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  • क्‍या LPG गैस की होने वाली है किल्लत ? जाने 10 जुलाई के रेट, सप्लाई और बुकिंग स्थिति

    क्‍या LPG गैस की होने वाली है किल्लत ? जाने 10 जुलाई के रेट, सप्लाई और बुकिंग स्थिति


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट के आसपास फिर से बढ़ी हलचल के बीच देशभर में एलपीजी उपभोक्ताओं के मन में कई सवाल उठ रहे हैं। क्या रसोई गैस की सप्लाई प्रभावित होगी? क्या सिलेंडर के दाम बढ़ सकते हैं? और क्या बुकिंग के नियमों में कोई बदलाव होगा? फिलहाल इन सभी सवालों का जवाब राहत देने वाला है।

    होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ा तनाव
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से संघर्ष विराम को लेकर दिए गए बयानों के बाद होर्मुज स्ट्रेट क्षेत्र में एक बार फिर गोलीबारी की घटनाएं सामने आई हैं। इससे दुनिया के सबसे व्यस्त तेल परिवहन मार्गों में शामिल इस समुद्री रास्ते की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

    भारत की एलपीजी सप्लाई पर कितना असर?
    भारत की करीब 60 प्रतिशत एलपीजी सप्लाई होर्मुज स्ट्रेट से होकर आती है। संघर्ष के दौरान इस मार्ग पर संकट की स्थिति बनी थी, लेकिन भारत ने सप्लाई प्रबंधन और वैकल्पिक व्यवस्था के जरिए घरेलू उपभोक्ताओं तक रसोई गैस की आपूर्ति जारी रखी।

    फिलहाल किल्लत के आसार नहीं
    केप्लर के एनालिस्ट सुमित रितोलिया के मुताबिक, मौजूदा हालात का भारत के कच्चे तेल आयात पर फिलहाल बड़ा असर नहीं पड़ा है। उनका कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में भारतीय रिफाइनरियों ने अपने आयात स्रोतों में विविधता लाई है, जिससे किसी एक मार्ग पर निर्भरता कम हुई है।

    कच्चे तेल की सप्लाई बनी हुई है सामान्य
    रितोलिया के अनुसार, पिछले 100 दिनों में भारत के लिए कच्चे तेल की आपूर्ति लगभग सामान्य रही है। रूस से बड़ी मात्रा में आयात के अलावा सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात से वैकल्पिक मार्गों के जरिए भी सप्लाई जारी है। वहीं पश्चिमी अफ्रीका और लैटिन अमेरिका से आयात ने भी आपूर्ति को संतुलित बनाए रखा है।

    रूस बना सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता
    जून महीने में भारत का कच्चे तेल का आयात रिकॉर्ड 4.93 मिलियन बैरल प्रतिदिन पहुंच गया। इसमें रूस से करीब 2.7 मिलियन बैरल प्रतिदिन आयात हुआ, जो कुल आयात का आधे से अधिक हिस्सा रहा। इसके साथ ही रूस भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है।

    शिपिंग और बीमा लागत बढ़ने की आशंका
    विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही सामान्य बनी हुई है। हालांकि, यदि क्षेत्रीय तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो मालभाड़ा और बीमा लागत बढ़ सकती है। वहीं अमेरिकी प्रतिबंधों और कारोबारी जोखिमों के कारण भारतीय रिफाइनरियों के ईरान से तेल आयात बढ़ाने की संभावना फिलहाल नहीं है।

    10 जुलाई को LPG रेट में कोई बदलाव नहीं
    10 जुलाई के ताजा रेट के अनुसार घरेलू और कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इंडियन ऑयल की कीमतों के मुताबिक, दिल्ली में 14.2 किलोग्राम का घरेलू सिलेंडर 942 रुपये और 19 किलोग्राम का कमर्शियल सिलेंडर 2930 रुपये में मिल रहा है। कोलकाता में घरेलू सिलेंडर 968 रुपये और कमर्शियल सिलेंडर 3081.50 रुपये का है।

    जयपुर में घरेलू सिलेंडर 945.50 रुपये और कमर्शियल सिलेंडर 2957.50 रुपये में उपलब्ध है। वहीं चेन्नई में घरेलू सिलेंडर की कीमत 957.50 रुपये और कमर्शियल सिलेंडर 3106 रुपये है।

