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  • हवा-सूरज के बाद अब समुद्र की लहरों से बिजली बनाने की तैयारी, बनाई खास डिवाइस

    हवा-सूरज के बाद अब समुद्र की लहरों से बिजली बनाने की तैयारी, बनाई खास डिवाइस


    नई दिल्ली।
    बिजली (Electricity) बनाने के लिए आपने सोलर पैनल (Solar panel) और विंड टर्बाइन (Wind turbine) के बारे में तो सुना ही होगा. लेकिन अब समुद्र की लहरों (Ocean Waves) से भी बिजली बनाने की कोशिश हो रही है. इसके लिए खास तरह की डिवाइस बनाई गई है, जिसे Wave Energy Converter यानी WEC कहा जाता है. ये डिवाइस समुद्र की लहरों की मूवमेंट को बिजली में बदलने का काम करती है. चीन में इस टेक्नोलॉजी पर काम हो रहा है।


    जानिए समुद्र की लहरों से कैसे बनती है बिजली?

    आसान भाषा में समझें तो समुद्र की लहरें जब ऊपर-नीचे होती हैं तो उनमें काफी एनर्जी होती है. WEC इसी एनर्जी को पकड़ने का काम करता है. डिवाइस का कुछ हिस्सा लहरों के साथ मूव करता है और इस मूवमेंट को मैकेनिकल या हाइड्रोलिक सिस्टम के जरिए बिजली बनाने वाले जनरेटर तक पहुंचाया जाता है।

    कुछ डिवाइस में लहरों से टर्बाइन घूमती है. वहीं कुछ डिवाइस पानी की लहरों के साथ ऊपर-नीचे या आगे-पीछे होने वाली बॉडी का इस्तेमाल करती हैं. यानी WEC का डिजाइन अलग हो सकता है, लेकिन मकसद एक ही है समुद्र की लहरों की एनर्जी को बिजली में बदलना.


    चीन ने बनाया बड़ा वेव एनर्जी कन्वर्टर

    चीन में WEC को लेकर काफी काम हुआ है. इनमें नानकुन नाम का बड़ा डिवाइस भी शामिल है. इसका वजन करीब 6,000 टन बताया गया है और यह एक दिन में 24,000 kWh तक बिजली पैदा करने की कैपिसिटी रखता है. इसे करीब 3,500 घरों की रोजाना बिजली खपत के बराबर बताया गया है. यही वजह है कि वेव एनर्जी को लेकर एक बार फिर चर्चा बढ़ी है. अब तक सोलर और विंड एनर्जी पर ज्यादा फोकस रहा है, लेकिन समुद्र की लहरों में भी काफी एनर्जी मौजूद है।


    सोलर और विंड से कैसे अलग?

    सोलर पैनल को बिजली बनाने के लिए सूरज की रोशनी चाहिए, जबकि विंड टर्बाइन हवा पर निर्भर करती है. WEC समुद्र की लहरों की मूवमेंट का इस्तेमाल करता है. समुद्र का पानी हवा से ज्यादा भारी होता है, इसलिए लहरों में काफी एनर्जी मौजूद हो सकती है. लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि वेव एनर्जी को आसानी से बिजली में बदला जा सकता है. इसके लिए सही जगह, सही डिजाइन और मजबूत सिस्टम की जरूरत होती है।

    चीन में बनी वेव एनर्जी कन्वर्टर टेक्नोलॉजी में लगातार एडवांस बनाया जा रहा है, अगर ये टेक्नोलॉजी बड़े लेवल पर सक्सेस होती है तो आने वाले समय में समुद्र भी क्लीन एनर्जी का एक बड़ा सोर्स बन सकता है. यानी सक्सेस में बिजली के लिए सिर्फ सूरज और हवा ही नहीं, समुद्र की लहरों पर भी नजर होगी।

  • 11 या 12 अगस्त, कब लगेगा साल का दूसरा सूर्य ग्रहण ? जानें भारत में दिखेगा या नहीं

    11 या 12 अगस्त, कब लगेगा साल का दूसरा सूर्य ग्रहण ? जानें भारत में दिखेगा या नहीं


