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  • भारत बनेगा वैश्विक निवेश का अगला बड़ा केंद्र, तेजी से बढ़ता मध्यम वर्ग और टेक्नोलॉजी बना रहे मजबूत बाजार

    भारत बनेगा वैश्विक निवेश का अगला बड़ा केंद्र, तेजी से बढ़ता मध्यम वर्ग और टेक्नोलॉजी बना रहे मजबूत बाजार


    नई दिल्ली ।चीन के डालियान में आयोजित विश्व आर्थिक मंच की वार्षिक बैठक ‘न्यू चैंपियंस’ यानी समर दावोस के दौरान भारत की आर्थिक संभावनाओं को लेकर एक बार फिर वैश्विक स्तर पर सकारात्मक संदेश सामने आया है। नॉर्वे की प्रमुख बायोटेक्नोलॉजी कंपनी एकर बायोमरीन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मैट्स जोहानसन ने भारत को दुनिया के सबसे मजबूत और आकर्षक दीर्घकालिक बाजारों में से एक बताते हुए कहा कि देश की विशाल आबादी, तेजी से बढ़ता मध्यम वर्ग और नई तकनीकों को तेजी से अपनाने की क्षमता भविष्य की आर्थिक सफलता का मजबूत आधार तैयार कर रही है।

    आईएएनएस से बातचीत में जोहानसन ने कहा कि भारत उन देशों में शामिल है जहां दीर्घकालिक निवेश और कारोबारी विस्तार की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। उनके अनुसार भारत केवल एक बड़ा उपभोक्ता बाजार ही नहीं है बल्कि नवाचार और तकनीकी बदलावों को स्वीकार करने की असाधारण क्षमता भी रखता है। यही वजह है कि वैश्विक कंपनियां भारत को भविष्य के विकास इंजन के रूप में देख रही हैं।

    उन्होंने कहा कि भारत में बड़ी आबादी और लगातार बढ़ती क्रय शक्ति वाला मध्यम वर्ग आर्थिक गतिविधियों को नई दिशा दे रहा है। इसके साथ ही डिजिटल तकनीक और नवाचार को अपनाने की रफ्तार भी दुनिया के कई देशों से बेहतर है। इन सभी कारकों के कारण भारत आने वाले वर्षों में भी वैश्विक निवेशकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण बाजार बना रहेगा।

    भारत के प्रति अपनी कंपनी की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए जोहानसन ने बताया कि एकर बायोमरीन देश में अपनी मौजूदगी को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। कंपनी मुंबई में नया कार्यालय खोलने की तैयारी कर रही है ताकि भारतीय बाजार में अपनी गतिविधियों का विस्तार किया जा सके। उन्होंने कहा कि भारत पहले से ही कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार है और आने वाले समय में इसकी भूमिका और अधिक बढ़ने वाली है।

    उन्होंने बताया कि एकर बायोमरीन लंबे समय से भारतीय झींगा पालन उद्योग को आवश्यक सामग्री उपलब्ध करा रही है। भारत का श्रिम्प फार्मिंग सेक्टर दुनिया के प्रमुख एक्वाकल्चर बाजारों में शामिल है और इस क्षेत्र में कंपनी की मजबूत भागीदारी रही है। अब कंपनी केवल जलीय कृषि तक सीमित नहीं रहना चाहती बल्कि खाद्य उत्पादों और मानव स्वास्थ्य से जुड़े पोषण सप्लीमेंट्स के क्षेत्र में भी भारतीय बाजार में अपनी उपस्थिति बढ़ाने की योजना बना रही है।

    मैट्स जोहानसन ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बढ़ती भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में एआई वैश्विक अर्थव्यवस्था और उद्योगों की उत्पादकता बढ़ाने वाला सबसे बड़ा कारक बन सकता है। उनके मुताबिक एआई का उपयोग केवल उत्पादन इकाइयों तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि बिक्री, विपणन, वित्तीय प्रबंधन और आपूर्ति श्रृंखला जैसे क्षेत्रों में भी बड़े बदलाव लाएगा।

    उन्होंने कहा कि उनकी कंपनी एआई को अपनी पूरी वैल्यू चेन में शामिल करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। इससे न केवल दक्षता बढ़ेगी बल्कि लागत में कमी और बेहतर निर्णय लेने में भी मदद मिलेगी। जोहानसन का मानना है कि एआई वैश्विक आर्थिक विकास का नया इंजन बनने जा रहा है और जो कंपनियां इसे तेजी से अपनाएंगी वे भविष्य में प्रतिस्पर्धा में आगे रहेंगी।