    बुकिंग और सप्लाई पहले की तरह सामान्य
    फिलहाल एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं किया गया है। सरकार और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों का कहना है कि घरेलू एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता है और सप्लाई पूरी तरह सामान्य बनी हुई है। ऐसे में उपभोक्ताओं को किसी तरह की किल्लत या घबराहट में खरीदारी करने की आवश्यकता नहीं है।

  • किसानों के लिए राहत की खबर: उर्वरकों की कमी का संकट टला, सरकार ने जारी किए बड़े आंकड़े

    किसानों के लिए राहत की खबर: उर्वरकों की कमी का संकट टला, सरकार ने जारी किए बड़े आंकड़े

    नई दिल्ली। खरीफ सीजन से पहले किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। देशभर में उर्वरकों की उपलब्धता को लेकर चल रही आशंकाओं के बीच केंद्र सरकार ने साफ किया है कि देश में खाद की कोई कमी नहीं है और आपूर्ति पूरी तरह स्थिर बनी हुई है। सरकार का कहना है कि मौजूदा समय में उर्वरकों का भंडार सामान्य जरूरत से काफी अधिक है, जिससे आने वाले महीनों में किसानों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

    सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार देश में इस वर्ष उर्वरकों की कुल आवश्यकता लगभग 390 लाख मीट्रिक टन से अधिक रहने का अनुमान है। इसके मुकाबले मौजूदा समय में 200 लाख मीट्रिक टन से अधिक उर्वरकों का स्टॉक उपलब्ध है। यह मात्रा सामान्य मानकों से काफी ज्यादा मानी जा रही है। इससे संकेत मिलते हैं कि खेती के महत्वपूर्ण सीजन में मांग बढ़ने के बावजूद सप्लाई चेन पर किसी प्रकार का दबाव नहीं पड़ेगा।

    अधिकारियों ने बताया कि वैश्विक परिस्थितियों और अंतरराष्ट्रीय तनावों के बावजूद भारत ने घरेलू उत्पादन और आयात दोनों मोर्चों पर मजबूत स्थिति बनाए रखी है। हाल के समय में कई देशों में आपूर्ति संबंधी चुनौतियां सामने आईं, लेकिन भारत ने पहले से रणनीतिक तैयारी करके संभावित संकट को काफी हद तक नियंत्रित रखा। इसी का परिणाम है कि उर्वरकों की उपलब्धता लगातार बनी हुई है।

    देश में यूरिया, डीएपी, एनपीके और अन्य मिश्रित उर्वरकों का उत्पादन भी संतोषजनक स्तर पर रहा है। साथ ही आयात के जरिए भी आपूर्ति को मजबूत किया गया है। सरकार ने आगामी खरीफ सीजन को ध्यान में रखते हुए बड़ी मात्रा में आवश्यक उर्वरकों का स्टॉक पहले ही सुरक्षित कर लिया है। इससे किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने में आसानी होगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि खेती के मौसम में उर्वरकों की उपलब्धता सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक होती है। यदि समय पर खाद नहीं मिले तो उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है। ऐसे में पर्याप्त स्टॉक का होना कृषि क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

    सरकार का यह भी कहना है कि उर्वरक उत्पादन में उपयोग होने वाले कच्चे माल की उपलब्धता की लगातार समीक्षा की जा रही है। इससे भविष्य में किसी तरह की आपूर्ति बाधा से बचा जा सकेगा। आने वाले महीनों में मांग बढ़ने की संभावना के बीच प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां भी तेज कर दी गई हैं। फिलहाल उपलब्ध आंकड़े संकेत दे रहे हैं कि देश में खाद संकट जैसी स्थिति बनने की आशंका बेहद कम है और किसानों को इस बार पर्याप्त आपूर्ति मिलने की उम्मीद है।

  • घरेलू गैस की आपूर्ति में कोई समस्या नहीं , जमाखोरों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई होगी

    घरेलू गैस की आपूर्ति में कोई समस्या नहीं , जमाखोरों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई होगी


    नई दिल्ली।
    सरकार ने आज देशवासियों को आश्वस्त किया कि देश की रिफायनरियों में कच्चे तेल से द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) के उत्पादन को बढ़ाने का निर्देश दिया गया है और घरेलू गैस सिलेंडरों की आपूर्ति बाधित होने की कोई भी संभावना नहीं है इसलिए आम जनों को चिंतित होने की जरूरत नहीं है। सरकार ने जमाखोरी करने को चेताया है कि उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

