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  • ENG vs PAK: रॉबिन्सन-टंग ने उड़ाई पाकिस्तानी बल्लेबाजी की धज्जियां, इंग्लैंड ने जीता पहला टेस्ट

    ENG vs PAK: रॉबिन्सन-टंग ने उड़ाई पाकिस्तानी बल्लेबाजी की धज्जियां, इंग्लैंड ने जीता पहला टेस्ट


    हेडिंग्ले। पाकिस्तान की बल्लेबाजी एक बार फिर इंग्लैंड के तेज गेंदबाजों के सामने बेनकाब हो गई। हेडिंग्ले में खेले गए पहले टेस्ट में इंग्लैंड ने पाकिस्तान को दूसरी पारी में महज 135 रन पर समेटते हुए पारी और 103 रन से करारी शिकस्त दी। इसके साथ ही तीन मैचों की टेस्ट सीरीज में इंग्लैंड ने 1-0 की बढ़त बना ली। ओली रॉबिन्सन और जोश टंग ने दोनों पारियों में पांच-पांच विकेट लेकर पाकिस्तान की बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी, जबकि जोफ्रा आर्चर ने भी अहम मौकों पर विकेट चटकाए।

    171 पर ढेर हुआ पाकिस्तान, इंग्लैंड ने खड़ा किया 409 का पहाड़
    टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी पाकिस्तान की टीम पहली पारी में सिर्फ 171 रन बना सकी। अब्दुल्ला शफीक ने 61 और इमाम-उल-हक ने 42 रन बनाए, लेकिन बाकी बल्लेबाज इंग्लैंड के पेस अटैक के सामने ज्यादा देर नहीं टिक सके। रॉबिन्सन और टंग ने पांच-पांच विकेट लेकर पाकिस्तानी पारी को समेट दिया।

    जवाब में इंग्लैंड ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 409 रन बनाए और पहली पारी के आधार पर 238 रन की विशाल बढ़त हासिल कर ली। हैरी ब्रूक ने 93 गेंदों में 91 रन बनाए। जॉर्डन कॉक्स ने 73, जो रूट ने 66 और डेन लॉरेंस ने 51 रन की पारियां खेलीं।

    दूसरी पारी में भी नहीं संभला पाकिस्तान
    238 रन से पिछड़ने के बाद पाकिस्तान को मैच बचाने के लिए लंबी बल्लेबाजी करनी थी, लेकिन उसकी शुरुआत ही खराब रही। जोफ्रा आर्चर ने इमाम-उल-हक को आउट किया, जबकि अजान अवैस 9 रन बनाकर पवेलियन लौटे। इसके बाद रॉबिन्सन ने अब्दुल्ला शफीक को 15 रन पर चलता कर दिया।

    शान मसूद ने 29 रन बनाकर संघर्ष की कोशिश की, लेकिन जोश टंग ने आते ही पाकिस्तान के मध्यक्रम को तहस-नहस कर दिया। उन्होंने सऊद शकील को 14 रन पर आउट करने के बाद एक ही ओवर में शान मसूद और सलमान आगा के विकेट निकाल दिए। टंग ने महज 11 गेंदों में तीन विकेट लेकर पाकिस्तान को 76 रन पर छह विकेट के संकट में पहुंचा दिया।

    रिजवान ने दिखाया संघर्ष, फिर भी 135 पर सिमटी टीम
    विकेटकीपर बल्लेबाज मोहम्मद रिजवान ने 39 गेंदों पर 41 रन बनाकर कुछ प्रतिरोध जरूर किया। वह दूसरी पारी में पाकिस्तान के सबसे सफल बल्लेबाज रहे, लेकिन उनकी पारी भी टीम को हार से नहीं बचा सकी। गस एटकिंसन ने रिजवान को आउट किया और इसके बाद आर्चर ने आखिरी बल्लेबाज को पवेलियन भेज दिया। पाकिस्तान की पूरी टीम 37.3 ओवर में 135 रन पर ऑलआउट हो गई और इंग्लैंड ने तीन दिन में ही मुकाबला अपने नाम कर लिया।

