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  • OTT पर रिलीज हुई झाड़-फूंक, काले जादू और तंत्र विद्या की रहस्यमयी कहानी में छिपा अंधविश्वास का खतरनाक सच

    OTT पर रिलीज हुई झाड़-फूंक, काले जादू और तंत्र विद्या की रहस्यमयी कहानी में छिपा अंधविश्वास का खतरनाक सच

    नई दिल्ली । ओटीटी प्लेटफॉर्म पर हॉरर फिल्मों के शौकीनों के लिए झाड़-फूंक नाम की फिल्म रिलीज हुई है। 1 घंटे 53 मिनट की यह फिल्म काले जादू, तंत्र विद्या और अंधविश्वास जैसे विषयों पर आधारित है। फिल्म की कहानी में कुल पांच प्रमुख किरदार हैं और पूरी फिल्म की शूटिंग केवल एक घर में की गई है। सीमित किरदारों और एक ही स्थान पर आधारित कहानी के जरिए फिल्म डर और रहस्य का माहौल तैयार करने की कोशिश करती है।

    फिल्म की कहानी आस्था (सुंबुल तौकीर खान) और राजवीर के इर्द-गिर्द आगे बढ़ती है। आस्था गर्भवती है और राजवीर के साथ उत्तराखंड के जंगलों से होते हुए दिल्ली जा रही होती है। इसी दौरान उनकी कार दुर्घटनाग्रस्त हो जाती है। हादसे के बाद जब आस्था को होश आता है तो वह खुद को एक अनजान दंपती के बीच पाती है। यह घटना उसकी जिंदगी में एक अप्रत्याशित मोड़ लेकर आती है।

    मोहन ठाकुर (यशपाल शर्मा) और कामिनी ठाकुर (पद्मिनी कोल्हापुरे) आस्था को अपने घर ले आते हैं। शुरुआत में दोनों उसके प्रति काफी अपनापन और स्नेह दिखाते हैं। उनके व्यवहार से आस्था भी धीरे-धीरे उनसे जुड़ने लगती है। हालांकि, कहानी आगे बढ़ने के साथ मोहन ठाकुर के इरादों से जुड़े रहस्य सामने आने लगते हैं। जिस घर में आस्था को सहारा मिलता दिखाई देता है, वहीं धीरे-धीरे उसके सामने कई असामान्य परिस्थितियां पैदा होने लगती हैं।

    फिल्म में एक छोटे बच्चे का किरदार भी अहम है। बच्चा किसी अजीब खतरे से घिरा हुआ है। उसे उस स्थिति से बाहर निकालने के लिए मोहन ठाकुर काले जादू और तांत्रिक विद्या का सहारा लेता है। इसी घटनाक्रम के माध्यम से फिल्म में अंधविश्वास, रहस्यमयी गतिविधियों और तंत्र-मंत्र से जुड़े पहलुओं को दिखाया गया है। पांच किरदारों के बीच आगे बढ़ने वाली कहानी में घर का वातावरण और वहां होने वाली घटनाएं रहस्य को बनाए रखने का काम करती हैं।

    फिल्म की शुरुआत प्रभावशाली है। शुरुआती हिस्से में डर और रहस्य का माहौल दर्शकों का ध्यान खींचता है। कहानी जिस तरह आगे बढ़ती है, उससे घटनाओं के पीछे छिपे सच को जानने की उत्सुकता पैदा होती है। हालांकि, फिल्म जैसे-जैसे क्लाइमेक्स की तरफ बढ़ती है, उसका डराने वाला प्रभाव कम होने लगता है। शुरुआत में जो घटनाएं रोमांच पैदा करती हैं, आगे चलकर उनका असर उतना मजबूत नहीं रह जाता।

    फिल्म का कॉन्सेप्ट दिलचस्प है, लेकिन कहानी के अंतिम हिस्से में रोमांच बनाए रखने में कमी दिखाई देती है। इसका क्लाइमेक्स भी अपेक्षाकृत कमजोर और साधारण महसूस होता है। संगीत की बात करें तो इसमें एक रोमांटिक गाना शामिल किया गया है। इसके अलावा बैकग्राउंड म्यूजिक के माध्यम से डर और रहस्य का वातावरण बनाने की कोशिश की गई है। शुरुआती हिस्से में इसका प्रभाव बेहतर दिखाई देता है, लेकिन आगे चलकर कहानी की गति और डर का स्तर कमजोर पड़ता है।

