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  • ट्रंप को बड़ा झटका… ईरान के सुप्रीम लीडर बोले- विदेश नहीं भेजेंगे देश का यूरेनियम भंडार

    ट्रंप को बड़ा झटका… ईरान के सुप्रीम लीडर बोले- विदेश नहीं भेजेंगे देश का यूरेनियम भंडार


    तेहरान।
    अमेरिका (America) के साथ यूरेनियम (Uranium) को लेकर चल रही तीखी तकरार के बीच ईरान (Iran) ने बड़ा फैसला लिया है। दो वरिष्ठ ईरानी सूत्रों के मुताबिक, देश के सर्वोच्च नेता आयातुल्लाखा मोजतबा मेनेई (Supreme Leader Ayatollah Mojtaba Menei) ने निर्देश जारी कर दिया है कि ईरान का लगभग हथियार-योग्य समृद्ध यूरेनियम भंडार विदेश नहीं भेजा जाएगा। इससे अमेरिका की प्रमुख मांग पर तेहरान का रुख और सख्त हो गया है। यह फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। इजरायल के साथ मिलकर चल रही शांति वार्ता अब और जटिल हो सकती है।

    रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, इजरायली अधिकारियों ने बताया कि ट्रंप ने इजरायल को आश्वासन दिया था कि ईरान का अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम भंडार देश से बाहर भेज दिया जाएगा और किसी भी शांति समझौते में इसे अनिवार्य शर्त बनाया जाएगा। नाम न छापने की शर्त पर बात करने वाले ईरानी सूत्रों ने बताया कि सर्वोच्च नेता का यह निर्देश और सत्ता के अंदरूनी हलकों में आम सहमति है कि समृद्ध यूरेनियम को देश से बाहर नहीं जाना चाहिए। अधिकारियों का मानना है कि ऐसा करने से ईरान भविष्य में अमेरिका-इजरायल हमलों के प्रति और अधिक कमजोर हो जाएगा।


    नेतन्याहू की सख्ती

    दूसरी ओर इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कहा है कि जब तक ईरान से समृद्ध यूरेनियम हटाया नहीं जाता, उसके प्रॉक्सी मिलिशिया समर्थन बंद नहीं होते और बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता समाप्त नहीं की जाती, तब तक युद्ध समाप्त नहीं माना जाएगा।


    ईरान को विश्वास नहीं

    28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल के हमलों से शुरू हुए युद्ध के बाद अस्थिर युद्धविराम लागू है। इस दौरान ईरान ने खाड़ी राज्यों में अमेरिकी ठिकानों पर गोलीबारी की और लेबनान में हिजबुल्लाह के साथ लड़ाई तेज हुई। हालांकि शांति प्रयास अभी तक नाकाम रहे हैं। ईरानी सूत्रों ने कहा कि तेहरान को आशंका है कि युद्धविराम वाशिंगटन का सिर्फ रणनीतिक धोखा है, ताकि नए हमलों की तैयारी की जा सके। ईरान के शीर्ष शांति वार्ताकार मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने बुधवार को कहा कि दुश्मन की गतिविधियां नए हमलों की तैयारी का संकेत दे रही हैं।


    अमेरिकी राष्ट्रपति ने क्या कहा?

    ट्रंप ने बुधवार को कहा कि यदि ईरान शांति समझौते के लिए तैयार नहीं हुआ तो अमेरिका नए हमलों के लिए तैयार है, हालांकि उन्होंने कुछ दिनों का इंतजार करने का भी संकेत दिया। दोनों पक्षों ने कुछ मुद्दों पर समझौता शुरू कर दिया है, लेकिन परमाणु कार्यक्रम को लेकर गहरे मतभेद बरकरार हैं, खासकर समृद्ध यूरेनियम के भविष्य और संवर्धन अधिकार पर।


    ईरान का रुख सख्त

    ईरानी अधिकारियों ने बार-बार कहा है कि उनकी प्राथमिकता युद्ध का स्थायी समाधान और अमेरिका-इजरायल से कोई हमला न होने की विश्वसनीय गारंटी है। इसके बाद ही वे परमाणु कार्यक्रम पर विस्तृत बातचीत के लिए तैयार होंगे। ईरान लंबे समय से परमाणु बम बनाने से इनकार करता रहा है। युद्ध से पहले ईरान ने अपने 60% समृद्ध यूरेनियम भंडार का आधा हिस्सा बाहर भेजने पर सहमति जताई थी, लेकिन ट्रंप की लगातार धमकियों के बाद यह रुख बदल गया, जिसका परिणाम अब सबके सामने है।


    क्या कह रहे आईएईए के आंकड़े?

    अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के अनुसार, जून 2025 के हमलों के समय ईरान के पास 440.9 किलोग्राम 60% समृद्ध यूरेनियम था। हमलों के बाद बचा हुआ भंडार मुख्य रूप से इस्फहान और नतांज के परमाणु केंद्रों में सुरक्षित है। दूसरी ओर ईरान का कहना है कि उसे चिकित्सा और अनुसंधान रिएक्टर के लिए सीमित मात्रा में अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम की जरूरत है।

  • Israel-Iran: ‘दुश्मनों को ढूंढकर खत्म करेंगे’, ईरान के नए सुप्रीम लीडर को लेकर इस्राइल का सख्त संदेश

    Israel-Iran: ‘दुश्मनों को ढूंढकर खत्म करेंगे’, ईरान के नए सुप्रीम लीडर को लेकर इस्राइल का सख्त संदेश

    तेल अवीव। इस्राइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच इस्राइल रक्षा बल (आईडीएफ) ने स्पष्ट किया है कि वह हर उस व्यक्ति को निशाना बनाएगा जो उसके लिए खतरा है। इसमें ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई भी शामिल हैं। हालांकि, आईडीएफ ने यह भी माना है कि फिलहाल उन्हें खामेनेई के ठिकाने की जानकारी नहीं है।

    ठिकाने की जानकारी नहीं, लेकिन कार्रवाई तय

    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आईडीएफ के सैन्य प्रवक्ता एफि डेफ्रिन ने कहा कि खामेनेई की लोकेशन को लेकर कोई ठोस जानकारी नहीं है। इसके बावजूद उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि इस्राइल अपने दुश्मनों को छोड़ेगा नहीं। उनका कहना था कि जो भी इस्राइल के खिलाफ कदम उठाएगा, उसे ढूंढकर खत्म किया जाएगा।

    बासिज बलों पर भी इस्राइल की नजर

    आईडीएफ ने यह भी संकेत दिए हैं कि ईरान के अर्धसैनिक बासिज बल भी उसके निशाने पर हैं। डेफ्रिन ने दोहराया कि इस्राइल हर उस व्यक्ति तक पहुंचेगा, जो उसके खिलाफ काम कर रहा है। पहले आईडीएफ यह दावा कर चुका है कि उसने बासिज कमांडर गुलामरेजा सुलेमानी को मार गिराया था।

    लंबे सैन्य अभियान की तैयारी

    इस्राइल ने साफ कर दिया है कि वह लंबे समय तक चलने वाले अभियान के लिए तैयार है। इसमें यहूदी पर्व फसह के दौरान भी सैन्य गतिविधियां जारी रह सकती हैं। इस बीच, ईरान की ओर से दागी जा रही मिसाइलों को रोकने के लिए भी इस्राइल लगातार अपने रक्षा तंत्र को सक्रिय रखे हुए है।

    तेल अवीव और यरुशलम में गूंजे सायरन

    रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेल अवीव और यरुशलम में एयर रेड सायरन सुनाई दिए। रात के समय आसमान में तेज चमक देखी गई, जिसमें तेल अवीव के ऊपर क्लस्टर म्यूनिशन मिसाइल भी शामिल थी। इसके बाद बचाव दलों को ग्रेटर तेल अवीव के कई इलाकों में भेजा गया।