    रॉबिन्सन-टंग ने मिलकर बरपाया कहर
    इंग्लैंड की जीत में ओली रॉबिन्सन सबसे बड़े नायक रहे। उन्होंने पहली पारी में 5/51 और दूसरी पारी में तीन विकेट लिए। मैच में कुल 8/80 के शानदार आंकड़े के साथ उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया।

    जोश टंग ने भी मैच में आठ विकेट लिए। उन्होंने पहली पारी में 5/46 और दूसरी पारी में तीन विकेट चटकाए। जोफ्रा आर्चर ने दूसरी पारी में तीन विकेट हासिल किए। इंग्लैंड के तेज गेंदबाजों ने लगातार फुल लेंथ पर गेंदबाजी करते हुए पाकिस्तानी बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया।

    जो रूट की कप्तानी में शानदार वापसी
    बेन स्टोक्स के टेस्ट क्रिकेट से संन्यास और ब्रेंडन मैकुलम के कोच पद से हटने के बाद इंग्लैंड नए दौर में प्रवेश कर रहा है। ऐसे में पूर्णकालिक टेस्ट कप्तान के तौर पर जो रूट की वापसी जीत के साथ हुई। इंग्लैंड ने गेंदबाजी, बल्लेबाजी और फील्डिंग तीनों विभागों में पाकिस्तान को पछाड़ दिया। पाकिस्तान के कप्तान सलमान आगा ने भी मैच के बाद माना कि इंग्लैंड ने उनकी टीम को हर विभाग में मात दी।

    लॉर्ड्स में होगी अगली भिड़ंत
    इस जीत से इंग्लैंड को विश्व टेस्ट चैंपियनशिप 2025-27 में भी अहम अंक मिले हैं। वहीं पाकिस्तान का अंक प्रतिशत गिरकर 19.05 हो गया है। दोनों टीमों के बीच सीरीज का दूसरा टेस्ट 27 अगस्त से लॉर्ड्स में खेला जाएगा।

    पाकिस्तान के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती अपनी बल्लेबाजी को संभालने की है। हेडिंग्ले में जिस तरह उसका शीर्ष और मध्यक्रम इंग्लैंड के तेज गेंदबाजों के सामने बिखरा, अगर यही कहानी लॉर्ड्स में भी दोहराई गई तो सीरीज में वापसी मुश्किल हो सकती है।

  • मुझे गिरफ्तार किया जा सकता है मेरी हत्या भी हो सकती है', फिर भी दिसंबर में बांग्लादेश लौटेंगी शेख हसीना; अदालत में आत्मसमर्पण का ऐलान

    मुझे गिरफ्तार किया जा सकता है मेरी हत्या भी हो सकती है', फिर भी दिसंबर में बांग्लादेश लौटेंगी शेख हसीना; अदालत में आत्मसमर्पण का ऐलान


    नई दिल्ली ।
    बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि वह दिसंबर 2026 में भारत से बांग्लादेश लौटेंगी और वहां की अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करेंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें अपनी गिरफ्तारी और यहां तक कि हत्या का भी खतरा है, लेकिन इसके बावजूद वह अपने देश लौटने के फैसले से पीछे नहीं हटेंगी। उनका कहना है कि यदि उन्हें न्यायिक प्रक्रिया का सामना करना है तो वह अपनी मातृभूमि की धरती पर ही करना चाहेंगी।

    शेख हसीना लंबे समय से भारत में रह रही हैं। वर्ष 2024 में बांग्लादेश में राजनीतिक उथल-पुथल और हिंसक छात्र आंदोलन के बाद उन्हें देश छोड़ना पड़ा था। इसके बाद उन्होंने भारत में शरण ली और तब से यहीं रह रही हैं। इस दौरान बांग्लादेश में उनके खिलाफ कई कानूनी कार्रवाइयां शुरू हुईं और राजनीतिक परिस्थितियां भी लगातार बदलती रहीं।

    पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि उनके साथ अवामी लीग के कई वरिष्ठ नेता भी बांग्लादेश लौटने की तैयारी कर रहे हैं। उनका कहना है कि वे सभी अदालत की प्रक्रिया में शामिल होंगे और कानून के अनुसार अपना पक्ष रखेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है तथा उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। ऐसे माहौल के बावजूद उन्होंने वापसी का निर्णय लिया है।

    शेख हसीना ने कहा कि उन्हें इस बात का पूरा अंदेशा है कि स्वदेश लौटते ही उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि उनकी जान को गंभीर खतरा हो सकता है। इसके बावजूद उन्होंने कहा कि यदि जीवन का अंत होना ही है तो वह अपने देश की मिट्टी पर होना चाहिए, जहां उनके परिवार की यादें जुड़ी हैं। उन्होंने कहा कि अपने देश और न्यायिक व्यवस्था का सामना करना उनका कर्तव्य है।

    बांग्लादेश की अदालत पहले ही वर्ष 2024 के राजनीतिक घटनाक्रम और विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में शेख हसीना को दोषी ठहराते हुए उनके खिलाफ मौत की सजा का फैसला सुना चुकी है। हालांकि पूर्व प्रधानमंत्री लगातार इन आरोपों को निराधार बताती रही हैं और उनका कहना है कि उनके खिलाफ की गई कार्रवाई राजनीतिक कारणों से प्रेरित है। उनका दावा है कि उन्हें निष्पक्ष सुनवाई का अवसर मिलना चाहिए।

    इस बीच बांग्लादेश की सरकार लगातार भारत से शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग करती रही है। दोनों देशों के बीच इस मुद्दे को लेकर कूटनीतिक स्तर पर भी चर्चा होती रही है। भारत ने अब तक यह स्पष्ट किया है कि वह प्रत्यर्पण से जुड़े अनुरोधों की प्रक्रिया के अनुसार समीक्षा कर रहा है और दोनों देशों के बीच रचनात्मक संवाद बनाए रखने का पक्षधर है।

    शेख हसीना ने यह भी कहा कि उनकी वापसी किसी बाहरी दबाव या किसी विदेशी सरकार की पहल का परिणाम नहीं होगी। उन्होंने दोहराया कि वह स्वयं अपने निर्णय के आधार पर बांग्लादेश लौटेंगी और अदालत के समक्ष उपस्थित होकर कानूनी प्रक्रिया का सामना करेंगी। उनके इस ऐलान के बाद बांग्लादेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज होने की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि उनकी वापसी से देश के राजनीतिक समीकरणों और आगामी घटनाक्रम पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।

  • लॉरेंस गैंग के सदस्य राजपाल ने नागदा में किया सरेंडर, फायरिंग की साजिश कबूली, कई बड़े मामलों से जुड़ा नाम

    लॉरेंस गैंग के सदस्य राजपाल ने नागदा में किया सरेंडर, फायरिंग की साजिश कबूली, कई बड़े मामलों से जुड़ा नाम

    नागदा । मध्य प्रदेश के नागदा में कुख्यात लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े बदमाश राजपाल ने गुरुवार को अपने गांव रत्न्यखेड़ी में आत्मसमर्पण कर दिया। सरेंडर के दौरान उसने खरगोन के एक व्यापारी के घर पर फायरिंग करवाने की बात स्वीकार की।

    राजपाल ने दावा किया कि जिस कारोबारी को निशाना बनाया गया, वह कथित रूप से छोटी बच्चियों पर गलत नजर रखता था और किसानों के साथ अत्याचार करता था। इसी कारण उसे सबक सिखाने के लिए यह वारदात कराई गई। उसने बताया कि पहले उसके साथियों ने हमला करने की कोशिश की, लेकिन असफल रहने पर ‘हैरी बॉक्सर’ नामक साथी के जरिए फायरिंग करवाई गई। राजपाल का नाम मोहाली स्थित पुलिस खुफिया मुख्यालय पर हुए मोहाली रॉकेट लॉन्चर हमला में भी सामने आ चुका है।

