Tag: Summer Heat
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किस राशि को सताती है सबसे ज्यादा गर्मी? जानिए अपना तत्व, शरीर पर असर और राहत के ज्योतिषीय उपाय
नई दिल्ली। भीषण गर्मी और तेज धूप का असर हर व्यक्ति पर अलग-अलग तरीके से पड़ता है, लेकिन ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इसका संबंध केवल मौसम से नहीं बल्कि व्यक्ति की राशि और उसके तत्व से भी माना जाता है। मेडिकल ज्योतिष में राशियों के तत्व और प्रकृति के आधार पर शरीर की संवेदनशीलता, रोगों की प्रवृत्ति और मौसम का प्रभाव समझा जाता है। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक मेष, सिंह और धनु अग्नि तत्व की राशियां हैं, जिनकी प्रकृति पित्त प्रधान मानी जाती है। यही कारण है कि इन राशियों के लोगों को गर्मी, लू, शरीर में जलन और त्वचा संबंधी परेशानियां ज्यादा प्रभावित करती हैं। वहीं वृष, कन्या और मकर पृथ्वी तत्व की राशियां हैं,जिनकी प्रकृति वायु प्रधान मानी जाती है। मिथुन, तुला और कुम्भ वायु तत्व से जुड़ी मिश्रित प्रकृति की राशियां हैं, जबकि कर्क, वृश्चिक और मीन जल तत्व की राशियां हैं, जिनमें कफ प्रकृति अधिक होती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता है तो गर्मी का असर बढ़ना शुरू हो जाता है और वृष राशि में पहुंचते-पहुंचते तापमान चरम पर पहुंच जाता है। इस दौरान शरीर के जलीय तत्व तेजी से कम होने लगते हैं और पंचतत्वों से बने शरीर पर गर्मी का प्रभाव बढ़ जाता है।विशेषज्ञों का कहना है कि चंद्रमा जल तत्व और बुध त्वचा व हरियाली का कारक माना जाता है, इसलिए गर्मी से बचाव के लिए इन दोनों ग्रहों को मजबूत करना जरूरी माना गया है। कहा जाता है कि बुध को मजबूत करने के लिए खीरा, तरबूज, खरबूजा और अन्य जलयुक्त फलों का सेवन लाभकारी होता है, जबकि चंद्रमा को बलवान बनाए रखने के लिए पर्याप्त पानी और शीतल पेय पदार्थों का सेवन करना चाहिए। ज्योतिषीय मान्यता है कि यदि चंद्रमा और बुध मजबूत रहें तो व्यक्ति सूर्य की तेज तपिश को बेहतर तरीके से सहन कर सकता है।गर्मी और लू से बचने के लिए राशि के अनुसार पेय पदार्थों का सेवन, मंगल से जुड़ी वस्तुओं का दान, लाल रंग के कपड़ों से परहेज और सफेद या हल्के रंग के वस्त्र धारण करने की सलाह दी जाती है। धर्मशास्त्रों में सूर्योदय से पहले स्नान को स्वास्थ्यवर्धक बताया गया है, क्योंकि इस समय जल में सकारात्मक और ऊर्जावान तत्व अधिक सक्रिय माने जाते हैं, जो शरीर को ठंडक और ऊर्जा प्रदान करते हैं। -

झांसी में गर्मी का कहर: 39°C पार तापमान, तेज धूप और लू से जनजीवन बेहाल
नई दिल्ली। झांसी में मंगलवार को मौसम ने एक बार फिर गर्मी का तीखा रूप दिखाया, जहां सुबह से ही तेज धूप और गर्म हवाओं ने लोगों को परेशान कर दिया। शहर में सुबह 11 बजे तक तापमान 39 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जिससे दिन की शुरुआत ही झुलसाने वाली गर्मी के साथ हुई। जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ा, सड़कों पर गर्मी का असर और ज्यादा महसूस किया गया और दोपहर होते-होते लोगों की आवाजाही काफी कम हो गई।भीषण गर्मी के कारण बाजारों और चौराहों पर सामान्य दिनों की तुलना में भीड़ कम नजर आई। लोग जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकल रहे हैं। तेज धूप और लू से बचने के लिए कई लोग मुंह पर कपड़ा बांधकर या सिर ढककर बाहर निकलते दिखे। सबसे ज्यादा असर दिहाड़ी मजदूरों, रिक्शा चालकों और सड़क पर काम करने वाले लोगों पर पड़ा, जो छांव और पेड़ों के नीचे राहत तलाशते नजर आए।
गर्मी बढ़ने के साथ ही शहर में ठंडे पेय पदार्थों की मांग भी बढ़ गई है। शिकंजी, जूस और ठंडे पेय की दुकानों पर लोगों की भीड़ देखी जा रही है, क्योंकि लोग गर्मी से राहत पाने के लिए इनका सहारा ले रहे हैं। मौसम विभाग के अनुसार दिन के आगे बढ़ने के साथ तापमान में और वृद्धि हो सकती है और दोपहर बाद पारा 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना है।
हालांकि मौसम विभाग ने थोड़ी राहत की संभावना भी जताई है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार दोपहर बाद आसमान में बादल छा सकते हैं और हल्की बारिश भी हो सकती है। यदि ऐसा होता है तो लोगों को कुछ समय के लिए गर्मी और उमस से राहत मिल सकती है, लेकिन फिलहाल पूरे दिन तेज गर्मी और उमस बने रहने का अनुमान है।
मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे धूप में अनावश्यक बाहर निकलने से बचें, पर्याप्त पानी पीते रहें और गर्मी से बचाव के सभी जरूरी उपाय अपनाएं, ताकि लू और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याओं से बचा जा सके।
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एमपी में थमेगा बारिश-आंधी का दौर, बढ़ेगी गर्मी, 12 मई से कई जिलों में लू चलने की चेतावनी
भोपाल। मध्यप्रदेश में अब मौसम का मिजाज बदलने वाला है। पिछले कई दिनों से जारी आंधी, बारिश और ओलावृष्टि के बाद प्रदेश में तेज गर्मी की वापसी होने जा रही है। मौसम विभाग (IMD) ने 12 मई से कई जिलों में लू चलने की चेतावनी जारी की है। रविवार से ही तापमान में बढ़ोतरी महसूस होने लगेगी।भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और जबलपुर समेत प्रदेश के अधिकांश शहरों में दिन के तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी हो सकती है। रतलाम में शनिवार को अधिकतम तापमान 44 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
शनिवार को प्रदेश में ट्रफ लाइन और साइक्लोनिक सर्कुलेशन सक्रिय रहने के कारण कई इलाकों में बादल छाए रहे। शाम के समय भोपाल, बैतूल, सिवनी, पांढुर्णा, डिंडौरी, अनूपपुर, रायसेन, गुना, विदिशा, राजगढ़, सागर, जबलपुर, दमोह, बालाघाट, मंडला, उमरिया, शहडोल और छिंदवाड़ा में बारिश के साथ तेज आंधी चली।
प्रदेश में 30 अप्रैल से लगातार मौसम बदला हुआ था। 9 मई तक कई जिलों में बारिश का दौर जारी रहा। इस दौरान कभी पश्चिमी विक्षोभ तो कभी ट्रफ और चक्रवातीय गतिविधियों का असर देखने को मिला, जिसके चलते मई के शुरुआती दिनों में गर्मी से राहत बनी रही। मौसम विभाग के अनुसार, 10 मई के बाद मौसम साफ होने लगेगा और तापमान तेजी से बढ़ेगा। 12 और 13 मई को प्रदेश के पश्चिमी हिस्सों के कुछ जिलों में लू चलने की संभावना जताई गई है।
मौसम विभाग ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह भी दी है। विभाग के अनुसार, गर्मी के दौरान पर्याप्त पानी पीते रहें, शरीर को हाइड्रेट रखें और दोपहर में लंबे समय तक धूप में निकलने से बचें। हल्के रंग और सूती कपड़े पहनने की सलाह दी गई है। बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है।
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15 मई के बाद अचानक क्यों तेज हो जाती है गर्मी, वृषभ गोचर और रोहिणी नक्षत्र से जुड़ा है खास कारण
नई दिल्ली।
मई महीने के मध्य के बाद उत्तर भारत समेत उत्तरी गोलार्ध के कई हिस्सों में गर्मी अचानक तेज महसूस होने लगती है। दिन जैसे-जैसे आगे बढ़ते हैं, सूरज की तपिश और अधिक तीखी हो जाती है और वातावरण शुष्क होता जाता है। इसी समय को वृषभ संक्रांति से जोड़कर देखा जाता है, जब सूर्य मेष राशि से निकलकर वृषभ राशि में प्रवेश करता है। माना जाता है कि इस परिवर्तन के बाद गर्मी अपने अगले और अधिक तीव्र चरण में पहुंच जाती है।ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार सूर्य का वृषभ राशि में प्रवेश धरती के तापमान और वातावरण पर गहरा प्रभाव डालता है। इस राशि का संबंध स्थिरता और तीव्र ऊर्जा से माना जाता है, और जब सूर्य इसमें प्रवेश करता है तो उसकी उष्मा का प्रभाव और अधिक स्पष्ट हो जाता है। इसी समय दिन लंबे होने लगते हैं और सूर्य की किरणें धरती पर अधिक सीधी पड़ती हैं, जिससे गर्मी का स्तर तेजी से बढ़ता है।
इसके साथ ही रोहिणी नक्षत्र का प्रभाव भी इस अवधि को और महत्वपूर्ण बनाता है। परंपरागत मान्यताओं में इसे अत्यधिक गर्मी का संकेत माना गया है, जहां सूर्य की किरणें धरती को अधिक तीव्रता से प्रभावित करती हैं। ग्रामीण मान्यताओं में इस समय को ‘नौतपा’ से भी जोड़ा जाता है, जो भीषण गर्मी के चरम समय का संकेत देता है।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो इस समय पृथ्वी का उत्तरी हिस्सा सूर्य की ओर अधिक झुका होता है, जिसके कारण सूर्य की किरणें लगभग सीधी पड़ती हैं। सीधी किरणें जमीन और वातावरण को तेजी से गर्म करती हैं और पहले से जमा गर्मी भी इसमें शामिल हो जाती है। यही कारण है कि मई के मध्य के बाद तापमान में तेजी से वृद्धि देखने को मिलती है।
इस अवधि में हवा में नमी कम हो जाती है और वातावरण अधिक शुष्क हो जाता है, जिससे दिन के समय तापमान बहुत तेजी से बढ़ता है। रात के समय भी गर्मी का असर कम नहीं होता और वातावरण में ठंडक का अभाव महसूस होता है। मौसम विशेषज्ञ इस स्थिति को गर्मी के लगातार जमा होने का प्रभाव मानते हैं, जो धीरे-धीरे चरम पर पहुंच जाता है।