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  • रविवार का राशिफल: सूर्यदेव की कृपा से चमकेंगे ये भाग्यशाली राशियाँ, जानिए किसके लिए रहेगा दिन बेहद शुभ

    रविवार का राशिफल: सूर्यदेव की कृपा से चमकेंगे ये भाग्यशाली राशियाँ, जानिए किसके लिए रहेगा दिन बेहद शुभ


    नई दिल्ली । वैदिक ज्योतिष शास्त्र में रविवार का दिन विशेष रूप से सूर्यदेव को समर्पित माना गया है। सूर्य को आत्मा, सम्मान, शक्ति और सफलता का कारक ग्रह कहा गया है। ऐसे में रविवार के दिन ग्रह-नक्षत्रों की चाल कई राशियों के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और शुभ परिणाम लेकर आती है। ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार इस दिन कुछ राशियों पर सूर्यदेव की विशेष कृपा बनी रहती है, जिससे उनके कार्यों में सफलता, मान-सम्मान और आर्थिक लाभ के योग बनते हैं।

    रविवार का दिन मेष राशि के जातकों के लिए उत्साह और नई ऊर्जा लेकर आता है। इस राशि के लोगों को कार्यक्षेत्र में सफलता मिलने के योग बनते हैं और किसी पुराने रुके हुए काम में गति आ सकती है। वहीं वृषभ राशि के जातकों के लिए यह दिन आर्थिक दृष्टि से लाभकारी साबित हो सकता है। परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और कोई शुभ समाचार मिलने की संभावना रहती है।

    मिथुन राशि के लिए रविवार का दिन सकारात्मक सोच और नए अवसर लेकर आता है। इस राशि के लोग अपने निर्णयों से लाभ प्राप्त कर सकते हैं और व्यापार में भी सुधार देखने को मिलता है। कर्क राशि के जातकों के लिए भी यह दिन भाग्य का साथ लेकर आता है। नौकरी और करियर में प्रगति के संकेत मिलते हैं और रुके हुए कार्य पूरे होने की संभावना रहती है।

    सिंह राशि के लिए रविवार विशेष रूप से शुभ माना जाता है क्योंकि यह राशि सूर्य की ही राशि होती है। इस दिन सिंह राशि के जातकों को मान-सम्मान, प्रतिष्ठा और सफलता प्राप्त होती है। किसी बड़े अवसर या जिम्मेदारी मिलने के योग भी बनते हैं।

    कन्या राशि के लोगों के लिए दिन सामान्य से अच्छा रह सकता है, हालांकि उन्हें कार्यों में सावधानी रखने की आवश्यकता होती है। तुला राशि के जातकों के लिए यह दिन सरकारी कार्यों और कानूनी मामलों में सफलता दिला सकता है।

    वृश्चिक राशि के लिए यह दिन आत्मविश्वास बढ़ाने वाला रहेगा। धनु राशि के जातकों के लिए नए अवसर खुल सकते हैं और आय के स्रोत बढ़ने की संभावना बनती है। मकर राशि के लिए दिन थोड़ा संयम रखने वाला हो सकता है, लेकिन मेहनत का फल जरूर मिलेगा।

    कुंभ राशि के जातकों के लिए यह दिन परिश्रम और सफलता का संकेत देता है, जबकि मीन राशि के लोगों के लिए रविवार मानसिक शांति और पारिवारिक सुख लेकर आता है।

    ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि रविवार के दिन सूर्यदेव को अर्घ्य देने और तांबे के पात्र में जल चढ़ाने से विशेष लाभ प्राप्त होता है। साथ ही इस दिन “ॐ सूर्याय नमः” मंत्र का जाप करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सफलता के मार्ग खुलते हैं।

    कुल मिलाकर रविवार का दिन कई राशियों के लिए शुभ संकेत लेकर आता है, विशेषकर उन लोगों के लिए जो मेहनत और आत्मविश्वास के साथ अपने कार्यों में आगे बढ़ते हैं।

  • रविवार के वास्तु टिप्स: सूर्य देव की कृपा पाने के लिए करें ये आसान उपाय, घर में आएगी सुख-समृद्धि

    रविवार के वास्तु टिप्स: सूर्य देव की कृपा पाने के लिए करें ये आसान उपाय, घर में आएगी सुख-समृद्धि


    नई दिल्ली ।  वास्तु शास्त्र और ज्योतिष में रविवार का विशेष महत्व माना गया है। यह दिन सूर्य देव को समर्पित होता है, जिन्हें ऊर्जा, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, सम्मान और सफलता का कारक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रविवार के दिन कुछ विशेष वास्तु उपाय करने से घर-परिवार में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और व्यक्ति के जीवन में उन्नति के नए रास्ते खुल सकते हैं।

    वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार रविवार की सुबह सूर्योदय से पहले उठकर घर की साफ-सफाई करना शुभ माना जाता है। विशेष रूप से घर के पूर्व दिशा वाले हिस्से को स्वच्छ रखना चाहिए, क्योंकि पूर्व दिशा सूर्य की दिशा मानी जाती है। इस दिशा में गंदगी या अव्यवस्था होने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह प्रभावित हो सकता है।

    रविवार को सुबह सूर्य देव को तांबे के लोटे से जल अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। जल में लाल फूल, रोली या अक्षत मिलाकर अर्घ्य देने से आत्मविश्वास और मान-सम्मान में वृद्धि होने की मान्यता है। साथ ही सूर्य मंत्रों का जाप करने से मानसिक शक्ति और ऊर्जा बढ़ती है।

    वास्तु शास्त्र के अनुसार रविवार के दिन घर की पूर्व दिशा में लाल, नारंगी या सुनहरे रंग की सजावटी वस्तुएं रखना शुभ माना जाता है। इससे सूर्य तत्व मजबूत होता है और घर में सकारात्मक वातावरण बना रहता है। यदि संभव हो तो इस दिन घर में प्राकृतिक प्रकाश का अधिकतम प्रवेश सुनिश्चित करें।

    रविवार को गुड़, गेहूं, तांबा या लाल वस्तुओं का दान करना भी शुभ माना गया है। मान्यता है कि इससे सूर्य दोष कम होता है और व्यक्ति को करियर तथा सामाजिक जीवन में लाभ प्राप्त होता है। जरूरतमंद लोगों की सहायता करना भी इस दिन विशेष फलदायी माना गया है।

    वास्तु के अनुसार रविवार के दिन घर में टूटे-फूटे इलेक्ट्रॉनिक सामान, बेकार वस्तुएं और कबाड़ हटाने का प्रयास करना चाहिए। ऐसी चीजें नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करती हैं और उन्नति में बाधा बन सकती हैं। घर को व्यवस्थित रखने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ता है।

    इसके अलावा रविवार को परिवार के साथ समय बिताना, बड़ों का सम्मान करना और सकारात्मक विचारों को अपनाना भी शुभ माना गया है। वास्तु शास्त्र केवल भौतिक व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक संतुलन को भी महत्वपूर्ण मानता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रविवार को सूर्य देव की कृपा प्राप्त करने के लिए आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ, सूर्य नमस्कार और नियमित ध्यान भी लाभकारी हो सकता है। इन उपायों से व्यक्ति के जीवन में आत्मविश्वास, सफलता और सकारात्मकता बढ़ने की मान्यता है।

  • इस दिन रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे सूर्य देव…. नौतपा में पड़ेगी प्रचंड गर्मी

    इस दिन रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे सूर्य देव…. नौतपा में पड़ेगी प्रचंड गर्मी


    नई दिल्ली।
    ज्येष्ठ महीने (Jyeshtha month) के शुरू होते ही गर्मी अपना प्रचंड (Extreme Heat) रूप दिखाने लगी है. लेकिन अब नौतपा (Nautapa) के चलते सूरज आग के गोले की तरह तपने वाला है. ज्योतिषीय गणना के अनुसार, 25 मई 2026 को दोपहर 03:37 बजे ग्रहों के राजा सूर्य देव अपने मित्र चंद्रमा के नक्षत्र ‘रोहिणी’ (Nakshatra ‘Rohini’) में प्रवेश कर रहे हैं. सूर्य का यह नक्षत्र परिवर्तन (Surya Nakshatra Parivartan 2026) प्रकृति और मानव जीवन पर बड़ा असर डालेगा. सूर्य के रोहिणी में आते ही 25 मई से 2 जून 2026 तक ‘नौतपा’ रहेगा, जिसके कारण उत्तर और मध्य भारत में भीषण हीटवेव (लू) की स्थिति बनेगी।

    वैदिक ज्योतिष के अनुसार, रोहिणी नक्षत्र के स्वामी चंद्रमा हैं, जो शीतलता के प्रतीक हैं. जब अग्नि तत्व सूर्य देव इस नक्षत्र में आते हैं, तो वे इसकी शीतलता को सोख लेते हैं, जिससे पृथ्वी का तापमान रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाता है. सूर्य का यह उग्र रूप 8 जून 2026 तक रहेगा, लेकिन शुरुआती 9 दिन यानी नौतपा का समय सबसे ज्यादा कष्टप्रद होगा. सूर्य के इस गोचर से जहां कुछ राशियों को लाभ होगा, वहीं 4 विशेष राशियां ऐसी हैं जिन्हें इस दौरान आर्थिक, मानसिक और स्वास्थ्य के मोर्चे पर भारी नुकसान और चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।