    उच्चपदस्थ सूत्राें ने यहां संवाददाताओं से कहा कि देश में एलपीजी की आपूर्ति पर पश्चिम एशिया के युद्ध के कारण कुछ असर हुआ है लेकिन भारत में स्थिति तेल रिफायनरियों में क्षमता वृद्धि के उपाय किये गये हैं और जल्द ही बाज़ार में उपलब्धता बढ़ेगी। सूत्रों के अनुसार देश की रिफायनरियों में एलपीजी के उत्पादन में करीब 25 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और इसके और बढ़ने की संभावना है।

    सूत्रों ने कहा कि पश्चिम एशिया में संकट के नाम पर देश में जो भी वितरक कृत्रिम संकट बता कर जमाखोरी कर रहे हैं, उन पर सरकार की पैनी नज़र है और उन्हें पछताना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने केवल व्यावासयिक सिलेंडरों की आपूर्ति नियंत्रित की है और प्राथमिकता के आधार पर उनके वितरण का निर्णय करने का अधिकार राज्यों को दिया है।

    सूत्रों ने बताया कि भारत दुनिया में एलपीजी का दूसरा सबसे बड़ा आयातक है जो अपनी एलपीजी खपत का लगभग 55-60% हिस्सा मुख्य रूप से खाड़ी देशों- कतर एवं संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से सीधे आयात करता है, जबकि शेष 40-45% घरेलू स्तर पर रिफाइनरियों में कच्चे तेल के शोधन के दौरान उप-उत्पाद के रूप में निर्मित होता है। हाल ही में सरकार ने उत्पादन बढ़ाने के लिए रिफाइनरियों को आदेश दिया है। वैश्विक आपूर्ति में बाधा का असर भारत पर पड़ना स्वाभाविक है।

    सरकारी आंकड़ों के मुताबिक भारत एलपीजी का लगभग 29-34% हिस्सा कतर से आयात करता है और कतर के बाद यूएई लगभग 26% की हिस्सेदारी के साथ दूसरा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है। हाल के वर्षों में, भारत ने कतर से सालाना 5.3 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक एलपीजी का आयात किया है, जिसकी कीमत 4 अरब डॉलर से अधिक है। 2024 में, भारत और कतर ने 2048 तक सालाना 75 लाख टन द्रवीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की आपूर्ति के लिए एक बड़ा समझौता भी किया है। भारत की आयातित एलपीजी का अधिकांश भाग होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर आता है जिसे ईरान ने बाधित कर रखा है।

    सूत्रों ने कहा कि भारत में कच्चे तेल की आपूर्ति का कोई संकट नहीं है। भारत रूस समेत 40 से अधिक देशों से कच्चे तेल की खरीद करता है। भारत ने अपनी रिफायनरियों से कहा है कि वह कच्चे तेल के शोधन में उप उत्पादों में एलपीजी को प्राथमिकता दें और उनका उत्पादन बढ़ाएं ताकि बाहर से आने वाली एलपीजी की कमी की यथासंभव भरपाई हो सके। उल्लेखनीय है कि कच्चे तेल के शोधन से प्रोपेन और ब्यूटेन, मीथेन, एथेन, नैफ्था, प्लास्टिक, रसायन और उच्च ऑक्टेन गैसोलीन, पेट्रोल, केरोसीन, जेट फ्यूल, डीज़ल, फ्यूल ऑयल, ल्यूब्रिकेंट्स, वैक्स तथा अस्फाल्ट / बिटुमेन का भी उत्पादन होता है।

  • मध्य प्रदेश में घरेलू गैस की कोई कमी नहीं, निर्बाध आपूर्ति रहेगी जारी: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    मध्य प्रदेश में घरेलू गैस की कोई कमी नहीं, निर्बाध आपूर्ति रहेगी जारी: मुख्यमंत्री डॉ. यादव


