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  • गर्मियों में खरबूजा खाने से पहले बरतें ये जरूरी सावधानियां, नहीं तो सेहत पर पड़ सकता है भारी असर

    गर्मियों में खरबूजा खाने से पहले बरतें ये जरूरी सावधानियां, नहीं तो सेहत पर पड़ सकता है भारी असर

    नई दिल्ली । गर्मियों के मौसम में जैसे ही तापमान बढ़ता है, बाजारों में रसीले और ठंडक देने वाले फलों की मांग भी तेजी से बढ़ जाती है। इन्हीं में खरबूजा एक ऐसा फल है जो अपनी मिठास, पानी की अधिक मात्रा और ठंडक देने वाले गुणों के कारण लोगों की पहली पसंद बन जाता है। यह फल शरीर को हाइड्रेट रखने, थकान दूर करने और गर्मी के प्रभाव को कम करने में मदद करता है, लेकिन इसके सेवन को लेकर सावधानी बरतना भी उतना ही जरूरी माना जाता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि खरबूजा जितना फायदेमंद है, उतना ही कुछ परिस्थितियों में यह नुकसान भी पहुंचा सकता है। खासकर उन लोगों के लिए जो पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे हैं, उनके लिए इसका सेवन सोच-समझकर करना आवश्यक है। शरीर की प्रकृति और पाचन क्षमता के अनुसार ही इस फल को आहार में शामिल करना उचित माना जाता है।

    डायबिटीज से पीड़ित लोगों के लिए खरबूजा विशेष सावधानी की मांग करता है। इसमें प्राकृतिक शर्करा मौजूद होती है, जो रक्त में शुगर के स्तर को प्रभावित कर सकती है। इसलिए ऐसे मरीजों को इसे सीमित मात्रा में ही खाना चाहिए और अपने चिकित्सक की सलाह को प्राथमिकता देनी चाहिए। इसी तरह जिन लोगों का पाचन तंत्र कमजोर होता है, उन्हें भी खरबूजे के सेवन के बाद गैस, पेट फूलने और अपच जैसी समस्याएं हो सकती हैं। खाली पेट या अधिक मात्रा में इसका सेवन इन समस्याओं को और बढ़ा सकता है।

    इसके अलावा कुछ लोगों में खरबूजे से एलर्जी की समस्या भी देखी जाती है। ऐसे मामलों में इसे खाने के बाद गले में खुजली, त्वचा पर चकत्ते या होंठों में सूजन जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत इसका सेवन बंद करना आवश्यक होता है। किडनी या लिवर से जुड़ी गंभीर बीमारियों से पीड़ित व्यक्तियों के लिए भी यह फल सीमित मात्रा में ही उपयुक्त माना जाता है क्योंकि इसमें मौजूद पानी और पोटैशियम की अधिक मात्रा शरीर पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती है।

    आयुर्वेदिक दृष्टिकोण के अनुसार खरबूजा एक शीतल और पौष्टिक फल है, जो गर्मियों में शरीर को ऊर्जा और ठंडक दोनों प्रदान करता है। लेकिन इसके सेवन का सही समय भी महत्वपूर्ण होता है। भोजन के तुरंत बाद खरबूजा खाना पाचन क्रिया को प्रभावित कर सकता है, इसलिए इसे खाने के बीच में या उचित अंतराल के बाद ही लेना बेहतर माना जाता है।

    विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि सर्दी-खांसी जैसी स्थितियों में यदि किसी व्यक्ति को खरबूजा खाने के बाद असुविधा महसूस होती है, तो उसे अस्थायी रूप से इससे परहेज करना चाहिए। हालांकि सामान्य रूप से स्वस्थ व्यक्तियों के लिए यह फल बेहद लाभकारी और ताजगी देने वाला माना जाता है, बशर्ते इसका सेवन संतुलित मात्रा में किया जाए।

    गर्मी के मौसम में खरबूजा निश्चित रूप से एक बेहतरीन विकल्प है, लेकिन इसका सही उपयोग ही इसे स्वास्थ्य के लिए वरदान बनाता है, वरना यह लापरवाही में परेशानी का कारण भी बन सकता है।

