Tag: Sukesh

  • 200 करोड़ रंगदारी मामले में जैकलीन को आरोपी बनाने की मांग, अदालत ने याचिका खारिज की

    200 करोड़ रंगदारी मामले में जैकलीन को आरोपी बनाने की मांग, अदालत ने याचिका खारिज की

    नई दिल्ली । दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने 200 करोड़ रुपये की कथित रंगदारी से जुड़े मामले में अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडीस और लीपाक्षी एलावाड़ी को अतिरिक्त आरोपी के तौर पर तलब करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। यह याचिका सुकेश चंद्रशेखर के कथित करीबी सहयोगी नवास कक्कट की ओर से दायर की गई थी।

    विशेष न्यायाधीश गगनदीप सिंह की अदालत ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि इसमें जिन लोगों को अतिरिक्त आरोपी बनाए जाने की मांग की गई है, उनके खिलाफ इस स्तर पर पर्याप्त आधार सामने नहीं आता। अदालत ने याचिकाकर्ता की दलीलों और उपलब्ध बयानों पर विचार करने के बाद यह फैसला सुनाया।

    याचिकाकर्ता का मामला मुख्य रूप से सह-आरोपी पिंकी ईरानी के उस बयान पर आधारित था, जो महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून यानी मकोका की धारा 18 के तहत दर्ज किया गया था। अदालत ने इस बयान को आधार मानते हुए याचिका में लगाए गए दावों की जांच की।

    अदालत ने कहा कि यदि पिंकी ईरानी के बयान को पूरी तरह सही मान भी लिया जाए, तब भी उसमें उन लोगों की भूमिका स्पष्ट रूप से सामने नहीं आती, जिन्हें सुकेश के निर्देश पर महंगे उपहार दिए जाने की बात कही गई है। ऐसे में केवल इस बयान के आधार पर जैकलीन फर्नांडीस और लीपाक्षी एलावाड़ी को नए आरोपी के तौर पर तलब करने का आधार नहीं बनता।

    सुनवाई के दौरान अदालत ने लीपाक्षी एलावाड़ी के बयान का भी उल्लेख किया। कोर्ट के मुताबिक, मामले में उपलब्ध सामग्री को देखते हुए आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 319 के तहत किसी अतिरिक्त आरोपी को तलब करने के लिए आवश्यक आधार इस स्तर पर स्थापित नहीं होता।

    नवास कक्कट की ओर से दायर याचिका में अपने ऊपर लगे आरोपों से संबंधित घटनाक्रम का भी उल्लेख किया गया था। दावा किया गया कि वह सुकेश चंद्रशेखर के निर्देश पर कथित अपराध से जुड़ी रकम को अलग-अलग स्थानों पर रखने, उसे स्थानांतरित करने और उसके लेनदेन को संभालने में मदद करता था।

    याचिका में यह भी आरोप लगाया गया था कि बॉलीवुड से जुड़े लोगों के लिए महंगे उपहार और अन्य कीमती सामान खरीदने के भुगतान की व्यवस्था में भी उसकी भूमिका थी। इसके लिए बैंक खातों में लेनदेन से संबंधित प्रविष्टियां कराने की बात कही गई थी।

    मामले में जैकलीन फर्नांडीस का नाम पहले भी सुकेश चंद्रशेखर से जुड़े विवाद में सामने आता रहा है। हालांकि, मौजूदा सुनवाई में अदालत के सामने सवाल यह था कि उपलब्ध सामग्री के आधार पर उन्हें इस मामले में अतिरिक्त आरोपी के तौर पर तलब किया जा सकता है या नहीं।

    अदालत ने याचिकाकर्ता की ओर से रखे गए आधारों और संबंधित बयानों पर विचार करने के बाद माना कि अतिरिक्त आरोपी को तलब करने के लिए जरूरी कानूनी आधार मौजूद नहीं है। इसी के साथ जैकलीन फर्नांडीस और लीपाक्षी एलावाड़ी को आरोपी बनाने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी गई।

  • मकोका आरोपों पर सुकेश की याचिका पर हाईकोर्ट सख्त, दिल्ली पुलिस को अपना पक्ष रखने का निर्देश