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि नागरिकों को रसोई गैस संबंधी परेशानी नहीं होगी। प्रदेश में घरेलू रसोई गैस सहित पीएनजी और सीएनजी की कोई कमी नहीं है और उपभोक्ताओं को निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरुवार देर शाम एक बयान में कहा कि वर्तमान में मिडिल ईस्ट-एशिया में युद्ध की स्थितियों के संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मंत्रीगण सजग हैं। नागरिकों को चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है, केंद्र और राज्य सरकार के स्तर पर कालाबाजारी रोकने के लिए पूरे प्रबंधन किए गए हैं।

    उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक गतिविधियों के कारण से पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस के संबंध में वर्तमान स्थितियों में अभी तक अधिकांश कच्चे तेल की आपूर्ति स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होती थी, जिसे परिवर्तित कर अन्य स्थानों से भी कच्चे तेल की आपूर्ति सुनिश्चित की गई है। साथ ही देश की रिफाइनरी उच्च क्षमता पर कार्य कर रही है। प्राकृतिक गैस की आपूर्ति के लिये वैकल्पिक आपूर्तिकर्ता के माध्यम से खरीदी प्रक्रिया जारी है।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि घरेलू पीएनजी और सीएनजी की आपूर्ति बिना कटौती के हो रही है। रिफाइनरी को एलपीजी उत्पादन अधिकतम करने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे वर्तमान में एलपीजी उत्पादन में लगभग 25 प्रतिशत की वृद्धि भी हुई है। इसके अलावा एक विशेष उपलब्धि प्राप्त हुई है कि जिसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले ऐसे जहाज एवं टेंकर जिनमें भारतीय फ्लेग लगे हैं उनको नहीं रोका जाएगा, यह एक राजनयिक विजय है, जिससे पेट्रोलियम सप्लाई में बाधा समाप्त होगी।

    उन्होंने बताया कि गैस आपूर्ति प्रबंधन के लिये प्राकृतिक गैस नियंत्रण आदेश जारी किया गया है, जिससे देश में किसी भी प्रकार की घरेलू गैस की आपूर्ति में कमी न हो। उपरोक्त के अनुक्रम में प्रदेश में पेट्रोल, डीजल, एटीएस, क्रूड ऑयल और घरेलू गैस की किसी प्रकार की कमी की स्थिति नहीं है तथा निरंतर आपूर्ति जारी है। पेट्रोलियम पदार्थों की कीमत में किसी प्रकार की वृद्धि नहीं हुई है। इसी के दृष्टिगत मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देशानुसार वरिष्ठ मंत्रियों की समिति का गठन भी किया गया है।


    मुख्य सचिव जैन ने जिला कलेक्टर्स को दिये निर्देश

    मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन ने गुरुवार देर शाम वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से कमिश्नर-कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक के साथ पश्चिम-मध्य एशिया में युद्ध के कारण उत्पन्न हुई स्थिति के दृष्टिगत एलपीजी सहित अन्य ईंधन की उपलब्धता की समीक्षा की और आवश्यक निर्देश दिए। बैठक में डीजीपी कैलाश मकवाना और एसीएस शिवशेखर शुक्ला एवं रश्मि अरुण शमी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

    मुख्य सचिव जैन ने कलेक्टर्स से कहा कि घरेलू गैस वितरण की ऑनलाइन व्यवस्था को और मजबूत करें तथा इससे जुड़ी कंपनियां भी सर्वर आदि की क्षमता बढाएं जिससे रिफिल बुकिंग ओटीपी जनरेशन और वितरण बिना असुविधा के सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कहा कि सुनिश्चत करें कि गलत सूचनाओं का प्रसार और अफवाहों को सख्ती से रोंके और उपभोक्ताओं तक मीडिया आदि का उपयोग कर सही सूचना पहुचाएं। उन्होंने कहा कि नागरिकों के बीच सकारात्मक माहौल बनाए और सूचना तंत्र मजबूत कर अवैध जमाखोरी और कालाबाजारी की कोई भी घटना नही हो, यह सुनिश्चत करें।

    मुख्य सचिव ने कलेक्टर्स द्वारा होटल्स, रेस्टोरेंट, मैरिज गार्डन आदि के संचालकों से बात कर रसोई गैस की जगह इलेक्ट्रिक भट्टी और इंडेक्शन आदि का उपयोग बढ़ाने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने सभी कलेक्टर्स से कहा कि वे भी वैकल्पिक और सुरक्षित ईंधन के उपयोग के प्रति नागरिकों और खानपान व्यवसाय में लगे लोगों बीच वैकल्पिक ईंधन के उपयोग के प्रति जागरूकता बढाएं।