    सरेंडर के दौरान राजपाल ने पुलिस पर आरोप लगाया कि उसके परिवार को लगातार परेशान किया जा रहा था, जिसके चलते उसे यह कदम उठाना पड़ा। उसने यह भी कहा कि देशभर की विभिन्न सुरक्षा एजेंसियां और कई राज्यों की पुलिस उससे पहले भी पूछताछ कर चुकी हैं।

    इससे पहले राष्ट्रीय जांच एजेंसी एनआईए ने भी राजपाल और उसके साथी योगेश भाटी को हिरासत में लेकर पूछताछ की थी। दोनों के नाम कई आपराधिक मामलों में सामने आ चुके हैं, जिनमें आरोपी दीपक रंगा को पनाह देने का मामला भी शामिल है।

    सरेंडर से पहले राजपाल ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि गलत काम करने वालों को गैंग नहीं छोड़ेगा। उसने दावा किया कि वे प्रशासन की मदद करते रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे। जिस फायरिंग का जिक्र राजपाल कर रहा है, वह 16 मार्च को हुई थी। खरगोन के व्यापारी दिलीप सिंह राठौड़ के घर पर तीन नकाबपोश बदमाशों ने गोलियां चलाई थीं। यह पूरी घटना CCTV कैमरे में कैद हुई थी और बाद में इसकी जिम्मेदारी लॉरेंस गैंग ने ली थी।

    राठौड़ परिवार के अनुसार, घटना के समय परिवार इंदौर में था, जबकि उनके पिता को अंतरराष्ट्रीय नंबरों से कॉल कर धमकियां दी गईं। व्हाट्सएप कॉल और वॉयस नोट के जरिए 10 करोड़ रुपए की फिरौती मांगी गई और सबूत के तौर पर फायरिंग का वीडियो भी भेजा गया।

    राजपाल रतलाम जिले के हथनारा गांव का निवासी है। करीब दस साल पहले वह भाजपा नेता रघुनाथ सिंह बब्बू के यहां ड्राइवर था। बाद में उसने एक स्कूल भी खोला, लेकिन आर्थिक तंगी के चलते 2021 में उसे बंद करना पड़ा। इसके बाद वह आपराधिक गतिविधियों में सक्रिय हो गया।

    पुलिस सूत्रों के अनुसार, 2022 में वह आर्म्स एक्ट के मामले में तिहाड़ जेल में करीब सात महीने तक बंद रहा। इसी दौरान उसका संपर्क लॉरेंस बिश्नोई गैंग से हुआ। दिल्ली में नादिर शाह हत्याकांड में भी उसका नाम सामने आया था, जिसमें बाद में वह सरकारी गवाह बन गया। इसके अलावा महाराष्ट्र के नांदेड़ के व्यापारी संजय बियानी हत्याकांड में रेकी करने और मध्य प्रदेश के सेंधवा क्षेत्र से एक व्यापारी के अपहरण के मामले में भी उसका नाम जुड़ चुका है।

  • सरेंडर नहीं सीधा टकराव; ईरान युद्ध के बीच हिजबुल्लाह प्रमुख का बड़ा ऐलान, अब क्या होगा?

    सरेंडर नहीं सीधा टकराव; ईरान युद्ध के बीच हिजबुल्लाह प्रमुख का बड़ा ऐलान, अब क्या होगा?