  • सुबह या शाम कब करें वॉकिंग? गर्मियों में हेल्थ एक्सपर्ट्स की अहम सलाह

    सुबह या शाम कब करें वॉकिंग? गर्मियों में हेल्थ एक्सपर्ट्स की अहम सलाह

    नई दिल्ली । गर्मी के मौसम में स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए वॉकिंग को सबसे आसान और प्रभावी व्यायामों में से एक माना जाता है, लेकिन इसका लाभ तभी मिलता है जब इसे सही समय पर किया जाए। गलत समय पर की गई वॉकिंग शरीर पर विपरीत प्रभाव डाल सकती है और कई बार यह गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण भी बन सकती है।

    विशेषज्ञों के अनुसार गर्मी के दौरान दिन के समय तापमान काफी अधिक हो जाता है, जिससे शरीर जल्दी थक जाता है और पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए वॉकिंग के लिए समय का सही चयन बेहद जरूरी माना जाता है। आमतौर पर सुबह और शाम का समय सबसे सुरक्षित और फायदेमंद होता है।

    सुबह के समय, खासकर 5 बजे से 7 बजे के बीच का समय वॉकिंग के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। इस समय वातावरण अपेक्षाकृत ठंडा होता है और हवा भी साफ होती है, जिससे शरीर को ताजगी मिलती है। इस दौरान की गई वॉक न केवल शरीर को ऊर्जा देती है बल्कि मानसिक तनाव को भी कम करने में मदद करती है। इसके अलावा सुबह के समय प्रदूषण का स्तर भी कम होता है, जिससे सांस लेने में आसानी रहती है और फेफड़ों पर दबाव कम पड़ता है।

    अगर किसी कारणवश सुबह वॉक करना संभव न हो, तो शाम का समय एक अच्छा विकल्प माना जाता है। शाम 6:30 बजे के बाद तापमान धीरे-धीरे कम होने लगता है और धूप का असर भी खत्म हो जाता है। इस समय की गई वॉक शरीर को रिलैक्स करने में मदद करती है और दिनभर की थकान को कम करती है। हालांकि बहुत देर रात तक वॉक करने से बचना चाहिए क्योंकि इससे नींद का पैटर्न प्रभावित हो सकता है।

    दिन के समय, खासकर 11 बजे से 4 बजे के बीच वॉकिंग करना स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा हो सकता है। इस दौरान तेज धूप और गर्म हवाएं शरीर के तापमान को तेजी से बढ़ा सकती हैं, जिससे हीट स्ट्रोक, सिरदर्द, चक्कर और कमजोरी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। बुजुर्गों और बच्चों के लिए यह समय और भी अधिक खतरनाक माना जाता है, इसलिए इस अवधि में बाहर निकलने से बचना चाहिए।

    गर्मी में वॉकिंग के दौरान शरीर से पसीना अधिक निकलता है, जिससे शरीर में पानी की कमी हो सकती है। इसलिए वॉक से पहले और बाद में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना जरूरी है। नारियल पानी और नींबू पानी जैसे पेय शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद कर सकते हैं और इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखते हैं।

    इसके अलावा वॉकिंग के दौरान हल्के और ढीले कपड़े पहनना भी जरूरी माना जाता है। हल्के रंग के कपड़े शरीर को ठंडक प्रदान करते हैं और गर्मी का असर कम महसूस होता है। धूप से बचाव के लिए टोपी और सनग्लासेस का उपयोग भी फायदेमंद हो सकता है।

  • डिहाइड्रेशन से बचने का आसान उपाय ORS, शरीर में बनाए रखता है नमक-पानी का संतुलन

    डिहाइड्रेशन से बचने का आसान उपाय ORS, शरीर में बनाए रखता है नमक-पानी का संतुलन


    नई दिल्ली । गर्मी का मौसम आते ही शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन की समस्या तेजी से बढ़ने लगती है। तेज धूप, ज्यादा पसीना, उल्टी-दस्त और लंबे समय तक बाहर रहने के कारण शरीर से पानी के साथ जरूरी नमक और मिनरल्स भी निकल जाते हैं। इससे कमजोरी, चक्कर आना, थकान और कई बार गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, ऐसी स्थिति में सबसे आसान, सस्ता और प्रभावी उपाय है-ओआरएस (ORS – Oral Rehydration Solution)।