    बहरीन ने भी रोकीं मिसाइलें और ड्रोन

    इस बीच बहरीन रक्षा बल ने दावा किया है कि उसने ईरान से दागी गई 129 मिसाइलों और 233 ड्रोन को इंटरसेप्ट कर नष्ट किया है। यह घटनाक्रम अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष के बीच सामने आया है, जो पिछले दो हफ्तों से अधिक समय से जारी है।

  • ईरान-USA-इजराइल जंग: मजबूरी में लड़ रहा ईरान, नए सुप्रीम लीडर घायल, UAE ने मिसाइलों को नष्ट किया

    ईरान-USA-इजराइल जंग: मजबूरी में लड़ रहा ईरान, नए सुप्रीम लीडर घायल, UAE ने मिसाइलों को नष्ट किया


    नई दिल्ली। अमेरिका और इजराइल के साथ जारी ईरान संघर्ष आज 10वें दिन पहुंच गया है। ईरान ने साफ किया है कि यह जंग उनकी पसंद नहीं, बल्कि मजबूरी में लड़नी पड़ रही है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सोमवार को प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि इस जंग को देश पर जबरन थोप दिया गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल मध्यस्थता या सीजफायर पर चर्चा करना संभव नहीं है, क्योंकि सैन्य टकराव जारी है और प्राथमिकता देश की सुरक्षा पर है।बघाई ने जोर देकर कहा कि ईरान ने जंग शुरू नहीं की थी, और किसी अन्य देश तुर्किये, साइप्रस और अजरबैजान पर हमला नहीं किया गया।

    नए सुप्रीम लीडर पर हमला
    ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की 28 फरवरी को अमेरिका-इजराइल हमले में मौत हुई थी। 1989 से ईरान की सर्वोच्च सत्ता पर काबिज अली खामेनेई ने 1979 की इस्लामिक क्रांति में अहम भूमिका निभाई थी और 1981 में आठ साल के लिए राष्ट्रपति भी रहे।

    उनके उत्तराधिकारी, मुजतबा खामेनेई, बीती रात नए सुप्रीम लीडर घोषित हुए, लेकिन उन्हें हाल ही में इजराइली हमले में चोट लगी। ईरानी सुरक्षा अधिकारी अली लारीजानी ने कहा कि नए नेतृत्व से देश में उम्मीद और एकजुटता बढ़ी है, जबकि अमेरिका और इजराइल के लिए यह निराशाजनक संकेत है।

    UAE ने रोकी ईरान की मिसाइलें और ड्रोन
    संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने दावा किया कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने ईरान से दागी गई 12 बैलिस्टिक मिसाइलें और 17 ड्रोन हवा में ही नष्ट कर दिए। युद्ध शुरू होने के बाद UAE की तरफ कुल 253 मिसाइलें और 1,440 ड्रोन दागे जा चुके हैं।

    स्थिति तनावपूर्ण, लेकिन ईरान ने मजबूती दिखाई
    ईरानी अधिकारियों ने कहा कि देश की सुरक्षा मजबूत है और नए सुप्रीम लीडर के नेतृत्व में ईरान और भी एकजुट दिखाई देगा। उन्होंने यह भी कहा कि देश की रक्षा के लिए मजबूरी में जंग लड़नी पड़ रही है, और किसी अन्य क्षेत्र पर आक्रामकता नहीं दिखाई जा रही।

  • ईरान में मोजतबा खामेनेई बने सुप्रीम लीडर, एक्सपर्ट बोले- अमेरिका से और बढ़ सकता है टकराव

    ईरान में मोजतबा खामेनेई बने सुप्रीम लीडर, एक्सपर्ट बोले- अमेरिका से और बढ़ सकता है टकराव


    नई दिल्ली। ईरान के मौजूदा नेतृत्व ने देश के नए सुप्रीम लीडर के रूप में मोजतबा खामेनेई को नियुक्त कर दिया है। उन्हें अयातुल्ला अली खामेनेई का उत्तराधिकारी बनाया गया है। विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला ईरान के अमेरिका के साथ समझौते की बजाय टकराव की नीति को मजबूत करने का संकेत देता है।

