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  • मोहम्मद रफी के एक एवरग्रीन गाने ने पलट दी थी हिंदी सिनेमा की बाजी, धर्मेंद्र को मिला नया मुकाम तो फीका पड़ा राजेश खन्ना का जादू

    मोहम्मद रफी के एक एवरग्रीन गाने ने पलट दी थी हिंदी सिनेमा की बाजी, धर्मेंद्र को मिला नया मुकाम तो फीका पड़ा राजेश खन्ना का जादू

    नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के सुनहरे दौर में संगीतकारों, गायकों और अभिनेताओं के बीच की आपसी केमिस्ट्री ने कई बड़े सितारों के करियर की दिशा तय की है। सत्तर के दशक की शुरुआत में जब बॉलीवुड के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना बैक टू बैक 15 ब्लॉकबस्टर फिल्में देकर सफलता के शिखर पर थे, तब उनकी फिल्मों में पार्श्वगायन के लिए किशोर कुमार पहली पसंद बन चुके थे। अधिकांश बड़े संगीत निर्देशकों द्वारा किशोर दा को प्राथमिकता दिए जाने के कारण, उस दौर के दिग्गज गायक मोहम्मद रफी का करियर कुछ समय के लिए डगमगाने लगा था। लेकिन साल 1973 में आई एक फिल्म और उसके एक सदाबहार गीत ने फिल्म इंडस्ट्री के पूरे परिदृश्य को हमेशा के लिए बदलकर रख दिया।

    यह ऐतिहासिक बदलाव अभिनेता धर्मेंद्र की मुख्य भूमिका वाली फिल्म लोफर के माध्यम से देखने को मिला था। इस फिल्म में संगीतकार लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के निर्देशन में मोहम्मद रफी ने आज मौसम बड़ा बेईमान है गीत को अपनी जादुई आवाज दी थी। धर्मेंद्र और अभिनेत्री मुमताज पर फिल्माया गया यह रोमांटिक गीत रिलीज होते ही देश भर में एक बड़ा कल्ट क्लासिक साबित हुआ। इस एकल गीत की लोकप्रियता ने सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए और यह उस दौर से लेकर आज तक भारतीय सिनेमा के सबसे पसंदीदा सदाबहार रोमांटिक गानों की सूची में शीर्ष पर बना हुआ है।

    इस गाने की अभूतपूर्व सफलता ने मोहम्मद रफी के करियर को एक नई और बेहद मजबूत संजीवनी प्रदान करने का काम किया। इस जबरदस्त वापसी के बाद फिल्म जगत के तमाम दिग्गज संगीतकारों ने एक बार फिर रफी साहब की तरफ रुख करना शुरू कर दिया और उन्हें बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए साइन किया जाने लगा। वहीं दूसरी ओर, इस फिल्म की बड़ी कामयाबी ने अभिनेता धर्मेंद्र के पैर भी इंडस्ट्री में मजबूती से जमा दिए। लोफर की सफलता के बाद धर्मेंद्र को बड़े बैनर्स की फिल्मों के ढेरों ऑफर्स मिलने लगे, जिससे हिंदी सिनेमा में एक्शन और रोमांस का एक नया दौर शुरू हुआ।

    इस संगीत सफर में आए बदलाव का सीधा असर तत्कालीन सुपरस्टार राजेश खन्ना के करियर पर भी देखने को मिला। इसी कालखंड के दौरान फिल्म इंडस्ट्री का झुकाव राजेश खन्ना के रोमांटिक अंदाज से हटकर धर्मेंद्र और अमिताभ बच्चन की एंग्री यंग मैन और एक्शन इमेज की तरफ बढ़ने लगा था। साल 1975 में रिलीज हुई निर्देशक रमेश सिप्पी की ऐतिहासिक फिल्म शोले ने इस बदलाव पर अंतिम मुहर लगा दी थी। शोले में धर्मेंद्र और अमिताभ बच्चन की जोड़ी ने जो इतिहास रचा, उसने राजेश खन्ना के स्टारडम के दौर को काफी पीछे धकेल दिया और उनके करियर का ग्राफ तेजी से नीचे आने लगा।

