Tag: Supplements

  • हेल्दी डाइट के नाम पर इन पोषण संबंधी धारणाओं पर आंख मूंदकर भरोसा न करें, गलत तरीके से अपनाने पर फायदे की जगह नुकसान हो सकता है

    हेल्दी डाइट के नाम पर इन पोषण संबंधी धारणाओं पर आंख मूंदकर भरोसा न करें, गलत तरीके से अपनाने पर फायदे की जगह नुकसान हो सकता है


    नई दिल्ली । शरीर को दिनभर अच्छे तरीके से काम करते रहने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है, जो हमें भोजन से प्राप्त होती है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को ऐसा भोजन करने की सलाह देते हैं, जो न सिर्फ शरीर को ताकत दे, बल्कि पोषक तत्वों से भी भरपूर हो।

    आहार को लेकर अक्सर हमारे मन में कई सारे सवाल रहते हैं। सुबह खाली पेट क्या पीना चाहिए, कौन-सा फल कब खाना चाहिए, कार्बोहाइड्रेट पूरी तरह छोड़ देना चाहिए या रात में खाना खाने से मोटापा बढ़ेगा? स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं कि स्वस्थ आहार के चार आधार हैं, पर्याप्तता, संतुलन, सीमित मात्रा और विविधता। यानी सिर्फ एक चीज को डाइट में जोड़ लेना या किसी एक खाद्य पदार्थ को पूरी तरह हटा देना स्वस्थ खानपान की गारंटी नहीं है।

    एक और बड़ा भ्रम यह भी है कि जो चीज प्राकृतिक हैं, वह हर व्यक्ति के लिए सुरक्षित और फायदेमंद भी होगी। ऐसे में हेल्दी डाइट के नाम पर अपनाई जा रही कुछ धारणाओं को समझना जरूरी है, ताकि फायदे की जगह नुकसान से बचा जा सके।

    शरीर के पोषण का रखें ध्यान

    लोगों को सही खानपान और संतुलित आहार के महत्व के बारे में जागरूक करने के उद्देश्य से हर साल 1 से 7 सितंबर तक राष्ट्रीय पोषण सप्ताह मनाया जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं कि अच्छा स्वास्थ्य केवल भरपेट खाने से नहीं, बल्कि शरीर को नियमित रूप से सही पोषक तत्व जैसे विटामिन्स, प्रोटीन और खनिज मिलने से बनता है।

    हमारे समाज में खान-पान को लेकर कई तरह की धारणाएं और मिथक प्रचलित हैं, जिनका लोग बिना पूरी जानकारी के पालन करते हैं। इनमें कार्बोहाइड्रेट, फलों और सप्लीमेंट्स से जुड़ी धारणाएं प्रमुख हैं।

    मिथ: कार्बोहाइड्रेट का मतलब वजन बढ़ाने वाली चीज

    स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं कि कार्बोहाइड्रेट वाली चीजें सेहत के लिए आवश्यक हैं और इन्हें पूरी तरह वजन बढ़ाने वाला पोषक तत्व मानना सही नहीं है। कार्बोहाइड्रेट शरीर के लिए ऊर्जा का प्रमुख स्रोत है। समस्या कार्बोहाइड्रेट की मौजूदगी से ज्यादा उसके स्रोत से जुड़ी होती है।

    साबुत अनाज, दालें, फल और सब्जियों से मिलने वाले कार्बोहाइड्रेट शरीर को स्वस्थ रखने और काम करने की ऊर्जा देते हैं। वहीं अत्यधिक प्रोसेस्ड और मीठे खाद्य पदार्थों से मिलने वाला कार्बोहाइड्रेट लंबे समय में वजन और ब्लड शुगर लेवल बढ़ाने वाला हो सकता है।

    मिथ: फल जितना ज्यादा खाएंगे, उतना ज्यादा फायदा

    फलों को हेल्दी डाइट का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है, लेकिन इन्हें भी संतुलित मात्रा में ही खाना चाहिए। ज्यादा मात्रा में फलों के सेवन से भी नुकसान हो सकते हैं। 10 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को रोजाना कम से कम 400 ग्राम फल और सब्जियां खाने की सलाह दी जाती है। इससे अधिक मात्रा में कुछ फल वजन बढ़ने, शुगर और पाचन संबंधी दिक्कतें बढ़ाने वाले हो सकते हैं।