    नई दिल्ली। वर्ष 2026 का दूसरा और पूर्ण सूर्य ग्रहण 12 अगस्त को लगेगा। यह खगोलीय घटना विज्ञान और ज्योतिष, दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस दौरान चंद्रमा पूरी तरह सूर्य को ढक लेगा, जिससे पृथ्वी के कुछ हिस्सों में दिन के समय अंधकार छा जाएगा। हालांकि, यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां सूतक काल प्रभावी नहीं माना जाएगा।

    कब लगेगा सूर्य ग्रहण?
    समय क्षेत्र (टाइम जोन) के अंतर के कारण कुछ देशों में यह ग्रहण 11 अगस्त की तारीख में दिखाई दे सकता है, लेकिन भारतीय समय (IST) के अनुसार यह 12 अगस्त 2026 को लगेगा। इसलिए भारत में इसकी मान्य तिथि 12 अगस्त ही होगी।

    सूर्य ग्रहण का समय (भारतीय समय)
    ग्रहण प्रारंभ: रात 9:04 बजे
    चरम (पीक): रात 11:17 बजे
    ग्रहण समाप्त: देर रात 1:27 बजे (13 अगस्त)

    कहां दिखाई देगा पूर्ण सूर्य ग्रहण?
    यह पूर्ण सूर्य ग्रहण मुख्य रूप से इन क्षेत्रों में दिखाई देगा—
    ग्रीनलैंड
    आइसलैंड
    स्पेन
    रूस
    अटलांटिक महासागर के कुछ हिस्से
    इसके अलावा यूरोप के अधिकांश देशों, उत्तरी अमेरिका के कुछ क्षेत्रों और उत्तर-पश्चिमी अफ्रीका में यह आंशिक सूर्य ग्रहण के रूप में देखा जा सकेगा।

    क्या भारत में दिखाई देगा?
    नहीं। यह सूर्य ग्रहण भारत में दृश्यमान नहीं होगा, क्योंकि भारतीय समय के अनुसार यह रात में घटित होगा। इसलिए देश में इसे देखा नहीं जा सकेगा।

    क्या भारत में सूतक काल लगेगा?
    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य ग्रहण से 12 घंटे पहले सूतक काल शुरू होता है। लेकिन चूंकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां सूतक काल मान्य नहीं होगा। मंदिरों के कपाट सामान्य रूप से खुले रहेंगे और पूजा-पाठ व अन्य मांगलिक कार्यों पर कोई प्रतिबंध नहीं रहेगा।

    ज्योतिषीय महत्व
    ज्योतिष के अनुसार यह ग्रहण सिंह राशि और मघा नक्षत्र में लगेगा। सिंह राशि के स्वामी स्वयं सूर्य हैं, इसलिए इस राशि के जातकों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार ग्रहण का प्रभाव वैश्विक स्तर पर मौसम, प्राकृतिक घटनाओं और राजनीतिक परिस्थितियों पर भी पड़ सकता है।

    ग्रहण के बाद क्या करें?
    – भगवान शिव या अपने इष्ट देव का स्मरण और मंत्र जाप करना शुभ माना जाता है।
    – ग्रहण समाप्त होने के बाद गेहूं, गुड़, तांबे के बर्तन या लाल वस्त्र का दान करना धार्मिक दृष्टि से लाभकारी माना जाता है।

  • कर्क संक्रांति आज: सूर्य का कर्क राशि में प्रवेश, उत्तरायण समाप्त, इन 4 राशियों को होगा लाभ

    कर्क संक्रांति आज: सूर्य का कर्क राशि में प्रवेश, उत्तरायण समाप्त, इन 4 राशियों को होगा लाभ


    नई दिल्ली। आज कर्क संक्रांति के अवसर पर सूर्य देव मिथुन राशि से निकलकर चंद्रमा की राशि कर्क में प्रवेश कर रहे हैं। ज्योतिष और हिंदू पंचांग के अनुसार सूर्य के इस राशि परिवर्तन को कर्क संक्रांति कहा जाता है, जिसका विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है।