    1. वृषभ राशि (Taurus)

    चूंकि सूर्य देव आपकी ही राशि में रहते हुए रोहिणी नक्षत्र में गोचर कर रहे हैं, इसलिए इसका सबसे सीधा और गहरा प्रभाव आप पर पड़ेगा. इस अवधि में आपके स्वभाव में बेवजह का गुस्सा, अहंकार और चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है. कार्यस्थल पर सहकर्मियों या बिजनेस में पार्टनर के साथ गंभीर विवाद हो सकते हैं. 25 मई से 8 जून के बीच पार्टनरशिप के कामों में कोई भी बड़ा फैसला जल्दबाजी में न लें. अपनी वाणी पर नियंत्रण रखें, अन्यथा बनते काम बिगड़ सकते हैं.


    2. मिथुन राशि (Gemini)

    मिथुन राशि के जातकों के लिए सूर्य का यह गोचर आपकी राशि से बारहवें भाव यानी व्यय और हानि के भाव में होने जा रहा है. इस दौरान आपके खर्चों में अप्रत्याशित रूप से भारी बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे बजट पूरी तरह बिगड़ जाएगा. धन हानि के प्रबल योग बन रहे हैं. किसी कानूनी मामले या कोर्ट-कचहरी के चक्कर में दौड़भाग और मानसिक तनाव बढ़ सकता है. इस समय अवधि में किसी को भी बड़ा कर्ज या उधार देने से बचें. पैसों के लेनदेन में पूरी सतर्कता बरतें.


    3. वृश्चिक राशि (Scorpio)

    सूर्य देव आपकी राशि से सातवें भाव (साझेदारी और वैवाहिक जीवन) में गोचर करेंगे, जो सीधे आपके रिश्तों को प्रभावित करेगा. दांपत्य जीवन में जीवनसाथी के साथ गलतफहमियां और तनाव बढ़ सकता है. व्यापार में यदि पार्टनरशिप है, तो वहां भी मतभेद उभर सकते हैं. कार्यक्षेत्र में आपकी प्रतिष्ठा को थोड़ी ठेस पहुंचने की आशंका है. जीवनसाथी के स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें. किसी भी व्यावसायिक दस्तावेज पर बिना अच्छी तरह पढ़े हस्ताक्षर न करें.


    4. कुंभ राशि (Aquarius)

    कुंभ राशि के जातकों के लिए सूर्य का यह गोचर चौथे भाव में होने जा रहा है, जिसे सुख, संपत्ति और माता का भाव माना जाता है. पारिवारिक सुख-शांति में कमी आ सकती है और घरेलू मोर्चे पर वाद-विवाद की स्थिति बन सकती है. भूमि, मकान या वाहन से जुड़े मामलों में अचानक रुकावटें आ सकती हैं. इसके अलावा, सेहत में गिरावट आ सकती है. अपनी माता के स्वास्थ्य को लेकर बिल्कुल भी लापरवाही न बरतें. सीने में तकलीफ या हाई ब्लड प्रेशर (रक्तचाप) के मरीज इस दौरान अपनी दवाइयां समय पर लें और धूप में निकलने से बचें.

  • आज का ज्योतिषीय संकेत 9 मई 2026: सूर्य देव की कृपा से नौकरी और करियर में मिल सकती है बड़ी सफलता

    आज का ज्योतिषीय संकेत 9 मई 2026: सूर्य देव की कृपा से नौकरी और करियर में मिल सकती है बड़ी सफलता


    नई दिल्ली। 9 मई 2026 का दिन ज्योतिषीय दृष्टि से कई राशियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति संकेत दे रही है कि आज कुछ जातकों पर सूर्य देव की विशेष कृपा बनी रह सकती है, जिससे करियर और नौकरी से जुड़े मामलों में सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना है।

    मेष राशि:
    आज का दिन ऊर्जा और आत्मविश्वास से भरपूर रहेगा। कार्यस्थल पर आपकी मेहनत को सराहना मिल सकती है। किसी वरिष्ठ अधिकारी से सहयोग प्राप्त होगा और रुके हुए काम पूरे होने की संभावना है।

    वृषभ राशि:
    आर्थिक मामलों में सुधार के संकेत हैं। पुराने निवेश से लाभ मिल सकता है। नौकरीपेशा लोगों को नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं, जो भविष्य में प्रमोशन का मार्ग खोल सकती हैं।