    सिनेमाई विश्लेषकों के अनुसार, लोफर फिल्म का वह एक गाना महज एक हिट ट्रैक नहीं था, बल्कि वह बॉलीवुड में दो बड़े युगों के बीच का टर्निंग पॉइंट था। उसने जहां एक तरफ भारतीय संगीत के सबसे सुरीले गायक मोहम्मद रफी को उनका खोया हुआ सिंहासन वापस दिलाया, वहीं दूसरी तरफ धर्मेंद्र और अमिताभ बच्चन जैसे कलाकारों के लिए आगे का रास्ता साफ किया। यही कारण है कि आज भी जब हिंदी सिनेमा के सबसे प्रभावशाली गानों और गानों से बदलने वाली स्टार्स की किस्मत का जिक्र होता है, तो मोहम्मद रफी और धर्मेंद्र के इस जुगलबंदी को सबसे पहले याद किया जाता है।

  • मां बनने के 3 महीने बाद ग्लो के साथ लौटीं कैटरीना कैफ, चेहरे पर निखार देख फैंस रह गए दंग!

    मां बनने के 3 महीने बाद ग्लो के साथ लौटीं कैटरीना कैफ, चेहरे पर निखार देख फैंस रह गए दंग!


    नई दिल्ली। बॉलीवुड की चमकती हुई अभिनेत्री कैटरीना कैफ मां बनने के तीन महीने बाद पहली बार पब्लिक में नजर आईं और उनकी एक झलक ने फैंस का दिल जीत लिया। बेटे विहान कौशल के जन्म के बाद कैटरीना ने अपनी पर्सनल लाइफ में सादगी अपनाई और लाइमलाइट से दूरी बनाई थी। हाल ही में उन्हें मुंबई में कार के अंदर बैठे देखा गया, जहां उनका ग्लो, चेहरे की ताजगी और शांत अंदाज सभी का ध्यान खींच रहे थे। ब्लैक आउटफिट में कैटरीना ने पोनीटेल किया हुआ था और मास्क पहने हुए थीं, लेकिन उनकी आंखों की चमक और कैमरा की ओर प्यारा वेव देखते ही बन रहा था। सोशल मीडिया पर उनका यह वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, और पहली नजर में उन्हें पहचान पाना थोड़े मुश्किल था, लेकिन फैंस ने इस वीडियो को खूब पसंद किया।

    कैटरीना और उनके पति विक्की कौशल ने 7 नवंबर 2025 को अपने बेटे का स्वागत किया था। उन्होंने बेटे का नाम विहान कौशल रखा, जो कि विक्की की फिल्म ‘उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक’ के मेजर विहान सिंह शेरगिल से जुड़ा है। इस नाम का ऐलान उन्होंने फैंस के साथ इमोशनल अंदाज में साझा किया और लिखा, “हमारी जिंदगी की रोशनी, विहान कौशल। हमारी दुआएं कबूल हो गईं। जिंदगी अब और भी खूबसूरत लग रही है। एक पल में हमारी पूरी दुनिया बदल गई है। हम शब्दों में अपनी खुशी और शुक्रिया बयां नहीं कर सकते।” इस खास कनेक्शन और इमोशनल मैसेज ने फैंस को बेहद प्रभावित किया और सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

    डिलीवरी के तीन महीने बाद कैटरीना का ग्लो और चेहरे का निखार सभी को आकर्षित कर रहा है। मां बनने के बाद भी उनका आत्मविश्वास, शांत और खूबसूरत अंदाज सोशल मीडिया पर छाया हुआ है। इस दौरान कैटरीना ने अपने समय का बड़ा हिस्सा परिवार और बच्चे पर केंद्रित रखा, लेकिन धीरे-धीरे फैंस के साथ जुड़ने के लिए छोटे-छोटे पब्लिक अपीयरेंस और व्लॉग्स भी शेयर कर रही हैं। उनका यह ग्लो और चेहरे की ताजगी दर्शाती है कि मां बनने के बाद भी उन्होंने अपनी फिटनेस, स्ट्रेंथ और चमक को बनाए रखा है।

