Tag: Supreme Court bail

  • मनी लॉन्ड्रिंग केस में राहत की बड़ी खबर, पूर्व मंत्री आलमगीर आलम को सुप्रीम कोर्ट से जमानत, दो साल बाद जेल से बाहर आने का रास्ता साफ

    मनी लॉन्ड्रिंग केस में राहत की बड़ी खबर, पूर्व मंत्री आलमगीर आलम को सुप्रीम कोर्ट से जमानत, दो साल बाद जेल से बाहर आने का रास्ता साफ

    नई दिल्ली ।  झारखंड के चर्चित टेंडर कमीशन घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सोमवार को एक अहम कानूनी मोड़ सामने आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम और उनके निजी सचिव संजीव लाल को जमानत दे दी। दोनों आरोपी लंबे समय से न्यायिक हिरासत में थे और पिछले लगभग दो वर्षों से जेल में बंद थे। इस फैसले के बाद मामले की कानूनी दिशा एक नए चरण में प्रवेश कर गई है।

    सुनवाई के दौरान अदालत के सामने यह बात प्रमुखता से रखी गई कि दोनों आरोपियों को मई 2024 से हिरासत में रखा गया है और अब तक मुकदमे की सुनवाई में पर्याप्त प्रगति नहीं हो सकी है। आरोपियों की ओर से यह तर्क दिया गया कि ट्रायल में देरी का मुख्य कारण लगातार दाखिल हो रही अतिरिक्त चार्जशीटें हैं, जिसके चलते केस की कार्यवाही आगे नहीं बढ़ पा रही है। इसी आधार पर लंबे समय तक जेल में रखने को अनुचित बताया गया।

    यह पूरा मामला उस समय सामने आया था जब जांच एजेंसी ने रांची में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए कई ठिकानों पर छापेमारी की थी। इस छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में नकदी बरामद होने का दावा किया गया था, जिससे जांच की गंभीरता और बढ़ गई थी। इसके अलावा एक डायरी भी बरामद हुई थी, जिसमें कथित तौर पर टेंडर कमीशन और लेन-देन से जुड़े विवरण दर्ज थे, जिसने पूरे मामले को और भी संवेदनशील बना दिया।

    जांच एजेंसियों के अनुसार यह आरोप है कि सरकारी टेंडर आवंटन के बदले एक संगठित व्यवस्था के तहत कमीशन लिया जाता था। इस व्यवस्था में टेंडर राशि का एक तय प्रतिशत वसूला जाता था और इसे अलग-अलग स्तरों पर वितरित किया जाता था। जांच में यह भी दावा किया गया कि इस प्रक्रिया में विभागीय स्तर से लेकर अन्य कई लोग शामिल थे, जो एक नेटवर्क की तरह काम कर रहे थे।

    पूर्व मंत्री के साथ-साथ उनके निजी सचिव और कुछ अन्य लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई थी। आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताओं के जरिए अवैध लेन-देन को अंजाम दिया गया और इस पूरे सिस्टम को एक ढांचे के तहत संचालित किया जा रहा था। जांच में मिले दस्तावेजों और बरामद सामग्री के आधार पर मामले को मनी लॉन्ड्रिंग से भी जोड़ा गया।

    सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद फिलहाल दोनों आरोपियों को राहत मिल गई है, हालांकि कानूनी प्रक्रिया अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। यह मामला लंबे समय से राज्य की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में चर्चा का विषय बना हुआ है और आने वाले समय में इसकी जांच और सुनवाई पर सभी की नजरें बनी रहेंगी।

  • मैं वहीं रहा जहाँ भगवान कृष्ण का जन्म हुआ, 30 करोड़ के फ्रॉड केस में 71 दिन जेल में बिताने के बाद विक्रम भट्ट रिहा

    मैं वहीं रहा जहाँ भगवान कृष्ण का जन्म हुआ, 30 करोड़ के फ्रॉड केस में 71 दिन जेल में बिताने के बाद विक्रम भट्ट रिहा


