Tag: support

  • कृति सैनन के रक्षाबंधन विज्ञापन पर ट्रोलिंग के बीच राहुल गांधी ने किया समर्थन, महिला की पसंद और स्वतंत्रता पर दिया संदेश

    कृति सैनन के रक्षाबंधन विज्ञापन पर ट्रोलिंग के बीच राहुल गांधी ने किया समर्थन, महिला की पसंद और स्वतंत्रता पर दिया संदेश

    नई दिल्ली ।बॉलीवुड अभिनेत्री कृति सैनन अपने रक्षाबंधन से जुड़े एक ज्वेलरी विज्ञापन को लेकर सोशल मीडिया पर हो रही आलोचना के बीच चर्चा में हैं। विज्ञापन में कृति को इंडो वेस्टर्न परिधान में दिखाया गया था, जिसके बाद उनके पहनावे को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। विवाद बढ़ने के बाद कृति ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपनी बात स्पष्ट की।

    कृति ने अपनी पोस्ट में कहा कि किसी त्योहार की भावना केवल कपड़ों से तय नहीं होती, बल्कि उससे जुड़े भाव और परंपराओं के अर्थ अधिक महत्वपूर्ण होते हैं। उन्होंने रक्षाबंधन को भाई बहन के बीच सुरक्षा, स्नेह और शुभकामनाओं से जुड़ा पर्व बताया। उन्होंने यह भी कहा कि वह और उनकी बहन एक दूसरे को राखी बांधती हैं और एक दूसरे की उसी तरह देखभाल कर सकती हैं, जैसे परिवार में भाई बहन करते हैं।

    कृति ने महिलाओं के पहनावे को लेकर होने वाली टिप्पणियों पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यह तय करने का अधिकार दूसरों को नहीं होना चाहिए कि किसी महिला को क्या पहनना चाहिए और क्या नहीं। उनकी पोस्ट का मुख्य संदेश यह था कि त्योहार की भावना को कपड़ों की शैली के आधार पर नहीं आंका जाना चाहिए।

    इसी पोस्ट को कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर साझा किया। उन्होंने कृति के विचारों का समर्थन करते हुए महिलाओं की व्यक्तिगत पसंद और स्वतंत्रता की बात कही। राहुल गांधी ने कहा कि महिला क्या पहनती है, क्या करती है और कहां करती है, यह उसकी अपनी पसंद है। उन्होंने महिलाओं को उनकी स्वतंत्रता के लिए ट्रोल किए जाने का विरोध किया और पुरुषसत्तात्मक सोच पर सवाल उठाया।

    राहुल गांधी की प्रतिक्रिया सामने आने के बाद यह मामला राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय भी बन गया। कृति सैनन के विज्ञापन को लेकर शुरू हुई बहस अब महिलाओं के पहनावे, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सार्वजनिक टिप्पणी की सीमाओं तक पहुंच गई है। सोशल मीडिया पर ऐसे मामलों में कलाकारों के कपड़ों और उनके सांस्कृतिक जुड़ाव को लेकर अलग अलग विचार सामने आते रहे हैं।

    कृति ने अपने संदेश में रक्षाबंधन की पारिवारिक भावना पर विशेष जोर दिया। उन्होंने बताया कि उनके लिए राखी केवल किसी एक पारंपरिक रिश्ते तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवार के सदस्यों के बीच एक दूसरे की सुरक्षा, खुशी और अच्छे स्वास्थ्य की कामना से जुड़ी है। उन्होंने अपने परिवार और पालतू कुत्तों के संदर्भ में भी स्नेह की इसी भावना को व्यक्त किया।

    विज्ञापन में कृति के परिधान को लेकर उठी आपत्तियों के बावजूद अभिनेत्री ने अपने संदेश में विवाद को बढ़ाने के बजाय त्योहार के मूल भाव पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने यह स्पष्ट करने की कोशिश की कि सांस्कृतिक मूल्यों को केवल पहनावे के आधार पर निर्धारित करना उचित नहीं है।

    इस पूरे विवाद में राहुल गांधी का कृति की पोस्ट को साझा करना महत्वपूर्ण रहा। उनके समर्थन से मुद्दे को राजनीतिक संदर्भ भी मिला। हालांकि, मूल विवाद कृति के विज्ञापन और उनके पहनावे को लेकर सोशल मीडिया पर हुई आलोचना से शुरू हुआ था।

    काम के मोर्चे पर कृति सैनन हाल में फिल्म कॉकटेल में नजर आई थीं, जिसमें उनके साथ रश्मिका मंदाना और शाहिद कपूर भी थे। फिल्म को दर्शकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली और इसके बाद कृति के अगले प्रोजेक्ट को लेकर प्रशंसकों में उत्सुकता बनी हुई है। फिलहाल रक्षाबंधन विज्ञापन से जुड़ा विवाद उनके सार्वजनिक चर्चाओं में बने रहने की वजह बना हुआ है।