    तेहरान। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़े युद्ध के बीच हिजबुल्लाह के महासचिव शेख नईम कासिम ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि लेबनानी प्रतिरोध आंदोलन ने आत्मसमर्पण के बजाय टकराव का रास्ता चुना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी सेनाएं अमेरिका-इजरायल परियोजना का मुकाबला करने के लिए बिना किसी सीमा के बलिदान देने को पूरी तरह तैयार हैं।

    ईरान के सरकारी चैनल प्रेस टीवी की रिपोर्ट के अनुसार, हिजबुल्लाह प्रमुख ने वर्तमान संकट को लेबनान की क्षेत्रीय अखंडता और भविष्य के लिए अस्तित्वगत संघर्ष बताया है।

    बयान में कासिम ने तर्क दिया कि लेबनान इस समय एक नाजुक मोड़ पर खड़ा है। उनके अनुसार, देश के सामने दो विकल्प हैं, या तो आत्मसमर्पण कर अपनी भूमि, गरिमा, संप्रभुता और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य त्याग दें, या अपरिहार्य टकराव में शामिल होकर कब्जे का डटकर विरोध करें। उन्होंने कहा कि प्रतिरोध की सक्रिय नीति ने इजरायली दुश्मन को कोई आश्चर्यचकित करने का मौका नहीं दिया और आगे की घुसपैठ के सभी बहानों को प्रभावी ढंग से खारिज कर दिया है। इस दौरान महासचिव ने अपने योद्धाओं की वीरता की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने वीरता, सम्मान, देशभक्ति और गरिमा के सबसे शानदार महाकाव्य लिखे हैं।

    उन्होंने विस्थापित लेबनानी नागरिकों की भी सराहना की, जिन्होंने अपने वतन के सम्मानजनक भविष्य के लिए बलिदान और प्रतिरोध का रास्ता अपनाया है।

    कासिम के बयान का मुख्य मुद्दा कथित ‘ग्रेटर इजरायल’ की विस्तारवादी योजना है। उन्होंने चेतावनी दी कि यह ‘खतरनाक अमेरिकी-इजरायली परियोजना’ यूफ्रेट्स से नील नदी तक क्षेत्रीय नियंत्रण स्थापित करना चाहती है, जिसमें लेबनान भी शामिल है। हिजबुल्लाह नेता के मुताबिक, लेबनानी धरती पर इजरायली आक्रमण 2024 के अंत से लगातार जारी है और इजरायली दुश्मन ने पिछले युद्धविराम समझौतों का बार-बार उल्लंघन किया है।
    घरेलू नीति पर बोलते हुए कासिम ने लेबनानी सरकार से आग्रह किया कि वह उन उपायों को रद्द करे जो प्रतिरोध को अपराध मानते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक देश खतरे में है, हथियारों का एकाधिकार केवल लेबनान के पतन और ‘ग्रेटर इजरायल’ योजना को बढ़ावा देगा। यही कारण है कि उन्होंने सक्रिय संघर्ष के दौरान किसी भी प्रकार की बातचीत को सख्ती से खारिज कर दिया और कहा कि गोलीबारी के बीच इजरायली दुश्मन से बातचीत जबरन आत्मसमर्पण के समान है।
  • ईरान के तेल भंडार पर इज़राइल का बड़ा हमला, ट्रम्प बोले- “ईरान लड़ने लायक नहीं बचेगा”

    ईरान के तेल भंडार पर इज़राइल का बड़ा हमला, ट्रम्प बोले- “ईरान लड़ने लायक नहीं बचेगा”



    नई दिल्ली। अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच जारी जंग का नौवां दिन बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। इज़राइल ने ईरान में तेल भंडार से जुड़े ठिकानों पर हवाई हमले शुरू कर दिए हैं। इज़राइली मीडिया के अनुसार, ईरान के 30 फ्यूल टैंकों और कई तेल डिपो को निशाना बनाया गया है।

    अमेरिकी रुख:
    पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शनिवार को कहा कि अमेरिका चाहता है कि ईरान पूरी तरह हार मान ले। उनका कहना है कि या तो ईरान खुद आत्मसमर्पण करे या उसकी सैन्य ताकत इतनी कमजोर कर दी जाए कि वह लड़ने लायक ही न बचे। ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ईरान अब मिडिल ईस्ट का दबंग नहीं, बल्कि ‘लूजर’ बन गया है।

