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  • भोपाल में 8 हजार कारोबारियों को नोटिस, 190 दुकानें सील: चौथे दिन बदली तस्वीर, मामला सुप्रीम कोर्ट में

    भोपाल में 8 हजार कारोबारियों को नोटिस, 190 दुकानें सील: चौथे दिन बदली तस्वीर, मामला सुप्रीम कोर्ट में


    भोपाल । राजधानी भोपाल में रहवासी इलाकों में चल रहे कारोबार के खिलाफ नगर निगम की सीलिंग कार्रवाई अचानक धीमी पड़ गई है। तीन दिनों तक लगातार कार्रवाई करते हुए नगर निगम ने 190 प्रतिष्ठानों को बंद कराया लेकिन चौथे दिन शहर में एक भी सीलिंग नहीं हुई। कार्रवाई रुकने के साथ ही छोटे व्यापारियों और बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर अलग-अलग कार्रवाई को लेकर विवाद और तेज हो गया है। उधर रहवासियों नगर निगम और नगरीय प्रशासन के अधिकारी अपने-अपने पक्ष के साथ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए हैं। इस पूरे मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी।

    भोपाल में 31 अगस्त से शुरू हुई कार्रवाई के पहले दिन नगर निगम ने 109 प्रतिष्ठानों को बंद कराया था। इसके बाद 1 सितंबर को 61 प्रतिष्ठानों पर सीलिंग की गई जबकि 2 सितंबर को केवल 20 प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई हुई। इस तरह तीन दिनों में कुल 190 प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की गई। लेकिन चौथे दिन 3 सितंबर को शहर में कहीं भी सीलिंग नहीं हुई। अधिकारियों का कहना है कि टीम हाईकोर्ट में जमीन से जुड़े मामलों में व्यस्त रही जिसके कारण सीलिंग की कार्रवाई नहीं हो सकी। हालांकि लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बाद कार्रवाई में आई इस अचानक नरमी को लेकर कई सवाल भी खड़े हो रहे हैं।

    मामले में रहवासियों ने नगर निगम की कार्रवाई पर पक्षपात का आरोप लगाया है। याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी का कहना है कि अरेरा कॉलोनी के जिन बड़े मॉल और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को लेकर रहवासियों ने शिकायतें की थीं उन पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। जबकि छोटे व्यापारियों और दुकानदारों पर नोटिस और सीलिंग की कार्रवाई की जा रही है। इसी आधार पर रहवासियों ने सुप्रीम कोर्ट में दस्तावेज पेश कर अधिकारियों की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि कानून का पालन सभी के लिए समान रूप से होना चाहिए और अवैध व्यावसायिक गतिविधियों के मामले में छोटे और बड़े प्रतिष्ठानों के बीच कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए।

    इस बीच नगरीय प्रशासन और नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारी भी दिल्ली पहुंच गए हैं। सूत्रों के अनुसार सरकार और निगम की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पक्ष रखने की तैयारी की जा रही है। अधिकारियों ने इस मामले में वरिष्ठ कानूनी विशेषज्ञों से भी चर्चा की है। 15 सितंबर को होने वाली सुनवाई में नगर निगम कार्रवाई को लेकर रिपोर्ट और आगे की स्थिति स्पष्ट कर सकता है।

    सीलिंग कार्रवाई के बीच नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी माना है कि इस कार्रवाई से भोपाल के व्यापारी परेशान हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसा रास्ता तलाशने का प्रयास कर रही है जिससे कानून का पालन भी हो और आम लोगों तथा व्यापारियों को अनावश्यक नुकसान भी न उठाना पड़े। मंत्री ने भोपाल के मास्टर प्लान को जल्द जारी करने की बात भी कही है। ऐसे में सीलिंग विवाद के बीच मास्टर प्लान को लेकर सरकार का अगला फैसला बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    नगर निगम अब तक एक महीने के भीतर 8 हजार से अधिक दुकानदारों और प्रतिष्ठान संचालकों को नोटिस जारी कर चुका है। कई स्थानों पर 24 घंटे के भीतर रहवासी भवनों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियां बंद करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद कई दुकानदारों ने प्रतिष्ठान स्वेच्छा से बंद करने के पोस्टर और बैनर भी लगा दिए।