    मिथ: सप्लीमेंट्स से पूरी हो जाएगी पोषक तत्वों की कमी

    अच्छी सेहत पाने के लिए खुद से सप्लीमेंट लेना शुरू कर देना नुकसानदायक हो सकता है। सप्लीमेंट की जरूरत शरीर में पोषक तत्वों की कमी और चिकित्सकीय आवश्यकता के आधार पर तय की जाती है। खुद से कोई सप्लीमेंट शुरू करना कई बार फायदे से ज्यादा नुकसानदायक हो सकता है। पोषक तत्वों से भरपूर संतुलित आहार का सेवन शरीर की जरूरतें पूरी करने का अधिक सुरक्षित तरीका माना जाता है।

  • विटामिन D की कमी: जानिए किन लोगों को सप्लीमेंट, लेना है बेहद जरूरी

    विटामिन D की कमी: जानिए किन लोगों को सप्लीमेंट, लेना है बेहद जरूरी


    नई दिल्ली । आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली, लंबे समय तक घर या ऑफिस के अंदर रहना और कम धूप के संपर्क में आना शरीर में विटामिन D की कमी का बड़ा कारण बन रहा है। हैरानी की बात यह है कि धूप से भरपूर देश में भी बड़ी संख्या में लोग इस समस्या से प्रभावित हैं। विटामिन D हड्डियों की मजबूती, इम्यूनिटी और मांसपेशियों के स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी माना जाता है, लेकिन इसकी कमी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकती है।

    विशेषज्ञों के अनुसार कुछ लोगों में विटामिन D की कमी का खतरा अधिक होता है और उन्हें सप्लीमेंट की जरूरत पड़ सकती है। सबसे पहले वे लोग जो ज्यादातर समय घर या ऑफिस के अंदर रहते हैं और जिनकी त्वचा पर पर्याप्त धूप नहीं पड़ती। इसके अलावा गहरी त्वचा (डार्क स्किन) वाले लोगों में भी यह कमी अधिक देखी जाती है क्योंकि उनकी त्वचा में मेलेनिन अधिक होने से विटामिन D बनने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है।

    50 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों में भी विटामिन D बनाने की क्षमता कम हो जाती है, जिससे हड्डियां कमजोर होने लगती हैं और जोड़ों में दर्द की समस्या बढ़ सकती है। वहीं मोटापे से ग्रस्त लोगों में यह विटामिन शरीर की फैट कोशिकाओं में फंस जाता है, जिससे इसकी उपलब्धता कम हो जाती है। गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को भी इसकी अधिक आवश्यकता होती है क्योंकि इस दौरान शरीर की जरूरतें बढ़ जाती हैं।

    शाकाहारी या वीगन लोगों में भी विटामिन D की कमी आम है क्योंकि इसके प्रमुख प्राकृतिक स्रोत जैसे मछली और अंडे उनके आहार में शामिल नहीं होते। इसके अलावा किडनी या पाचन संबंधी रोगों से पीड़ित लोगों में भी शरीर विटामिन D को सही तरीके से अवशोषित नहीं कर पाता, जिससे कमी की संभावना बढ़ जाती है।

    विटामिन D की कमी के लक्षणों में लगातार थकान, हड्डियों और जोड़ों में दर्द, मांसपेशियों में कमजोरी, बाल झड़ना, बार-बार बीमार पड़ना और मूड स्विंग शामिल हैं। लंबे समय तक कमी रहने पर यह हड्डियों को कमजोर कर सकता है और इम्यून सिस्टम को प्रभावित कर सकता है।

    विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सुबह या दिन के समय थोड़ी देर धूप लेना, आहार में मशरूम, फोर्टिफाइड दूध, अंडे की जर्दी और अन्य पोषक खाद्य पदार्थ शामिल करना फायदेमंद हो सकता है। हालांकि सप्लीमेंट लेने से पहले ब्लड टेस्ट और डॉक्टर की सलाह जरूरी है, क्योंकि अधिक मात्रा में विटामिन D शरीर के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है। कुल मिलाकर, सही जीवनशैली, संतुलित आहार और समय-समय पर जांच के जरिए विटामिन D की कमी को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है।