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  • मप्र हाईकोर्ट को मिलेंगे 12 नए जज, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 7 वकीलों और 5 न्यायिक अधिकारियों के नाम सुझाए

    मप्र हाईकोर्ट को मिलेंगे 12 नए जज, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 7 वकीलों और 5 न्यायिक अधिकारियों के नाम सुझाए


    जबलपुर । मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की कमी दूर करने और लंबित मुकदमों के बढ़ते बोझ को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में 12 नए न्यायाधीशों की नियुक्ति की सिफारिश की है। प्रस्तावित नामों में सात वकील और पांच न्यायिक अधिकारी शामिल हैं। यदि सभी नियुक्तियों को मंजूरी मिल जाती है तो हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की कुल संख्या बढ़कर 50 हो जाएगी। इससे जबलपुर स्थित मुख्य पीठ के साथ इंदौर और ग्वालियर खंडपीठ में भी न्यायिक कामकाज को गति मिलने की उम्मीद है।

    सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की ओर से की गई इस सिफारिश को मध्यप्रदेश की न्याय व्यवस्था के लिहाज से अहम माना जा रहा है। लंबे समय से अदालतों में लंबित मामलों और न्यायाधीशों की कमी का मुद्दा सामने आता रहा है। ऐसे में 12 नए न्यायाधीशों की नियुक्ति से मुकदमों की सुनवाई के लिए उपलब्ध न्यायिक क्षमता बढ़ सकती है। इससे मामलों की सुनवाई और उनके निपटारे की प्रक्रिया को बेहतर बनाने में मदद मिलने की संभावना है।

    पांच न्यायिक अधिकारियों के नाम शामिल

    कॉलेजियम ने न्यायिक सेवा कोटे से पांच वरिष्ठ न्यायिक अधिकारियों को हाईकोर्ट का न्यायाधीश बनाने की अनुशंसा की है। इनमें रेणुका कंचन कृष्णमूर्ति मिश्रा वीरेंद्र सिंह राजपूत ममता जैन और अशिता श्रीवास्तव के नाम शामिल हैं। ये सभी न्यायिक सेवा से जुड़े अधिकारी हैं और अब इनके नामों पर नियुक्ति की आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

    बार कोटे से सात वकीलों की सिफारिश

    वकीलों के कोटे से जिन सात नामों की सिफारिश की गई है उनमें डॉ. विवेक शरण राजेश कुमार शुक्ला कनकलता सिंह भक्ति व्यास श्रेयस पंडित मृणाल केलकर और अविनाश जरगर शामिल हैं। इन नामों को कॉलेजियम की अनुशंसा के बाद नियुक्ति की प्रक्रिया के अगले चरण में भेजा जाएगा। इस तरह न्यायिक सेवा और बार दोनों वर्गों से नए न्यायाधीशों के चयन का प्रस्ताव तैयार किया गया है।

    राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद होगी नियुक्ति

    कॉलेजियम की सिफारिश के बाद अब नियुक्ति की संवैधानिक और प्रशासनिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। प्रस्ताव केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्रालय को भेजा जाएगा। मंत्रालय में जरूरी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद नियुक्ति से जुड़ी फाइल राष्ट्रपति के पास भेजी जाएगी। राष्ट्रपति की मंजूरी और नियुक्ति वारंट जारी होने के बाद केंद्र सरकार की ओर से अधिसूचना जारी की जाएगी।

    इसके बाद मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश नवनियुक्त न्यायाधीशों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे। शपथ ग्रहण और कार्यभार संभालने के बाद हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर 50 हो जाएगी।

    नई नियुक्तियों का असर केवल जबलपुर की मुख्य पीठ तक सीमित नहीं रहेगा। इंदौर और ग्वालियर खंडपीठ में भी न्यायिक कामकाज को इससे मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि लंबित मुकदमों की संख्या कम होने और सुनवाई की गति बढ़ने का वास्तविक असर नए न्यायाधीशों के कार्यभार संभालने के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल कॉलेजियम की सिफारिश के बाद अब सभी की नजर नियुक्ति की अगली प्रक्रिया पर टिकी है।

  • एमपी हाईकोर्ट के जस्टिस धर्माधिकारी बने मद्रास हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस, 24 साल की प्रैक्टिस के बाद मिला बड़ा पद

    एमपी हाईकोर्ट के जस्टिस धर्माधिकारी बने मद्रास हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस, 24 साल की प्रैक्टिस के बाद मिला बड़ा पद


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश न्यायिक जगत के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। Sushrut Arvind Dharmadhikari को Madras High Court का नया चीफ जस्टिस नियुक्त किया गया है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश के बाद केंद्र के Ministry of Law and Justice (India) ने गुरुवार को उनकी नियुक्ति का आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया। इस नियुक्ति के साथ ही वे Madhya Pradesh High Court से अन्य राज्यों में चीफ जस्टिस बनने वाले 17वें न्यायाधीश बन गए हैं।