  • अखिलेश के बयान पर सियासी घमासान: जयंत के समर्थन में उतरीं मायावती, बोलीं- तुरंत माफी मांगें सपा प्रमुख

    अखिलेश के बयान पर सियासी घमासान: जयंत के समर्थन में उतरीं मायावती, बोलीं- तुरंत माफी मांगें सपा प्रमुख


    नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के ‘चवन्नी को रुपया बना दिया’ वाले बयान को लेकर उत्तर प्रदेश की सियासत में बयानबाजी तेज हो गई है। राष्ट्रीय लोकदल (RLD) अध्यक्ष जयंत चौधरी के जाट समाज को निशाना बनाए जाने के आरोप के बाद अब बसपा सुप्रीमो मायावती भी उनके समर्थन में उतर आई हैं। मायावती ने अखिलेश यादव के बयान को अहंकारी और अशोभनीय बताते हुए उनसे तुरंत माफी मांगने की मांग की है।

    जयंत बोले- राजनीतिक लड़ाई में मेरा नाम लेते, समाज को क्यों घसीटा?

    जयंत चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर अखिलेश यादव पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक विरोध के बीच अखिलेश ने पूरे जाट समाज को निशाना बनाया। जयंत ने कहा कि अगर अखिलेश को उनसे कोई शिकायत थी तो सीधे उनका नाम लेकर बात करनी चाहिए थी। पूरे समाज को इस विवाद में घसीटना उचित नहीं है।

    जयंत ने अखिलेश के रवैये को अहंकारी बताते हुए कहा कि उन्होंने इस तरह के राजनीतिक अहंकार को करीब से देखा है और यही किसी के राजनीतिक पतन की वजह बनता है।

    मायावती ने जयंत का किया समर्थन

    मायावती ने भी X पर पोस्ट कर जयंत चौधरी का समर्थन किया। उन्होंने अखिलेश यादव के बयान को न केवल जयंत और राष्ट्रीय लोकदल का अपमान बताया, बल्कि इसे पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह और जाट समाज का भी अपमान करार दिया।

    मायावती ने कहा कि अखिलेश यादव को अपने बयान के लिए तुरंत माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने समाजवादी पार्टी पर अहंकारी रवैया अपनाने का आरोप भी लगाया।

    1993 के सपा-बसपा गठबंधन का भी किया जिक्र

    मायावती ने सपा पर निशाना साधते हुए 1993 के सपा-बसपा गठबंधन का जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी के इसी अहंकारी रवैये के कारण गठबंधन टूट गया था और इसके बाद स्टेट गेस्ट हाउस कांड हुआ।

    मायावती का कहना है कि बाद में दोनों दलों के बीच राजनीतिक गठबंधन जरूर हुआ, लेकिन अखिलेश यादव के रवैये में भी कथित तौर पर वही अहंकार दिखाई दिया। उन्होंने सपा पर राजनीतिक जरूरत के हिसाब से रुख बदलने का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी काम निकलने के बाद ‘गिरगिट की तरह रंग बदलती है।’

    PDA में पंडितों को शामिल करने पर भी साधा निशाना

    मायावती ने अखिलेश यादव के PDA में ‘P’ को पंडितों से जोड़ने वाले बयान पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा अब पंडित समाज को अपना हितैषी बताने की कोशिश कर रही है, जबकि उनके मुताबिक पार्टी ने कभी पिछड़े वर्गों, अल्पसंख्यकों या ब्राह्मण समाज के हित में वास्तविक रूप से काम नहीं किया।

    क्या था अखिलेश का ‘चवन्नी’ वाला बयान?

    दरअसल, कुछ दिन पहले एक कार्यक्रम में अखिलेश यादव ने अपने सहयोगी दलों और राजनीतिक साथियों का जिक्र करते हुए बिना नाम लिए आरएलडी और जयंत चौधरी पर तंज कसा था। उन्होंने कहा था कि समाजवादी पार्टी ने अपने सहयोगियों को आगे बढ़ाया, लेकिन इसके बावजूद कुछ लोग पार्टी का साथ छोड़कर चले गए।

    अखिलेश ने इसी संदर्भ में कहा था कि ‘हम लोगों ने चवन्नी का रुपया बना दिया, फिर भी हमें छोड़कर चले गए।’ इसी बयान को लेकर अब जयंत चौधरी और मायावती ने सपा प्रमुख पर हमला बोला है।

  • अभिजीत दीपके ने सौरव दास का किया समर्थन, बोले उनके वीडियो से लॉ छात्रों का भविष्य बचा और सवाल उठाना जरूरी है