    यह मामला सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों से जुड़ा हुआ है। अगस्त के पहले सप्ताह में हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की 10 सदस्यीय जांच समिति की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी और हाईकोर्ट से दुकानदारों को मिले राहत आदेश भी निरस्त कर दिए थे। अब 15 सितंबर की सुनवाई में यह साफ हो सकता है कि भोपाल में सीलिंग कार्रवाई दोबारा तेज होगी या सरकार और प्रभावित व्यापारियों के लिए कोई नया समाधान निकाला जाएगा। फिलहाल 190 सीलिंग के बाद चौथे दिन की जीरो कार्रवाई ने इस पूरे विवाद को और ज्यादा चर्चा में ला दिया है।

  • सीलिंग कार्रवाई से भड़के भोपाल के व्यापारी, 170 प्रतिष्ठानों पर एक्शन के बाद कोलार रोड पर आंदोलन की तैयारी

    सीलिंग कार्रवाई से भड़के भोपाल के व्यापारी, 170 प्रतिष्ठानों पर एक्शन के बाद कोलार रोड पर आंदोलन की तैयारी


    भोपाल । भोपाल में आवासीय भवनों के व्यावसायिक उपयोग और अवैध निर्माण को लेकर चल रही सीलिंग कार्रवाई अब बड़ा विवाद बनती जा रही है। नगर निगम की लगातार कार्रवाई से नाराज व्यापारियों ने विरोध तेज कर दिया है। इसी क्रम में कोलार व्यापारी महासंघ ने बुधवार को कोलार रोड बंद रखने का आह्वान किया है। व्यापारी अपनी दुकानें बंद रखकर नगर निगम की सीलिंग कार्रवाई का विरोध करेंगे और सड़क पर उतरकर प्रदर्शन भी करेंगे। महासंघ की ओर से कोलार तिराहे से गोल जोड़ तक सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रखने की अपील की गई है। हालांकि मेडिकल और पेट्रोल पंप जैसी आवश्यक सेवाओं को बंद से अलग रखा गया है।

    व्यापारियों का कहना है कि जिस तरह से नगर निगम प्रतिष्ठानों को बंद करने की कार्रवाई कर रहा है उससे छोटे कारोबारियों के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो सकता है। कोलार व्यापारी महासंघ के पदाधिकारियों का आरोप है कि कार्रवाई के कारण बड़ी संख्या में व्यापारी परेशान हैं और अब उनके सामने विरोध प्रदर्शन के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है। मंगलवार को भी सीलिंग कार्रवाई के विरोध में व्यापारियों ने अलग तरीके से प्रदर्शन किया था। कई व्यापारियों ने थाली और मंजीरा बजाकर अपनी नाराजगी जताई और प्रशासन के खिलाफ आवाज बुलंद की।

    दूसरी ओर नगर निगम ने साफ कर दिया है कि कार्रवाई रुकने वाली नहीं है। निगम लगातार तीसरे दिन भी प्रतिष्ठानों को बंद कराने की कार्रवाई करने की तैयारी में है। अब तक करीब 170 प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की जा चुकी है। नगर निगम की कार्रवाई के साथ ही व्यापारी संगठनों का विरोध भी लगातार बढ़ता जा रहा है। मंगलवार को व्यापारियों ने रोशनपुरा चौराहे पर करीब चार घंटे तक प्रदर्शन किया और सीलिंग की कार्रवाई पर सवाल उठाए।

    मामले को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाने वाले याचिकाकर्ताओं की ओर से भी नगर निगम की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं। आरोप लगाया गया है कि कार्रवाई सभी पर समान रूप से नहीं हो रही है और छोटे कारोबारियों को अधिक परेशान किया जा रहा है जबकि प्रभावशाली और बड़े लोगों के प्रतिष्ठानों को लेकर भी जांच निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए। इस संबंध में पूरी स्थिति की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में लाने की बात कही गई है।