    मुख्य सचिव जैन ने विभिन्न शहरों में पीएनजी के कनेक्शन की जानकारी ली और कलेक्टर्स से कहा कि वे अधिकाधिक उपभोक्ताओं को पाइप लाइन गैस प्रणाली से जोड़ें। उन्होंने कलेक्टर्स से कहा कि सी एम हेल्पलाइन की शिकायतों का उसी दिन संतुष्टि पूर्वक समाधान सुनिश्चित किया जाए।

    डीजीपी मकवाना ने पुलिस अधिकारियों से कहा कि वे सोशल मीडिया सहित विभिन्न प्लेट फार्म पर गलत सूचनाओं और अफवाह फैलाने वालों पर कार्यवाही करें और संपूर्ण व्यवस्था में सुरक्षात्मक इंतजाम सुनिश्चित करें।

    खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग की अपर मुख्य सचिव रश्मि अरूण शमी ने बताया कि प्रदेश में एलपीजी सहित पेट्रोल और डीजल की पर्याप्त उपलब्धता है। प्रदेश के सीएनजी स्टेशन एवं पीएनजी उपभोक्ताओं के उपयोग के लिए एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता है। प्रदेश मे पेट्रोलियम/ सीएनजी, पीएनजी गैस की आपूर्ति लगातार जारी है। घरेलू उपभोक्ताओं के लिए पर्याप्त मात्रा में एलपीजी की लगातार उपलब्धता है। शैक्षणिक एवं चिकित्सा संस्थानों को वाणिज्यिक सिलेंडर के उपयोग की छूट प्रदान की गई है। उन्होंने कलेक्टर्स से मीडिया के माध्यम से प्रचार-प्रसार करने के लिए भी कहा है।

    कांफ्रेंस में इंदौर, भोपाल, उज्जैन, जबलपुर, सागर, धार के कलेक्टर्स सहित ग्वालियर एवं रीवा के कमिश्नर ने किए जा रहे उपायों की जानकारी दी। एसीएस रश्मि अरूण शमी ने अधिकारियों से कहा कि वाणिज्यिक उपयोगकर्ताओं को उपलब्ध स्टॉक का विवेकपूर्ण उपयोग करने एवं वैकल्पिक ईंधन स्रोतों को अपनाने की सलाह दें। जहां पीएनजी लाइन उपलब्ध है वहां पीएनजी के कनेक्शन लेने के लिए प्रेरित किया जाए। जिन कामो में गैस ज्यादा खर्च होती है उनको नियंत्रित करने एवं विकल्प तैयार करने के लिए प्रेरित किया जाए। जिला कलेक्टर, जिले के खाद्य नियंत्रक/अधिकारी, ऑयल कंपनी के नोडल अधिकारी तथा एलपीजी वितरकों से समन्वय कर एलपीजी की आवश्यकता तथा उपलब्धता की प्रतिदिन समीक्षा भी करें।


    वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा

    प्रदेश में घरेलू रसोई गैस की कोई कमीं नहीं है और उपभोक्ताओं से अपील की गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान नहीं दें। राज्य शासन एलपीजी सहित अन्य ईंधन के परिवहन, भंडारण और वितरण पर पूरी तरह से सतर्क है। एसीएस रश्मि अरूण शमी को समन्वय अधिकारी बनाया गया है, वे प्रतिदिन सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों से संवाद और समन्वय करेंगी। मुख्य सचिव जैन ने कहा कि पर्याप्त उपलब्धता के बावजूद गलत सूचनाओं के कारण घरेलू गैस की कमी की अफवाह फैलने से रोका जाए। उन्होंने कहा कि रसोई गैस सहित अन्य ईंधन का सुरक्षित परिवहन, भंडारण और वितरण सुनिश्चित किया जाए।

    मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य स्तर के साथ ही जिला स्तर पर भी कंट्रोल रूम बनाए जाएं जहां प्रतिदिन की स्थिति की समीक्षा के साथ ही समाधान हो। बैठक में बताया गया कि गैस कंपनियों की भी हेल्पलाइन से लोगों को सही जानकारी दी जा रही है। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि जन भावनाओं के दृष्टिगत कंट्रोल रूम में कई फोन नम्बर रखें तथा दक्ष अमले की तैनाती की जाए। उन्होंने कहा कि रसोई गैस वितरण की पारदर्शी व्यवस्था है और संबंधित विभागों का दायित्व है कि वे ऐसा वातावरण तैयार करें जिससे जन भावनाएं व्यवस्था के साथ हों।

  • पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध से LNG सप्लाई को बड़ा झटका… भारत में 40% घटी सप्लाई

    पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध से LNG सप्लाई को बड़ा झटका… भारत में 40% घटी सप्लाई


    नई दिल्ली।
    पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध (West Asia War) के कारण भारत में तरलीकृत प्राकृतिक गैस (Liquefied Natural Gas) यानी LNG की सप्लाई को बड़ा झटका लगा है। लगभग 40% LNG सप्लाई प्रभावित होने के बाद, सरकार उर्वरक (फर्टिलाइजर) जैसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों सहित विभिन्न उद्योगों के लिए एक गैस वितरण योजना (‘ऑप्टिमाइजेशन प्लान’) पर तेजी से काम कर रही है।


    फर्टिलाइजर क्षेत्र पर प्रभाव और सरकार की रणनीति

    टाइम्स ऑफ इंडिया ने मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों के हवाले से लिखा है कि पेट्रोलियम मंत्रालय जल्द ही नई वितरण व्यवस्था को अंतिम रूप दे सकता है। हो सकता है कि ये व्यवस्था आज ही यानी मंगलवार तक लागू भी हो जाए। इसमें उर्वरक क्षेत्र की सप्लाई में कुछ कमी किए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि, इस कटौती का असर खेती पर नहीं पड़ेगा।

    पर्याप्त गैस आपूर्ति: उर्वरक इकाइयों को उनकी क्षमता के इष्टतम स्तर पर काम करने के लिए पर्याप्त गैस दी जाएगी।

    रखरखाव का समय: गैस की कम उपलब्धता फिलहाल बड़ी चिंता का विषय नहीं है क्योंकि कुछ उर्वरक कंपनियां इस समय का इस्तेमाल अपने कारखानों के नियमित रखरखाव (मेंटेनेंस शटडाउन) के लिए कर रही हैं।

    सुस्ती का दौर: फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FAI) के अनुसार, कृषि क्षेत्र में अभी मांग कम है। खरीफ फसलों की बुवाई जून में शुरू होगी। इस दौरान खपत मध्यम रहती है, जिससे उद्योग को अपना स्टॉक भरने और रखरखाव का समय मिल जाता है।


    बंपर स्टॉक से दूर हुई चिंता

    आंकड़ों के अनुसार, भारत के पास उर्वरकों का पर्याप्त भंडार है, जो संकट के समय एक बड़े ‘कुशन’ (सुरक्षा कवच) का काम करेगा। शुक्रवार तक कुल उर्वरक स्टॉक 36.5% बढ़कर 17.7 मिलियन टन (MT) हो गया है, जो पिछले साल इसी समय लगभग 13 MT था। FAI के मुताबिक, DAP और NPK का भंडार पिछले साल की तुलना में 70-80% अधिक है।

    फरवरी के अंत तक एजेंसियों ने 9.8 MT उर्वरक का आयात किया है। इसके अलावा, अगले तीन महीनों के लिए 1.7 MT का अतिरिक्त आयात तय किया जा चुका है। उर्वरक विभाग ने स्पष्ट किया है कि भारत ने फॉस्फेटिक उर्वरकों के आयात स्रोतों में विविधता लाई है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि अंतरराष्ट्रीय लॉजिस्टिक समस्याओं के कारण किसानों को खाद की कमी का सामना न करना पड़े।


    गैर-प्राथमिकता वाले उद्योगों की चुनौतियां

    विशेषज्ञों की मानें तो उर्वरक सरकार की प्राथमिकता है, इसलिए इसमें भारी कटौती नहीं होगी। हालांकि, गैर-प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को कम गैस सप्लाई से ही काम चलाना होगा। इन उद्योगों को अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए तुरंत वैकल्पिक ईंधन की व्यवस्था करनी होगी।