    अभिजीत दीपके ने सौरव दास का किया समर्थन, बोले उनके वीडियो से लॉ छात्रों का भविष्य बचा और सवाल उठाना जरूरी है


    नई दिल्ली । 
    अभिजीत दीपके ने सौरव दास के समर्थन में बयान देते हुए कहा है कि वह देश और विशेष रूप से कानून की पढ़ाई कर रहे छात्रों के हित में काम कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि सौरव दास के एक वीडियो के सामने आने के बाद बार काउंसिल के चेयरमैन ने अपना नोटिफिकेशन वापस ले लिया था। दीपके के मुताबिक इससे बड़ी संख्या में लॉ छात्रों का भविष्य प्रभावित होने से बच गया।

    अभिजीत दीपके ने कहा कि सौरव दास का प्रयास देश के लिए सकारात्मक है और कानून के छात्रों के लिए भी इसका महत्व है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कोई व्यक्ति सार्वजनिक हित से जुड़े मुद्दे पर अपनी बात रख रहा है तो उसे जानबूझकर परेशान करने की कोशिश क्यों की जानी चाहिए।

    उन्होंने सौरव दास और उनके परिवार से जुड़े एक अन्य घटनाक्रम का भी उल्लेख किया। दीपके के अनुसार दिल्ली में एक यूट्यूबर सौरव दास के घर में प्रवेश कर गया था। उन्होंने इस घटनाक्रम को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि सौरव और उनके परिवार को इस तरह परेशान करने की जरूरत नहीं होनी चाहिए थी।

    दीपके ने यह भी सवाल उठाया कि परिवार के सदस्यों से उनकी निजी गतिविधियों और कामकाज से जुड़े सवाल क्यों किए गए। उन्होंने विशेष रूप से सौरव की मां को इस पूरे मामले में शामिल किए जाने पर आपत्ति जताई। उनके अनुसार परिवार को अनावश्यक रूप से परेशान करने की स्थिति पैदा नहीं होनी चाहिए।

    सौरव दास ने इससे पहले पुडुचेरी में अपने परिवार को पुलिस की ओर से डराए और धमकाए जाने का आरोप लगाया था। हालांकि, पुलिस ने इन आरोपों को खारिज किया था। पुलिस की ओर से बताया गया कि अधिकारी सौरव दास के रिश्तेदारों के घर जरूर गए थे, लेकिन यह कार्रवाई नियमित सुरक्षा प्रक्रिया का हिस्सा थी।

    पुलिस के अनुसार स्वतंत्रता दिवस जैसे महत्वपूर्ण अवसरों से पहले संवेदनशील स्थानों और प्रमुख मार्गों के आसपास रहने वाले लोगों के घर जाकर सुरक्षा संबंधी जानकारी जुटाई जाती है। इसी प्रक्रिया के तहत सौरव दास के रिश्तेदारों के घर भी पुलिस पहुंची थी। पुलिस ने किसी तरह की धमकी या परेशान किए जाने के आरोपों से इनकार किया था।

    इस पूरे मामले के बीच अभिजीत दीपके ने सौरव दास के काम को लेकर अपना समर्थन दोहराया। उन्होंने कहा कि देश में कानून के छात्रों के भविष्य और शिक्षा से जुड़े विषयों पर आवाज उठाना जरूरी है। उनके अनुसार यदि किसी मुद्दे पर बदलाव की जरूरत है तो उसके बारे में सवाल पूछे जाने चाहिए और संबंधित व्यवस्था से जवाब मांगा जाना चाहिए।

    स्कूलों की स्थिति को लेकर भी अभिजीत दीपके ने अपनी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी देश के कई बच्चे बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनके अनुसार शिक्षा व्यवस्था में मूलभूत सुविधाओं की कमी दूर किए बिना देश की वास्तविक प्रगति संभव नहीं है।

    उन्होंने कहा कि बच्चों को बेहतर शिक्षा और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना प्राथमिकता होनी चाहिए। उनका मानना है कि शिक्षा के क्षेत्र में सुधार का सीधा संबंध देश के भविष्य से है और इस दिशा में लगातार काम करने की जरूरत है।

    सौरव दास से जुड़े विवाद में फिलहाल उनके आरोपों और पुलिस के स्पष्टीकरण के अलग-अलग पक्ष सामने आए हैं। वहीं अभिजीत दीपके ने स्पष्ट रूप से सौरव के प्रयासों का समर्थन किया है और उनके खिलाफ होने वाली किसी भी अनावश्यक कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। मामले को लेकर आगे होने वाले घटनाक्रम पर अब नजर रहेगी।