    मकोका आरोपों पर सुकेश की याचिका पर हाईकोर्ट सख्त, दिल्ली पुलिस को अपना पक्ष रखने का निर्देश

    नई दिल्ली । 200 करोड़ रुपए की वसूली और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में आरोपी सुकेश चंद्रशेखर ने महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून (मकोका) के तहत लगाए गए आरोपों को चुनौती देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है। सुकेश ने निचली अदालत के उस फैसले के खिलाफ याचिका दाखिल की है, जिसमें उसके खिलाफ मकोका के तहत आरोप तय किए गए थे। दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है और अगली सुनवाई के लिए 23 सितंबर की तारीख तय की है।

    सुकेश चंद्रशेखर की याचिका में कहा गया है कि उसके खिलाफ लगाए गए मकोका के आरोपों पर दोबारा विचार किया जाना चाहिए। याचिकाकर्ता का पक्ष है कि इस कानून के तहत कार्रवाई को लेकर नए सिरे से समीक्षा की आवश्यकता है। अब इस मामले में दिल्ली पुलिस के जवाब के बाद हाईकोर्ट आगे की सुनवाई करेगा और तय करेगा कि मकोका आरोपों को लेकर आगे क्या प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

    यह पूरा मामला करीब 200 करोड़ रुपए की कथित वसूली और धोखाधड़ी से जुड़ा हुआ है। जांच एजेंसियों के अनुसार, सुकेश चंद्रशेखर पर आरोप है कि उसने खुद को सरकारी अधिकारी बताकर एक कारोबारी परिवार से बड़ी रकम हासिल की। आरोप है कि उसने प्रभावशाली लोगों से संपर्क होने और कानूनी मामलों को सुलझाने का भरोसा दिलाकर पैसे की मांग की थी।

    मामला उस समय सामने आया जब फोर्टिस के पूर्व प्रमोटर शिविंदर सिंह की पत्नी अदिति सिंह ने शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, एक व्यक्ति ने उनसे संपर्क किया और खुद को केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी के रूप में पेश किया। उसने उनके पति से जुड़े कानूनी मामलों में मदद दिलाने का दावा किया और इसके बदले बड़ी रकम की मांग की गई। इसके बाद पुलिस ने इस मामले की जांच शुरू की।

    जांच में एजेंसियों ने आरोप लगाया कि इस कथित साजिश में कई लोग शामिल थे और सरकारी अधिकारियों की पहचान का गलत इस्तेमाल किया गया। जांच के दौरान करीब 217 करोड़ रुपए तक की रकम अलग-अलग माध्यमों से हासिल किए जाने का दावा किया गया। इसी आधार पर दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू की।

    जांच आगे बढ़ने के बाद सुकेश चंद्रशेखर की भूमिका सामने आने पर उसे गिरफ्तार किया गया था। पुलिस का आरोप था कि वह जेल के अंदर रहते हुए भी अपनी गतिविधियों को संचालित कर रहा था। जांच एजेंसियों ने उसके पास से मोबाइल फोन मिलने का भी दावा किया था। इसके बाद पुलिस ने उसके खिलाफ मकोका के तहत कार्रवाई की।

    महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून यानी मकोका का इस्तेमाल संगठित अपराध से जुड़े मामलों में किया जाता है। इस कानून के तहत कार्रवाई के लिए पुलिस को यह दिखाना होता है कि अपराध किसी संगठित गिरोह या लगातार आपराधिक गतिविधियों से जुड़ा हुआ है। दिल्ली पुलिस का आरोप रहा है कि सुकेश ने अकेले नहीं बल्कि एक समूह के साथ मिलकर कथित अपराध को अंजाम दिया।

    अब हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई इस बात पर केंद्रित होगी कि सुकेश के खिलाफ मकोका के तहत लगाए गए आरोप कानूनी रूप से सही हैं या नहीं। दिल्ली पुलिस के जवाब के बाद मामले में आगे की दिशा तय होगी। इस मामले में लंबे समय से चल रही कानूनी प्रक्रिया के बीच हाईकोर्ट की अगली सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है।