    कर्क संक्रांति के साथ ही सूर्य का उत्तरायण काल समाप्त हो गया है और अब सूर्य दक्षिणायन हो गए हैं। आगामी छह माह तक सूर्य दक्षिणायन रहेंगे। शास्त्रों में इस अवधि को देवताओं की रात्रि कहा गया है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार सूर्य के कर्क राशि में प्रवेश से कुछ राशियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन और शुभ फल मिलने की संभावना है।

    इन राशियों को मिलेगा विशेष लाभ

    मेष राशि (Aries)
    कर्क संक्रांति मेष राशि के जातकों के लिए शुभ संकेत लेकर आई है। आत्मविश्वास और साहस में वृद्धि होगी। कार्यस्थल पर आपके काम की सराहना होगी और वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलेगा। नौकरी की तलाश कर रहे लोगों और कारोबार बढ़ाने की योजना बना रहे लोगों के लिए समय अनुकूल रहेगा। आर्थिक स्थिति भी पहले से बेहतर हो सकती है।

    कन्या राशि (Virgo)
    कन्या राशि वालों के लिए सूर्य का यह गोचर आर्थिक दृष्टि से लाभकारी माना जा रहा है। धन प्राप्ति के नए अवसर मिल सकते हैं और लंबे समय से अटका हुआ पैसा वापस मिलने के योग बन रहे हैं। सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी तथा परिवार में सुखद वातावरण रहेगा। किसी पुराने मित्र या रिश्तेदार से मुलाकात भी लाभदायक साबित हो सकती है।

    तुला राशि (Libra)
    तुला राशि के नौकरीपेशा लोगों को पदोन्नति या नई जिम्मेदारी मिलने की संभावना है। लंबे समय से अटके सरकारी कार्य पूरे हो सकते हैं। व्यापारियों को नई डील से अच्छा लाभ मिलने के संकेत हैं। पिता का सहयोग और मार्गदर्शन महत्वपूर्ण निर्णयों में मददगार रहेगा।

    मीन राशि (Pisces)
    मीन राशि के जातकों के लिए यह समय सुख और समृद्धि लेकर आ सकता है। संपत्ति या वाहन खरीदने की योजना साकार हो सकती है। परिवार में शांति और सौहार्द बना रहेगा तथा मानसिक तनाव में कमी आएगी। विद्यार्थियों को भी शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना है।

    कर्क संक्रांति पर करें ये तीन शुभ कार्य

    तिल और गंगाजल से स्नान करें
    यदि पवित्र नदी में स्नान संभव न हो तो घर पर स्नान के पानी में गंगाजल और काले तिल मिलाकर स्नान करें। इसे शुभ माना गया है।

    सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करें
    स्नान के बाद तांबे के लोटे में जल, लाल चंदन, अक्षत और लाल पुष्प डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें तथा ‘ॐ सूर्याय नमः’ मंत्र का जाप करें।

    अन्न, वस्त्र और उपयोगी वस्तुओं का दान करें
    दक्षिणायन की शुरुआत में दान का विशेष महत्व माना गया है। इस दिन जरूरतमंद लोगों या ब्राह्मणों को अन्न, विशेष रूप से सत्तू, वस्त्र, छाता अथवा मौसमी फलों का दान करना शुभ माना जाता है।

  • सूर्य-अरुण की युति आज बनाएगी दशांक योग…. इन राशि के जातकों की खुलेगी किस्मत !

    सूर्य-अरुण की युति आज बनाएगी दशांक योग…. इन राशि के जातकों की खुलेगी किस्मत !


    नई दिल्ली।
    आज शाम करीब 6 बजकर 51 मिनट से ब्रह्मांड में एक बेहद महत्वपूर्ण और दुर्लभ ज्योतिषीय घटना होने जा रही है. इस समय सूर्य देव और अरुण ग्रह (Uranus) एक-दूसरे से 36 डिग्री की विशेष कोणीय स्थिति में आ रहे हैं. वैदिक ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, इस विशिष्ट कोणीय दूरी के कारण दशांक योग (Dashank Ypg 2026) का निर्माण हो रहा है.

