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  • भारत-स्पेन संबंधों को नई ऊंचाई देने स्पेन जाएंगे पबित्रा मार्गेरिटा, मैड्रिड में कई अहम बैठकों पर रहेंगी नजरें

    भारत-स्पेन संबंधों को नई ऊंचाई देने स्पेन जाएंगे पबित्रा मार्गेरिटा, मैड्रिड में कई अहम बैठकों पर रहेंगी नजरें

    नई दिल्ली ।विदेश एवं कपड़ा राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा 3 नवंबर से तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर स्पेन जाएंगे। इस दौरान वह 30वें इबेरो-अमेरिकन कॉन्फ्रेंस शिखर सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। भारत इस सम्मेलन में एसोसिएट ऑब्जर्वर यानी सहयोगी पर्यवेक्षक के रूप में भाग ले रहा है। इस यात्रा को दोनों देशों के बीच राजनयिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    स्पेन में आयोजित होने वाले इस सम्मेलन में लैटिन अमेरिका और यूरोप के कई देश हिस्सा लेते हैं। वर्तमान में इसके सदस्य देशों की संख्या 22 है। इनमें लैटिन अमेरिका के 19 देश और यूरोप के तीन देश स्पेन, पुर्तगाल तथा अंडोरा शामिल हैं। इसके अलावा सम्मेलन में 12 एसोसिएट ऑब्जर्वर और 20 कंसल्टेटिव ऑब्जर्वर भी जुड़े हुए हैं। भारत सहयोगी पर्यवेक्षक के रूप में इस मंच की गतिविधियों में भागीदारी कर रहा है।

    पबित्रा मार्गेरिटा की यात्रा के दौरान सम्मेलन के इतर विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों के साथ द्विपक्षीय बैठकों का कार्यक्रम भी प्रस्तावित है। इन मुलाकातों में आपसी सहयोग और साझा हितों से जुड़े विषयों पर चर्चा होगी। इसके अलावा राज्य मंत्री स्पेन की राजधानी मैड्रिड में रहने वाले भारतीय समुदाय के लोगों से भी मुलाकात करेंगे। इससे स्पेन में बसे भारतीय नागरिकों के साथ संपर्क और संवाद को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

    यह यात्रा भारत और स्पेन के बीच वर्ष 2026 के लिए घोषित संयुक्त पहल के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है। दोनों देशों ने 2026 को संस्कृति, पर्यटन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता के संयुक्त वर्ष के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। इस पहल के तहत दोनों देशों में विभिन्न कार्यक्रम और गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। राज्य मंत्री की यात्रा इन्हीं आयोजनों की कड़ी का हिस्सा होगी।

    भारत और स्पेन के बीच राजनयिक संबंध वर्ष 1956 में स्थापित हुए थे। वर्ष 2026 में दोनों देशों के संबंधों के 70 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इस अवसर पर दोनों देशों ने सहयोग के नए क्षेत्रों को प्राथमिकता दी है। इसी वर्ष आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट में स्पेन के राष्ट्रपति पेड्रो सांचेज भी नई दिल्ली पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी।

    दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत में रक्षा, सुरक्षा, प्रौद्योगिकी और अन्य क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के उपायों पर चर्चा हुई थी। भारत और स्पेन के बीच रक्षा आधुनिकीकरण, एयरोस्पेस, नौसैनिक तकनीक और आतंकवाद विरोधी सहयोग जैसे क्षेत्रों में भी साझेदारी विकसित हो रही है।

    व्यापारिक मोर्चे पर स्पेन यूरोप में भारत का छठा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। वर्ष 2023 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 9.9 अरब डॉलर दर्ज किया गया था। भारत में 250 से अधिक स्पेनिश कंपनियां सक्रिय रूप से कारोबार कर रही हैं। इन कंपनियों की मौजूदगी दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों के विस्तार को दर्शाती है।

    स्पेन में भारतीय समुदाय की संख्या लगभग 75 हजार बताई जाती है। दोनों देशों के बीच लोगों के स्तर पर संपर्क बढ़ाने के लिए भी कई प्रयास किए गए हैं। अगस्त 2024 में बार्सिलोना में भारत का नया महावाणिज्य दूतावास खोला गया था। इससे स्पेन में भारतीय नागरिकों को राजनयिक और अन्य आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिल रही है।

    शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच सहयोग जारी है। स्पेन के वलाडोलिड विश्वविद्यालय में हिंदी और भारतीय अध्ययन से जुड़ी पीठ स्थापित है। इसके अलावा स्पेन के कई शहरों में हर साल अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। पबित्रा मार्गेरिटा की आगामी यात्रा के दौरान होने वाली बैठकों और सम्मेलन में भागीदारी से इन सांस्कृतिक, शैक्षणिक, व्यापारिक और तकनीकी संबंधों को आगे बढ़ाने के अवसर मिलेंगे।

  • भारत मंडपम में शुरू हुआ 18वां BRICS शिखर सम्मेलन, पीएम मोदी ने सदस्य देशों के योगदान और समर्थन के लिए जताया आभार

    भारत मंडपम में शुरू हुआ 18वां BRICS शिखर सम्मेलन, पीएम मोदी ने सदस्य देशों के योगदान और समर्थन के लिए जताया आभार

    नई दिल्ली ।भारत की मेजबानी में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन का शनिवार को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आधिकारिक आगाज हो गया। दो दिन तक चलने वाला यह सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को आयोजित किया जा रहा है। इसमें BRICS देशों के साथ पार्टनर देशों के नेता भी हिस्सा ले रहे हैं। इसके अलावा आउटरीच कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किए गए देशों के प्रतिनिधि भी सम्मेलन में पहुंचे हैं।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन के साथ शिखर सम्मेलन की औपचारिक शुरुआत हुई। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने भारत की BRICS अध्यक्षता को सफल बनाने में सभी देशों की ओर से मिले सक्रिय योगदान और समर्थन के लिए आभार जताया।

    पीएम मोदी ने कहा कि इस वर्ष का BRICS शिखर सम्मेलन एक ऐतिहासिक पड़ाव है। इसकी वजह यह है कि इस वर्ष BRICS अपनी स्थापना के 20 साल पूरे कर रहा है। उन्होंने संगठन की दो दशक लंबी यात्रा का उल्लेख करते हुए इसके अगले चरण को लेकर भी अपनी बात रखी।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि इंसानी जिंदगी में 20 साल की उम्र परिपक्वता और जिम्मेदारी के एक नए दौर की शुरुआत होती है। इसी संदर्भ में उन्होंने BRICS की 20 साल की यात्रा को भी महत्वपूर्ण बताया और आगे की दिशा तय करने की जरूरत पर जोर दिया।

    अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने भारत की BRICS अध्यक्षता के दौरान सहयोग और समर्थन देने वाले सभी प्रतिभागी देशों का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि भारत की अध्यक्षता को सफल बनाने में सभी के सक्रिय योगदान की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

    18वां BRICS शिखर सम्मेलन ऐसे समय आयोजित हो रहा है जब संगठन अपनी स्थापना के दो दशक पूरे होने के पड़ाव पर है। सम्मेलन के दौरान सदस्य देशों और साझेदार देशों के नेता एक साथ मौजूद हैं। इसके अलावा आउटरीच के लिए आमंत्रित देशों के प्रतिनिधियों की भागीदारी भी हो रही है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने BRICS की आगे की यात्रा के संदर्भ में अगले 20 वर्षों के लिए नए एजेंडे पर काम करने की जरूरत बताई। उनके संबोधन का प्रमुख संदेश संगठन की अब तक की यात्रा के बाद भविष्य की प्राथमिकताओं और दिशा को लेकर रहा।

    भारत मंडपम में आयोजित इस दो दिवसीय सम्मेलन में BRICS देशों के साथ पार्टनर देशों की भागीदारी हो रही है। सम्मेलन के लिए आमंत्रित प्रतिनिधियों की मौजूदगी से भी इसका दायरा व्यापक हुआ है।