    मिथुन राशि:
    आज सोच-समझकर निर्णय लेने की जरूरत है। कामकाज में थोड़ी उलझन रह सकती है, लेकिन धैर्य से स्थिति संभल जाएगी। सहकर्मियों का सहयोग मिलेगा।

    कर्क राशि:
    परिवार और कार्यस्थल दोनों जगह संतुलन बनाए रखना जरूरी होगा। आज कोई अच्छी खबर मिल सकती है, खासकर नौकरी या पदोन्नति से जुड़ी हुई।

    सिंह राशि:
    सूर्य देव की विशेष कृपा आपके ऊपर बनी रह सकती है। आत्मविश्वास बढ़ेगा और कार्यस्थल पर आपकी नेतृत्व क्षमता की सराहना होगी। प्रमोशन के योग बन सकते हैं।

    कन्या राशि:
    काम में ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है। छोटी गलतियों से बचें। आर्थिक मामलों में सावधानी रखें, लेकिन दिन अंत तक सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं।

    तुला राशि:
    साझेदारी और टीमवर्क से लाभ होगा। किसी पुराने प्रोजेक्ट में सफलता मिल सकती है। नौकरी में तरक्की के संकेत हैं।

    वृश्चिक राशि:
    आज का दिन मिश्रित परिणाम देने वाला रहेगा। मेहनत का फल देर से मिलेगा, लेकिन मिलेगा जरूर। किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति से मुलाकात फायदेमंद हो सकती है।

    धनु राशि:
    भाग्य आपका साथ देगा। नए अवसर मिल सकते हैं। विदेश या दूरस्थ स्थान से जुड़े कामों में सफलता के योग हैं।

    मकर राशि:
    कार्यस्थल पर जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं, लेकिन आप उन्हें अच्छे से निभा लेंगे। आर्थिक स्थिति स्थिर रहेगी और भविष्य की योजना मजबूत होगी।

    कुंभ राशि:
    नए विचार और योजनाएं आगे बढ़ेंगी। नौकरी में बदलाव या प्रमोशन की संभावना बन सकती है। मित्रों का सहयोग मिलेगा।

    मीन राशि:
    आज भावनात्मक रूप से संतुलन बनाए रखना जरूरी है। कार्यक्षेत्र में सुधार के संकेत हैं और रुके हुए काम पूरे हो सकते हैं।

    कुल मिलाकर 9 मई 2026 का दिन कई राशियों के लिए करियर और आर्थिक दृष्टि से सकारात्मक संकेत दे रहा है। विशेष रूप से नौकरीपेशा लोगों के लिए यह दिन तरक्की और नए अवसरों की संभावना लेकर आया है।

  • चैती छठ 2026: 22 मार्च से शुरू होगा महापर्व, जानिए नहाय खाय से पारण तक की सटीक तिथियां

    चैती छठ 2026: 22 मार्च से शुरू होगा महापर्व, जानिए नहाय खाय से पारण तक की सटीक तिथियां


    नई दिल्ली । चैत्र मास की शुरुआत के साथ ही लोक आस्था का महापर्व चैती छठ आने वाला है। सूर्योपासना को समर्पित यह चार दिवसीय व्रत विशेष रूप से बिहार झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में बड़ी श्रद्धा से मनाया जाता है। छठ पर्व में भगवान Surya और Chhathi Maiya की उपासना की जाती है। मान्यता है कि यह व्रत संतान सुख दीर्घायु और परिवार की समृद्धि के लिए अत्यंत फलदायी होता है। पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में चैती छठ की शुरुआत 22 मार्च से होगी और 25 मार्च को उषा अर्घ्य व पारण के साथ इसका समापन होगा।

    चैती छठ 2026 की प्रमुख तिथियां

    नहाय खाय 22 मार्च 2026 पहला दिन इस दिन व्रती पवित्र नदी या घर में स्नान कर शुद्ध और सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं। परंपरागत रूप से कद्दू भात कद्दू की सब्जी और चावल बनाया जाता है। इसी के साथ व्रत की औपचारिक शुरुआत होती है।

    खरना 23 मार्च 2026 दूसरा दिन

    व्रती पूरे दिन निर्जला उपवास रखते हैं। शाम को गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद बनाकर पूजा की जाती है। प्रसाद ग्रहण करने के बाद 36 घंटे का कठोर निर्जला व्रत आरंभ हो जाता है।

    संध्या अर्घ्य 24 मार्च 2026 तीसरा दिन

    इस दिन अस्ताचलगामी सूर्य को नदी तालाब या जलाशय के किनारे अर्घ्य अर्पित किया जाता है। यह छठ पर्व का सबसे भावनात्मक और भव्य दृश्य होता है जब घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।