    ईरान में सुप्रीम लीडर देश का सबसे शक्तिशाली पद होता है। विदेश नीति, रक्षा और परमाणु कार्यक्रम जैसे अहम फैसलों पर अंतिम अधिकार उसी के पास होता है। साथ ही वह राष्ट्रपति और संसद के कामकाज को भी दिशा देता है। यानी कई मामलों में सुप्रीम लीडर की ताकत राष्ट्रपति से भी अधिक मानी जाती है।

    ट्रंप के लिए झटका माना जा रहा फैसला

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए भी झटका माना जा सकता है। ट्रंप ने पहले मोजतबा को कमजोर नेता बताते हुए उनकी संभावित नियुक्ति को खारिज किया था और यह भी संकेत दिए थे कि नए सुप्रीम लीडर के चयन में उनकी राय अहम होनी चाहिए।

    गौरतलब है कि युद्ध के शुरुआती दौर में अमेरिका और इजरायल के हमलों के दौरान अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी। इसके बाद मोजतबा को उनका उत्तराधिकारी बनाया गया है। इस कदम को तेहरान में कट्टरपंथी ताकतों के प्रभाव को मजबूत करने वाला माना जा रहा है।

    अमेरिका के लिए ‘बेइज्जती’ जैसा कदम

    मिडिल ईस्ट इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ फेलो एलेक्स वटांका के मुताबिक इतने बड़े सैन्य अभियान के बाद भी अगर 86 वर्षीय नेता की जगह उसके और ज्यादा कट्टरपंथी बेटे को सत्ता मिल जाए तो यह अमेरिका के लिए बड़ी असहज स्थिति है।

    विश्लेषकों का कहना है कि मोजतबा का चयन एक स्पष्ट संदेश देता है कि ईरान फिलहाल समझौते की राह नहीं, बल्कि सख्त रुख और जवाबी कार्रवाई की नीति अपनाने की तैयारी में है।

    रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, मिडिल ईस्ट इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ फेलो पॉल सलेम ने कहा कि मोजतबा के नेतृत्व में ईरान के लिए आने वाले दिन कठिन हो सकते हैं। उनका मानना है कि मोजतबा ऐसे नेता नहीं हैं जो अमेरिका के साथ समझौता करने या अपनी रणनीति बदलने के लिए तैयार हों।

    पिता से भी ज्यादा कट्टर बताए जाते हैं मोजतबा

    पूर्व अमेरिकी राजनयिक और ईरान विशेषज्ञ एलन आयर के मुताबिक मोजतबा खामेनेई को उनके पिता से भी ज्यादा सख्त और कट्टर माना जाता है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) भी उन्हें पसंदीदा उम्मीदवार मानती रही है।

    56 वर्षीय मोजतबा खामेनेई ने शिया इस्लाम की शिक्षा ईरान के कोम स्थित धार्मिक मदरसों में प्राप्त की है। उन्हें ‘हुज्जतुल इस्लाम’ की उपाधि मिली हुई है, जो शिया धर्म में एक महत्वपूर्ण धार्मिक दर्जा माना जाता है।

    अमेरिका ने 2019 में मोजतबा खामेनेई पर प्रतिबंध भी लगाया था। अमेरिकी वित्त मंत्रालय का आरोप था कि किसी आधिकारिक सरकारी पद पर न होने के बावजूद वे अपने पिता के प्रतिनिधि की तरह काम करते हुए सत्ता के फैसलों पर प्रभाव डालते रहे हैं।

    आर्थिक संकट और सख्त नीतियों की चुनौती

    ईरान पहले से ही कमजोर अर्थव्यवस्था, बढ़ती महंगाई, गिरती मुद्रा और बढ़ती गरीबी जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। इसके साथ ही सरकार की कड़ी नीतियों के कारण जनता में असंतोष और विरोध प्रदर्शन भी बढ़े हैं।ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि मोजतबा के सामने देश की आंतरिक चुनौतियों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय दबाव से निपटना भी बड़ी चुनौती होगी। कई विश्लेषकों का कहना है कि मौजूदा हालात में उनके पास सख्त रुख अपनाने के अलावा ज्यादा विकल्प नहीं हैं, चाहे युद्ध समाप्त ही क्यों न हो जाए।