    ईरान की चेतावनी:
    ईरानी सेना ने भी धमकी दी है कि अगर अमेरिकी जहाज फारस की खाड़ी में आए, तो उन्हें समुद्र में डुबो दिया जाएगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका ने खाड़ी में ऑयल टैंकर भेजने की बात कही थी, जो आमतौर पर होर्मुज स्ट्रेट से गुजरते हैं।

    जंग के आँकड़े:

    सिविल इलाकों पर हमला: 6,668

    घर और दुकानें नष्ट: 5,535 घर और 1,041 दुकानें

    मेडिकल सेंटर और स्कूल: 14 मेडिकल सेंटर और 65 स्कूल

    मृत्यु: 1,483

    इज़राइल में घायल: 1,765 लोग

    रेड क्रिसेंट सेंटर: 13 हमले का शिकार

    अंतरराष्ट्रीय दबाव और ईरान की प्रतिक्रिया:
    ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने पड़ोसी देशों से माफी मांगी है और कहा कि अब सिर्फ तब हमला होगा जब उन देशों की जमीन से ईरान पर हमला किया जाए। ट्रम्प ने इसे अमेरिका और इज़राइल के लगातार हमलों का नतीजा बताया।

    संक्षेप में:
    इज़राइल के हमलों ने ईरान के तेल भंडारों को बुरी तरह नुकसान पहुँचाया है। अमेरिका की धमकियों और ट्रम्प के बयान ने ईरान की स्थिति को कमजोर कर दिया है। अब युद्ध का रुख सिर्फ सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि तेल और ऊर्जा ढांचे पर भी असर पड़ रहा है, जिससे वैश्विक तेल बाजार में भारी उथल-पुथल की आशंका बढ़ गई है।

  • बीजापुर में सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़, 5 लाख का इनामी माओवादी ढेर

    बीजापुर में सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़, 5 लाख का इनामी माओवादी ढेर


    बीजापुर ।छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में शुक्रवार को सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच एक बड़ी मुठभेड़ हुई। इस मुठभेड़ में एक 5 लाख रुपये का इनामी माओवादी फागनू माडवी मारा गया। मुठभेड़ सुबह भैरमगढ़ थाना क्षेत्र के आडवाड़ा-कोटमेटा वन क्षेत्र में शुरू हुई जब जिला रिजर्व गार्ड डीआरजी की एक टीम को माओवादियों की उपस्थिति की सूचना मिली और उन्होंने ऑपरेशन चलाया।

    मारे गए नक्सली की पहचान 35 वर्षीय फागनू माडवी के रूप में हुई है। वह भैरमगढ़ क्षेत्र समिति का सक्रिय सदस्य था। मुठभेड़ के बाद उसका शव घटनास्थल पर पाया गया। मौके से एक .303 राइफल एक 9 मिमी पिस्टल दो स्कैनर सेट एक रेडियो और एक मेडिकल किट बरामद किया गया। इस घटना को लेकर बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पट्टिलिंगम ने कहा कि सुरक्षा बलों द्वारा लगातार चलाए जा रहे अभियानों के कारण बस्तर में माओवादी नेटवर्क काफी कमजोर हो चुका है। उन्होंने बाकी माओवादी कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे हिंसा छोड़कर सरकार की पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण करें।

    इस वर्ष छत्तीसगढ़ में सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच मुठभेड़ों में कुल 285 माओवादी मारे गए हैं जिनमें से 256 माओवादी बस्तर मंडल के सात जिलों में मारे गए जिनमें बीजापुर भी शामिल है। शेष माओवादी रायपुर मंडल के गरियाबंद जिले और दुर्ग मंडल के मोहला-मनपुर-अंबागढ़ चौकी जिले में मारे गए। यह मुठभेड़ सुरक्षा बलों की लगातार कोशिशों का परिणाम है जो छत्तीसगढ़ और विशेष रूप से बस्तर में माओवादी गतिविधियों को नष्ट करने की दिशा में काम कर रहे हैं।