  • नई दिल्ली में चल रहे छात्र आंदोलन के समर्थन में आज बंद रहेगा महाराष्ट्र

    नई दिल्ली में चल रहे छात्र आंदोलन के समर्थन में आज बंद रहेगा महाराष्ट्र


    मुंबई।
    वंचित बहुजन आघाड़ी (Vanchit Bahujan Aghadi) ने नई दिल्ली (New Delhi) के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन (Student movement) के पक्ष में गुरुवार को ‘महाराष्ट्र बंद’ का आह्वान किया है। वीबीए अध्यक्ष और डॉ बाबासाहेब आंबेडकर (Dr. Babasaheb Ambedkar) के पोते प्रकाश आंबेडकर (Prakash Ambedkar) ने यहां प्रेस वार्ता में बताया कि वामपंथी राजनीतिक दलों, शैक्षणिक संस्थानों और कोचिंग सेंटरों ने बंद का समर्थन किया है।


    क्या खुला रहेगा, क्या बंद

    बंद के समर्थन में कुछ क्षेत्रों ऐच्छिक रूप से कुछ दुकानें और बाजार बंद रह सकते हैं। हालांकि, इस दौरान जरूरी सेवाएं जारी रहेंगी। खबर है कि इस दौरान पब्लिक ट्रांसपोर्ट सामान्य रूप से चल सकता है। हालांकि, अगर प्रदर्शन होता है तो यातायात व्यवस्था, रोड ब्लॉक जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।


    क्यों बुलाया बंद

    उन्होंने कहा, ‘केंद्र सरकार छात्र आंदोलनों से इतनी डरी हुई है कि उसने प्रादेशिक सेना तक को तैनात कर दिया है। वामपंथी दलों और शैक्षणिक संस्थानों ने हमारे बंद का समर्थन किया है, वहीं राज्य के कोचिंग संस्थान भी हमारे संपर्क में हैं।’


    राहुल गांधी से कर दी डिमांड

    उन्होंने कहा, ‘हम नई पीढ़ी खड़ी करने का प्रयास कर रहे हैं। मेरा मानना है कि सरकार को जवाबदेह बनाया जाना चाहिए। छात्रों के आंदोलन पर सरकार ने अब तक कोई फैसला नहीं लिया है, इसलिए 23 जुलाई का महाराष्ट्र बंद होकर रहेगा। मेरी यह भी राय है कि राहुल गांधी को जंतर-मंतर जाकर विरोध प्रदर्शन करना चाहिए।’

    उन्होंने यह भी कहा कि यह छात्र आंदोलन हालांकि उनका नहीं है, फिर भी वह इसका पूरा समर्थन करते हैं। इसके साथ ही उन्होंने भाजपा के छात्र संगठन से भी इस इस बंद में हिस्सा लेने की अपील की।


    चर्चाएं जारी

    वीबीए प्रमुख ने कहा, ‘इस बंद को सफल बनाने के लिए हम मजदूर यूनियनों, बेस्ट यूनियनों, बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) की यूनियनों और अन्य श्रमिक संगठनों से चर्चा कर रहे हैं। दिल्ली में छात्रों पर अमानवीय अत्याचार हुए हैं, जिससे लोगों में भारी आक्रोश है। कई संगठन इस बंद में शामिल होने को उत्सुक हैं।’


    रिजर्व पुलिस फोर्स बुलाने पर आपत्ति

    उन्होंने कहा ‘दिल्ली में छात्र आंदोलन को कुचलने के लिए कश्मीर से रिजर्व पुलिस बल बुलाये गए हैं, जिसका हम कड़ा विरोध करते हैं। हमारी कोशिश है कि सरकार छात्रों पर आंसू गैस या बल प्रयोग न करे। हमने भाजपा को छोड़कर सभी दलों से बंद में शामिल होने की अपील की है, ताकि आंदोलनकारी छात्रों के प्रति एकजुट होकर हम समर्थन दिखा सकें।’


    दादर में पुलिस कार्रवाई

    इससे पहले मुंबई पुलिस ने आज दादर वेस्ट में समुद्र तट पर स्थित ऐतिहासिक चैत्यभूमि पर वामपंथी दलों की ओर से आयोजित शांतिपूर्ण सभा को तितर-बितर कर दिया। यह स्थान डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर का समाधि स्थल होने के साथ-साथ दलित समुदाय के लिए प्रमुख तीर्थ स्थल भी है।

    पुलिस सूत्रों के अनुसार एहतियाती तौर पर चैत्यभूमि से हिरासत में लिए गये भाकपा के कॉमरेड मिलिंद रानाडे और अन्य कार्यकर्ताओं को नजरबंद कर दिया गया है। वहीं माकपा के कॉमरेड शैलेंद्र कांबले और शेतकारी कामगार पार्टी (पीडब्ल्यूपी) के राजू कोरडे के आवासों पर चौबीसों घंटे निगरानी रखी जा रही है।