    सूर्य को आत्मा, मान-सम्मान और सफलता का कारक माना जाता है, जबकि अरुण ग्रह को अचानक बदलाव, नवीनता और क्रांतिकारी विचारों का स्वामी माना जाता है. इन दोनों का यह संयोग कुछ विशेष राशि के जातकों के लिए भाग्य के द्वार खोलने वाला साबित होगा. आइए जानते हैं कि इस दशांक योग से किन राशियों को सबसे ज्यादा फायदा होने वाला है।


    1. मेष राशि (Aries)

    – मेष राशि के जातकों के लिए यह योग किसी वरदान से कम नहीं है. सूर्य और अरुण की यह स्थिति आपके कार्यक्षेत्र में बड़ा उछाल लाएगी.
    – फायदा: यदि आपका कोई सरकारी काम लंबे समय से अटका हुआ था, तो वह अब पूरा हो जाएगा.
    – आर्थिक पक्ष: अचानक धन लाभ के योग बनेंगे. व्यापार में नए और लाभकारी सौदे हाथ लग सकते हैं.
    – सलाह: इस दौरान अपने सीनियर्स के साथ संबंध मधुर बनाए रखें, पदोन्नति (Promotion) के रास्ते खुलेंगे.


    2. सिंह राशि (Leo)

    – चूंकि सूर्य सिंह राशि के स्वामी हैं, इसलिए इस दशांक योग का सीधा और सकारात्मक प्रभाव आप पर पड़ेगा. आपके आत्मविश्वास में जबरदस्त वृद्धि देखने को मिलेगी.
    – फायदा: समाज और कार्यस्थल पर आपकी प्रतिष्ठा बढ़ेगी. आपकी नेतृत्व क्षमता (Leadership Quality) की लोग सराहना करेंगे.
    – आर्थिक पक्ष: निवेश के लिए यह समय बेहद उत्तम है. पुराना फंसा हुआ पैसा वापस मिल सकता है.
    – सलाह: अहंकार से बचें और अपनी ऊर्जा का सही दिशा में इस्तेमाल करें.


    3. तुला राशि (Libra)

    – तुला राशि वालों के लिए यह समय आर्थिक रूप से बेहद सुदृढ़ होने वाला है. अरुण ग्रह का प्रभाव आपके जीवन में कुछ सकारात्मक और अचानक बदलाव लेकर आएगा.
    – फायदा: नौकरीपेशा लोगों को नए अवसरों की प्राप्ति होगी. अगर आप नौकरी बदलने की सोच रहे हैं, तो अच्छे ऑफर मिल सकते हैं.
    – आर्थिक पक्ष: आय के नए स्रोत बनेंगे, जिससे आपकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी.
    – सलाह: कोई भी बड़ा वित्तीय फैसला जल्दबाजी में न लें, सोच-समझकर आगे बढ़ें.

    4. धनु राशि (Sagittarius)

    – धनु राशि के जातकों के लिए भाग्य का पूरा साथ मिलने का समय आ गया है. इस योग के प्रभाव से आपके सोचे हुए काम समय पर पूरे होंगे.
    – फायदा: उच्च शिक्षा या विदेश यात्रा की इच्छा रखने वाले छात्रों के लिए यह समय अनुकूल परिणाम लेकर आएगा.
    – आर्थिक पक्ष: पैतृक संपत्ति से लाभ होने की संभावना है. व्यापारिक यात्राएं सुखद और मुनाफेदार रहेंगी.
    – सलाह: अपने गुरु और बड़ों का आशीर्वाद लेकर ही किसी नए काम की शुरुआत करें.