    उषा अर्घ्य एवं पारण 25 मार्च 2026 चौथा दिन

    अगली सुबह उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इसके साथ ही व्रत का समापन होता है और प्रसाद ग्रहण कर पारण किया जाता है।
    चैती छठ का धार्मिक महत्व
    यह पर्व शुद्धता संयम और अटूट श्रद्धा का प्रतीक है। मान्यता है कि व्रत करने से संतान सुख और परिवार की खुशहाली प्राप्त होती है। चैत्र मास में होने के कारण इसे विशेष आध्यात्मिक फल देने वाला माना जाता है।छठ पूजा में बनाया जाने वाला ठेकुआ मुख्य प्रसाद होता है जिसे अत्यंत पवित्र माना जाता है। चैती छठ प्रकृति सूर्य और जल के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का पर्व है। चार दिनों तक चलने वाला यह व्रत आत्मसंयम भक्ति और पारिवारिक एकता का संदेश देता है।

  • मकर संक्रांति  2026: मकर संक्रांति के दिन इन रंगों के कपड़े पहनना होता है शुभ यहां जानें कैसे

    मकर संक्रांति 2026: मकर संक्रांति के दिन इन रंगों के कपड़े पहनना होता है शुभ यहां जानें कैसे


    नई दिल्ली । मकर संक्रांति एक ऐसा त्योहार है जो न केवल भारत में बल्कि दुनिया भर में विशेष श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। यह त्योहार सूर्य देव के मकर राशि में प्रवेश का प्रतीक है और इसका महत्व बहुत गहरा है। मकर संक्रांति के दिन सूर्य की गति और उनके मकर राशि में प्रवेश के साथ नई ऊर्जा का संचार होता है और पुराने को छोड़कर नए का स्वागत किया जाता है। इस दिन का आध्यात्मिक और भौतिक रूप से बड़ा महत्व है और यह जीवन में शुभ परिवर्तन और समृद्धि का संकेत माना जाता है।इसके साथ ही मकर संक्रांति के दिन एक और परंपरा है जो विशेष रूप से ध्यान आकर्षित करती है और वह है इस दिन विशेष रंगों के कपड़े पहनने की मान्यता। माना जाता है कि सूर्य देव से जुड़े उज्ज्वल और ऊर्जावान रंग पहनने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और व्यक्ति का भाग्य और सौभाग्य में वृद्धि होती है। आइए जानते हैं कि इस दिन कौन से रंग शुभ माने जाते हैं और क्यों।

    पीला रंग सूर्य देव का प्रिय रंग

    मकर संक्रांति के दिन पीला रंग पहनने की परंपरा है। पीला रंग सूर्य देव का प्रिय रंग माना जाता है और यह ज्ञान समृद्धि और सकारात्मकता का प्रतीक है। इस दिन पीला रंग पहनने से घर में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है। पीला रंग ऊर्जा और उत्साह को बढ़ावा देता है और इसे शुभ और सौभाग्यवर्धक माना जाता है। इसलिए मकर संक्रांति के दिन पीला रंग पहनकर हम सूर्य देव को सम्मान देते हैं और उनकी कृपा प्राप्त करते हैं।

    नारंगी केसरिया रंग ऊर्जा और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक

    नारंगी रंग जिसे केसरिया रंग भी कहा जाता है इस दिन एक और शुभ रंग है। नारंगी रंग ऊर्जा उत्साह और आध्यात्मिक शक्ति का संकेत देता है। यह रंग हमें जीवन में नयापन शक्ति और आत्मविश्वास का अहसास कराता है। मकर संक्रांति के दिन नारंगी रंग पहनने से न केवल हमारे भीतर ऊर्जा का संचार होता है बल्कि यह हमें मानसिक शांति और स्थिरता भी प्रदान करता है। इसके अलावा नारंगी रंग सूर्य के ऊर्जा से जुड़ा होता है और यही कारण है कि यह इस दिन विशेष रूप से शुभ माना जाता है।

    लाल रंग शक्ति और साहस का प्रतीक

    लाल रंग जो शक्ति और साहस का प्रतीक माना जाता है मकर संक्रांति पर पहनने के लिए एक और शुभ रंग है। यह रंग जीवन में उत्साह और नकारात्मकता से लड़ने की शक्ति को बढ़ाता है। लाल रंग पहनने से व्यक्ति के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है और यह उसे किसी भी विपरीत परिस्थिति से निपटने के लिए मानसिक और शारीरिक ताकत देता है। मकर संक्रांति के दिन लाल रंग पहनकर हम अपनी आंतरिक शक्ति को जागृत कर सकते हैं और जीवन में सफलता की ओर बढ़ सकते हैं।