    उन्होंने बताया कि एहतियाती कार्रवाई के तहत भाकपा से जुड़े अखिल भारतीय छात्र संघ (एआईएसएफ) के युवा नेता कॉमरेड आमिर काजी और पीडब्ल्यूपी के साम्य कोरडे को चेतावनी दी गई है कि यदि वे अपने घरों से बाहर निकले तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जायेगा।

    इस बीच मुंबई पुलिस ने चैत्यभूमि को भारी बैरिकेड्स और नाकेबंदी लगाकर पूरी तरह से सील कर दिया है, जहां पहले से ही एक स्थायी पुलिस चौकी मौजूद है। प्रदर्शनकारी जहां तक संभव हो छोटे समूहों में जुटने का प्रयास कर रहे हैं। कुछ प्रदर्शनकारी तंग गलियों से होते हुए चैत्यभूमि पहुंचे, तो कुछ ने शहर के अलग-अलग हिस्सों में स्थानीय स्तर पर विरोध प्रदर्शन किए।

    कांग्रेस भी साथ
    महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल कहा कि कांग्रेस ने गुरुवार को वीबीए के बुलाए गए महाराष्ट्र बंद का समर्थन किया, जो राष्ट्रीय राजधानी में छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई के विरोध में है।

  • मानसून सत्र में परिसीमन बिल पास कराने की तैयारी… इंडिया गठबंधन से नाता तोड़ने वाले दलों से समर्थन पर बातचीत जारी

    मानसून सत्र में परिसीमन बिल पास कराने की तैयारी… इंडिया गठबंधन से नाता तोड़ने वाले दलों से समर्थन पर बातचीत जारी


    नई दिल्ली।
    मानसून सत्र (Monsoon-Session) में परिसीमन (Delimitation) व महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक (Constitution Amendment-Bill) को पारित कराने के लिए मोदी सरकार (Modi Government) ने अपनी रणनीतियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। इसके लिए जरूरी दो तिहाई संख्या बल हासिल करने के लिए सरकार ने विपक्षी दलों की तीन श्रेणियां बनाई हैं। हाल ही में इंडिया गठबंधन से नाता तोड़ने वाली द्रमुक के अलावा एनसीपी (एसपी), जगनमोहन रेड्डी की वाईएसआर कांग्रेस से विधेयक को प्रत्यक्ष समर्थन करने पर, जबकि दूसरे कई अन्य गैर कांग्रेसी दलों से परोक्ष समर्थन पर बातचीत का दौर जारी है।

    सूत्रों के अनुसार, विपक्षी दलों की तीन श्रेणियों में पहली श्रेणी ऐसे दलों की है, जो विधेयक का समर्थन नहीं करेंगे। दूसरी श्रेणी समर्थन की संभावना वाले दलों की है। तीसरी श्रेणी मतदान से दूरी बनाने की संभावना वाले दलों की है। सूत्रों की माने तो प्रत्यक्ष समर्थन के लिए द्रमुक, वाईएसआर कांग्रेस की कुछ मांगों पर विचार किया जा रहा है। इसी श्रेणी में शरद पवार की एनसीपी भी शामिल है। सदन में अगर पुरानी स्थिति रही तो सरकार को दो तिहाई बहुमत के लिए अतिरिक्त 54 तो वर्तमान स्थिति के हिसाब से 60 मतों का जुगाड़ करना होगा।


    संसद में कैसे सधेगा नंबर गेम?

    इस बीच तृणमूल कांग्रेस के बागी गुट के 20 सांसदों का एनसीपीआई में विलय और शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल होने के बाद सरकार को पुरानी स्थिति में 28 मतों और वर्तमान स्थिति में 36 अतिरिक्त मतों का जुगाड़ करना होगा। अगर द्रमुक के 22, एनसीपी (एसपी) के 8 और वाईएसआर कांग्रेस के 4 सांसदों ने विधेयक का समर्थन किया तो सरकार की परेशानी दूर हो जाएगी। मोदी सरकार ने पूर्वोत्तर के वॉयस ऑफ पीपुल्स, यूपीपीएल और जेडपीएम (4 सांसद) को पहले ही साध लिया है।


    दूसरी स्थिति के लिए भी रणनीति

    द्रमुक, एनसीपी (एसपी) और वाईएसआर कांग्रेस में से एक या दो दल अगर समर्थन के लिए राजी नहीं हुए तो इन्हें मतदान से दूर रहने के लिए मनाया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि तृणमूल के कम से कम दो सांसद इस प्रस्ताव को स्वीकार कर सकते हैं। इसके अलावा शिरोमणि अकाली दल, निर्दलीय सांसदों को भी समर्थन न देने की स्थिति में मतदान से दूर रहने के लिए मनाया जाएगा। फिर सरकार की विपक्षी दलों के उन सांसदों पर भी नजर है जो नेतृत्व से नाराज चल रहे हैं।


