दिए। ट्विंकल ने लिखा, “मेरे कम मार्क्स आए हैं। मैं परिवार का नाम रोशन नहीं कर सकी, इसलिए यह कदम उठा रही हूं। गुड बाय।” यह चंद शब्द बताते हैं कि एक किशोर मन पर ‘सफलता’ का कितना भारी दबाव था कि उसने जीवन को ही हार मान लिया। दो दिन पहले आए 11वीं के रिजल्ट ने उसे इतना तोड़ दिया था कि उसने अपनी प्रतिभा और भविष्य की जगह मौत को चुनना बेहतर समझा।

    जांच में जुटी पुलिस और फोरेंसिक टीम
    घटना की सूचना मिलते ही बहोड़ापुर थाना प्रभारी और सीएसपी कृष्णपाल सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। फोरेंसिक एक्सपर्ट्स और फिंगरप्रिंट टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं। पुलिस ने वह रजिस्टर और हथियार जब्त कर लिया है जिससे छात्रा ने खुदकुशी की। प्राथमिक जांच में यह स्पष्ट है कि छात्रा रिजल्ट के बाद से ही गुमसुम थी और गहरे मानसिक तनाव से गुजर रही थी।

    यह घटना समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है। बच्चों की उपलब्धियों को केवल अंकों के तराजू पर तौलने की प्रवृत्ति आज मासूम जिंदगियों पर भारी पड़ रही है। ग्वालियर की इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि संवाद की कमी और ‘नाम रोशन’ करने का अनकहा दबाव किसी भी हंसते-खेलते घर का चिराग बुझा सकता है।

  • नीमच कंट्रोल रूम में दर्दनाक आत्महत्या हेड कॉन्स्टेबल ने सुसाइड नोट में खोले सिस्टम के राज

    नीमच कंट्रोल रूम में दर्दनाक आत्महत्या हेड कॉन्स्टेबल ने सुसाइड नोट में खोले सिस्टम के राज


    नीमच  /मध्यप्रदेश के नीमच जिले से पुलिस विभाग को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है जहां एक हेड कॉन्स्टेबल ने ड्यूटी पर रहते हुए जहर खाकर आत्महत्या कर ली। यह दर्दनाक घटना रविवार आठ फरवरी की बताई जा रही है। मृतक हेड कॉन्स्टेबल ने मरने से पहले चार पेज का सुसाइड नोट लिखा है जिसमें उसने अपने ही विभाग के एक आरआई पर गंभीर मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं। इस घटना के बाद पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है और आला अधिकारी मामले की हर पहलू से जांच की बात कह रहे हैं।

    मृतक हेड कॉन्स्टेबल होशियार सिंह उम्र पचास वर्ष नीमच पुलिस लाइन कनावटी में रहते थे। जानकारी के अनुसार वह पिछले पांच दिनों से स्वास्थ्य कारणों के चलते अवकाश पर थे और सोमवार से दोबारा ड्यूटी जॉइन करने वाले थे। इसी बीच रविवार सुबह वह पुलिस लाइन पहुंचे और शाम के समय जिला पुलिस कंट्रोल रूम पहुंचे। यहीं उन्होंने जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया जिससे उनकी हालत अचानक बिगड़ गई।कंट्रोल रूम में मौजूद पुलिसकर्मियों ने तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी। सूचना मिलते ही नीमच कैंट थाना प्रभारी नीलेश अवस्थी अन्य पुलिस स्टाफ के साथ मौके पर पहुंचे और होशियार सिंह को तत्काल निजी अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

    मामले में सबसे गंभीर पहलू यह है कि हेड कॉन्स्टेबल के पास से चार पन्नों का सुसाइड नोट बरामद हुआ है जो अब सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है कि यह सुसाइड नोट स्वयं होशियार सिंह ने लिखा था। इस पत्र में उन्होंने अपने विभाग के एक आरआई पर लगातार मानसिक प्रताड़ना देने का आरोप लगाया है। पत्र में लिखा गया है कि उन्हें लंबे समय से दबाव अपमान और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा था जिससे वे पूरी तरह टूट चुके थे।

    सूत्रों के अनुसार विभागीय स्तर पर यह भी सामने आया है कि होशियार सिंह को पूर्व में एक बार सेवा से पृथक किया जा चुका था। इसके अलावा उन्हें अपने कार्यकाल के दौरान चार बार विभागीय सजा भी दी गई थी। बताया जा रहा है कि अधिकतर सजाएं बिना सूचना लंबे समय तक अनुपस्थित रहने और अन्य अनुशासनात्मक कारणों से जुड़ी थीं। पुलिस अब इस पहलू की भी गंभीरता से जांच कर रही है कि क्या इन्हीं कारणों से उन पर अतिरिक्त दबाव बनाया जा रहा था।