     क्यों जरूरी है ORS?
    डॉक्टरों का कहना है कि जब शरीर से ज्यादा मात्रा में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स जैसे सोडियम और पोटैशियम बाहर निकल जाते हैं, तो केवल साधारण पानी पीना पर्याप्त नहीं होता। पानी प्यास तो बुझा देता है, लेकिन शरीर में जरूरी नमक और मिनरल्स की कमी पूरी नहीं कर पाता।
    यहीं ORS शरीर में नमक और पानी का सही संतुलन बनाकर तेजी से राहत पहुंचाने का काम करता है।

     ORS कैसे करता है काम?
    ओआरएस शरीर को तेजी से हाइड्रेट करता है और खोए हुए इलेक्ट्रोलाइट्स की भरपाई करता है। इससे शरीर की कमजोरी कम होती है और मरीज जल्दी रिकवर करने लगता है।
    विशेषज्ञों के अनुसार, दस्त या उल्टी शुरू होते ही ORS का सेवन शुरू कर देना चाहिए ताकि शरीर में पानी और नमक का संतुलन बना रहे।

     बच्चों से बुजुर्गों तक सभी के लिए सुरक्षित
    ORS का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह बच्चों, बड़ों और बुजुर्गों—सभी के लिए सुरक्षित माना जाता है। खासकर छोटे बच्चों और बुजुर्गों में डिहाइड्रेशन जल्दी गंभीर रूप ले सकता है, इसलिए समय रहते ORS देना बेहद जरूरी होता है।

    घर पर कैसे बनाएं ORS?
    ORS को घर पर भी आसानी से तैयार किया जा सकता है। इसके लिए-
    एक लीटर उबले और ठंडे पानी में ORS पाउच मिलाएं
    इसे अच्छी तरह घोल लें
    दस्त या उल्टी के दौरान थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पीते रहें
    बाजार में उपलब्ध पैकेट वाले ORS का उपयोग करना अधिक सुरक्षित और आसान माना जाता है।

    गर्मियों में ORS के फायदे

    शरीर को तेजी से हाइड्रेट करता है
    कमजोरी और थकान कम करता है
    पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखता है
    डिहाइड्रेशन से बचाव करता है
    अस्पताल जाने की जरूरत कम कर सकता है

    कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें?
    अगर ORS लेने के बाद भी लगातार उल्टी, तेज बुखार, बेहोशी, अत्यधिक कमजोरी या दस्त की समस्या बनी रहे, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

    छोटी सावधानी, बड़ा बचाव
    गर्मी के मौसम में डिहाइड्रेशन से बचाव के लिए ORS बेहद जरूरी और प्रभावी उपाय माना जाता है। समय पर इसका सेवन शरीर को सुरक्षित रखने और गंभीर स्थिति से बचाने में मदद करता है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह जीवनरक्षक साबित हो सकता है। गर्मी में डिहाइड्रेशन से बचने के लिए ORS सबसे आसान और प्रभावी उपाय है, जो शरीर में पानी और जरूरी नमक का संतुलन बनाए रखता है।

  • गर्मी में नींबू पानी से राहत या परेशानी? जानें क्यों कुछ लोगों को होती है पेट फूलने की समस्या

    गर्मी में नींबू पानी से राहत या परेशानी? जानें क्यों कुछ लोगों को होती है पेट फूलने की समस्या


    नई दिल्ली ।  गर्मी के मौसम में नींबू पानी को एक प्राकृतिक और ताजगी देने वाला पेय माना जाता है। यह शरीर को हाइड्रेट रखने के साथ-साथ विटामिन C की पूर्ति भी करता है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि हर व्यक्ति के शरीर पर इसका प्रभाव एक जैसा नहीं होता और कुछ लोगों को इसके सेवन के बाद सूजन या पेट फूलने जैसी समस्या का अनुभव हो सकता है।

    चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, नींबू पानी में मौजूद साइट्रिक एसिड कुछ संवेदनशील लोगों के पाचन तंत्र को प्रभावित कर सकता है। जिन लोगों को पहले से गैस, एसिडिटी या इरिटेबल बाउल सिंड्रोम जैसी समस्या होती है, उनमें नींबू पानी के सेवन से पेट में भारीपन, गैस और ब्लोटिंग यानी सूजन की शिकायत बढ़ सकती है।