  • Iran के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई की पत्नी की भी मौत.. US-इजराइली हमलें हो गई थीं घायल

    Iran के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई की पत्नी की भी मौत.. US-इजराइली हमलें हो गई थीं घायल


    तेहरान।
    ईरान (Iran) के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई (Supreme Leader Ayatollah Ali Khamenei) की पत्नी, मंसूरेह खोजस्तेह बाघेरजादेह की मौत हो गई है। खबर है कि US-इजराइली हमलों में लगी चोटों की वजह से उनकी मौत हो गई। ईरान के सरकारी ब्रॉडकास्टर (Government Broadcaster) प्रेस टीवी ने सोमवार को कहा कि हमले के बाद वह ‘शहीद हो गईं’ खामेनेई खुद शनिवार को अमेरिका और इजराइल के हमलों में मारे गए थे। ईरानी सरकारी मीडिया ने बताया कि खोजस्तेह भी उन्हीं हमलों में घायल हो गई थीं और बाद में उनकी चोटों की वजह से मौत हो गई।

    ईरान की सरकारी मीडिया ने बताया कि अयातुल्ला खामेनेई हमलों के शुरुआती दौर में ही मारे गए। US और इज़राइली अधिकारियों ने कहा कि ये हमले स्ट्रेटेजिक मिलिट्री और सिक्योरिटी टारगेट पर किए गए थे। इसकी पुष्टि US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप के धर्मगुरु की मौत की घोषणा के कुछ घंटों बाद हुई, जो सरकार बदलने की एक बड़ी कोशिश का हिस्सा था।


    सुप्रीम लीडर के परिवार में हुई मौतों की पहले ही पुष्टि कर दी थी

    रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि खामेनेई के कई रिश्तेदार, जिनमें उनकी बेटी, दामाद और उनकी पोती शामिल हैं, उन्हीं हमलों में मारे गए। रॉयटर्स ने यंग जर्नलिस्ट्स क्लब के ज़रिए तेहरान सिटी काउंसिल के एक सदस्य का ज़िक्र किया, जिन्होंने हमलों के बाद सुप्रीम लीडर के परिवार में हुई मौतों की पहले ही पुष्टि कर दी थी।

    सुप्रीम लीडर के परिवार के सदस्यों की मौत से तेहरान की लीडरशिप पर अंदरूनी दबाव बढ़ने और पूरे इलाके में तनाव और बढ़ने की उम्मीद है। ईरानी अधिकारियों ने पहले ही चेतावनी दी है कि देश पर किसी भी हमले का बदला लिया जाएगा।


    सीनियर मौलवी अयातुल्ला अराफी अंतरिम सुप्रीम लीडर के तौर पर काम करेंगे

    सरकार से जुड़ी IRNA न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक, अली खामेनेई की हत्या के बाद सीनियर मौलवी अयातुल्ला अलीरेज़ा अराफी ईरान के अंतरिम सुप्रीम लीडर के तौर पर काम करेंगे। अराफी को टेम्पररी लीडरशिप काउंसिल का ज्यूरिस्ट मेंबर बनाया गया है, जिसे ईरान के कॉन्स्टिट्यूशनल प्रोसेस के तहत परमानेंट उत्तराधिकारी चुने जाने तक ट्रांज़िशन के दौरान सुप्रीम लीडर की शक्तियों का इस्तेमाल करने का काम सौंपा गया है।

    ईरान के संवैधानिक ढांचे के तहत, अंतरिम लीडरशिप काउंसिल में प्रेसिडेंट मसूद पेजेशकियन, चीफ जस्टिस गुलाम-होसैन मोहसेनी-एजेई और गार्डियन काउंसिल के एक मौलवी शामिल हैं। यह तीन सदस्यों वाली बॉडी मिलकर सुप्रीम लीडर की शक्तियों का इस्तेमाल करेगी और खामेनेई की मौत के बाद बदलाव के समय में देश के मामलों की देखरेख करेगी, जब तक कि कोई परमानेंट उत्तराधिकारी नहीं चुना जाता।