    सुनहरा रंग वैभव और सफलता का प्रतीक

    सुनहरा रंग जो सूर्य देव के साथ जुड़ा हुआ है वैभव सफलता और तेज का प्रतीक है। मकर संक्रांति के दिन सुनहरा रंग पहनना शुभ माना जाता है क्योंकि यह न केवल सूर्य के उज्ज्वल प्रकाश से जुड़ा है बल्कि यह व्यक्ति को समृद्धि और सफलता की दिशा में प्रेरित करता है। सुनहरा रंग पहनने से व्यक्ति के जीवन में खुशहाली और सफलता आती है। इसके अलावा यह रंग किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत के लिए आदर्श माना जाता है।

    किन रंगों से बचें

    जहां मकर संक्रांति पर कुछ रंगों को पहनना शुभ माना जाता है वहीं कुछ रंगों से बचने की भी सलाह दी जाती है। काला और गहरा नीला रंग इस दिन पहनने से परहेज किया जाता है क्योंकि इन्हें नकारात्मक ऊर्जा से जोड़ा जाता है। इन रंगों का पहनना व्यक्ति की ऊर्जा को कमजोर कर सकता है और यह शुभता में कमी ला सकता है। इसलिए इस दिन काले और गहरे नीले रंग के कपड़े पहनने से बचना चाहिए।

    मकर संक्रांति के दिन की अन्य परंपराएं

    मकर संक्रांति का त्योहार सिर्फ रंगों से जुड़ा नहीं है बल्कि इस दिन के साथ कई धार्मिक और सामाजिक परंपराएं जुड़ी हुई हैं। इस दिन सूर्य देव को अर्घ्य देकर दान-पुण्य और स्नान करने से सुख-समृद्धि स्वास्थ्य और सफलता की प्राप्ति होती है। मकर संक्रांति के दिन तिल और गुड़ के लड्डू भी बांटे जाते हैं जो एकता और मित्रता का प्रतीक होते हैं।मकर संक्रांति एक ऐसा पर्व है जो सूर्य देव के प्रति आस्था और विश्वास का प्रतीक है। इस दिन विशेष रंगों के कपड़े पहनकर हम अपनी जीवन शक्ति को सकारात्मक दिशा में मोड़ सकते हैं और सूर्य देव की कृपा प्राप्त कर सकते हैं। पीला नारंगी लाल और सुनहरा रंग पहनने से न केवल शुभता और समृद्धि मिलती है बल्कि यह ऊर्जा और उत्साह से भी भर देता है। तो इस मकर संक्रांति इन रंगों के कपड़े पहनें और सूर्य देव से शुभ आशीर्वाद प्राप्त करें!

  • रविवार के विशेष उपाय: सूर्य मजबूत होंगे तो चमकेगा भाग्य, दूर होंगी बीमारी और बाधाएं

    रविवार के विशेष उपाय: सूर्य मजबूत होंगे तो चमकेगा भाग्य, दूर होंगी बीमारी और बाधाएं


    नई दिल्ली । ज्योतिष के अनुसार रविवार सूर्यदेव को समर्पित होता है। सूर्य को आत्मा, तेज, स्वास्थ्य और राजसत्ता का प्रतीक माना गया है। यदि कुंडली में सूर्य कमजोर हो, तो व्यक्ति को बार-बार अपमान, असफलता, रोग और करियर में रुकावटों का सामना करना पड़ता है। लेकिन यदि रविवार के उपाय समय पर और नियमित रूप से किए जाएं, तो सूर्य मजबूत होकर जीवन में स्थिरता, सफलता और सकारात्मक ऊर्जा लाते हैं।

    रविवार के असरदार उपाय

    1. उगते सूर्य को अर्घ्य दें

    सुबह जल्दी उठकर स्नान के बाद तांबे के पात्र में जल, लाल पुष्प और थोड़ा गुड़ डालकर सूर्य को अर्घ्य दें। इस दौरान मंत्र ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः का 11 या 21 बार जप करें। यह उपाय सूर्य को बल देता है और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाता है।

    2. लाल रंग का दान और उपयोग

    रविवार को लाल वस्त्र पहनें और जरूरतमंद को लाल कपड़ा, गुड़ या गेहूं का दान करें। इस उपाय से मान-सम्मान बढ़ता है और आर्थिक अड़चनें दूर होती हैं।

    3. सूर्य स्तुति और दीप प्रज्ज्वलन

    घर के मंदिर में घी का दीपक जलाकर आदित्य हृदय स्तोत्र या सूर्य चालीसा का पाठ करें। इससे मानसिक कमजोरी दूर होती है और निर्णय क्षमता मजबूत होती है।