    सत्र के दौरान बनेगी अंतिम रणनीति

    सरकार की योजना विपक्षी दलों से लगातार बातचीत जारी रखते हुए सत्र के दौरान अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने की है। सरकार के सूत्रों ने बताया कि विधेयक को अगले महीने के पहले सप्ताह में पेश करने की है। ऐसे में सत्र के दौरान विपक्षी दलों से मंथन का नया दौर शुरू होगा।

  • वन नेशन-वन इलेक्शन 2029 के आम चुनाव तक लागू करने की तैयारी….99% लोग प्रस्ताव के समर्थन में

    वन नेशन-वन इलेक्शन 2029 के आम चुनाव तक लागू करने की तैयारी….99% लोग प्रस्ताव के समर्थन में


    नई दिल्ली।
    एक देश- एक चुनाव (One Nation, One Election) को लेकर हलचल तेज होती दिख रही है। संसद (Parliament) की संयुक्त समिति के अध्यक्ष पीपी चौधरी ने शुक्रवार को गोवा में इसको लेकर बड़ा बयान दिया है। वहीं, भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर (Anurag Thakur) ने इसे गेम चेंजर बताया है। आपको बता दें कि समिति एक साथ चुनाव कराने संबंधी विधेयकों की समीक्षा कर रही। इसका उद्देश्य ऐसी व्यवस्था बनाना है जिससे ‘एक देश, एक चुनाव’ सुधार को 2029 के आम चुनाव तक लागू किया जा सके।

    समिति के अध्यक्ष पीपी चौधरी ने दावा करते हुए कहा कि अबतक जिन नागरिक संस्थाओं से सुझाव लिया गया है उसमें से करीब 99 फीसदी ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया है। प्रस्ताव का उद्देश्य बार-बार होने वाले चुनाव से होने वाले अनुमानित सात लाख करोड़ रुपये के आर्थिक नुकसान को रोकना है।

    पीपी चौधरी ने कहा कि गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली समेत कई राज्यों का दौरा पूरा हो चुका है। यहां संविधान विशेषज्ञों, नागरिक संस्थाओं, शिक्षाविदों और अन्य संबंधित लोगों से बातचीत हुई है। जिन लोगों से सलाह ली गई उनमें से अधिकतर ने एक साथ चुनाव कराने के विचार का समर्थन किया है। अब कोशिश ऐसी व्यवस्था बनाने की है जिसे सभी राजनीतिक दल स्वीकार करें। इसे लागू करने की समय सीमा के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि समिति कई विकल्पों पर विचार कर रही है।


    गेंम चेंजर साबित होगी व्यवस्था

    वहीं, इस मुद्दे पर भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा है कि एक देश- एक चुनाव पूरे देश के लिए गेम चेंजर साबित होगा। नई व्यवस्था से शासन व्यवस्था अधिक प्रभावी होगी, निवेश बढ़ेगा और बार-बार चुनाव कराने में लगने वाले समय एवं संसाधनों की बचत से रोजगार के अधिक अवसर पैदा होंगे। उन्होंने जीएसटी का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि एक राष्ट्र, एक कर की व्यवस्था से देश को व्यापक लाभ मिला है। बार-बार होने वाले चुनावों का असर राज्यों के राजस्व, सरकारी कामकाज, न्याय व्यवस्था, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ता है।


    संविधान संसोधन विधेयक पर चर्चा

    समिति ने गोवा में संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024 पर चर्चा शुरू की। इसकी शुरुआत मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत और उनके मंत्रिमंडल के सदस्यों के साथ बातचीत से हुई जिसमें एकसाथ चुनाव कराने में आने वाली चुनौतियों और उनसे निपटने के तरीकों पर उनकी राय मांगी गई। चौधरी ने बताया कि मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल के सदस्यों के साथ ‘एक देश, एक चुनाव’ को कैसे लागू किया जा सकता है, इसमें क्या चुनौतियां हैं और सभी को स्वीकार्य संतुलन बनाए रखते हुए उन चुनौतियों को कैसे कम किया जा सकता है।

  • युद्ध लंबा चला तो ईरान टिक नहीं पाएगा, चीन का समर्थन भी पर्याप्त नहीं, जाने एक्सपर्ट्स का विश्लेषण

    युद्ध लंबा चला तो ईरान टिक नहीं पाएगा, चीन का समर्थन भी पर्याप्त नहीं, जाने एक्सपर्ट्स का विश्लेषण