    फिल्म का निर्देशन राजन वर्मा ने किया है। वह इसके लेखक और निर्माता भी हैं। उन्हें जीसस जोरदार, धमन: द सेवियर और पानी: एक प्रेम कहानी जैसी फिल्मों के लिए जाना जाता है। फिल्म के अंत में अंधविश्वास को लेकर एक सामाजिक संदेश दिया गया है। कहानी यह दिखाने की कोशिश करती है कि अंधविश्वास के प्रभाव में आकर लोग किस तरह गलत फैसले ले सकते हैं और इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। फिल्म के माध्यम से यह बात भी सामने रखी गई है कि भारत में अंधविश्वास के कारण कई लोगों की जान तक चली जाती है।

    कुल मिलाकर झाड़-फूंक में हॉरर, रहस्य, काला जादू और तंत्र विद्या को एक सीमित कहानी के भीतर पेश किया गया है। इसकी शुरुआत और विषय दर्शकों की रुचि जगा सकते हैं, हालांकि कमजोर क्लाइमेक्स और बाद के हिस्से में कम होता डर फिल्म के प्रभाव को सीमित करता है। अंधविश्वास पर आधारित हॉरर कहानियां पसंद करने वाले दर्शक इसे देखने पर विचार कर सकते हैं।

  • गड़े धन का लालच बना मौत का जाल! MP में तंत्र-मंत्र के नाम पर हत्या, नरबलि और करोड़ों की ठगी का काला खेल

    गड़े धन का लालच बना मौत का जाल! MP में तंत्र-मंत्र के नाम पर हत्या, नरबलि और करोड़ों की ठगी का काला खेल


    भोपाल । रातों-रात अमीर बनने का सपना, खेतों में दबे खजाने की कहानियां और तंत्र-मंत्र के जरिए अकूत संपत्ति मिलने का झांसा आज भी लोगों को अंधविश्वास की ऐसी अंधेरी दुनिया में धकेल रहा है, जहां अंत अक्सर हत्या, ठगी और बर्बादी के रूप में होता है। मध्य प्रदेश में हाल के दिनों में सामने आए कई मामलों ने यह साबित कर दिया है कि गड़े धन का मिथक अब केवल अफवाह नहीं, बल्कि संगठित अपराध और अंधविश्वास का खतरनाक हथियार बन चुका है।

    भोपाल के सूखी सेवनिया इलाके में एक पिता ने कथित तांत्रिक के बहकावे में आकर अपनी 17 वर्षीय बेटी की हत्या कर दी। तांत्रिक ने दावा किया था कि खेत में दबे खजाने तक पहुंचने के लिए लड़की की बलि जरूरी है। पिता ने बेटी की हत्या कर शव खेत में दफना दिया। कई महीने बाद जब खेत की जुताई हुई तो कंकाल मिलने से पूरे मामले का खुलासा हुआ।

    रायसेन जिले में भी गड़े धन की तलाश एक व्यापारी की जिंदगी पर भारी पड़ गई। कथित तांत्रिक ने करोड़ों के खजाने का लालच देकर पूजा कराई और फिर नरबलि की बात कहकर व्यापारी की हत्या कर शव रेत में दफना दिया। पुलिस जांच में यह सनसनीखेज वारदात सामने आई।

    बालाघाट में एक तांत्रिक के कहने पर 11 लोग एक महिला के घर में गड़ा धन तलाशने घुस गए। महिला के जागने पर उस पर चाकू से हमला कर दिया गया। हालांकि आरोपियों को कोई खजाना नहीं मिला और वे घर का सामान लूटकर फरार हो गए। पुलिस ने बाद में गिरोह के कई सदस्यों को गिरफ्तार किया।

    मंदसौर में भी कथित तांत्रिकों ने किसान को नोटों की बारिश और गड़ा धन निकालने का सपना दिखाकर करीब 12 लाख रुपये ठग लिए। पूजा-पाठ, भूत-प्रेत और नरबलि का डर दिखाकर लगातार पैसे वसूले जाते रहे। आखिरकार जब नोटों की गड्डियों में असली मुद्रा की जगह छोटे नोट निकले तो पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ।

    राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़े भी इस गंभीर समस्या की पुष्टि करते हैं। वर्ष 2024 में देशभर में टोना-टोटका से जुड़ी 54 हत्याएं दर्ज की गईं, जिनमें अकेले मध्य प्रदेश में 17 मामले सामने आए। इस तरह अंधविश्वास से जुड़ी हत्याओं के मामलों में प्रदेश देश में पहले स्थान पर है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि प्राचीन समय में युद्ध के दौरान लोग अपनी संपत्ति जमीन में छिपा देते थे। समय के साथ यह मान्यता बन गई कि ऐसे खजानों की रक्षा अदृश्य शक्तियां करती हैं और विशेष तांत्रिक क्रियाओं से ही उन्हें प्राप्त किया जा सकता है। लेकिन शास्त्रों में तंत्र-मंत्र से गड़ा धन निकालने, नोटों की बारिश कराने या रातों-रात अमीर बनने का कोई प्रमाण नहीं मिलता। कथित तांत्रिक इसी अज्ञानता और लालच का फायदा उठाकर लोगों को अपने जाल में फंसाते हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे भ्रामक वीडियो और फर्जी दावों ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया है। ऐसे में जरूरत है कि लोग वैज्ञानिक सोच अपनाएं, अंधविश्वास से दूर रहें और किसी भी तरह के चमत्कार या गड़े धन के दावों पर भरोसा करने से पहले सतर्क रहें। क्योंकि खजाने की तलाश में उठाया गया एक गलत कदम कई परिवारों की जिंदगी हमेशा के लिए तबाह कर सकता है।

  • अंधविश्वास बना मौत की वजह? झाड़-फूंक के दौरान युवक की मौत, मौलवी पर बलि देने का आरोप

    अंधविश्वास बना मौत की वजह? झाड़-फूंक के दौरान युवक की मौत, मौलवी पर बलि देने का आरोप


    बाराबंकी। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। बुखार से पीड़ित एक युवक की कथित झाड़-फूंक के दौरान संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मृतक के परिजनों ने मौलवी पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि झाड़-फूंक के नाम पर युवक की जीभ काट दी गई, जिससे अत्यधिक रक्तस्राव हुआ और उसकी जान चली गई। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर जांच शुरू कर दी है।

    यह मामला टिकैतनगर थाना क्षेत्र के सिहोरिया गांव का है। मृतक की पहचान सुकई गौतम के रूप में हुई है। परिजनों के मुताबिक सुकई पिछले चार दिनों से तेज बुखार से पीड़ित था। इसी दौरान उसके एक परिचित ने इलाज के लिए खजुरी गांव के मौलवी गुल्ले हिदायत रसूल को बुलाने की सलाह दी। परिवार का कहना है कि मौलवी ने घर पहुंचकर युवक पर किसी प्रेत बाधा का साया होने की बात कही और झाड़-फूंक से उसे ठीक करने का दावा किया।

    परिजनों के अनुसार अगले दिन रात करीब आठ बजे मौलवी दोबारा घर पहुंचा और झाड़-फूंक शुरू की। उस समय परिवार के कुछ सदस्य गांव में ताजिया देखने गए हुए थे जबकि घर पर केवल सुकई और उसका भाई राजेश मौजूद थे। आरोप है कि इसी दौरान मौलवी ने युवक को नहलाया, फूल-पत्ती चढ़ाई, कुछ मंत्र पढ़े और ताबीज का पानी पिलाया। इसके बाद उसने धारदार हथियार से युवक की जीभ काट दी। परिजनों का आरोप है कि इस घटना के बाद मौलवी मौके से फरार हो गया।

    बताया गया कि युवक की चीख-पुकार सुनकर उसका भाई मौके पर पहुंचा और अन्य परिजनों को सूचना दी। परिवार ने तुरंत उसे अस्पताल ले जाने की कोशिश की, लेकिन रास्ते में ही अत्यधिक रक्तस्राव के कारण उसकी मौत हो गई।

    घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने आरोपी मौलवी गुल्ले बाबा उर्फ हिदायत रसूल को हिरासत में ले लिया है और उससे पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट सहित सभी वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    फिलहाल पुलिस ने स्पष्ट किया है कि परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों की सत्यता की जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फोरेंसिक जांच के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों और घटना की परिस्थितियों का स्पष्ट खुलासा हो सकेगा। पुलिस का कहना है कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर विधिक कार्रवाई की जाएगी।