    8 जुलाई 1966 को Raipur में जन्मे जस्टिस सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी ने वर्ष 1992 में अपने विधिक करियर की शुरुआत की थी। उन्होंने करीब 24 वर्षों तक मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में वकालत की और इस दौरान सिविल, क्रिमिनल और संवैधानिक मामलों में सक्रिय रूप से पैरवी की। उनके लंबे अनुभव और कानूनी समझ के कारण उन्हें न्यायिक क्षेत्र में विशेष पहचान मिली।

    वकालत के दौरान उन्होंने 2000 से 2015 तक केंद्र सरकार के लिए स्टैंडिंग काउंसिल के रूप में भी काम किया।

    इस दौरान उन्होंने Income Tax Department, Reserve Bank of India और Central Excise Department सहित कई सरकारी संस्थानों और सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों का प्रतिनिधित्व किया।

    बाद में उन्हें 7 अप्रैल 2016 को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। इसके बाद 17 मार्च 2018 को उन्हें स्थायी न्यायाधीश के रूप में पुष्टि मिली। न्यायिक कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई की और न्यायिक व्यवस्था में अहम योगदान दिया।

    चीफ जस्टिस बनने से पहले उनका तबादला 23 अप्रैल 2025 को Kerala High Court में किया गया था।

    यह स्थानांतरण संविधान के अनुच्छेद 222 के तहत किया गया था, जिसकी मंजूरी भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद राष्ट्रपति ने दी थी। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 20 मार्च, 24 मार्च और 3 अप्रैल 2025 को हुई बैठकों में उनके स्थानांतरण की सिफारिश की थी।

    केरल हाईकोर्ट में कार्यरत रहते हुए जस्टिस धर्माधिकारी हाल ही में चर्चित फिल्म The Kerala Story 2: Goes Beyond से जुड़े मामले की सुनवाई में भी शामिल रहे। इस मामले में एकल न्यायाधीश द्वारा फिल्म की रिलीज पर 15 दिनों की अस्थायी रोक लगाए जाने के आदेश के खिलाफ अपील दायर की गई थी।

    जस्टिस धर्माधिकारी और P. V. Balakrishnan की खंडपीठ ने इस अपील पर लगभग दो घंटे तक सुनवाई करने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

    बताया जा रहा है कि जस्टिस धर्माधिकारी की नियुक्ति Manindra Mohan Shrivastava के सेवानिवृत्त होने के दिन 5 मार्च को प्रभावी हुई है। उनकी नियुक्ति को न्यायिक क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है और इससे मध्यप्रदेश न्यायिक व्यवस्था की प्रतिष्ठा भी बढ़ी है।

  • पांच राज्यों के HC को मिलेंगे नए चीफ जस्टिस, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने की सिफारिश

    पांच राज्यों के HC को मिलेंगे नए चीफ जस्टिस, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने की सिफारिश


    नई दिल्ली।
    सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम (Supreme Court Collegium) ने गुरुवार को हुई बैठक में विभिन्न उच्च न्यायालयों (High Courts) में रिक्त होने वाले मुख्य न्यायाधीशों (Chief Justices) के पदों को भरने के लिए पांच न्यायाधीशों के नामों की सिफारिश की है। ये रिक्तियां रिटायरि और ट्रांसफर के चलते उत्पन्न हो रही हैं। कॉलेजियम की सिफारिशों को केंद्र सरकार की मंजूरी मिलना अभी शेष है। कॉलेजियम के निर्णय के अनुसार, इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस मनोज कुमार गुप्ता को उत्तराखंड हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की गई है। यह पद वर्तमान मुख्य न्यायाधीश के 9 जनवरी 2026 को रिटायर होने के बाद रिक्त होगा।

    इसके अलावा, बॉम्बे हाईकोर्ट की न्यायाधीश जस्टिस रेवती पी. मोहिते डेरे को मेघालय हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाए जाने की सिफारिश की गई है। यह सिफारिश मेघालय हाईकोर्ट के मौजूदा मुख्य न्यायाधीश के प्रस्तावित ट्रांसफर के मद्देनजर की गई है।

    कॉलेजियम ने बॉम्बे हाईकोर्ट के ही एक अन्य न्यायाधीश जस्टिस एम.एस. सोनक को झारखंड हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की अनुशंसा की है। झारखंड हाईकोर्ट में यह पद 8 जनवरी 2026 को वर्तमान मुख्य न्यायाधीश के रिटायर होने से रिक्त होगा।

    केरल हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस ए. मुहम्मद मुस्ताक को सिक्किम हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की गई है। वहीं, उड़ीसा हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस संगम कुमार साहू को पटना हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाए जाने का प्रस्ताव किया गया है।

    इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने मेघालय हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीस जस्टिस सौमेन सेन को केरल हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की भी सिफारिश की है। यह ट्रांसफर केरल हाईकोर्ट के मौजूदा मुख्य न्यायाधीश के 9 जनवरी 2026 को रिटायर होने के बाद प्रभावी होगा।