    नए LNG स्रोतों की तलाश और बाधाएं

    भारत वर्तमान में अपनी कुल जरूरत का 60% LNG पश्चिम एशिया के अलावा अन्य स्रोतों से प्राप्त करता है। अब सरकार और कंपनियां बचे हुए हिस्से की भरपाई के लिए ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों से अतिरिक्त आपूर्ति सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही हैं।

    इसमें दो मुख्य चुनौतियां हैं:

    शिपिंग: गैस के परिवहन के लिए विशेष LNG टैंकरों की व्यवस्था करना।
    क्षमता: यह सुनिश्चित करना कि नए सप्लायर देशों के पास जहाजों पर लादने से पहले गैस को लिक्विफाई (तरलीकृत) करने की अतिरिक्त क्षमता हो।


    संकट का मुख्य कारण क्या है?

    भारत में यूरिया निर्माण के लिए इस्तेमाल होने वाली 60% LNG कतर से आयात की जाती है। हाल ही में ईरान द्वारा कतर की कतरएनर्जी फैसिलिटी पर किए गए हमले के बाद, कतर को अपना उत्पादन रोकने के लिए मजबूर होना पड़ा है। इसी कारण भारत की सप्लाई चेन में यह बड़ी रुकावट आई है।

  • Israel-Iran युद्ध के बीच कच्चे तेल की आपूर्ति की चिंता… क्या रूस से आयात बढ़ाएगा भारत?

    Israel-Iran युद्ध के बीच कच्चे तेल की आपूर्ति की चिंता… क्या रूस से आयात बढ़ाएगा भारत?


    नई दिल्ली।
    ईरान संकट (Israel-Iran War) के बीच भारत (India) समेत दुनिया के तमाम देशों के सामने तेल से जुड़ी समस्याएं खड़ी होने की चिंता है। हालांकि जानकारों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे कच्चे तेल (Crude Oil) के प्रमुख आपूर्ति मार्ग के बंद होने से भारत को निकट भविष्य में कच्चे तेल (Crude Oil) की आपूर्ति में किसी बड़े व्यवधान का सामना करने की आशंका नहीं है। अधिकारियों ने यह जानकारी देते हुए कहा कि कच्चे तेल का भंडार कम से कम 10 दिन की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त है।


    भारत के पास आकस्मिक योजनाएं

    ईरान पर अमेरिका और इजरायल के सैन्य हमलों के बाद तेजी से बदलते घटनाक्रम में इस्लामिक गणराज्य के सर्वोच्च नेता के मारे जाने की खबरें भी शामिल हैं। इससे संकेत मिलता है कि यह संघर्ष बहुत लंबा नहीं चलेगा। हालांकि, शीर्ष अधिकारियों और विश्लेषकों का कहना है कि यदि तनाव बढ़ता है, तो भारत के पास आकस्मिक योजनाएं तैयार हैं।


    रूस से आयात बढ़ा सकता है भारत

    ईरान के सरकारी मीडिया ने 28 फरवरी को कहा था कि अमेरिका और इजरायल के मिसाइल हमलों के जवाब में उसने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा निकासी बिंदुओं में से एक है, जिससे वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है। अधिकारियों ने कहा कि कम अवधि के लिए इसके बंद होने से भारत पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा क्योंकि उसके पास ईंधन की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त आपूर्ति है। उन्होंने आगे कहा कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य लंबे समय तक बंद रहता है, तो देश रूसी तेल की खरीद बढ़ाकर अपने आयात स्रोतों में बदलाव कर सकता है।


    भारत के पास कितना तेल भंडार

    हालांकि, इसका तत्काल प्रभाव तेल की कीमतों पर दिखेगा। ब्रेंट क्रूड इस सप्ताह सात महीने के उच्चस्तर लगभग 73 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। यदि आपूर्ति बाधित होती है, तो कीमतें 80 डॉलर प्रति बैरल की ओर बढ़ सकती हैं। एक अधिकारी ने कहा, ”भारतीय रिफाइनरी कंपनियों के पास टैंक और पारगमन में मिलाकर 10 से 15 दिन का कच्चा तेल भंडार है। इसके अलावा, उनके ईंधन टैंक भरे हुए हैं, जो देश की 7-10 दिन की ईंधन जरूरत को आसानी से पूरा कर सकते हैं।” एक अन्य अधिकारी ने कहा कि भारत वेनेजुएला, ब्राजील और अफ्रीका जैसे दूरदराज के देशों से भी तेल खरीद सकता है।