    नीमच के पुलिस अधीक्षक अंकित जायसवाल ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि जहर खाने से हालत बिगड़ने पर प्रधान आरक्षक को निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। उन्होंने कहा कि सुसाइड नोट में लगाए गए आरोपों सहित पूरे मामले की निष्पक्ष और गहराई से जांच कराई जाएगी।इस घटना ने एक बार फिर पुलिस विभाग के भीतर कार्यरत कर्मचारियों के मानसिक दबाव और आंतरिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी निगाहें जांच पर टिकी हैं कि सच्चाई क्या सामने आती है और जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है।

  • भोपाल में मातम: बैंक क्लर्क ने ट्रेन के आगे कूदकर दी जान, सुसाइड नोट में खुद को बताया जिम्मेदार।

    भोपाल में मातम: बैंक क्लर्क ने ट्रेन के आगे कूदकर दी जान, सुसाइड नोट में खुद को बताया जिम्मेदार।


    भोपाल । राजधानी भोपाल के व्यस्ततम एमपी नगर इलाके से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है जहां जीवन की भागदौड़ और मानसिक तनाव ने एक हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया। भारतीय स्टेट बैंक SBI में क्लर्क के पद पर कार्यरत 35 वर्षीय अभिनाष जैन ने मंगलवार को चेतक ब्रिज के नीचे ट्रेन के सामने कूदकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। यह घटना उस समय हुई जब ऑफिस में उनका अपनी पत्नी के साथ किसी बात को लेकर तीखा विवाद हुआ था।

    दफ्तर से निकले और फिर कभी नहीं लौटे जानकारी के अनुसार लाला लाजपत राय कॉलोनी निवासी अभिनाष जैन और उनकी पत्नी रोली जैन दोनों ही मैदा मील स्थित एसबीआई की एक ही शाखा में कार्यरत थे। मंगलवार की सुबह दोनों हमेशा की तरह साथ में घर से दफ्तर के लिए निकले थे लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि यह उनकी आखिरी मुलाकात होगी। ऑफिस पहुंचने के बाद पति-पत्नी के बीच किसी गंभीर विषय पर बहस हुई। प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस सूत्रों के मुताबिक विवाद के बाद अभिनाष मानसिक रूप से काफी विचलित हो गए और अचानक बैंक से बाहर निकल गए।

    व्हाट्सएप पर अंतिम विदाई: अब कभी वापस नहीं आऊंगा बैंक से निकलने के कुछ ही समय बाद अभिनाष ने अपने पिता भाई और पत्नी को व्हाट्सएप पर एक भावुक संदेश भेजा। इस संदेश को सुसाइड नोट के रूप में देखा जा रहा है जिसमें उन्होंने स्पष्ट रूप से लिखा कि वे अब कभी वापस नहीं लौटेंगे और अपने इस कठोर फैसले के लिए वे किसी और को नहीं बल्कि स्वयं को जिम्मेदार मानते हैं। संदेश भेजने के तुरंत बाद उन्होंने अपना मोबाइल फोन बंद कर दिया जिससे परिजनों में हड़कंप मच गया। घबराए हुए परिजनों ने तत्काल एमपी नगर पुलिस को इसकी सूचना दी जिसके बाद पुलिस ने उनकी तलाश शुरू की।

    चेतक ब्रिज के पास मिला क्षत-विक्षत शव पुलिस और परिजन जब शहर के विभिन्न कोनों में अभिनाष की तलाश कर रहे थे तभी चेतक ब्रिज के पास रेलवे ट्रैक पर लोगों की भारी भीड़ जमा होने की सूचना मिली। मौके पर पहुंचे मृतक के साले ने कपड़ों और हुलिए से अभिनाष की पहचान की। ट्रेन की चपेट में आने के कारण शव बुरी तरह क्षत-विक्षत हो चुका था। सूचना मिलते ही एमपी नगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और पंचनामा बनाकर शव को पोस्टमार्टम के लिए हमीदिया अस्पताल रवाना किया।

    जांच के घेरे में वो आखिरी विवाद पुलिस अब इस मामले की हर पहलू से जांच कर रही है। एएसआई अनूप के अनुसार प्राथमिक तौर पर यह मामला आत्महत्या का ही है लेकिन पुलिस उस विवाद की जड़ तक पहुंचने की कोशिश कर रही है जो बैंक परिसर में पति-पत्नी के बीच हुआ था। क्या तनाव केवल उस क्षण का था या लंबे समय से कोई पारिवारिक कलह चल रही थी पुलिस इन सभी बिंदुओं पर परिजनों के बयान दर्ज करेगी। बुधवार को पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है।यह दुखद घटना समाज में बढ़ते मानसिक तनाव और छोटी-छोटी बातों पर उपजे विवादों के भयावह परिणाम की याद दिलाती है। एक सुरक्षित भविष्य और प्रतिष्ठित नौकरी होने के बावजूद क्षणिक आवेश ने एक युवा जीवन का अंत कर दिया।