  • ईरान में तबाही: खामनेई की मौत के बाद अयातुल्ला आराफी बने अंतरिम सुप्रीम लीडर, अमेरिका-इजराइल पर ईरानी पलटवार

    ईरान में तबाही: खामनेई की मौत के बाद अयातुल्ला आराफी बने अंतरिम सुप्रीम लीडर, अमेरिका-इजराइल पर ईरानी पलटवार



    नई दिल्ली। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामनेई की मौत के अगले दिन ही देश के राजनीतिक और धार्मिक परिदृश्य में बड़ा बदलाव आया। 67 वर्षीय अयातुल्ला अलीरेजा आराफी को अंतरिम सुप्रीम लीडर की जिम्मेदारी सौंपी गई है। आराफी लंबे समय से ईरान की धार्मिक-राजनीतिक व्यवस्था में अहम भूमिका निभा रहे हैं। वे असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स के उपाध्यक्ष हैं और गार्जियन काउंसिल के सदस्य रह चुके हैं। वर्तमान में वे ईरान की सेमिनरी प्रणाली का नेतृत्व कर रहे हैं। अब असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स स्थायी सुप्रीम लीडर का चयन करेगी।

    खामनेई की मौत के बाद ईरान में 40 दिन का राजकीय शोक और सात दिन की छुट्टी घोषित की गई। ईरानी इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा कि देश ने एक महान नेता खो दिया है। वहीं, ईरानी सेना ने खतरनाक अभियान की चेतावनी दी और अमेरिकी ठिकानों पर हमले की योजना बनाई।

    अमेरिका-इजराइल ने किया आक्रमण

    इजराइल और अमेरिका ने संयुक्त हमले में ईरान पर 24 घंटे में 1,200 से अधिक बम गिराए। इस हमले में सुप्रीम लीडर खामनेई की मौत हुई। उनके ऑफिस कॉम्प्लेक्स पर 30 मिसाइलों से हमला हुआ। हमले में उनके परिवार के सदस्य और 40 कमांडर्स भी मारे गए। इजराइल के पीएम नेतन्याहू और अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प ने खामनेई की मौत की पुष्टि की।

    इस हमले में 200 से अधिक लोग मारे गए और 740 से ज्यादा घायल हुए। एक स्कूल पर मिसाइल गिरने से 148 छात्राओं की मौत हो गई।

    ईरान का जवाबी हमला

    ईरान ने अमेरिका और इजराइल के हमलों का जवाब देते हुए 9 देशों पर ड्रोन और मिसाइल हमला किया। इसमें इजराइल पर करीब 400 मिसाइलें दागी गईं। इसके अलावा कतर, कुवैत, जॉर्डन, बहरीन, सऊदी अरब, UAE में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। दुबई में पाम होटल एंड रिसॉर्ट और बुर्ज खलीफा के पास ड्रोन हमला हुआ।

    पृष्ठभूमि और विवाद

    ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच विवाद के मुख्य कारण हैं: न्यूक्लियर प्रोग्राम पर शक, बैलिस्टिक मिसाइलों का विकास, क्षेत्रीय अस्थिरता और मिडिल ईस्ट में राजनीतिक दखल। अमेरिका ने ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं, जिससे अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई। इसके जवाब में ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को तेज करने और कठोर बयान देने जैसे कदम उठाए।

    अयातुल्ला अली खामनेई का जीवन

    खामनेई का जन्म 19 अप्रैल 1939 को मशहद में हुआ। उन्होंने 1963 में शाह के खिलाफ भाषण दिया और गिरफ्तार हुए। 1979 की इस्लामी क्रांति में वे प्रमुख आंदोलनकारी बने। 1981 में उन पर बम हमले हुए, उसी वर्ष वे ईरान के राष्ट्रपति बने। 1989 में खोमैनी की मौत के बाद उन्हें सुप्रीम लीडर बनाया गया। समर्थक उन्हें इस्लामी व्यवस्था का मजबूत रक्षक मानते हैं, जबकि आलोचक कट्टर शासन का आरोप लगाते हैं।