    BRICS के 20 वर्ष पूरे होने के मौके पर आयोजित यह शिखर सम्मेलन भारत की मेजबानी में हो रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में इस अवसर को संगठन की यात्रा के महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में रेखांकित किया।

    उन्होंने भारत की अध्यक्षता के दौरान मिले सहयोग के लिए सभी का आभार व्यक्त करते हुए संगठन के आगामी वर्षों की दिशा पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता बताई। उनके मुताबिक 20 साल की यात्रा के बाद BRICS के लिए आगे के दो दशकों को ध्यान में रखते हुए नए एजेंडे पर काम करना होगा।

    शिखर सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में जारी रहेगा। इसमें BRICS सदस्य देशों, पार्टनर देशों और आउटरीच के लिए आमंत्रित देशों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। सम्मेलन के पहले दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन के साथ इसकी औपचारिक शुरुआत हुई।

  • SCO शिखर सम्मेलन में PM मोदी के पाकिस्तान दौरे पर सस्पेंस, इस्लामाबाद ने सभी सदस्य देशों को आमंत्रित करने की तैयारी शुरू की

    SCO शिखर सम्मेलन में PM मोदी के पाकिस्तान दौरे पर सस्पेंस, इस्लामाबाद ने सभी सदस्य देशों को आमंत्रित करने की तैयारी शुरू की

    नई दिल्ली । शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के आगामी शिखर सम्मेलन को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक गतिविधियां चर्चा में हैं। साल 2027 में पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में आयोजित होने वाले SCO सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शामिल होने को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है, लेकिन पाकिस्तान की ओर से सभी सदस्य देशों को आमंत्रित करने की बात कही गई है।

    पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने संकेत दिए हैं कि SCO के नियमों और प्रोटोकॉल के तहत सम्मेलन में सभी सदस्य देशों को निमंत्रण भेजा जाएगा। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा कि संगठन के सभी सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों को सम्मेलन में आमंत्रित करना मेजबान देश की जिम्मेदारी है।

    इस बयान के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी SCO सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए पाकिस्तान जाएंगे। हालांकि, भारत की ओर से इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। प्रधानमंत्री की किसी भी विदेश यात्रा का फैसला समय, परिस्थितियों और कूटनीतिक प्राथमिकताओं के आधार पर लिया जाता है।

    SCO एक महत्वपूर्ण बहुपक्षीय संगठन है, जिसमें भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान, ईरान सहित कई अन्य देश सदस्य हैं। इस संगठन का उद्देश्य क्षेत्रीय सहयोग, सुरक्षा, आर्थिक विकास और आपसी संबंधों को मजबूत करना है। हर साल सदस्य देशों के बीच अध्यक्षता बदलती रहती है और जिस देश के पास अध्यक्षता होती है, वही शिखर सम्मेलन की मेजबानी करता है।

    2027 में SCO की अध्यक्षता पाकिस्तान के पास रहने की संभावना है, जिसके तहत इस्लामाबाद में राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों की बैठक आयोजित की जाएगी। ऐसे सम्मेलनों में सदस्य देशों के शीर्ष नेता क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा करते हैं।

    भारत और पाकिस्तान के रिश्ते लंबे समय से चुनौतीपूर्ण रहे हैं। दोनों देशों के बीच कई मुद्दों को लेकर मतभेद हैं, जिनमें सीमा सुरक्षा और आतंकवाद जैसे विषय प्रमुख हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी के पाकिस्तान दौरे का फैसला केवल SCO की बैठक तक सीमित नहीं होगा, बल्कि व्यापक कूटनीतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर लिया जाएगा।

    इस बीच पाकिस्तान ने भारत और अन्य सदस्य देशों के साथ SCO प्रक्रिया के तहत सामान्य राजनयिक प्रोटोकॉल का पालन करने की बात कही है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता से भारत और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों के बीच संभावित बैठक को लेकर भी सवाल किया गया था, जिस पर उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसी किसी प्रस्तावित मुलाकात की जानकारी नहीं है।

    SCO की स्थापना वर्ष 2001 में हुई थी। संगठन का मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाना और क्षेत्र में शांति, स्थिरता तथा आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है। समय के साथ इसका दायरा बढ़ा है और यह एशिया के प्रमुख बहुपक्षीय मंचों में शामिल हो गया है।

    अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि भारत इस सम्मेलन को लेकर क्या रुख अपनाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संभावित भागीदारी को लेकर अंतिम फैसला आने वाले समय में भारत सरकार की कूटनीतिक रणनीति और क्षेत्रीय परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

  • बीजिंग पहुंचे ट्रंप, आज शिखर सम्मेलन में होंगे शामिल… जिनपिंग से इन मुद्दों पर होगी चर्चा

    बीजिंग पहुंचे ट्रंप, आज शिखर सम्मेलन में होंगे शामिल… जिनपिंग से इन मुद्दों पर होगी चर्चा


    बीजिंग।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) बुधवार को चीन (China) की राजधानी बीजिंग (Beijing) पहुंचे। यहां वे चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Chinese President Xi Jinping) के साथ ईरान युद्ध, व्यापार और ताइवान को अमेरिकी हथियारों की बिक्री जैसे अहम मुद्दों पर बहुप्रतीक्षित चर्चा करेंगे।

    शिखर सम्मेलन का मुख्य हिस्सा गुरुवार को होगा, जब दोनों नेता द्विपक्षीय वार्ता करेंगे और एक औपचारिक भोज में शामिल होंगे। चीनी राजधानी में एयर फोर्स वन के उतरने के बाद चीन की ओर से ट्रंप का भव्य स्वागत किया गया।

    व्हाइट हाउस के अनुसार, राष्ट्रपति का स्वागत चीनी उपराष्ट्रपति हान झेंग, वॉशिंगटन में चीन के राजदूत शी फेंग, विदेश मंत्रालय के कार्यकारी उप मंत्री मा झाओक्सू और बीजिंग में अमेरिकी दूत डेविड परड्यू द्वारा किया गया। स्वागत समारोह में लगभग 300 चीनी युवा, एक सैन्य सम्मान गार्ड और एक सैन्य बैंड शामिल हुए।

    ट्रंप की चीन यात्रा के दौरान उनके साथ जाने वाले अमेरिकी व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल में टिम कुक और ऐलन मस्क सहित अमेरिका के 16 प्रमुख कारोबारी शामिल हैं। व्हाइट हाउस ने ट्रंप के वॉशिंगटन से रवाना होने से पहले इन शीर्ष व्यवसायियों की सूची जारी की। यात्रा के दौरान ट्रंप की शी जिनपिंग से मुलाकात होने की संभावना है, जिसमें आर्थिक सहयोग और व्यापारिक पहलों पर चर्चा की जाएगी। सूची जारी होने के कुछ समय बाद सिसको ने पुष्टि की कि उसके मुख्य कार्यकारी अधिकारी अब इस यात्रा में शामिल नहीं होंगे।

    मस्क की भागीदारी ट्रंप और अरबपति कारोबारी के बीच संबंधों में फिर से आई नजदीकी को दिखाती है। मस्क पहले ट्रंप प्रशासन में वरिष्ठ सलाहकार रह चुके हैं और उन्होंने संघीय नौकरशाही में सुधार से जुड़े प्रयासों का नेतृत्व भी किया था, लेकिन पिछले वर्ष मतभेदों के बाद उन्होंने पद छोड़ दिया था। हाल के महीनों में दोनों के संबंधों में सुधार की खबरें सामने आई हैं। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ट्रंप चीन के साथ नये निवेश और व्यापार बोर्डों के गठन की संभावनाओं पर भी चर्चा कर सकते हैं। प्रतिनिधिमंडल में प्रौद्योगिकी, वित्त, एयरोस्पेस और विनिर्माण सहित अमेरिकी उद्योग जगत के विभिन्न क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व शामिल है। प्रतिनिधिमंडल में शामिल प्रमुख अधिकारियों में लैरी फिंक, स्टीफन श्वार्ज़मैन, केली ऑर्टबर्ग, ब्रायन साइक्स, जेन फ्रेजर, जिम एंडरसन, लैरी कल्प और डेविड सोलोमन शामिल हैं।