  • जुलाई में बदलेंगी सूर्य, बुध और शुक्र की चाल, 4 राशियों के खुलेंगे तरक्की के रास्ते, इन्‍हें बरतनी होगी सावधानी

    जुलाई में बदलेंगी सूर्य, बुध और शुक्र की चाल, 4 राशियों के खुलेंगे तरक्की के रास्ते, इन्‍हें बरतनी होगी सावधानी


    नई दिल्ली। जुलाई 2026 का महीना ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस महीने सूर्य, बुध और शुक्र जैसे प्रमुख ग्रह अपनी राशि या चाल में परिवर्तन करेंगे, जबकि शनि पहले से ही वक्री अवस्था में रहेंगे। ज्योतिष के अनुसार, इन ग्रहों के गोचर का प्रभाव सभी 12 राशियों पर पड़ेगा। जहां कुछ राशियों के लिए यह समय प्रगति, आर्थिक लाभ और सफलता लेकर आ सकता है, वहीं कुछ राशि वालों को सोच-समझकर कदम उठाने की सलाह दी गई है।

    जुलाई में कब-कब होगा ग्रहों का गोचर
    द्रिक पंचांग के अनुसार, महीने की शुरुआत में 4 जुलाई को शुक्र सिंह राशि में प्रवेश करेंगे। शुक्र को सुख, प्रेम, वैभव और भौतिक सुविधाओं का कारक माना जाता है, इसलिए इस गोचर का प्रभाव इन क्षेत्रों में देखने को मिल सकता है।

    इसके बाद 16 जुलाई को सूर्य मिथुन राशि से निकलकर कर्क राशि में प्रवेश करेंगे। इस परिवर्तन को **कर्क संक्रांति** कहा जाता है, जिसका धार्मिक और ज्योतिषीय दोनों ही दृष्टि से विशेष महत्व है।

    वहीं, 24 जुलाई से बुध अपनी वक्री चाल समाप्त कर मार्गी हो जाएंगे। ज्योतिष मान्यता के अनुसार, इससे व्यापार, संचार, निर्णय क्षमता और बुद्धि से जुड़े कार्यों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। महीने के दौरान शनि देव भी कुंभ राशि में वक्री अवस्था में रहेंगे और अपनी धीमी गति से विभिन्न राशियों पर प्रभाव डालते रहेंगे।

    इन 4 राशियों को मिल सकते हैं शुभ परिणाम

    मेष राशि
    बुध और सूर्य का गोचर आर्थिक मामलों में नए अवसर प्रदान कर सकता है। नौकरी और व्यवसाय में सम्मान बढ़ने के संकेत हैं। नया कारोबार शुरू करने की योजना बना रहे लोगों के लिए समय अनुकूल माना जा रहा है। पारिवारिक जीवन भी सुखद रहने की संभावना है।

    सिंह राशि
    शुक्र और सूर्य का राशि परिवर्तन व्यक्तित्व में आकर्षण बढ़ा सकता है। नौकरीपेशा लोगों को नई जिम्मेदारियां या पदोन्नति मिलने के योग हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है और लंबे समय से रुके कार्य पूरे होने की संभावना है।

    तुला राशि
    ग्रहों का यह परिवर्तन करियर में उन्नति के नए अवसर दे सकता है। व्यापार से जुड़े लोगों को लाभ मिलने के संकेत हैं। स्वास्थ्य में भी पहले की तुलना में सुधार देखने को मिल सकता है।

    धनु राशि
    शनि की अनुकूल स्थिति और बुध के मार्गी होने से भाग्य का साथ मिलने की संभावना है। लंबी दूरी की यात्राएं लाभदायक साबित हो सकती हैं। कोर्ट-कचहरी से जुड़े मामलों में भी सकारात्मक परिणाम मिलने के संकेत हैं।

    इन राशियों को बरतनी होगी सावधानी

    मिथुन राशि
    इस महीने अचानक खर्च बढ़ सकते हैं, जिससे आर्थिक संतुलन प्रभावित हो सकता है। कार्यस्थल पर विवाद से बचें और अपनी वाणी पर संयम रखें।

    मकर राशि
    मानसिक तनाव बढ़ सकता है। स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही न बरतें और खान-पान पर विशेष ध्यान दें। पैसों के लेन-देन में सतर्कता बरतना बेहतर रहेगा।

    कुंभ राशि
    शनि की वक्री चाल के कारण कुछ कार्यों में रुकावट आ सकती है। वाहन चलाते समय अतिरिक्त सावधानी रखें। इस दौरान नया निवेश करने से बचने की सलाह दी गई है।