    भोपाल में यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों से भी जुड़ी हुई है। आवासीय भवनों के व्यावसायिक उपयोग और अवैध निर्माण के मामले में अगस्त के पहले सप्ताह में सुनवाई हुई थी। इसके बाद राज्य सरकार की ओर से गठित जांच समिति की कार्रवाई पर रोक लगाई गई और मामले में पहले दिए गए राहत आदेशों को भी लेकर स्थिति बदली। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसके निर्देशों के तहत चल रही जांच में किसी तरह का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा। अब मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होनी है और इससे पहले नगर निगम को कार्रवाई से जुड़ी रिपोर्ट पेश करनी है।

    इसी कारण शहर में नोटिस और सीलिंग की कार्रवाई को तेज किया गया है। नगर निगम मुख्य मार्गों के दोनों ओर और उनसे जुड़ी गलियों में भी सर्वे कर रहा है। नदी और तालाब किनारे बने भवन ग्रीन बेल्ट बफर जोन और कैचमेंट क्षेत्र में स्थित निर्माण प्राथमिक जांच के दायरे में रखे गए हैं। अवैध मैरिज गार्डन और नियमों के विरुद्ध संचालित अन्य प्रतिष्ठानों की भी जांच की जा रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में भोपाल में सीलिंग कार्रवाई और व्यापारियों के विरोध के बीच टकराव और तेज होने की संभावना बनी हुई है।

  • ED बनाम ममता बनर्जी: I-PAC रेड को लेकर गंभीर आरोप, सुप्रीम कोर्ट में याचिका

    ED बनाम ममता बनर्जी: I-PAC रेड को लेकर गंभीर आरोप, सुप्रीम कोर्ट में याचिका

    नई दिल्ली। ईडी का दावा है कि कोलकाता में I-PAC के डायरेक्टर प्रतीक जैन के आवास और ऑफिस पर छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मौके पर पहुंचीं और ईडी अधिकारियों से अहम फाइलें, हार्ड डिस्क और मोबाइल फोन छीन लिए गए। एजेंसी का कहना है कि इस कदम से जांच प्रक्रिया गंभीर रूप से बाधित हुई।

    पहले हाई कोर्ट, अब सुप्रीम कोर्ट

    इससे पहले ईडी ने शुक्रवार (9 जनवरी 2026) को कोलकाता हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी, जिस पर बुधवार (14 जनवरी 2026) को सुनवाई प्रस्तावित है। हाई कोर्ट में ईडी ने कहा कि जांच में जानबूझकर रुकावट डाली गई, जिससे एजेंसी का काम प्रभावित हुआ।
    याचिका में ईडी ने मामले की सीबीआई जांच कराने और केस दर्ज करने की अनुमति भी मांगी है।

    ED से टकराव के बीच ममता सरकार का जवाब

    ईडी की कार्रवाई के जवाब में ममता बनर्जी सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट में कैविएट एप्लीकेशन दाखिल कर दी है। राज्य सरकार ने अदालत से आग्रह किया है कि इस मामले में कोई भी आदेश पारित करने से पहले उसका पक्ष जरूर सुना जाए, ताकि कोई एकतरफा फैसला न हो।

    क्या है पूरा विवाद?

    पूरा मामला गुरुवार (8 जनवरी 2026) को शुरू हुआ, जब ईडी ने कोयला घोटाला मामले में राजनीतिक कंसलटेंसी फर्म I-PAC के डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर और ऑफिस पर छापेमारी की।
    ईडी की कार्रवाई के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी राज्य प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचीं। आरोप है कि इस दौरान कुछ अहम फाइलें और इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज निकालकर मुख्यमंत्री की गाड़ी में रखवाए गए, जिसके बाद यह मामला कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर गरमा गया।