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  • लखनऊ हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: कोर्ट की अनुमति बिना “अग्रिम जांच” वैध नहीं

    लखनऊ हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: कोर्ट की अनुमति बिना “अग्रिम जांच” वैध नहीं


    नई दिल्ली। लखनऊ उच्च न्यायालय पीठ ने एक अहम फैसले में कहा है कि किसी भी आपराधिक मामले में आगे की जांच (Further Investigation) शुरू करने से पहले अदालत की अनुमति लेना जरूरी है। बिना कोर्ट की मंजूरी की गई अग्रिम विवेचना को वैध नहीं माना जा सकता।यह फैसला जस्टिस Shree Prakash Singh की एकल पीठ ने सैयद मोहम्मद हमजा की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।

     कोर्ट ने क्या कहा?
    हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि:

    एक ही केस में दोबारा संज्ञान (Second Cognizance) लेना कानूनन स्वीकार्य नहीं है

    यदि ट्रायल पहले से चल रहा है, तो पुलिस को आगे की जांच से पहले अदालत की अनुमति लेनी होगी

    बिना अनुमति दाखिल की गई सप्लीमेंट्री चार्जशीट कानूनी सवालों के घेरे में आएगी

     पूरा मामला क्या था?
    वर्ष 2021 में अंबेडकरनगर में मामला दर्ज हुआ था

    शुरुआती चार्जशीट में हत्या की धारा नहीं लगाई गई थी

    बाद में पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर धारा 302 और 201 IPC जोड़ते हुए सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल कर दी गई

    याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि:

    आगे की विवेचना से पहले ट्रायल कोर्ट से अनुमति नहीं ली गई

    यह सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों के खिलाफ है
     सरकार ने क्या माना?
    सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से यह स्वीकार किया गया कि:

    एसपी के निर्देश पर आगे की जांच हुई

    लेकिन ट्रायल कोर्ट से पूर्व अनुमति नहीं ली गई थी

    इसके बाद हाई कोर्ट ने:

    29 अप्रैल 2023 की सप्लीमेंट्री चार्जशीट

    3 फरवरी 2026 का सेकेंड कॉग्निजेंस ऑर्डर

    13 फरवरी 2026 का डिस्चार्ज ऑर्डर

     तीनों को निरस्त कर दिया।

    फैसले का महत्व
    यह निर्णय इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि इससे:

    पुलिस जांच प्रक्रिया में न्यायिक निगरानी मजबूत होगी

    एक ही केस में बार-बार कार्रवाई पर रोक लगेगी

    आरोपी के कानूनी अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी

    हालांकि कोर्ट ने यह भी कहा कि जांच एजेंसियां कानून के मुताबिक दोबारा उचित प्रक्रिया अपनाकर कार्रवाई कर सकती हैं।