    नई दिल्ली। अमेरिका और Iran के बीच बढ़ते सैन्य टकराव और इजरायल पर हुए हमलों के बाद मध्य-पूर्व के कई देशों में युद्ध जैसी स्थिति बन चुकी है। हालांकि रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के पास इतने संसाधन नहीं हैं कि वह लंबे समय तक अमेरिका और इजरायल जैसे शक्तिशाली देशों का मुकाबला कर सके।

    अमेरिका के तीन प्रमुख लक्ष्य
    सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल राजेन्द्र सिंह के अनुसार, अमेरिका के ईरान पर हमले के पीछे तीन मुख्य उद्देश्य हैं: ईरान में सत्ता परिवर्तन लाना, उसके मिसाइल कार्यक्रम को नष्ट करना और परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ने से रोकना। अमेरिका चाहता है कि ईरान भविष्य में किसी भी प्रकार का खतरा न बन सके।

    वहीं, ईरान की जवाबी कार्रवाई केवल उन हमलों का प्रतिकार है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि उसकी ताकत इतनी नहीं कि वह लंबे समय तक संघर्ष जारी रख सके। उसे अपने मिसाइल और सीमित संसाधनों के सहारे अमेरिका और इजरायल का मुकाबला करना कठिन होगा, इसलिए अंततः बातचीत की मेज पर आने की नौबत आएगी।

    ईरान की सीमित ताकत

    पूर्व एयर वाइस मार्शल ओपी तिवारी के अनुसार, ईरान की एयरफोर्स कमजोर है और हिज़बुल्ला तथा कुछ शिया संगठनों का समर्थन पहले जैसा नहीं रहा। जबकि रूस फिलहाल हथियारों की मदद नहीं दे सकता, चीन कुछ हथियारों से सहायता कर सकता है, लेकिन यह भी अमेरिका और इजरायल के मुकाबले पर्याप्त नहीं है। विशेषज्ञों का निष्कर्ष है कि ईरान के लिए लंबा युद्ध संभव नहीं और उसकी संभावित तबाही तय है।

    तेल की कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर

    विशेषज्ञों के अनुसार, युद्ध से मध्य-पूर्व में तेल की कीमतों में इजाफा हो रहा है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है। भारत इन देशों से तेल आयात करता है, इसलिए तेल की कीमतों और आपूर्ति में बाधा देश के लिए चुनौती बनेगी। अमेरिका के पास वेनेजुएला से तेल का विकल्प मौजूद है, जबकि भारत रूस से तेल खरीदने का विकल्प इस्तेमाल कर सकता है।

    भारतीय नागरिकों की सुरक्षा चुनौती
    लेफ्टिनेंट जनरल राजेन्द्र सिंह ने बताया कि ईरान, इजरायल, कतर, सऊदी अरब, बहरीन और यूएई में लाखों भारतीय नागरिक रहते हैं। युद्ध की स्थिति में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण होगा। हालांकि ईरान के हमले ज्यादातर अमेरिकी बेसों को निशाना बना रहे हैं, लेकिन मिसाइलों के भटकने का खतरा भी पूरी तरह टला नहीं जा सकता।
  • ट्रंप; बोले- जिसने ग्रीनलैंड डील पर साथ नहीं दिया, उसे भी नहीं छोड़ेंगे

    ट्रंप; बोले- जिसने ग्रीनलैंड डील पर साथ नहीं दिया, उसे भी नहीं छोड़ेंगे

     अमेरिकी राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक स्वास्थ्य कार्यक्रम में ट्रंप ने ग्रीन लैंड के मुद्दे पर मीडिया से बात की। उन्होंने कहा, “अगर वे (यूरोपीय देश) ग्रीनलैंड समझौते का समर्थन नहीं करते हैं, तो मैं उन देशों पर टैरिफ लगा सकता हूं। हमें राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ग्रीनलैंड की जरूरत है, उन्हें यह समझना होगा।”

    आपको बता दें, डोनाल्ड ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब यूरोपीय देश लगातार ग्रीनलैंड में अभ्यास के लिए सेना भेजकर अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर नाटो देशों के बीच बढ़ते इस तनाव को कम करने के लिए अमेरिकी सांसदोंका एक दल इस समय डेनमार्क में है। यहां पर वह डेनमार्क और ग्रीनलैंड के सांसदों से बातचीत कर रहे हैं।

    ट्रंप की ग्रीन लैंड प्रस्ताव को लेकर यूरोप में विरोध इस तरह बढ़ गया है कि जर्मनी और इटली जैसे देशों ने खुले आम रूस के साथ खुद से बात करने की शुरुआत करने पर सहमति जताई है। फ्रांस सीधे तौर पर ग्रीनलैंड में अपनी सेना को पहले से तैनात किए हुए है। इसके बाद भी राष्ट्रपति मैक्रों ने वहां और सैनिक भेजने की बात कही है।