    हालांकि, सामान्य परिस्थितियों में नींबू पानी शरीर के लिए काफी लाभकारी माना जाता है। यह शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने, पाचन सुधारने और गर्मी में थकान कम करने में मदद करता है। लेकिन इसका अत्यधिक या गलत समय पर सेवन नुकसान भी पहुंचा सकता है।

    विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि नींबू पानी हमेशा संतुलित मात्रा में और हल्के गुनगुने या सामान्य तापमान के पानी में लिया जाना चाहिए। बहुत अधिक खट्टा या चीनी युक्त नींबू पानी भी शरीर में असंतुलन पैदा कर सकता है, जिससे सूजन जैसी समस्या उत्पन्न हो सकती है।

    इसके अलावा, खाली पेट अत्यधिक नींबू पानी का सेवन कुछ लोगों में एसिडिटी को बढ़ा सकता है, जो आगे चलकर पेट में सूजन और असहजता का कारण बनता है। इसलिए इसे हमेशा समझदारी और संतुलन के साथ लेना चाहिए।

    डॉक्टरों का मानना है कि यदि किसी व्यक्ति को नींबू पानी पीने के बाद बार-बार सूजन या पेट दर्द की समस्या हो रही है, तो उसे इसका सेवन कम कर देना चाहिए या चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।

    कुल मिलाकर, नींबू पानी गर्मी में एक बेहतरीन पेय है, लेकिन इसका असर व्यक्ति की शारीरिक स्थिति पर निर्भर करता है। सही मात्रा और सही तरीके से सेवन करने पर यह लाभकारी है, जबकि असंतुलित सेवन सूजन जैसी परेशानी का कारण बन सकता है।

  • भीषण गर्मी से बचाव: हीट वेव में सुरक्षित रहने के आसान और असरदार तरीके

    भीषण गर्मी से बचाव: हीट वेव में सुरक्षित रहने के आसान और असरदार तरीके


    नई दिल्ली । देश के कई हिस्सों में तापमान लगातार बढ़ रहा है और हीट वेव की स्थिति लोगों की सेहत के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है। तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण डिहाइड्रेशन, लू लगना, चक्कर आना, कमजोरी और यहां तक कि गंभीर मामलों में हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।
    विशेषज्ञों के अनुसार, गर्मी के इस चरम मौसम में थोड़ी सी लापरवाही भी स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकती है। इसलिए घर से बाहर निकलने से पहले कुछ जरूरी सावधानियां अपनाना बेहद महत्वपूर्ण है।

     शरीर को हाइड्रेट रखना सबसे जरूरी कदम
    गर्मी में सबसे पहले ध्यान रखने वाली बात है पर्याप्त पानी पीना। शरीर में पानी की कमी होने से डिहाइड्रेशन और लू लगने का खतरा बढ़ जाता है। घर से बाहर निकलने से पहले पानी जरूर पिएं और साथ में बोतल भी रखें। इसके अलावा नींबू पानी, छाछ या ओआरएस का सेवन भी शरीर को ठंडा और हाइड्रेटेड रखने में मदद करता है।

    हल्के और ढीले कपड़े पहनें
    गर्मी में तंग और गहरे रंग के कपड़े शरीर की गर्मी बढ़ा सकते हैं। इसलिए सूती, हल्के और ढीले कपड़े पहनना बेहतर होता है। सफेद या हल्के रंग के कपड़े धूप को कम अवशोषित करते हैं और शरीर को ठंडा रखने में मदद करते हैं।

    धूप से बचाव के लिए जरूरी सुरक्षा
    घर से बाहर निकलते समय सिर को ढकना बेहद जरूरी है। इसके लिए छाता, टोपी या स्कार्फ का उपयोग करें। साथ ही सनग्लासेज पहनने से आंखों को तेज धूप से सुरक्षा मिलती है। सीधे सूरज की रोशनी में लंबे समय तक रहने से बचें, खासकर दोपहर 12 से 4 बजे के बीच।

    हल्का और ताजा खाना खाएं
    गर्मी में भारी और मसालेदार भोजन शरीर में गर्मी बढ़ा सकता है। इसलिए हल्का और ताजा भोजन करें।
    फल, सलाद, दही और तरल पदार्थों को डाइट में शामिल करें ताकि शरीर को जरूरी पोषण भी मिले और गर्मी से राहत भी।