    विक्की कौशल ने भी पिता बनने का अनुभव साझा करते हुए बताया कि वह सिर्फ एक चीयरलीडर बनने की कोशिश कर रहे हैं और बच्चे के बड़े होने का इंतजार कर रहे हैं ताकि वे और अधिक योगदान कर सकें। उन्होंने कैटरीना की तारीफ करते हुए कहा, “अभी इस समय मां ही असली सुपरहीरो है। उसने पूरी प्रेग्नेंसी के दौरान बहुत हिम्मत दिखाई और अब मां बनकर भी हर चीज़ पूरी ताकत से संभाल रही है। मुझे उस पर बहुत गर्व है और मैं उससे बहुत प्यार करता हूं।” यह बयान इस कपल की मजबूत बॉन्डिंग और पारिवारिक प्यार की झलक देता है।

    कैटरीना का यह पहला पब्लिक अपीयरेंस सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और फैंस उनकी मां बनने के बाद की खूबसूरती और ग्लैमरस अंदाज पर तारीफों की बरसात कर रहे हैं। मां बनने के बाद भी उनकी सादगी, ग्लो और आत्मविश्वास ने साबित कर दिया कि कैटरीना कैफ केवल फिल्मों में ही नहीं बल्कि असली जिंदगी में भी एक सुपरस्टार हैं। उनके फैंस बेसब्री से उनके अगले अपडेट, व्लॉग्स और बेटे विहान के साथ उनकी जिंदगी की झलक का इंतजार कर रहे हैं।

  • Hrithik Roshan: बचपन में हकलाने की समस्या, 21 की उम्र में गंभीर बीमारी, चुनौतियों से पार पाकर बने सुपरस्टार

    Hrithik Roshan: बचपन में हकलाने की समस्या, 21 की उम्र में गंभीर बीमारी, चुनौतियों से पार पाकर बने सुपरस्टार

