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  • दतिया में विधायक प्रीतम सिंह लोधी के समर्थक आपस में भिड़े, भाजपा सरकार के खिलाफ लगाए नारे

    दतिया में विधायक प्रीतम सिंह लोधी के समर्थक आपस में भिड़े, भाजपा सरकार के खिलाफ लगाए नारे


    दतिया।
    मध्य प्रदेश के दतिया में भाजपा के पिछोर विधायक प्रीतम सिंह लोधी के समर्थक एसपी कार्यालय के घेराव के दौरान आपस में ही भिड़ गए। प्रदर्शन के दौरान माइक पर नारे लगाने को लेकर विवाद शुरू हुआ, जो देखते ही देखते खींचतान और धक्का-मुक्की तक पहुंच गया। हालात बिगड़ते देख विधायक को खुद हस्तक्षेप करना पड़ा। इस दौरान भाजपा सरकार के खिलाफ भी नारे लगाए गए। शुक्रवार को घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होता रहा।

    दरअसल, शिक्षा विभाग के सब इंजीनियर भूपेंद्र कुमार राजपूत के साथ 15 सितंबर को हुई मारपीट के विरोध में विधायक प्रीतम सिंह लोधी गुरुवार दोपहर अपने समर्थकों के साथ एसपी कार्यालय का घेराव करने पहुंचे थे। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ता मामले को लेकर नारेबाजी कर रहे थे। इसी बीच माइक पर नारे लगाने को लेकर समर्थकों के बीच विवाद हो गया।

    माइक छीनने को लेकर शुरू हुई झूमाझटकी

    बताया जाता है कि प्रदर्शन के दौरान एक युवक हाथ में माइक लेकर विधायक प्रीतम सिंह लोधी को ‘चंबल टाइगर’ बताते हुए उनके समर्थन में नारे लगाने लगा। इसी दौरान युवक ने दतिया से कांग्रेस विधायक घनश्याम सिंह के खिलाफ भी नारेबाजी शुरू कर दी।

    इस पर भीड़ में मौजूद एक अन्य समर्थक ने आगे बढ़कर युवक के हाथ से माइक छीन लिया। माइक को लेकर दोनों के बीच खींचतान शुरू हो गई। देखते ही देखते विवाद धक्का-मुक्की और झूमाझटकी में बदल गया। समर्थकों के बीच बढ़ते विवाद को देखकर विधायक प्रीतम सिंह लोधी को हस्तक्षेप करना पड़ा। इसके बाद प्रदर्शनकारियों का हुजूम आगे बढ़ा।

    भाजपा सरकार के खिलाफ भी लगे मुर्दाबाद के नारे

    घटना के दौरान समर्थकों के बीच विवाद के साथ भाजपा सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी हुई। सामने आए वीडियो में माइक को लेकर समर्थकों के बीच खींचतान होती दिखाई दे रही है। माइक छीने जाने से नाराज युवक ने ‘भाजपा सरकार मुर्दाबाद’ के नारे लगाने शुरू कर दिए।

    एसपी कार्यालय के घेराव के दौरान विधायक के समर्थकों के बीच हुई इस घटना और भाजपा सरकार के खिलाफ नारेबाजी का वीडियो शुक्रवार को सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना रहा।

  • इमरान समर्थकों के लॉन्ग मार्च के बीच शहबाज शरीफ ने बढ़ाया बातचीत का हाथ, रखी ये शर्त

    इमरान समर्थकों के लॉन्ग मार्च के बीच शहबाज शरीफ ने बढ़ाया बातचीत का हाथ, रखी ये शर्त


    लाहौर।
    पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने विपक्षी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) को बातचीत की सशर्त पेशकश की है। उन्होंने कहा कि अगर PTI इस्लामाबाद की ओर बढ़ रहे अपने लॉन्ग मार्च को तत्काल रोक देती है, तो सरकार बातचीत के लिए तैयार है। राजधानी में एक कार्यक्रम के दौरान शरीफ ने पार्टी नेतृत्व से प्रदर्शन की राजनीति छोड़कर बातचीत का रास्ता अपनाने की अपील की।

    शरीफ ने चेतावनी दी कि लगातार सड़क प्रदर्शनों से पाकिस्तान में फिर राजनीतिक अस्थिरता का दौर लौट सकता है। उन्होंने कहा कि देश पहले ही लंबे समय तक राजनीतिक उथल-पुथल का सामना कर चुका है और ऐसी स्थिति दोबारा पैदा नहीं होनी चाहिए।

    बातचीत टूटने के बाद आया बयान

    शहबाज शरीफ का यह बयान सरकार और PTI के बीच बातचीत बेनतीजा रहने के बाद आया है। हाल ही में नेशनल असेंबली के स्पीकर अयाज सादिक के चैंबर में दोनों पक्षों के बीच बातचीत हुई थी, लेकिन किसी समझौते तक नहीं पहुंचा जा सका।

    शरीफ ने PTI नेतृत्व पर बातचीत में गंभीरता से आगे नहीं बढ़ने का आरोप लगाया। उनका दावा है कि वार्ता के दौरान जिन मुद्दों पर शुरुआती सहमति बनी थी, PTI ने बाद में उनमें बदलाव कर दिया। सरकार के अनुसार, राजनीतिक तनाव कम करने और विवादों का समाधान निकालने के उद्देश्य से बातचीत शुरू की गई थी, लेकिन विपक्ष का रुख टकराव जारी रखने वाला रहा।

    अर्थव्यवस्था को लेकर जताई चिंता

    प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि करीब ढाई साल की आर्थिक स्थिरीकरण प्रक्रिया के बाद देश की अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत दिखाई देने लगे हैं।

    शरीफ के मुताबिक, मैन्युफैक्चरिंग, रेमिटेंस और निर्यात के क्षेत्र में सकारात्मक संकेत मिले हैं। ऐसे समय में लंबे धरने और राजनीतिक मार्च से कारोबारी गतिविधियां और आर्थिक विकास प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि अगर विरोध प्रदर्शनों के कारण आर्थिक गतिविधियां बाधित होती हैं तो इसका सीधा नुकसान राष्ट्रीय हितों को होगा।

    बातचीत के साथ कार्रवाई का भी संकेत

    शहबाज शरीफ ने कहा कि संघीय सरकार PTI के साथ बैठकर संवैधानिक तरीके से राजनीतिक विवादों का शांतिपूर्ण समाधान निकालने के लिए तैयार है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सड़क पर मार्च जारी रखते हुए सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश के बीच नई बातचीत नहीं होगी।

    सरकार का कहना है कि राजनीतिक संवाद का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं हुआ है, लेकिन राजधानी में कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसकी प्राथमिकता है। शरीफ ने संकेत दिया कि अगर प्रदर्शन के कारण सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होती है या इस्लामाबाद को ठप करने की कोशिश की जाती है, तो कानून लागू कराने वाली एजेंसियां कार्रवाई कर सकती हैं।