    गौरतलब है कि ट्रंप लगातार ग्रीनलैंड को कब्जे में लेने की बात कह रहे हैं। ग्रीनलैंड, नाटो (उत्तर अटलांटिक संधि संगठन) का एक अर्ध स्वायत्त क्षेत्र है और ट्रंप ने इस सप्ताह की शुरुआत में कहा था कि आर्कटिक द्वीप पर अमेरिका के नियंत्रण से कम कुछ भी स्वीकार नहीं है।

    उन्होंने शुक्रवार को बिना कोई विस्तृत जानकारी दिए कहा, ‘‘अगर कोई देश ग्रीनलैंड के मुद्दे पर सहमत नहीं होता है, तो मैं उस पर शुल्क लगा सकता हूं। हमें राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ग्रीनलैंड की आवश्यकता है।’’

  • क्रिप्टोकरेंसी पर रोक जरूरी… आयकर विभाग ने किया RBI के रूख का समर्थन

    क्रिप्टोकरेंसी पर रोक जरूरी… आयकर विभाग ने किया RBI के रूख का समर्थन


    नई दिल्ली।
    आयकर विभाग (Income Tax Department) ने बुधवार को क्रिप्टोकरेंसी जैसी वर्चुअल डिजिटल संपत्तियों (Virtual digital assets Cryptocurrencies) से जुड़े बड़े रिस्क की ओर ध्यान खींचा है। इसके साथ ही विभाग ने भारतीय रिजर्व बैंक के रुख का समर्थन करते हुए इन वित्तीय साधनों के प्रवेश का विरोध किया है। सूत्रों के मुताबिक, वित्त मामलों की संसदीय स्थायी समिति के समक्ष एक प्रस्तुति में टैक्स अफसरों ने बताया कि कैसे गुमनाम, सीमा रहित और तत्काल धन हस्तांतरण की सुविधा से बिना किसी विनियमित वित्तीय मध्यस्थ के फंड्स को सिस्टम के जरिए भेजना संभव हो पाता है।

    इसके अलावा, विदेशी क्रिप्टो एक्सचेंज, निजी वॉलेट और विकेंद्रीकृत प्लेटफॉर्म के कारण अधिकारियों के लिए टैक्सेबल इनकम का पता लगाना बहुत मुश्किल हो जाता है। इनमें संपत्ति का असली मालिक भी आसानी से पता नहीं चल पाता।


    अंतरराष्ट्रीय पहलू और चुनौतियां

    विदेशों में होने वाली वर्चुअल डिजिटल संपत्ति की गतिविधियों में अधिकार क्षेत्र की सीमाओं को भी एक समस्या बताया गया। इसमें कई देशों के नियम शामिल हो सकते हैं, जिससे फंड फ्लो को जांचना, टैक्स लायबिलिटी की पुष्टि करना और वसूली करना लगभग असंभव हो जाता है। हाल के महीनों में सूचना साझा करने के प्रयास होने के बावजूद, यह प्रक्रिया अब भी कठिन बनी हुई है। इससे कर अधिकारियों को लेन-देन की श्रृंखला का सही आकलन और पुनर्निर्माण करने की क्षमता प्रभावित होती है।


    भारत की स्थिति और सुरक्षा उपाय

    भारत उन देशों में शामिल है जो जोरदार लॉबिंग और कुछ सरकारों के दबाव के बावजूद अब तक क्रिप्टोकरेंसी और स्टेबलकॉइन को मंजूरी देने में हिचकिचा रहे हैं। इससे पहले, कई मौकों पर आरबीआई ने अपनी चिंताएं जताई हैं, जिनमें किसी भी अंतर्निहित परिसंपत्ति की कमी होना शामिल है, जो इसे निवेशकों के लिए जोखिम भरा बनाती है। यहां तक कि कानून प्रवर्तन एजेंसियां भी खासतौर पर सावधान हैं क्योंकि वर्चुअल डिजिटल संपत्तियों का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी वित्तपोषण के लिए किया जा सकता है।

    आयकर विभाग ने कहा कि चूंकि क्रिप्टो प्लेटफॉर्म विदेशों में काम करते हैं, इसलिए समन जारी करना या टीडीएस वसूलना जैसी कानूनी कार्रवाई करना कठिन हो सकता है। कई एक्सचेंज फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट के साथ भी रजिस्टर्ड नहीं हैं और कर विभाग की पहुंच से बाहर हैं। भारतीय कर अधिकारियों ने लाभार्थियों को ट्रैक करने के लिए टीडीएस जैसे सुरक्षा उपाय बनाने की कोशिश की है और क्रिप्टो तथा अन्य वर्चुअल डिजिटल संपत्तियों में कारोबार करने वाली इकाइयों के पंजीकरण को भी अनिवार्य किया है।