    नई दिल्‍ली ।  ऋतिक रोशन का जन्म 10 जनवरी 1974 को मुंबई में हुआ था। उनकी गिनती हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के सबसे प्रतिभाशाली अभिनेताओं में होती। अपने बेहतरीन अभिनय, डांस की खास शैली और दिलकश लुक्स की वजह से वह लाखों दिलों पर राज करते हैं। हालांकि, उनकी सफलता की कहानी सिर्फ चमक-दमक और स्टाइल से जुड़ी नहीं है। फिल्मों से कदम रखन से पहले उनके संघर्ष की कहानी कई लोगों के लिए प्रेरणा का काम कर सकती है।
    फिल्म परिवार से रखते हैं ताल्लुक
    ऋतिक रोशन का जन्म एक फिल्मी परिवार में हुआ था। उनके पिता राकेश रोशन बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता और फिल्म निर्माता हैं। वहीं, उनकी मां पिंकी रोशन, एक गृहिणी हैं। उनके दादा, रोशनलाल नागरथ भी संगीतकार थे। उनके चाचा राजेश रोशन भी संगीतकार हैं। राकेश की फिल्मों का संगीत वह ही तैयार करते हैं।
    बचपन में कई चुनौतियों का किया सामना
    फिल्मी परिवार से ताल्लुक रखने के बावजूद ऋतिक का बचपन काफी संघर्षों के साथ गुजरा। वह हकलाने की समस्या से जूझते थे, जिसके कारण वह लोगों के बीच बोलने में संकोच करते थे। इसके अलावा वह अपने हाथ के अतिरिक्त अंगूठे की वजह से काफी खराब महसूस करते थे। स्कूल के दोस्त उनका मजाक उड़ाया करते थे। पहली फिल्म में नजर आने से पहले वह अपने इस अंगूठे को कटवाना चाहते थे, लेकिन मां की सलाह के बाद उन्होंने ऐसा नहीं किया।
    21 साल की उम्र में हुई गंभीर बीमारी
    ऋतिक एक और गंभीर शारीरिक समस्या का सामना कर चुके हैं। 21 साल की उम्र में उन्हें स्कोलियोसिस नामक बीमारी का पता चला, जिसमें रीढ़ की हड्डी में घुमाव होता है और यह व्यक्ति की शारीरिक गतिविधियों को प्रभावित करता है। डॉक्टर ने यह तक कह दिया था कि वह कभी डांस नहीं कर सकते। हालांकि, ऋतिक ने अपनी मेहनत और समर्पण से इस बीमारी पर भी जीत हासिल की और बॉलीवुड के सबसे बेहतरीन डांसर्स में अपनी जगह बनाई।
    चुनौतियों से पार पाकर बने सुपरस्टार
    ऋतिक रोशन ने 2000 में कहो न प्यार है से हिंदी सिनेमा में कदम रखा। इस फिल्म ने उन्हें स्टार बना दिया और वह रातों-रात लाखों दिलों की धड़कन बन गए। उनकी आकर्षक पर्सनालिटी, कड़ी मेहनत और डांस स्टाइल ने दर्शकों को अपना दीवाना बना लिया। इस फिल्म की सफलता ने उन्हें बॉलीवुड के शीर्ष अभिनेताओं में जगह दिलाई।
    इस फिल्म में जल्द आएंगे नजर
    इसके बाद उन्होंने कई सुपरहिट फिल्मों में अभिनय किया, जिनमें, धूम 2, जिंदगी ना मिलेगी दोबारा, वॉर, और सुपर 30 जैसी फिल्मों का नाम प्रमुख है। उनकी फिल्मों में न सिर्फ उनके अभिनय का जादू देखने को मिला, बल्कि उन्होंने अपने डांस और स्टाइल से भी करोड़ों लोगों को अपना प्रशंसक बनाया। मौजूदा समय में वह वॉर 2 में काम कर रहे हैं। इस फिल्म का निर्देशन अयान मुखर्जी कर रहे हैं। फिल्म इस साल स्वतंत्रता दिवस के आस-पास रिलीज हो सकती है।
  • कौन है बॉलीवुड का सबसे पढ़ा-लिखा खान: सलमान, शाहरुख या आमिर?

    कौन है बॉलीवुड का सबसे पढ़ा-लिखा खान: सलमान, शाहरुख या आमिर?


    नई दिल्ली। बॉलीवुड के तीन दिग्गज खानों-सलमान खान, शाहरुख खान और आमिर खान-को लेकर अक्सर सवाल उठते हैं कि इनमें से कौन सबसे ज्यादा पढ़ा-लिखा है। आइए जानते हैं उनके शैक्षणिक सफर के बारे में। सलमान खान का जन्म 1965 में हुआ। उन्होंने अपने शुरुआती साल ग्वालियर के द सिंधिया स्कूल में बिताए और बाद में मुंबई के सेंट स्टैनिस्लास हाई स्कूल से पढ़ाई पूरी की। हालांकि सलमान ने कॉलेज की पढ़ाई पूरी नहीं की और 23 साल की उम्र में एक्टिंग करियर शुरू कर दिया। उनका पहला फिल्म प्रोजेक्ट 1988 की बीवी हो तो ऐसी में सपोर्टिंग रोल था और इसके बाद 1989 में सूरज बड़जात्या की मैंने प्यार किया में उन्होंने लीड रोल निभाया।

    शाहरुख खान की पढ़ाई थोड़ी अलग रही। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज से इकोनॉमिक्स में बैचलर ऑफ आर्ट्स ऑनर्स की पढ़ाई की। हालांकि अपनी डिग्री उन्होंने साल 2016 में ही प्राप्त की क्योंकि वह खुद जाकर डिग्री लेना चाहते थे। शाहरुख ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी IIT में इंजीनियरिंग करने के लिए एंट्रेंस एग्जाम भी दिया और पास हुए, लेकिन उन्होंने IIT में दाखिला लेने के बजाय जामिया मिलिया इस्लामिया से मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री शुरू की। हालांकि इस कोर्स को उन्होंने बीच में ही छोड़ दिया।