    नई दिल्ली। विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी 71 दिन जेल में बिताने के बाद सुप्रीम कोर्ट से बेल मिलने के बाद रिहा हो गए। जेल में बिताए समय ने उन्हें और मजबूत बनाया और उन्होंने कहा कि सच और न्याय हमेशा जीतते हैं।

    फिल्ममेकर विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी भट्ट 71 दिन जेल में रहने के बाद सुप्रीम कोर्ट से बेल मिलने के बाद शुक्रवार को रिहा हो गए। उदयपुर जेल कैंपस के बाहर मीडिया से बातचीत में विक्रम ने अपने जेल में बिताए समय और फ्रॉड केस पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि वह पॉजिटिव हैं और उन्हें भारतीय लीगल सिस्टम पर पूरा भरोसा है।

    जेल में बिताए 71 दिन
    विक्रम भट्ट को दिसंबर 2025 में मुंबई से राजस्थान पुलिस ने ₹30 करोड़ के फ्रॉड केस में गिरफ्तार किया था। इस केस में उन्हें और उनकी पत्नी को आरोपी बनाया गया था। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा बेल दिए जाने के बाद दोनों को उदयपुर जेल से रिहा किया गया।

    जेल से बाहर आते ही विक्रम ने कहा, “मैंने ढाई महीने जेल में बिताए हैं। मुझे पूरा भरोसा था कि सच सामने आएगा। जेल में मेरा एक दोस्त बना जिसने मुझे मेवाड़ की मिट्टी के स्वभाव के बारे में बताया। उसने कहा कि मेवाड़ की मिट्टी में सच परेशान हो सकता है, लेकिन हार नहीं सकता। मैं उसी मिट्टी का तिलक लगाकर बाहर जा रहा हूं, यहाँ सच की हमेशा जीत होगी।”

    विक्रम ने जेल अनुभव को आध्यात्मिक नजरिए से भी देखा। उन्होंने कहा, “मैं भगवान कृष्ण का भक्त हूं। मैं उसी जगह पर रहा हूँ जहाँ भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था। मैं पहले से दोगुना बेहतर बनकर बाहर आ रहा हूं। भगवान कृष्ण की तरह मुझे भी नई लड़ाई लड़नी है। मुझे इस देश के लीगल सिस्टम पर पूरा भरोसा है और जो भी न्याय होगा, वह सबके हित में होगा।”

    फ्रॉड केस की पृष्ठभूमि
    विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी पर नवंबर 2025 में उदयपुर में एफआईआर दर्ज की गई थी। शिकायत करने वाले डॉ. अजय मुर्डिया ने आरोप लगाया कि भट्ट दंपति ने एक फिल्म प्रोजेक्ट के नाम पर ₹30 करोड़ से अधिक की राशि हड़प ली। शिकायत में कहा गया कि प्रोडक्शन हाउस ने चार फिल्मों के लिए कॉन्ट्रैक्ट साइन किए, लेकिन एग्रीमेंट के मुताबिक फिल्में प्रदान नहीं कीं और फंड का गलत इस्तेमाल किया।

    पुलिस ने अपनी जांच में यह पाया कि आरोपियों ने नकली बिल और दस्तावेज़ का इस्तेमाल कर पैसे निकालने की कोशिश की। हालांकि, विक्रम भट्ट ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों से इनकार किया है और कहा कि वे पूरी तरह निर्दोष हैं।

    अगले कदम और मीडिया प्रतिक्रिया
    जेल से रिहाई के बाद विक्रम ने मीडिया से कहा कि वे फिलहाल अपने फिल्म और प्रोडक्शन काम पर ध्यान केंद्रित करेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि जेल का अनुभव उनके लिए सीख और आत्मनिरीक्षण का अवसर रहा। उनका कहना था कि मुश्किलें चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हों, सच और न्याय हमेशा जीतते हैं।

    विक्रम भट्ट की यह कहानी न केवल फिल्म उद्योग में विवाद और कानूनी लड़ाई की मिसाल है, बल्कि यह भी दिखाती है कि कठिनाइयों के बीच भी धैर्य और सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखना कितना महत्वपूर्ण है।