    लू लगने के लक्षण पहचानना जरूरी
    अगर किसी व्यक्ति को तेज सिरदर्द, उल्टी, चक्कर, अत्यधिक पसीना या कमजोरी महसूस हो तो यह लू के संकेत हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत ठंडी जगह पर जाएं, पानी पिएं और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से संपर्क करें।

    सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है
    हीट वेव के दौरान थोड़ी सी सावधानी आपको गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से बचा सकती है। पर्याप्त पानी पीना, सही कपड़े पहनना, धूप से बचाव और हल्का भोजन करना जैसी आदतें अपनाकर आप गर्मी के कहर से खुद को सुरक्षित रख सकते हैं।

  • मेथी दाने का सही सेवन जानिए, वरना गर्मियों में बढ़ सकती हैं समस्याएं.

    मेथी दाने का सही सेवन जानिए, वरना गर्मियों में बढ़ सकती हैं समस्याएं.

    नई दिल्ली। भारतीय रसोई में मौजूद मसालों को केवल स्वाद बढ़ाने के लिए ही नहीं, बल्कि सेहत सुधारने के लिए भी जाना जाता है। इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण मसाला है मेथी दाना, जिसे आयुर्वेद में एक प्रभावशाली औषधि माना गया है। इसके नियमित सेवन से पाचन तंत्र मजबूत होता है, रक्त शर्करा नियंत्रित रहती है और शरीर को कई तरह के लाभ मिलते हैं। हालांकि, गर्मियों के मौसम में इसके सेवन को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

    आयुर्वेद के अनुसार मेथी दाना उष्ण प्रकृति का होता है, यानी इसकी तासीर गर्म होती है। यह सामान्य रूप से शरीर में वात और कफ को संतुलित करने में सहायक होता है, लेकिन गर्मियों के दौरान शरीर में पित्त का स्तर पहले से ही बढ़ा रहता है। ऐसे में यदि मेथी दाने का सेवन अधिक मात्रा में किया जाए, तो यह शरीर में असंतुलन पैदा कर सकता है। कई लोगों को इसके कारण पेट में जलन, एसिडिटी, गैस और कब्ज जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि गर्मियों में मेथी दाने का सेवन पूरी तरह बंद करने की जरूरत नहीं है, बल्कि इसके सेवन के तरीके में बदलाव करना ज्यादा महत्वपूर्ण है। सबसे अच्छा तरीका यह माना जाता है कि मेथी दानों को रातभर पानी में भिगो दिया जाए और सुबह उस पानी को छानकर पी लिया जाए। इस प्रक्रिया से इसकी गर्म तासीर कुछ हद तक कम हो जाती है और शरीर को इसके लाभ भी मिलते रहते हैं।

    इसके अलावा मेथी दाने का पाउडर बनाकर उसे दही या छाछ के साथ लेना भी एक बेहतर विकल्प माना जाता है। छाछ और दही की ठंडी तासीर मेथी के गर्म प्रभाव को संतुलित करती है, जिससे पाचन तंत्र को राहत मिलती है और शरीर में गर्मी नहीं बढ़ती। यह तरीका खासतौर पर उन लोगों के लिए फायदेमंद है, जिन्हें पेट से जुड़ी समस्याएं रहती हैं।

    गर्मियों में मेथी दाने की मात्रा को सीमित रखना भी बेहद जरूरी है। अधिक मात्रा में सेवन करने से शरीर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। साथ ही, इसे खाली पेट लेने से बचने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इससे गैस और एसिडिटी की समस्या बढ़ सकती है। भोजन के बाद इसका सेवन करना ज्यादा सुरक्षित और लाभकारी माना जाता है।

    कुछ विशेष परिस्थितियों में सावधानी बरतना और भी जरूरी हो जाता है। मधुमेह के मरीज, लो ब्लड प्रेशर से पीड़ित व्यक्ति, गर्भवती महिलाएं और स्तनपान कराने वाली माताएं मेथी दाने का सेवन करने से पहले चिकित्सकीय सलाह जरूर लें। ऐसा इसलिए क्योंकि यह शरीर के शुगर लेवल और ब्लड प्रेशर को प्रभावित कर सकता है।