    आमिर खान ने स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद मुंबई के प्रतिष्ठित नरसी मोंजी कॉलेज ऑफ कॉमर्स एंड इकोनॉमिक्स में दाखिला लिया। यहाँ उन्होंने दो साल तक इकोनॉमिक्स, बिजनेस स्टडीज और फाइनेंशियल अकाउंटिंग के लेक्चर अटेंड किए। इसके बाद उन्होंने कॉलेज छोड़ दिया और फिल्म उद्योग में कदम रखा। आमिर ने नासिर हुसैन के तहत असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में काम शुरू किया और फिर बॉलीवुड में डेब्यू किया।

    इन तीनों खानों की पढ़ाई के आधार पर देखा जाए तो सलमान खान ने सबसे कम पढ़ाई की है, जबकि आमिर खान ने कॉलेज तक पढ़ाई पूरी की लेकिन उसे बीच में छोड़ दिया। शाहरुख खान पढ़ाई के मामले में सबसे आगे हैं, उन्होंने बैचलर की डिग्री पूरी की और आईआईटी की परीक्षा भी पास की। हालांकि उन्होंने मास्टर डिग्री पूरी नहीं की, फिर भी उनकी शिक्षा का स्तर अन्य दो खानों की तुलना में ज्यादा माना जाता है।इस प्रकार, शाहरुख खान को बॉलीवुड का सबसे ज्यादा पढ़ा-लिखा खान कहा जा सकता है। वहीं सलमान और आमिर ने अपने करियर की सफलता के लिए पढ़ाई के रास्ते को जल्दी छोड़ दिया और फिल्म इंडस्ट्री में अपना नाम बनाया। यह साबित करता है कि पढ़ाई और करियर की राह हमेशा एक जैसी नहीं होती; कुछ लोग शिक्षा पूरी करके भी बॉलीवुड में चमकते हैं, तो कुछ अपने हुनर से सफलता हासिल करते हैं।

  • गोविंदा का जन्मदिन स्पेशल बॉलीवुड से राजनीति तक गोविंदा का रंगीन सफर

    गोविंदा का जन्मदिन स्पेशल बॉलीवुड से राजनीति तक गोविंदा का रंगीन सफर

    नई दिल्ली ।मुंबई बॉलीवुड के सुपरस्टार गोविंदा आज भी फिल्मों और डांस के मामले में अपनी अलग पहचान बनाए हुए हैं।उनका नाम आते ही दिमाग में एक ही बात आती है कॉमेडी डांस और शानदार अभिनय। गोविंदा का असली नाम गोविंदा आहूजा है और उनका जन्म 21 दिसंबर 1963 को मुंबई महाराष्ट्र में हुआ।वह बॉलीवुड के सबसे सफल और चर्चित अभिनेताओं में से एक हैं जिनका करियर अब तक कई दशकों तक चला है। 
    गोविंदा ने अपने करियर की शुरुआत 1986 में फिल्म इल्जाम से की थी जिसमें उनके साथ नीलम शशि कपूर और शत्रुघ्न सिन्हा जैसे सितारे थे। लेकिन उन्होंने अपनी पहचान कॉमेडी हीरो के रूप में बनाई और उनकी फिल्में दर्शकों के दिलों में हमेशा के लिए बसी रही। उनके फनी अंदाज बेहतरीन टाइमिंग और कॉमिक सीन ने उन्हें हर वर्ग के दर्शकों के बीच लोकप्रिय बना दिया।