    गौरतलब है कि 23 जून से शुरू हुआ समर दावोस सम्मेलन 25 जून तक चलेगा। इस वैश्विक मंच पर दुनिया भर के उद्योग जगत के दिग्गज, नीति निर्माता, शिक्षाविद और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि नवाचार, उद्यमिता, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और आर्थिक विकास के भविष्य पर मंथन कर रहे हैं। भारत को लेकर व्यक्त किए गए सकारात्मक विचार एक बार फिर यह संकेत देते हैं कि वैश्विक निवेशकों की नजर में देश की आर्थिक संभावनाएं लगातार मजबूत होती जा रही हैं।

  • भारत की विकास यात्रा को मिलेगी नई रफ्तार: कृषि और टेक्नोलॉजी बनेंगे अर्थव्यवस्था के सबसे बड़े इंजन

    भारत की विकास यात्रा को मिलेगी नई रफ्तार: कृषि और टेक्नोलॉजी बनेंगे अर्थव्यवस्था के सबसे बड़े इंजन


    नई दिल्ली । दुनिया की सबसे तेजी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल भारत आने वाले वर्षों में भी अपनी विकास गति बनाए रखेगा। चीन के डालियान शहर में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की एनुअल न्यू चैंपियंस मीटिंग यानी समर दावोस में वैश्विक विशेषज्ञों ने भारत की आर्थिक क्षमता पर भरोसा जताते हुए कहा कि देश के विकास को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में कृषि और टेक्नोलॉजी की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत न केवल वैश्विक विकास दर में महत्वपूर्ण योगदान देगा बल्कि नवाचार और डिजिटल परिवर्तन के जरिए नई आर्थिक संभावनाओं का केंद्र भी बनेगा।

    वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के मैनेजिंग डायरेक्टर मिरेक डुसेक ने भारत को दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक बताते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में भी भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत गति से आगे बढ़ती रहेगी। उनके अनुसार भारत वैश्विक आर्थिक वृद्धि का एक प्रमुख आधार बन चुका है और इसकी विकास यात्रा दुनिया भर के निवेशकों और नीति निर्माताओं का ध्यान आकर्षित कर रही है।

    डुसेक ने कहा कि समर दावोस का उद्देश्य दुनिया भर के इनोवेटर्स, टेक्नोलॉजी विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं और उद्योग जगत के नेताओं को एक मंच पर लाकर वैश्विक चुनौतियों के समाधान तलाशना है। उन्होंने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसी उभरती तकनीकें न केवल उत्पादकता बढ़ाने में मदद करेंगी बल्कि वैश्विक आर्थिक विकास को भी नई दिशा देंगी।

    वहीं पद्मश्री से सम्मानित और ओहायो स्टेट यूनिवर्सिटी में मृदा विज्ञान के प्रतिष्ठित प्रोफेसर रतन लाल ने भारत की कृषि क्षमता को देश की आर्थिक ताकत का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और इस लक्ष्य को हासिल करने में कृषि क्षेत्र की बड़ी भूमिका होगी।

    प्रोफेसर रतन लाल ने कहा कि खेती की उत्पादकता बढ़ाने के लिए मिट्टी की सेहत सुधारना और भूमि के टिकाऊ प्रबंधन को प्राथमिकता देना बेहद जरूरी है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कृषि क्षेत्र में वैज्ञानिक तकनीकों और आधुनिक संसाधनों का उपयोग किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ खाद्य सुरक्षा को भी मजबूत करेगा।

    उन्होंने यह भी कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल तकनीकें भारतीय कृषि में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती हैं। इन तकनीकों की मदद से मिट्टी की जांच पहले की तुलना में अधिक तेज, सस्ती और सटीक हो सकेगी। इससे किसानों को अपनी जमीन और फसल की जरूरतों के अनुरूप सही निर्णय लेने में मदद मिलेगी, जिससे उत्पादन बढ़ेगा और लागत कम होगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की युवा आबादी, तेजी से बढ़ता डिजिटल ढांचा, तकनीकी नवाचार और मजबूत कृषि आधार देश को वैश्विक आर्थिक शक्ति बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। समर दावोस में हुई चर्चाओं से यह स्पष्ट संकेत मिला कि भविष्य की भारतीय अर्थव्यवस्था का आधार केवल उद्योग और सेवाएं नहीं बल्कि आधुनिक तकनीक से सशक्त कृषि भी होगी। यही संयोजन भारत को आने वाले दशक में वैश्विक विकास का सबसे बड़ा केंद्र बना सकता है।