    4. पिता और वरिष्ठों का आशीर्वाद लें

    रविवार को पिता, गुरु या किसी वरिष्ठ व्यक्ति का सम्मान करें। उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लेने से सूर्य का शुभ प्रभाव बढ़ता है और जीवन में स्थिरता आती है।

    5. तांबे से जुड़े उपाय

    रविवार को तांबे के बर्तन में जल पीना या कमर में तांबे का सिक्का रखना शुभ माना जाता है। इससे स्वास्थ्य और आत्मबल में वृद्धि होती है और नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं।

    6. नौकरी-व्यापार में बाधा हो तो उपाय

    यदि करियर में बार-बार अड़चन आ रही हो, तो किसी मंदिर में गुड़ और गेहूं का दान करें और सूर्यदेव से सफलता की प्रार्थना करें। यह उपाय व्यवसाय और नौकरी में बाधाओं को दूर करने में मदद करता है।

    रविवार के उपाय क्यों जरूरी हैं?

    ज्योतिष में सूर्य को कुंडली का राजा माना गया है। मजबूत सूर्य व्यक्ति को नेतृत्व क्षमता, सम्मान, सरकारी सहयोग और उत्तम स्वास्थ्य देता है। रविवार को नियमित रूप से किए गए उपाय न केवल आत्मविश्वास बढ़ाते हैं बल्कि जीवन में नकारात्मकता को भी दूर करते हैं।

  • Makar Sankranti पर सूर्य देव की कृपा पाने के लिए करें ये काम, होगी सुख-समृद्धि की बरसात

    Makar Sankranti पर सूर्य देव की कृपा पाने के लिए करें ये काम, होगी सुख-समृद्धि की बरसात

    नई दिल्ली। हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, मकर संक्रांति पर स्नान-दान से पुण्य फल मिलते हैं। इस दिन सूर्य देव की उपासना करने से साधक को सुख-समृद्धि की प्राप्ति हो सकती है। ऐसे में आप इस दिन पर कुछ विशेष कार्यों द्वारा सूर्य देव की कृपा के पात्र बन सकते हैं।

    ऐसा माना गया है कि मकर संक्रांति (Makar Sankranti 2026) के दिन किए गए स्नान-दान और पूजा-पाठ करने से साधक को कई गुना फल मिलता है। इस साल मकर संक्रांति बुधवार, 14 जनवरी को है। मकर संक्रांति पर खरमास का समापन भी होता है, जिससे विवाह आदि जैसे शुभ कार्य दोबारा शुरू हो जाते हैं।

    जरूर करें ये काम
    मकर संक्रांति के दिन (Makar Sankranti 2025 Upay) सुबह जल्दी उठकर किसी पवित्र नदी खासकर गंगा में स्नान जरूर करें। अगर आपके लिए ऐसा करना संभव न हो, तो आप घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर भी स्नान कर सकते हैं। इससे साधक के लिए सुख-समृद्धि के योग बनते हैं।

    शनि दोष से मिलेगी राहत
    शनि दोष से राहत पाने के लिए मकर संक्रांति (Makar Sankranti 2025) के दिन गंगाजल में काले तिल मिलाकर शिव जी का अभिषेक करें। ऐसा करने से आपको अपनी स्थिति में लाभ देखने को मिल सकता है। इसके साथ ही आप मकर संक्रांति पर गंगा स्नान के बाद बहती जलधारा में काले तिल प्रवाहित कर सकते हैं, जिससे शनि दोष में राहत मिलती है।
    इस तरह करें सूर्य देव को प्रसन्न
    मकर संक्रांति के दिन स्नान-ध्यान के बाद सूर्य देव को जल अर्पित करना चाहिए। इससे जातक के मान-सम्मान में वृद्धि होती है। इस दिन सूर्य देव को जल अर्पित करने के लिए सबसे पहले जल में लाल फूल, अक्षत (चावल) और रोली मिलाएं और इसके बाद सूर्य को अर्घ्य दें। इस दौरान ॐ सूर्याय नम: मंत्र का जप करते रहें।

    अंत में सूर्य देव को नमस्कार करते हुए सुख-समृद्धि की कामना करें। साथ ही इस दिन पर सूर्य देव की कृपा के लिए अपनी क्षमता के अनुसार, अन्न, तिल, गुड़, कपड़े, कंबल और धन आदि का दान (Makar Sankranti Daan) करें व गरीब और जरूरतमंद लोगों को भोजन कराएं।