    सुपरहिट फिल्में और डांस आइकन
    गोविंदा की फिल्मों का जादू आज भी लोगों के दिलों में बसा हुआ है। उनकी फिल्मों जैसे राजा बाबू आंखें कुली नंबर वन आंदोलन बड़े मियां छोटे मियां दीवाना मस्ताना दुल्हे राजा अनाड़ी नंबर 1 शोला और शबनम राजा भैया जोरू का गुलाम हीरो नंबर 1 बेटी नंबर 1 और घर घर की कहानी ने बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाया।इन फिल्मों में उनका अभिनय हास्य और शानदार डांस स्टाइल ने उन्हें दर्शकों का सबसे पसंदीदा स्टार बना दिया।

    गोविंदा का डांस भी कमाल का था।उनके डांस नंबर जैसे किसी डिस्को में जाएं सोना कितना सोना है तुझको ही दुल्हन बनाऊंगा और जोरू का गुलाम आज भी पार्टी और डांस के इवेंट्स में गाए जाते हैं।उनकी एनर्जी और स्टाइल ने उन्हें 90 और 2000 के दशक में डांस आइकन बना दिया। उनके डांस स्टेप्स और चुलबुले अंदाज को आज भी हर डांसर फॉलो करता है।

    राजनीतिक सफर

    गोविंदा का फिल्मी करियर ही नहीं उनकी राजनीतिक यात्रा भी उतनी ही दिलचस्प रही है। 2004 में गोविंदा ने राजनीति में कदम रखा और मुंबई उत्तर निर्वाचन क्षेत्र से भारतीय संसद के सदस्य के रूप में सेवा दी। वह कांग्रेस पार्टी से जुड़े और इस पार्टी के तहत उन्होंने 2004 से 2009 तक लोकसभा में अपनी भूमिका निभाई। फिल्मों और राजनीति के बीच अपने करियर को संतुलित करते हुए गोविंदा ने यह साबित किया कि वह सिर्फ एक अभिनेता नहीं बल्कि एक नेता भी हैं जो जनता की सेवा करना चाहते हैं। बाद में उन्होंने शिवसेना से जुड़ने का फैसला किया और पार्टी के साथ सक्रिय भूमिका निभाई। गोविंदा को उनके समर्थक उनकी ईमानदारी और मेहनत के लिए सराहते हैं।

    गोविंदा का व्यक्तित्व और विरासत

    गोविंदा का करियर आज भी दर्शकों के दिलों में जिंदा है। उनका व्यक्तित्व और फिल्मों में किया गया काम उन्हें हमेशा याद दिलाता रहेगा। चाहे वह उनकी अनोखी कॉमिक टाइमिंग हो या फिर उनका अद्भुत डांस स्टाइल गोविंदा ने बॉलीवुड को ऐसी विरासत दी है जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकेगा। आज भी वह एक प्रेरणा बने हुए हैं खासकर युवा पीढ़ी के लिए। उनकी कड़ी मेहनत ईमानदारी और कड़ी मेहनत ने उन्हें केवल एक अभिनेता ही नहीं बल्कि एक आदर्श भी बना दिया है।

    गोविंदा का बॉलीवुड से राजनीति तक का सफर रंगीन शानदार और प्रेरणादायक रहा है। उनका करियर हर किसी के लिए एक मिसाल है कि अगर आप मेहनत करें और दिल से अपने काम को प्यार करें तो सफलता मिलनी तय है। गोविंदा को उनके जन्मदिन पर ढेर सारी शुभकामनाएं और आगे आने वाले दिनों में और अधिक सफलता की कामना।

  • जब अमिताभ बच्चन ने मीडिया को बायकॉट कर दिया था: बिना नाम के छपते थे उनकी फिल्मों के रिव्यू

    जब अमिताभ बच्चन ने मीडिया को बायकॉट कर दिया था: बिना नाम के छपते थे उनकी फिल्मों के रिव्यू


    नई दिल्ली । बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन ने न केवल अपनी शानदार एक्टिंग से करोड़ों दिलों को जीता बल्कि एक समय ऐसा भी आया था जब उन्होंने मीडिया से दूरी बना ली थी। यह घटना उनके करियर के सबसे शानदार दौर के दौरान घटी जब अमिताभ की फिल्में बॉक्स ऑफिस पर हिट हो रही थीं और वह बॉलीवुड के सुपरस्टार बन चुके थे। फिर भी उन्होंने मीडिया को बायकॉट करने का फैसला किया था।