    मीन राशि
    पारिवारिक जीवन में गलतफहमियां उत्पन्न हो सकती हैं। कार्यस्थल पर वरिष्ठ अधिकारियों के साथ तालमेल बनाकर चलना लाभदायक रहेगा। धैर्य और संयम इस महीने आपकी सबसे बड़ी ताकत साबित हो सकते हैं।

  • सोने की अंगूठी पहनने का सही तरीका: राशि, उंगली और शुभ दिन जानिए

    सोने की अंगूठी पहनने का सही तरीका: राशि, उंगली और शुभ दिन जानिए


    नई दिल्ली ।भारतीय ज्योतिष में सोने को सिर्फ आभूषण नहीं बल्कि ग्रहों की सकारात्मक ऊर्जा को संतुलित करने वाली धातु माना जाता है। मान्यता है कि जब सोने की अंगूठी सही उंगली, उचित दिन और विधि से पहनी जाती है, तो यह जीवन में धन, सम्मान और मानसिक स्थिरता बढ़ाने में सहायक होती है। वहीं, गलत नियमों के साथ सोना पहनना विपरीत प्रभाव भी ला सकता है।

    कौन सी उंगली में सोना पहनना शुभ है?
    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अनामिका उंगली सूर्य तत्व का प्रतिनिधित्व करती है। इस उंगली में सोने की अंगूठी पहनने से प्रतिष्ठा आत्मविश्वास और कार्यक्षमता बढ़ती है। कुछ परंपराओं में कनिष्ठा छोटी उंगली में भी सोना पहनने की सलाह दी गई है।वही मध्यमा उंगली शनि से जुड़ी होने के कारण इसमें सोना पहनना तनाव और आर्थिक रुकावट ला सकता है। अंगूठे में सोना पहनना शुभ नहीं माना जाता क्योंकि यह चंद्रमा का संकेतक है।

    सोना पहनने के शुभ दिन

    धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार सोना पहनने के लिए गुरुवार सबसे उत्तम माना जाता है, क्योंकि यह बृहस्पति का दिन है। रविवार भी सूर्य से जुड़ा होने के कारण मान-सम्मान बढ़ाने वाला है। इसके अलावा, बुधवार और शुक्रवार सामान्यतः अनुकूल माने जाते हैं।

    सोने की अंगूठी पहनने की पारंपरिक विधि
    सोना पहनने से पहले उसका शुद्धिकरण आवश्यक माना गया है। अंगूठी को पहले गंगाजल या स्वच्छ जल में रखें फिर दूध और शहद से शुद्ध करें। इसके बाद अंगूठी को भगवान विष्णु या सूर्यदेव के सामने रखकर प्रार्थना करें और ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का 11 बार जाप करें। शुद्धिकरण के बाद इसे अनामिका उंगली में पहनें।
    राशियों के अनुसार अनुकूलता
    ज्योतिष के अनुसार, मेष, सिंह, कर्क, धनु और मीन राशि वाले सोना पहनने से शुभ फल प्राप्त करते हैं। जबकि वृषभ, मिथुन, मकर और कुंभ राशि वालों को बिना व्यक्तिगत कुंडली देखे सोना नहीं पहनना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतिम निर्णय हमेशा व्यक्तिगत कुंडली देखकर ही लेना चाहिए।

    सोना और ग्रहों का संबंध

    सोना मुख्य रूप से बृहस्पति ग्रह का प्रतिनिधित्व करता है, जो ज्ञान, धर्म, संतान और धन का कारक माना जाता है। कुछ मान्यताओं में यह सूर्य को भी बल देता है, जिससे आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता मजबूत होती है।

    धार्मिक दृष्टि से महत्व

    धार्मिक परंपराओं में सोना महालक्ष्मी का प्रतीक माना गया है। यह माना जाता है कि सोना धारण करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा, समृद्धि और शांति बनी रहती है। हालांकि किसी भी धातु या रत्न को धारण करने से पहले योग्य ज्योतिषाचार्य से परामर्श लेना अत्यंत लाभकारी होता है।