  • पौष मास 2025: भगवान विष्णु और सूर्य देव की पूजा का महत्व

    पौष मास 2025: भगवान विष्णु और सूर्य देव की पूजा का महत्व



    नई दिल्ली ।
    हिंदू कैलेंडर का दसवां महीना पौष मास धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस महीने में भगवान विष्णु और सूर्य देव की विशेष पूजा की जाती है। पौष मास में कई प्रमुख व्रत और त्योहार आते हैं, जो भक्तों के जीवन में सुख, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति के लिए माने जाते हैं। इस महीने में खरमास की शुरुआत होती है और इसके साथ ही भक्त गुरु गोविंद सिंह जयंती, पुत्रदा एकादशी, कालाष्टमी, मासिक शिवरात्रि जैसे महत्वपूर्ण पर्व मनाते हैं। पौष मास को आम बोलचाल में पूष का महीना भी कहा जाता है।

    पौष मास 2025 की शुरुआत और प्रमुख व्रत

    पौष मास 2025 की शुरुआत 5 दिसंबर, शुक्रवार से हो रही है। इस दिन पौष कृष्ण प्रतिपदा तिथि है और साथ ही रोहिणी व्रत रखा जाएगा। रोहिणी व्रत उस समय मनाया जाता है जब सूर्योदय के बाद रोहिणी नक्षत्र प्रबल होता है। यह व्रत जैन धर्म और हिंदू धर्म में समान रूप से महत्व रखता है। इसके बाद 7 दिसंबर, रविवार को पौष कृष्ण चतुर्थी के दिन अखुरथ संकष्टी चतुर्थी व्रत मनाया जाएगा। इस व्रत को करने से घर में सुख-समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।

    मध्य पौष मास: मासिक व्रत और त्यौहार

    11 दिसंबर, गुरुवार को कालाष्टमी व्रत और मासिक कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाएगी। वहीं 15 दिसंबर, सोमवार को पौष कृष्ण पक्ष की सफला एकादशी होगी। इस दिन व्रत रखने और भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करने से जीवन में सफलता और मानसिक शांति प्राप्त होती है। 16 दिसंबर, मंगलवार को धनु संक्रांति होगी, जब सूर्य धनु राशि में प्रवेश करेंगे और खरमास की शुरुआत होगी। इसके अगले दिन 17 दिसंबर, बुधवार को बुध प्रदोष व्रत रखा जाएगा। इसी तरह, 18 दिसंबर, गुरुवार को मासिक शिवरात्रि मनाई जाएगी, जो हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को पड़ती है।

    पौष अमावस्या और अन्य महत्वपूर्ण तिथियां

    19 दिसंबर, शुक्रवार को पौष अमावस्या है, जो व्रत और दान के लिए विशेष रूप से शुभ मानी जाती है। इसके अलावा, 24 दिसंबर, बुधवार को विघ्नेश्वर चतुर्थी का पर्व मनाया जाएगा। पौष शुक्ल चतुर्थी के दिन विघ्नेश्वर चतुर्थी का आयोजन होता है। 27 दिसंबर, शनिवार को गुरु गोविंद सिंह जयंती मनाई जाएगी। यह पर्व सिख धर्म के संस्थापक गुरु गोविंद सिंह के जन्मोत्सव के रूप में पूरे श्रद्धा भाव से मनाया जाता है। इसके बाद 30 दिसंबर, मंगलवार को पौष शुक्ल एकादशी के रूप में पुत्रदा एकादशी का व्रत रखा जाएगा। इस व्रत को संतान सुख और परिवार की खुशहाली के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

    पौष पूर्णिमा और माघ मास की शुरुआत

    पौष मास का समापन 3 जनवरी 2026, शनिवार को पौष पूर्णिमा के साथ होगा। इस दिन से माघ स्नान की परंपरा प्रारंभ होती है। माघ मास में संगम में स्नान करने का विशेष महत्व है। प्रयागराज सहित अन्य पवित्र स्थलों पर माघ मेले का आयोजन होता है, जहां हजारों श्रद्धालु कल्पवास और धार्मिक अनुष्ठान करते हैं।

    पौष मास का धार्मिक और आध्यात्मिक संदेश

    पौष मास में किए जाने वाले व्रत और त्यौहार जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, आध्यात्मिक शांति और सामाजिक कल्याण लाने का माध्यम हैं। भगवान विष्णु और सूर्य देव की पूजा  अन्न और धन का दान, पवित्र नदियों में स्नान करने से न केवल पुण्य की प्राप्ति होती है बल्कि मन और आत्मा की शुद्धि भी होती है। पौष मास में श्रद्धा और भक्ति के साथ किए गए कर्म सौभाग्य और समृद्धि के लिए लाभकारी माने जाते हैं।