    मीडिया से दूरी का कारण
    अमिताभ बच्चन ने मीडिया से इस समय दूरी बना ली थी जब वह अपनी फिल्मों शोले दीवार और त्रिशूल जैसी हिट फिल्मों के साथ दर्शकों के दिलों में अपनी जगह बना चुके थे। मीडिया में उनके बारे में नकारात्मक रिपोर्ट्स और अफवाहों की भरमार थी। इन अफवाहों के चलते अमिताभ ने मीडिया से संवाद कम कर दिया था। यह स्थिति उस समय के जर्नलिस्टों और फिल्म समीक्षकों के लिए चौंकाने वाली थी क्योंकि उनकी फिल्मों के रिव्यू अब उनके नाम के बिना ही छपने लगे थे।

    तरन आदर्श का बयान
    हाल ही में फिल्म ट्रेड एनालिस्ट और जर्नलिस्ट तरन आदर्श ने इस मुद्दे पर ANI से बात की। उन्होंने कहा किसी भी जर्नलिस्ट के पास यह ताकत नहीं है कि वह किसी स्टार को बना दे या गिरा दे। अमिताभ बच्चन ने अपने करियर के सबसे अच्छे दौर में मीडिया को बायकॉट कर दिया था और इसके बावजूद वह अपनी पहचान बनाने में सफल रहे। तरन आदर्श ने यह भी बताया कि उस समय अमिताभ की हिट फिल्मों का रिव्यू बिना उनके नाम के ही छपता था जो इस बात का प्रमाण है कि उनके काम से ही लोग जुड़े थे न कि मीडिया की कवरेज से।
    अमिताभ का सुपरस्टार बनने का सफर
    अमिताभ बच्चन का करियर फिल्म इंडस्ट्री में असाधारण रहा है। चाहे वह शोले जैसी क्लासिक फिल्म हो या दीवार और त्रिशूल जैसी हिट फिल्में उनके अभिनय ने भारतीय सिनेमा के मानक को नया रूप दिया। हालांकि मीडिया के बायकॉट के बावजूद वह सफलता की सीढ़ी चढ़ते गए। उनकी अभिनय क्षमता और पर्दे पर उनकी मौजूदगी ने उन्हें दर्शकों के बीच एक अद्वितीय स्थान दिलाया। इस समय के बाद भी अमिताभ का करियर एक लंबी यात्रा पर चलता रहा और वह आज भी बॉलीवुड के सबसे बड़े सितारों में से एक माने जाते हैं।
    मीडिया और अमिताभ बच्चन का रिश्ता
    मीडिया और अमिताभ बच्चन के रिश्ते में एक वक्त ऐसा भी आया जब दोनों के बीच विवाद गहरा गया था। लेकिन फिल्म कुली के सेट पर हुए एक खतरनाक एक्सीडेंट के बाद यह संबंध कुछ बेहतर हुए। इसके बाद जब अमिताभ ने 1984 में राजनीति में कदम रखा और चुनाव लड़ा तो मीडिया ने अहम भूमिका निभाई। यह समय था जब अमिताभ और मीडिया के रिश्ते में सुधार हुआ।
    जया बच्चन का विरोध
    हालांकि आज भी अमिताभ और मीडिया के रिश्ते में कोई खास समस्या नहीं है लेकिन उनकी पत्नी जया बच्चन का मीडिया से कुछ अलग नजरिया है। हाल में जया ने पापराजी कल्चर का खुलकर विरोध किया था और कहा था कि यह स्टार्स के निजी जीवन में हस्तक्षेप करने की हद से आगे बढ़ चुका है। अमिताभ और मीडिया के रिश्ते की यह जटिल कहानी इस बात को दर्शाती है कि कैसे एक अभिनेता अपने काम और व्यक्तित्व के साथ पूरी दुनिया को प्रभावित कर सकता है भले ही वह मीडिया के साथ नहीं हो।